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शादी के बिना भी साथ रह सकते हैं बालिग़ जोड़े: अदालत

सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अगर लड़का बालिग है तो वह बालिग लड़की के साथ बिना शादी के लिव इन रिलेशन में रह सकता है।

अदालत ने यह व्यवस्था केरल की एक दंपत्ति की याचिका पर दी।

जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा, याचिकाकर्ता नंदकुमार के विवाह को शादी के समय 21 साल से कम उम्र होने के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है।

पीठ ने फैसला देते हुए कहा कि नंदकुमार और उससे विवाह करने वाली लड़की तुषारा हिंदू है। ऐसे में हिंदू विवाह अधिनियम 1995 के तहत ऐसी शादियां अमान्य नहीं हो सकती। जैसा कि अधिनियम की धारा 12 में प्रावधान में है।

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शादी के लिए निर्धारित उम्र नहीं होने के बावजूद यह पर्याप्त है कि याचिकाकर्ता बालिग हैं और बिना शादी के साथ रहने का अधिकार रखते हैं। पीठ ने कहा, यहां तक कि अब विधायिका में भी लिव इन रिलेशन को मान्यता मिली है। ऐसे संबंध में रह रही महिलाओं को भी घरेलू हिंसा कानून 2005 में संरक्षण दिया गया है।

इसके साथ ही अदालत ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें तुषारा की कस्टडी उसके पिता को दी गई थी। पीठ ने कहा, हस स्पष्ट करते हैं कि तुषारा को यह पूरी स्वतंत्रता है कि वह किसके साथ रहना चाहती है।

अवैध निर्माण गिरवाने गईं महिला अधिकारी की हत्या

एक बहुत ही चौंकाने वाली घटना में हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के कसौली के मंडोधार में पहली मई को सुप्रीम कोर्ट का आदेश का पालन करवाने गयी एक महिला टाउन प्लानर की होटल मालिक ने हत्या कर दी। हरित प्राधिकरण और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद होटल की अवैध मंजिल गिरवाने गयी इस अधिकारी शैल बाला शर्मा को पुलिस और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में जान से मार दिया गया।  अब सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का कडा संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाबतलबी की है।
”तहलका” की जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने १७ अप्रैल को सोलन जिले के कसौली में होटलों में किए अवैध निर्माण दो हफ्ते में गिराने के निर्देश दिए थे। इसी आदेश का पालन करवाने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की उप अधिकारी  शैल बाला शर्मा अन्य अधिकारियों और पुलिस दल के साथ एक गेस्ट हाउस (होटल) में अवैध निर्माण के हिस्से को गिरवी गयी थीं। घटना के समय का वीडियो देखने ज़ाहिर होता है कि जब महिला अधिकारी अवैध निर्माण गिरवाने का आदेश दे रही थीं होटल मालिक वहां मौजूद अपनी बुजुर्ग मां के साथ कागज़ उन्हें दिखाकर इस करवाई को रोकने की बात कह रहा है हालांकि अधिकारी कह रही हैं की अवैध हिस्सा गिराने के आदेश सुप्रीम कोर्ट के हैं लिहाजा वह ऐसा करने दें। एक मौके पर होटल मालिक अधिकारी से यह कहता भी सुनाई देता है – ”मैडम आप मुझे हैंग ही कर दें”. इस पर अधिकारी  कहती हैं कि वैसा क्यों करेंगी, वे तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने आई हैं।
विभाग की टीम ने कसौली में नारायणी होटल के हिस्से में अवैध निर्माण पाया था महिला अधिकारी शैल बाला और उनकी टीम अवैध निर्माण हटाने पहुंचीं तो वहां होटल के स्टाफ और मालिक से उनकी बहस होने लगी। कहा जाता है कि कुछ देर बाद होटल के  मालिक विजय ठाकुर अपना आपा खो बैठा और उसने महिला अधिकारी पर गोली चला दी। बताया जाता है कि आरोपी बिजली बोर्ड में काम करता है। घटना को अंजाम देने के बाद बह फरार हो गया। इस गोलीबारी में एक मजदूर को भी गोली लगी, जिसका पीजीआई में उपचार चल रहा है। जिला प्रशासन के अधिकारी कसौली इलाके में 13 होटलों एवं रिसॉर्ट्स में अवैध निर्माण ढहा रहे थे, और इसी दौरान यह घटना घटी। इस दौरान बिजली विभाग के एक अधिकारी, संजय नेगी बाल-बाल बच गए।
जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी को दो गोलियां लगीं। शैल बाला की मौके पर ही मौत हो गई  जबकि वहां मौजूद एक मजदूर भी गोली लगने से घायल हो गया उसे इलाज के लिए पीजीआई, चंडीगढ़ रेफर किया गया है।
सोलन के एसपी मोहित चावला के मुताबिक हत्यारोपी होटल मालिक विजय ठाकुर वारदात के बाद से फरार है। ”पुलिस उसे जल्द गिरफ्तार कर लेगी”। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है और महिला अधिकारी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि एक गोली जाकर शैल बाला को लग गई और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। मजदूर गुलाब सिंह के पेट में एक गोली लगी और वह घायल हो गया।
इस बीच महिला अधिकारी की होटल मालिक के गोली मारकर हत्या करने की घटना पर शीर्ष अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगायी है। बुधवार को कोर्ट ने अफसर को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराने पर राज्य सरकार को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की हिमाकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी, राज्य सरकार इस मामले की पूरी रिपोर्ट अदालत को सौंपे। इस मामले की अगली सुनवाई अब गुरुवार (३ मई) को होगी।
इस बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अधिकारी के निधन पर शोक जताया है और कहा कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा और कानून के अनुसार, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनहोंने कहा – ”प्रदेश में किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था को बरकरार रखा जाएगा।”

अवैध खनन का बड़ा घोटाला

यह एक घोटला है, कोयला ब्लाक घोटाले से भी कहीं ज़्यादा बड़ा और खतरनाक। इससे देश की खनिज संपदा की सीधी लूट हो रही है। इनमें ‘लियोनिट’, ‘टाइटेनियम आकऑक्साइड’ (रंजारिज) तुरसावस (जि़रकोन) और मोनाज़ाइट जैसे खनिज शामिल हैं। मोनाजाइट एक ऐसा खनिज है जिस पर चीन समेत कई देशों में प्रतिबंध है। इसके बावजूद यहां यह पिछले काफी लंबे समय से चल रहा है। ‘तहलका’ के पास मौजूद दस्तावेजों से पता चलता है कि परमाणु ताकत में काम आने वाले खनिज भी न केवल गैर कानूनी तरीके से निकाले जा रहे हैं अपितु चीन जैसे देशों को बिना किसी रुकावट के बेचे भी जा रहे हैं।

