
नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के अनुसार, 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क स्थापित नहीं हो सका है, जबकि 84 भारतीयों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है।
84 भारतीय सुरक्षित निकाले गए
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सुरक्षित निकाले गए 84 लोगों में त्रिशूली-1 रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना से जुड़े 63 भारतीय कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 नागरिक शामिल हैं।
तमिलनाडु के 21 नागरिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे और उन्हें प्रभावित क्षेत्र से निकालकर पहले काठमांडू लाया गया। बाद में वे शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए।
290 भारतीयों का पता लगाने की कोशिश
मंत्रालय के अनुसार, संपर्क से बाहर भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, पर्यटक और विभिन्न राज्यों से आए तीर्थयात्री शामिल हैं।
नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कई जगह सड़क, पुल और संचार व्यवस्था बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई है। ऐसे में लोगों की सही स्थिति का पता लगाने और उनसे संपर्क स्थापित करने में कठिनाई आ रही है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय अधिकारियों की टीमें नेपाल की संबंधित एजेंसियों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय कर रही हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों की भी तलाश
बाढ़ की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय यात्रियों के कई समूह भी आए हैं। शुरुआती सूचनाओं के अनुसार, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और अन्य राज्यों के नागरिक प्रभावित क्षेत्रों में थे।
दो तमिलनाडु समूहों को लेकर विशेष रूप से जानकारी जुटाई गई। कुछ भारतीय नागरिक चीन की ओर भी फंसे हुए बताए गए हैं और उनके सुरक्षित नेपाल लौटने तथा आगे निकासी के प्रयास किए जा रहे हैं।
भारत ने 47 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेजी
भारत ने नेपाल में जारी राहत और बचाव अभियान के समर्थन में 47.5 टन से अधिक आपातकालीन राहत सामग्री भेजी है।
इसमें टेंट, कंबल, स्वच्छता किट, सोलर लैंप, दवाइयां, भोजन, डी-वॉटरिंग पंप, जनरेटर और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। भारत की ओर से आगे भी अतिरिक्त सहायता भेजने की तैयारी की जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक और राहत उड़ान में करीब 13 टन अतिरिक्त सामग्री भेजे जाने की तैयारी थी, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर, खाद्य सामग्री, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और दवाइयां शामिल हैं।
24 घंटे काम कर रहा कंट्रोल रूम
भारतीय नागरिकों की तलाश और निकासी के लिए विदेश मंत्रालय ने 24 घंटे का कंट्रोल रूम बनाया है। काठमांडू और बीजिंग स्थित भारतीय मिशनों ने भी 24×7 हेल्पलाइन स्थापित की हैं।
भारतीय अधिकारी प्रभावित नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिवारों तक अपडेट पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
नेपाल में जारी है बड़ा राहत अभियान
नेपाल में फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर सड़कें, पुल, बस्तियां और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई दुर्गम इलाकों तक पहुंचना अभी भी कठिन बना हुआ है।
बाढ़ के बाद कुछ क्षेत्रों में नए खतरे की भी आशंका बनी हुई है। भोटेकोशी नदी प्रणाली के पास बने एक अवरोध से पानी जमा होने की खबरों के कारण अधिकारियों ने कुछ इलाकों में लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री से बात की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से फोन पर बातचीत कर बाढ़ में हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना जताई और भारत की ओर से मानवीय सहायता का आश्वासन दिया था।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत का मुख्य focus फिलहाल प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, स्थिति की पुष्टि और आवश्यकतानुसार निकासी पर है।
हालांकि 290 भारतीयों का अभी संपर्क में न होना चिंता का विषय है, लेकिन “संपर्क से बाहर” का अर्थ यह नहीं है कि इन सभी लोगों की मौत हो गई है। प्रभावित क्षेत्रों में संचार और परिवहन व्यवस्था बाधित होने के कारण कई लोगों से अस्थायी रूप से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
भारतीय और नेपाली एजेंसियां लगातार इन नागरिकों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटी हैं।


