फिल्मकार मृणाल सेन का निधन

पद्म विभूषण और दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित मशहूर फिल्मकार मृणाल सेन का रविवार सुबह निधन हो गया है। वे लम्बे समय से बीमार थे।

करीब ९५ साल के मृणाल सेन का निधन रविवार सुबह साढ़े दस बजे कोलकाता के भवानीपोर स्थित उनके घर में हुआ। सेन को सिनेमा में उनके योगदान के लिए २००५ में ”दादा साहब फाल्के” पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

मृणाल सेन का जन्म १४ मई, १९२३ को फरीदपुर में हुआ था जो अब  बंगलादेश में है। मृणाल सेन को प्रयोगधर्मी फिल्मकार माना जाता था और उन्होंने अपनी फिल्मों में कई प्रयोग किये। उनकी फिल्म ”नील आकाश नीचे” से उन्हें बड़ी पहचान मिली। वैसे उनकी पहली फीचर पहली १९५५ में आई जिसका नाम था – ”रातभोर”। उनकी अगली फिल्म ”नील आकाशेर नीचे” ने उनको पहचान दी। उनकी तीसरी फिल्म ”बाइशे श्रावण” ने उनको अन्तर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि दिलाई और वे स्थापित हो गए। उनकी अधिकतर फ़िल्में बांग्ला भाषा में हैं।

उनकी कला के लिए भारत सरकार ने उन्हें साल २००५ में ”पद्म विभूषण”  किया। उन्हें कला में योगदान के लिए ”दादा साहब फाल्के” पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। यही नहीं साल २००० में उन्हें रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन ने अपने देश के ”ऑर्डर ऑफ फ्रेंडशिप” सम्मान से सम्मानित किया। मृणाल सेन ने ८० साल वर्ष की आयु में २००२ में आखिरी फिल्म ”आमार भुवन” बनाई थी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई हस्तियों ने सेन के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

मृणाल सेन की प्रसिद्ध फिल्में

रातभोर, नील आकाशेर नीचे, बाइशे श्रावण, पुनश्च, अवशेष, प्रतिनिधि, अकाश कुसुम, मतीरा मनीषा, भुवन शोम, इच्छा पुराण, इंटरव्यू, एक अधूरी कहानी, कलकत्ता १९७१, बड़ारिक, कोरस, मृगया, ओका,  उरी कथा, परसुराम, एक दिन प्रतिदिन, आकालेर सन्धाने, चलचित्र, खारिज, खंडहर, जेंनसिस, एक दिन अचानक, सिटी लाईफ-कलकत्ता भाई एल-डराडो,

महापृथ्वी, अन्तरीन, १०० ईयर्स ऑफ सिनेमा, आमार भुवन और सन्दर्भ।