
मोहिनी सेंगर । नई दिल्ली
3 अक्टूबर 2014 को शुरू, 30 अप्रैल 2023 को पूरा हुआ 100वां एपिसोड; UN हेडक्वार्टर न्यूयॉर्क में भी सुना गया
30 मिनट का मासिक कार्यक्रम: योग, स्वच्छता, महिला नेतृत्व, युवा, पर्यावरण, विज्ञान, खादी, खेल, सांस्कृतिक विरासत जैसे मुद्दों पर बात; सेल्फी विद डॉटर, स्थानीय कारीगर, पर्यावरण कार्यकर्ताओं की कहानियों को मिला राष्ट्रीय मंच
17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। उनके सार्वजनिक जीवन के कई पहलुओं में एक नाम ऐसा है, जिसने लगातार सुर्खियां बटोरीं ‘मन की बात’। 3 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ यह मासिक रेडियो कार्यक्रम प्रधानमंत्री और देश के लोगों के बीच संवाद का एक अलग माध्यम बना। बदलते डिजिटल दौर में जब सोशल मीडिया और वीडियो तेजी से बढ़ रहे थे, तब रेडियो को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने का फैसला अपने आप में अलग संचार प्रयोग था।
30 मिनट, लेकिन मुद्दे पूरे देश के
‘मन की बात’ का फॉर्मेट लगभग 30 मिनट का रहा है और इसका प्रसारण आकाशवाणी तथा दूरदर्शन नेटवर्क के जरिए किया जाता है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने अलग-अलग समय पर योग, स्वच्छता, महिला नेतृत्व, युवाओं, पर्यावरण, विज्ञान, खादी, खेल और सांस्कृतिक विरासत जैसे मुद्दों पर बात की। खास बात यह रही कि इसमें केवल बड़े राष्ट्रीय मुद्दे ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों और संगठनों की कहानियों को भी जगह मिली।
‘मन की बात’ में आम लोगों की एंट्री
इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता नागरिकों की भागीदारी रही। द इंडियन एक्सप्रेस की 100वें एपिसोड पर प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों और कई संगठनों के काम का उल्लेख किया गया था। हरियाणा के ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान से लेकर स्थानीय कारीगरों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक पहल करने वालों तक, कई कहानियां राष्ट्रीय मंच पर पहुंची। यानी कार्यक्रम का फोकस केवल प्रधानमंत्री के भाषण पर नहीं, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों की कहानियों पर भी रहा।
100 एपिसोड का पड़ाव
30 अप्रैल 2023 को ‘मन की बात’ ने अपना 100वां एपिसोड पूरा किया। इस मौके पर कार्यक्रम का प्रसारण न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भी लाइव सुना गया। उस समय भारतीय मीडिया रिपोर्टों में इसे कार्यक्रम के लगभग नौ साल के सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया गया। एक अध्ययन का हवाला देते हुए द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि आठ वर्षों में कार्यक्रम की पहुंच करीब 100 करोड़ लोगों तक होने का दावा किया गया था और करीब 96 प्रतिशत आबादी इसके बारे में जागरूक थी।
कोविड से लेकर डिजिटल इंडिया तक
‘मन की बात’ ने समय के साथ अपने विषय भी बदले। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य, सावधानियों और टीकाकरण जैसे विषय कार्यक्रम में प्रमुख रहे। बाद के वर्षों में डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप, स्पेस सेक्टर, स्थानीय उत्पादों, सरकारी पहलों और सांस्कृतिक अभियानों का भी उल्लेख हुआ। द इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण के अनुसार, शुरुआती वर्षों के कार्यक्रम अपेक्षाकृत सामान्य और प्रेरक विषयों पर केंद्रित थे, जबकि बाद के दौर में सरकारी नीतियों और पहलों को भी अधिक जगह मिली।
जन्मदिन पर ‘मन की बात’ क्यों खास?
मोदी के जन्मदिन पर उनके राजनीतिक सफर की चर्चा के बीच ‘मन की बात’ उनके सार्वजनिक संचार का एक अलग अध्याय है। एक रेडियो कार्यक्रम के तौर पर इसकी शुरुआत 2014 में हुई और यह वर्षों तक जारी रहा। इसका सफर यह भी दिखाता है कि सोशल मीडिया के दौर में रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यम को किस तरह राष्ट्रीय संवाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 17 सितंबर के मौके पर ‘मन की बात’ इसलिए चर्चा में रहती है क्योंकि यह मोदी के सार्वजनिक जीवन में भाषण से आगे बढ़कर संवाद के एक नियमित मंच के रूप में दर्ज हो चुकी है।



