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मौत बिकाऊ है

– चीन का खतरनाक मांझा भारत में प्रतिबंधित होने के बाद भी धड़ल्ले से बिक रहा है!

इंट्रो- चीन में बना सामान न सिर्फ घटिया है, बल्कि उससे मानव-जीवन को खतरा पैदा हो चुका है। भारत में आयातित चीन के सामान को हम मौत का सामान कहें, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। चीन से आयातित सामान में से पतंग उड़ाने वाली डोर, जिसे मांझा कहा जाता है; भी एक ऐसा ही जानलेवा प्लास्टिक का सिंथेटिक धागा है। अब तक चीन के मांझे की वजह से सैकड़ों लोगों, छोटे पशुओं, पक्षियों और समुद्री जीवों की जान जा चुकी है। चीन का यह जानलेवा मांझा भारत में प्रतिबंधित होने के बावजूद आज भी देश की राजधानी दिल्ली से लेकर आगरा, कोलकाता और दूसरे कई शहरों के बाजारों में कथित रूप से बिक रहा है। इस मांझे की उपलब्धता को लेकर ‘तहलका’ एसआईटी की पड़ताल पर आधारित यह खुलासा एक परेशान करने वाली वास्तविकता को देश के सामने लेकर आया है कि चीन के मांझे पर प्रतिबंध का बहुत कम या कहें कि कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और यह धड़ल्ले से बिक रहा है। पढ़िए, तहलका एसआईटी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-

‘मुझे लगता है कि आप हमारी बातचीत रिकॉर्ड कर रहे हैं। स्टिंग कर रहते हो क्या? अगर आप मुझसे चाइनीज मांझा खरीदना चाहते हैं, तो खरीद लीजिए। आप इतने सारे सवाल क्यों पूछ रहे हैं? ऐसा लगता है, जैसे आप मुझे रिकॉर्ड कर रहे हैं! कृपया सुनिश्चित करें कि मैं परेशानी में न पड़ूँ।’ -उत्तर प्रदेश के आगरा के एक पतंग विक्रेता नासिर खान उर्फ मुन्ना ने यह बात ग्राहक बनकर उसकी दुकान पर गये ‘तहलका’ रिपोर्टर को प्रतिबंधित चीन का मांझा बेचने की पेशकश करते हुए जोर देकर शक करते हुए कही।

‘मैंने अपने कूरियर के माध्यम से कोलकाता से बैंगलोर तक पांच किलोग्राम गांजा (मारिजुआना- एक प्रतिबंधित ड्रग) की आपूर्ति की है। मैंने पैकेट पर दवा लिखा और यह बिना किसी जांच के पास हो गया। इसी तरह मैं कूरियर सेवा का उपयोग करके कोलकाता से दिल्ली तक चाइनीज मांझा भेजूँगा। कोलकाता में भी चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध है; लेकिन इसे चुनिंदा ग्राहकों को चोरी-छिपे बेचा जाता है। मैं नियमित रूप से दिल्ली को इसकी आपूर्ति कर सकता हूं।’ यह दावा कोलकाता के एक अन्य प्रतिबंधित चाइनीज मांझा विक्रेता राजेश सिंह (बदला हुआ नाम) ने ‘तहलका’ रिपोर्टर के सामने किया।

‘शाहदरा, दिल्ली का एक मांझा विक्रेता श्याम कुमार 500 रुपए प्रति रोल (मांझे का एक लच्छा) चाइनीज मांझे की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। हालांकि श्याम अनजान लोगों से मिलने से सावधान रहता है और फोन पर बात नहीं करना चाहता। वह मेरे माध्यम से सौदा करने को तैयार है।’ -यह बात दिल्ली के जावेद खान (बदला हुआ नाम) ने ‘तहलका’ के रिपोर्टर से कही।

भारत में पतंग उड़ाने का महत्त्वपूर्ण पुरातन और भावनात्मक महत्त्व है। हालांकि पतंग उड़ाने के लिए अवैध चीन के प्लास्टिक के खतरनाक केमिकल और कांच के लेप से बनाये हुए मांझे का अनियंत्रित उपयोग भारत के निवासियों के लिए घातक साबित हुआ है। प्लास्टिक जैसा महसूस होने वाले नायलॉन के धागे से बना चाइनीज मांझा पतला होता है और आसानी से पतंग उड़ाने में मदद करता है। यद्यपि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थानीय क्षेत्रों में भी निर्मित होता है, जिसका प्राथमिक घटक (सिंथेटिक पॉलीप्रोपाइलीन) चीन से प्राप्त किया जाता है।

भारत में हर साल चाइनीज मांझे से कई मौतें होती हैं और बहुत लोग इससे घायल भी होते हैं। ऐसे मामले आमतौर पर स्वतंत्रता दिवस और मकर संक्रांति से पहले के हफ़्तों में बढ़ जाते हैं, जब राजधानी से लेकर दूसरे शहरों में अधिकांश लोग अपनी-अपनी छतों से या खुले मैदानों में जाकर पतंग उड़ाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, कई लोगों की डोर से गला कटने से मौत हो चुकी है। यह नुकसान केवल इंसानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षी भी इसके शिकार हो रहे हैं और इस मांझे से पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। दशकों से चाइनीज मांझे से जुड़ी घटनाएं एक बढ़ता खतरा बन गयी हैं। परिणामस्वरूप, सन् 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने देश भर में ग्लास-कोटेड धागों की बिक्री, निर्माण और आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की भारत में भारी मांग बनी हुई है। भारतीय मांझे की तुलना में यह सस्ता और प्रतिस्पर्धियों की पतंग काटने में अधिक प्रभावी है। प्रतिबंधित और संभावित घातक डोर को बेचने के आरोप में देश भर में कई गिरफ्तारियां की गयी हैं; लेकिन पुलिस की सख्त कार्रवाई के दावों के बावजूद बिक्री जारी है।

‘तहलका’ ने आगरा, कोलकाता और दिल्ली में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की कथित बिक्री की गहन पड़ताल की। जांच में पाया गया कि प्रतिबंध काफी हद तक काग़ज़ों तक ही सीमित है। इन शहरों में पतंग आपूर्तिकर्ता प्रतिबंधित डोर बेचते हुए कैमरे में क़ैद हुए। जांच के पहले पड़ाव में ‘तहलका’ रिपोर्टर ने नकली ग्राहक बनकर आगरा के दुकानदार नासिर से बात की। ‘तहलका’ रिपोर्टर ने इस बारे में गहन जानकारी जुटाने के लिए दिल्ली में अपने मनगढ़ंत पतंग व्यवसाय बताकर नासिर से चाइनीज मांझे की नियमित आपूर्ति की मांग की। रिपोर्टर ने अवैध रूप से चाइनीज मांझा बेचने वालों की तलाश करते हुए आगरा के नासिर से संपर्क किया।

रिपोर्टर : मांझा कौन-सा है आपके पास?