सरकारें आती जाती रही पर यह लूट लगातार चलती रही है। ‘तहलका’ की जांच में पता चला है कि सरकारी अनदेखी और लापरवाही के कारण गैरकानूनी खनन जारी है। इसमें केंद्र व आंध्र प्रदेश के सरकारी विभागों की मिलीभगत भी सामने आती है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा विभाग और केंंद्रीय खनन मंत्रालय भी इसमें शामिल हैं। असल में खनन का यह घोटाला बाकी कई घोटालों से बड़ा है जिसमें नौकरशाही और राजनीति का तालमेल है। लेकिन आज तक यह लोगों की नज़रों से इसलिए छुपा रहा है क्योंकि इसके साथ बड़े-बड़े लोगों के नामों को जोडऩा आसान नहीं था। केंद्र की राय है कि पर्यावरण की इज़ाजत देने की ताकत राज्य सरकारों को दी जाए। पर क्या राज्य सरकारों के पास इतना सब कुछ करने के लिए पूरा साजो-समान है? यह एक बड़ा सवाल है। हम सब जानते हैं कि खनन हमारे पूरे पर्यावरण को तबाह करता है। पर इस मामले में सज़ा का अनुपात बहुत ही कम है। मिसाल के तौर पर 2015-17 में गैर कानूनी खनन के 1,07,609 मामले पूरे देश में दर्ज किए गए लेकिन असली एफआईआर 6,033 मामलों में ही दर्ज हुई। देश की सर्वोच्च अदालत ने अगस्त 2017 में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय खनिज नीति में संशोधन करने का निर्देश दिया था। अदालत का कहना था कि मौजूदा नीति केवल कागज़ी है और उसका क्रियान्वयन नहीं होता क्योंकि इसमें कई ताकतवर लोग शामिल होते हैं।

जांच में उन सभी जांच एजेंसियों द्वारा दिया गया ‘डाटाÓ शामिल किया गया है जो उन्होंने उनके बारे में दिया है जो समुद्र तल से रेत और परमाणु खनिज गैर कानूनी तरीके से निकालते हैं पर बिना किसी सज़ा के खौफ से।

इस घोटाले के बारे में एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है। इसकी पूरी जानकारी ‘तहलकाÓ के पास है। उसके अनुसार अवैध खनन और निर्यात का काम खुले रूप से सरकारी कानूनों और नियमों को धता बताते हुए चलता रहा है। भारतीय खनन ब्यूरो (आईबीएम) और परमाणु खनिज निदेशालय (एएमडी) खनन की योजनाओं को मंजूरी देते हैं। आईबीएस केंद्रीय खनन मंत्रालय के तहत आता है और एएमडी परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत और ये दोनों ही विभाग सीधे प्रधानमंत्री के तहत हैं। राज्य सरकारों के यातायात के परमिटों को इक_ा कर उनकी भी जांच की गई। इन दस्तावेजों के बिना खनन और निर्यात नहीं किया जा सकता। कस्टम विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि अवैध खनन किस हद तक हो रहा है।

श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश) का समुद्र तटीय रेत परमाणु खनिजों के साथ ‘इल्मेनाइटÓ, ‘रूटीलÓ, ल्यूकॉक्सीन, जिरकोन और ‘मोनाज़ाइटÓ जैसे खनिजों का मिश्रण है। इनमें ‘मोनाज़ाइटÓ एक ऐसा खनिज है जो परमाणु ईधन ‘थोरियमÓ बनाने के काम आता है। ‘मोनाज़ाइटÓ के निर्यात और निजी संस्थानों को बेचने पर पूरी रोक है पर हमारी राष्ट्रीय संपदा कुछ अनैतिक कंपनियों और व्यक्तियों द्वारा निर्यात की जा रही है।

राज्यसभा सदस्य रेणुका चौधरी जो ‘पब्लिक अकाउंटस कमेटी (पीएसी)Ó की सदस्य भी थीं उन्होंने यह मुद्दा 14 मार्च 2016 को सदन में उठाया था। असल में पीएसी के सदस्य भाजपा के सांसद राजू ने पाया था कि ‘ट्राइमेक्सÓ ग्रुप न केवल अवैध खनन में लगा है बल्कि ‘मोनाज़ाइटÓ का अवैध निर्यात भी कर रहा है।

प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई, केंद्रीय खान मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और आंध्रप्रदेश के सतर्कता व प्रवर्तन विभाग ने इस मामले में कुछ लोगों के नाम उजागर किए थे। इनमें आंध्रप्रदेश का एक राजनेता राजेंद्र प्रसाद कोनेरू और उसके दो बेटों मधु कोनेरू और प्रदीप कोनेरू और ‘ट्राइमेक्स सेंडस के नाम प्रमुख थे। इन्हें अवैध खनन में अभियुक्त भी बनाया गया। ‘तहलकाÓ ने ट्राइमेक्स ग्रुप के चेन्नई और दुबई के पतों पर प्रश्नों की सूची दो अप्रैल 2018 को भेजी और फिर 13 अप्रैल 2018 को उन्हें स्मरण पत्र भी भेजे।

अंत में कंपनी ने 22 अप्रैल 2018 को ग्रे मैटर कम्युनिकेशनस एंड कंस्लटिंग प्राईवेट लिमिटेड के द्वारा अपना जवाब भेजा। उन्होंने सभी आरोपों का खंडन किया उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी मोनाजाइट को न तो निर्यात किया है और न ही किसी निजी कंपनी, व्यक्ति या चीन को बेचा है। उनके अनुसार परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एइआरबी) एक वैधानिक संस्था है जो सभी तरह की रेडियो एक्टिव सामग्री के बारे में दिशा निर्देश जारी करती रहती है और उस पर पूरा नियंत्रण रखती है। कंपनी ने परमाणु ऊर्जा (रेडिएशन प्रोटेकशन) नियम 2004 के तहत एइआरबी से लाइसेंस लिया है। कंपनी इस नियामक संस्था के सभी निर्देशों का पालन करती है और समय-समय पर काम का निरीक्षण भी किया जाता है लेकिन आज तक किसी भी निरीक्षण में कंपनी द्वारा कोई उल्लंघन किए जाने की बात नहीं आई है। ट्राईमैक्स जिसके दफ्तर दुबई और चैन्नई में हैं, ने तहलका को चेताया कि उनके स्पष्टीकरण के विरुद्ध प्रत्यक्ष  या परोक्ष कोई खबर न छापें। यदि  ऐसा होता है तो यह मानहानि और अदालत  के आदेश के खिलाफ  होगा।

