बॉलीवुड पर अंडरवर्ल्ड की गोलियों की दशकों पुरानी है कहानी

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सुजीत ठाकुर, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के विरोध के बीच वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने अपने पुराने रुख पर पुनर्विचार करेगी। पार्टी प्रमुख वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने 2023 में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े नए कानून का समर्थन करने पर अब अफसोस जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता के लिए उसकी नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त संस्थागत संतुलन जरूरी है।

जगन का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस विवाद ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

2023 के कानून पर अब बदला रुख

जगन मोहन रेड्डी ने माना कि 2023 में उनकी पार्टी ने जिस कानून का समर्थन किया था, उसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को शामिल नहीं किया गया था। नए कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को शामिल किया गया।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की व्यवस्था की गई थी। 2023 के कानून ने सीजेआई की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री को समिति में शामिल कर दिया। जगन अब इसी बदलाव को लेकर अपनी पार्टी के पहले के समर्थन पर अफसोस जताते हुए पुनर्विचार की बात कर रहे हैं।

‘एकतरफा’ प्रक्रिया में बदलाव की मांग

जगन ने मौजूदा नियुक्ति व्यवस्था को एकतरफा बताते हुए इसमें बदलाव की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता केवल उसके फैसलों से नहीं बल्कि उन लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया से भी जुड़ी है, जो देश में चुनाव कराने की जिम्मेदारी संभालते हैं।

उनका जोर चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका बहाल करने पर है। जगन के मुताबिक इससे नियुक्ति प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष के बीच बेहतर संस्थागत संतुलन कायम हो सकता है तथा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर उठने वाले सवालों को कम किया जा सकता है। ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 को देश के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के रूप में काम कर चुके थे। उनकी नियुक्ति उसी 2023 के कानून के तहत गठित चयन समिति की व्यवस्था के तहत हुई थी।

राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बदलाव

जगन का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनकी पार्टी ने 2023 में संबंधित कानून का समर्थन किया था। अब उसी कानून में किए गए बदलाव को लेकर अफसोस जताना जगन के रुख में बदलाव का संकेत है। आंध्र प्रदेश की राजनीति में टीडीपी-भाजपा गठबंधन के मुकाबले अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही वाईएसआरसीपी के लिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा आगे की राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर मतदाता सूची, एसआईआर और चुनावी संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच समन्वय बढ़ने की संभावना के बीच जगन का बयान राष्ट्रीय स्तर पर भी महत्व रखता है।