नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि यह ऑपरेशन काफी जटिल और लंबे समय से प्लान किया गया मिशन था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां काफी समय से अबू-बिलाल की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। ट्रंप के अनुसार, आतंकी को लगता था कि वह अफ्रीका में छिपकर सुरक्षित रह सकता है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को उसकी हर हरकत की जानकारी मिल रही थी।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अफ्रीका के उस इलाके में की गई जहां ISIS से जुड़े कई आतंकी गुट सक्रिय हैं। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, अबू-बिलाल संगठन की अंतरराष्ट्रीय रणनीति और नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। उस पर कई आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने और नए लड़ाकों को जोड़ने के आरोप भी थे। माना जा रहा है कि उसके मारे जाने से ISIS की गतिविधियों को बड़ा झटका लग सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबू-बिलाल का असली नाम अबू बक्र इब्न मुहम्मद इब्न अली अल-मैनुकी था। वह अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में ISIS से जुड़े ऑपरेशनों को संभालता था। अमेरिकी विदेश विभाग ने साल 2023 में उसे आधिकारिक तौर पर संगठन का वरिष्ठ नेता घोषित किया था। उसके कई अलग-अलग नाम भी सामने आए थे, जिनका इस्तेमाल वह पहचान छिपाने के लिए करता था।
ट्रंप ने इस ऑपरेशन के लिए नाइजीरिया सरकार और वहां की सेना का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा और किसी भी आतंकी संगठन को सुरक्षित ठिकाना नहीं मिलेगा। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद अफ्रीका में ISIS का नेटवर्क कमजोर पड़ सकता है।
हालांकि, इस ऑपरेशन को लेकर अभी तक ISIS की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ इसे आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मान रहे हैं।