यहां यह जानना भी उचित होगा कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि ‘बीचÓ खनिजों में जो मात्रा ‘मोनाज़ाइटÓ की मिलती है वह कम है और उसे निकालना काफी मंहगा पड़ता है। कंपनी का कहना है कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ‘मोनाज़ाइटÓ ऐसा पदार्थ नहीं है जिसे कहीं भी बेचा जा सकता है और आज की परमाणु तकनालोजी में यह इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकता।

इन गैरकानूनी कृत्यों का पता उस समय लगा जब 2004 में खान और भूगोल विभाग के सहायक निदेशक ने ट्राइमेक्स की ‘लीजÓ को राजस्व व वन विभाग की मंजूरी के बिना लागू कर दिया। जीओ एमएस नंबर31 तिथि 06 फरवरी 2004 के मुताबिक इन दोनों विभागों की मंजूरी इस ‘लीजÓ को लागू करने में अनिवार्य थी। यह पता चला कि ट्राइमेक्स ने 1.3 और 2.0 घन मीटर के ‘लोडरÓ इस्तेमाल किए और खुदाई के लिए0.9 और 1.5 घन मीटर के उपकरण प्रयोग किए और साथ ही दिन-रात खुदाई की। उसने इसके लिए फ्लड लाइट्स का भी इस्तेमाल किया जो अवैध है और सीआरज़ेड के आदेश जे-19011/11/2003-1। -111 का उल्लंघन है। हालांकि यह पर्यावरण और वन विभाग के निर्देशों का भी उललंघन था पर सरकार ने इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

दुबई स्थित इस कंपनी ने इन आरोपों का भी खंडन किया है। उन्होंने कहा सीआरजेड की मंजूरी के मामले में कोई किसी तरह का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। कंपनी का कहना है कि यह आरोप मानहानि की श्रेणी में आता है और अदालत ने मीडिया को मानहानि वाले वक्तव्य दिखाने से रोक दिया है।

इस मामले में राज्य सरकार के अधिकारियों ने भी ऐसा ही किया और सालों तक अवैध खनन चलने दिया। छह मार्च 2013 को भारतीय ब्यूरो ऑफ माइंस, वन, राजस्व और निदेशक खनन और भूगर्भशास्त्र ने एक विस्तृत रिपोर्ट सरकार के प्रधान सचिव (उद्योग व वाणिज्य) को भेजी जिसमें बताया गया कि ‘ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीज ने 387.72 एकड़ ज़मीन पर अवैध खनन किया है। 20 सितंबर 2013 की अपनी रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश सरकार के खनन व भूगर्भशास्त्र के निदेशक ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था, पर आज तक इस पर कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

‘रेडियो एक्टिवÓ और परमाणु खनिजों का अवैध निर्यात खतरनाक है जबकि इसमें गाढ़ा ‘मोनाज़ाइटÓ भी था जिसमें ‘थोरियमÓ होता है जो परमाणु उद्योग में इस्तेमाल किया जाता है। यह देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय है। आंध्र प्रदेश के सतर्कता और प्रवर्तन विभाग और खनन और भूगर्भशास्त्र के अधिकारियों ने ‘ईस्ट-वेस्ट मिनिरल सैंड्स प्राइवेट लिमिटेड (ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस लिमिटेड) के जून, सितंबर और नवंबर 2015 के मामलों की जांच की। ईस्ट वेस्ट मिनिरल सैंड प्राइवेट लिमिटेड (यह लीज़ ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस लिमिटेड से ईस्ट-वेस्ट मिनीरल सेंड प्राइवेट लिमिटेड के नाम बदली गई थी) और आज यह ट्राइमेक्स सैंडस (पी) के नाम पर काम कर रही है। जांच कर्ताओं को पता चला कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने 304.40 एकड़ विवादित ज़मीन पर खनन किया और 1295.63 करोड़ के अवैध खनिज निकाले। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने अपने प्लांट के नीचे 9750 मीट्रिक टन ‘मोनाजाइट़Ó जमा कर रखा है। पर ऐसा लगता है कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने इसे अपने कब्जे में लेने का कोई प्रयास नहीं किया है।

सभी ट्राइमेक्स इंडस्ट्रीस ने अवैध तरीके से 17,58,112 मीट्रिक टन ‘बीच सैंडÓ परमाणु खनिज को निकाला और उसे विभिन्न स्थानों पर भेजा। इसकी कीमत 1295.63 करोड़ बनती है।

इस बारे में ट्राइमेक्स ग्रुप ने कहा कि यह कहना गलत और झूठ है कि कंपनी ने अवैध खनन कर 17,58,112 मीट्रिक टन सामग्री बाहर निकाली जिसकी कीमत 1295.63 करोड़ बनती है और इसमें ‘मोनाजाइटÓशामिल है। सतर्कता विभाग बिना किसी आधार के इन आंकड़ों तक पहुंचा है। ध्यान देने की बात यह है कि सतर्कता विभाग की रिपोर्ट स्वयं अपनी ही बातों का खंडन करती है, और यह आधारहीन, निरर्थक और काल्पनिक आधार पर तैयार की गई है। जब 2005 में हमने आरटीआई के तहत रिपोर्ट की प्रतिलिपि मांगी तो सतर्कता और प्रवर्तन विभाग के आधिकारियों ने हमें रिपोर्ट की प्रतिलिपि नहीं दी थी।

सतर्कता और प्रवर्तन विभाग की महा निदेशक एआर अनुराधा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि खनन और भूगर्भशास्त्र के अधिकारियों ने खनन को जारी रखवाया और खनिजों को 387.72 एकड़ विवादित क्षेत्र से बाहर ले जाने के लिए पर्चियां जारी की। जबकि यह निर्धारित मानकों का उल्लंघन था। श्रीकाकुलम जि़ले के गाड़ा मंडल के गांव वातसावालसा में अधिकारी खनन को रोकने में विफल रहे।

