तहलका सन्डें स्पेशल-फेसबुक वाली लड़की -एक सच्ची कहानी 

अपराजिता का प्यार शाहजहां की तरह नहीं था जिसने अपने प्यार की खातिर संगमरमर का ताजमहल बनवा दिया था ...ना ही उसका लव आन लाईन आधुनिक दशरथ मांझी की तरह था जिसने अपनी पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीर कर सड़क बना दिया था ..यह तो ऐसा प्यार था जिसमें कोई इंतहान नहीं था जिसमें प्रेमी ने प्रेमिका के लिए कोई इबारत लिखने का काम नहीं किया था- अरविंन्द चतुर्वेदी

-अरविंन्द चतुर्वेदी 

मध्य प्रदेश में भिंड मुरैना के एक गांव में पुलिस रात बारह बजे एक दो कमरे के मकान में अठारह साल के लड़के से पूछ रही थी…कि बता लड़की कहां है…लड़के ने कहा मुझे नहीं पता …तभी एक सिपाही को बाथरूम से चूड़ी खनकने की आवाज सुनाई दी …सिपाही उधर बढ़ा ….वह एक अंधेरा कमरा था जिसे टायलेट में बदल दिया गया था… जहां पर साड़ी को ही पर्दे की तरह लटका कर अंधेरा कर के अलग किया गया था यह गाँव के लिए एक गुसलखाना था जहां महिलाएँ नहाने के साथ घर का बर्तन आदि धोने का काम करती है ,सिपाही ने पर्दे को हटाकर देखा तो एक तेरह साल लड़की जमीन पर बैठकर बर्तन धो रही थी …पुलिस ने लड़की की पहचान के लिए पिता को बाथरूम के पास बुलाया ….कहा देखिए क्या यही है ?आप की बेटी …!

पुलिस के साथ कोट, पैंट और टाई लगाए खड़ा व्यक्ति रोने लगा …कहा… साहब यही मेरी गुड़िया है … तेरह साल की एक लड़की मैक्सी पहने हाथ में बर्तन पकड़े खड़ी थी …लड़की कहने लगी -मै नहीं जाऊंगी …मैं यही रहना चाहती हूं …पर पुलिस के समझाने पर लड़की मान गई …और वह पुलिस के साथ लखनऊ लौटने के लिए राजी हो गई …यह कहानी है सोशल मीडिया लव आन लाईन की …जो किसी को झकझोर देती है ..जब वह पैदा हुई तो मानो पूरा परिवार खुशी से झूम उठा लोग रजत को बधाई दे रहे थे कि ……..तुम्हारे  घर लक्ष्मी पैदा हुई है अब सारे दुख दूर हो जाऐंगे …ऐसा हुआ भी रजत की दिनों -दिन तरक्की हो रही थी … पहले उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ज्वेलरी का एक शो रूम हुआ करता था ……..पर अपराजिता के पैदा होने के बाद रजत  ने उत्तर प्रदेश के अलग -अलग शहरों में पांच शो रूम खोल दिए थे ..मां इन्द्राणी भी बहुत खुश थी ।

वो हर दिन अपराजिता को बढ़ते हुए देख रही थी। अपराजिता लखनऊ के सबसे बड़े स्कूल में पढ़ रही थी ,आज कल लोगो की एक फितरत है कि जितना बड़ा और नामचीन स्कूल उतना सोसाईटी में एडमिशेन कराने वाले मां बाप का नाम …अपराजिता अब कक्षा आठ में पहुंच गई थी …मां को हमेशा अपराजिता के पढ़ाई की चिन्ता लगी रहती थी …इधर अपराजिता के पिता का व्यवसाय और बढ़ने लगा था, अब अपराजिता के परिवार में दो सदस्य और बढ़ गए थे ,जिसमें मां इन्द्राणी का समय अपराजिता के लिए घटने लगा था .. घर की जिम्मेदारी के साथ ही छोटे भाई -बहनों को पालने में धीरे धीरे अपराजिता को मां का समय कम मिलने लगा ….अपराजिता को लगने लगा कि उसके माता- पिता के पास उसके लिए समय नहीं है …अपराजिता अपना समय फोन पर बिताने लगी …यानी सोशल मीडिया पर जैसे फेसबुक ,मैसेंजर ,आदि पर वह घंटो चैट करती थी ..किशोर या किशोरियों के दिमाग पर किसी चीज की छाप बहुत जल्द पड़ती है, अगर वो आभासी दुनिया को ही वास्तविक मान लेते है उसके नतीजे इतने भयावह होते है कि आप कल्पना नहीं कर सकते।

