पूजा सिंह, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
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‘पीके हूबहू मेरे उपन्यास पर आधारित है’

आमिर खान अभिनीत विवादित फिल्म पीके से एक और विवाद जुड़ गया है. साहित्यकार कपिल ईसापुरी का दावा है कि फिल्म का कथानक और उसके संवाद उनके उपन्यास फरिश्ता से मेल खाते हैं. पूजा सिंह से उनकी बातचीत  

गजानन माधव ‘मुक्तिबोध’ : अनवरत विद्रोही

नई कविता के अग्रणी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध के निधन को आधी सदी हो रही है, इसी के साथ उनकी सर्वाधिक चर्चित और महत्वपूर्ण कविता 'अंधेरे में' भी अपनी रचना के 50 साल पूरे कर चुकी है. समय रहते अपना दाय न पा सके इस दिग्गज कवि को उसके निधन के बाद रचना संसार ने सर आंखों पर बिठाया  

‘स्त्री की आकांक्षा भी बेहतर दुनिया की आकांक्षा है’

अल्पना मिश्र उन लेखिकाओं में हैं जिनकी कहानियों की महिला पात्र अपने ही अस्तित्व के लिए जूझ रही है. हाशिए की उस स्त्री के सरोकार सामने लाने वाली अल्पना मिश्र से पूजा सिंह की बातचीत  

‘अस्मिता के प्रश्न, जीवन के मूलभूत प्रश्नों के लिए रोड़ा बनते हैं’

आप की मूल पहचान कवियत्री के रूप में है. लेकिन आपने अन्य विधाओं में भी रचना की है. विभिन्न विधाओं के रचनाकर्म में क्या फर्क देखती हैं? यूं तो सारी विधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. हर विधा का अपना मूल स्वभाव होता है. लेकिन सबके भीतर कहीं न कहीं  

सितारा देवी: ओझल सितारा…

94 की उम्र में अपने निधन से पहले वह लंबे समय से बीमारियों से जूझ रही थीं. सितारा देवी ने हिंदी सिने जगत में कथक का न केवल प्रवेश कराया बल्कि उसे एक अलग पहचान भी दिलाई. उनको याद करने के कई बहाने हैं. दिलों पर राज करना एक ऐसा  

‘हिंदी साहित्य आलोचकों के लिए रचा जा रहा है’

लंदन में रहने वाले चर्चित कथाकार तेजेंद्र शर्मा हाल ही में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के हाथों केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा का हिंदी सम्मान ग्रहण करने भारत आए थे. पूजा सिंह की उनसे बातचीत के अंश  

‘गांधी’ के निर्माता एटनबरा का निधन

यह कहना गलत न होगा कि गांधी फिल्म ने रिचर्ड एटनबरा को भारत में वैसी ही मकबूलियत दिलाई जैसी खुद गांधी को हासिल थी.  

‘महाभारत से बेहतर संभवत: दुनिया में कुछ नहीं लिखा गया’

युवा कविता के क्षेत्र में देश का सबसे प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार इस वर्ष भोपाल के युवा कवि आस्तीक वाजपेयी को देने की घोषणा की गई है. उन्हें यह पुरस्कार उनकी कविता ‘विध्वंस की शताब्दी’ के लिए दिया जा रहा है. पूजा सिंह की उनसे बातचीत  

नहीं रहे प्राण

मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण के निधन के बाद भारतीय कार्टूनों की दुनिया अब पहले जैसी नहीं रहेगी.  

शोभन सरकार

ने एक सपना देखा और इसके बाद पूरे देश ने देखा कि 1000 टन सोने के लिए खुदाई शुरू हो गई