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मैंने पीएम मोदी को सभी राजनीतिक जिम्मेदारियों से मुक्त होने की मेरी इच्छा से अवगत कराया है- महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पीएम मोदी को पत्र लिख कर अनुरोध किया है कि उन्हें सभी राजनीतिक जिम्मेदारियों से मुक्त कर दें। बता दें कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र के विपक्षी दलों ने कोश्यारी पर कथित तौर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था।

वहीं राजभवन द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि राज्यपाल कोश्यारी ने अपना शेष जीवन पढ़ने, लिखने और अन्य कामों में इत्मीनान से बिताने की इच्छा जताई हैं।

कोश्यारी ने मीडिया को एक बयान में कहा कि, महाराष्ट्र जैसे महान राज्य- संतों, समाज सुधारकों और बहादुर सेनानियों की भूमि के राज्य सेवक या राज्यपाल के रूप में सेवा करना मेरे लिए पूर्ण सम्मान और सौभाग्य की बात थी।

आपको बता दें, कुछ दिन पहले जैन समुदाय के एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा थी कि राज्यपाल बनने के बाद वह नाखुश हैं और उन्हें लगता है कि वह सही जगह पर नहीं हैं। कोश्यारी ने कहा था कि मैं दुखी हूं, खुश नहीं हूं। उन्हें खुशी और सही जगह तभी महसूस होती है जब राजभवन में सन्यासी आते हैं।

कोश्यारी ने सरकार से भविष्य में तीर्थ उद्योग लगाने का अनुरोध भी किया। राज्यपाल ने कहा था कि मैं सरकार से पर्यटन मंत्रालय की तरह एक तीर्थ मंत्रालय बनाने का अनुरोध करता हूं क्योंकि तीर्थ की अपनी गरिमा होती हैं।

उद्धव ठाकरे ने बीआर आंबेडकर के पोते संग किया गठबंधन, लड़ेंगे बीएमसी चुनाव: महाराष्ट्र

बाला साहेब की जयंती के मौके पर आज महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने आने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों के मद्देनजर संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाडी (वीबीए) के साथ गठबंधन की घोषणा की हैं। शिवसेना के विभाजन के बाद यह पहला बड़ा चुनाव होगा।

प्रकाश अंबेडकर ने महाराष्ट्र एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट और भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिलाने से इनकार कर दिया था। और तभी से यह संभावनाएं लगाई जा रही थी कि प्रकाश अंबेडकर उद्धव ठाकरे के साथ जाएंगे।

इस गठबंधन की घोषणा करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि, “आज 23 जनवरी को बालासाहेब ठाकरे की जयंती है। मैं संतुष्ट और खुश हूं कि महाराष्ट्र के कई लोग चाहते थे कि हम साथ आएं। प्रकाश अंबेडकर और मैं आज यहां गठबंधन बनाने के लिए आए हैं। मेरे दादा और प्रकाश अंबेडकर के दादा सहकर्मी थे और उन्होंने उस समय सामाजिक मुद्दों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। ठाकरे और अंबेडकर का इतिहास रहा है अब उनकी आने वाली पीढ़ियां देश के मौजूदा मुद्दों पर लड़ने के लिए यहां हैं।“

वहीं प्रकाश अंबेडकर ने कहा कि, “गठबंधन देश में ‘नर्इ राजनीति की शुरूआत’ का प्रतीक है। हम सामाजिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करते रहे हैं। हम सामाजिक मुद्दों पर जीतते हैं या नहीं यह मतदाताओं के हाथ में है, लेकिन ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने के लिए सीट देना राजनीतिक दलों के हाथ में है, अभी तक केवल हम दोनों है। कांग्रेस ने अभी तक गठबंधन को स्वीकार नहीं किया है मुझे उम्मीद है कि शरद पवार भी गठबंधन में शामिल होंगे। कांग्रेस अभी गठबंधन में शामिल नहीं हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि शरद पवार की राकांपा साथ आएगी।“

इससे पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना के एक नेता ने कहा कि, शिव शक्ति और भीम शक्ति (शिव और भीम की शक्ति) बीएमसी चुनाव से पहले एक साथ आएंगे।

अंडमान-निकोबार में द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (23 नवंबर) अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में उन्हें समर्पित स्मारक मॉडल का उद्घाटन किया है। साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी ने अंडमान और निकोबार में 21 द्वीपों का नामकरण भी किया हैं। अंडमान-निकोबार में द्वीपों का नाम 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखा गया है। इनमें विक्रम बत्रा, अब्दुल हमीद जैसे नाम बी शामिल हैं।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि, देश नेता जी को पल-पल याद कर रहा है। अंडमान द्वीपों पर पहले गुलामी की छाप थीं। और आज परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर द्वीपों का नाम रखे जाने से, ये आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्थल बनेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि, नेताजी से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही थी, हमने यह किया। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में नेताजी का स्मारक लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना का संचार करेगा। लोग अब हमारे इतिहास के बारे में जानने के लिए अंडमान जा रहे है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि, दिल्ली और बंगाल से लेकर अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पूरा देश नेताजी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है, उनसे जुड़ी विरासत को सहेज रहा है। आजादी के बाद से ही हमारी सेना को युद्ध करने पड़े और हर जगह पर हमारी सेना ने अपना शौर्य दिखाया है।

उन्होंने आगे कहा कि, सेना और जवानों के नाम से देश को नयी पहचान दी जा रही है। अंडमान एक ऐसी धरती हैं जहां पानी, प्रकृति, पर्यावरण, पुरुषार्थ और प्रेरणा सब कुछ है। भला देश में ऐसा कौन होगा जिसका मन यहां आने को न करता हों। हमें अवसरो को पहचानना होगा। कोरोना के झटकों के बाद भी पर्यटन के क्षेत्र में प्रयासों का असर दिखा है और लोगों में सौंदर्य के अलावा यहां के इतिहास को लेकर भी उत्सुकता बढ़ी हैं।

राहुल गांधी की यात्रा के बीच जम्मू के नरवाल में दो बम विस्फोट, 6 घायल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के जम्मू कश्मीर में पहुँचने के बीच शनिवार को जम्मू के साथ लगते नरवाल इलाके में दो विस्फोट हुए हैं। इनमें 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।

जानकारी के मुताबिक यह विस्फोट जम्मू रेलवे स्टेशन के साथ लगते नरवाल में जहाँ हुए वहां कबाड़ का काम भी होता है। हो सकता है कि कबाड़ के बीच कोई विस्फोटक हों, जिसमें यह धमाके हुए।