ट्राइमेक्स ने इन आरोपों का खंडन किया। उनका कहना है कि बीच सैंड खनिजों के खनन और परमाणु खनिजों के निर्यात के बारे में दी गई रिपोर्ट झूठी और गलत हैं। उनका कहना है कि खनन से संबंधित कंपनी की सारी कार्रवाईयां कानून और नियमों के तहत हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग जिनकी अपनी रुचियां इसमें हैं वे हमारे खिलाफ सरकार और दूसरी एजेंसियों के पास शिकायतें करते रहते हैं।

महानिदेशक ने राजस्व विभाग के प्रधान सचिव को 1295.63 करोड़ रुपए वसूलने की सिफारिश की थी क्योंकि कंपनी ने राजस्व विभाग से खनन के लिए कोई मंजूरी नहीं ली थी। साथ ही गाड़ा मंडल के तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की भी सिफारिश की थी जिन्होंने विवादित स्थल पर खनन नहीं रोका। इसी रिपोर्ट में आंध्र प्रदेश के प्रधानसचिव से कहा गया था कि वहां खनन बंद कर दें क्योंकि वह नियमों के अनुसार नहीं हो रहा था। इस रिपोर्ट की प्रतिलिपियां प्रधानसचिव राजस्व, प्रधानसचिव उद्योग व वाणिज्य और मुख्य सचिव आंध्र प्रदेश सरकार को भी भेजी गई लेकिन अवैध खनन और ‘मोनाजाइटÓ का निर्यात बदस्तूर जारी रहा। हैरानी की बात है कि आज तक परमाणु ऊर्जा विभाग ने भारी मात्रा में ‘मोनाजाइटÓ के निर्यात के बावजूद आज तक इस विषय में कोई कार्रवाई नही की है। इस खनन से न केवल सरकार को राजस्च का भारी नुकसान हो रहा है बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रहा है।

आंध्र प्रदेश सरकार के सतर्कता व प्रवर्तन विभाग की जांच से खुलासा हुआ है कि ट्राईमेक्स इंडस्ट्रीस ने खनन के लिए निर्धारित योजना के अनुरूप काम नहीं किया और नियमों का उल्लंघन किया है। जो वृक्षारोपण उस क्षेत्र में होना चाहिए था वह भी नहीं किया गया है।

निष्क्रियता

आंध्रप्रदेश के सतर्कता व प्रवर्तन विभाग ने अपनी 11 मार्च 2.016 के रिपोर्ट में ट्राईमेक्स ग्रुप से 1295.63 करोड़ रुपए वापिस लेने की सिफारिश की थी जो उन्होंने 17,58,112 मीट्रिक टन अवैध खनन करके कमाए थे। विभाग ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। खनिज ‘कनसेशनÓ के नियम 22ए का उल्लंघन करने के लिए भी इनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। आंध्रप्रदेश सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि फर्म ने राजस्व विभाग की मंजूरी के बिना श्रीकाकुलम जि़ले के वातसावालसा और गाड़ा गावों मे खनन किया।

अब कंपनी की विदेशों में चल रही कंपनियों की जांच भी ज़रूरी है जहां पर इन खनिजों का निर्यात किया गया। इस कारण इसमें सीबीआई जैसी किसी संस्था से जांच कराने की ज़रूरत है।

ट्राइमेक्स का कहना है कि हाईकोर्ट ने वन विभाग को वतसावालासा गांव के सर्वेक्षण नंबर 216 और 217 में कंपनी की चल रही खनन प्रक्रिया में दखल देने से रोक दिया है। इसके बावजूद 2012 में वन विभाग ने यह कहते हुए कि हाईकोर्ट का आदेश ने उन्हें केवल सर्वेक्षण नंबर 216 और 217 में ही हस्तक्षेप करने से रोका है। इससे परेशान हो कर कंपनी ने हाईकोर्ट में एक और याचिका दाखिल की कि वन विभाग को सभी सर्वेक्षण नंबरों में भी हस्तक्षेप करने से रोका जाए जो कि जीओ के तहत आते हैं। यह क्षेत्र 7.2 वर्ग किलोमीटर बनता है। ये दोनों आदेश आज तक लागू हैं।

इतने सारे सबूत होने के बावजूद इस मामले में सरकारी अफसरों की निष्क्रियता यह संकेत देती है कि ट्राईमेक्स ग्रुप ने कितना दबाव इस्तेमाल किया होगा और इस ग्रुप की सांठगांठ नौकरशाही और राजनीति में शिखर तक होगी। देखना है कि अब राज्य या केंद्र सरकार खुद इसमें कार्रवाई करती है या इसे अदालतों पर छोड़ दिया जाता है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी

भगोड़े आर्थिक अपराधी अध्यादेश- 2018 को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। अब अधिकारियों को बैंकों के साथ धोखाधड़ी और जानबूझ कर ऋण न चुकाने जैसे आर्थिक अपराध कर देश से भागने वाले लोगों की संपत्तियां जब्त करने की कार्रवाई करने में आसानी होगी।

सूत्रों के मुताबिक़ यह अध्यादेश उन आर्थिक अपराधियों के लिए लाया गया जो देश की अदालतों के न्यायाधिकार क्षेत्र से बाहर भाग कर कानूनी प्रक्रिया बच रहे हैं।

‘‘इस अध्यादेश की जरूरत थी क्योंकि अपराध के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू होने की संभावना या कानूनी प्रक्रिया के बीच में ही देश की अदालतों के न्यायाधिकार क्षेत्र से बाहर भागने वालों की संख्या बढ़ी है,’’ एक आधिकारिक बयान में बिना किसी का नाम लिये कहा गया है।

रिपोर्ट्स में कहा गया है क़ी इस अध्यादेश का उद्देश्य भगोडे़ आभूषण कारोबारी नीरव मोदी जैसे व्यक्तियों की धोखाधड़ी से सरकारी खजाने या सकारी बैंकों को हुए नुकसान की त्वरित वसूली की कार्रवाई की कानूनी व्यवस्था करना है। नीरव मोदी और उसके साहयोगियों पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ करीब 14000 करोड़ रुपये के कर्ज की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

