तहलका की पड़ताल: जानलेवा मांझे का कारोबार

पूरे भारत में प्रतिबंधित चीनी मांझे के फलते-फूलते कारोबार का पर्दाफाश

पूरे देश में चीनी मांझा रखने, बेचने और बनाने पर एनजीटी के रोक वाले आदेश के बावजूद यह जानलेवा डोर पूरे भारत में खुलेआम बिक रही है। इस बार तहलका एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में इस गैर-कानूनी कारोबार का पर्दाफाश किया है, जो बेखौफ होकर कुछ लोग कर रहे हैं। तहलका एसआईटी की रिपोर्ट
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लखनऊ में चीनी मांझे से गला कटने के कारण एक 36 वर्षीय मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की दुखद मौत के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस साल फरवरी में कड़े आदेश जारी किए कि राज्य में मांझे से होने वाली सभी मौतों के मामले में हत्या का केस दर्ज किया जाए और जानलेवा पतंग की डोर की बिक्री रोकने में नाकाम रहने पर स्थानीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
दुबग्गा के रहने वाले मोहम्मद शोएब अपनी मोटरसाइकिल से लखनऊ के पुराने शहर वाले इलाके की ओर जा रहे थे, तभी यह जानलेवा हादसा हुआ। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चीनी मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पूरे राज्य में सख़्त कार्रवाई करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करें। पतंग उड़ाने वाली डोर, जिसे मांझा कहा जाता है, पर पारंपरिक रूप से एक खुरदरे मिश्रण की परत चढ़ाई जाती है, ताकि प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिद्वंद्वी की पतंग की डोर को काटा जा सके।
दुनिया भर में पतंग उड़ाने के दौरान गिरने से हर साल 15 साल और उससे कम उम्र के 37,000 से ज्यादा बच्चों और युवाओं की मौत हो जाती है। भारत में कांच की कोटिंग वाली सिंथेटिक डोर, जिसे आम तौर पर चाइनीज मांझा कहा जाता है, हर साल कई लोगों की जान लेता है। सिर्फ मकर संक्रांति और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों के दौरान ही यह जानलेवा डोर गले कटने और ऊंचाई से गिरने की वजह से हर साल 4 से 15 लोगों की जान ले लेती है।
2026 के स्वतंत्रता दिवस के नजदीक आते ही तहलका ने उत्तर प्रदेश और भारत के अन्य राज्यों में प्रतिबंधित चीनी मांझे के अवैध व्यापार की गुप्त पड़ताल की। हमें जो पता चला, वह चिंताजनक है, क्योंकि पतंग बेचने वाले दुकानदार बिना पुलिस की कार्रवाई के डर के भरोसेमंद ग्राहकों को खतरनाक डोर बेच रहे हैं।
‘आप मेरी रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। आप मेरा स्टिंग कर रहे हैं। अगर आप मुझसे चाइनीज मांझा खरीदना चाहते हैं, तो खरीद लें। आप इतने सारे सवाल क्यों पूछ रहे हैं? कृपया ध्यान रखें कि मैं किसी मुसीबत में न फँसूँ।’  -उत्तर प्रदेश के आगरा में रहने वाले पतंग सप्लायर नासिर खान उर्फ “मुन्ना”, तहलका के रिपोर्टर को प्रतिबंधित कांच-कोटेड डोर बेचते हुए।
‘मैंने हाल ही में कूरियर के माध्यम से कोलकाता से बैंगलोर पांच किलोग्राम गांजा भेजा। मैंने पैकेज पर दवा का लेबल लगाया और वह बिना किसी जांच-पड़ताल के निकल गया। मैं इसी तरह कोलकाता से दिल्ली तक चाइनीज मांझा भेजूंगा। कोलकाता में भी इस पर प्रतिबंध है, लेकिन इसे चुनिंदा खरीदारों को चोरी-छिपे बेचा जाता है। मैं नियमित रूप से दिल्ली में इसकी आपूर्ति कर सकता हूं।’ -जीतू सिंह, कोलकाता स्थित प्रतिबंधित चीनी मांझा का आपूर्तिकर्ता।
