Chhattisgarh: बारूदी सुरंग में विस्फोट, 3 जवान शहीद

बस्तर में जमीन के नीचे छिपी मौत: 'नक्सल मुक्त' ऐलान के बाद पहला बड़ा हमला...
बस्तर में जमीन के नीचे छिपी मौत: 'नक्सल मुक्त' ऐलान के बाद पहला बड़ा हमला...

तहलका ब्यूरो।

रायपुर/ नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कांकेर में हुआ आईईडी ब्लास्ट महज एक हादसा नहीं है। यह उस खतरे का सबूत है जो जमीन के अंदर अब भी छिपा है। राज्य को 31 मार्च को ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किया गया था। इस घोषणा के बाद यह पहली बड़ी दुखद घटना है। यह ब्लास्ट बताता है कि कागजों पर जीत और जमीन की हकीकत में बड़ा अंतर है। कांकेर-नारायणपुर सीमा पर जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के जवान गश्त पर थे। वे नक्सलियों के पुराने छिपाए बमों को खोजने निकले थे। तभी एक जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी समेत तीन बहादुर जवान शहीद हो गए।

पुलिस को ये जानकारी सरेंडर कर चुके नक्सलियों ने दी थी। बस्तर आईजी के मुताबिक, अब तक सैकड़ों बम बरामद हो चुके हैं। नक्सलियों ने जाते-जाते बस्तर की जमीन में मौत का जाल बिछाया है। ये बम सालों तक आम लोगों और जवानों के लिए ‘टाइम बम’ बने रहेंगे। सरकार ने नक्सलवाद खत्म होने का एलान तो कर दिया, लेकिन जमीन के नीचे दबा बारूद कुछ और ही कहानी कह रहा है।

संजय गढपाले और कृष्णा कोमरा की शहादत कई सवाल छोड़ गई है। क्या शांति का ऐलान करने से पहले पूरे इलाके से बम हटा लेना जरूरी नहीं था? क्या हमें बम खोजने के लिए और भी आधुनिक मशीनों की जरूरत है? अभी एक जवान परमानंद कोमरा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। यह घटना सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। बस्तर में अब भी कदम-कदम पर खतरा बरकरार है।