इसकी जरूरत बताते हुए बयान में कहा गया कि इस तरह के अपराधियों के भारतीय अदालतों के सामने हाजिर नहीं होने से जांच में बाधाएं आती हैं तथा अदालत का समय बर्बाद होता है। इससे कानून का शासन भी कमजोर होता है।

बयान में कहा गया , ‘‘ कानून में मौजूद दिवानी एवं फौजदारी प्रावधान इस तरह की समस्या से निपटने के लिए पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। ’’

आंधी पानी से 16 की मौत; ताजमहल को नुकसान पहुंचा

जहां ब्रज में बुधवार को आए बवंडर ने चंद मिनटों में ऐसी तबाही मचाई कि 16 लोगों की मृत्यु हो गयी, वहीं दुनिया भर में सातवें अजूबे के तौर पर मशहूर ताजमहल को लगातार आंधी-पानी से नुकसान पहुंचा है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारी बारिश और आंधी की वजह से ताजमहल परिसर में स्थित एक पिलर का हिस्सा टूट कर गिर गया है.

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, ताजमहल के एंट्री गेट के एक पिलर का हिस्सा गिर गया.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में बीते कुछ दिनों से आंधी और बारिश की खबरें हैं.

बुधवार के भयंकर तूफान से शहर से देहात तक सैकड़ों पेड़, होर्डिंग, टीनशेड, खंभे उखड़ गए। कई जगह मकान और दीवार ढह गईं।

आगरा के अछनेरा और डौकी में तीन-तीन जबकि ताजगंज में दो लोगों की मौत हो गई। मथुरा और फिरोजाबाद में चार-चार लोगों की मौत हो गई।

भारत बंद के मद्देनज़र देश के विभिन्न हिस्सों में धारा 144 लागू

जाति आधारित आरक्षण के विरोध में बुलाये गए भारत बंद के मद्देनज़र देश के विभिन्न हिस्सों में निषेधाज्ञा आदेश लगाई गयी है।

भारतीय दंड संहिता की 144 धारा, जो किसी जगह पांच या अधिक लोगों को एकत्र होने से प्रतिबंधित करती है, राजस्थान के जयपुर और भरतपुर, मध्य प्रदेश के भोपाल और उत्तराखंड की नैनीताल में लगाया गया है।

भरतपुर में धारा 144 को 15 अप्रैल तक लगाया गया है और इंटरनेट सेवा भी आज सुबह 9 बजे तक निलंबित रहेगी।

जिला प्रशासन ने जुलूस और धरने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है और चेतावनी दी है कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ “कड़ी कार्रवाई” की जाएगी।

नौकरी और शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ ये राष्ट्रव्यापी बंद कुछ संगठनों द्वारा बुलाया गया है।

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों के लिए एक सलाह जारी की है कि यदि आवश्यक हो, तो उन्हें आवश्यक व्यवस्था करने और निषेध आदेश जारी करने के लिए कहें।

2 अप्रैल को हुई राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दौरान उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बिहार, गुजरात और पंजाब सहित विभिन्न राज्यों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें 10 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

2 अप्रैल को भारत बंद को एससी / एसटी अत्याचार अधिनियम की रोकथाम पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विरोध करने के लिए बुलाया गया था।

दलित निकायों का दावा है कि मार्च 20 के आदेश ने अधिनियम को कमज़ोर किया, जो कि भेदभाव और अत्याचारों के खिलाफ हाशिए समुदायों की रक्षा करता है।

हिमाचल हादसे में २६ स्कूल बच्चों सहित २९ की मौत

हिमाचल प्रदेश के काँगड़ा जिला में सोमवार (९ अप्रैल) की शाम एक स्कूल बस के करीब २०० फुट गहरी खाई में गिर जाने से २६ स्कूल बच्चों सहित २९ लोगों की मौत हो गयी। शाम करीं ४.४५ पर यह हादसा हुआ। हादसा नूरपुर उपमण्डल के मलकवाल गाँव के पास हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार यह हादसा वजीर राम सिंह पठानिया मैमोरियल स्कूल की बस के खाई में गिरने से हुआ। इस बस में में ४० छात्र सवार थे और छुट्टी के बाद घर जा रहे थे। ये सभी बच्चे नजदीकी  के गांवों के थे। हादसे में सात बच्चों ने मौके पर दम तोड़ दिया जबकि अन्य की मौत नूरपुर अस्पताल में हुई। गंभीर रूप से घायल बच्चों को टांडा अस्पताल रेफर किया गया है।
तहलका की जानकारी के अनुसार हादसे में बस चालक मदन लाल (67) के अलावा दो शिक्षकों की भी  मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंचे और राहत और बचाव कार्य शुरू किया। स्थानीय लोगों ने राहत में मदद की और बस के नीचे दबे बच्चों को अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलते ही नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया, एसडीएम आबिद हुसैन सादिक के अलावा डीसी कांगड़ा  संदीप कुमार और एसपी कांगड़ा संतोष पटियाल अस्पताल मौके पर पहुंचे।
मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने बस हादसे पर शोक जताते हुए इसकी न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा उन्होंने खाद्य और आपूर्ति मंत्री किशन कपूर को घटनास्थल पर भेजा है। सीएम ने कांगड़ा जिला प्रशासन को राहत और बचाव कार्य मे तेजी लाने को कहा है और पीड़ित परिवारों को हर सम्भव सहायता का भी भरोसा दिलाया है। मंडी में चल रही भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में बस हादसे पर दो मिनट का मौन रखा गया।
इस दिल दहला देने वाले हादसे के वाद पूरे इलाके में शोक फैला हुआ है। मासूमों के अंग हादसा स्थल पर बिखरे पड़े थे और वहां परिजनों की चीख-पुकार गूँज रही थी। नूरपुर उपमंडल के चुवाड़ी मार्ग में हुए इस हादसे ने 26 मासूमों की जान ले ली जबकि दो शिक्षकों सहित बस चालक की भी मौत हो गई।  हादसे में 29 की जान गई है जबकि कुछ अभी भी घायल हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है। यह सभी बजीर राम सिंह पठानिया मैमोरियल स्कूल से संबंधित थे।
हादसे पर राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल और वीरभद्र सिंह ने गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने कहा कि यह एक दुःखद घटना है, जिसमें मासूम स्कूली बच्चों की जानें गई हैं। कांग्रेस विधायक दाल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी हादसे पर शोक जताया है।