‘दिल्ली के शाहदरा के एक और सप्लायर श्याम कुमार 500 रुपए प्रति रोल के हिसाब से रेगुलर तौर पर चाइनीज मांझा सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। हालांकि अजनबियों से मिलने को लेकर वे बहुत आशंकित रहते हैं और फोन पर बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि वे मेरे जरिए डील करने को तैयार हैं।’ -जावेद खान (नाम बदला हुआ), दिल्ली में एक बिचौलिया।
भारत में पतंग उड़ाने से जुड़ी गहरी पुरानी यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि गैर-कानूनी सिंथेटिक डोर का लगातार इस्तेमाल एक पसंदीदा शौक को जानलेवा खतरे में बदल देता है। अपने प्रचलित नाम के बावजूद चाइनीज मांझा स्थानीय स्तर पर ही बनाया जाता है; इसे यह नाम इसलिए मिला है, क्योंकि इसका मुख्य कच्चा माल- सिंथेटिक पॉलीप्रोपाइलीन चीन से आयात किया जाता है।
पिसे हुए कांच की कोटिंग वाले घने नायलॉन या प्लास्टिक जैसे रेशों से बना यह धागा बेहद पतला, तेज और हल्का होता है, जिससे हवा में पतंगों के मुकाबले के दौरान दूसरी पतंगों को काटना आसान हो जाता है। हर साल मरने वालों और घायल होने वालों की संख्या बढ़ रही है। स्वतंत्रता दिवस और मकर संक्रांति से पहले और बाद के हफ्तों में चोट लगने और हताहत होने की घटनाएं लगातार तेजी सामने आती हैं, क्योंकि नेशनल कैपिटल रीजन और उसके आस-पास के इलाकों में लोग छतों पर पतंग उड़ाने के लिए इकट्ठे होते हैं।
यह धागा न केवल इंसानों का गला काटता है, बल्कि स्थानीय पक्षियों को भी बुरी तरह उलझाकर मार डालता है, जिससे पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचता है। इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक खतरा मानते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2017 में कांच की कोटिंग वाले सिंथेटिक धागे के निर्माण, बिक्री और सप्लाई पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया था। एनजीटी की रोक और पुलिस के सख़्ती से निगरानी करने के दावों के बावजूद चाइनीज मांझे की भारी मांग बनी हुई है। यह पारंपरिक भारतीय मांझे की तुलना में सस्ता और कहीं ज्यादा तेज है, इसलिए शौकीन लोग इसे ही पसंद कर रहे हैं।
आगरा, कोलकाता और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रतिबंधित चीनी मांझे की बिक्री को लेकर तहलका की जमीनी पड़ताल की। पड़ताल से पता चला कि यह प्रतिबंध ज्यादातर सरकारी फाइलों तक ही सीमित रहा है। तीनों शहरों में पतंग बेचने वाले तहलका के छिपे हुए कैमरे में खुलेआम प्रतिबंधित चीनी मांझा बेचते हुए पकड़े गए। पड़ताल के तहत तहलका रिपोर्टर ने सबसे पहले आगरा में नासिर से मुलाकात की। उसने खुद को दिल्ली में अपने पतंग के कारोबार के लिए चीनी मांझे की नियमित सप्लाई चाहने वाले खरीदार के तौर पर पेश किया। नासिर रिपोर्टर से मिलने के लिए प्रतिबंधित चीनी मांझा लेकर पहुंचा।
रिपोर्टर ने नासिर से यह पूछकर शुरुआत की कि वह किस तरह का मांझा लाए हैं। नासिर तुरंत पुष्टि करते हैं कि यह वही उत्पाद है, जिसके लिए रिपोर्टर ने अनुरोध किया था। जब उनसे पूछा गया कि क्या यह चाइनीज मांझा है? तो नासिर ने बताया कि यह प्लास्टिक और नायलॉन की कोटिंग वाला मांझा है, जिसमें कांच लगा होता है। इससे यह साफ हो गया कि वह क्या बेच रहे हैं।
रिपोर्टर : मांझा कौन-सा है आपके पास?
नासिर : वही है जो आपने मंगाया है।
रिपोर्टर : चीन का?
नासिर : प्लास्टिक का बोलते हैं, …चाइना का।
रिपोर्टर : बोलते तो चाइना का ही हैं; नायलॉन वाला, प्लास्टिक वाला, ….वही शीशे वाला।
नासिर : हां; वही वाला।

