एम. रियाज़ हाशमी। चंडीगढ़/नई दिल्ली
एयर टैक्सी का भविष्य कैसा होगा, इसकी एक झलक चंडीगढ़ की एक एयरस्ट्रिप पर देखने को मिली। यहां पंजाब की विमानन स्टार्टअप कंपनी नलवा एयरो ने अपने बॉक्स-विंग इलेक्ट्रिक विमान के छोटे मॉडल का शुरुआती उड़ान परीक्षण किया। विमान ने जमीन से ऊपर उठकर हवा में स्थिर रहने और आगे की ओर उड़ान भरने का प्रदर्शन किया। इस परीक्षण की खासियत केवल विमान का इलेक्ट्रिक होना नहीं, बल्कि उसके पंखों का डिजाइन भी है। कंपनी के मुताबिक, इस आकार के विमान में बॉक्स-विंग डिजाइन, इलेक्ट्रिक मोटर और पूरी तरह दिशा बदल सकने वाले रोटरों का यह संयोजन दुनिया में पहली बार उड़ान परीक्षण तक पहुंचा है।
इस तकनीकी प्रयोग को देखने के लिए रक्षा, विमानन और तकनीक से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ भी मौजूद थे। शुरुआती उड़ान परीक्षण के बाद अब कंपनी का लक्ष्य पांच सीटों वाला ऐसा विमान विकसित करना है, जिसका इस्तेमाल एयर टैक्सी, एयर एंबुलेंस, माल ढुलाई और पर्यटन जैसी सेवाओं में किया जा सके। नलवा एयरो 2028 के अंत तक अपनी एयर टैक्सी लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, इससे पहले कंपनी को विमान के विकास, परीक्षण और जरूरी नियामकीय मंजूरियों से गुजरना होगा।
नलवा एयरो के संस्थापक एवं सीईओ कुलजीत सिंह संधु ने ‘तहलका’ से कहा, “हमारा विजन सिर्फ एक और इलेक्ट्रिक विमान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बिल्कुल अलग डिजाइन के जरिए विमान की वायुगतिकी को नए सिरे से परिभाषित करना है। एक सदी से भी पहले जिस वैज्ञानिक अवधारणा पर काम किया गया था, उसे अब भारत में स्वदेशी शोध और इंजीनियरिंग के जरिए व्यावहारिक विमानन तकनीक में बदलने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मिले प्रोत्साहन ने हमें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम विमानन तकनीक विकसित करने की अपनी यात्रा तेज करने के लिए नया आत्मविश्वास और प्रेरणा दी है।”
पंखों के डिजाइन ने बदला उड़ान का तरीका
पारंपरिक विमानों में पंखों का फैलाव दोनों ओर होता है। नलवा एयरो इससे अलग बॉक्स-विंग डिजाइन पर काम कर रही है। आसान भाषा में समझें तो इसमें पंखों की संरचना को इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक बॉक्स जैसी आकृति बनाते हैं। कंपनी का मानना है कि इससे हवा के प्रवाह और विमान की उड़ान के दौरान पैदा होने वाले खिंचाव को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। जर्मन वैज्ञानिक लुडविग प्रांटल सहित विमानन और वायुगतिकी के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों ने एक सदी से भी पहले पंखों की ऐसी संरचनाओं के सिद्धांतों पर काम किया था। अब नलवा एयरो इस अवधारणा को इलेक्ट्रिक विमान के साथ जोड़कर व्यावहारिक रूप देने की कोशिश कर रही है। कंपनी के शुरुआती आंतरिक अध्ययनों के मुताबिक, चुने गए कुछ पारंपरिक विमान डिजाइनों की तुलना में कुछ वायुगतिकीय मानकों में 40% तक सुधार की संभावना है।
हेलीकॉप्टर की तरह उठेगा, विमान की तरह उड़ेगा
इस एयर टैक्सी की दूसरी अहम विशेषता इसके रोटर हैं। यानी घूमने वाले पंखे, जो हवा को नीचे की ओर धकेलकर विमान को ऊपर उठाने में मदद करते हैं। विमान में इनकी दिशा बदलने की व्यवस्था है। उड़ान भरते समय रोटर नीचे की ओर जोर पैदा करते हैं, जबकि आगे की उड़ान के दौरान उनकी दिशा बदली जा सकती है, ताकि विमान आगे बढ़ सके। यही वजह है कि ईवीटीओएल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) विमान को पारंपरिक रनवे पर दौड़कर उड़ान भरने की जरूरत नहीं होती। यह ऐसा इलेक्ट्रिक विमान है, जो हेलीकॉप्टर की तरह सीधे ऊपर उठ सकता है और नीचे उतर सकता है। चंडीगढ़ में किया गया परीक्षण अभी छोटे मॉडल का है। इसमें हवा में स्थिर रहने और आगे बढ़ने की क्षमता का प्रदर्शन हुआ है। अब इसी डिजाइन को पूर्ण आकार के विमान में विकसित कर उसका वजन, संतुलन, ऊर्जा की जरूरत और सुरक्षा संबंधी प्रदर्शन होगा।