आज कल सोशल मीडिया की वजह से तरह -तरह की बिमारियां किशोर और किशोरियों में घर कर गई है …जैसे कोई फेसबुक अपडेट छूट जाए तो वो बैचेन हो जाती है ..आपके दोस्त आन लाईन है और सेल्फी को लेकर आपके भीतर सनक है -इसे डिजिटल दीवानगी का नाम दिया गया है … अपराजिता भी इसी का शिकार हो गई थी ..वह धीरे -धीरे परिवार से दुर होती जा रही थी …अब वह आभासी दुनिया में पहुंच गई थी, अधिकतर लोगों के लिए आभासी दुनिया फूलों की सेज की तरह होती है इसमें हकीकत की जिन्दगी में मिलने वाले कांटे नदारद रहते है ….इसमें सपनो की दुनिया जैसी उड़ान होती है ..फेसबुक पर शानदार तस्वीरें…दोस्तों से मिलने वाले लाइक और कमेन्ट आर्दश जीवन की आकांक्षा पैदा कर रहे थे …तेरह साल की अपराजिता भी सोशल मीडिया के जरिए अपने स्टेटस को देखकर खुश हो रही थी। अपराजिता के फेसबुक पर सैकड़ों दोस्त थे …थे जिनसे उसकी मैसेंजर पर रोज बात होती थी ..कुछ ऐसे थे जिनके साथ वह अपने दिनभर की हर बात शेयर करती थी …कुछ दोस्त ऐसे थे जिनके फैंटेसी से वो चकाचौंध थी और भविष्य में उनके साथ जिन्दगी बिताने की इच्छा रखती थी।

मां इन्द्राणी बेटी की पढ़ाई को लेकर लगातार परेशान थी। इस बार परेशानी थोड़ी बढ़ गई ,जब स्कूल की प्रिंसिपल ने इन्द्राणी को बुलाकर अपराजिता की शिकायत की ? कहा कि आपकी बेटी पढ़ाई में बेहद कमजोर है … वो अक्सर मोबाइल फोन लेकर स्कूल आती है ,जिससे दूसरे बच्चो की आदत भी खराब हो रही है …अगर बेटी कक्षा 8 पास नहीं हुई तो हम उसे अगली क्लास में प्रमोट नहीं करेंगे ।प्रिंसिपल की धमकी ने इन्द्राणी को डरा दिया ,उसे लगा की अगर ये अपने क्लास में फेल हो गई तो वह रजत को क्या जवाब देगी ।स्कूल से लौटने के बाद इन्द्राणी ने अपराजिता को जमकर मार लगाई और खूब खरी खोटी सुनाई …अपराजिता को लगने लगा जिसे …मां …सबसे ज्यादा प्यार करती थी ,उसे सबके सामने ही दुत्कार दिया ।वो बेचैनी थी… उसकी अंगुलियां लगातार मोबाइल पर चल रही थी …लगातार वो एक के बाद दूसरे को मैसेज किए जा रही थी ….मां अपराजिता की हरकतों को देख रही थी पर उसने रात कुछ नहीं कहा …अगले दिन जब अपराजिता स्कूल जाने के लिए अपना बैग ले कर घर से निकल रही थी …उसी समय इन्द्राणी ने अपराजिता को रोका, उसका बैग चेक कर उसमें रखा मोबाइल निकाल लिया ..अपराजिता तड़प गई …ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके शरीर से किसी ने जान निकाल लिया हो पर उसने कुछ नहीं कहा …वह वहां से स्कूल जाने के लिए निकल गई ..स्कूल जाते समय रास्ते ही में परिवार से बदला लेने के लिए अपराजिता ने ऐसा प्लान तैयार किया जो किसी के होश उड़ा दे और इसके लिए उसने इस्तेमाल किया LOVE ON LINE का ….अपराजिता समय पर स्कूल पहुंची और उसने सभी कक्षाएं अटेंड की …स्कूल समाप्त होने के बाद उसने अपनी दोस्त नादिरा से कहा कि मुझे आंटी से कुछ पूछना है.. तुम्हारे साथ ही मै आपके घर चलुंगीं …नादिरा के अब्बा उसे लेने के लिए स्कूल आए थे ..अपराजिता भी उनके साथ हो ली …घर पहुंचते ही उसने नादिरा की अम्मी से कहां आंटी जी मुझे कुछ रिसर्च करना है क्या आप मुझे थोड़ी देर के लिए अपना मोबाईल दे देगी ….,नादिरा की अम्मी ने उसे मोबाईल दे दिया …मोबाइल मिलते ही अपराजिता की आंखों में जैसे चमक आ गई उसकी अंगुलियां लगातार मोबाइल पर घूम रही थी …आप को यहां बताते चले कि आंकड़े बताते है कि पांच में से दो युवा ….स्मार्टफोन के बगैर बेचैन होने लगते है …वही 96 प्रतिशत युवक और युवतियां हर सुबह उठते ही सबसे पहले सोशल मीडिया खंगालने का काम करते है या करती है …अपराजिता ने तुरन्त ही नादिरा की अम्मी के मोबाइल में फेसबुक एप डाउनलोड कर लिया ….उसके बाद उसने उसी फोन पर मैसेंजर एप डाउनलोड करके अपना अकाउंट खोला।