हमने नासिर से कहा कि हमें आगरा से दिल्ली तक चाइनीज मांझे की रेगुलर सप्लाई चाहिए, क्योंकि दिल्ली में आगरा के मुकाबले चाइनीज मांझे पर ज्यादा सख्ती से रोक लगी हुई है। नासिर ने जवाब दिया कि वह राजस्थान के जयपुर में एक सप्लायर को जानते हैं, जो वह प्रतिबंधित सामान रेगुलर तौर पर उपलब्ध करा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वह हमारे लिए एक सैंपल लाए हैं और जब भी नया स्टॉक आएगा, तो हमें बता देंगे, क्योंकि उनके पास हमारा कॉन्टैक्ट नंबर पहले से ही है
रिपोर्टर : देखो ऐसा है दिल्ली में तो है नहीं ये।
नासिर : बैन (प्रतिबंधित) है।


रिपोर्टर : पूरे इंडिया में बैन है, …इसकी सप्लाई चाहिए ज्यादा।
नासिर : देखिए मैं तो छोटा-मोटा हूं। अभी आप ये ले जाइए, अभी ऐसा एक डिस्ट्रीब्यूटर है जयपुर में।
रिपोर्टर : कौन है जयपुर में?
नासिर : ये मुझे मालूम करना पड़ेगा।
रिपोर्टर : डिस्ट्रीब्यूटर है जयपुर में? …चाइना मांझे का?
नासिर : हम तो छोटे-मोटे दुकानदार हैं, 1-2 लेकर बेचते हैं, आप चाहें से ले लीजिए। …..आगे से आपका नंबर मेरे पास है ही; जैसे मालूम पड़ेगा, आपको बता दूंगा…।

इसके बाद नासिर ने भविष्य में व्यापार को आसान बनाने के लिए अपनी पहचान और आगरा में अपनी दुकान का पता बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने पुष्टि की कि दुकान उनके नाम पर रजिस्टर्ड है। उन्होंने कहा कि कोई भी नासिर भाई के नाम से पूछ सकता है। मीटिंग खत्म होने से पहले उन्होंने यूं ही रिपोर्टर का नाम भी पूछा।
रिपोर्टर : आपकी दुकान वहीं है ना! मॉल के बाजार में?
नासिर : हां।
रिपोर्टर : किसके नाम से है?
नासिर : मेरे ही नाम से है। …नासिर भाई के नाम से पूछ लेना।
रिपोर्टर : पूरा नाम क्या है?
नासिर : नासिर भाई।
रिपोर्टर : खान, अली, …कुछ नहीं?
नासिर : हां; खान लगा लेना।
नासिर : आपका शुभ नाम क्या है?
रिपोर्टर : मेरा नाम आमिर अली …और आपका मुन्ना? …मुन्ना के नाम से पतंग की दुकान है ना?
नासिर : जी।

फिर नासिर ने हमें उस तरह-तरह के चाइनीज मांझे के बारे में बताया, जो वह बेच रहे हैं। उनके अनुसार, उनके पास स्टॉक में केवल गोल्ड वैरायटी है और वह भी सीमित मात्रा में। उन्होंने कहा कि वे आमतौर पर एक बार में सिर्फ एक या दो रोल ही बेचते हैं।
रिपोर्टर : फिलहाल बताओ, मांझे कौन-कौन से हैं?
नासिर : इसमें तो गोल्ड ही है बस।
रिपोर्टर : गोल्ड की एक ही वैरायटी है बस! और कुछ नहीं है?
नासिर : हम तो एक-एक, दो-दो लेकर ही बेचते हैं भाई!