नासिर : वही है, जो आपने मंगाया है।

रिपोर्टर : चीन का?

नासिर : प्लास्टिक का बोलते हैं, चीन का।

रिपोर्टर : बोलते तो चाइना का ही हैं; नायलॉन वाला, प्लास्टिक वाला, वही शीशे वाला।

नासिर : हां; वही वाला।

‘तहलका’ रिपोर्टर ने नासिर से कहा कि हम आगरा से दिल्ली तक चाइनीज मांझे की नियमित आपूर्ति चाहते हैं; क्योंकि आगरा की तुलना में दिल्ली में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध बहुत सख्त है। नासिर ने जवाब दिया कि वह जयपुर (राजस्थान) में एक सप्लायर को जानता है, जो प्रतिबंधित मांझे की नियमित आपूर्ति कर सकता है। उसने कहा कि वह उनके (रिपोर्टर के) लिए चाइनीज मांझे का एक नमूना लाया है; और चूंकि उसके पास हमारा (रिपोर्टर का) संपर्क नंबर है, इसलिए जब भी उसे और मांझा मिलेगा, तो वह उन्हें (रिपोर्टर को) सूचित करेगा।

रिपोर्टर : देखो ऐसा है, दिल्ली में तो है नहीं ये।

नासिर : बैन (प्रतिबंधित) है।

रिपोर्टर : पूरे इंडिया में बैन है, इसकी सप्लाई चाहिए ज़्यादा।

नासिर : देखिए, मैं तो छोटा-मोटा दुकानदार हूं। अभी आप ये ले जाइए। अभी ऐसा एक डिस्ट्रीब्यूटर है जयपुर में।

रिपोर्टर : कौन है जयपुर में?

नासिर : ये मुझे मालूम करना पड़ेगा।

रिपोर्टर : डिस्ट्रीब्यूटर है जयपुर में? …चाइना मांझे का?

नासिर : हां। …हम तो छोटे-मोटे दुकानदार हैं। 1-2 लेकर बेचते हैं। आप चाहें इसे ले लीजिए। आगे से आपका नंबर मेरे पास है ही; जैसे मालूम पड़ेगा, आपको बता दूंगा।

इस आदान-प्रदान में ‘तहलका’ रिपोर्टर ने नासिर की पहचान और एक प्रमुख बाजार में उसकी दुकान के स्थान की पुष्टि करने का प्रयास किया। जैसे ही नासिर ने अपना उपनाम ‘मुन्ना’ साझा किया, उससे यह भी पता चल गया कि वह कैसे एक घनिष्ठ अनौपचारिक नेटवर्क में काम करता है।

रिपोर्टर : आपकी दुकान वहीं है ना! मॉल के बाजार में?

नासिर : हां।

रिपोर्टर : किसके नाम से है?

नासिर : मेरे ही नाम से है। …नासिर भाई के नाम से पूछ लेना।

रिपोर्टर : पूरा नाम क्या है?

नासिर : नासिर भाई।

रिपोर्टर : खान, अली, …कुछ नहीं?

नासिर : हां; खान लगा लेना। …आपका शुभ नाम क्या है?

रिपोर्टर : मेरा नाम आमिर अली, …और आपका मुन्ना? …मुन्ना के नाम से पतंग की दुकान है ना?

नासिर : जी।

‘तहलका’ रिपोर्टर ने नासिर से इस बारे में पूछताछ जारी रखी कि वह किस प्रकार के चाइनीज मांझे की आपूर्ति करता है? नासिर ने खुद का छोटा प्रोफाइल बनाये रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि उनका स्टॉक एक ही प्रकार- गोल्डन के रंग तक ही सीमित है; जो ग्राहकों के साथ व्यवहार करने में उनके सतर्क दृष्टिकोण को सूक्ष्मता से दर्शाता है।

रिपोर्टर : फिलहाल बताओ मांझे कौन-कौन से हैं?

नासिर : इसमें तो गोल्ड ही है बस।

रिपोर्टर : गोल्ड की एक ही वैरायटी है बस! …और कुछ नहीं है?

नासिर : हम तो एक-एक, दो-दो लेकर ही बेचते हैं भाई!

जब नासिर से पूछा गया कि वह हमें नियमित आधार पर कितनी मात्रा में चाइनीज मांझे की आपूर्ति कर सकता है, तो उसने कहा कि वह अपने आपूर्तिकर्ता से पूछेगा, तब उन्हें (नकली ग्राहक बने रिपोर्टर को) बताएगा। उसने बताया कि फिलहाल उसके पास चाइनीज मांझे का सिर्फ एक ही रोल है।

रिपोर्टर : तो ये बताओ, हमें कितना माल मिल सकता है?

नासिर : अब ये तो पूछकर बताऊंगा, ऐसे कैसे बता सकता हूं।

रिपोर्टर : आप कितना दे सकते हो?

नासिर : एक ही है मेरे पास तो।

रिपोर्टर : अभी नहीं आगे?

नासिर : मैं आपको पूछकर बता दूंगा।

नासिर को तब संदेह हुआ, जब ‘तहलका’ रिपोर्टर ने उससे चाइनीज मांझे के बारे में कई सवाल पूछे। उसने दलील दी कि चूंकि उसके बच्चे बहुत छोटे हैं, इसलिए वह किसी परेशानी में नहीं पड़ना चाहता। रिपोर्टर से अपनी सुरक्षा के बारे में आश्वासन मिलने के बाद नासिर ने बताया कि वह उनके (रिपोर्टर के) लिए चाइनीज मांझे का एक नमूना लाया है, और उसके लिए पैसे की मांग की। एक स्पष्ट बातचीत में हमारे रिपोर्टर ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की क़ीमत पर सवाल उठाया और पड़ताल की, कि क्या एक रोल के 600 रुपये ज़्यादा हैं?

रिपोर्टर : फिलहाल दिखा दो, कैसा है माल?

