
रिपोर्ट: एम. रियाज़ हाशमी
चीन ने एलएसी पर फौज घटाई, लेकिन भारत ने युद्ध की रणनीतिक मुस्तैदी और बढ़ा दी रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, ड्रोन प्लाटून और 22,156 किमी सड़कों से नई तैयारी
रक्षा मंत्रालय की ‘वार्षिक रिपोर्ट 2025-26’ में बड़ा खुलासा: 2025 में एलएसी के सामने पीएलए की तैनाती में ‘महत्वपूर्ण कमी’, फिर भी 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड तैनात; भारत ने रुद्र ब्रिगेड, भैरव कमांडो, दिव्यास्त्र बैटरी, एएसएचएनआई ड्रोन और 22,156 किमी सड़कों से सीमा सुरक्षा मजबूत की
नई दिल्ली । 14 सितंबर, 2026 भारत-चीन सीमा पर लंबे समय से जारी सैन्य तनाव के बीच एक अहम बदलाव सामने आया है। वर्ष 2025 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी- लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) के सामने चीनी सेना यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में ‘महत्वपूर्ण कमी’ आई। हालांकि, चीन की सैन्य मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यह खुलासा रक्षा मंत्रालय की ‘वार्षिक रिपोर्ट 2025-26’ में किया गया है।
‘तहलका’ के हाथ लगी 324 पेज की इस रिपोर्ट के मुताबिक़, एलएसी से लगे इलाकों में 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड आकार की सैन्य टुकड़ियां तैनात थीं, जबकि इतनी ही क्षमता वाली 10 टुकड़ियां पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में मौजूद थीं। रिपोर्ट कहती है कि भारतीय सेना ने एलएसी के सभी सेक्टरों में अपनी तैनाती को ‘मजबूत, अच्छी तरह तैयार और किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार’ बताया है। यानी चीन की तैनाती में कमी के बावजूद भारत ने अपनी सीमा सुरक्षा और सैन्य तैयारी को कमजोर नहीं किया है।
10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड अभी भी तैनात
रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में उत्तरी मोर्चे की स्थिति का आकलन करते हुए कहा गया है कि 2025 में उत्तरी सीमाओं के सामने पीएलए की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी देखी गई। इसके बावजूद एलएसी के आसपास 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड आकार की टुकड़ियां तैनात रहीं। इतनी ही संख्या में सैन्य टुकड़ियां चीन के पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में थीं। कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड का मतलब ऐसी सैन्य संरचना से है जिसमें अलग-अलग सैन्य क्षमताओं और हथियार प्रणालियों को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता होती है। रिपोर्ट ने इन टुकड़ियों की वास्तविक सैनिक संख्या नहीं बताई है। इसलिए रिपोर्ट के आधार पर इन 10 टुकड़ियों को किसी निश्चित संख्या में सैनिकों में बदलना उचित नहीं होगा।
भारत ने एलएसी पर अपनी तैनाती को नहीं किया कमजोर
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण संदेश यह भी है कि चीनी सेना की तैनाती घटने के बावजूद भारतीय सेना ने एलएसी पर अपनी तैयारी बरकरार रखी है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि एलएसी के सभी सेक्टरों में भारतीय सेना की तैनाती मजबूत है और वह किसी भी उभरती आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अच्छी तरह तैयार है। भारत की ओर से सीमा पर सैन्य तैयारी को कम करने के बजाय उसे लगातार मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
भारत-चीन के बीच बातचीत बढ़ी तो सीमा पर स्थिरता भी आई
रिपोर्ट के मुताबिक़, 2025 में भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत फिर तेज हुई। रक्षा मंत्रालय का आकलन है कि इन बातचीतों से उत्तरी सीमाओं पर सकारात्मक बदलाव आए और स्थिरता बनी। 2025 में भारत और चीन के बीच वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (डब्ल्यूएमसीसी- परामर्श एवं समन्वय के लिए कार्य तंत्र) की 33वीं और 34वीं बैठक मार्च और जुलाई में हुई। इसके अलावा सीमा विवाद को सुलझाने के लिए स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (एसआर- विशेष प्रतिनिधि) स्तर की बातचीत भी फिर शुरू हुई। रिपोर्ट के मुताबिक़ दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में इस स्तर पर बातचीत हुई।
मोदी की चीन यात्रा और सैन्य कमांडरों की बैठक का भी असर
रिपोर्ट भारत-चीन संबंधों में आए सकारात्मक बदलाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ—शंघाई सहयोग संगठन) सम्मेलन की यात्रा से भी जोड़ती है। इसके अलावा पूर्वी लद्दाख में 25-26 अक्टूबर 2025 को 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। रिपोर्ट इसे वरिष्ठतम सैन्य कमांडर स्तर की बैठक बताती है। जमीनी स्तर पर भी पीएलए के साथ बॉर्डर पर्सनल मीटिंग्स (बीपीएम- सीमा पर तैनात सैन्य अधिकारियों की बैठकें) सभी सेक्टरों में जारी रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक़ ये बैठकें सौहार्दपूर्ण और मित्रवत माहौल में हुईं और इनमें विवादित मुद्दों को सुलझाने की कोशिश जारी रही।
