Home Blog Page 127

भाजपा में विरोध के स्वर क्यों होने लगे मुखर ?

इस बार जैसे ही लोकसभा चुनाव में भाजपा अल्पमत में आयी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का न सिर्फ़ जलवा कम हो गया, बल्कि भाजपा में ही उनका विरोध शुरू हो गया है। पिछले 10 वर्षों में या यह कहें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के केंद्र सरकार में पिछले दो कार्यकालों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि भाजपा में किसी नेता या मंत्री ने दबी ज़ुबान से भी उनकी पीठ के पीछे भी उनके ख़िलाफ़ कुछ भी बोलने, यहाँ तक कि उनके ख़िलाफ़ सोचने की भी कोशिश की हो। बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा यह रहा है कि उनका फोन भी किसी मंत्री या नेता को चला जाता था, तो कुर्सी से उठ खड़ा होता था और ऐसे बात करता था, जैसे एक डरा हुआ बच्चा अपने हेड मास्टर के सामने बड़े अदब से सोच-समझकर बोलता है। प्रधानमंत्री मोदी का ही क्या, गृह मंत्री अमित शाह का भी अमूमन यही जलवा रहा है। लेकिन जैसे ही केंद्र में बैसाखियों के सहारे मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनी और भाजपा बहुमत से 32 सीटें कम 240 सीटों पर सिमटी, तबसे कई राज्यों से प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री के ख़िलाफ़ भाजपा के ही कई नेता, मंत्री, सांसद और विधायक बोलने लगे हैं। बोलने के अलावा बाक़ायदा वो चिट्ठियाँ लिखकर उनकी ख़िलाफ़त कर रहे हैं। इस्तीफ़ों का दौर शुरू हो गया है। झारखण्ड में गुणानंद महतो ने भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता पद से इस्तीफ़ा दे दिया, तो वहीं राजस्थान में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सी.पी. जोशी का इस्तीफ़ा हो सकता है।

दरअसल जब सरसंघचालक मोहन भागवत ने केंद्र की मोदी सरकार को, या यह कहें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जब कई मामलों को लेकर नसीहत दी, तभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नाराज़ चल रहे उन्हीं की पार्टी के नेता उनके ख़िलाफ़ दबी ज़ुबान से बोलने लगे थे। लेकिन जैसे ही भाजपा केंद्र में पूर्ण बहुमत न लाकर कमज़ोर हुई और प्रधानमंत्री को अपने बलबूते पर कुछ बाहरी पार्टियों को एनडीए का हिस्सा बनाकर सरकार बनाने के लिए सहयोग लेना पड़ा, तो इस विरोध के दबे स्वर मुखर होकर बाहर तक सुनायी देने लगे। अब स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री मोदी उत्तर प्रदेश में करारी हार को पचा नहीं पा रहे हैं और चाहकर भी अपने चेहरे पर लड़े गये और अपने ख़ासमख़ास गृहमंत्री अमित शाह द्वारा टिकट बँटवारे के चलते लोकसभा चुनाव में बुरी तरह पिछड़ने, जिसमें ख़ासतौर पर उत्तर प्रदेश से उम्मीदों के मुताबिक परिणाम नहीं आया, इसका ठीकरा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिर पर नहीं फोड़ पा रहे हैं। और न ही उन्हें इस हार का ज़िम्मेदार ठहराते हुए हटा पा रहे हैं। हालाँकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाने की ख़बरों को केंद्र में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार बनते ही ख़ूब हवा मिली और यह हवा यूँ ही नहीं चली। कथित रूप से चर्चा तो यहाँ तक है कि इसके पीछे भाजपा के तथाकथित चाणक्य के इशारे के तहत बाक़ायदा उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह और दूसरे दलों से आयातित तमाम नेताओं, विधायकों और मंत्रियों की लॉबिंग शुरू हुई थी। इनमें से उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा से लगातार मिल रहे थे, तो वहीं उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष को बुलाकर ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक की।

