‘एडविना माउंटबेटन के प्रभाव में थे नेहरू’

sdfdrजवाहर लाल नेहरू के बारे में यह बात जगजाहिर है कि उनके एडविना माउंटबेटन से गहरे ताल्लुकात थे. सच या झूठ ज्यादा किसी को नहीं पता. मित्रता तक तो ठीक है, लेकिन कल्पनाशील, गप्पप्रेमी भारतीय समाज ने इस संबंध को कई और मुकाम दिए हैं. कल्पना यहां तक जाती है कि एडविना माउंटबेटन से नेहरू के जिस्मानी संबंध थे. कहानीकारों और इतिहासकारों का एक समूह दोनों के संबंधों को इस तरह से परिभाषित करता है कि एडविना को अंग्रेजों ने नेहरू को बरगलाने के लिए भारत भेजा था. एडविना ने नेहरू को अपने प्रेम में फांसकर ऐसी तमाम शर्तें मनवाईं जो भारत के हित में नहीं थी. नेहरूविरोधी धारा के लोगों ने यह प्रचार भी किया है कि एडविना के कहने पर ही नेहरू पाकिस्तान के बंटवारे के लिए तैयार हो गये थे. कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि भारत से जाने के बाद नेहरू विदेश नीति से लेकर कई राजनीतिक मुद्दों पर एडविना की सलाह लिया करते थे.


गौर फरमाएं

एडविना माउंटबेटन की बेटी पामेला ह्रिक्स ने अपनी किताब डॉटर ऑफ एम्पायर में लिखा है कि उनकी मां एडविना भारत के पहले प्रधानमंत्री की करीबी दोस्त थीं. दोनों एक-दूसरे के साथ वक्त बिताते थे और खुश रहते थे. एडविना नेहरू के इस संबंध के बारे में पिता माउंटबेटन भी जानते थे. पार्टी और तेज रफ्तार जिंदगी की शौकीन लेडी माउंटबेटन के जीवन में नेहरू के आने के बाद ठहराव आया था और पामेला इस रिश्ते को आध्यात्मिक और रूहानी बताती हैं, जिसमें वासना के लिए कोई जगह नहीं थी.

यह सच है कि नेहरू और लेडी माउंटबेटन के बीच आत्मीय संबंध थे. दोनों एक-दूसरे से गहराई तक जुड़े हुए थे और 13 साल की इस दोस्ती में उन्होंने अच्छा वक्त बिताया. यह दो राजनेताओं या प्रमुख शख्सियतों के बीच बननेवाले रिश्ते की एक मिसाल है. नेहरू और एडविना के जिन चित्रों के आधार पर उनके संबंधों पर चुटकियां ली जाती हैं उनमें आपत्तिजनक कुछ भी नहीं है. दुनिया की तमाम शीर्ष राजनीतिक और प्रभावशाली शख्सियतों के बीच आत्मीय और गहरे संबंध रहे हैं. एक-दूसरे के बीच पत्र व्यवहार भी होता है. अपने समय की इन दो महत्वपूर्ण हस्तियों के बीच का संबंध भी कुछ कुछ ऐसा ही था.