नासिर : अब ऐसी बात तो नहीं है सर! …ये लाये हैं।

रिपोर्टर : क्या बात कर रहे हो?

नासिर : मेरे भी छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। ऐसी बात तो नहीं, कोई डरने वाली बात?

रिपोर्टर : कोई बात नहीं है, आप क्यूं परेशान हो रहे हो। सुनो, मांझा यहीं दिखाओगे या कहां दिखाओगे?

नासिर : यहां देख लो आप, पैसे दे दो।

रिपोर्टर : मुझे पैसे बता दो कितने हुए?

नासिर : 600 रुपये दे दो मुझे आप।

रिपोर्टर : 600 रुपीज ज्यादा नहीं है?

नासिर : तुम्हारे लिए आया हूं मैं यहां पे, अब मेरा पेट्रोल दे देना। …50 रुपीज और दे देना भाई! दूसरे की गाड़ी लेकर आया हूं।

इस बातचीत में ‘तहलका’ रिपोर्टर ने नासिर से चाइनीज मांझे की तत्काल उपलब्धता और लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने की संभावना को दर्शाया। फिलहाल सीमित स्टॉक के साथ नासिर ने एक ग्राहक मानते हुए रिपोर्टर को आश्वस्त किया कि वह भविष्य में मांझे की आपूर्ति की व्यवस्था कर सकता है और अपडेट के लिए संपर्क में रह सकता है।

रिपोर्टर : मुझे ये बताओ, मुझे कितना माल मिल जाएगा आपसे अभी?

नासिर : सर! मेरे पास तो अभी एक ही है; …आगे होगा, तो आपको दे दूंगा।

रिपोर्टर : मुझे चाहिए लगातार सप्लाई।

नासिर : मेरे पास नंबर तो है ही, …मैं आपको पूछकर बता दूंगा।

अब नासिर ने रिपोर्टर से दिल्ली का पता पूछा और दिल्ली के जाफराबाद या नांगलोई से एक पतंग आपूर्तिकर्ता से संपर्क करने की सिफारिश की, जो उन्हें (रिपोर्टर को) दिल्ली में ही चाइनीज मांझे की आपूर्ति करने में उसने सक्षम बताया।

रिपोर्टर : अच्छा, पतंगें कौन-कौन सी हैं आपके पास?

नासिर : पतंगें सब मिलेंगी। …पन्नी की, काग़ज की, सब मिलेंगी। दिल्ली में कहां है आपकी दुकान?

रिपोर्टर : दिल्ली में मयूर विहार, जमना पार।

नासिर : अच्छा, वहां जाफराबाद में भी तो है। तो जाफराबाद में आप उससे ले लेना, …राज से, लालू से; उन पर मिल जाएगा सब।

रिपोर्टर : चाइनीज मांझा है उनके पास?

नासिर : होगा, शायद…।

रिपोर्टर : आपके जानकार हैं?

नासिर : मेरे खयाल में नांगलोई में हो शायद।

रिपोर्टर के कई सवालों के बाद नासिर को फिर से शक हुआ और उसने रिपोर्टर से पूछा कि क्या वह (रिपोर्टर) उनकी रिकॉर्डिंग कर रहे हैं? यह आश्वासन देने के बाद कि उसकी रिकॉर्डिंग नहीं की जा रही है; नासिर ने रिपोर्टर को बताया कि वह एक सप्लायर से चाइनीज मांझा ले रहा है।

रिपोर्टर : ये बताओ, आपकी सप्लाई कहां है? कौन-से एरिया से है?

नासिर : हम तो लोकल हैं। 10-20 रुपीज खोल के बेचते हैं।

रिपोर्टर : आपकी सप्लाई कहां से है? कहां से आता है आपके पास?

नासिर : एक डिस्ट्रीब्यूटर देने आता है। अरे आप अभी रिकॉर्डिंग क्यूं कर रहे हो?

रिपोर्टर : अरे नहीं।

नासिर : देखो, मेरी बात सुनो; मैं अभी दुकान से उठकर आया हूं। आप मुझे रिकॉर्ड कर रहे हो?

रिपोर्टर : देखो डरो मत, ये देखो मैंने अंदर कर लिया।

नासिर : नहीं, आप इतना क्यूं पूछ रहे हो? …आपने कहा पतंग का, …बालूगंज से आया हूं।

रिपोर्टर : चलो छोड़ो।

तीसरी बार फिर नासिर ने सवाल उठाया कि क्या ‘तहलका’ रिपोर्टर के द्वारा उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है? इस बार उसने रिपोर्टर से धर्म के अनुसार उनके ईश्वर की कसम खाने को कहा कि अगर वह (रिपोर्टर) उसकी रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे हैं, तो कसम खाएं। कसम खाने के बाद उसने मांझा देने की पेशकश की; लेकिन रिपोर्टर के उसे टालने के हाव-भाव से नासिर को फिर शक हुआ कि वह (रिपोर्टर) चाइनीज मांझा खरीदने में सिर्फ टालमटोल कर रहे हैं और उसे खरीदने के लिए गंभीर नहीं हैं। नासिर को रिपोर्टर पर काफी शक हो गया; क्योंकि रिपोर्टर ने उससे बहुत सारे सवाल पूछे।

नासिर : अब सर! ये तो आप फॉर्मेलिटी पूरी कर रहे हैं, आपको लेना-वेना कुछ नहीं है।

रिपोर्टर : ऐसी बात नहीं।

नासिर : तो आप इतनी चीजें क्यूं पूछ रहे हो? ये बताइए आप, …आप मुझे अपना एड्रेस दे दो। मैं आपके पास खुद आऊंगा मयूर विहार, पूरा एड्रेस दे दो।

रिपोर्टर : अच्छा लिखो।

नासिर : आप लिखकर दे दो, आपके पास पेन तो होगा।

रिपोर्टर : व्हाट्सएप पर लिख लो, मोबाइल कौन-सा है आपके पास?

नासिर : आप लिखकर सेंड कर दो मुझे। …अरे नहीं भाई!

रिपोर्टर : अरे लो-लो, पैसे लो।

नासिर : आप देखिए, पहले अल्लाह-पाक की कसम खाइए। …आप कुछ कर तो नहीं रहे हैं?