इसके बाद रिपोर्टर ने नासिर से पूछा कि वह कितनी मात्रा में चाइनीज मांझा सप्लाई कर सकते हैं। नासिर ने कहा कि वह तुरंत किसी मात्रा के लिए पक्का वादा नहीं कर सकते और उन्हें पहले जांच करनी होगी। उन्होंने आगे कहा कि उनके पास अभी सिर्फ एक रोल है और वे भविष्य में इसकी उपलब्धता के बारे में रिपोर्टर को बाद में बताएंगे।
रिपोर्टर : तो ये बताओ, हमें कितना माल मिल सकता है?
नासिर : अब ये तो पूछकर बताऊंगा, ऐसे कैसे बता सकता हूं।
रिपोर्टर : आप कितना दे सकते हो?
नासिर : एक ही है मेरे पास तो।
रिपोर्टर : अभी नहीं, आगे?
नासिर : मैं आपको पूछकर बता दूंगा।

चीनी मांझे के बारे में कई सवाल पूछे जाने पर नासिर को रिपोर्टर के इरादों पर शक होने लगा। उन्होंने मुसीबत में पड़ने को लेकर चिंता जताई और कहा कि उन्हें अपने दो छोटे बच्चों की देखभाल करनी है। जब रिपोर्टर ने उसे भरोसा दिलाया, तो नासिर ने बैन किए गए चीनी मांझे का एक सैंपल निकाला और बदले में 600 रुपए मांगे।
रिपोर्टर : फिलहाल दिखा दो, कैसा है माल?
नासिर : अब ऐसी बात तो नहीं है, सर! …ये लाये हैं।
रिपोर्टर : क्या बात कर रहे हो?
नासिर : मेरे भी छोटे-छोटे दो बच्चे हैं। ….ऐसी बात तो नहीं, कोई डरने वाली बात?
रिपोर्टर : कोई बात नहीं है, आप क्यूं परेशान हो रहे हो? सुनो, मांझा यहीं दिखाओगे या कहां दिखाओगे?
नासिर : यहां देख लो, आप पैसे दे दो।
रिपोर्टर : मुझे पैसे बता दो कितने हुए?
नासिर : 600 रुपये दे दो मुझे आप।

जब रिपोर्टर ने कहा कि 600 रुपए ज्यादा हैं, तो नासिर ने उस कीमत का बचाव किया। उन्होंने बताया कि वह किसी और की गाड़ी उधार लेकर और अपनी जेब से पेट्रोल का खर्च उठाकर चाइनीज मांझे देने रिपोर्टर से मिलने आए हैं। उन्होंने अपने यात्रा खर्च के लिए अतिरिक्त 50 रुपये भी मांगे।
रिपोर्टर : 600 रुपीज ज्यादा नहीं है?
नासिर : तुम्हारे लिए आया हूं मैं यहां पे, अब मेरा पेट्रोल दे देना। 50 रुपीज और दे देना, भाई! दूसरे की गाड़ी लेकर आया हूं।



रिपोर्टर ने फिर नासिर से पूछा कि वह नियमित रूप से कितना चाइनीज मांझा सप्लाई कर सकता है। नासिर ने जवाब दिया कि अभी उसके पास स्टॉक में सिर्फ एक रोल है। उन्होंने रिपोर्टर को भरोसा दिलाया कि वे अपने सप्लायर से पता करेंगे और भविष्य में इसकी उपलब्धता के बारे में जानकारी देंगे।
रिपोर्टर : मुझे ये बताओ, मुझे कितना माल मिल जाएगा आपसे अभी?
नासिर : सर, मेरे पास तो अभी एक ही है। आगे होगा तो आपको दे दूंगा।
रिपोर्टर : मुझे चाहिए लगातार सप्लाई।
नासिर : मेरे पास नंबर तो है ही, मैं आपको पूछकर बता दूंगा।

फिर नासिर ने दिल्ली में हमारा पता पूछा और सुझाव दिया कि हम चीनी मांझा स्थानीय स्तर पर भी ले सकते हैं। उन्होंने जाफराबाद और नांगलोई में पतंग बेचने वालों का सुझाव दिया और कहा कि वे शायद प्रतिबंधित मांझा उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास कई तरह की पतंगें उपलब्ध हैं।
रिपोर्टर : अच्छा, पतंगें कौन-कौन सी हैं आपके पास?
नासिर : पतंगें सब मिलेंगी…, पन्नी की, कागज की, सब मिलेंगी। दिल्ली में कहां है आपकी दुकान?
रिपोर्टर : दिल्ली में मयूर विहार, जमुना पार।
नासिर : अच्छा, वहां जाफराबाद में भी तो है। तो जाफराबाद में आप उससे ले लेना, …राज से, लालू से; उन पर मिल जाएगा सब।
रिपोर्टर : चाइनीज मांझा है उनके पास?
नासिर : होगा, शायद।
रिपोर्टर : आपके जानकार हैं?
नासिर : मेरे ख्याल में नांगलोई में हो, शायद।