कर्नाटक चुनावः बीजेपी ने जारी की 72 उम्मीदवारों की पहली सूची

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी ) ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 72 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है।

बीजेपी ने मुख्यमंत्री उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा को शिकारीपुरा से चुनाव लड़ेंगे।

दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद उम्मीदवारों की सूची जारी की गई है।
पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के साथ पार्टी के कई और नेता भी शामिल रहे।

चुनाव में 224 सीटों वाली विधानसभा के लिए 150 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर उतर रही भाजपा ने प्रधानमंत्री और अमित शाह समेत अपने सभी स्टार प्रचारकों को कर्नाटक में प्रचार में लगाया है।

12 मई को कर्नाटक में एक ही चरण में मतदान होंगे और 15 मई को नतीजे आएंगे। कर्नाटक में 56 हजार पोलिंग स्‍टेशन होंगे।

हिंदी का सम्मान कभी कम न होगा: हिमानी

हालांकि आज किसी व्यक्ति की काबिलियत उसके अंग्रेजी ज्ञान से आंकी जाती है, तब भी हिंदी में अच्छा साहित्य लिखा और पढ़ा जा रहा है, लेखिका एम जोशी हिमानी ने तहलका को बताया। उत्तराखंड में जन्मी हिमानी हिंदी कहानीकारों में आज जाना माना नाम है। वर्ष 1991 में उनकी पहली कहानी अधिकार एक साप्ताहिक में छपी थी हंसा आएगी ज़रूर और पिनड्रॉप साइलेंस जैसे संग्रह प्रकाशित होने तक हिमानी के लेखन में एक बात बारंबार मिलती है वह है उनके पात्रों का सामान्य जीवन और रोज़मर्रा की जि़न्दगी से उनका जूझना। ‘सभी कहानियों के पात्र तथा घटनायें मेरे आसपास की होती हैं,’ हिमानी ने कहा। अब्दुल वासे से हुई लेखिका की बातचीत के कुछ अंश:

आपको लिखने का शौक कब और कैसे हुआ?
बचपन से मैंने अपने घर में ‘कल्याण’ पत्रिका को आते देखा था। मैं उसके रंगीन चित्रों के प्रति अत्यंत आकर्षित रहती थी। मेरे जीवन में ‘कल्याण’ मासिक तथा वार्षिक ‘कल्याण’ ग्रन्थ ने पुस्तकों के प्रति जिज्ञासा तथा प्रेम को बढ़ाया। मैं पन्द्रह वर्ष की अवस्था में हाईस्कूल करने के बाद गांव से लखनऊ आ गई थी। यहां के खुले वातावरण व मुझे मिली स्वतंत्रता ने मुझे पुस्तकों का दिवाना बना दिया। अपने जीवन में सबसे पहले मैंने शरत्चन्द्र का उपन्यास ‘देवदास’ पढ़ा था।
लेखन की तरफ धीरे धीरे मेरा झुकाव बढ़ा। कुछ बाल कहानियां लिखीं जो स्वतंत्र भारत, नवजीवन सरीखे पत्रों के रविवारीय परिशिष्टों में छपीं।
वर्ष 1991 में मेरी पहली कहानी अधिकार साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपी। बाद में यह कहानी उस वर्ष की श्रेष्ठ कहानी संग्रह में छपने के लिए चुनी गई और प्रकाशित हुई।

कहा जा रहा है कि पिन ड्राप साइलेंस नामक कहानियों का संग्रह आपको मंझी हुई कहानीकार के रूप में पेश करता है। इन नौ कहानियों में आपको कौन सी कहानी सबसे ज़्यादा अच्छी लगती है?
पिनड्राप साइलेंस की सारी कहानियां मेरे दिल के करीब हैं इसलिए किसी एक को सबसे अच्छी कहना मेरे लिये नामुमकिन है। इन सभी कहानियों के पात्र तथा घटनायें मेरे आसपास की हैं।
कहानी गियर वाली साइकिल के पात्र मौर्या साहब तो मेरे सीनियर रहे हैं। उन जैसा व्यक्तित्व मैंने जिंदगी में कहीं और नहीं देखा। इसलिए मुझे उस कहानी को लिखने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ी। मौर्या जी को मैं याद करती रही और लिखती रही ज्यों का त्यों। मौर्या जी के अनुरोध पर मुझे पात्र का नाम भी ज्यों का त्यों रखना पड़ा। मौर्या जी रिटायर हो गये हैं। जब भी मिलते हैं कहते हैं- आपने मुझे अमर कर दिया।
पिछले साल मैं लन्दन गई थी। वहां मेरे मित्र बीबीसी के पूर्व प्रोड्यूसर, एंकर ललित मोहन जोशी ने ‘गियर वाली साईकिलÓ का पाठ भी मुझसे कराया था। मौर्या जी वर्षों पहले सूचना विभाग में जोशी के भी सहयोगी रह चुके थे।
मिलाई, अधिकार, आफिस का आखिरी दिन, राबर्ट तुम कहां, हे रामावतार। .. सभी कहानियों के पात्र मैंने अपने इर्द गिर्द से उठाये हैं इसलिए किसे नंबर एक पर रखूं?

