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27 साल का वनवास, दिल्ली की शीला से आस

पिछले महीने की 17 जुलाई को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हल्की बौछार पड़ रही थी. कांग्रेस पार्टी ने इस दिन राजधानी में एक रोड शो का आयोजन किया था. अगले विधानसभा चुनावों में शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाने के बाद एक तरह से यह पार्टी  

हम जिसकी पूजा करते हैं उसी को ये बूचड़खाने में काट देते हैं तो तनाव तो पैदा होगा ही : विनय कटियार

उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव के क्या कारण रहे और इस बार अलग क्या है? एक बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के पराभव का कारण कल्याण सिंह का पार्टी छोड़कर जाना था. इस कारण प्रदेश की पिछड़ी खासकर लोध जातियों ने पार्टी का साथ छोड़  

कैसे उत्तर प्रदेश में भाजपा किसी भी कीमत पर जीत को बेकरार है…

भाजपा ने 2014 में लोकसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल की. इस चुनाव में उसने उत्तर प्रदेश की कुल 80 सीटों में से 71 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था. अब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में एक साल से कम समय बचा है. अगली सर्दी के मौसम में  

तीन तलाक विवाद : नाइंसाफी नाकुबूल

पिछले साल अक्टूबर में उत्तराखंड के देहरादून की 35 साल की एक शायरा बानो की दुनिया उजड़ गई. उनके पति इलाहाबाद में रहते हैं. वे उत्तराखंड में अपने माता-पिता के घर इलाज के लिए गई थीं, तब उन्हें पति का तलाकनामा मिला, जिसमें लिखा था कि वे उनसे तलाक ले  

कैराना के मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है : हुकुम सिंह

आपने अपने क्षेत्र कैराना के बारे में यह मसला उठाया था कि वहां से पलायन हो रहा है. असलियत क्या है? आपको मौका लगे तो कैराना विजिट कर लीजिए. कैराना अब किसी भले आदमी के रहने लायक रहा नहीं. परिस्थिति जैसी उभर कर आ रही है, मौके पर उससे ज्यादा  

‘सत्ता हस्तांतरण संधि से पता चल पाएगी नेताजी की सच्चाई’ : राम तीर्थ विकल

गुमनामी बाबा उर्फ भगवन जी की ‘गुमनाम’ मौत के 42 दिन बाद फैजाबाद से प्रकाशित होने वाले अखबार ‘नये लोग’ के दो पत्रकार राम तीर्थ विकल और उनके सहयोगी चंद्रेश कुमार ने गुमनामी बाबा के नेताजी होने का दावा करते हुए पहली खबर लिखी. इस खबर को अखबार के पहले  

केशव के हाथ कमल

कहते हैं कि राजनीति में टोटके खूब चलते हैं. ऐसा ही एक टोटका सत्तारूढ़ भाजपा में चल रहा है. यह टोटका हिंदुत्व, पिछड़ा और चायवाला कंबिनेशन का है. लोकसभा चुनाव में ऐसे ही उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बड़ी जीत दर्ज की तो अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ऐसे ही  

मुठभेड़ चाल

सीबीआई कोर्ट ने 25 साल पहले पीलीभीत में हुए 10 सिखों के फर्जी एनकाउंटर में 47 पुलिसकर्मियों को दोषी पाया है. फर्जी एनकाउंटर तो हमारे देश में आम बात है, लेकिन बहुत कम मामले ऐसे हैं जिनमें फर्जी एनकाउंटर करने वाले पुलिसकर्मियों या सैन्यकर्मियों को सजा हुई हो. हो सकता  

फर्जी एनकाउंटर का खेल जनता को स्वीकार नहीं करना चाहिए

सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय समाज में एनकाउंटर को स्वीकार्यता मिली हुई है. समाज इसे स्वीकार करता है. आप इसे एक उदाहरण से समझिए कि एक मशहूर कांड; भागलपुर का अंखफोड़वा कांड, जिस पर प्रकाश झा ने फिल्म भी बनाई थी वह बहुत ही जघन्य कांड था. बिहार  

फर्ज का एनकाउंटर

12 जुलाई, 1991 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश स्थित नानकमत्था गुरुद्वारे (अब उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में) से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र स्थित सिख धर्मस्थलों के दर्शन के लिए चली तीर्थयात्रियों से भरी एक बस अपनी यात्रा पूरी करके वापस लौट रही थी. बस में उस समय 25 लोग