नई दिल्ली: Punjab के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने राष्ट्रपति Droupadi Murmu से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग रखी कि जो 7 राज्यसभा सीटें खाली हुई हैं, उन्हें दोबारा भरने का मौका AAP को दिया जाए। भगवंत मान ने कहा कि अगर संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो उसमें संशोधन किया जाना चाहिए।
आम आदमी पार्टी (आप) को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा में उसके 10 सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि ‘आप’ अपने मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटक गई है।
मान ने आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित एक पत्र राष्ट्रपति को सौंपा। उन्होंने ‘निर्वाचित’ और ‘चयनित’ शब्दों के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा, ‘‘वे ‘चयनित’ थे। इसलिए, उनकी सदस्यता रद्द कर दी जानी चाहिए। क्योंकि इन सांसदों को पंजाब की जनता द्वारा निर्वाचित किए गए विधायकों ने चुना है।’’
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में मान ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि भाजपा के पास (पंजाब में) केवल दो विधायक सीट हैं, जबकि राज्यसभा में उसके छह सांसद हैं। उन्होंने सवाल किया, “यह कैसे संभव है? क्या यह संविधान का मजाक नहीं है?”मान ने उन पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘ अगर वे दिल से इतने क्रांतिकारी हैं तो उन्हें अपनी सीटों से इस्तीफा दे देना चाहिए था। आम आदमी पार्टी किसी और को भेज सकती थी।’’
मुख्यमंत्री ने पंजाब के सभी आम आदमी पार्टी विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेज भी राष्ट्रपति को सौंपे, जिसमें छह सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की गई थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी बात सुनी और कहा है कि वह इस मामले पर संवैधानिक Experts से चर्चा करके जवाब देंगी। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को लेकर मान ने कहा कि भाजपा ने हमेशा पंजाब की अनदेखी की है और वह राज्य के हितों के खिलाफ रही है।
मान ने मुर्मू से मुलाकात से पहले ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘‘पंजाब के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए हमारा संघर्ष जारी है। आज, हम आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों के साथ पंजाब के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करने और राष्ट्रपति के समक्ष राज्य की सशक्त आवाज उठाने के लिए रवाना हुए हैं।”
मान ने छह सांसदों के भाजपा में शामिल होने को “पूरी तरह से असंवैधानिक” और लोकतंत्र की “हत्या” करार दिया।

भाजपा पंजाब के लिए कट्टर विरोधी है… बोले – भगवंत मान | Photo Credit: Naveen Bansal
दरअसल, यह पूरा मामला आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने और भाजपा में शामिल होने से जुड़ा है। 24 अप्रैल को AAP को बड़ा झटका लगा था, जब उसके 10 में से 7 सांसदों—राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल—ने पार्टी छोड़ दी थी। इन सांसदों ने आरोप लगाया था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है, जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसी घटनाक्रम को लेकर अब राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है और AAP इस मामले को संवैधानिक स्तर पर चुनौती देने की बात कर रही है।