हंसा आएगी ज़रूर लिखने के पीछे आपकी क्या मंशा थी? कहानी और इसके पात्र काल्पनिक हैं या आपके जीवन पर आधारित है?
हंसा का चरित्र कोई एक पात्र नहीं है। कई पात्रों का निचोड़ है। हंसा आयेगी जरूर मेरे जीवन की कहानी कतई नहीं है। हां उसे प्रामाणिक बनाने के लिए मैंने उसे आत्मकथात्मक शैली में जरूर लिखा है।
मैं भारतीय थल सेना के सैनिक रहे अपने पिता की जन्मजन्मातर तक ऋणी रहूंगी, जिन्होंने मुझे कालेज में पढऩे का मौका दिया, मर्दों के बीच में जाकर नौकरी करने का अवसर दिया, जिस कारण मैं अपने नज़रिए से इस दुनिया को देख पाई और खुद का और जरूरत पडऩे पर दूसरों का भी संबल बन पाई।
मैं अपने खानदान की पहली स्त्री हूं जो शासकीय सेवा में है। यह संभव हुआ, मेरे माता पिता के त्याग और प्रोत्साहन के कारण।
मैंने हमेशा महसूस किया औरतों का शोषण कई प्रकार से और कई स्तरों पर होता रहा है और शायद होता रहेगा। आज कई कानून बन गये हैं, समाज में जागरूकता आई है फिर भी हर तरह स्त्री ही दु:ख भोगती है।
यह उपन्यास मैंने अपने बालपन में देखी सच्ची घटना से प्रेरित होकर लिखा है। बरबाद हो चुके रजवाड़ा परिवार का संभ्रान्त व्यक्ति अपने पुत्र की ग़ैरमौजूदगी में अपनी नवविवाहिता पुत्रवधू से संबंध बनाता है जिसकी परिणिति वधू के गर्भवती होने के रूप में होती है। राज खुलता है। पंचों के सामने बहू सच बता देती है। उसके मायके वालों को बुलाया जाता है। वे बेटी को ले जाने से साफ इंकार कर देते हैं।
अंतत: उस सत्रह अठारह साल की नववधू को जबर्दस्ती नारी निकेतन भेज दिया जाता है जहां वह पुत्र को जन्म देती है। बाद में कुछ वर्ष बाद एक सरदार ट्रक ड्राइवर उसको ब्याह कर पंजाब लेकर चला जाता है। फिर क्या हुआ उसके साथ कोई नहीं जानता।
मैं आज भी उस औरत की चीत्कार को महसूस करती हूं जब वह रो रोकर घर से न निकाले जाने की गुहार लगा रही थी। वह संभ्रान्त व्यक्ति कुछ समय के सामाजिक बहिष्कार के बाद भी हमेशा अपने घर में रहा। उसके पुत्र तक ने अपने पिता से कभी कोई प्रश्र नहीं किया।

कितना उदार है हमारा समाज औरतों के प्रति?
आज भी समाज में तमाम हंसाओं का शोषण बदस्तूर जारी है। चाहे वह बाल श्रमिक के रूप में किसी घर में काम कर रही हों। या अपनों के बीच में ही क्यों न हों। क्या किसी की निगाहों में पाकीजग़ी मिलती है उनको?
यदि औरतें संवेदनशील बन जायें, दमन का शिकार की खिल्ली उड़ाने के बजाय उसको हेमा की तरह नैतिक, मानसिक, भावनात्मक संबल भी दे सकें तो समाज में बहुत सारी घटनायें होने से रुक जाएंगी।
उपन्यास में एक उपकथा भागीरथी की है। यह घटना है मेरी नानी के परिवार की। आज भी वहां पर भूत रूप में भागीरथी आमा की पूजा की जाती है। आज हम विकास के ऊंचे पायदान की ओर बढ़ रहे हैं। बेशक शहरी औरतों का जीवन बदला है पर ग्रामीण स्त्री का जीवन बहुत नहीं बदला है। आज भी कई भागीरथियां प्रसव के दौरान मौत के मुंह में चली जाती हैं। हमारे गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है गांव स्तर पर।

आज अंग्रेज़ी पर जब ज़्यादा ज़ोर है आप हिंदी लेखन को कितना लोकप्रिय और सफल मानती हैं?
यह सही है कि आज हिंदी के पाठक बहुत कम रह गये हैं। लेखकों का बुरा हाल है। कोई लेखक केवल लेखन से जीविकोपार्जन नहीं कर सकता है अंग्रेजी का हर जगह बोलबाला है। इस सबके बावजूद हिंदी में अच्छा साहित्य लिखा जा रहा है। हिंदी के जो पाठक हैं वे गुणी पाठक हैं। आज सोशल मीडिया में भी हिंदी साहित्य का काफी प्रचार किया जा रहा है। हिंदी का सम्मान कभी कम न होगा।

नए हिंदी लेखकों को लोकप्रिय और सफल होने के लिये किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
नये उभरते लेखकों को मेरा यही कहना है कि जीवन में अनुभव आने दीजिए। चुनौतियों का सामना कीजिए। खूब लिखिए।

शिक्षा केंद्रों की स्वायत्तता या बाजारीकरण

केंद्र की भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार ने देश के 62 माने हुए शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता का तमगा देते हुए इनकी अचल संपत्तियों के लिहाज से अब इनका पूरी तौर पर निजीकरण करने का फैसला लिया है। हालांकि स्वायत्तता का मतलब यह नहीं है कि अब इनमें ज़्यादा वैचारिक आज़ादी होगी, शोध के लिए अपार फंड होगा और राज्य व सरकारी नियंत्रण कम होगा।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह घोषणा करके यह ज़रूर जता दिया कि बाधाओं के बाद भी वे नीतियां अमल में ला सकते हैं। अब जिन्हें पढऩा है वे पैसा खर्च करें। मुफ्त में कुछ नहीं।

विश्वविद्यालयों में स्वायत्तता होगी लेकिन एकेडेमिक आज़ादी का अभाव रहेगा। सरकारी शिक्षण संस्थानों में पहले संवैधानिक आदेशों के तहत शिक्षण व्यवस्था थी, अच्छे नागारिक बनाने का संकल्प था, आपस में खुला विवाद होता था। छात्र-छात्राओं को कम लागत में अच्छी शिक्षा सुलभ होती थी।

लेकिन अब स्वायत्त शिक्षण संस्थान के छात्र-छात्राओं को देश, धर्म, संस्कृति से लगाव रखना होगा। बाजार की ज़रूरतों के अनुसार ही खुद को वे योग्य बनाएंगे। एकेडेमिक ऑटोनॉमी के तहत ऐसे शोधों की संभावना बढ़ेगी जैसे सरकार की नई नीतियां और उनका प्रभाव या नई सरकारी नीतियों का बाजार पर असर आदि जैसे ढेरों विषय। यानी अब कारपोरेट उद्योग और एकेडेमिक विभागों में ज़्यादा तालमेल होगा। सही तौर पर स्वायत्तशासी यूनिवर्सिटी वह होगी जहां छात्र और अध्यापक देश विरोधी न हों सरकारी नीतियों का विरोध न करते हों और देशभक्ति संबंधी नीतियों को अमल में लाएं।

