हरियाणा को नशामुक्त बनाने के लिए अभियान

हरियाणा में नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। नशा तस्करों की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया जा रहा है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार जनभागीदारी, कम्युनिटी पुलिसिंग और नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों को जब्त एवं ध्वस्त करने जैसी सख्त कार्रवाई के माध्यम से हरियाणा को नशामुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चला रही है।

मुख्यमंत्री पंचकूला में ‘हरियाणा उदय अभियान के तहत आयोजित “नशा मुक्त हरियाणा के लिए एनजीओ एवं केमिस्ट एसोसिएशन संवाद कार्यक्रम” को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित लोगों को नशामुक्त हरियाणा की शपथ भी दिलाई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशाखोरी केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि समाज, परिवार, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार कानून बनाकर और पुलिस कार्रवाई के जरिए नशा तस्करी पर अंकुश लगा सकती है, लेकिन इस बुराई का स्थायी समाधान तभी संभव है जब पूरा समाज इसे जन आंदोलन का रूप देकर इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हो।

उन्होंने बताया कि नशामुक्त हरियाणा अभियान को गांव-गांव और शहर-शहर तक पहुंचाने के लिए जिला और स्थानीय स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इनमें एसडीएम, बीडीपीओ, ग्राम सरपंच तथा नशा मुक्ति अभियान से जुड़े स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो जनजागरूकता और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ उसके आत्मविश्वास, परिवार, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्र की ऊर्जा को भी नष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और हरियाणा के युवाओं ने खेल, शिक्षा, विज्ञान और उद्योग सहित अनेक क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है। यदि यही युवा नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की हार होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल नशा तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि समाज में नशे की मांग को भी समाप्त करना है। इसके लिए जागरूकता, पुनर्वास और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि नशा तस्करों की संपत्तियां जब्त की जा रही हैं और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि नशे के कारोबार के प्रति सरकार की नीति पूरी तरह से ‘जीरो टॉलरेंस’ की है।

सैनी ने स्वयंसेवी संगठनों से आह्वान किया कि वे हर गांव, वार्ड और मोहल्ले तक पहुंचकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि नशे के शिकार लोगों को समाज से अलग-थलग करने के बजाय उन्हें विश्वास, मार्गदर्शन और सकारात्मक वातावरण देकर मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “किसी भी व्यक्ति को आजीवन नशेड़ी मान लेना उचित नहीं है। यदि उसे अपनापन और सही वातावरण मिले तो उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।”

केमिस्ट समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दवा विक्रेता केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि समाज के विश्वास की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने अपील की कि नशे के रूप में दुरुपयोग की आशंका वाली दवाओं की बिक्री पूरी जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ की जाए ताकि वे गलत हाथों में न पहुंचें।

कार्यक्रम के दौरान केमिस्ट एसोसिएशन और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन प्रणाली की प्रभावी निगरानी और दवा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने का सुझाव दिया। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि जनहित में प्राप्त सभी व्यावहारिक सुझावों पर गंभीरता से विचार कर उन्हें लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक, नवाचार और स्टार्टअप के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। ऐसे समय में यदि कोई युवा नशे की ओर मुड़ता है तो देश एक संभावित वैज्ञानिक, खिलाड़ी, उद्यमी या नवोन्मेषक खो देता है। उन्होंने कहा कि हर युवा का जीवन अमूल्य है और उसका लक्ष्य विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना होना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं, उनसे खुलकर संवाद करें और उन्हें मोबाइल की दुनिया से अधिक परिवार से जोड़ें। उन्होंने कहा कि परिवार तभी सुरक्षित रहेगा जब माता-पिता अपने बच्चों के मित्र बनेंगे।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें, अपने परिवार और समाज को भी इससे बचाएं तथा यदि कहीं नशा तस्करी की जानकारी मिले तो पुलिस, हरियाणा एनसीबी हेल्पलाइन या मानस पोर्टल पर इसकी सूचना दें।

उन्होंने कहा, “नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता से ही हरियाणा को नशामुक्त बनाया जा सकता है।”