Home Blog Page 404

‘सिंधु जल संधि’ में संशोधन के लिए भारत ने पाकिस्तान को किया नोटिस जारी

भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि में संशोधन को लेकर पाकिस्तान को नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार सिंधु जल के लिए संबंधित आयुक्तों के माध्यम से 25 जनवरी को आईडब्ल्यूटी के अनुच्छेद XII (3) के अनुसार नोटिस जारी किया गया हैं।

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने आईडब्ल्यूटी के प्रावधानों और उनके कार्यान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। और इसी के चलते भारत को आईडब्ल्यूटी के संशोधन के लिए एक उचित नोटिस जारी करने के लिए मजबूर किया है।

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2015 में पाकिस्तान ने भारत की किशनगंगा और रातले हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स पर अपनी तकनीकी आपत्तियों की जांच के लिए एक तटस्थ विशेषज्ञ की नियुक्ति के लिए अनुरोध किया था किंतु वर्ष 2016 में पाकिस्तान ने एकतरफा रूप से इस अनुरोध को वापस ले लिया था और प्रस्तावित किया कि एक मध्यस्थता अदालत उसकी आपत्तियों पर फैसला सुनाए।

पाकिस्तान कि यह एकतरफा कार्रवार्इ सिंधु जल संधि के अनुच्छेद IX द्वारा परिकल्पित विवाद समाधान के श्रेणीबद्ध तंत्र के उल्लंघन में है। और इसके अनुसार भारत ने इस मामले को एक तटस्थ विशेषज्ञ के पास भेजने के लिए एक अलग अनुरोध किया है।

नोटिस में कहा गया है कि भारत द्वारा पारस्परिक रूप से सहमत तरीके से आगे बढ़ने के लिए बार-बार प्रयास करने के बावजूद, पाकिस्तान ने 2017 से 2022 तक स्थायी सिंधु आयोग की पांच बैठकों के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया। और पाकिस्तान के निरंतर आग्रह पर, विश्व बैंक ने हाल ही में तटस्थ विशेषज्ञ और मध्यस्थता न्यायालय प्रक्रियाओं दोनों पर कार्रवाई शुरू की है। आईडब्ल्यूटी के किसी भी प्रावधानों के इस तरह के उल्लंघन का सामना करते हुए, भारत को संशोधन का नोटिस जारी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

आपको बता दें, सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) 1960 के प्रावधानों के अनुसार, सिंधु बेसिन की छह नदियों के पानी के बंटवारे पर भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु आयुक्त और स्थायी सिंधु आयोग है। जो कि हर साल वैकल्पिक रूप से भारत और पाकिस्तान में कम से कम एक बार मिलते हैं।

सिंधु बेसिन की छह नदियों में से भारत का तीन पूर्वी नदियों- सतलुज, ब्यास और रावी पर पूर्ण अधिकार हैं, वहीं पश्चिमी नदियों- चिनाब, झेलम और सिंधु पर पाकिस्तान का अधिकार है। और भारत व पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि हुई है। किंतु भारत की नदियों से पाकिस्तान को भारी मात्रा में अतिरिक्त पानी मिल जाता हैं।

 

मिक्स डबल्स के फाइनल में ब्राजीली जोड़ी से हारी सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी

भारत की स्टार टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा और रोहन बोपन्ना की जोड़ी को आस्ट्रेलियाई ओपन टेनिस टूर्नामेंट के मिक्स्ड डबल्स के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा है। ब्राजीलियन जोड़ी राफेल माटोस और लुइसा स्टेफनी ने उन्हें 7-6 और 6-2 से हराया हैं।

यह सानिया मिर्जा के करियर का आखिरी ग्रैंड स्लैम था और इसमें उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा साथ ही सानिया मिर्जा के ग्रैंड स्लैम करियर का अंत हार के साथ हुआ। वहीं राफेल माटोस और लुइसा स्टेफनी की जोड़ी ने दूसरे सेट में 6-2 से जीत दर्ज करते हुए खिताब अपने नाम किया है।

