नई दिल्ली: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा आज से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश से श्रद्धालुओं की पहली खेप को रवाना किया, जो 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलने के मौके पर वहां मौजूद रहेगी। इस बार यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
अब तक करीब 18.25 लाख श्रद्धालु रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं, जो पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम जरूर है, लेकिन भीड़ का दबाव फिर भी काफी बड़ा माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी शुरू कर दी है। ऋषिकेश और हरिद्वार में काउंटर खुल चुके हैं, जहां श्रद्धालु आसानी से रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं।
यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए इस बार कई नए नियम भी लागू किए गए हैं। बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक रहेगी, हालांकि इसे लेकर स्पष्ट गाइडलाइन अभी सामने नहीं आई है कि इसे कैसे लागू किया जाएगा। वहीं केदारनाथ के गर्भगृह में अब श्रद्धालु गंगाजल या फूल नहीं चढ़ा सकेंगे और विशेष पूजा का समय भी बदल दिया गया है।
ट्रैफिक और भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन ने यात्रा मार्ग को अलग-अलग जोन में बांटा है। सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक ही वाहनों को चलने की अनुमति होगी, इसके बाद चेकपोस्ट पर रोक दी जाएगी। 54 हजार वाहनों के लिए 118 पार्किंग स्पेस बनाए गए हैं ताकि जाम जैसी स्थिति से बचा जा सके।
सुरक्षा के लिहाज से भी इस बार खास इंतजाम किए गए हैं। 48 हॉल्टिंग पॉइंट बनाए गए हैं, जहां आपदा की स्थिति में करीब 1.18 लाख लोग रुक सकते हैं। भूस्खलन की आशंका वाले 80 स्थान चिन्हित किए गए हैं, जहां इमरजेंसी टीमें तैनात रहेंगी।
इस बार की चारधाम यात्रा आस्था के साथ-साथ सुरक्षा और व्यवस्था का बड़ा टेस्ट भी मानी जा रही है।