एक संदेश कल रात से उसके जबाव का इंतजार कर रहा था …यह संदेश उसके ऑनलाइन लव की तरफ से दुबई से आया था …इस संदेश में लिखा हुआ था कि जान मैं शनिवार को क्रुज से चल कर गोवा पहुंच जाऊंगा …तुम कैसे आओगी …इधर से अपराजिता ने जबाव दिया …मैं भी शनिवार को गोवा पहुंच जाऊंगी …इसी के साथ ही अपराजिता ने कहा… बाय जान और

फेसबुक एप को नादिरा की अम्मी के मोबाईल से डिलीट कर दिया … वापस घर की तरफ चल दी ।घर पहुंचने के बाद अपराजिता से उसकी मां ने प्यार से पूछा …..कैसा दिन रहा बेटा …अपराजिता ने कुछ नहीं कहा और अपने कमरे में चली गई …अपराजिता उस रात सो ना सकी वह जिन्दगी को लेकर तरह तरह के सपने देख रही थी …उसे लग रहा था कि वह कुछ ही दिनों में अपने सपनों के राजकुमार से मिलेगी जो उसके हर सपनों को पूरा करेगा ..वह अपने दुख देने वाले माता पिता से दूर होगी अब किसी काम को करने के पहले उसे किसी से परमिशन लेने की जरूरत नहीं होगी …अब उसे किसी की फटकार नहीं सुननी पड़ेगी अब वह किताबों के बोझ से पुरी तरह आजाद होगी इन्हीं सपनों के उधेड़बुन में कब सुबह हो गई अपराजिता को पता ही नहीं चला ..अगले दिन अपराजिता समय पर स्कूल के लिए निकल गई …स्कूल समाप्त करने के बाद वह नादिरा के साथ उसके घर गई …उसकी अम्मी का मोबाइल लिया