रिपोर्टर : अल्लाह-पाक की कसम।

नासिर : सर पे हाथ रखो मेरे, छोटा भाई हूं।

रिपोर्टर : हां; लो पैसे लो।

‘तहलका’ रिपोर्टर ने नासिर को उसके द्वारा लाये गये मांझे के लिए 700 रुपए देने के बाद चाइनीज मांझा लिए बिना ही यह कहकर छोड़ दिया कि अभी इसे रखे रहो, बाद में ले लेंगे। रिपोर्टर ने उससे चाइनीज मांझा नहीं लिया; क्योंकि यह भारत में प्रतिबंधित है। नासिर के बाद ‘तहलका’ रिपोर्टर ने दिल्ली में राजेश सिंह से मुलाकात की। कोलकाता का मूल निवासी राजेश सिंह के साथ बातचीत में रिपोर्टर ने शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की उपलब्धता की पड़ताल की। राजेश ने स्पष्ट रूप से बताया कि कैसे दुकानदार पुलिस की जांच के बाद भी खुद को इसे बेचने में दूसरे तरीके (रिश्वत आदि) से अभ्यस्त कर लेते हैं या फिर पुलिस की गाड़ी आने पर अक्सर अपने स्टॉक को छुपाते लेते हैं। लेकिन रास्ता साफ होने पर आसानी से ग्राहकों को चाइनीज मांझा बेच देते हैं, जो भूमिगत बाजारों में चल रही कालाबाजारी और पुलिस प्रशासन के लचीलेपन को दर्शाता है।

रिपोर्टर : अब बता, चाइनीज मांझा; …कि कहां-कहां मिल रहा है? …कोलकाता में?

राजेश : चाइनीज मांझे कोलकाता में हर जगह मिलता है। बैन है; पर पुलिस आता है, तो सब छुपा देता है।

इस बातचीत में राजेश सिंह ने प्रतिबंधित चाइनीज मांझे के लिए कोलकाता के एक भूमिगत बाजार के बारे में स्पष्ट रूप से बताया। राजेश ने बताया कि कैसे दुकानदार चतुराई से पुलिस गश्त से अपना स्टॉक छुपाते हैं, और पुलिस के जाते ही इस अवैध उत्पाद की बिक्री फिर से शुरू कर देते हैं, जबकि प्रदर्शन यह करते हैं कि वे कॉटन का मांझा बेच रहे हैं।

रिपोर्टर : कौन-कौन सा मार्केट है?

राजेश : कोलकाता पूरा ही मार्केट है। …कोलकाता में आप कहीं पर भी छोटा-सा दुकान ले लो, बड़ा-सा दुकान ले लो; जब गाड़ी दिखता है, सब छुपा जाता है। धागे वाला सामने चालू हो जाता है। फिर जब गाड़ी गया, फिर चाइनीज वाला शुरू हो जाता है।

इस गहन बातचीत में राजेश सिंह ने कोलकाता के उन खास इलाक़ों का नाम उजागर किया, जहां प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बिकता है। उसने कोलकाता के दो बाजारों- टीटागढ़ और बड़ा बाजार का नाम लिया, जहां चाइनीज मांझा मिलता है। उसने कहा कि बड़ा बाजार में चाइनीज मांझा 24 घंटे उपलब्ध रहता है।

रिपोर्टर : कौन-कौन से इलाके हैं कोलकाता के? …जहां चाइनीज मांझा मिलता है?

राजेश : वहां हमको चाइनीज मांझा का नाम नहीं पता, वो लोग लेकर आता है रंग-बिरंगी।

रिपोर्टर : लेकिन इलाका कौन-कौन सा है?

राजेश : अच्छा; इलाका हो गया टीटागढ़।

रिपोर्टर : ये कोलकाता में है?

राजेश : हां; कोलकाता में।

रिपोर्टर : साउथ-ईस्ट या नॉर्थ-वेस्ट? …कौन-सी जगह?

राजेश : साउथ में। …सब जगह में हैं। हद से आधा-एक घंटे का रास्ता है। सब कुछ मिलेगा, टीटागढ़ हो गया। बड़ा बाजार हो गया। …बड़ा बाजार में तो 24 घंटे मिलेगा।

रिपोर्टर : चाइनीज मांझा?

राजेश : 24 घंटा।

इस बातचीत में ‘तहलका’ रिपोर्टर ने राजेश से व्हाट्सएप पर भेजी गयी चरखी के स्रोत के बारे में सवाल किया। राजेश ने खुलासा किया कि इसे टीटागढ़ से प्राप्त किया गया था, जिससे क्षेत्र के बारे में उनके स्थानीय ज्ञान का संकेत मिलता है, जबकि उन्होंने बताया कि वह हवाई अड्डे से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर रहते हैं।

रिपोर्टर : तूने कहां से लिया था, जो मुझे चरखी भेजी थी?

राजेश : टीटागढ़, लोकल है।

रिपोर्टर : लोकल है, मतलब तू वहीं रहता है?

राजेश : हम तो एयरपोर्ट साइड में रहता, वो 15 मिन्ट का रास्ता है।

इस बातचीत में रिपोर्टर ने राजेश से दिल्ली में चाइनीज मांझे की आपूर्ति करने के बारे में पूछताछ की। राजेश ने अवैध व्यापार के लिए अपनी संलिप्तता का इजहार करते हुए कुछ दिनों के भीतर सड़क मार्ग से सामान भेजने की एक सीधी योजना के बारे में आत्मविश्वास से रिपोर्टर को आश्वास्त किया कि वह कई अवैध चीज़ों को मँगाने का प्रबंधन कर सकता है।

रिपोर्टर : तो अगर चाइनीज मांझे का तुझे ठेका दे दिया जाए, दिल्ली सप्लाई करने का, तो तू कर लेगा?

राजेश : कर लूंगा।

रिपोर्टर : कैसे करेगा?

राजेश : वही सेम xxxx वाई रोड 3-4 दिन में, …के अंदर माल।

इस चौंकाने वाली बातचीत में राजेश ने मादक पदार्थों की तस्करी के रहस्य का खुलासा किया। यह पूछे जाने पर कि क्या वह कूरियर के माध्यम से दिल्ली में चाइनीज मांझा की आपूर्ति कर पाएगा? राजेश ने हमें आश्वस्त करने के लिए बताया कि उसने अपनी कूरियर कम्पनी के माध्यम से कोलकाता से बैंगलोर तक प्रतिबंधित ड्रग्स गांजा (मारिजुआना) की आपूर्ति की थी; वह भी पांच-छ: किलोग्राम की मात्रा में।

राजेश : हम लोग, जैसा क्या करते, बैंगलोर हम भेजे वीड (गांजा)।

रिपोर्टर : हैं! वीड? …वीड मतलब चरस?