इन विस्फोटों में छह लोग घायल हुए हैं जिनमें से एक की हालत काफी गंभीर बताई गयी है। फिलहाल घटना की जांच कर रही है। अभी यह पता नहीं चला है कि यह  विस्फोट कैसे और किस कारण से हुए।

बता दें कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समय भारत जोड़ो यात्रा के साथ जम्मू कश्मीर में हैं लिहाजा सुरक्षा एजेंसियां भी काफी चौकन्नी हैं। उनकी सुरक्षा का वहां विशेष इंतजाम किया गया है। राज्य में इसके दृष्टिगत हाई अलर्ट भी जारी किया गया है।

विस्फोट की जानकारी के बाद घटनास्थल पर पहुंची पुलिस ने पूरा इलाका घेर लिया। धमाकों की जांच की जा रही है। सभी घायल अस्पताल में भर्ती किये गए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि वहां खड़े पुराने वाहनों में आईईडी लगाकर धमाका किया गया।

‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान के लोगो लॉन्च के मौके पर बोले जयराम रमेश यह पूरी तरह राजनीतिक 

कांग्रेस ने शनिवार (21 जनवरी) को अपने अगले अभियान ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ का लोगो रिलीज किया है। साथ ही केंद्र सरकार के खिलाफ एक चार्जशीट भी जारी की है।
इस अभियान के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी ने अपनी आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा है कि, यह अभियान भारत जोड़ो यात्रा’ अभियान का ही दूसरा चरण है। और यह अभियान 100% राजनीतिक है। इस अभियान के द्वारा कांग्रेस पार्टी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की विफलताओं को घर-घर जाकर देश की जनता को बताएगी।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि, “इस ऐतिहासिक कार्यक्रम ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के 130 दिनों के बाद कांग्रेस को देश की जनता से पर्याप्त इनपुट मिला है। पैदल चलते हुए लाखों लोगों ने राहुल गांधी से बात की, हम उनके दर्द को समझ सकते हैं जो वे मोदी सरकार के कुशासन के कारण झेल रहे हैं। हाथ से हाथ जोड़ो अभियान’ 26 जनवरी से शुरू होगा। भारत जोड़ो यात्रा का संदेश आम लोगों तक पहुंचाने के लिए ये घर-घर अभियान चलाया जाएगा। आज हमने मोदी सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी की है।”
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा की, “हाथ से हाथ जोड़ो अभियान ‘भारत जोड़ो अभियान’ का दूसरा चरण है। भारत जोड़ो अभियान में राहुल गांधी जी ने विचारधारा के आधार पर मुद्दे उठाए थे और उसका चुनाव से किसी भी प्रकार का लेना-देना नहीं था। किंतु ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान में हमारा निशाना मोदी सरकार की तमाम विफलताओं पर हैं और यह पूरी तरह से राजनीतिक अभियान है।”
साथ ही कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा है कि, ”26 जनवरी से ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान शुरू होगा। आज प्रेस वार्ता में ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान का लोगो लॉन्च किया गया। आइए, जुड़िए ‘हाथ से हाथ जोड़ो’ अभियान से और भारत जोड़ो यात्रा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाइए।”
आपको बता दें, ‘हाथ से जोड़ो हाथ’ अभियान 26 जनवरी से शुरू होकर 26 मार्च तक चलेगा। इस अभियान के तहत कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों से बात करेंगे और भारत जोड़ो यात्रा के संदेश को लोगों तक पहुंचाएंगे। इसके लोगो लॉन्च के मौके पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता जयराम रमेश मौजूद रहे।

मॉस्को से गोवा आ रहे प्लेन में बम होने की धमकी के बाद उज्बेकिस्तान उतारा गया

मॉस्को से गोवा आ रहे एक चार्टर्ड विमान में बम की सूचना (धमकी) के बाद उसे आज सुबह उज्बेकिस्तान की तरफ मोड़ दिया गया। इस प्लेन में 240 यात्री थे। विमान को गोवा हवाईअड्डे पर सुबह सवा 4 बजे लैंड होना था।

जानकारी के मुताबिक इस प्लेन को उज्बेकिस्तान में उतार लिया गया है। इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल उसके भीतर बम होने की अभी कोई जानकारी नहीं मिली है।

रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि गोवा के डाबोलिम हवाई अड्डे के निदेशक ने आधी रात करीब साढ़े 12 बजे प्लेन में बम होने की एक ईमेल मिलने के बाद इसे डायवर्ट करने का फैसला किया गया।

याद रहे दो हफ्ते पहले भी मास्को से गोवा जाने वाली एक उड़ान में बम होने की धमकी के बाद उसकी गुजरात के जामनगर हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई थी।

कोविड काल में नाम कमाने वाले क्रिस हिपकिंस न्यूजीलैंड के अगले पीएम

कोविड काल में अपने काम से जबरदस्त प्रशंसा पाने वाले क्रिस हिपकिंस न्यूजीलैंड के अगले प्रधानमंत्री होंगे। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी ने उन्हें जैसिंडा अर्डर्न की जगह अपना नया नेता चुना है जिन्होंने कुछ दिन पहले अपने पद से हटने की घोषणा की थी।

हिपकिंस अभी सिर्फ 44 साल के हैं और जैसिंडा अर्डर्न की सरकार में पुलिस, लोकसेवा और शिक्षा मंत्री थे। जैसिंडा की जगह नया नेता चुनने के लिए लेबर पार्टी में  क्रिस हिपकिंस इकलौते प्रत्याशी थे। वरिष्ठ नेता हिपकिंस देश के 41वें प्रधानमंत्री होंगे।

अब कल (रविवार) संसद में लेबर सदस्य औपचारिक रूप से हिपकिंस को नेता चुनेंगे। कोरोना के समय प्रभारी मंत्री के रूप में हिपकिंस के काम की देश भर में ख्याति मिली थी।

अब हिपकिंस पर 14 अक्टूबर को आम चुनाव जीतने की जिम्मेदारी होगी। देश में चुनाव सर्वे में उनकी पार्टी को पिछड़ता हुआ दिखाया गया है। वहां विपक्ष बढ़ती कीमतों, गरीबी और अपराध दरों को लेकर लेबर पार्टी की सरकार पर हमलावर है।

जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले, राज्य में काफी यात्रा बस से होगी: जयराम

कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की वकालत की है। राज्य में चल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 5 अगस्त, 2019 को जो किया गया वह जम्मू और कश्मीर के लोगों का घोर अपमान था, जो दशकों से भारत के साथ हैं। जयराम ने यह भी जानकारी दी कि सुरक्षा चिंताओं के कारण राज्य में यात्रा का एक बड़ा हिस्सा बस से पूरा किया जाएगा।

