भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने रविवार को गुरुग्राम में अत्याधुनिक ‘टावर ऑफ जस्टिस’ न्यायिक परिसर का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हरियाणा सरकार की न्यायिक अधोसंरचना को सुदृढ़ करने और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। इस अवसर पर उन्होंने गुरुग्राम से ही वर्चुअल माध्यम से नूंह जिले के तावडू और पुन्हाना न्यायिक परिसरों की आधारशिला भी रखी।
उद्घाटन समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, सुप्रीम कोर्ट एवं पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तथा विधि जगत से जुड़े अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह न्यायिक परिसर हरियाणा सरकार की संवेदनशीलता और न्यायिक ढांचे के विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने स्मरण किया कि वर्ष 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहते हुए उन्होंने ही इस परियोजना की आधारशिला रखी थी और आज इसका उद्घाटन होना उनके लिए विशेष अवसर है।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज उद्योग, प्रौद्योगिकी, नवाचार और निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ संपत्ति, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी और अनुबंध संबंधी विवादों में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में गुरुग्राम की अदालतों में 24 हजार से अधिक दीवानी मामले, लगभग एक हजार वाणिज्यिक विवाद तथा एक लाख से अधिक परक्राम्य लिखत अधिनियम से जुड़े मामले लंबित हैं। ऐसे में यह नया न्यायिक परिसर न्यायालयों की क्षमता बढ़ाने, लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण और न्याय तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने बताया कि परिसर में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, आधुनिक रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली तथा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उनका कहना था कि न्याय व्यवस्था आधुनिक होने के साथ-साथ मानवीय और संवेदनशील भी होनी चाहिए, ताकि कोई भी नागरिक आर्थिक, सामाजिक या प्रक्रियागत कारणों से न्याय से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘टावर ऑफ जस्टिस’ संविधान की गरिमा, न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और नागरिकों के न्याय में अटूट विश्वास का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के साथ-साथ ‘ईज ऑफ जस्टिस’ भी उतना ही आवश्यक है। न्याय व्यवस्था सरल, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध होगी तो आर्थिक विकास को भी मजबूती मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि यह केवल एक नए भवन का उद्घाटन नहीं, बल्कि न्यायपालिका में जनता के विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने न्यायालयों के विस्तार के साथ-साथ मध्यस्थता और लोक अदालत जैसी वैकल्पिक विवाद निपटान व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि ‘टावर ऑफ जस्टिस’ न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में सरकार और न्यायपालिका के समन्वित प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है। वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने कहा कि समयबद्ध और सुलभ न्याय ही विकसित भारत की मजबूत नींव है तथा ई-कोर्ट, ई-फाइलिंग, राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित केस प्रबंधन जैसी पहलें न्यायिक सुधारों को नई गति दे रही हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा ने इस अवसर को गुरुग्राम के लिए ऐतिहासिक बताया और परियोजना को साकार करने में हरियाणा सरकार, लोक निर्माण विभाग, इंजीनियरों, निर्माण श्रमिकों तथा न्यायिक परिवार के योगदान की सराहना की।
समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘टावर ऑफ जस्टिस’ के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया। समारोह में सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के न्यायाधीश, मंत्रीगण, विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा बार एसोसिएशन के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।