आपको बता दें, सानिया मिर्जा ने प्रोफेशनल टेनिस करियर से सन्यास का ऐलान किया था और यह उनका आखिरी ग्रैंड स्लैम था। और वे 19 फरवरी से शुरू होने वाली डब्ल्यूटीए 1000 दुबई टेनिस चैंपियनशिप के बाद संन्यास ले लेंगी।

बीबीसी की बैन डॉक्यूमैंट्री पर जेएनयू में बवाल, छात्रसंघ ने दर्ज करायी शिकायत; दिल्ली पुलिस ने कहा नहीं हुई पत्थरबाजी

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में एक बार फिर विवाद हो गया है। इस बार जेएनयू में हुए विवाद का कारण बीबीसी की बैन डॉक्यूमेंट्री ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ है और इसे लेकर कैंपस में बखेड़ा खड़ा हो गया है और दिल्ली पुलिस के पास तीन शिकायतें दर्ज हुई हैं। दो शिकायत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दी है। और एक शिकायत जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रतिबंधित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग के दौरान पथराव किए जाने के दावों के साथ जेएनयू के छात्रों ने वसंत कुंज थाने के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। और थाने के बाहर जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) की अध्यक्ष आइशी घोष ने मीडिया से बातचीत कर बताया कि हमने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई हैं।

आइशी घोष ने कहा है कि, अभी उसने प्रारंभिक शिकायत दी है वह विस्तार से लिखित शिकायत बुधवार दोपहर बाद देगी। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जेएनयू में पत्थरबाजी हुई होती तो किसी को चोट लगती। इस मामले में किसी की एमएलसी नहीं बनी है, दिल्ली पुलिस जेएनयू के बाहर तैनात है और स्थिति को नियंत्रण में रखा हुआ हैं।

इस मामले में आइसा के एक छात्र की एमएलसी हुई है जो कि पुलिस को मिल गई हैं। एमएलसी में छात्र को कोई अंदरूनी चोट नहीं लगने की बात कही गयी है। पुलिस ने शिकायतें ले ली है और पूरे मामले की जांच जारी हैं।

आपको बता दें, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग करने की घोषणा की थी। और आरोप है कि इस दौरान छात्रसंघ कार्यालय में बिजली काट दी गई और पथराव हुआ।

इसके बाद बीबीसी डॉक्यूमेंट्री देख रहे छात्रों पर पथराव के मामले में छात्रों ने शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने तक मार्च किया। बीबीसी की ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ डॉक्यूमेंट्री सीरीज गुजरात दंगों पर आधारित है। जब नरेंद्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे।

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पीएम मोदी की आलोचना वाली बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर नए आईटी नियमों के तहत प्रतिबंध लगाया है और इस डॉक्यूमेंट्री पर शेयर करने वाले ट्वीट ब्लॉक करने का आदेश दिया था। जेएनयू प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि अगर डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा को 8 हफ्ते की दी अंतरिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत के मामले में आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को अंतरिम जमानत दे दी है। आशीष मिश्रा एक साल से ज्यादा समय से जेल में बंद रहे। और आज उसे 8 हफ्ते के लिए अंतरिम जमानत मिली है।

बता दें, इस दौरान आशीष दिल्ली में नहीं रहेंगे। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश को भी एक सप्ताह में छोड़ने और पासपोर्ट सरेंडर करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी की पीठ ने यह आदेश सुनाया है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि गवाहों को धमकाया गया, तो बेल कैंसिल कर दी जाएगी। और यदि यह पाया जाता है कि मिश्रा ट्रायल में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह उनकी जमानत रद्द करने का एक वैध आधार होगा। साथ ही आशीष मिश्रा कोर्ट को अपनी लोकेशन के बारे में भी बताएंगे।

कोर्ट ने आगे कहा कि, आशीष मिश्रा या उनके परिवार के सदस्य द्वारा गवाह को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास से जमानत रद्द हो जाएगी। और आशीष ट्रायल में भाग लेने को छोड़कर यूपी नहीं जाएंगे। साथ ही उनको अपने स्थान के अधिकार क्षेत्र के थाने में ही हाजिरी लगानी होगी। ट्रायल कोर्ट को भी जल्द सुनवाई पूरी करने को कहा गया है।

मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी और आशीष मिश्रा की जमानत आगे बढ़ाई जाए या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट 8 हफ्ते बाद तय करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े दूसरे केस में बंद चार अन्य किसानों को भी 8 हफ्तों की अंतरिम जमानत दे दी है। इस घटना में किसानों और पत्रकार सहित आठ लोगों की मौत हो गयी थी।

सर्वोच्च अदालत पर अपलोड जानकारी के मुताबिक न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी की पीठ इस अहम मामले में आदेश सुनाएगी। याद रहे सर्वोच्च अदालत की पीठ ने 19 जनवरी को आशीष की अर्जी पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

आपको बता दें, यह घटना तिकुनिया की है जहाँ 3 अक्टूबर, 2021 को आठ लोगों की मौत होने के बाद हिंसा भड़क गयी थी। मंत्री के बेटे पर आरोप है कि किसानों की मौत उसकी गाड़ी से कुचलने के कारण हुई थी। घटना के समय किसान उत्तर प्रदेश के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके में दौरे के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।

इसे लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस में एफआईआर दर्ज हुई थी जिसके मुताबिक एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया, जिसमें आशीष मिश्रा बैठा था। घटना के बाद, एसयूवी के चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित रूप से गुस्साए किसानों ने पीट-पीट कर मार डाला था। हिंसा में एक पत्रकार की भी जान चली गयी थी।

इस मामले में आशीष मिश्रा के अलावा 12 अन्य आरोपियों में अंकित दास, नंदन सिंह बिष्ट, लतीफ काले, सत्यम उर्फ सत्य प्रकाश त्रिपाठी, शेखर भारती, सुमित जायसवाल, आशीष पांडे, लवकुश राणा, शिशु पाल, उल्लास कुमार उर्फ मोहित त्रिवेदी, रिंकू राणा और धर्मेंद्र बंजारा शामिल हैं। सभी 13 आरोपी अभी जेल में हैं और इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की दंगा से संबंधित धारा 147 और 148, 149 (गैरकानूनी विधानसभा), 302 (हत्या) और 307 (हत्या का प्रयास) समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

याद रहे 26 जुलाई, 2022 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पिछले साल 26 जुलाई को आशीष मिश्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आशीष मिश्रा ने वकील के जरिये उच्च न्यायालय के आदेश को सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय ने 19 जनवरी को सुनवाई के दौरान कहा था कि एक आरोपी को अनिश्चित काल के लिए कारावास में नहीं रखा जाना चाहिए, जब तक कि अपराध साबित न हुआ हो। साथ ही शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

फ्लाइट में पेशाब कांड विवाद के बाद एयर इंडिया के विमानों में शराब परोसने की नीति में किया गया संशोधन

एयर इंडिया ने अपनी फ्लाइट के दौरान शराब परोसे जाने संबंधी नीति में बदलाव किया है। एयर इंडिया के विमान में शराब के नशे में एक व्यक्ति द्वारा एक महिला पर पेशाब करने की घटना सामने आने के बाद यह बदलाव किया गया है।

बदलाव में चालक दल के सदस्यों को उन यात्रियों की पहचान कर चौकस रहना होगा जो कि अपनी शराब का सेवन कर रहे हों। साथ ही यात्रियों को चालक दल के सदस्यों द्वारा परोसे जाने तक शराब पीने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

एअर इंडिया के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा है कि, एयरलाइन ने अन्य विमान कंपनियों द्वारा अपनाए जाने वाले तौर-तरीकों, अमेरिकी नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन (एनआरए) के दिशा-निर्देशों के आधार पर उड़ान में शराब की पेशकश संबंधी मौजूदा नीति की समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि, ये काफी हद तक एयर इंडिया के मौजूदा तौर-तरीकों के अनुरूप हैं। हालांकि बेहतर स्पष्टता के लिए कुछ समायोजन किए गए हैं।