राजेश : नहीं, गांजा। …वो भेजा बैंगलोर, कोलकाता से xxxx से।

रिपोर्टर : कूरियर से भेजा?

राजेश : कूरियर से भेजा, कब भेजा, वो मेरे इस फोन में नहीं है, उस फोन में है। …एक-दो महीना नहीं, दो-तीन महीने पहले। …पांच-पांच, छ:-छ: केजी (किलोग्राम) गांजा भेजा।

रिपोर्टर : पांच-छ: केजी गांजा भेजा!

राजेश : हां; आराम से ले लिया।

रिपोर्टर : आपने xxxx कूरियर से कोलकाता से बैंगलोर भेजा?

राजेश : हां; हम आपको स्लिप भी दिखा देंगे। पर हम लोग को पता है ना! क्या लिखना चाहिए, क्या चेकिंग होता है, क्या नाम लिखना चाहिए। …अब जैसे ये प्याज है। हम इस प्याज को पैक किया और इसको कोई मेडिसिन का नाम दे दिया. …काग़ज पे मेडिसिन लिखा दिया; गाड़ी में रख दिया और वो निकल गया।

इस अचंभित करने वाली बातचीत में राजेश का दावा है कि अवैध आग्नेयास्त्रों और हथियारों को भी कूरियर किया जा सकता है। राजेश के दावे रेडार के तहत चल रहे अवैध बाजारों की चिंताजनक वास्तविकता को रेखांकित करते हैं, और ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाने में कानून प्रवर्तन के सामने आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करते हैं।

रिपोर्टर : हथियार वग़ैहर सब, रिवॉल्वर एट्च. (इत्यादि)?

राजेश : हां; छोटा सामान होगा, निकल जाएगा।

रिपोर्टर : रिवॉल्वर वग़ैरह निकल जाएगी?

राजेश : हां।

रिपोर्टर : कौन-कौन से आइटम?

राजेश : कोई भी आइटम।

रिपोर्टर : जो भी बैन, इल्लीगल हैं; …सारे?

राजेश : हां; वो हम भिजवा देंगे।

इस बातचीत में राजेश ने आगे चाइनीज मांझे के उपयोग से जुड़े खतरों के बारे में, विशेष रूप से इससे लगने वाली गंभीर चोटों और मौतों की संभावना की बात स्वीकार की। उसने कुबूल किया कि उसने अपनी आंखों से चाइनीज मांझे से लोगों को मरते हुए और घायल होते हुए देखा है। लेकिन इसके बावजूद वह कोलकाता से दिल्ली तक इस अवैध उत्पाद की आपूर्ति करने की बात स्वीकार करते हुए नकली ग्राहक बने हमारे रिपोर्टर के लिए भी आपूर्ति करने को तैयार है।

रिपोर्टर : बड़ा खतरनाक होता है; …उससे लोग भी मर गये हैं। चाइनीज मांझे से।

राजेश : एक्सीडेंट भी होते हैं। जो हेलमेट लेकर चला रहा है, नजदीक जिसके नहीं होता कांच, उसका यहां से लेकर यहां तक (गर्दन की ओर इशारा करते हुए) कटके निकल गया।

रिपोर्टर : गर्दन कट जाती है।

राजेश : आंख के सामने देखा है मैंने ये सब।

अब राजेश ने चाइनीज मांझे के व्यापार के काले रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए इसके प्रसार में स्थानीय कानून व्यवस्था की भूमिका पर आरोप लगाया। जब राजेश से रिपोर्टर ने पूछा कि क्या आप पर कभी चाइनीज मांझा बेचने के लिए कोलकाता पुलिस ने छापा मारा है? इसके जवाब में राजेश ने कहा कि पुलिस आरोपियों से 500 रुपये रिश्वत लेती है और उन्हें छोड़ देती है।

रिपोर्टर : कभी पकड़े नहीं गये? …पुलिस ने रेड नहीं की चाइनीज मांझे की?

राजेश : पकड़ने की क्या? …पुलिस तो खुद खाती है। बाई चांस अगर होता भी है, तो वो सेल नहीं

बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर, 16 जिलों के 4 लाख लोग प्रभावित

बिहार में कोसी और गंडक सहित सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। हालांकि, राहत वाली बात है कि वीरपुर के कोसी बैराज, वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज पर जलस्राव में कमी आयी है। प्रदेश के 16 जिलों के 31 प्रखंड के चार लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

जल संसाधन विभाग के मुताबिक, वीरपुर बैराज में कोसी का जलस्राव सोमवार को सुबह छह बजे 2,65,530 क्यूसेक था जबकि 10 बजे यह घटकर 2,54,385 क्यूसेक हो गया है। इसी तरह वाल्मीकिनगर बैराज में सुबह 10 बजे गंडक का जलस्राव भी 1,55,600 लाख क्यूसेक है। इस बीच, प्रदेश की सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, गंडक, कोसी, बागमती, महानंदा एवं अन्य नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण 16 जिलों पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, अररिया, किशनगंज, गोपालगंज, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, सिवान, मधेपुरा, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, सारण एवं सहरसा के 31 प्रखंडों में 152 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत लगभग 4 लाख से अधिक की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है।

बाढ़ से प्रभावित आबादी को सुरक्षित निष्क्रमित करने के लिए एनडीआरएफ की कुल 12 टीम एवं एसडीआरएफ की कुल 12 टीमों को तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त वाराणसी से एनडीआरएफ की तीन टीमों को बुलाया गया है।

बताया गया कि लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने एवं आवागमन के लिए 630 नावों का परिचालन कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बाढ़ पीड़ितों के लिए 43 राहत शिविरों का संचालन किया जा रहा है, जिसमे 11 हजार से अधिक लोग शरण लिये हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि नेपाल में भारी वर्षा के कारण रविवार की सुबह पांच बजे कोसी बैराज, वीरपुर से 6,61,295 क्यूसेक जलस्राव हुआ था, जो 1968 के बाद सर्वाधिक है।

जल संसाधन विभाग का दावा है कि तटबंधों की सुरक्षा के लिए जल संसाधन विभाग की टीमें दिन-रात तत्पर हैं। हालांकि कई तटबंधों के क्षतिग्रस्त होने के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति भयावह हो गई है।