रिपोर्टर के कई सवालों के बाद नासिर को दूसरी बार शक हुआ और उसने पूछा कि क्या उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है। जब रिपोर्टर ने उसे भरोसा दिलाया कि वह ऐसा नहीं करेंगे, तो नासिर ने राहत की सांस ली और बताया कि उन्होंने चीनी मांझा एक वितरक से लिया है।
रिपोर्टर : ये बताओ, आपकी सप्लाई कहां है? कौन-से एरिया से है?
नासिर : हम तो लोकल हैं। 10-20 रुपीज खोल के बेचते हैं।
रिपोर्टर : आपकी सप्लाई कहां से है? कहां से आता है आपके पास?
नासिर : एक डिस्ट्रीब्यूटर देने आता है… अरे, आप रिकॉर्डिंग क्यूं कर रहे हो?
रिपोर्टर : अरे, नहीं।
नासिर : देखो, मेरी बात सुनो, मैं अभी दुकान से उठकर आया हूं। आप मुझे रिकॉर्ड कर रहे हो?
रिपोर्टर : देखो डरो मत, ये देखो, मैंने (मोबाइल फोन) अंदर कर लिया।
नासिर : नहीं, आप इतना क्यूं पूछ रहे हो? …आपने कहा पतंग का, बालूगंज से आया हूं।
रिपोर्टर : चलो, छोड़ो।
 
नासिर ने तीसरी बार पूछा कि क्या रिपोर्टर उसे रिकॉर्ड कर रहे हैं। इस बार उन्होंने रिपोर्टर से अल्लाह की कसम खाने को कहा कि कोई रिकॉर्डिंग नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि रिपोर्टर चीनी मांझा खरीदने के बजाय सवाल पूछने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि पूछताछ सिर्फ एक औपचारिकता है। शक होने के बावजूद उन्होंने रिपोर्टर का पता मांगा, ताकि वह भविष्य में मयूर विहार में उनसे मिल सकें।
नासिर : अब सर! ये तो आप फॉर्मेलिटी पूरी कर रहे हैं, आपको लेना-वेना कुछ नहीं है।
रिपोर्टर : ऐसी बात नहीं।
नासिर : तो आप इतनी चीजें क्यूं पूछ रहे हो? ये बताइए आप, …आप मुझे अपना एड्रेस दे दो। मैं आपके पास खुद आऊंगा मयूर विहार, पूरा एड्रेस दे दो।
रिपोर्टर : अच्छा, लिखो।
नासिर : आप लिखकर दे दो, आपके पास पेन तो होगा।
रिपोर्टर : व्हाट्सएप पर लिख लो, मोबाइल कौनसा है आपके पास?
नासिर : आप लिखकर सेंड कर दो मुझे।
नासिर (आगे) : अरे नहीं, भाई!
रिपोर्टर : अरे, लो.. लो; पैसे लो।
नासिर : आप देखिए, पहले अल्लाह-पाक की कसम खाइए। …आप कुछ कर तो नहीं रहे हैं?
रिपोर्टर : हम्म।
नासिर : सर, मेरे सिर पर हाथ रखो, छोटा भाई हूं।
रिपोर्टर : हां, लो पैसे लो।