इसी के साथ एनआरए की ट्रैफिक लाइट प्रणाली में चालक दल को नशे के संभावित मामलों को पहचानने और प्रबंधित करने में मदद करने के लिए शामिल भी किया गया है। अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों को उचित और सुरक्षित तरीके से परोसा जाना चाहिए और इसमें मेहमानों को शराब परोसने से मना करना भी शामिल है।

साथ ही एयर इंडिया की फ्लाइट में हुए पेशाब कांड के बाद डीजीसीए ने एयरलाइन पर 30 लाख का जुर्माना और विमान के पायलट का लाइसेंस 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया हैं। जिसके बाद फ्लाइट में यह सब बदलाव किए गए हैं और एअर इंडिया ने एक कमेटी भी बनाई है जिसने शंकर के इस एयरलाइन की फ्लाइट में ट्रेवल करने पर 4 महीने के लिए बैन लगा दिया था।

वहीं इस पेशाब कांड के आरोपी शंकर मिश्रा के वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल पर लगाया गया 4 महीने का बैन गलत हैं।

बालाकोट के बाद पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमले की तैयारी में था: पोम्पिओ

भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिका के एक वरिष्ठ मंत्री को जानकारी दी थी कि 2019 के शुरू में आतंकियों के पुलवामा हमले के बाद भारत की तरफ से बालाकोट में की गयी कार्रवाई के बीच पाकिस्तान ने भारत पर परमाणु हमला करने की तैयारी कर ली थी। यह दावा अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने किया है। उनके मुताबिक इसके बाद उनकी टीम ने रात-दिन इसपर काम किया था ताकि संकट को टाला जा सके।

पोम्पिओ के दावे के मुताबिक स्वराज ने उन्हें बताया था कि पाकिस्तान की तरफ से ऐसी किसी कार्रवाई की जानकारी मिलते ही भारत ने भी आक्रामक जवाब की तैयारी शुरू कर दी थी। उनके मुताबिक स्वराज की तरफ से मिली जानकारी से वह ‘दंग’ रह गए थे। पोम्पिओ ने यह दावा एक दिन पहले लॉन्च की अपनी नई पुस्तक ‘नेवर गिव एन इंच: फाइटिंग फॉर द अमेरिका आई लव’ में किया है।

पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक यह सब तब हुआ, जब वह 27-28 फरवरी को अमेरिका-उत्तर कोरिया शिखर सम्मेलन के लिए हनोई में थे। इसके बाद उनकी टीम ने इस संकट को टालने के लिए भारत और पाकिस्तान के साथ रात भर काम किया था। पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री के मुताबिक उन्हें नहीं लगता कि किसी को भी दुनिया में इस बात का पता है कि फरवरी 2019 में भारत और पाकिस्तान चरम तनाव परमाणु हमले के करीब आ गए थे।

पोम्पिओ ने पुस्तक में आगे लिखा है कि भारत-पाकिस्तान की प्रतिद्वंद्विता परमाणु हमले को लेकर कितने करीब आ गया था। उनके मुताबिक सच यह है कि उन्हें भी इसका ठीक-ठीक उत्तर नहीं पता, बस इतना पता है कि यह बहुत करीब था।

शाहरुख-दीपिका स्टारर पठान आज होगी रिलीज, हिन्दू संगठन हैं इसके विरोध में

कट्टरपंथियों के विरोध के बीच शाहरुख खान-दीपिका पादुकोण स्टारर ‘पठान’ आज से देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज की जा रही है। हालांकि, इस फिल्म को लेकर जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्होंने रिलीज से एक दिन पहले मंगलवार को भागलपुर (बिहार) और आगरा में सिनेमा हॉल के बाहर लगे फिल्म के पोस्टर फाड़कर जला दिए।

