NEET आंदोलन का नया ट्विस्ट: छात्रों पर दर्ज FIR हटाने सुप्रीम कोर्ट पहुंची सरकार, 13 मामलों पर आज होगी सुनवाई

NEET आंदोलन में छात्रों पर दर्ज FIR हटाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची
NEET आंदोलन से जुड़े छात्रों पर दर्ज 13 FIR को हटाने के लिए केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

स्नेहलता चौरसिया | नई दिल्ली

जिस NEET आंदोलन में छात्रों की आवाज सड़कों पर गूंजी, पुलिस कार्रवाई हुई और FIR दर्ज होने तक मामला पहुंचा, अब उसी कहानी ने सुप्रीम कोर्ट में नया मोड़ ले लिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस सरकार के खिलाफ छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, अब वही सरकार छात्रों पर दर्ज FIR हटवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंच गई?

दिल्ली पुलिस ने कहा—13 FIR आगे नहीं बढ़ाना चाहती

दरअसल, NEET पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर जुलाई में दिल्ली में हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान कई मामले दर्ज किए गए थे। दिल्ली पुलिस ने अब सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह इन 13 FIRs को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। केंद्र सरकार ने भी इन मामलों को खत्म करने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 1 सितंबर को सुनवाई होनी है।

सरकार ने अनुच्छेद 142 के तहत मांगी राहत

FIR से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची लड़ाई केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन FIR को quash यानी रद्द करने की मांग की है। सरकार की दलील का केंद्र छात्रों को राहत देना है, लेकिन राहत हर व्यक्ति को समान रूप से नहीं मिलने वाली।

2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज करने की भी मांग

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से यह अनुमति भी मांगी है कि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले बताए गए 2,873 लोगों के खिलाफ अलग FIR दर्ज कर जांच की जा सके। यानी सरकार का संदेश साफ है—आम प्रदर्शनकारियों को राहत मिल सकती है, लेकिन गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों को इससे बाहर रखा जाएगा।

राजनीतिक एंगल क्या है?

इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ कानूनी राहत मानना आसान नहीं है। छात्रों का आंदोलन सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका था। अब FIR वापस लेने की पहल से सरकार छात्रों के साथ टकराव की छवि को कम करने और संवाद का रास्ता खोलने का संदेश भी दे सकती है।

सोशल और कानूनी सवाल भी बड़े

मामला सिर्फ 13 FIR का नहीं है। सवाल यह है कि क्या परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले छात्रों का भविष्य मुकदमों में उलझना चाहिए? सुप्रीम कोर्ट पहले भी पात्र छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने की गुंजाइश पर जोर दे चुका है, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य प्रभावित न हो।

वहीं, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति भी गठित की है।

1 सितंबर की सुनवाई पर सबकी नजरें

अब सबकी नजर 1 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। फैसला यह तय करेगा कि NEET आंदोलन से जुड़े छात्रों को कितनी कानूनी राहत मिलेगी और सरकार की यह पहल महज FIR हटाने तक सीमित रहती है या छात्र आंदोलन और सरकार के बीच रिश्तों में एक नया अध्याय खोलती है।