और एक बार फिर उसमें फेसबुक और मैसेंजर ऐप डाउनलोड किया… उसने अपने लव आन लाइन को लिखा…. मैं निकल रही हूं… शनिवार को गोवा में मिलते हैं… इसके बाद अपराजिता के दोस्त ने इंटरनेट कालिंग के जरिए अपराजिता से बात की और अपने आने की पूरी प्लानिंग समझा डाली। अपराजिता ने नादिरा की अम्मी के मोबाईल फोन के जरिए ओला ऐप बुक करवाया.. यह कैब कुछ देर बाद ही उसके दोस्त के घर आ गई…. कैब आने के बाद अपराजिता ने कैब ड्राइवर से पूछा की क्या गोवा चलोगे… तब ड्राइवर ने कहा पैसे अगर एडवांस मिलेंगे तो मैं गोवा चलूंगा… अपराजिता ने पूछा कितने पैसे लगेंगे… ड्राइवर का जवाब था… लगभग बाइस हजार रु… तब अपराजिता ने कहा मैं रूपए आपको गोवा में दूंगी… इस पर ओला ड्राइवर ने गोवा जाने के लिए मना कर दिया… तब तेरह साल की अपराजिता ने ड्राइवर को कहा भइया ऐसा करो आप मुझे चारबाग रेलवे स्टेशन छोड़ दो… मैं वही से गोवा चली जाऊंगी… जब अपराजिता नादिरा के घर से निकलने लगी तो उसने नादिरा को अपने पास बुलाया और धमकाने के अंदाज में कहा नादिरा मैं तुम्हें एक बात बताना चाहती हूं… नादिरा ने कहा क्या… फिर अपराजिता ने कहा कि मैं यहां से बाहर जा रही हूं और जहां मैं जा रही हूं उन लोगों से मैंने तुम्हारी अम्मी के मोबाईल से बात की है… जब मैं अपने घर वापस नहीं पहुंचूंगी तो पुलिस सबसे पहले तुम लोगों से ही पूछताछ करेगी… इसलिए मेरी तुम्हे सलाह है कि मेरे जाने के बाद तुम सिम और मोबाईल तोड़ कर फेंक देना… नादिरा ने अपराजिता के जाते ही मोबाईल और सिम दोनों तोड़कर फेंक दिया…

अपराजिता ट्रेन पकड़ने के लिए लखनऊ के चारबाग स्टेशन पहुंचती है तो उसे पता चलता है कि लखनऊ से गोवा के लिए कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं है… शातिर अपराजिता ने वहां खड़े पुलिस वाले से कहा की गोवा में मेरे परिवार के साथ दुर्घटना हो गई है क्या ऐसी ट्रेन है जो मुझे जल्द से जल्द गोवा पहुंचा दे… तब पुलिस वाले ने कहा की यहां से ऐसी कोई ट्रेन गोवा नहीं जाती पर अभी दो घंटे बाद यहां से पुष्पकम एक्सप्रेस मुम्बई जाएगी… तुम उससे मुम्बई जा सकती हो…………. इसके बाद उसी पुलिस वाले ने अपराजिता के लिए लखनऊ से मुम्बई के लिए टिकट खरीदा और उसे ले जाकर महिला डिब्बे में बिठा दिया… अपराजिता अपने लव आन लाइन से मिलने के लिए निकल चुकी थी… उसे ना अपने मां…. बाप की फिकर थी और ना ही परिवार की परवाह… उसने मोबाईल छिन जाने का अपने परिवार से ऐसा बदला लिया की वो शायद ही उसे भूल पाएं…

अपराजिता के घर ना लौटने पर उसके पिता ने थाने में जाकर गुमशुदा रिपोर्ट दर्ज करा दी… घर में मां का रो -रो कर बुरा हाल था.. इधर ट्रेन में अपराजिता ने मुम्बई स्टेशन पहुंचने के पहले अपनी सामने की सीट पर बैठी आंटी को अपनी झूठी प्राब्लम बता कर कुछ सर्च करने के लिए उनका मोबाईल मांग लिया था… इस बार अपराजिता खुश किस्मत थी.. कि सामने वाली आंटी के मोबाईल में फेसबुक अपलोड होता है… इसके बाद अपराजिता उस फोन में अपना एकाउंट खोल कर मैसेंजर पर जाती है पर उसमें दुबई से आने वाले दोस्त का कोई संदेश ना पाकर बेचैन हो जाती है… इसके बाद अपराजिता ने उसी फोन के जरिए दुबई वाले दोस्त को मैसेंजर के जरिए मैसेज भेजा… थोड़ी देर में उसका जबाब भी आ जाता है… दुबई वाले लव आन लाइन दोस्त ने अपराजिता से कहा कि जिस क्रुज से वो गोवा आने वाला था उसका क्रुज छुट गया है… अब वो गोवा शनिवार को नहीं आ पाएगा।