ज़ाहिर है कि अगर मुख्यमंत्री योगी की आज हिंदुत्ववादी छवि और राष्ट्रीय पहचान नहीं होती और उनके समर्थकों की संख्या करोड़ों में नहीं होती, तो उनका आज मुख्यमंत्री पद पर बने रहना भी नामुमकिन ही था। लेकिन जब उत्तर प्रदेश से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ विरोध की आवाज़ें आने लगीं, तो फिर केशव प्रसाद मौर्य को वापस उत्तर प्रदेश भेज दिया गया और पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की तरफ़ से सफ़ाई दी गयी कि उत्तर प्रदेश में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। विपक्ष इस तरह की अफ़वाहें फैलाकर भाजपा को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन उससे पहले केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बग़ैर यह तक कह दिया कि सरकार से संगठन बड़ा होता है।

बहरहाल, इस अंदरूनी ख़िलाफ़त और वाद-विवाद को बढ़ता देख नौबत यहाँ तक आ पहुँची कि आलाकमान को उत्तर प्रदेश के नेताओं को यह हिदायत देनी पड़ी कि वे सार्वजनिक मंचों पर पार्टी और नेताओं के ख़िलाफ़ न बोलें और अगर कुछ कहना ही है, तो पार्टी के भीतर ही अपनी समस्याओं को रखें। उत्तर प्रदेश में मुख़ालिफ़त के चलते यह भी नौबत आ गयी कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को उत्तर प्रदेश में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में ख़ुद शामिल होकर नाराज़ पार्टी नेताओं को शान्त करने की कोशिश करनी पड़ी। लेकिन इसके बावजूद भी केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ यानी उप मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हो सके। अंदर की ख़बरें तो यहाँ तक हैं कि उत्तर प्रदेश में हार की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जितनी भी बैठकें बुलायीं, उनमें केशव प्रसाद मौर्य नदारद रहे। न ही उन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार की हार की ज़िम्मेदारी अपने सिर पर ली। अब वह कह रहे हैं कि पूरा प्रदेश उनका है और उप चुनाव में फूलपुर सीट की ज़िम्मेदारी शायद उन्हें सौंपी जाए। माना जा रहा है कि अगर उत्तर प्रदेश की 10 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहता है, तब तो उत्तर प्रदेश में बदलाव नहीं होगा; लेकिन अगर इसमें भी भाजपा पिछड़ी, तो उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुछ फेरबदल करेंगे। हालाँकि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में अच्छा परिणाम न आने के बाद उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों में जीत के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमर कस ली है और कोई बड़ी बात नहीं कि आगामी चुनावों में टिकट वितरण में उनकी बात पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को माननी पड़े। इसके संकेत यहीं से मिल रहे हैं कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने 30 मंत्रियों को बुलाकर बैठक करके 10 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर गुप्त रणनीति बनायी है। हालाँकि इस बैठक में भी उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री यानी केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक ने हिस्सा नहीं लिया।

बहरहाल, फ़िलहाल तो भाजपा के उत्तर प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं; लेकिन कहा जा रहा है कि आने वाले समय में संगठनात्मक स्तर पर बड़े फेरबदल हो सकते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी भी उत्तर प्रदेश में मिली बड़ी हार को पचा नहीं पा रहे हैं। कथित सूत्रों ने बताया कि पिछले दिनों पाँच राज्यों की 13 विधानसभा सीटों में से 11 सीटें हारने के बाद वह और भी बेचैन हो गये हैं और अपने स्तर पर उत्तर प्रदेश में होने वाले उपचुनाव पर नज़र रखे हुए हैं। हो सकता है कि उपचुनाव की तारीख़ चुनाव आयोग के घोषित करने के बाद वह इस उपचुनाव में अपने दिशा-निर्देश जारी करें या उनकी मज़ीर् के हिसाब से गृह मंत्री अमित शाह या पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा दिशा-निर्देश जारी करें। और अगर उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा, तो यह भी हो सकता है कि प्रधानमंत्री मोदी यहाँ कुछ फेरबदल करने की कोशिश करें। कुछ लोगों का मानना यह है कि लोकसभा में ज़्यादातर सीटें हारने की ज़िम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी की ही क्यों हो? जब उनके हिसाब से टिकट तक नहीं बाँटे गये और चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ा गया।