हम नासिर को उसके लाए चाइनीज मांझे के लिए 700 रुपए देकर चले आए। हालांकि हमने इसकी डिलीवरी नहीं ली, क्योंकि भारत में चीनी मांझे की बिक्री और उसे अपने पास रखना प्रतिबंधित है।
नासिर के बाद हम दिल्ली में जीतू सिंह से मिले। जीतू सिंह कोलकाता के रहने वाले हैं और कोलकाता से दिल्ली तक बैन किए गए चीनी मांझे की सप्लाई करने के लिए तैयार हैं। जीतू ने तहलका को बताया कि बैन के बावजूद कोलकाता में शहर के लगभग हर बाजार में चीनी मांझा आसानी से मिल जाता है। उनके अनुसार, पुलिस के आते ही दुकानदार इसे छिपा देते हैं और इसकी जगह सूती मांझा दिखाते हैं। पुलिस के जाते ही प्रतिबंधित मांझे की बिक्री फिर से शुरू हो जाती है। उनका दावा है कि पूरे शहर में यह आम बात है।
रिपोर्टर : अब बता, चाइनीज मांझा की…. कहां-कहां मिल रहा है कोलकाता में?
जीतू : चाइनीज मांझा कोलकाता में हर जगह मिलता है। बैन है, पर पुलिस आता है, तो सब छुपा देता है।
रिपोर्टर : कौन-कौन सा मार्केट है?
जीतू : कोलकाता पूरा ही मार्केट है। कोलकाता में आप कहीं पर भी छोटा-सा दुकान ले लो, बड़ा-सा दुकान ले लो; जब गाड़ी (कैरिंग पुलिस ऑफिसर) दिखता है, सब छुप जाता है। धागे वाला सामने चालू हो जाता है। फिर जब गाड़ी गया, फिर चाइनीज वाला शुरू हो जाता है।

जब उन इलाकों के नाम बताने को कहा गया, जहां चीनी मांझा बिकता है, तो जीतू ने कोलकाता में टीटागढ़ और बड़ा बाजार की ओर इशारा किया। उनका दावा है कि बैन किया गया मांझा पूरे शहर में मिल रहा है, लेकिन वे खासतौर पर इन दो बाजारों का जिक्र करते हैं। उनके अनुसार, बड़ा बाजार में चीनी मांझा चौबीसों घंटे मिलता है। वह इसे ऐसी चीज के तौर पर पेश करते हैं, जो पाबंदी के बावजूद आसानी से मिल जाती है।
रिपोर्टर : कौन-कौन से इलाके हैं कोलकाता के जहां चाइनीज मांझा मिलता है?
जीतू : वहां हमको चाइनीज मांझा का नाम नहीं पता, वो लोग लेकर आता है, रंग-बिरंगी।
रिपोर्टर : लेकिन इलाका कौन-कौन सा है?
जीतू : अच्छा, इलाका हो गया टीटागढ़।
रिपोर्टर : ये कोलकाता में है?
जीतू : हां, कोलकाता में।
रिपोर्टर : साउथ, ईस्ट, नॉर्थ, वेस्ट… कौन-सी जगह?
जीतू : साउथ में… सब जगह में हैं। हद से आधा-एक घंटे का रास्ता है… सब कुछ मिलेगा। टीटागढ़ हो गया. बड़ा बाजार हो गया, बड़ा बाजार में तो 24 घंटे मिलेगा।
रिपोर्टर : चाइनीज मांझा?
जीतू : 24 घंटा।

जीतू ने व्हाट्सएप पर चाइनीज मांझे का एक सैंपल भी शेयर किया। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने इसे कहां से खरीदा है, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह कोलकाता के टीटागढ़ से आया है। उन्होंने आगे कहा कि वह एयरपोर्ट के पास रहते हैं, जो टीटागढ़ से लगभग 15 मिनट की दूरी पर है। उनके जवाबों से पता चलता है कि उन्हें उस इलाके की जानकारी है, जहां प्रतिबंधित मांझा बेचा जाता है।
रिपोर्टर : तूने कहां से लिया था, जो मुझे चरखी भेजी थी?
जीतू : टीटागढ़, लोकल है।
रिपोर्टर : लोकल है मतलब तू वहीं रहता है?
जीतू : हम तो एयरपोर्ट साइड में रहता, वो 15 मिनट का रास्ता है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कोलकाता से दिल्ली तक प्रतिबंधित मांझा पहुंचा सकता है, तो जीतू बिना किसी हिचकिचाहट के हां कह दी। उन्होंने दावा किया कि वह उस कूरियर कंपनी के जरिए डिलीवरी संभाल सकते हैं, जहां वह काम करते हैं। उनके अनुसार, खेप को सड़क मार्ग से भेजा जा सकता है और यह तीन से चार दिनों में पहुंच जाएगी।
रिपोर्टर : तो अगर चाइनीज मांझे का तुझे ठेका दे दिया जाए दिल्ली सप्लाई करने का, तो तू कर लेगा?
जीतू : कर लूंगा।
रिपोर्टर : कैसे करेगा?
जीतू : वही सेम…. xxxx, वाई रोड 3-4 दिन के अंदर माल।
 