अपराजिता ने जैसे ही यह मैसेज देखा उसका हलक सूख गया… उसको समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे… अपराजिता ने जीवन में कोई कठिनाई नहीं देखी थी… मां बाप ने उसे बड़े अरमानों के पाला था। अपराजिता को चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा दिखाई दे रहा था… उसे लग रहा था की अब तक तो घर में सबको पता चल चुका होगा… मै कैसे वापस लौट सकती हूं घर जाने पर जमकर मार पड़ेगी… इसी उधेड़बुन में अपराजिता ने दो और लोगों को ट्रेन से ही संदेश भेजा… ये भी अपराजिता के लिए लव आन लाइन ही थे… इसमें एक गोवा के पांच सितारा होटल का मैनेजर था… जबकि दूसरा शख्स अठारह साल का राम सिंह था जो कल्याण रेलवे स्टेशन पर कैटरिंग यानि ट्रेनों में खाना सप्लाई करने का काम करता था… जैसे जैसे ट्रेन मुम्बई के नजदीक पहुंच रही थी वैसे वैसे अपराजिता के दिलों की धड़कन तेज हो रही थी… तभी मैसेंजर से बीप की आवाज़ आई अपराजिता ने मैसेंजर खोल कर देखा तो यह संदेश राम सिंह की तरफ से भेजा गया था …अपराजिता के संदेश के जवाब में राम सिंह ने लिखा कि मै कल्याण स्टेशन पर मिलूंगा…इस संदेश के मिलने के बाद अपराजिता की जान में जान आई ….उसे लगा कि बच गई मै..?  मैसेंजर के जरिए अपराजिता ने यह पूछना नहीं भूला कि तुमने किस रंग की शर्ट पहन रखी है …और वह यह बताना भी नहीं भूली की वह किस डिब्बे में बैठी है..

अल्बर्ट आइंस्टीन आफ मेडिसिन में न्यूरोलजिकल क्लीनिकल प्रोफेसर लूसी ब्राउन का कहना है कि ‘अपने लिए सही साथी की चाह बहुत त्रीव होती है …ब्राउन प्यार में डुबे लोगों के दिमाग का अध्ययन करती है उनका कहना है कि प्यार की इच्छा शरीर की समान्य प्रक्रिया है जैसे हमें भोजन पानी की जरूरत होती है वैसे ही लोग आन लाइन मैच पर आसानी से यकीन कर लेते है ।… जैसे ही ट्रेन कल्याण स्टेशन पहुंची राम सिंह प्लेटफार्म पर खड़ा इंतजार कर रहा था …तस्वीर में अपराजिता तो सुन्दर दिखती थी पर जब वह उसे अपने सामने देखा तो मानो होश खो बैठा…उसे इस बात का अंदेशा  भी नहीं था कि उसके साथ क्या होने जा रहा था … पिछली पीढ़ियों के मुकाबले आज के किशोर और किशोरियों को इंटरनेट की बेरोकटोक सेवा उपलब्ध है..लेकिन यह उन्मुक्त पीढ़ी उत्सुकता या हार्मोन के ज्वार को शांत करते है पर सेक्स नहीं करते पर कहा जाता है कि जो दिखता है वह हमेशा सच नहीं होता किताब पर आंखे गड़ाए किशोर या किशोरी कैन्टैसी के करीब होते है जो किसी भी माता पिता का होश उड़ा दे इन उपन्यासों में ऐसे उत्तेजक फैन्टैसी होती है जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे ।,हैरी पॉटर…के बाद जान ग्रीक का द फाल्ट इन आर स्टार्स और हारुकी मुराकाने की नॉर्वेजीयन वुड सबसे चर्चित किताबे है …ये किताबे ज्यादातर इश्क होने उसे खो देने और बेहिसाब सेक्सुअलिटी से भरी है …इसमें एफ (Fuck) वर्ड की भरमार है।