जयराम ने कहा कि विशेष दर्जा केवल जम्मू और कश्मीर तक ही सीमित नहीं था, क्योंकि भारत में कई राज्य हैं जिन्हें संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत विशेष दर्जा हासिल है। वरिष्ठ नेता ने कहा – ‘मुझे लगता है कि जम्मू और कश्मीर को जल्द से जल्द पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। कई विपरीत परिस्थितियों के बावजूद दशकों से सूबे की जनता हमेशा भारत के साथ खड़ी रही है।’

उन्होंने कहा – ‘सुरक्षा चिंताओं के कारण जम्मू-कश्मीर में यात्रा का एक बड़ा हिस्सा बस से पूरा किया जाएगा। मार्च सितंबर में कन्याकुमारी में देश के दक्षिणी सिरे से शुरू हुआ और 125 दिनों में करीब 3,400 किलोमीटर की यात्रा की।’

याद रहे कांग्रेस श्रीनगर में यात्रा का समापन एक बड़ी रैली के साथ करेगी जिसमें उसने देश भर के दो दर्जन राष्ट्रीय दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है। रमेश ने कहा – ‘यात्रा का उद्देश्य राजनीति की पुनर्कल्पना करना और राहुल गांधी की सार्वजनिक छवि को बदलना है।’

बता दें जम्मू कश्मीर पहुंचते ही खतरे को देखते हुए राहुल गांधी की सुरक्षा और कड़ी कर दी गयी है। भारत जोड़ो यात्रा के इस अंतिम चरण में कल बारिश के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए जैकेट पहनी थी। उनके साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा बल के जवान थे। जम्मू कश्मीर में यात्रा को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिलने से पार्टी ने खुशी जताई है

कर बचाने के रास्ते- बड़े खिलाड़ी टैक्स बचाने के लिए बन जाते हैं अभिनेता!

जिसकी आमदनी जितनी ज्यादा होती है, वह उतनी ही बड़ी टैक्स यानी कर चोरी करता है। लेकिन इन बड़ी आमदनी वाले बड़े लोगों के पास टैक्स चोरी करके भी बचने के रास्ते होते हैं। ‘तहलका एसआईटी’ की जाँच रिपोर्ट से पता चलता है कि कैसे क्रिकेट दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने टैक्स से एक बड़ी राहत पाने के लिए अभिनेता की भूमिका निभायी? कैसे भारतीय क्रिकेटरों में कर कानून के गलत पक्ष में जाने की अनोखी आदत है। इसी तरह की टैक्स चोरी को लेकर तहलका एसआईटी की एक पड़ताल :-

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यह सब 2011 में शुरू हुआ, जब मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के तत्कालीन सहायक आयुक्त के साथ विवाद हुआ। जब मामले का विवरण सार्वजनिक हुआ, तो लोग हैरान रह गये कि क्या सचिन तेंदुलकर सिर्फ एक क्रिकेटर हैं या एक अभिनेता भी हैं? सचिन तेंदुलकर द्वारा विभिन्न कम्पनियों से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में प्राप्त 5.92 करोड़ रुपये पर कर कटौती का दावा करने के बाद विवाद छिड़ गया था।

आयकर अधिनियम-1961 की धारा-80(आरआर) के तहत कटौती का दावा किया गया था। धारा-80(आरआर) सुविधा प्रदान करती है कि यदि कोई व्यक्ति एक चुनिंदा पेशेवर है, यानी एक लेखक, नाटककार, कलाकार, संगीतकार, अभिनेता या खिलाड़ी है और वह विदेशी स्रोतों से आय प्राप्त करता है, तो अधिकारी अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए अर्जित किये गये पूरे धन पर कर नहीं लगाएँगे।

हालाँकि आकलन अधिकारी ने तेंदुलकर के दावे को खारिज कर दिया। अस्वीकृति का आधार यह था कि सचिन एक पेशेवर क्रिकेटर थे। इसके बाद उन्होंने अपने पेशे से मॉडलिंग और विज्ञापन से आय नहीं ली। मूल्यांकन अधिकारी ने तर्क दिया कि विज्ञापन में केवल किसी उत्पाद का समर्थन करके, सचिन एक अभिनेता होने का दावा नहीं कर सकते। तेंदुलकर ने हालाँकि इस आदेश के खिलाफ आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की।

उनके वकील ने प्रस्तुत किया कि तेंदुलकर ने वेतन से आय, एक क्रिकेटर के रूप में अन्य स्रोतों से आय और मॉडलिंग / प्रायोजन से आय को व्यवसाय / पेशे से आय के रूप में दिखायी है। उन्होंने प्रस्तुत किया कि सचिन एक पेशेवर क्रिकेटर नहीं थे और उनका एकमात्र पेशा एक अभिनेता का था। इसके अलावा धारा-80(आरआर) के तहत एक व्यक्ति के पास एक से अधिक पेशे हो सकते हैं। अपने अंतिम निर्णय में आईटीएटी ने मास्टर ब्लास्टर की अपील पर सहमति व्यक्त की और उन्हें बिना मुद्दों के कटौती का लाभ उठाने की अनुमति दी। इसके अलावा आईटीएटी ने सचिन तेंदुलकर के तर्क को सही पाया, क्योंकि उन्होंने दोहराया कि वह एक कलाकार होने के साथ-साथ एक क्रिकेटर भी हो सकते हैं।

इसके अलावा जब लिटिल मास्टर, जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता है; स्क्रीन पर आते हैं, तो वह अपने क्रिकेट कौशल का उपयोग नहीं करते, बल्कि केवल अपने अभिनय कौशल का उपयोग करते हैं। आईटीएटी ने कहा कि ब्रांड या उत्पादों के प्रचार के लिए ऐसे कौशल की आवश्यकता होती है, जो क्रिकेट से सम्बन्धित नहीं है; इसलिए कटौती उचित है।

तेंदुलकर पर वित्त वर्ष 2001-02 और वित्त वर्ष 2004-05 के दौरान विदेशी मुद्रा में ईएसपीएन-स्टार स्पोर्ट्स, पेप्सिको और वीजा से अर्जित 5,92,31,211 रुपये की आय पर 2,08,59,707 रुपये का आयकर लगाया गया था।
ट्रिब्यूनल के फैसले के उनके पक्ष में जाने से सचिन ने टीवी विज्ञापनों के माध्यम से की गयी आय पर लगभग दो करोड़ रुपये बचा लिये। लेकिन यह पहली बार नहीं था, जब सचिन तेंदुलकर को आयकर अधिकारियों के साथ इस तरह उलझना पड़ा हो। इससे पहले भी वह उन करीब 75,000 लोगों, जिनमें कई मशहूर हस्तियाँ और व्यवसायी शामिल थे; में से एक थे, जिन्होंने कारों पर टैक्स का भुगतान करने में विफल रहने के बाद यह नाराजगी झेली हो।