पीएम मोदी ने मिथुन चक्रवर्ती को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार दिए जाने पर दी बधाई

नई दिल्ली : इस साल का दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को दिया जाएगा। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिग्गज अभिनेता को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

मिथुन चक्रवर्ती को यह पुरस्कार देने की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कोलकाता की गलियों से लेकर सिनेमा की ऊंचाइयों तक, मिथुन दा की अद्भुत सिने यात्रा ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। दादासाहेब फाल्के चयन समिति ने भारतीय सिनेमा में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए उन्हें इस सम्मान से नवाजने का निर्णय लिया है।”

मंत्री ने बताया कि यह पुरस्कार 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में 8 अक्टूबर को मिथुन चक्रवर्ती को प्रदान किया जाएगा। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की पोस्ट पर रिप्लाई करते हुए लिखा, “मुझे खुशी है कि मिथुन चक्रवर्ती जी को भारतीय सिनेमा में उनके अद्वितीय योगदान को मान्यता देते हुए प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वह एक कल्चरल आइकन हैं, जिनको अपने बहुमुखी प्रदर्शन के लिए पीढ़ियों से सराहना मिली हैं। उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं।”

दूसरी ओर, इस अवार्ड पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का कहना है, “हमें बड़ा अफसोस है कि इस बार का पुरस्कार पीएम नरेंद्र मोदी को नहीं मिला। वह इसके हकदार थे। पूरे देश में अगर कोई कलाकार है, तो वह पीएम मोदी हैं।”

उल्लेखनीय है कि मिथुन चक्रवर्ती ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मृणाल सेन की फिल्म मृगया (1976) से की थी, जिसके लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यह फिल्म भारत और उस समय के सोवियत संघ में भी बड़ी हिट रही थी। इसके बाद 1982 में आई फिल्म ‘डिस्को डांसर’ के जरिए मिथुन दा पूरी दुनिया में मशहूर हो गए।

ज्ञात हो कि, दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भारत का सबसे बड़ा सिनेमा पुरस्कार है, जो हर साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिया जाता है। यह पुरस्कार भारतीय सिनेमा के विकास में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्ति को प्रदान किया जाता है।

मिथुन चक्रवर्ती को हाल ही में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था। अप्रैल में हुए इस समारोह में उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान प्राप्त किया। इस बारे में उन्होंने कहा था, “मैं बहुत खुश हूं। मैंने कभी भी अपने लिए किसी से कुछ नहीं मांगा। जब मुझे गृह मंत्रालय से फोन आया कि मुझे पद्म भूषण दिया जा रहा है, तो मैं एक मिनट के लिए चुप हो गया, क्योंकि मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी।”

सुनीता विलियम्स को लाने SpaceX Crew 9 पहुंचा अंतरिक्ष स्टेशन, नासा ने शेयर किया वीडियो

नई दिल्ली : कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में फंसी भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को घर लाने का मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल आईएसएस से सफलतापूर्वक जुड़ गया है और सुनीता विलियम्स अब जल्द ही धरती पर वापस आ जाएंगी।

स्पेसएक्स ने शनिवार को यह रेस्क्यू मिशन लॉन्च किया था। कैप्सूल में सुनीता विलियम्स के साथ उनके साथी अंतरिक्ष यात्री बुच विलमोर भी सवार हैं। नासा ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी जारी किया है जिसमें सुनीता और अन्य अंतरिक्ष यात्री काफी खुश नजर आ रहे हैं। यहां सुनीता विलियम्स और बुच ने स्पेसएक्स के क्रू का स्वागत किया। नासा के निक हेग और रूस के अलेक्जेंडर गोरबुनोव को बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स को वापस लाने का काम सौंपा है।

सुनीता विलियम्स पांच जून, 2024 को यान स्टारलाइनर से आईएसएस पर गई थीं। लेकिन यान में तकनीकी खराबी आ जाने के कारण उन्हें जल्द ही वापस लौटना पड़ा था। कई महीनों तक मरम्मत के प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। इसीलिए सुनीता विलियम्स को आईएसएस पर ही रहना पड़ा।

सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका में हुआ था लेकिन उनके पूर्वज गुजरात के मेहसाना के झुलासन गांव के रहने वाले थे। वह एक अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं और उन्होंने कई अंतरिक्ष मिशनों में हिस्सा लिया है। अब स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को लेकर धरती की ओर रवाना होगा। अनुमान है कि वह फरवरी 2025 तक धरती पर वापस आ जाएंगी।

मल्लिकार्जुन खड़गे साहब राहुल गांधी के विरोधी: गिरिराज सिंह

पटना : बेगूसराय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद व केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को राहुल गांधी का विरोधी बताया।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान पर हमला बोला, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं तब तक नहीं मरूंगा, जब तक की मोदी को सत्ता से हटा ना दूं।

गिरिराज ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा, “इस बयान से साफ जाहिर होता है कि खड़गे साहब राहुल गांधी के विरोधी हैं, क्योंकि मोदी जी 100 सालों तक हैं, और तब तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी बूढ़े हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में राहुल गांधी को इस पद तक पहुंचने का मौका ही नहीं मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “खड़गे साहब आप एक बात समझ लीजिए कि पीएम मोदी हजार सालों तक देश की जनता के दिलों पर राज करेंगे। कोई जिंदा रहे या मर जाए। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है। मोदी जी गरीबों के मसीहा के रूप में जाने जाते हैं।”

इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी खड़गे के मंच पर कही बातों को अशोभनीय और शर्मनाक बताया था। लिखा, कल (29 सितंबर) कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में अपने नेताओं और अपनी पार्टी से भी ज्यादा घटिया और शर्मनाक बात कही। उन्होंने अपनी कटुता का परिचय देते हुए बेवजह पीएम मोदी को अपने निजी स्वास्थ्य मामले में घसीटा और कहा कि वे पीएम मोदी को सत्ता से हटाकर ही दम लेंगे।

इस पोस्ट में शाह ने आगे खड़गे के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए लिखा, जहां तक खड़गे के स्वास्थ्य की बात है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रार्थना करते हैं, मैं प्रार्थना करता हूं और हम सभी प्रार्थना करते हैं कि वे दीर्घायु और स्वस्थ रहें। वे अनेक वर्षों तक जीवित रहें और 2047 तक विकसित भारत का निर्माण होते देखें।