इतना ही नहीं, ख़ुद उत्तर प्रदेश के बनारस से तीसरी बार चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा पहुँचे हैं। इस प्रकार से उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी उत्तर प्रदेश में जनाधार बनाये रखने की भी बनती है। दूसरी बात, ख़ाली उत्तर प्रदेश को लोकसभा में हार के लिए ज़िम्मेदार ही क्यों माना जाए? क्योंकि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई दूसरे राज्यों में भी भाजपा का प्रदर्शन कौन-सा अच्छा रहा? रही विरोध की बात, तो उत्तर प्रदेश ही नहीं, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तराखण्ड और हिमाचल से भी पार्टी के भीतर से ही मुख़ालिफ़त होने लगी है। उसका क्या? यह मुख़ालिफ़त सिर्फ़ लोकसभा चुनाव में मनचाहा परिणाम न आने की वजह से नहीं है, बल्कि पिछले कुछ ही वर्षों में कई भाजपा नेताओं को उनके ओहदों से हटाने से लेकर बाहरियों को पार्टी में लाकर अचानक बड़े पदों पर बैठाने और कार्यकर्ताओं की अनदेखी करने से भी विरोध हो रहा है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई प्रमुख नेता एक्शन मोड में आ गये हैं और विधायकों, सांसदों, मंत्रियों को आदेश हुआ है कि वे कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करें। इससे शायद स्थिति सुधर जाए; लेकिन पार्टी के भीतर उठने वाले विरोध को कैसे शान्त किया जाएगा।

मसलन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात भले ही दोनों ही उप मुख्यमंत्री नहीं सुन रहे हो; लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता योगी को आज भी सिर-माथे पर बिठाये हुए है। मुख्यमंत्री योगी का सात साल का बेदाग़ चेहरा और प्रदेश की क़ानून व्यवस्था ही उनकी असली ताक़त है। हालाँकि भाजपा में लगातार उठ रही मुख़ालिफ़त और फूट से प्रधानमंत्री मोदी ज़रूर चिन्तित होंगे; लेकिन उन्हें इसका समाधान ढूँढना होगा और सभी को मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करना होगा।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

फिजी के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली  :  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को फिजी का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है। यह राष्ट्रपति के नेतृत्व के साथ-साथ भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक लोगों के आपसी संबंधों की भी पहचान है।

पीएम मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, राष्ट्रपति को फिजी के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किए जाने पर बधाई। यह प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत गर्व और खुशी का क्षण है। यह राष्ट्रपति के नेतृत्व के साथ-साथ भारत और फिजी के बीच ऐतिहासिक लोगों के आपसी संबंधों की भी पहचान है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को फिजी का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को फिजी के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किए जाने पर मेरी हार्दिक बधाई। यह सम्मान न केवल विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाता है, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत करता है, जो मानवता की भलाई के लिए हमारी साझेदारी की पुष्टि करता है।

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को फिजी के राष्ट्रपति रातू विलियामे मैवलीली कटोनिवेरे द्वारा फिजी के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई। भारत और फिजी के बीच आपसी सम्मान, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित दीर्घकालिक संबंध हैं। यह सम्मान हमारी मजबूत रणनीतिक साझेदारी और हमारे वैश्विक साझेदारों के साथ मजबूत संबंध बनाने के राष्ट्रपति के प्रयासों को दर्शाता है। बता दें कि इसी साल प्रधानमंत्री मोदी को भी फिजी के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया था।

पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट ने वर्ल्ड चैम्प‍ियन को धोया

हिसार :  भारत की महिला रेसलर विनेश फोगाट पेरिस ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं। प्री क्वार्टर फाइनल में उन्होंने विश्व चैंपियन जापान की युई सुसाकी को 3-2 से हराया। उसके बाद क्वार्टर फाइनल में यूक्रेन की ओकसाना लिवाच को हराया। विनेश का यह तीसरा ओलंपिक है और देश को उनसे गोल्ड की उम्मीद होगी। इस मैच में ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट यूई सुसाकी पहले आगे चल रही थीं, लेकिन अंतिम 10 सेकेंड में विनेश ने पूरी बाजी पलट दी।

सुसाकी मौजूदा विश्व चैंपियन और टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता हैं। फोगाट पहले राउंड में 0-1 से पीछे चल रही थी लेकिन अंतिम 30 सेकंड में 2 पॉइंट के साथ स्थिति को अपने पक्ष में कर लिया। भारतीय खिलाड़ी अधिकांश मैच में रक्षात्मक थी लेकिन बाद के चरण में उसने चैंप-डी-मार्स एरेना में जीत हासिल करने के लिए खुद को पूरी तरह से लागू किया।

हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी के मामले को लेकर एकजुट हुए विपक्षी सांसद

नई दिल्ली : कांग्रेस समेत इंडिया ब्लॉक के दलों ने हेल्थ इंश्योरेंस में जीएसटी बढ़ाए जाने के खिलाफ मंगलवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा इस मुद्दे पर सरकार को पत्र लिखे जाने का भी उल्लेख किया।

विपक्षी दलों के सांसद संसद परिसर में मकर द्वार के बाहर एकत्र हुए और अपना विरोध जताया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल रहे।

विरोध कर रहे कांग्रेस सांसदों का कहना था कि सरकार ने हेल्थ इंश्योरेंस पर जो जीएसटी लगाया है उससे सामान्य जन काफी प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसदों ने इस दौरान कहा कि स्वयं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इस विषय पर पत्र लिख चुके हैं।

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि न केवल विपक्ष बल्कि सरकार के अंदर भी हेल्थ इंश्योरेंस पर जीएसटी की दरों को लेकर विरोध है। विपक्षी सांसद महुआ माजी ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर सरकार ने बिना कुछ सोचे समझे तानाशाही रवैया अपनाते हुए 18 पर्सेंट जीएसटी लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि लोगों की सुविधा और असुविधा को ध्यान में न रखते हुए मनमाने तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं। पहले नोटबंदी कर दी गई, जीएसटी लागू किया दिया। यदि हेल्थ इंश्योरेंस में 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जाएगा तो इसका सबसे अधिक प्रभाव मध्यम वर्ग पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस महंगा होने पर लोग इंश्योरेंस खरीदना बंद कर देंगे। वे अपने पैसों को किसी दूसरी जगह जैसे कि सोना, संपत्ति आदि में निवेश करेंगे ताकि बीमार पड़ने पर इस संपत्ति को बेचकर अपना उपचार करवा सकें।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने हेल्थ इंश्योरेंस में जीएसटी की दरों के विरोध में संसद परिसर में यह प्रदर्शन किया। कांग्रेस पार्टी का यह विरोध सदन के अंदर भी जारी रहने वाला है। हालांकि सदन के अंदर वह दूसरे मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराएगी।

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि वह केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएगी। कांग्रेस ने कहा है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने वक्तव्यों से राज्यसभा को गुमराह किया है।

कांग्रेस का कहना है कि देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का ट्रैक रिकॉर्ड रायसेन और मंदसौर में किसानों के खिलाफ खराब रहा है और अब वह देश के कृषि मंत्री बन गए हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा देने के बाद देश छोड़ा, PM आवास में घूसे लोग

ढाका : बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है और देश में अब एक अंतरिम सरकार का गठन होगा। देश के सेना प्रमुख जनरल वकर-उज-जमान ने सोमवार को ये घोषणा की।

देश के नाम एक टेलीविजन संबोधन में, बांग्लादेश सेना प्रमुख ने नागरिकों से सेना पर भरोसा बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि रक्षा बल आने वाले दिनों में शांति सुनिश्चित करेंगे। इससे पहले, कई रिपोर्टों से संकेत मिले कि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के ढाका में प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास में घुसने के बाद हसीना “सुरक्षित स्थान” के लिए रवाना हो गईं। जानकारी के अनुसार शेख हसीना ने किसी दूसरे देश रवाना हो गई है।

पंजाब नेशनल बैंक से दिन दहाड़े 21 लाख की लूट

पटना : बिहार में विपक्ष कानून व्यवस्था को लेकर लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। इस बीच, सोमवार को अपराधियों ने पटना के दुल्हिन बाजार स्थित एक बैंक को निशाना बनाया और करीब 21 लाख रुपए लूटकर फरार हो गए। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सोमवार को दुल्हिन बाजार स्थित पंजाब नेशनल बैंक खुलने के कुछ ही देर के बाद चार-पांच की संख्या में अपराधी बैंक में घुस गए और हथियार के बल पर बैंक के कर्मचारियों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद ये लोग वहां से करीब 21 लाख रुपए लूटकर फरार हो गए।