अपराजिता भी इससे अछूती नही थी कक्षा आठ में पढ़ने वाली अपराजिता ने इन किताबों को मानो आत्मारत कर लिया लिया था …राम सिंह ने ट्रेन से उतरते ही अपराजिता को पहचान लिया उसके पास पहुंच गया …अपराजिता ने जब राम सिंह को अपने सामने देखा तो उसके सपने हवा हो गए …उसकी हवाईयां उड़ी थी ..पर अपराजिता के पास कोई विकल्प नहीं था …अपराजिता ने राम सिंह को बिना कोई मौका दिए ही कह दिया कि मै तो तुम्हारे लिए ही अपना घर छोड़ कर आई हूं ..मुझे तुमसे शादी करना है …अगर शादी नहीं करोगी तो मै आत्महत्या कर लूंगीं …इतना सुनना था कि राम सिंह के चेहरे की खुशी फुर्र हो गई …वह सोच में पड़ गया …वही अपराजिता के पास अब कोई विकल्प नही था …उसने घर लौटने का विचार त्याग दिया था क्यों कि उसको डर था कि घर जाने पर उसके साथ पता नहीं क्या किया जाएगा। राम सिंह ने फटाफट अपना काम समाप्त किया और वही पास में रहने वाले अपने जीजा जितेन्द्र के घर की तरफ चल दिया …राम सिंह को लग रहा था कि जीजा से मुझे इस मामले में सलाह लेनी चाहिए …वही दूसरी तरफ अपराजिता के सारे सपने हवा हो गए थे …अपराजिता अपनी तुलना नर्ड से करती थी …जैसे किशोर और किशोरियों के लिए जान ग्रीन ने अपने यू ट्यूब वीडियो ब्लाक पर नाया शब्द गढ़ा है..”नर्डफाइटर्स”उन्होने नर्ड को आसम कहकर तारीफ की है…उन्होने किशोरों की दुनिया को दो वर्गों में बांटने का काम किया है नर्ड और कूल (बिंदास) तेरह वर्षीय अपराजिता बिंदास थी क्लास में उसके ग्रेड खराब जरूर थे पर फैशन करना पारदर्शी कपड़े पहनना …डेटिंग करना इंटरनेट पर अपनी सेक्सी तस्वीरें पोस्ट करना उसका प्रमुख शगल था …राम सिंह के जीजा का मुबाई के धारावी इलाके में एक खोली थी जिसमे राम सिंह का जीजा जितेन्द्र उसकी बहन रागिनी और उसका पांच साल का बेटा रामु रहता था …वही एक कोने में राम सिंह भी बिस्तर लगा कर जिन्दगी जी रहा था …जीजा से बात करने के बाद अगले दिन राम सिंह ने आर्य समाज मंदिर में अपराजिता से शादी कर ली …जहां अपराजिता को लेकर उनके माता पिता के मन में अनन्त सपने थे कि वो अपनी बेटी को किसी राजकुमार के साथ दुल्हन बनाकर भेजते ….अपराजिता भी कुछ ऐसा ही सोचती थी कि उसको लेने के लिए कोई राजकुमार आएगा पर ऐसा राजकुमार शायद उसने सपने में नहीं सोचा था ..परिस्थितिया किसी को कैसे मजबूर कर कैद कर लेती है ये शायद अपराजिता से बेहतर उस समय कोई नहीं जानता था..अपराजिता की हनीमून की पहली रात उधार लिए हुए कमरे में बीती ………ज जिसका इंतजाम राम के जीजा ने अपने दोस्त से धरावी में एक रूम की चाबी लेकर किया था …

