‘राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे’: केजरीवाल का तंज नहीं, बल्कि AAP की अपनी चुनी हुई परीक्षा  पूरी कहानी समझिए

केजरीवाल का तंज नहीं, बल्कि AAP की अपनी चुनी हुई परीक्षा पूरी कहानी समझिए
अरविंद केजरीवाल ने राघव चड्ढा समेत AAP के दल-बदल करने वाले सात राज्यसभा सांसदों पर 'गद्दारी' का आरोप लगाया

नई दिल्ली। रविवार को गोवा में AAP के एक कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल ने वह बात कह दी जिसे पांच महीने से कोई नहीं कह रहा था। राघव चड्ढा समेत अपने सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में जाने पर पहली बार खुलकर बोलते हुए उन्होंने इसे ‘गद्दारी’ और ‘अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया, और फिर वह लाइन कही जो तुरंत चर्चा में आ गई  “राज्यसभा में यह आम आदमी पार्टी के लिए सीख थी। अब किसी को राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार ठोक-बजाकर देखेंगे कि व्यक्ति ठीक है या नहीं” । चड्ढा का नाम नहीं लिया, लेकिन निशाना साफ था। लेकिन इस एक तंज को सिर्फ एक तंज मानकर पढ़ना इस कहानी का सबसे छोटा नुस्खा होगा। असली कहानी पांच बड़े सवालों में छिपी है।

1. अचानक पांच महीने बाद, और वह भी गोवा में  क्यों?

दिलचस्प टाइमिंग है। अप्रैल में जब सात सांसद गए, तब केजरीवाल की ओर से इतना खुला बयान नहीं आया। अब रविवार को, वोटर लिस्ट विवाद के बीच चलती आमने-सामने की जंग के ठीक बाद, AAP नेता ने इसे ‘सीख’ बताते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया । गोवा जैसे राज्य में यह बात कहना भी इसलिए अहम है कि वहां AAP अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में है  यानी संदेश सिर्फ चड्ढा के लिए नहीं, उन कार्यकर्ताओं के लिए भी था जिन्हें पार्टी छोड़कर भागने की लालसा आ सकती है।

2. सात सांसद, एक साथ  क्या हुआ था अप्रैल में?

यह कोई एक व्यक्ति का इस्तीफा नहीं था  AAP की राज्यसभा ताकत का बड़ा हिस्सा एक झटके में भाजपा में चला गया। राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत सात सांसदों ने पार्टी छोड़ी । चड्ढा पर तो केजरीवाल का सबसे ज्यादा भरोसा था  इतना कि उन्हें पंजाब से राज्यसभा भेजा गया, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और युवा चेहरे के तौर पर खड़ा किया गया। इसीलिए ‘100 बार जांच’ वाला तंज दरअसल एक स्वीकारोक्ति भी है  कि जिस पहले पहिए को खुद चुना गया था, वही निकला सबसे बड़ा झटका।

3. यह जंग ‘ब्रेकअप वाली सियासत’ कहां से शुरू हुई?

पिछले दो हफ्तों में यह मुकाबला बेहद निजी हो चुका है। पंजाब के ड्राफ्ट SIR वोटर लिस्ट से चड्ढा का नाम कटा, तो उन्होंने AAP सरकार पर ‘राजनीतिक बदले’ का आरोप लगाया । फिर AAP ने उल्टा सवाल उठाया कि पंजाब से नाम कटते ही दिल्ली की राजेंद्र नगर सीट की लिस्ट में उनका नाम ‘747वें नंबर’ पर कैसे आ गया । इसी दौरान चड्ढा ने वह तंज लगाया जिसने पूरा मामला टीआरपी-स्टाइल युद्ध बना दिया  “AAP मेरे साथ किसी ऐसी एक्स-गर्लफ्रेंड की तरह बर्ताव कर रही है जिसे उसका पार्टनर छोड़ गया है… लगता है मैं केजरीवाल और AAP के सपनों में आता हूं” । केजरीवाल का रविवार वाला बयान इसी कड़ी का जवाब है  निजी तंज का जवाब संस्थागत सबक वाले अंदाज में।

4. ‘100 बार जांच’ वाली बात का असली अर्थ

सतह पर यह चड्ढा पर व्यंग्य है, लेकिन गहराई में यह AAP के सामने आई तीन परेशानियों का कबूलनामा है। पहली  भरोसे का संकट: जिस पार्टी की पहचान ‘अलग राजनीति’ और साफ उम्मीदवारी थी, वहां अपने ही चुने लोगों पर शक करने की नौबत आ गई। दूसरी  राज्यसभा का गणित: सात सांसदों के जाने से संसद में AAP की आवाज कमजोर हुई, और पार्टी के लिए नई चुनौती यह बनी कि वह किस पर भरोसा करके किसे ऊपर भेजे। तीसरी  कानून का बड़ा सवाल: दल-बदल विरोधी कानून के बावजूद राज्यसभा सांसदों का खुलेआम दल बदलना और सदन की सदस्यता बरकरार रखना भारतीय राजनीति का पुराना पैटर्न है  और केजरीवाल की निराशा इस सिस्टम पर भी है, जिसमें छोड़ने वाले को ज्यादा कीमत नहीं चुकनी पड़ती।

5. आगे क्या देखने वाला है?

अब यह लड़ाई दो मोर्चों पर चलेगी। सियासी मोर्चे पर पंजाब चुनाव 2027  जहां SIR वोटर लिस्ट का विवाद और चड्ढा की मौजूदगी अभियान का हिस्सा बन सकती है । और संगठनात्मक मोर्चे पर AAP का अगला राज्यसभा चुनाव  जब देखा जाएगा कि ‘100 बार जांच’ सिर्फ एक तंज थी या सचमुच पार्टी ने अपना तालमेल बदला। जो भी हो, एक बात तय है: केजरीवाल-चड्ढा की यह ‘ब्रेकअप वाली सियासत’ अभी और सुर्खियों में रहेगी  और हर नए विवाद के साथ AAP के लिए यह सवाल गहराता जाएगा कि उसकी असली ताकत ‘चेहरे’ थे या ‘कार्यकर्ता’।