डिजिटल अरेस्ट: ₹2.60 करोड़ की ठगी ने खोला ₹30 हजार करोड़ के नेटवर्क का राज; 400 से ज्यादा खातों में रकम का बंटवारा, 20 राज्यों में 163 एफआईआर

गोवा की एक महिला से 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर ₹2.60 करोड़ की ठगी की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क मिला है। 400 से ज्यादा खातों में रकम का बंटवारा, 20 राज्यों में 163 एफआईआर और 330 शिकायतों से जुड़े तार। नेटवर्क से जुड़े 27,850 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग लेन-देन और 2,904 करोड़ की नकद जमा सामने आई है। ईडी ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
ईडी ने 20 ठिकानों पर छापे मारे, ₹3.25 करोड़ नकद जब्त किया। यह प्रतिनिधि तस्वीर है।

नई दिल्ली, 24 अगस्त: | M. Riyaz Hashmi

गोवा की एक महिला से ठगी की जांच में ईडी को मिला बड़ा मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क; 400 से ज्यादा खातों में रकम का बंटवारा, 20 राज्यों में 163 एफआईआर और 330 शिकायतों से जुड़े तार

साइबर ठगी का ‘डिजिटल अरेस्ट’ मॉडल अब केवल पीड़ित को वीडियो कॉल पर डराकर रकम ऐंठने तक सीमित नहीं दिख रहा। गोवा में ₹2.60 करोड़ की ऐसी ही ठगी की जांच ने एक संगठित वित्तीय नेटवर्क का पता लगाया है, जिसमें साइबर फ्रॉड की रकम को बैंक खातों में पहुंचाने के बाद कई स्तरों पर घुमाया गया, नकदी में बदला गया और फिर आरबीआई से लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजर कंपनियों के जरिए विदेशी मुद्रा तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल कार्यालय ने 23 अगस्त 2026 को फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सय्यद को गिरफ्तार किया। दोनों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर गोवा की विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया।

जांच की शुरुआत नॉर्थ गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 9 जून 2025 को दर्ज एफआईआर से हुई, गोवा निवासी महिला को 21 मई से 2 जून 2025 के बीच ₹2,60,33,634 ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया

जांच की शुरुआत नॉर्थ गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 9 जून 2025 को दर्ज एफआईआर से हुई। इसमें एक गोवा निवासी महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराकर 21 मई से 2 जून 2025 के बीच ₹2,60,33,634 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। आरोपियों ने इन खातों को केंद्रीय एजेंसियों के ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ यानी गुप्त निगरानी खाते बताया था। गृह मंत्रालय लगातार स्पष्ट करता रहा है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ कोई वास्तविक कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, आरबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं और उनसे रकम ट्रांसफर कराते हैं।

कुछ घंटों में 400 से ज्यादा खातों में बंटी रकम, ₹27,850 करोड़ से ज्यादा के बैंकिंग लेन-देन, ₹2,904 करोड़ नकद जमा

ईडी के मुताबिक, गोवा की महिला से हासिल रकम किसी एक खाते में नहीं रुकी। कुछ ही घंटों के भीतर इसे पहले निष्क्रिय या हाल में खोले गए बैंक खातों में पहुंचाया गया और फिर 400 से ज्यादा लाभार्थी खातों में बांट दिया गया। आगे की जांच में कमोडिटी, ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेक्स कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों के बीच वित्तीय लेन-देन की कड़ियां मिलीं। इन संस्थाओं से जुड़े खातों में ₹27,850 करोड़ से ज्यादा के बैंकिंग लेन-देन सामने आए हैं। इसके अलावा करीब ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए गए। इनमें ₹584.70 करोड़ 61,448 बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीन (बीएनएएम) लेन-देन के जरिए जमा किए गए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹27,850 करोड़ का बैंकिंग लेन-देन और ₹2,904 करोड़ की नकद जमा नेटवर्क से जुड़े लेन-देन का वॉल्यूम है, न कि इतनी रकम की साइबर ठगी साबित हो चुकी है। ईडी के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े खातों के संबंध में अब तक 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 330 पीड़ित शिकायतें और 163 एफआईआर सामने आई हैं। इनमें रिपोर्ट किया गया कुल नुकसान ₹417.49 करोड़ है।