फिल्म का विरोध हिंदू संगठनों ने तब शुरू किया जब फिल्म के एक गाने ‘बेशरम रंग’ का टीजर रिलीज किया गया। इसमें दीपिका पादुकोण की ड्रेस के रंग को लेकर इन कट्टरपंथी हिन्दू संगठनों को ऐतराज था। इसके बाद ‘पठान’ विवादों में आ गयी और अब कुछ संशोधन के बाद इसे आज रिलीज किया जा रहा है।

विरोध कर रहे हिंदू संगठनों का आरोप है कि ‘फिल्म के गाने में हिन्दू धर्म का अपमान किया गया है। हिंदुत्व से समझौता नहीं किया जा सकता। सनातन संस्कृति का विरोध करने वाले किसी भी तत्व को पूरे देश में कहीं भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उधर भागलपुर में पोस्टर जलाने को लेकर स्थानीय थाने और एसपी को आवेदन दिया गया जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन दिया है।

उधर आगरा में भी ‘पठान’ का विरोध कर रहे दक्षिणपंथी संगठन हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को फिल्म के पोस्टरों पर स्याही फेंकी और उन्हें फाड़ने की कोशिश की। हिंदू महासभा के नेताओं ने कहा कि किसी भी कीमत पर ‘पठान’ फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया जाएगा।

गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के सभी आरोपी सबूतों के अभाव में बरी किए

साल 2002 में गुजरात के गोधरा कांड के बाद हुए दंगों के एक मामले, जिसमें दो बच्चों सहित अल्पसंख्यक समुदाय के 17 सदस्यों की हत्या हो गयी थी, के आरोपी 22 लोगों को सबूत के अभाव में बरी कर दिया गया है। यह फैसला गुजरात के पंचमहल जिले के हलोल कस्बे की एक अदालत ने सुनाया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्ष त्रिवेदी की अदालत ने यह फैसला सुनाया। इस मामले के जिन 22 आरोपियों को बरी किया गया है, उनमें से आठ की अब मौत हो चुकी है।

बचाव पक्ष के वकील गोपाल सिंह सोलंकी के मुताबिक जिले के देलोल गांव में दो बच्चों समेत अल्पसंख्यक समुदाय के 17 लोगों की हत्या और दंगा करने के मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ितों को 28 फरवरी, 2002 को मार दिया गया था और सबूत नष्ट करने के इरादे से उनके शव को जला दिया गया था। पंचमहल जिले के गोधरा कस्बे के पास 27 फरवरी, 2002 को भीड़ ने साबरमती एक्सप्रेस की एक बोगी जलाए जाने के एक दिन बाद राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे।

याद रहे रिकॉर्ड के मुताबिक बोगी जलाए जाने की घटना में 59 यात्रियों की मौत हो गई थी, जिनमें से अधिकांश लोग कारसेवक थे, जो अयोध्या से लौट रहे थे। हिंसा के बाद हत्या और दंगे से संबंधित आईपीसी धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। एक अन्य पुलिस निरीक्षक ने घटना के लगभग दो साल बाद नए सिरे से मामला दर्ज किया और दंगों में शामिल होने के आरोप में 22 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।

बचाव पक्ष के वकील के मुताबिक अभियोजन पक्ष आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत इकट्ठा करने में असमर्थ रहा और यहां तक कि गवाह भी मुकर गए। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि पीड़ितों के शव कभी नहीं मिले। पुलिस ने एक नदी के किनारे एक सुनसान जगह से हड्डियां बरामद कीं, लेकिन वे इस हद तक जली हुई थीं कि पीड़ितों की पहचान स्थापित नहीं की जा सकी।

सर्जिकल स्ट्राइक पर दिग्विजय सिंह के बयान से मैं और कांग्रेस सहमत नहीं – राहुल गांधी

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के सर्जिकल स्ट्राइक वाले बयान पर मंगलवार को भारत जोड़ो यात्रा के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि, उनके बयान से मैं और कांग्रेस सहमत नहीं। दिग्विजय सिंह ने जो भी कहा वह कांग्रेस का विचार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सेना कुछ करे तो उसके लिए सबूत की कोई जरूरत नहीं हैं।