पटना (वेस्ट) के पुलिस अधीक्षक अभिनव धीमन ने बताया कि बैंक मैनेजर से मिली सूचना के मुताबिक अब तक 21 लाख रुपए के लूट की जानकारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि श्वान दस्ते और एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है।

उन्होंने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज को खंगाला जा रहा है। लुटेरे भागने के क्रम में डीवीआर अपने साथ ले गए हैं। उनके भागने के रास्ते की तरफ भी पता किया जा रहा है। बताया जाता है कि लुटेरों की संख्या चार से पांच थी, जो हथियार से लैस थे। सभी लुटेरे युवा बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में बिहार में बैंक, ज्वेलरी शॉप और पेट्रोल पंप पर लूट की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

शेयर बाजार  धड़ाम, सेंसेक्स 2,222 अंक लुढ़का, निवेशकों को लगी 16 लाख करोड़ की चपत

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार का कारोबारी सत्र काफी नुकसान वाला रहा। अमेरिका में मंदी की आहट के चलते वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 2,222 अंक या 2.74 प्रतिशत गिरकर 78,759 और निफ्टी 662 अंक या 2.68 प्रतिशत गिरकर 24,055 पर बंद हुआ।

बाजार में गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का मार्केट कैप कम होकर 441 लाख करोड़ रुपए रह गया, जो कि पिछले कारोबारी सत्र में 457 लाख करोड़ रुपए था। इस तरह निवेशकों को 16 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। छोटे और मझोले शेयरों में गिरावट का सबसे ज्यादा असर देखा गया।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 858 अंक या 4.57 प्रतिशत गिरकर 17,942 पर था और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 2,056 अंक या 3.55 प्रतिशत गिरकर 55,857 पर बंद हुआ। सभी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए हैं। सबसे ज्यादा गिरावट पीएसयू बैंक, मेटल, रियल्टी, एनर्जी, इन्फ्रा, ऑटो और आईटी इंडेक्स में थी।

सेंसेक्स में 30 में से 28 शेयर लाल निशान में बंद हुए हैं। टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, एसबीआई, पावर ग्रिड, मारुति सुजुकी, जेएसडब्ल्यू स्टील, इन्फोसिस, एलएंडटी और टेक महिंद्रा टॉप लूजर्स थे। एचयूएल और नेस्ले ही केवल हरे निशान में बंद हुए हैं।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में मंदी की आहट और खराब जॉब डेटा एवं जापानी येन के बढ़ने के कारण बाजारों में अस्थिरता का माहौल है। इस कारण से भारतीय बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई है। हालांकि, निफ्टी 24,000 के करीब आकर बंद हुआ है।

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीणा का कहना है कि वैश्विक बाजारों से लगातार आ रही खराब खबरों के कारण गिरावट देखने को मिली है। जापान की ओर से ब्याज दरें बढ़ा दी गई है और जिसके कारण दुनियाभर में लगा जापान का पैसा वापस वहां की अर्थव्यवस्था में जाने की उम्मीद है। वहीं, अमेरिका में भी जॉब डेटा खराब आया, जिसके कारण बाजार में बिकवाली देखने को मिल रही है।

