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मैं प्रो. सिरास से तो नहीं मिला, लेकिन मनोज बाजपेयी ने जिस तरह का रोल किया है उसे देख लगता है कि वे वैसे ही रहे होंगे : दीपू

प्रो. सिरास की जिंदगी पर आधारित फिल्म ‘अलीगढ़’ रिलीज होने वाली है. क्या फिल्म बनाने का विचार आपका था? प्रो. सिरास पर फिल्म बनाने का विचार मेरा नहीं था. हम पत्रकार लोग तो ये सब देखते रहते हैं. हम लोग सिर्फ स्टोरी लिखते हैं और भूल जाते हैं. 2013-14 में  

‘गंगा को लेकर रोमांटिक नजरिया छोड़ना होगा, अगर उसे बुखार है तो ब्यूटी पार्लर ले जाने की जरूरत नहीं’

गंगा को लेकर हर कुछ दिन पर कोई न कोई बात होती रहती है. कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गंगा में जल परिवहन को फिर से शुरू करने के लिए योजनाओं का एक खाका पेश करते हुए संसद में बताया था कि उन्होंने पूरी तैयारी कर ली  

‘पर्यावरणविद यह कहते हैं कि ये न करो, वो न करो, लेकिन यह भी तो बताओ कि हम करें क्या’

उत्तराखंड में आई आपदा के दो साल बाद भी सरकार के ऊपर सही तरीके से काम न करने के आरोप लगते रहे हैं. अभी आरटीआई के जरिये खुलासा हुआ है कि केंद्र द्वारा भेजे गए 1,509 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है. क्या कहना है आपका? पिछले साल  

‘हमने तय किया था कि चुनाव लड़ेंगे अगर नहीं भी जीत पाए तो इतिहास बनेगा’

जिस छात्रसंघ में लड़कियों की मौजूदगी बिल्कुल नहीं थी, वहां पर चुनाव लड़ने का फैसला कैसे किया? यहां का पूरा चुनाव धनबल और बाहुबल से लड़ा जाता है जैसे विधानसभा या संसद का चुनाव हो. हमारे छात्रसंघ चुनाव का स्वरूप लगातार बदलता जा रहा था. लोग छात्रनेता होकर तुरंत राजनीति  

‘जुबानी तलाक एक गलत प्रथा है, महिलाओं के सम्मान के लिए इसे खत्म करना जरूरी है’

 देश में कई दशक से धर्म के नाम पर वोट बैंक की राजनीति हो रही है. चुनाव कोई भी हो ‘हम मुस्लिमों के लिए ये कर देंगे, वो कर देंगे’ कहकर उनका सच्चा हितैषी बनने का खेल शुरू हो जाता है. इस शोर में मुस्लिमों की असली परेशानियां सुनने वाला  

‘देश के सम्मान के लिए आमिर ऑटोरिक्शा वालों को अच्छा व्यवहार करने की सीख देते हैं, उन्हें वैसी ही सीख पत्नी को भी देनी चाहिए’

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर बिहार चुनाव नतीजों का क्या असर पड़ा? क्या किसी बदलाव के बारे में सोचा जा रहा है? बिहार चुनाव विधानसभा का चुनाव था. भाजपा में एक पूरी प्रक्रिया है जिसके तहत राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक हम चुनाव कार्य संपन्न कराते हैं. वह प्रक्रिया  

‘सुषमा स्वराज कहीं बेहतर कर सकती थीं, लेकिन उनके पूरे काम पर प्रधानमंत्री कार्यालय का ग्रहण लगा हुआ है’

मोदी की विदेश नीति के बारे में आप क्या सोचते हैं? यह काफी निराशाजनक है! उन्हें विदेश नीति की समझ नहीं है. भारत दुनिया का कोई पुलिसमैन नहीं है और उसे वैसा होने की इच्छा भी नहीं रखनी चाहिए. आपको अच्छा संवाद आना चाहिए. आप एकतरफा बात नहीं कर सकते.  

‘हमारा दृढ़ विश्वास मंगलराज में है, हमने अपने 15 वर्ष के शासन के दौरान बेजुबान लोगों को जुबान दिया’

क्या विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की इतनी बड़ी जीत की उम्मीद आपको थी? पूरा दो सौ प्रतिशत. जदयू और कांग्रेस के संग महागठबंधन बनने के दिन से ही उम्मीद थी. बिहार में राजग के किसी भी नेता में मुझे हरा देने का दम नहीं है. प्रचार के दौरान ही हमने  

‘बिहार में अब भी सामंती ताकतें हैं और सरकार  उन्हें संरक्षण देती रही है’

बिहार के चुनाव परिणाम को आप किस तरह से देखते हैं? बिहार की जनता को बधाई. यह भाजपा के खिलाफ एक जरूरी जनादेश है. यह चुनाव राष्ट्रीय संदर्भ में लड़ा गया था. राष्ट्रीय संदर्भ ही इसमें प्रधान बन गया था. 17 माह की सरकार में ही केंद्र की सरकार ने  

‘हम चाहते हैं कि आम जनता भी बदलाव ला सके’

चेंज डॉट ओआरजी को हिंदी में शुरू करने का फैसला क्यों किया गया जबकि आज लोग अंग्रेजी में संवाद करना अधिक पसंद करते हैं? भारत की इंटरनेट आबादी का 47 प्रतिशत वो हिस्सा है जो अंग्रेजी के अलावा भी किसी एक सामान्य भाषा को तरजीह देता है. ऐसी आशा है