भारत की सैन्य क्षमता बढ़ी, नई संरचनाएं और हथियार तैनात
रिपोर्ट की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तरी सीमाओं पर भारत ने अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए नई संरचनाएं और हथियार प्रणालियां तैनात की हैं। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ भारतीय सेना की रक्षा तैयारियों को नई पीढ़ी के उपकरणों और रुद्र ब्रिगेड, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी और भैरव बटालियन जैसी नई सैन्य क्षमताओं की तैनाती से मजबूत किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तरी सीमाओं पर बुनियादी ढांचे में भी तेजी से सुधार हुआ है। इसमें कनेक्टिविटी और सैनिकों के रहने के लिए बेहतर सुविधाओं पर विशेष जोर दिया गया है।
अब ‘रुद्र ब्रिगेड’ में बदली जा रही हैं पुरानी सैन्य संरचनाएं
भारतीय सेना ने एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड और एक माउंटेन ब्रिगेड को चरणबद्ध तरीके से रुद्र (ऑल आर्म्स) ब्रिगेड में बदलने को मंजूरी दी है। इसके आदेश जुलाई 2025 में जारी किए गए। इसका उद्देश्य विभिन्न सैन्य क्षमताओं को एक साथ लाकर युद्धक क्षमता को बढ़ाना है। बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए सेना ने भैरव लाइट कमांडो बटालियन बनाना शुरू किया है। एक भैरव बटालियन में 7 अधिकारी, 27 जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ), 230 अन्य रैंक होंगे। ऐसी 15 भैरव बटालियन बनाने के आदेश जारी किए गए हैं। इनका इस्तेमाल आधुनिक युद्ध, हाइब्रिड युद्ध और तेज गति वाले अभियानों में विशेष कार्यों के लिए किया जाएगा।
तोपखाने में भी बड़ा बदलाव, ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर जोर
रिपोर्ट के मुताबिक़ इस वर्ष तीन शक्तिबाण रेजिमेंट का अस्थायी गठन किया गया है। इसके अलावा पांच मौजूदा मीडियम रेजिमेंट को दिव्यास्त्र बैटरीमें बदले जाने की योजना है। इसी तरह सेना ने सभी इन्फैंट्री बटालियनों में चरणबद्ध तरीके से एक-एक एएसएचएनआई ड्रोन प्लाटून बनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य मानवरहित हवाई निगरानी यानी यूएएस (अनमैन्ड एरियल सर्विलांस) क्षमता बढ़ाना है।
एलएसी तक पहुंच आसान बनाने के लिए 22,156 किमी सड़कें
रिपोर्ट में सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर भी बड़ी जानकारी दी गई है। सीमा क्षेत्रों में कुल 476 सड़कों की करीब 22,156 किलोमीटर लंबाई के निर्माण की योजना है। पिछले पांच वर्षों में सीमा क्षेत्र की सामान्य स्टाफ सड़कों के लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब 27,668 करोड़ रुपये दिए हैं। इससे अग्रिम इलाकों में करीब 4,595 किलोमीटर सड़कें बनाई जा चुकी हैं। मौजूदा अवधि में करीब 1,113 किलोमीटर सड़क निर्माण पूरा हुआ है। उत्तरी पड़ोसी ने परतदार सड़क नेटवर्क विकसित किया है, जिसमें मुख्य मार्गों के साथ-साथ वैकल्पिक और अंतिम छोर तक पहुंचने वाली सड़कें शामिल हैं। इसी वजह से उत्तरी सीमाओं पर भारत के अपने सड़क ढांचे का समय पर विकास सैन्य दृष्टि से जरूरी बताया गया है।
सीमा पर रेल, 4जी और बिजली कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी
भारतीय सेना की परिचालन जरूरतों को देखते हुए सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार सड़क तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक़- चार रणनीतिक रेलवे लाइनों, 355 अग्रिम स्थानों तक 4जी कनेक्टिविटी, 108 अग्रिम स्थानों तक बिजली कनेक्टिविटी की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं और अलग-अलग चरणों में इन पर काम चल रहा है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 13 अक्टूबर 2025 को भारतीय सेना ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन के जरिए सैन्य विशेष ट्रेन से एक इन्फैंट्री बटालियन और जरूरी उपकरणों को कश्मीर घाटी में पहुंचाया।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी सेना ने अपनी क्षमताओं की समीक्षा की
रिपोर्ट के मुताबिक़ ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने अपनी क्षमता संबंधी कमियों की व्यापक समीक्षा की। इसमें सैन्य संरचना में बदलाव, विभिन्न सैन्य अंगों के बीच बेहतर तालमेल और नई तकनीकों को शामिल करने पर जोर दिया गया। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों के आधार पर सेना ने मानवरहित हवाई प्रणाली (यूएएस), ड्रोन रोधी प्रणाली (सी-यूएएस), घूमते हुए हथियार यानी लॉइटर म्यूनिशन, वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी क्षमताओं में जरूरी कमियों को दूर करने के लिए तत्काल खरीद पर भी जोर दिया।