2028 के अंत तक एयर टैक्सी उतारने का लक्ष्य
नलवा एयरो पांच सीटों वाला ईवीटीओएल विमान विकसित कर रही है। इसमें एक पायलट और यात्रियों के लिए सीटों की व्यवस्था प्रस्तावित है। कंपनी इसे शहरी एयर टैक्सी के अलावा एयर एंबुलेंस, माल परिवहन, पर्यटन और रक्षा क्षेत्र में उपयोग के लिए भी विकसित करना चाहती है। कंपनी की योजना 2028 के अंत तक एयर टैक्सी लॉन्च करने की है। लेकिन छोटे मॉडल का सफल उड़ान परीक्षण और यात्रियों को ले जाने वाले पूर्ण आकार के विमान का प्रमाणन दो अलग-अलग चरण हैं। पूर्ण आकार के विमान को विकसित करने के बाद विमान को नियामकीय प्रमाणन और व्यावसायिक संचालन के लिए जरूरी अनुमतियां हासिल करनी होंगी। इसलिए 2028 का लक्ष्य कितना व्यावहारिक साबित होगा, यह आने वाले परीक्षणों और प्रमाणन की प्रगति से तय होगा।
डीजीसीए से डिजाइन संगठन की हो चुकी मंजूरी
नलवा एयरो को जून 2025 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से पांच या उससे अधिक सीटों वाले ईवीटीओएल विमान की श्रेणी में डिजाइन संगठन की मंजूरी मिली थी। कंपनी के मुताबिक, उसके विमान के टाइप सर्टिफिकेशन यानी विमान के डिजाइन और सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने के प्रमाणन के लिए आवेदन जनवरी 2026 में स्वीकार किया गया। डिजाइन संगठन की मंजूरी का अर्थ है कि कंपनी को निर्धारित दायरे में विमान डिजाइन करने की क्षमता के लिए मान्यता मिली है। टाइप सर्टिफिकेशन और नियमित व्यावसायिक उड़ान की अनुमति के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से मुलाकात के दौरान कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुलजीत सिंह संधू और मुख्य तकनीकी अधिकारी नेल्सन सालास ने परियोजना की प्रगति और उड़ान परीक्षण की जानकारी दी। मंत्री ने स्वदेशी विमानन तकनीक विकसित करने के प्रयासों को प्रोत्साहित किया और अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से पोस्ट के जरिए इसकी प्रशंसा भी की।
विमान के साथ जमीन पर भी तैयार होगा पूरा ढांचा
एयर टैक्सी की उड़ान केवल विमान तैयार होने से संभव नहीं होगी। इसके लिए ऐसे वर्टिपोर्ट भी चाहिए, जहां विमान सीधे ऊपर उठ सके और सुरक्षित तरीके से उतर सके। दिल्ली-एनसीआर जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में रूफटॉप वर्टिपोर्ट, मेट्रो स्टेशनों के साथ परिवहन का तालमेल और एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी संभावित विकल्प हैं। लेकिन किसी भी इमारत या मेट्रो स्टेशन को वर्टिपोर्ट बनाने से पहले उसकी संरचनात्मक क्षमता, अग्नि सुरक्षा, यात्रियों की आवाजाही, आपातकालीन निकासी और हवाई मार्ग की उपयुक्तता की जांच जरूरी होगी। इलेक्ट्रिक विमान के लिए पर्याप्त चार्जिंग व्यवस्था, बैटरी की सुरक्षा, उड़ानों के बीच कम समय में दोबारा संचालन की क्षमता और हवाई यातायात के साथ समन्वय भी महत्वपूर्ण होगा। विमान को सुरक्षित उड़ाने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि शहरी आबादी के ऊपर उसका संचालन सुरक्षित और व्यावहारिक होगा।
तहलका एक्सप्लेनर: क्या है ईवीटीओएल, कैसे हवा में उड़ेगी यह टैक्सी?
