दीपक गोस्वामी, Author at Tehelka Hindi — Tehelka Hindi
दीपक गोस्वामी
दीपक गोस्वामी
Articles By दीपक गोस्वामी
‘चौदह साल के कठिन परिश्रम का फल रियो ओलंपिक के टिकट के रूप में अब मिला’

पहली कक्षा में पढ़ने वाली छह साल की वह मासूम तब एथलीट शब्द का मतलब तक नहीं समझती थी जबकि उसकी खुद की बड़ी बहन एक एथलीट थी. वह तो बस स्कूल की दौड़ प्रतियोगिता में पहला स्थान पाना चाहती थी. एक दिन उसकी एथलीट बहन ने उससे बोला, ‘तू  

‘नई पार्टी का गठन रमन सिंह के गांव में इसलिए किया ताकि शेर की मांद में घुसकर उसका शिकार करूं’

तीस साल आपने कांग्रेस में बिताए फिर अचानक से पार्टी से मोहभंग होने का क्या कारण रहा? किसी से कोई मोहभंग नहीं है. दो भावनात्मक कारणों से मैंने नया दल या नई राह पर चलने का फैसला किया. पहला कारण यह कि मुझे लगता है कि एक बेहद गरीब आदिवासी  

अनिल कुंबले : चुनौतियां ज्यादा, समय कम

अनिल कुंबले के नाम के जिक्र के साथ ही उनसे जुड़ी उपलब्धियां आंखों के सामने तैर जाती हैं. यह पूर्व लेग स्पिनर भारत का सर्वकालिक सफल गेंदबाज है. इंग्लैंड के जिम लेकर के बाद वे पारी के सभी दस विकेट चटकाने का अद्भुत कारनामा करने वाले विश्व के दूसरे और  

चंद सेकंड पहले जो वृद्धा मदद की गुहार लगा रही थी, वो अब चंदे के लिए मुझे धमकाए जा रही थी…

ग्वालियर में पारा 47 डिग्री को छू रहा था. इस साल मई के महीने में भीषण गर्मी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. गर्मी के चलते मेरी भी तबीयत गड़बड़ थी. उस दिन चेकअप कराके बाइक से घर वापस आ रहा था. कहने को तो सुबह के 10 बज  

इस क्रिकेट के साथ खेल क्यों ?

वर्ष 2012 में भारत और पाकिस्तान के बीच बंगलुरु में पहले ब्लाइंड टी-20 विश्वकप का फाइनल खेला जा रहा था. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत के तीन बल्लेबाज 42 रन तक पैवेलियन लौट चुके थे. यहां से केतनभाई पटेल ने भारतीय पारी को संभाला और 43 गेंदों पर 98 रन  

लोढ़ा समिति की सिफारिशें लागू होतीं तो अनुराग ठाकुर कभी बीसीसीआई के अध्यक्ष नहीं बन पाते : आदित्य वर्मा

आदित्य वर्मा के बारे में शायद कम ही लोग जानते हों लेकिन यही वे शख्स हैं जो पिछले लगभग दो साल से भारतीय क्रिकेट में मची हलचल का कारण रहे. सुप्रीम कोर्ट में लगाई इनकी ही याचिका के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से एन. श्रीनिवासन की छुट्टी हुई  

‘महिला आयोग से मदद नहीं, पुलिस उड़ाती है मजाक’

कौन बलात्कार की शिकार युवतियां कब 10 मई, 2016 से कहां जंतर मंतर, दिल्ली क्यों शादी का झांसा देकर बलात्कार करने के मामले में न्याय न मिलने और पुलिस द्वारा आरोपियों को बचाने और दिल्ली महिला आयोग के उदासीन रवैये को लेकर. अर्चना, यासमीन, साधना और प्रीति कुछ समय पहले  

फर्ज का एनकाउंटर

12 जुलाई, 1991 को तत्कालीन उत्तर प्रदेश स्थित नानकमत्था गुरुद्वारे (अब उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में) से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र स्थित सिख धर्मस्थलों के दर्शन के लिए चली तीर्थयात्रियों से भरी एक बस अपनी यात्रा पूरी करके वापस लौट रही थी. बस में उस समय 25 लोग  

ग्वालियर : कागजों में बसा सपनों का शहर

स्लम में रहने वालों को शंघाई में बसाने के सपने दिखाना भारत में कोई नई बात नहीं है. इन सपनों को संज्ञा दी जाती है विकास की. विकास के नाम पर देश में कई योजनाएं आईं, राजनीतिक नेतृत्व ने कई वादे किए. कभी पटना को पट्टाया बनाने की बात चली  

शत्रु संपत्ति : मुल्क अपना, जमीन पराई!

‘हमने जिन्ना को छोड़ा, मुस्लिम लीग को छोड़ा, महात्मा गांधी की धर्मनिरपेक्ष आवाज पर भारत को अपनाया कि ये हमारी साझी विरासत है. क्या पाकिस्तान पर भारत को तरजीह देना हमारा गुनाह था, जो आज विभाजन के 65 साल बाद हमें उसकी सजा दी जा रही है?’ सरकार द्वारा जनवरी