अपराजिता के लिए जिन्दगी के सारे सपने हवा हो गए रोज छोटी छोटी जरुरतो के लिए संघर्ष ने उसके जिन्दगी के सभी सपनों को बिखेर रख दिया …इधर पुलिस भी अपनी investigation  में लगी हुई थी वो लगातार अपराजिता के सभी दोस्तों से पुछताछ कर रही थी …अपराजिता के गायब होने वाले दिन की सभी कड़ियों को जोड़ लिया था अपराजिता जब घर से निकली और क्लास खत्म कर स्कूल से आगे बढ़ी …उस ओला वाले ड्राइवर को भी खोज लिया गया जिसने उसे स्टेशन छोड़ने का काम किया था …पुलिस ने अपराजिता की सहेली और उसकी मां से भी पुछताछ कर चुकी थी …पुलिस पर लगातार दबाव था कि वो अपराजिता को ढुढ निकाले पर पुलिस की जांच आगे बढ़ो तो रहे पर नतीजे वही ढाक के तीन पात …पुलिस गोवा के मैनेजर और दुबई से मैसेज भेजने वाले दोनो लोगो को ट्रेस करने का भी काम कर लिया था दुबई के परिवार के लोग जो उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में रहते थे उनसे भी पुछताछ कर लिया गया था पर वहां से पुलिस को निराशा हाथ लगी …इसी बीच राम सिंह के जीजा ने अपना घर बदल दिया अब वो मुम्बई के दुर्गापुरी में शिफ्ट हो गया …लखनउ पुलिस ने राम सिंह के जीजा का पता लगा लिया था और पुलिस उससे पुछताछ के लिए मुम्बई पहुंच गई रात को पुलिस ने जब जितेन्द्र को फोन किया तो उसने बहाना बना दिया कि आज रात वह नहीं आ पाएगा पर पुलिस ने जब एक बार फिर दबाव बनाया तो वह सुबह आने के लिए तैयार हो गया अगले दिन जब जितेन्द्र का पुलिस से सामना हुआ तो पुलिस के सवाल पूछने पर वह टूट गया और उसने बताया कि राम सिंह अपराजिता को लेकर भिंड मुरैना चला गया है ..

पुलिस ने तुरन्त मध्यप्रदेश के भिंड मुरैना के लिए कुच कर दिया अगले दिन पुलिस रात बारह बजे के आस पास राम सिंह के जीजा जितेन्द्र के साथ राम सिंह के घर के बाहर खड़ी थी …अपराजिता को खोजा जा चुका था ….अपराजिता का प्यार शाहजहां की तरह नहीं था जिसने अपने प्यार की खातिर संगमरमर का ताजमहल बनवा दिया था …ना ही उसका लव आन लाईन आधुनिक दशरथ मांझी की तरह था जिसने अपनी पत्नी के लिए पहाड़ का सीना चीर कर सड़क बना दिया था ..यह तो ऐसा प्यार था जिसमें कोई इंतहान नहीं था जिसमें प्रेमी ने प्रेमिका के लिए कोई इबारत लिखने का काम नहीं किया था …फेदरल ट्रेड कमीशन के स्टीव बेकर का कहना है कि आन लाइन रोमांश का यह तरीका कैसे काम करता है ये मुझे नहीं पता पर इससे शिकार होने वाले लोगों की संख्या चौंकाने वाली जरूर है । ये तीन महीने अपराजिता के ऐसे बीते थे जिसे वो शायद ही जिन्दगी में याद करना चाहेगी पर अपराजिता के इस लव आन लाइन ने राम सिंह को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया जब की उसका कोई दोष नही था …अब अपराजिता के परिवार वालों ने उसे पढ़ने के लिए पं बंगाल भेज दिया है जहां पर उसके मोबाइल रखने पर परिवार ने प्रतिबन्ध लगा दिया है …वही राम सिंह एक बार फिर से कल्याण रेलवे स्टेशन पहुंच कर जिन्दगी के जद्दोजहद से दो चार कर रहा है अभी उसने दोबारा शादी नही की है …उसे लगता है कि शायद करोड़पति अपराजिता बालिग होने के बाद एक बार फिर से लव आन लाइन के तार जोड़ ले जिससे उसके जीवन में बहार लौट आए ।