Mission Ladakh: सुरक्षा की ढाल और विकास की रफ्तार परखेंगे गृह मंत्री

लद्दाख का प्रशासनिक पुनर्जन्म: 5 नए जिले और शाह की 'सुरक्षा' समीक्षा : गृह मंत्री अमित शाह दोपहर के समय लेह हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे, तुरंत बाद, वे स्थानीय प्रशासन, उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और आईटीबीपी (ITBP) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठकें करेंगे…

बदला लद्दाख, बदली रणनीति: अशांति के बाद शाह का पहला और निर्णायक दौरा…Photo Credit : HT
बदला लद्दाख, बदली रणनीति: अशांति के बाद शाह का पहला और निर्णायक दौरा…Photo Credit : HT

तहलका डेस्क।

लद्दाख/ नई दिल्ली। 30 अप्रैल 2026 को लेह में महसूस किए गए 4.1 तीव्रता के भूकंप के झटकों के बीच गृह मंत्री अमित शाह का लद्दाख दौरा क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिहाज से एक बड़े रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। कुदरती हलचल के बावजूद इस दौरे का जारी रहना यह संकेत देता है कि केंद्र सरकार सीमावर्ती इलाकों की स्थिरता को लेकर कितनी गंभीर है।

गृह मंत्री अमित शाह दोपहर के समय लेह हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और स्थानीय प्रशासन, उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना और आईटीबीपी (ITBP) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रणनीतिक बैठकें करेंगे। और केंद्र सरकार द्वारा लद्दाख में चलाए जा रहे विभिन्न विकास परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। इस यात्रा का एक ऐतिहासिक पहलू लद्दाख प्रशासन द्वारा हाल ही में घोषित पांच नए जिलों नुब्रा, शाम, चांगथांग, ज़ांस्कर और द्रास का गठन है, जिससे अब इस केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की कुल संख्या सात हो गई है। यह प्रशासनिक पुनर्गठन दूरदराज के क्षेत्रों तक शासन की पहुंच मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

दो दिनी यात्रा के अगले दिन यानी 1 मई को, वह बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी में भाग लेकर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देंगे। मालूम हो कि पिछले वर्ष लद्दाख में हुई अशांति और राज्य के दर्जे तथा छठी अनुसूची की मांग को लेकर जारी आंदोलनों के बाद अमित शाह का यह पहला दौरा है। हालांकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि वे सीधे तौर पर प्रदर्शनकारी समूहों से नहीं मिलेंगे, क्योंकि केंद्र 22 मई को होने वाली औपचारिक वार्ता का इंतजार कर रहा है, लेकिन उनका वहां मौजूद होना ही एक बड़ा संदेश है। कुल मिलाकर, यह दौरा न केवल चीन सीमा पर भारत की अभेद्य दीवार को पुख्ता करने के लिए है, बल्कि लद्दाख के सामाजिक-राजनीतिक और ढांचागत विकास के प्रति केंद्र की अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।