नवी मुम्बई में पंजीकृत कारों पर उपकर का भुगतान न करने पर प्राधिकरण ने सभी आरोपियों को समन (नोटिस) जारी किया था। इनमें सचिन तेंदुलकर, गायक और संगीतकार शंकर महादेवन और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह शामिल थे। सचिन के पास बीएमडब्ल्यू एम5 लग्जरी कार है। नवी मुम्बई नगर निगम के अनुसार, वाहन कर का भुगतान न करने के कारण कुल बकाया राशि 50 करोड़ रुपये थी। बकाया राशि 1.5 लाख वाहनों से सम्बन्धित थी।

सचिन तेंदुलकर से पहले क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने कर छूट का लाभ उठाने के लिए अभिनेता की टोपी पहनने की कोशिश की थी। लेकिन भोगले की गुगली पर टैक्स अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से छक्का मार दिया। अपने काम के लिए विदेशों से कमाई करने वाले कलाकारों को विशेष छूट देने की क्रिकेट कमेंटेटर की कोशिश को एक आईटी ट्रिब्यूनल ने खारिज कर दिया था।

आईटी विभाग ने दावा किया था कि टैक्स में छूट माँगने के लिए भोगले खुद की तुलना उन लेखकों, नाटककारों, संगीतकारों, खिलाड़ियों और अभिनेताओं से नहीं कर सकते, जो विदेशी संस्थानों से कमाते हैं; क्योंकि उन्होंने कोई रचनात्मक काम नहीं किया। साल 2002 में ट्रिब्यूनल ने कहा कि भोगले ने जो किया, वह कोई रचनात्मक काम नहीं था और अच्छी अंग्रेजी तथा क्रिकेट का ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति कमेंट्री कर सकता हैं। क्रिकेट का खेल आजकल ग्लैमर और दौलत से भरा हुआ है, ये कारक भारत में युवाओं की क्रिकेटर बनने की महत्त्वाकांक्षा को बढ़ावा देते हैं।
इस बीच सचिन तेंदुलकर एकमात्र भारतीय क्रिकेटर नहीं हैं, जो अधिकारियों के साथ कर विवाद में फँस गये हैं। कई अन्य लोग हैं, जो करों के कारण सरकार के साथ परेशानी में उलझे और मामलों को अदालत के माध्यम से सुलझा लिया गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) क्रिकेटरों को मैचों में उनके प्रदर्शन के आधार पर वेतन देता है, जो उन्हें बेहतर खेलने और देश का गौरव बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करता है।

यहाँ तक कि राष्ट्र के लिए अपनी सेवाओं के बाद भी उनमें से अधिकांश एक सेलिब्रिटी का जीवन जीते हैं, जिन्होंने खेल के दिनों में पर्याप्त सम्पत्ति अर्जित की है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि जितना अधिक धन होता है, उतना अधिक करों को आकर्षित करता है। जैसा कि होता है कि करदाता (टैक्स पेयर) टैक्स चुकाने में खुशी महसूस नहीं करता। यहाँ उन प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेटरों की सूची दी गयी है, जिनका कर अधिकारियों के साथ विवाद हुआ था।

सौरभ गांगुली

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के खिलाफ सर्विस टैक्स डिमांड नोटिस को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। उन्हें लेख लिखने, टीवी शो की एंकरिंग करने आदि के लिए पारिश्रमिक मिलता था, जिसे प्राधिकरण ने शुरू में सेवा कर के रूप में निर्धारित किया था। हालाँकि कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनके खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया। इसे अमान्य करते हुए, यह माना गया कि लेख लिखने, टीवी शो एंकरिंग करने और आईपीएल खेलने के लिए प्राप्त पारिश्रमिक व्यापार सहायक सेवा के तहत सेवा कर का कारण नहीं है।

सचिन तेंडुलकर

निस्संदेह दुनिया में सबसे प्रसिद्ध भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी भी कर विवादों से अछूते नहीं थे, क्योंकि उन्हें एक से अधिक बार अधिकारियों से राहत लेनी पड़ी थी। सन् 2017 में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (आईटीएटी) की मुम्बई पीठ ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के खिलाफ विभाग की अपील को खारिज कर दिया और कहा कि शेयरों की बिक्री-खरीद से होने वाली आय को केवल इसलिए व्यावसायिक आय नहीं माना जा सकता है, क्योंकि उन्होंने पोर्टफोलियो प्रबंधक की सेवा का लाभ उठाया है।

कृष्णमाचारी श्रीकांत

पूर्व भारतीय कप्तान, जो अब मॉडलिंग, क्रिकेट कमेंट्री, पत्रकारिता, परामर्श और बीपीसीएल डीलरशिप के व्यवसाय में लगे हुए हैं; के मामले में एक बार आईटीएटी द्वारा पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही को बर$करार रखा गया था। जब अधिकारियों ने देखा कि उन्होंने अपने नाम, नाबालिग बच्चों और पत्नी के शेयरों को बेच दिया था, और शेयरों की बिक्री आय से 4.25 करोड़ रुपये की पेशकश नहीं की थी। यह दावा करते हुए कि भारतीय द्वारा शेयरों पर गार्निश अटैचमेंट को ओवरराइड करने के लिए भुगतान किया गया था।

आखिर आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल ने यह देखते हुए मूल्यांकन को बरकरार रखा कि उन्होंने उक्त कम्पनी ‘क्रिस श्रीकांत स्पोर्ट्स’ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड की सम्पूर्ण शेयरधारिता के लिए पेंटामीडिया ग्रुप ऑफ कंसर्न्स के साथ एक गैर-प्रतिस्पर्धी समझौता किया था, जिसके लिए प्रतिस्पर्धा नहीं करने की सहमति दी थी। उक्त कम्पनी- ‘क्रिस श्रीकांत स्पोर्ट्स एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ छ: साल की अवधि के लिए 7.50 करोड़ रुपये के गैर-प्रतिस्पर्धी शुल्क के लिए जो पूँजी प्राप्ति होने के कारण टैक्स से मुक्त थे। अपने 85 पन्नों के आदेश के अन्त में ट्रिब्यूनल ने पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही को बरकरार रखा और कहा कि निर्धारिती द्वारा भारतीय बैंक को 4.25 करोड़ रुपये का भुगतान केवल आय का एक आवेदन था।

स्वप्निल असनोदकर

मुम्बई सीईएसएटी ने एक बार राजस्थान रॉयल्स के पूर्व खिलाड़ी स्वप्निल असनोदकर को यह कहकर राहत दी थी कि ब्रांड प्रचार शुल्क पर कोई सेवा कर नहीं लगाया जाता है। सन् 2008 से सन् 2012 की अवधि के लिए, उन्हें फ्रेंचाइजी मालिकों के साथ किये गये एक समझौते के तहत 1.12 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई थी।