इसके बाद बातचीत कूरियर डिलीवरी पर मुड़ी। दिल्ली में चाइनीज मांझा भेजने से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए जीतू ने एक चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले भी उस कूरियर कंपनी का इस्तेमाल किया है, जिसमें वे काम करते हैं, ताकि कोलकाता से बेंगलुरु तक 5-6 किलो वजन की खेप में प्रतिबंधित ड्रग्स, यानी गांजा भेजा जा सके। वह यह भी बताते हैं कि पकड़े जाने से बचने के लिए ऐसे पार्सल को कैसे छिपाया जाते हैं।
रिपोर्टर : हैं…. वीड? वीड मतलब चरस?
जीतू : नहीं रे, गांजा। …वो भेजा बैंगलोर, कोलकाता से, xxxx से।


रिपोर्टर : कूरियर से भेजा?
जीतू : कूरियर से भेजा, कब भेजा… वो मेरे इस फोन में नहीं है, उस फोन में है। एक-दो महीना नहीं, दो-तीन महीने पहले।
जीतू : 5-5, 6-6 केजी गांजा भेजा।
रिपोर्टर : 5-6 केजी गांजा भेजा?
जीतू : हां, आराम से ले लिया।
रिपोर्टर : आपने xxxx कूरियर से कोलकाता से बैंगलोर भेजा?
जीतू : हां, हम आपको स्लिप भी दिखा देंगे। पर हम लोग को पता है ना क्या लिखना चाहिए, क्या चेकिंग होता है, क्या नाम लिखना चाहिए। अब जैसे ये प्याज है…. हम इस प्याज को पैक किया और इसको कोई मेडिसिन का नाम दे दिया। कागज पे मेडिसिन लिख दिया और वो निकल गया।

इसके बाद बातचीत और गंभीर हो जाती है। जीतू का दावा है कि कूरियर सर्विस के जरिए न सिर्फ बैन किया गया मांझा, बल्कि हथियार और दूसरी गैर-कानूनी चीजें भी भेजी जा सकती हैं। उनका कहना है कि छोटे हथियार आसानी से निकल सकते हैं। उनके अनुसार, लगभग किसी भी प्रतिबंधित वस्तु की डिलीवरी की जा सकती है। हालांकि बातचीत के दौरान जीतू द्वारा किए गए ये दावे सत्यापित नहीं हैं।
रिपोर्टर : हथियार वग़ैरा सब, …रिवॉल्वर इट्च?
जीतू : हां; छोटा सामान होगा, निकल जाएगा।
रिपोर्टर : रिवाल्वर वग़ैरा निकल जाएगी?
जीतू : हां।
रिपोर्टर : कौन-कौन से आइटम?
जीतू : कोई भी आइटम।
रिपोर्टर : जो भी बैन, इल्लीगल हैं, सारे?
जीतू : हां… वो हम भिजवा देंगे।

जीतू ने माना कि उसने चीनी मांझे की वजह से लोगों को घायल होते और यहां तक कि मरते हुए भी अपनी आंखों से देखा है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह अभी भी कोलकाता से दिल्ली तक प्रतिबंधित मांझा सप्लाई करने के लिए तैयार हैं।
रिपोर्टर : बड़ा खतरनाक होता है, उससे लोग भी मर गये हैं चाइनीज मांझे से।
जीतू : एक्सीडेंट भी होते हैं, जो हेलमेट लेकर चला रहा है, जिसके यहां कांच नहीं होता उसका यहां से लेकर यहां तक कटके निकल गया।
रिपोर्टर : गर्दन कट जाती है?
जीतू : आंख के सामने देखा है मैंने ये सब।