बता दें कि खड़गे जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने जसरोटा पहुंचे थे। चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उनकी तबीयत खराब हो गई थी। इस पर उन्होंने कहा था , मैं 83 साल का हूं, मैं तब तक नहीं मरूंगा, जब तक की मोदी को सत्ता से हटा ना दूं।

गृह मंत्री अमित शाह ने मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर जताई आपत्ति

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिए बयान को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शर्मनाक बताया है।

अमित शाह ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने भाषण में अपने नेताओं और अपनी पार्टी से भी ज्यादा घटिया और शर्मनाक बात कही। उन्होंने अपनी कटुता का परिचय देते हुए बेवजह पीएम मोदी को अपने निजी स्वास्थ्य मामले में घसीटा और कहा कि वे पीएम मोदी को सत्ता से हटाकर ही दम लेंगे।

अमित शाह ने आगे कहा, इससे पता चलता है कि इन कांग्रेस के लोगों में पीएम मोदी के प्रति कितनी नफरत और डर है कि वे हर समय उनके बारे में सोचते रहते हैं। जहां तक खड़गे के स्वास्थ्य की बात है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रार्थना करते हैं, मैं प्रार्थना करता हूं और हम सभी प्रार्थना करते हैं कि वे दीर्घायु और स्वस्थ रहें। वे अनेक वर्षों तक जीवित रहें और 2047 तक विकसित भारत का निर्माण होते देखें।

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे 29 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उनकी तबीयत खराब हो गई। खड़गे ने कहा, मैं 83 साल का हूं, लेकिन तब तक जिंदा रहूंगा जब तक हम मोदी को हटा नहीं देते हैं।

इसके बाद उन्होंने एक्स पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया। खड़गे ने लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जम्मू-कश्मीर आकर युवाओं के भविष्य के लिए झूठे आंसू बहा रहे है। असलियत ये है कि पिछले 10 सालों में पूरे देश के युवाओं को अंधकार में धकेल दिया है। जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार हैं। अभी बेरोज़गारी के आंकड़े आए हैं। 45 वर्षों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी मोदी की देन है।

उन्होंने केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए आगे लिखा, मोदी-शाह की सोच में रोजगार देना नहीं, सिर्फ भाषण देना, फोटो खिंचाना और फीता काटना है। जम्मू कश्मीर में सरकारी विभागों में 65 प्रतिशत पद खाली है। यहां की नौकरियां बाहरी लोगों को दी जा रही है। एम्स जम्मू में भी जम्मू के लोगों को नौकरियां नहीं मिलीं। ये जानकारी मुझे मिली है।

पहलवान विनेश फोगाट को नाडा ने जारी किया नोटिस

नई दिल्ली : भारतीय दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाओं में हैं। पेरिस ओलंपिक- 2024 में महिला 50 किलोग्राम कैटेगिरी में सिर्फ 100 ग्राम वजन ज्यादा होने की वजह से मेडल नहीं जीत सकी थीं। इसके बाद उन्होंने संन्यास का ऐलान कर दिया था। फिर वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गई थीं ।विनेश अब जुलाना निर्वाचन क्षेत्र से आगामी हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं। इसी बीच उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) की ओर से उन्हें एक नोटिस जारी किया गया है और 14 दिन के अंदर उनसे जवाब मांगा गया है.

नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी ने विनेश फोगाट को रहने के स्थल की जानकारी देने में विफलता के कारण नोटिस भेजा है और 14 दिन के अंदर जवाब मांगा है। नाडा ये नोटिस डोप टेस्ट के लिए तय समय और स्थान पर एथलीट के नहीं मिलने की स्थिति में जारी करता है क्योंकि इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता है। नाडा के पंजीकृत परीक्षण पूल में पंजीकृत सभी खिलाड़ियों को डोप जांच के लिए अपनी उपलब्धता के बारे में जानकारी देना जरूरी है और इन खिलाड़ियों में विनेश भी शामिल हैं।

नियम के मुताबिक, अगर खिलाड़ी ने जिस स्थान की जानकारी दी है और वह उस स्थान पर उपलब्ध नहीं होता तो इसे ठिकाने की जानकारी देने की विफलता माना जाता है। नाडा ने अपने नोटिस में विनेश को बताया कि उन्होंने अपने रहने के स्थल की जानकारी नहीं बताने की गलती की है क्योंकि वह 9 सितंबर को सोनीपत के खरखौदा गांव में अपने घर पर डोप जांच के लिए उपलब्ध नहीं थीं। विनेश को या तो इस उल्लघंन को स्वीकार करना होगा या यह सबूत देना होगा कि वह उस स्थान पर लगभग 60 मिनट तक मौजूद थीं। पर यहां यह जिक्र किया जा सकता है कि ठहरने की जगह संबंधित विफलता डोपिंग रोधी नियम का उल्लंघन नहीं है। कोई खिलाड़ी अगर 12 महीने में तीन बार स्थल की जानकारी संबंधित नियमों का उल्लघंन करता है तो ही नाडा एथलीट पर कोई एक्शन ले सकता है।

प्याज की कीमत नियंत्रित करने के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

नई दिल्ली : सरकार ने हाल ही में प्याज की कीमतों में वृद्धि पर नियंत्रण पाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी को काबू करने के लिए सरकार ने ‘बफर स्टॉक’ से प्याज की बिक्री बढ़ा दी है।

बता दें, बफर स्टॉक वह भंडार है, जिसे सरकार खाद्य पदार्थों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रखती है। यह स्टॉक बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए उपयोग किया जाता है।

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि सरकार ने थोक बाजारों में प्याज की बिक्री को बढ़ा दिया है। यह कदम विशेष रूप से दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में उठाया गया है। निधि खरे ने कहा कि जब सरकार ने निर्यात शुल्क हटाया, तब प्याज की कीमतों में वृद्धि का अंदेशा था। वर्तमान में, सरकार के पास 4.7 लाख टन का बफर स्टॉक उपलब्ध है।

सरकार 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर सब्सिडी (Subsidy) वाले प्याज की बिक्री करने की योजना बना रही है। यह बिक्री उन शहरों पर अधिक ध्यान देगी, जहां प्याज की कीमतें अन्य जगहों की तुलना में अधिक हैं।

