Manipur से बड़ी खबर: सुरक्षित लौटे Naga-Kuki समुदाय के 31 बंधक

बंधक बनाए गए लोगों की घर वापसी से तनाव के बीच जगी राहत की उम्मीद :इस पूरी घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को हुई थी, जब कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने चर्च के तीन पदाधिकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी और चार अन्य को जख्मी कर दिया था। इसी तरह नोनी जिले में भी एक आम नागरिक को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद इन लोगों को अगवा कर अज्ञात पहाड़ी इलाकों में ले जाया गया था...

सफल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी : हाथ बंधे थे, आंखों पर पट्टी थी...' मणिपुर में उग्रवादियों की कैद से छूटी महिला ने बयां किया दर्द...Pic Credit : indiatodayne 
सफल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी : हाथ बंधे थे, आंखों पर पट्टी थी...' मणिपुर में उग्रवादियों की कैद से छूटी महिला ने बयां किया दर्द...Pic Credit : indiatodayne 

तहलका डेस्क। 

नई दिल्ली/इंफाल। मणिपुर के अशांत माहौल के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सक्रिय हथियारबंद समूहों के चंगुल से कुकी और नगा समुदायों के 31 नागरिकों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया है। कुल 38 लोगों को बंधक बनाया गया था, जिनमें से बड़ी संख्या में लोगों की वापसी के बाद अब सुरक्षाबलों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। 

इस पूरी घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को हुई थी, जब कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने चर्च के तीन पदाधिकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी और चार अन्य को जख्मी कर दिया था। इसी तरह नोनी जिले में भी एक आम नागरिक को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद इन लोगों को अगवा कर अज्ञात पहाड़ी इलाकों में ले जाया गया था।
इस रिहाई प्रक्रिया को धरातल पर उतारने में सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन ने बड़ी भूमिका निभाई है। मुक्त कराए गए लोगों में 12 नगा महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें मखान गांव के पास छोड़ा गया। इसके साथ ही सेनापति जिले से कुकी समुदाय की 10 महिलाओं और 4 पुरुषों को भी देर रात सुरक्षाबलों को सौंप दिया गया।

इस संवेदनशील संकट के बीच ‘सेल्सियस ऑफ डॉन बॉस्को’ के दो सदस्यों की भी अलग-अलग जगहों से सुरक्षित वापसी हुई है, जिनमें से एक व्यक्ति पड़ोसी राज्य नगालैंड का रहने वाला है। इसके अलावा एक अन्य कार्रवाई में 18 साल की एक युवती सहित तीन अन्य लोगों को भी पुलिस टीम के हवाले किया गया।
इस पूरे संकट के पीछे की भयावहता रिहा हुए लोगों के बयानों से साफ झलकती है। मुक्त हुई एक महिला ने आपबीती बताते हुए कहा कि अपहरण के दौरान उनके हाथ-पैर बांधकर आंखों पर पट्टी लगा दी गई थी, जिससे उन्हें रास्ते का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों से साफ था कि उन्हें किसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में रखा गया था। राहत की बात यह रही कि बंधकों के साथ कोई शारीरिक हिंसा नहीं की गई।
राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम के अनुसार, सरकार इस संवेदनशील मसले को सुलझाने के लिए लगातार सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क में थी। इस बीच, इस सामूहिक अपहरण की घटना के विरोध में कांगपोकपी जिले में कुकी और नगा समाज के लोगों ने अलग-अलग शांतिपूर्ण धरने देकर अपना आक्रोश भी व्यक्त किया था।

बहरहाल, इस रिहाई ने राज्य में जारी तनाव के बीच संवाद और शांति का एक नया रास्ता जरूर खोला है।