जब जीतू से पूछा गया कि क्या चीनी मांझा बेचने के लिए कोलकाता पुलिस ने कभी उसके यहां छापा मारा है, तो उन्होंने एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस वाले पकड़े गए लोगों से नकद पैसे लेते हैं, मांझा जब्त करते हैं और बाद में उसे बेचने वालों को लौटा देते हैं। उनके अनुसार, इसकी वजह से प्रतिबंधित उत्पाद को दोबारा बेचा जा सकता है।
रिपोर्टर : कभी पकड़े नहीं गये? पुलिस ने रेड नहीं की चाइनीज मांझे की?
जीतू : पकड़ने की क्या? पुलिस तो खुद खाता है। बाई चांस अगर होता भी है तो वो ‘सेल’ नहीं होता, बम्ब (क्रैकर)… वो भी बैन है।
रिपोर्टर : कौन सा ‘सेल’?
जीतू : सेल हो गया… रॉकेट एक हो जाता है, चरखी वरखी, वो जो ऊपर जाकर फटता है (ऑल क्रैकर्स), वो सब बैन है। पुलिस को पता होता है कि ये यहां से सेल होता है। पुलिस वाला बाहर खड़ा रहता है। कोई लेकर निकले, हम उसको पकड़ें। वो क्या करता है? 500 रुपए ले लेता है, उसका सामान ले लेता है, फिर उसी को जाकर दे आता है चरखी वाले को। फिर वो दोबारा बेचता है। यहीं है, पुलिस सब में रहता है, भैया।

जीतू सिंह के बाद तहलका की मुलाकात जावेद खान (नाम बदला हुआ) से हुई, जिनके दोस्त दिल्ली के शाहदरा के रहने वाले श्याम कुमार हमें 500 रुपए प्रति रोल की दर से चाइनीज मांझा बेचने को तैयार हुए। हालांकि जावेद के अनुसार, श्याम हमसे सीधे लेन-देन नहीं करेंगे, बल्कि उसके जरिए लेन-देन करेंगे।
भारत और पाकिस्तान में पतंग उड़ाना एक लोकप्रिय खेल है। एक समय ऐसा भी था, जब लोग आसमान में अपनी पतंगों से जबरदस्त पेच लड़ाते थे। लेकिन आज पतंगबाजी भी खतरे से जुड़ गई है। पतंग उड़ाने को ज्यादा सुरक्षित बनाने या उस पर पूरी तरह से रोक लगाने की कई कोशिशें की गई हैं। भारत में चेन्नई पुलिस ने खतरनाक डोर से पतंग उड़ाने के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक और स्कूल कार्यक्रम आयोजित किए हैं। देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने वाली धारदार डोर पर रोक लगाने वाले कानून लागू हैं। पंजाब, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों ने चीनी मांझे पर रोक लगा दी है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगभग चार दशक पुराना कानून है, जो ऐसी डोर से पतंग उड़ाने पर रोक लगाता है, जहां यह मांझा लोगों, जानवरों या संपत्ति को खतरा हो सकता है, चोट पहुंचा सकता है या खतरे की घंटी हो सकता है। फिर भी ये कानून सही लागू नहीं हो सके हैं, जिसके चलते कई पतंगबाज गैर-कानूनी तरीके से घर पर ही ऐसी डोर खरीदते या बनाते रहते हैं।
आगरा, कोलकाता और दिल्ली में प्रतिबंधित चीनी मांझे को लेकर तहलका की पड़ताल में इस बात के बहुत कम सबूत मिले हैं कि इस प्रतिबंध का कोई वास्तविक असर हुआ है। मांझा सप्लायर खुलेआम कानून का उल्लंघन करते हुए बेझिझक प्रतिबंधित चीनी मांझा बेचते हुए पाए गए। आम आदमी पार्टी (आप) नेता राजेंद्र गांधी ने वाराणसी में चीनी मांझे की बिक्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया है। दिल्ली और इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अलग-अलग मौकों पर इसकी बिक्री के खिलाफ आदेश जारी किए हैं। इन उपायों के बावजूद यह गैर-कानूनी व्यापार बिना रुके जारी है, जिससे कानून लागू करने में गंभीर कमियां उजागर होती हैं, जबकि पूरे भारत में निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।