
नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े गए, सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया गया, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और कानून-व्यवस्था बाधित करने की कोशिश की गई। मामले की जांच के लिए पुलिस सीसीटीवी फुटेज, वायरल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद ले रही है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर मार्च निकालने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षा घेरा तोड़कर आगे बढ़ने लगे, जिसके बाद हालात बिगड़ गए। पुलिस का दावा है कि झड़प में कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए और सरकारी वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।
इस मामले में पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जिनमें से करीब 70 लोगों को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी भूमिका के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, लोक सेवक पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और गैरकानूनी जमावड़े समेत कई आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी भूमिका के अनुसार आगे कार्रवाई होगी।
दूसरी ओर, CJP ने पुलिस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पुलिस ने बिना पर्याप्त चेतावनी के लाठीचार्ज तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। संगठन ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए, जबकि पुलिस ने भी अपने कई जवानों के घायल होने की बात कही है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजनीतिक रंग ले चुका है। संसद से लेकर सड़क तक विपक्ष पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि संसद क्षेत्र की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सूचनाओं और सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक दावों से सावधान रहने की अपील की है।