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर ने 20 मार्च को स्वायत्तता का ऐतिहासिक घोषणा पत्र जारी किया। इसके पहले तकरीबन एक महीने पहले गजट नोटिफिकेशन किया गया था। जिस का शीर्षक था यूजीसी कैटागराइजेशन ऑफ यूनिवर्सिटीज फार ग्रांट ऑफ ग्रेडेड ऑटोनॉमी रेगुलेशंस 2018और कन्फर्मेंट ऑफ ऑटोनॉमस स्टेट ऑफ कॉलेजेज रेगुलेशंस 2012 इन रेगुलेशंस की तुलना में नई स्वायत्तता की बात कहीं अलग है। रेगुलेशंस का ज़ोर ऐसी नीति पर है जिसके तहत गुणात्मक शिक्षा में फंड जाएं।

जिन 62 विश्वविद्यालयों को स्वायत्त बनाने की बात की जा रही है उनमें जेएनयू, बीएचयू, और एएमयू प्रमुख हैं। इन सभी का परिसर काफी लंबा-चौड़ा है जिस पर अर्से से बाजार की निगाहें हैं। स्वायत्तता शब्द के बहाने देश की जनता को भ्रम में रखने की पहल केंद्र सरकार ने की है। मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षण संस्थानों को स्वायत्तता देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। इन्हें स्वायत्तता प्रदान करना इनकी अर्थव्यवस्था को उदार बनाना है। इन्हें फिर शिक्षा में अपना स्तर और ऊँचा करने के लिए यूजीसी(यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) का मुंह नहीं देखना होगा।

उनके अनुसार इन 62 विश्वविद्यालयों को कोई कोर्स शुरू करने ,नया विभाग खोलने , कोर्स की फीस तय करने और ऑफ लाइन परिसर बनाने के लिए किसी अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी। ये विदेशी विश्वविद्यालयों से समझौता (एमओयू) करके विदेश से अनुभवी प्राध्यापकों को ऊँचा वेतन देते हुए बुला सकते हैं। विदेशी छात्रों को अपने यहां प्रवेश दे सकते हैं। वेतन आयोग की सिफारिशें भी इनके लिए बहुत महत्व की नहीं होंगी। यूजीसी इनका निरीक्षण और परिक्षण भी नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि संसद में पास कानून के जरिए इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ मैनेजमेंट को ऐसी सुविधा पहले से ही हासिल है।

भारत सरकार चाहती है कि देश के बीस शिक्षण संस्थान तेजी से खुद को विकसित करें जिससे विश्वस्तर पर वे गिने भी जाएं। सरकार ने राज्यों में पांच केंद्रीय विश्व विश्वविद्यालय जेएनयू (हैदराबाद यूनिवर्सिटी) जाधवपुर यूनिवर्सिटी (कोलकाता), यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (दिल्ली), सावित्री बाई फुले (पुणे) विश्वविद्यालय इन्हें सरकार ने शिक्षण विश्वविद्यालयों और संस्थानों को नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन कौंसिल (एनएएसी) की रैकिंग के आधार पर चुने हैं। जिन्हें 305 और उससे ज़्यादा पहली कैटेगरी में स्थान हासिल हुए उन्हें पूर्ण स्वायत्तता दी गई। जिन विश्वविद्यालयों का नतीजा 3.5 से कम रहा उन्हें दूसरी कैटेगरी में रखा गया और उन्हें आंशिक स्वायत्तता दी गई। कुछ मुद्दों पर इन्हें जरूर अपनी गतिविधियों में यूजीसी से अनुमति लेनी होगी और विदेशी विश्वविद्यालयों से कांट्रेक्ट की पहल करनी होगी। इनमें मध्यप्रदेश के सागर में डा. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय है जिसके पास अच्छा बड़ा परिसर है और जहां अपनी स्थापना के समय से ही कई ऐसे विषय पढ़ाए जाते रहे हैं,जो तब देश के किसी और विश्वविद्यालय में पढ़ाए ही नहीं जाते थे।

सूची में शामिल निजी विश्वविद्यालयों में ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी सोनीपत, पंडित दीन दयाल पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी गांधीनगर, वेल्लोर इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी और मणिपाल एकेडेमी भी है।

सरकार ने आठ कॉलेजों को भी स्वायत्तता दी है। इनमें यशवंत राव चव्हाण इंस्टीच्यूट ऑफ साइंस, सतारा, श्री शिव सुब्रमण्यम नाडार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, कला-वक्कम, जी नारायम्मा इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी साइंस, हैदराबाद, विवेकानंद कॉलेज, कोल्हापुर, श्री वसावी इंजीनियरिंग कॉलेज पश्चिम गोदावरी, बोनम वेंकट चलमाय्या इंजीनियरिंग कॉलेज पूर्व गोदावरी, जयहिंद कॉलेज ऑफ कामर्स, और श्री विल पार्ल कलावानी मंडल मिठिबाई कॉलेज ऑफ आर्ट्स मुंबई हैं। ये तमाम कॉलेज अपने कोर्स तैयार करेंगे, परीक्षा लेंगे और छात्रों की योग्यता तय करेंगे । लेकिन ये डिग्री नहीं देंगे। यह काम विश्वविद्यालय करेंगे।

अखिल भारतीय तौर पर दो कैटेगरी में जांचे परखे गए विश्वविद्यालय में पहली कैटेगरी में दो विश्वविद्यालय और दूसरी कैटेगरी में तीन केंद्रीय विश्वविद्यालय यानी कुल पांच केंद्रीय विश्वविद्यालय हुए। राज्य विश्वविद्यालयों में पहली कैटेगरी में 12,दूसरी कैटेगरी में नौ यानी 21 राज्य विश्वविद्यालय हुए। इसी तरह डीम्ड विश्वविद्यालयों की पहली कैटेगरी में 11, दूसरी कैटेगरी में 13 यानी कुल 24 डीम्ड विश्वविद्यालय हुए। निजी विश्वविद्यालयों में दूसरी कैटेगरी में दो ही चुने गए। ऑटोनॉमस कालेजों में कोई भी पहली और दूसरी कैटेगरी में नहीं आ पाया। लेकिन आठ को सूची में रखा गया। इस तरह 60 शिक्षण संस्थान स्वायत्तता के क्षेत्र में अब चुन लिए गए हैं। जहां अब शिक्षण महंगा ज़रूर हो जाएगा।