जाट फाउंडेशन ने किया सांसदों का सम्मान

नई दिल्ली :  देश में जाट समाज का नाम रोशन करने वाले यूं तो हर फील्ड में मिल जाएंगे, चाहे वो खेल का मैदान हो, चाहे शिक्षा का मैदान हो, चाहे कला का मैदान हो, चाहे विज्ञान का मैदान हो, चाहे इंजीनियरिंग का मैदान हो, चाहे डॉक्टरी का मैदान हो, चाहे समाज सेवा का मैदान हो या फिर चाहे वो राजनीति का मैदान हो। लेकिन जाट समाज के बहुत से लोग इससे अनजान हैं कि उनके समाज के विद्वानों और पहलवानों ने पूरी दुनिया में परचम लहराया है। अभी हाल ही में ओलंपिक खेलों में जो दो ब्रांज मैडल भारत को मिले हैं, वो भी इसी समाज की देन हैं। इसी आधार पर अपने समाज के हर क्षेत्र के उभरते या चमकते हुए सितारों को सम्मानित करने का बीड़ा अखिल भारतीय जाट फाउंडेशन ने उठाया हुआ है।
हाल ही में 31 जुलाई को अखिल भारतीय जाट फाउंडेशन ने इसी सिलसिले में ‘सांसद सम्मान समारोह’ कार्यक्रम के तहत जाट समाज के सांसदों का सम्मान अशोक होटल, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में किया, जिसमें इस समाज के कई सांसदों को सम्मानित किया गया और समाज के युवाओं को आगे बढ़ने में उनकी मदद करने और उनका मार्गदर्शन करने पर चर्चा हुई।
समारोह की अध्यक्षता महारानी पटियाला, श्रीमति प्रणीत कौर ने की। समारोह के मुख्य अतिथि भाजपा के हरियाणा प्रभारी श्री सतीश पूनिया और उद्योगपति एस.के. नरवर थे। इसके अलावा विशिष्ठ अथितियों में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान, पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह, ओलंपियन बजरंग पूनिया, मथुरा के जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, यूके इंग्लैंड के डिप्टी मेयर रोहित अहलावत, पूर्व आईएएस सुरेंद्र कुमार वर्मा उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम में बागपत (उत्तर प्रदेश) से सांसद राजकुमार सांगवान, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से सांसद हरेंद्र मलिक, झालावाड (राजस्थान) से सांसद दुष्यंत सिंह. बाडमेर (राजस्थान) से सांसद उम्मेदराम, राज्यसभा सांसद माया निरोलिया और श्री सुभाष बराला आदि सांसद भी मौजूद रहे।
इस प्रकार से सांसद सम्मान समारोह में कई पूर्व और कई कार्यरत आईएएस, आईपीएस, आईआरएस अधिकारियों के अलावा राजनीति, खेल और फिल्म जगत की अनेक हस्तियां इस सम्मान समारोह में शामिल हुईं।
इस सम्मान कार्यक्रम में मुख्य रूप से जाट समाज की एकता, उसकी प्रगृति और उसके सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के बारे में चर्चा हुई और जाट समाज के सदस्यों, सम्मानित व्यक्तियों को एक साथ एक मंच पर लाने के उद्देश्य पर जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन फेडरेशन के अध्यक्ष धर्मवीर चौधरी ने किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में फेडरेशन के मुख्य सदस्य के रूप में फेडरेशन के संयोजक एस. के. काकरान, उपाध्यक्ष नरेंद्र चौधरी, फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव उत्तम चौधरी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सांसद सम्मान समरोह में सभी प्रमुख हस्तियों ने जाट समाज के साथ-साथ सभी समाज के लोगों और खास तौर पर देश की तरक्की और विकास में योगदान देने की पेशकश की।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं)

आरबीआई  की मौद्रिक नीति बैठक के निर्णय पर रहेगी बाजार की नजर

मुंबई : अमेरिकी अर्थव्यवस्था के एक बार फिर से मंदी की चपेट में आने की आशंका में हुई भारी बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह करीब आधी फीसदी गिरे घरेलू शेयर की अगले सप्ताह रिजर्व बैंक (आरबीआई) की द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के निर्णय, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के नतीजे तथा पश्चिम एशिया में उत्पन्न तनाव पर नजर रहेगी।

बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 350.77 अंक अर्थात 0.43 प्रतिशत की गिरावट लेकर सप्ताहांत पर 80981.95 अंक पर आ गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 117.15 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट लेकर 24717.70 अंक रह गया।

समीक्षाधीन सप्ताह में दिग्गज कंपनियों के विपरीत बीएसई की मझौली और छोटी कंपनियों में मिलाजुला रुख रहा। इससे मिडकैप जहां 31.44 अंक अर्थत 0.07 प्रतिशत फिसलकर सप्ताहांत पर 47675.23 अंक पर रहा वहीं स्मॉलकैप 334.94 अंक यानी 0.62 प्रतिशत लुढ़ककर 54629.29 अंक पर आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार, बीते सप्ताह कंपनियों के वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही की कमजोर आय और बढ़ा हुआ मूल्यांकन निवेशकों को आश्वस्त नहीं कर रहा है। धातु समूह पर कमजोर नतीजों का असर पड़ा तथा आयात में वृद्धि से घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा है। पूंजीगत सामान और रियल एस्टेट क्षेत्र पर मुनाफावसूली का दबाव रहा जबकि ऑटो क्षेत्र को उम्मीद से कम मासिक बिक्री आंकड़ों के कारण नुकसान उठाना पड़ा है।

वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि में कमजोरी के संकेत दिख रहे हैं, जो बढ़ते व्यापार तनाव, पश्चिम एशिया में संघर्ष और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण और भी गंभीर हो गया है। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की, जिसका जापानी बाजार पर असर पड़ा है जबकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व कमजोर रोजगार आंकड़ों के कारण सितंबर में ब्याज दरों में कटौती पर विचार कर रहा है। भविष्य में आरबीआई भी ऐसा ही कर सकता है लेकिन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई में हाल की बढ़ोतरी चिंता का विषय है। चीन विकास में मंदी का सामना कर रहा है, जिससे आर्थिक गति को बहाल करने के लिए अतिरिक्त नीतिगत उपाय आवश्यक हो गए हैं।

शेयरों के प्रीमियम मूल्यांकन, पहली तिमाही के कमजोर नतीजे और वैश्विक बाजार में जारी सुदृढ़ीकरण के कारण अगले सप्ताह बाजार में मजबूती की संभावनाएं बढ़ गई हैं। अगले सप्ताह 06 से 08 अगस्त को आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की होने वाली अगली द्विमासिक समीक्षा बैठक के निर्णयों पर बाजार की नजर रहेगी। हालांकि उम्मीद है कि आरबीआई नीतिगत दरों पर यथास्थिति बरकरार रखेगा।

इसके साथ ही अगले सप्ताह भारती एयरटेल, ओएनजीसी, सेल, एनएचपीसी, ओआईएल, बीईएमएल, टाटा पावर, टीवीएस मोटर, आयोकॉन, ल्यूपिन, अपोलो टायर, एमआरएफ और इरकॉन समेत कई दिग्गज कंपनियों के वित्त वर्ष 2024-25 की अप्रैल-जून तिमाही के परिणाम जारी होने वाले हैं। बाजार को दिशा देने में इन कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

नशा करने से कांवड़ नहीं लगती

डॉ. आशा अर्पित

आजकल धर्मनगरी हरिद्वार कांवड़ियों से अटी पड़ी है। स्थानीय लोगों का अनुमान है कि कांवड़ यात्रा के पहले दिन ही दो लाख कांवड़िये हरिद्वार आये। यह सिलसिला लगातार जारी है। और तो और पिछले वर्षों से महिला कांवड़ियों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है और कई छोटे बच्चे भी कांवड़ यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। कांवड़ियों की राह आसान नहीं होती। ग़रीबी, लाचारी, मजबूरी आदि इस यात्रा के कई पहलू हैं। नशा करने वाले कांवड़ियों की संख्या अधिक है। गांजा, सुल्फा ज़्यादा चलता है। हर कांवड़िया मानता है कि शिव भोले हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। अज्ञानतावश नशे का चलन है। महादेव के बारे में शास्त्रीय ज्ञान शून्य है। कोई-कोई सोशल मीडिया के ज्ञान को रिपीट करता है कि सबसे पहले किस-किस ने कांवड़ उठायी थी? हालाँकि कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार में कई जगह लंगर चलते हैं। लेकिन लाखों की संख्या है। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि शौच, नहाना-धोना बड़ी समस्या है, जिसके चलते गंदगी भी फैलती है। लेकिन यह ऐसा तबक़ा है, जिसे अच्छे तरीक़े से शिक्षित करके देश के विकास की मुख्यधारा में लाया जा सकता है।

दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से कांवड़ियों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है। शृंगार की हुई कांवड़ में 10-20 लीटर से लेकर 100 लीटर तक गंगाजल भरकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। महिलाओं के लिए यह यात्रा काफ़ी कठिन होती है। कई महिलाएँ बताती हैं कि उनकी टाँगें सूज गयी हैं, चलने में दिक़्क़त होती है। वहीं पुरुष कांवड़िये अपनी इस यात्रा को आसान बनाने के लिए नशे का सेवन करते हैं। उसमें भी ख़ासतौर पर गांजा और सुल्फा बीड़ी और सिगरेट में भरकर पीते हैं। कांवड़ के नियमों का पालन करने का ध्यान रखते हैं। जैसे- खाने-पीने के बाद नहाना, सोने के बाद नहाना और विश्राम करने के बाद नहाना। तभी ये गंगाजल को हाथ लगाते हैं; ऐसी उनकी मान्यता है।