22 सितंबर को दिल्ली में प्याज की खुदरा कीमत 55 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जबकि पिछले साल इसी समय यह कीमत 38 रुपये थी। मुंबई और चेन्नई में प्याज की कीमतें क्रमशः 58 रुपये और 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

ट्रेन पलटने की साजिश-ड्यूटी और प्रमोशन के लिए रेलवे कर्मियों ने ही बनाया था प्लान

सूरत : गुजरात में ‘ट्रेन पलटने की साजिश’ का खुलासा पूरी तरह फर्जी निकला है। प्रमोशन, पुरुस्कार और नाइट ड्यूटी की चाहत में तीन रेलवे कर्मचारियों ने ही साजिश रची थी। उन्होंने हादसा टालने का दावा किया था, लेकिन जांच में चौंकाने वाला खुलासा होने पर तीनों को दबोच लिया गया।

सूरत के पुलिस अधीक्षक (एसपी) होतेश जॉयसर ने बताया कि गिरफ्तार कर्मचारियों की पहचान सुभाष पोद्दार (39), मनीष मिस्त्री (28) और शुभम जायसवाल (26) के रूप में हुई है, जो रेलवे के रखरखाव विभाग में ट्रैकमैन के पद पर तैनात हैं। पोद्दार और उसके साथियों ने कोसांबा और किम स्टेशन के बीच शनिवार सुबह 5.30 बजे पटरी की जांच के दौरान बड़ा दावा किया। उन्होंने ऊपर के अधिकारियों को सूचना दी कि ‘शरारती तत्वों’ ने ट्रेन को पटरी से उतारने के लिए एक तरफ की पटरी से इलास्टिक क्लिप और दो फिशप्लेट हटा दी है। उन्होंने इसका वीडियो भी रिकॉर्ड करके भेजा था।

पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत आपराधिक साजिश का केस दर्ज करके जांच शुरू की। पुलिस ने पाया कि जिस वक्त क्षतिग्रस्त पटरी का वीडियो भेजा गया उससे कुछ पल पहले ही वहां से एक ट्रेन गुजरी थी। पुलिस ने पाया कि छेड़छाड़ का पता चलने और ट्रेन के गुजरने के समय के बीच अंतर बहुत कम था। इतने कम समय में इलास्टिक क्लिप और फिशप्लेट को हटाए जाने के दावे पर पुलिस को शक हुआ।

इसके बाद तीनों कर्मचारियों के मोबाइल फोन की जांच की गई। देर रात 2.56 बजे से तड़के 4.57 तक उन्होंने छेड़छाड़ वाले कई वीडियो बनाए थे। मिस्त्री ने अपने मोबाइल से खींचीं तस्वीरें भी डिलीट कर दी थीं। पता चला कि वीडियो अधिकारियों को सुबह 5:30 पर भेजे गए, लेकिन इन्हें रिकॉर्ड काफी पहले किया गया था।

पुलिस ने जब तीनों से गहन पूछताछ की तो वे टूट गए और गुनाह कबूल कर लिया। पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपियों ने कहा कि उन्हें लगा था कि इससे उन्हें सम्मानित किया जाएगा और प्रमोशन मिलेगा। इसके अलावा उन्हें आगे भी रात की ड्यूटी दी जाएगी, जिससे दिन में वे परिवार के साथ समय बिता सकेंगे। पोद्दार के मन में यह विचार आया था और तीनों ने मिलकर इसे अंजाम देना चाहा। पोद्दार की मॉनसून में नाइट ड्यूटी लगाई गई थी और अब यह खत्म होने वाली थी। दरअसल, नाइट ड्यूटी के बाद अगले दिन छुट्टी भी मिलती है।

पीएम मोदी की 3 दिवसीय यूएस यात्रा खत्म

PM arrives in Chennai on May 26, 2022.

न्यूयॉर्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय सफल यूएस यात्रा के बाद नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए, जिसमें क्वाड लीडर्स समिट और यूएन समिट ऑफ द फ्यूचर के मौके पर कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता की एक श्रृंखला देखी गई।

तीन दिवसीय यूएस यात्रा के अंतिम चरण में सोमवार को पीएम मोदी ने न्यूयॉर्क में यूएन: समिट ऑफ द फ्यूचर के मौके पर अपने अर्मेनियाई समकक्ष निकोल पशिन्यान और वेटिकन सिटी के कार्डिनल सचिव पिएत्रो पारोलिन के साथ बातचीत की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “आज संयुक्त राष्ट्र में समिट ऑफ द फ्यूचर के मौके पर आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिन्यान से मिलना अद्भुत रहा।”

एक दूसरे पोस्ट में उन्होंने लिखा, “न्यूयॉर्क में होली सी के राज्य सचिव कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन के साथ बहुत अच्छी बातचीत हुई।”

प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की।

प्रधानमंत्री ने जेलेंस्की के साथ अपनी बैठक के दौरान यूक्रेन में संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत के “स्पष्ट, सुसंगत और रचनात्मक” दृष्टिकोण को दोहराया, जो कूटनीति, संवाद और सभी हितधारकों के बीच सहभागिता पर आधारित है।

बैठक के बाद पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा कि न्यूयॉर्क में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात हुई। हम पिछले महीने यूक्रेन की अपनी यात्रा के परिणामों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया जा सके। उन्होंने यूक्रेन में संघर्ष के शीघ्र समाधान और शांति और स्थिरता की बहाली के लिए भारत का समर्थन दोहराया।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की के बीच यह बीते तीन महीने में तीसरी बैठक थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने आपस में संपर्क बरकरार रखने पर सहमति जताई।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को वियतनाम के राष्ट्रपति टू लैम से भी मुलाकात की और कहा कि इस मुलाकात से दोनों देशों के संबंध बेहतर होंगे।

अपनी मुलाकात के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, “हमने भारत-वियतनाम मित्रता की पूरी श्रृंखला का जायजा लिया। हम कनेक्टिविटी, व्यापार, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में मोमेंटम बनाए रखने को तत्पर हैं।”

दोनों देश बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी के साथ कई क्षेत्रों में अपने संबंधों को गहरा कर रहे हैं।

इन बैठकों से पहले प्रधानमंत्री ने समिट ऑफ द फ्यूचर को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व समुदाय को आश्वस्त किया कि भारत समस्त मानवता के अधिकारों की रक्षा और वैश्विक समृद्धि के लिए विचार, वचन और कर्म से काम करना जारी रखेगा।