दिग्विजय सिंह के बयान को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश भी सफाई दे चुके है। जम्मू-कश्मीर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जयराम रमेश मीडिया पर जमकर बरसे और इस मामले में अपनी सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि, “जो कुछ कहा जाना था वह पहले ही कहा जा चुका है, और अब पीएम से सवाल पूछे जाने चाहिए। सर्जिकल स्ट्राइक हंगामे से जुड़े सभी प्रश्नों का उत्तर उनकी पार्टी ने दिया है और मीडिया को इसकी आवश्यकता है कि पीएम से सवाल पूछे जाए।“

वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने आज कहा कि, “ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी के द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक पर बार-बार सवाल खड़े करते हैं। ये दिग्विजय सिंह वही हैं जिन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल खड़े किए थे। मेरा सवाल राहुल गांधी से है आपके साथ जो लोग चल रहे हैं वो देश तोड़ने में लगे है और आप चुप है क्यों? कभी आपने सोचा है आपके नेताओं के इस बयान से आतंक के आकाओं का मनोबल बढ़ता है ये भारत जोड़ो यात्रा है या भारत तोड़ो यात्रा है?”

आपको बता दें, सोमवार को दिग्विजय सिंह ने सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सरकार ने आज तक संसद में सर्जिकल स्ट्राइक का कोई सबूत पेश नहीं किया हैं।

दिल्ली में एमसीडी मेयर, डिप्टी मेयर व स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव आज, कांग्रेस चुनाव से रहेगी दूर

दिल्ली में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) मेयर और डिप्टी मेयर व स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव आज (24 जनवरी) होना है। मेयर का चुनाव सीक्रेट बैलट से होगा यानी कौन व्यक्ति किसे वोट डाल रहा है यह पता नहीं लगाया जा सकेगा। मेयर का चुनाव होने के बाद पीठासीन अधिकारी अपनी कुर्सी छोड़ देंगे जिसके बाद सदन की अध्यक्षता नवनिर्वाचित दिल्ली के मेयर करेंगे।

बता दें दिल्ली नगर निगम का सदन सुबह 11 बजे से शुरू होगा। एमसीडी सचिव की तरफ से जो कार्य सूची जारी की गई है उसके मुताबिक पीठासीन अधिकारी या प्रोटेम स्पीकर जो कि भाजपा की पार्षद सत्या शर्मा हैं वे सर्वप्रथम नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों और मनोनीत पार्षदों को शपथ दिलाएंगी।

एमसीडी में कांग्रेस के 9 पार्षद है फिर भी कांग्रेस एमसीडी मेयर और डिप्टी मेयर व स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव इसमें हिस्सा नहीं ले रही है।

आपको बता दें, एमसीडी के चुनाव 4 दिसंबर को हुए थे व मतगणना 7 दिसंबर को हुई थी। इसमें आम आदमी पार्टी (आप) ने 134 वार्ड जीतकर एमसीडी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया। जबकि भाजपा ने एमसीडी के 250 सदस्यीय सदन में 104 वार्ड में वहीं कांग्रेस ने 9 वार्ड में जीत दर्ज की थी।

वैसे तो मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नगर निगम चुनाव के बाद छह जनवरी को हुई सदन की पहली बैठक में किया जाना था। किंतु आप और भाजपा के सदस्यों के एक दूसरे से भिड़ जाने और हंगामा करने के बाद से सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया था जिसके कारण महापौर और उपमहापौर का चुनाव नहीं हो सका था।

मेयर की अध्यक्षता में सर्वप्रथम डिप्टी मेयर का चुनाव होगा और इसकी पूरी प्रक्रिया व वोटिंग ठीक उसी प्रकार होगी जैसे की मेयर चुनाव की होती है। इसके बाद स्टैंडिंग कमेटी के छह सदस्यों का चुनाव होगा। स्टैंडिंग कमेटी दिल्ली नगर निगम की सबसे शक्तिशाली इकाई होती है। मेयर का पद तो अहम होता ही है लेकिन निगम की असली सरकार स्टैंडिंग कमेटी होती है।