
कोलकाता। आंकड़ों की बिसात, सियासी बयानबाजी और बढ़ते तनाव के बीच जारी चुनावी जंग में बृहस्पतिवार सुबह पश्चिम बंगाल के Jhargram में एक मतदान केंद्र पर माहौल तब दिलचस्प हो गया जब ‘रामलाल’ नाम का एक Elephant भटकते हुए अचानक वहां पहुंच गया।
जंगलमहल के घने जंगलों के बीच स्थित जितुशोल प्राथमिक विद्यालय में मतदान अभी ठीक से शुरू भी नहीं हो पाया था कि अप्रत्याशित “मेहमान” ने पूरे माहौल को रोचक बना दिया।
Poll Worker अपनी व्यवस्थाओं में जुटे थे और Voter धीरे-धीरे बूथ की ओर बढ़ रहे थे, तभी ‘रामलाल’ वहां पहुंच गया। कतार के पास से गुजरते हुए उसकी मौजूदगी ने कुछ क्षण के लिए मतदान की रफ्तार थाम दी- न कोई शोर-शराबा हुआ, न अफरा-तफरी, लेकिन सभी की निगाहें उसी पर टिक गईं।
राजनीतिक दबदबे और ताकत के प्रदर्शन के लिए चर्चित इस राज्य में यह एक अलग तरह का “शक्ति प्रदर्शन” था, जहां न नारे थे, न भीड़, लेकिन फिर भी सबका ध्यान उसी पर केंद्रित हो गया। लोढ़ाशुली रेंज से पहुंचे Forest Department के अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए हाथी को सावधानीपूर्वक सुरक्षित दूरी की ओर मोड़ दिया, जिसके बाद मतदान की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो सकी। कुछ ही मिनटों में बूथ पर सामान्य स्थिति बहाल हो गई, और अब लोग हाथी को देखने नहीं, बल्कि EVM का बटन दबाने के लिए कतार में खड़े थे।
पूर्वाह्न 11 बजे तक पहले चरण की 152 सीट पर करीब 41 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। अधिकारियों के अनुसार, रात में हुईं छिटपुट घटनाओं को छोड़कर मतदान प्रक्रिया काफी हद तक शांतिपूर्ण है।
Jangalmahal में मानव और वन्यजीव संघर्ष रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, हालांकि प्रशासन ने इस चुनौती को भी उतनी ही गंभीरता से लिया था, जितनी किसी राजनीतिक संवेदनशीलता को।
हाथियों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई दल सहित विशेष टीम पूरे क्षेत्र में तैनात की गई थीं। वन विभाग ने अपने ‘ऐरावत’ वाहनों को भी सक्रिय किया, जबकि अनुभवी ‘हुल्ला’ दल तैयार रखे गए थे-इस बार भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि भटके हुए हाथियों को मतदान केंद्रों से दूर रखने के लिए।
अधिकारियों ने बताया कि मतदानकर्मियों और वन विभाग के दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया गया। किसी भी वन्यजीव की आवाजाही पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आपात संपर्क व्यवस्था भी स्थापित की गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ‘रामलाल’ इस इलाके के लिए कोई अजनबी नहीं है। झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा और यहां तक कि पड़ोसी ओडिशा तथा झारखंड में अकेले विचरण करने वाले इस हाथी का ग्रामीण अक्सर धान, फल और सब्जियां देकर स्वागत करते हैं।