‘डमी डायरेक्टर’ से विदेशी मुद्रा तक, कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे के मकानों में रहने वाले लोगों को दिखाया गया डायरेक्टर, जबकि खाते दूसरों के नियंत्रण में

ईडी की जांच में सामने आया कि नेटवर्क से जुड़ी कुछ कंपनियां ऐसे लोगों के नाम पर थीं, जिनकी आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। इनमें कर्मचारी, ड्राइवर और एक कमरे के मकानों में रहने वाले लोग शामिल थे। इन्हें कंपनियों का डायरेक्टर दिखाया गया, जबकि बैंक खाते और वास्तविक कारोबारी गतिविधियां कथित तौर पर दूसरे लोगों के नियंत्रण में थीं। यानी कागजों पर सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले डायरेक्टर और उनके नाम पर करोड़ों-अरबों के लेनदेन- जांच एजेंसी के लिए यह नेटवर्क की वास्तविक संरचना समझने की अहम कड़ी बनी। ईडी के मुताबिक, साइबर फ्रॉड से हासिल रकम बैंक खातों में आने के बाद नकदी में बदली गई और फिर विदेशी मुद्रा में रूपांतरण के लिए आरबीआई से अधिकृत फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर (एफएफएमसी) कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया।

20 ठिकानों पर छापे, ₹3.25 करोड़ नकद जब्त, डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और वैधानिक रजिस्टर कब्जे में

ईडी ने पीएमएलए की धारा 17 के तहत 17 जुलाई 2026 को मुंबई और गोवा में 20 परिसरों की तलाशी ली। इसके बाद 21 अगस्त 2026 को भी आगे की तलाशी कार्रवाई की गई। इन कार्रवाइयों में ₹3.25 करोड़ नकद जब्त किया गया। डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और वैधानिक रजिस्टर भी कब्जे में लिए गए हैं, जिनकी जांच जारी है। अब जांच का दायरा केवल गोवा की महिला से ठगी गई ₹2.60 करोड़ की रकम तक सीमित नहीं है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि 400 से ज्यादा खातों को किसने नियंत्रित किया, कंपनियों के वास्तविक संचालक कौन थे, नकदी की आवाजाही किस तरह हुई और आरबीआई-अधिकृत विदेशी मुद्रा कारोबार तक कथित अपराध की रकम कैसे पहुंची।

डिजिटल अरेस्ट के पीछे छिपा ‘फाइनेंशियल रूट’, एक महिला से डिजिटल स्क्रीन पर शुरू हुआ अपराध बैंकिंग और वित्तीय ढांचे की कई परतों से गुजरता हुआ विदेशी मुद्रा तक पहुंचा

इस मामले की असली अहमियत रकम के आकार से ज्यादा उसके रूट में है। एक महिला से डिजिटल अरेस्ट के जरिए रकम ट्रांसफर कराई गई। कुछ ही घंटों में पैसा कई खातों में बंटा। फिर कंपनियों के खातों में पहुंचा, नकदी में बदला गया और विदेशी मुद्रा के रास्ते आगे बढ़ाने की व्यवस्था तक पहुंचा। यानी डिजिटल स्क्रीन पर शुरू हुआ अपराध बैंकिंग और वित्तीय ढांचे की कई परतों से गुजरता हुआ उस बिंदु तक पहुंचा, जहां रकम की मूल पहचान छिपाना आसान हो सकता है। ₹417.49 करोड़ के रिपोर्टेड पीड़ित नुकसान और ₹27,850 करोड़ से ज्यादा के बैंकिंग लेन-देन वाले इस नेटवर्क की जांच अब यह तय करेगी कि इसके पीछे वास्तविक नियंत्रण किसका था और साइबर ठगी की रकम को वैध कारोबारी गतिविधियों का रूप देने के लिए पूरी व्यवस्था कैसे काम कर रही थी। ईडी की आगे की जांच डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और कंपनियों के वास्तविक नियंत्रण से जुड़े सबूतों पर केंद्रित है।