नीलकंठ से गंगाजल भरकर आ रहे नज़फ़गढ़ के आकाश भारद्वाज ने बताया कि उसे 300 किलोमीटर का सफ़र तय करके घर पहुँचना है। उसका कहना है कि जो आगे-पीछे नशा नहीं करता, वह सावन में ज़रूर करता है। इसका कारण उसने यह बताया कि नीलकंठ की चढ़ाई- उतराई में ही पैर जवाब दे जाते हैं, तो 300 किलोमीटर कैसे चला जाएगा? इसलिए ज़्यादातर कांवड़िये नशा करते हैं। वह बताता है कि गांजा माफ़ है, क्योंकि इसे भोले का महाप्रसाद माना गया है। इसके अलावा और कोई नशा नहीं किया जा सकता है। उससे कांवड़ ख़राब हो जाएगी। सोहनलाल भी 12 साल से कोई नशा नहीं करते और पवित्रता के साथ कांवड़ उठाकर चलते हैं। 220 किलोमीटर उन्हें जाना है। रोज़ 30 किलोमीटर का सफ़र पैदल तय करते हैं।

 दिल्ली के प्रवीण उन कांवड़ियों को संदेश देते हैं कि जो भोले शंकर के नाम से नशा करते हैं, उनको अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए कि शिव शंकर ने तो लोक-कल्याण के लिए ज़हर पिया था और उसे अपने कंठ में रखा था। क्योंकि शरीर की गर्मी के लिए वह धतूरे का सेवन करते थे, ताकि शरीर ठंडा रहे। क्या हम जैसे लोग दूसरों के भले के लिए ज़हर पी सकते हैं? उनके इसी वाक्य में कावड़ यात्रा का संदेश स्पष्ट हो जाता है। वह मानते हैं कि हमारी सारी कामनाएँ पूर्ण होती हैं, जब पवित्रता के साथ कांवड़ उठाकर हम भोले का जलाभिषेक करते हैं। दिल्ली के नरेला के चंदन कहते हैं कि हम सच्चे मन से अपने गुरु बनवारी लाल के साथ कांवड़ उठाने आते हैं। पहले हम भी नशा करते थे; लेकिन पिछले छ: साल से जबसे कांवड़ उठानी शुरू की, तबसे नशे को हाथ नहीं लगाया। इससे हमारी मनोकामनाएँ पूरी हो रही है। घर वालों की शिक्षा और संस्कार बहुत ज़रूरी हैं। उनका कहना है कि शिव जी ने किसी कारण से नशे का सेवन किया था। हमें तो उन्होंने नहीं कहा कि आप भी नशा करो। बुलंद शहर के साबितगढ़ के बनवारी लाल जूना अखाड़ा के आचार्य स्वामी अवधेशानंद के शिष्य हैं। उन्होंने बताया कि गुरु जी ने हमें अच्छी शिक्षा दी है। हम शिव-भक्त हैं। हमारे में कोई भेदभाव नहीं है। भाईचारा है। 23 साल हो गये उन्हें कांवड़ उठाते हुए और उनके साथ 1,500 कांवड़िये जुड़े हुए हैं, जो पवित्रता से सभी नियमों का पालन करते हैं। गुरु परंपरा के हिसाब से सभी इकट्ठे रहते हैं। उनका कहना है कि बच्चों को संस्कार घर से ही मिलते हैं। नशा करने वालों को शिक्षा और संस्कार घर से नहीं मिले। धर्म की शिक्षा भी नहीं मिली। आज के बच्चे अध्यात्म की तरफ़ आ ही नहीं रहे। धर्म के प्रति जागरूकता ज़रूरी है कि धर्म क्या है? यह ज्ञान उन्हें मिलना चाहिए। जब तक हमारा युवा मज़बूत नहीं होगा, तब तक देश आगे नहीं बढ़ सकता।