 

 

आईपीएल-2019 के 14 खिलाड़ी

सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईएसएटी), चेन्नई पीठ ने एक बार क्रिकेट खिलाड़ियों एल बालाजी, आर अश्विन, मुरली कार्तिक, दिनेश कार्तिक, एस बद्रीनाथ, विद्युत शिवरामकृष्णन, अनिरुदा श्रीकांत, सुरेश कुमार, यो महेश, हेमाँग बदानी, सी गणपति, अरुण कार्तिक, केबी, कौशिक गाँधी और पलानी अमरनाथ को राहत दी थी। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ये खिलाड़ी फ्रेंचाइजी से मिलने वाली राशि पर सर्विस टैक्स देने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

समीर दिघे

साल 2018 में आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण आईटीएटी की मुंबई पीठ ने भारत के पूर्व विकेटकीपर, समीर दिघे को यह कहते हुए कर राहत दी कि लगभग 50 लाख रुपये के लाभ मैच से प्राप्त आय पर क्रिकेटर को कर नहीं लगाया जा सकता है।

चेतेश्वर पुजारा

चेतेश्वर पुजारा को 2018 में बॉम्बे उच्च न्यायालय से बड़ी राहत मिली, जब उसने उनके खिलाफ सेवा कर संग्रह से सम्बन्धित एक आदेश को रद्द कर दिया।

कर्ण शर्मा

2018 में सीईएसएटी की अहमदाबाद पीठ ने माना कि क्रिकेट खिलाड़ी कर्ण शर्मा को राहत देते हुए 1 जुलाई, 2010 से पहले इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दौरान उनके द्वारा प्रदान की गयी प्रचार गतिविधियों के लिए क्रिकेट खिलाड़ियों को कोई सेवा कर देयता नहीं दी जा सकती है। कर्ण रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेल रहे थे, जब उन्हें फ्रेंचाइजी से 20 लाख रुपये मिले थे।

पार्थिव पटेल

आईटीएटी अहमदाबाद ने एक बार अधिकारियों को क्रिकेटर पार्थिव पटेल द्वारा दावा किये गये व्यय की स्वीकार्यता पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था और कराधान के उद्देश्य से क्रिकेट को एक पेशा माना था।

बीसीसीआई पर भी टैक्स बकाया

स्पोर्ट्स लाउंज के अनुसार, भारतीय क्रिकेटरों को तो भूल ही जाइए, यहाँ तक कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई), जो भारत में क्रिकेट को चलाने वाली संस्था है; पर राजस्व विभाग द्वारा कर चोरी का एक बड़ा मामला दर्ज किया गया है। संसद में वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, 462 करोड़ रुपये की वसूली के बाद राजस्व विभाग ने बीसीसीआई को 1,303 करोड़ रुपये के एक और बकाया आयकर का भुगतान करने के लिए कहा है।

भारतीय क्रिकेटरों के बारे में क्या बात करें, यहाँ तक कि पाकिस्तान के क्रिकेटर भी कर विवादों से बचे नहीं हैं। उनमें से कई कर कानून के गलत पक्ष के कारण सुर्खियां बटोर रहे हैं। साल 2012 में पाकिस्तान के आयकर विभाग ने पिछले दो वर्षों में 100 मिलियन रुपये की कर चोरी के लिए 21 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को नोटिस दिया था।

पाकिस्तान के अखबार डॉन के मुताबिक, उमर अकमल, मिस्बाह-उल-हक, कामरान अकमल, अब्दुल रज्जाक, मोहम्मद हफीज, शाहिद अफरीदी, यूनुस खान, अब्दुल रहमान, असद शफीक, तनवीर अहमद, अजहर अली, इमरान फरहत, राणा नावेद, सईद अजमल, उमर गुल, शोएब अख़्तर, सोहेल तनवीर और यासिर अराफात को नोटिस दिया गया था। दैनिक ने बताया कि यह पहला उदाहरण था जब आयकर विभाग ने क्रिकेटरों को नोटिस दिया था, जो देश में सेलिब्रिटी होने की स्थिति का आनंद लेते हैं। क्रिकेटरों ने टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया और खुद को कम टैक्स देनदारी की श्रेणी में फिट करके कम टैक्स चुकाने के तरीके खोज लिये।

जहाँ तक कर विवादों का सम्बन्ध है, इंग्लैंड के खिलाड़ी भी पीछे नहीं हैं। बहुत पहले डेली मेल ने रिपोर्ट किया था कि इंग्लैंड क्रिकेट टीम के सदस्यों को करदाताओं द्वारा जाँच का सामना करना पड़ सकता है। यह रिपोर्ट इन आरोपों के बीच आयी कि खिलाड़ियों ने अपनी कर देनदारियों को कम करने के लिए खामियों का फायदा उठाने की कोशिश की थी।
डेली मेल के अनुसार, इंग्लैंड की टीम के तत्कालीन सदस्य एंड्रयू स्ट्रॉस और केविन पीटरसन जाँच की आँच का सामना कर रहे थे। इंग्लैंड के विश्व कप विजेता स्टार क्रिकेटर आदिल रशीद को इनलैंड रेवेन्यू द्वारा टैक्स चोर के रूप में नामित और शर्मिंदा किया गया है। सन् 2019 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड को विश्व कप जिताने में मदद करने वाले इस गेंदबाज की पहचान कर अधिकारियों ने ‘जानबूझकर डिफॉल्टर’ के रूप में की, जो करों में 1,00,000 पाउंड से अधिक का भुगतान करने में विफल रहे। यॉर्कशायर क्रिकेटर, जिसका इंग्लैंड टीम के साथ एक केंद्रीय अनुबंध है, जहाँ सितारों को प्रति वर्ष लगभग एक मिलियन पाउंड का भुगतान किया जाता है; सन् 2013 से 2017 तक चार वर्षों के लिए अपनी टैक्स रिटर्न फाइल करने में चूक गये थे।

क्रिकेटर हमेशा से आयकर विभाग के रडार पर रहे हैं। सन् 2000 में जब केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) मैच फिक्सिंग के आरोपों की जाँच कर रहा था, आयकर विभाग ने 90 परिसरों और 29 लॉकरों की तलाशी ली, जिसमें 3.84 करोड़ रुपये नकद, आभूषण और अन्य सम्पत्ति जब्त की गयी। राज्यसभा में तत्कालीन वित्त मंत्री, यशवंत सिन्हा और राज्यमंत्री, धनंजय कुमार द्वारा बताया गया था। सात खिलाड़ी ऐसे थे, जिनके आवासीय और अन्य परिसरों की तलाशी ली गयी, वे थे- मोहम्मद अजहरुद्दीन, कपिल देव, अजय जडेजा, मनोज प्रभाकर, नवजोत सिद्धू, अजय शर्मा और निखिल चोपड़ा।

एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में श्रीलंका के पूर्व कप्तान सनथ जयसूर्या समेत दो अन्य क्रिकेटरों पर भारत में सड़ी सुपारी की तस्करी का आरोप लगा था। कथित कर-चोरी धोखाधड़ी सौदे में दो अन्य क्रिकेटरों के भी शामिल होने की बात कही गयी थी; लेकिन उनके नाम अभी सामने नहीं आये हैं। राजस्व खुफिया निदेशालय ने नागपुर में लाखों रुपये की सुपारी जब्त की। जाँच के दौरान उनका नाम सामने आने के बाद अधिकारियों द्वारा पूछताछ के लिए जयसूर्या को मुम्बई भी बुलाया गया था। जाँच के बाद आगे की पूछताछ के लिए श्रीलंका सरकार को पत्र भेजा गया।

लेकिन टैक्स चोरी सिर्फ दुनिया भर के क्रिकेटर ही नहीं करते हैं। यहाँ तक कि ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म भी टैस्स भुगतान से बच रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थ-व्यवस्था को नुकसान पहुँच रहा है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में सम्पन्न हुए टी20 वर्ल्ड कप में क्रिकेट प्रेमी टीवी सेट से चिपके नजर आये। टीवी पर ओवरों को विराम देने वाले विभिन्न सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के विज्ञापन थे, जिनमें से अधिकांश हमारे पसंदीदा क्रिकेटरों और टीवी / फिल्म अभिनेताओं द्वारा समर्थित थे। इस तरह के विज्ञापन वर्तमान समय में सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया आदि पर हैं; लेकिन एक लाल झंडा है।

ये एप्लिकेशन ज्यादातर देश के बाहर से संचालित होती हैं और इसलिए कर चोरी में शामिल होते हैं। भारत का राजस्व विभाग इन सट्टेबाजी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहा है। हाल ही में, उन्होंने 1XBET, Pari Match, Dafabet आदि सहित ऐसे ऐप्स की एक सूची साझा की थी।
अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट कर दुरुपयोग और निजी कर चोरी के कारण भारत को कथित तौर पर 10.3 बिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा है, जो सालाना 70,000 करोड़ रुपये से अधिक के बराबर है। वैश्विक स्तर पर, इस तरह की कर चोरी के कारण देशों को महाद्वीपों में 427 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है। अध्ययन में आगे कहा गया है कि भारत को सालाना 10.3 बिलियन डॉलर का कर नुकसान होता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा कॉरपोरेट टैक्स चोरी है और 202.15 मिलियन डॉलर ऑफशोर प्राइवेट टैक्स चोरी है।

आज जबकि दुनिया में क्रिकेट में शामिल लोगों द्वारा कर चोरी सुर्खियाँ बटोर रही है, यह मैच फिक्सिंग है, जिसने समय के साथ दुनिया भर में क्रिकेट का नाम खराब किया है।
‘तहलका’ जाँच से पता चलता है कि क्रिकेट के कट्टर प्रेमियों को यह नहीं लगता कि मैच फिक्सिंग सिर्फ एक कदाचार है। उनके लिए क्रिकेट की तो 2000 में ही मौत हो गयी थी। यह वह साल था, जब क्रिकेट में सबसे बड़ा मैच फिक्सिंग कांड सामने आया था। दक्षिण अफ्रीका के बेहद सम्मानित और बेहद सफल कप्तान हैंसी क्रोन्ये एक सट्टेबाज के साथ मैच फिक्सिंग की चर्चा करते हुए टेप में पकड़े गये थे। भारत तब हिल गया था, जब मनोज प्रभाकर ने आरोप लगाया था कि भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव, जो बाद में राष्ट्रीय कोच भी रहे; ने उन्हें सन् 1994 में श्रीलंका में एक मैच में अंडर-परफॉर्म (कमजोर प्रदर्शन) करने के लिए पैसे की पेशकश की थी। और भी बड़ा झटका तब लगा, जब सन् 1996 में क्रोनिए ने आरोप लगाया कि पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन ने उसे एक सट्टेबाज से मिलवाया था, जिसने उसे एक टेस्ट मैच हारने के लिए पैसे की पेशकश की थी।

सीबीआई की एक जाँच के बाद बीसीसीआई ने खिलाड़ी अजय शर्मा के साथ-साथ अजहरुद्दीन पर जीवन भर के लिए प्रतिबंध लगा दिया; जबकि अजय जडेजा, टीम फिजियो डॉ. अली ईरानी और मनोज प्रभाकर को पाँच साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। बीसीसीआई ने अपनी जाँच में सट्टेबाजों के साथ उनकी संलिप्तता पायी थी। लेकिन जडेजा पर लगे प्रतिबंध को सन् 2003 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने पलट दिया था और अजहरुद्दीन के प्रतिबंध को आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने 2012 में रद्द कर दिया था। दो साल बाद, दिल्ली की एक जिला अदालत ने शर्मा को बरी कर दिया और उन पर लगा आजीवन प्रतिबंध हटा लिया गया। जाहिर है कि बीसीसीआई की जाँच और सजा का तरीका उच्चतम न्यायिक मानकों पर खरा नहीं उतरता है।

भारत में मैच फिक्सिंग कानूनों का न होना अभियोजन में बाधा डालता है। पश्चिम में विशेष रूप से मैच फिक्सिंग से निपटने वाले कानून हैं। सन् 2019 में मैच फिक्सिंग को अपराध घोषित करने वाला श्रीलंका पहला दक्षिण एशियाई देश बन गया। जून, 2000 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (आईसीसी) की भ्रष्टाचार-रोधी इकाई के एक प्रमुख अधिकारी, स्टीव रिचर्डसन ने यह देखते हुए कि जाँच के तहत के अधिकांश मामलों में भारत में भ्रष्टाचारियों से सम्बन्ध थे, देश में मैच फिक्सिंग पर एक कानून की वकालत की थी।

प्रसिद्ध अमेरिकी व्यवसायी लियोना हेम्सले ने एक बार कहा था- ‘हम कर नहीं देते हैं, केवल छोटे लोग कर देते हैं।’ यह सही प्रतीत होता है, क्योंकि अमीर अकसर विभिन्न प्रकार के टैक्स से बचने और टैक्स-हेवेन (कर मुक्त) देशों के लिए उड़ानें भरते हैं। जहाँ तक आयकर का सम्बन्ध है, समान आय पर न्यायप्रिय व्यक्ति अधिक भुगतान करेगा और बेईमान व्यक्ति कम। केवल चतुर लोग ही अपने करों के हिस्से को सब्सिडी देने को अत्याधुनिक समाधानों द्वारा कम भुगतान करने के लिए कानून के आसपास अपना रास्ता खोजते हैं। इस रिपोर्ट में हमने सचिन तेंदुलकर के टैक्स बचाने के तरीकों पर चर्चा की, जिसने हरेक को आश्चर्यचकित कर दिया कि क्रिकेट के भगवान (तेंदुलकर) ऐसा कैसे कर सकते हैं?

