
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को अचानक बेचैनी और असहजता महसूस होने के बाद दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उन्हें 13 अगस्त 2026 की शाम अस्पताल लाया गया, जहां तुरंत कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने उनकी विस्तृत चिकित्सकीय जांच शुरू की।
AIIMS में तुरंत शुरू हुआ इलाज
AIIMS सूत्रों के मुताबिक, जेपी नड्डा को भर्ती किए जाने के बाद उनकी प्राथमिक जांच की गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने एहतियात के तौर पर कई कार्डियक टेस्ट किए। इनमें ECG, ब्लड टेस्ट और कोरोनरी एंजियोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण जांच शामिल रही। यह प्रक्रिया हृदय से जुड़ी किसी भी संभावित समस्या का पता लगाने के लिए की जाती है।
कोरोनरी एंजियोग्राफी क्यों की गई?
डॉक्टरों के अनुसार, जब किसी मरीज को अचानक बेचैनी, सीने में दबाव या असहजता महसूस होती है, तो हृदय की धमनियों की स्थिति जांचने के लिए कोरोनरी एंजियोग्राफी की जाती है। इससे यह पता चलता है कि हृदय तक रक्त प्रवाह सामान्य है या नहीं और कहीं कोई ब्लॉकेज तो नहीं है।
हालत स्थिर, डॉक्टरों की निगरानी जारी
AIIMS प्रशासन ने जानकारी दी है कि जेपी नड्डा की स्थिति फिलहाल स्थिर है और चिंता की कोई गंभीर बात नहीं है। उन्हें कार्डियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की विशेष निगरानी में रखा गया है। अस्पताल की मेडिकल टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट ले रही है।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
जेपी नड्डा के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में भी चिंता की लहर दौड़ गई। कई नेताओं ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। हालांकि, AIIMS की ओर से जारी शुरुआती रिपोर्ट में किसी गंभीर स्थिति की पुष्टि नहीं की गई है।
आगे की स्थिति पर नजर
डॉक्टरों का कहना है कि सभी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल मरीज को आराम और निगरानी में रखा गया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेपी नड्डा की हालत स्थिर है और वे AIIMS के कार्डियोलॉजी विभाग में डॉक्टरों की देखरेख में हैं।