कल्पना कीजिए कि गुरुग्राम से कनॉट प्लेस पहुंचने में सड़क पर एक से तीन घंटे लगने के बजाय आपको महज 10-12 मिनट लगें। न ट्रैफिक जाम, न लालबत्ती और न सड़क पर रेंगती गाड़ियां। इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी इसी भविष्य का वादा करती है। लेकिन क्या यह आम आदमी के लिए किफायती होगी और इसकी उड़ान कितनी सुरक्षित होगी?
हेलीकॉप्टर से कितना अलग? हेलीकॉप्टर भी सीधे उड़ान भरता है, लेकिन उसमें आम तौर पर ईंधन से चलने वाला इंजन होता है। ईवीटीओएल में इलेक्ट्रिक मोटरें इस्तेमाल होती हैं। इससे उड़ान के दौरान विमान में ईंधन जलाने से होने वाला स्थानीय उत्सर्जन नहीं होता और शोर कम होने की संभावना रहती है। हालांकि, वास्तविक शोर और पर्यावरणीय लाभ विमान के डिजाइन तथा इस्तेमाल की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।
किराया कितना होगा? नलवा एयरो की योजना के मुताबिक, दिल्ली में एयर टैक्सी सेवा का शुरुआती किराया करीब 500 रुपये से कम रखने की संभावना है। यह कंपनी का घोषित लक्ष्य है, अंतिम किराया नहीं। वास्तविक कीमत उड़ान की दूरी, यात्रियों की संख्या, विमान की लागत, चार्जिंग और परिचालन खर्च पर निर्भर करेगी। इसलिए अभी यह तो तय है कि सेवा आम यात्रियों के लिए बेहद किफायती साबित होगी।
क्या सफर सुरक्षित होगा? कंपनी के सीईओ कुलजीत सिंह संधू के मुताबिक, विमान में आठ रोटर होंगे। उनका दावा है कि दो रोटर फेल होने पर भी विमान क्रैश नहीं होगा और तीन रोटर बंद होने की स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग संभव होगी। कंपनी ने हेलीकॉप्टर की तुलना में इसे अधिक सुरक्षित और करीब 10 गुना शांत होने का दावा भी किया है। संबंधित तकनीकी परीक्षणों और स्वतंत्र सुरक्षा आकलन के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।
क्या बिना पायलट उड़ान संभव होगी? कंपनी की योजना शुरुआती तीन वर्षों तक यात्री उड़ानें पायलट के साथ संचालित करने की है। इसके बाद बिना पायलट वाली स्वचालित उड़ानों पर विचार किया जाएगा। ऐसी उड़ानों के लिए विमान की तकनीकी क्षमता के साथ नियामकीय प्रमाणन और डीजीसीए की जरूरी अनुमतियां भी अनिवार्य होंगी।
एयर टैक्सी को ऊर्जा कहां से मिलेगी? कंपनी की प्रस्तावित योजना में दो विकल्प हैं। पहला लिथियम-आयन बैटरी मॉडल है, जिसके एक बार चार्ज होने पर करीब 90 मिनट या 300 किलोमीटर तक उड़ान भरने का लक्ष्य बताया गया है। दूसरा हाइड्रोजन फ्यूल सेल मॉडल है, जिसकी प्रस्तावित उड़ान दूरी 800 किलोमीटर तक बताई गई है। इसमें हाइड्रोजन की रासायनिक ऊर्जा से बिजली बनाई जाती है और इसी बिजली से मोटरें चलती हैं।