पूंजीपतियों के लिए सरकार खोल रही है दरवाजे, पावर लूम वर्करों को 400 रू भी नहीं मिलती मजदूरी

वाराणसीः बनारस की मेहनतकश आबादी खासकर बुनकरों को संगठित-जागृत और गोलबंद करने के क्रम में फ़ातिमा-सावित्री जनसमिति की ओर से स्वयंवर वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में स्वयं बुनकरों ने उपस्थित होकर अपनी बदहाल जिंदगी की करुण दास्तान पेश की।

पॉवर लूम पर अपने परिवार के साथ काम करने वाले मोहम्मद अहमद अंसारी ने बताया कि बाजार पर पूँजी और दलालों का कब्जा होने के कारण बुनकरी के काम में लगे लोगों की वास्तविक मज़दूरी 400 रुपये भी नहीं है, जितनी कि निर्माण क्षेत्र के मज़दूरों की है। इसी क्रम में मुस्लिम आबादी के सामाजिक पिछ़ड़ेपन, स्त्रियों की तुलनात्मक रूप से अधिक खराब दशा की पृष्ठभूमि में शिक्षा का प्रश्न भी उठा। श्री अहमद ने कहा कि जब मज़दूरी-आमदनी ही इतनी कम है तो पहले भरण-पोषण की चिंता करें या कि पढ़ाई-लिखाई की। बेहद खराब माली हालत के चलते बुनकरों के बच्चे मदरसों में जाकर पढ़ने के लिए मज़बूर हैं।
उत्पादक शक्तियों के पैरों में पड़ी बेड़ियों को तोड़कर इतिहास को अग्रगति देने वाली शक्ति यानि कि मज़दूर वर्ग के ऐतिहासिक मिशन के साथ खड़े तमाम बुद्धिजीवियों ने भी अपने तीक्ष्ण प्रेक्षण से उपस्थित-जन को अवगत कराया। भगत सिंह छात्र मोर्चा के विनय ने कहा कि अत्यल्प मज़दूरी के साथ ही शिक्षा का प्रश्न भी शासक वर्ग के शोषक-उत्पीड़क राजकीय ढाँचे से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज शासक वर्ग शिक्षा को भी बाजार में खरीदा-बेचा जाने वाला माल बनाए हुए है। अगर हमें इस स्थिति में सार्थक हस्तक्षेप करना है तो हमें राज्य के चरित्र को प्रमुखता से उठाना है।
जनवादी विमर्श मंच के संयोजक हरिहर प्रसाद ने कहा कि नई शिक्षा नीति संयुक्त राष्ट संघ के सतत विकास एजेंडे को अमल में लागू करने के लिए लागू की जा रही है। इसके तहत देसी-विदेशी पूँजीपतियों के लिए सस्ते व कुशल श्रमिक तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके चलते उच्च शिक्षा महंगी हो जाएगी। सभी के लिए समान व निःशुल्क शिक्षा की पुरजोर हिमायत करते हुए उन्होंने कहा कि अगर इसका विरोध नहीं किया गया तो गरीबों-वंचित तबके के बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हो जाएंगे और केवल अमीरों के बच्चे ही ऊंची शिक्षा हासिल कर पाएंगे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए कवि-आलोचक डॉ. वंदना चौबे ने कहा कि साम्राज्यवादी महाप्रभुओं ने अकूत पूँजी खर्च करके अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खोल देने के पक्ष में माहौल बनाया। सांस्थानिक बुद्धिजीवियों को खंडीकरण की वैचारिकी का कायल बनाने और उसे प्रचारित करने के लिए अनेकशः रूपों में लाभान्वित किया। उन्होंने कहा कि मालिक-मज़दूर के मूल प्रश्न पर साजिशन पर्दा डालने हेतु मूल प्रश्न को परिधि के प्रश्नों से विस्थापित करने के लिए अस्मिता-विमर्श खड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि स्त्री और शिक्षा का प्रश्न भी अर्थव्यवस्था में ठहराव-मंदी और बेरोजगारी की समस्या से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। शिक्षा के बाजारीकरण की समस्या को अगर हम हल करना चाहते हैं तो उसे हमें बेरोजगारी के सवाल से जोड़ना ही होगा।
फ़ातिमा शेख के जमाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के समय में भारत का जो औपनिवेशिक ढाँचा था उसे वे अपने दम पर अकेले नहीं चला रहे थे। यहाँ की जो ब्राह्मणवादी ताकतें थीं, संपन्न लोगों की जो ताकतें थीं, जिनके पास संपत्ति थी, प्रभुत्व था, जाति की ताकत थी, उन सारी ताकतों के साथ उन्होंने गँठजोड़ किया। इतना आसान नहीं था उनके लिए भारत की जनता के साथ लोहा लेना। तो उन्होंने बड़े लोगों से गँठजोड़ करके अपना शासन यहाँ पर फैलाया और यहाँ की शिक्षा पर सबसे पहले प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आजादी मिलने के बाद भी शिक्षा व्यवस्था में बहुत हद तक निरंतरता बनी रही। वर्तमान दौर को साम्राज्यवाद का दूसरा दौर बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों को लेकर आजादी के बाद जनता में विश्वास था। सरकारी चीजों पर भरोसा था। लेकिन धीरे-धीरे 90 के दौर में यह भरोसा छीजने लगा। प्राइवेट के पक्ष में पूंजी की मदद से माहौल बनाया गया। हर सरकारी चीज पर अविश्वास प्रकट किया जाने लगा और इस तरह से नैरेटिव बनाया गया कि जनोपयोगी सेवाओं के सभी क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दीजिए। प्रचार और विज्ञापन का पूरा दौर आया और बताया गया कि पूँजीपतियों और कंपनियों के लिए सब कुछ खोल देने का नाम ही आजादी है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा-स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार के पास होती है तो उनकी खराब गुणवत्ता के खिलाफ आवाज उठाने का हमारा हक़ होता है क्योंकि हम वोट देकर सरकार बनाते हैं। लेकिन जब उन्हें निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया जाता है तो हम बोल ही नहीं पाते हैं क्योंकि निजी क्षेत्र तो अपने मुनाफे के लिए ही सभी गतिविधियों को संचालित करता है। बुनकर-मुस्लिम बस्तियों से जुड़े अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता का सवाल और उस पर बहस खाते-पीते मुस्लिमों के बीच की है। मज़दूर तो बस इस चिंता को व्यक्त-साझा करते हैं कि जिंदगी की गाड़ी को कैसे खींचें, कैसे अपने व अपने परिवार के लिए दो जून की रोटी का जुगाड़ करें।
दरअसल यह लोकतंत्र पूंजीपतियों का लोकतंत्र है। बाज़ार के सारे रास्ते खोलकर सारी टैरिफ और डियूटीज़ हटाकर सरकार पूंजीपतियों के लिए सारे दरवाज़े खोल चुकी है। यह नंगी प्रतियोगिता है। सरकार इसे ही लोकतंत्र कहती है। हमें लोकतंत्र की इस बुनियाद को समझना होगा। ज़ाहिर है कि हम लोकतंत्र के लिए ही लड़ेंगे लेकिन सरकार और पूंजीपतियों द्वारा थोपे गए लोकतंत्र को हम लोकतंत्र नहीं मानेंगे।
दिशा छात्र संगठन के अमित ने कहा कि देशा की शिक्षा व्यवस्था भारी परिवर्तन के दौर से गुज़र रही है लेकिन इस परिवर्तन में भी निरंतरता का पहलू बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अतीत की शोषणकारी व्यवस्था वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में भी अपनी निरंतरता लिए हुए है। मज़दूरों का खून पीने वाली, उनकी रक्त-मज्जा से मुनाफा निचोड़ने वाली इस पूँजीवादी व्यवस्था का बिना नाश किए जनपरक-विज्ञानकरक शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि शासन के जनद्रोही होने का सवाल आज भी उतना ही अहम बना हुआ है जितना कि अंग्रेजों के समय में था।
मज़दूर आंदोलन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता पवन कुमार ने कहा कि इस पूंजीवादी बाजारवाद में शिक्षा जीवन की अन्य जरूरतों जैसे स्वास्थ्य, परिवार के परिवेश से, मकान, भोजन, कपडा आदि से अलग-थलग नहीं है बल्कि सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। शिक्षा केवल स्कूल और कालेजों में मिलने वाली औपचारिक शिक्षा ही नहीं है, बल्कि इस औपचारिक शिक्षा के साथ अनौपचारिक शिक्षा जन्म के साथ ही माँ- बाप से, परिवार के परिवेश से, आस पास के परिवेश से और परिवार के आर्थिक सामाजिक हालातों से मिलने लगती है और आज कल के वॉट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर, इन्स्ताग्राम और अन्य सामाजिक मीडिया के माध्यम से यह अनौपचारिक शिक्षा लगातार दी जा रही है। औपचारिक शिक्षा में जहाँ उच्च शिक्षा केवल धनवानों और श्रम खरीदने वाले पूँजीवानों तक ही सीमित की जा रही है और अपना श्रम बेचकर जीविकोपार्जन करने वालों की पहुँच से दूर होती जा रही है, वहीँ प्राथमिक और माध्यमिक स्तर तक की औपचारिक शिक्षा केवल श्रम के खरीददारों पूँजीवानों धनवानों के कारखानों, घरों और संस्थानों में श्रम बेचने वाले नौकर पैदा करने तक सीमित है और उसी उद्देश्य से दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी व्यवस्था में जन साधारण अर्थात श्रम बेचकर जीवन निर्वाह करने वालों के भी अच्छे दिन आ जायेंगे, इससे बड़ा झूठ और भ्रम दूसरा नहीं है।
उन्होंने आज की पूंजीवादी राजसता, अस्मिता-विमर्श (पिछड़ावाद, जातिवाद, नारीवाद, क्षेत्रवाद आदि) को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि शासक वर्ग चाहता है कि जन सामान्य के अर्थात मेहनतकशों के मुद्दों को गायब कर दिया जाए। तभी तो वह पूँजी बनाम श्रम के मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए अरबों डालर एनजीओ-जगत को देकर फर्जी मुद्दों को केंद्र में लाने का प्रयास करता रह है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के लिए अन्य समस्यायों के साथ समेकित रूप से लड़ने की आवश्यकता है।
सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट शहजादे ने कहा कि सामाजिक चेतना के बगैर ज्ञान की प्रक्रिया चल ही नहीं सकती किसी भी ब्रेन को परिपक्व होने में 18 साल लगते हैं इसी दौरान धार्मिक पूर्वाग्रहों जातिवादी भेदभाव पर आधारित शिक्षा मनुष्य के व्यक्तित्व को बिगाड़ देती है। जबकि सामाजिक चेतना से लैस शिक्षा जो उत्पादन की पद्धति के अनुरूप होती है, वह ऐसे मनुष्य का निर्माण करती है जो सामूहिकता-सहकार की भावना से ओतप्रोत होता है।
उन्होंने कहा कि पूंजीपति अपने उद्देश्य को पूरा करने हेतु सामाजिक चेतना को नियंत्रित करने के लिए लंबे समय से चली आ रही सामाजिक व्यवस्था में निरंतरता बनाए रखने का प्रयास करता है।  ऑल इंडिया सेकुलर फोरम के डॉ. मोहम्मद आरिफ ने उच्च शिक्षा प्राप्त युवाओं के बीच पसरी भयंकर बेरोजगारी और अकिंचनता का चित्र उपस्थित करते हुए बताया कि बुनकरों की समस्या पर तो आए दिन अखबारों में बयान छपते रहते हैं, बिजली के फ्लैट रेट से जुड़ी मांग से हम भलीभाँति परिचित हैं लेकिन निजी स्कूलों-कॉलेजों में उच्च शिक्षा प्राप्त नौजवान पाँच हजार महीने की नौकरी करने को अभिशप्त है। हाड़तोड़ शारीरिक श्रम के बरअक्स मानसिक श्रम करने वालों पर पहनावे-ओढ़ावे और व्यक्तित्व की समग्र प्रस्तुति को लेकर अतिरिक्त सामाजिक दबाव के हवाले से उन्होंने कहा कि तथाकथित उच्च-शिक्षा प्राप्त लोग भी संकटग्रस्त-ठहरावग्रस्त अर्थव्यवस्था की मार से उतने ही परेशान हैं जितना कि आम मज़दूर वर्ग।
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कार्यक्रम को ऐपवा की कुसुम वर्मा, बिहार निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन के इंद्रजीत, स्वराज इंडिया के मो. अहमद अंसारी, उत्तर प्रदेश निर्माण व असंगठित मज़दूर यूनियन के इंद्रजीत, सामाजिक कार्यकर्ता प्रतिमा आदि ने भी संबोधित किया।