प्रेम की लोककथाएं

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imgजेठवा-उजली (राजस्थान)

जेठवा के विरह में उजली के छंदों को जोड़कर बुनी गई बड़ी मार्मिक लोककथा है जेठवा-उजली. खास तौर पर गुजरात और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में लोकप्रिय यह कथा यहां की संस्कृति के दो अहम पहलुओं ‘प्रेम’ और ‘शरणागत की रक्षा’ को दिखाती है. Read More>>


imgढोला-मारू (कच्छ)

यों तो थार के चप्पे-चप्पे पर प्रेमकथाएं बिखरी पड़ी हैं लेकिन ढोला-मारू की प्रेमकथा सबसे लोकप्रिय है. यहां हर तीज-त्योहार पर गाए जाने वाले लोकगीतों से लेकर लोकचित्रों और लोकनाटकों में ढोला-मारू को आदर्श दंपति का दर्जा मिला हुआ है.  Read More>>


imgछैला संदू (झारखंड)

झारखंड की राजधानी रांची के आसपास कई झरने हैं. लेकिन इन सबसे अलग है दशमफॉल. कई लोग कहते हैं कि यहां झरने से गिरने वाले पानी के प्रवाह से संगीत की ध्वनि निकलती है.  Read More>>


imgलोरिक चंदा (छत्तीसगढ़)

लोक जीवन में रचने-बसने वाली गाथाएं सिर्फ इसलिए जिंदा नहीं रहतीं कि वे एक आश्चर्य लोक का निर्माण करती हैं. वे लोगों के दिलों में इसलिए भी धड़कती हैं कि उनमें प्रेरणा देने वाले अनिवार्य तत्व के तौर पर प्रेम रहता है. छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक चर्चित लोकगाथा लोरिक चंदा भी ऐसी ही है.  Read More>>


imgराजुला-मालूशाही (उत्तराखंड)

कत्यूरी राजवंश के एक राजकुमार मालूशाही और तिब्बत सीमा निवासी एक साधारण व्यापारी की पुत्री राजुला के प्रेम से उपजी यह कथा सदियों बाद भी उत्तराखंड के लोक गीतों में जिंदा है. सभी प्रेम कथाओं की तरह इस कथा में भी सामाजिक, जातीय, क्षेत्रीय और परंपरागत विषमताओं की बाधाएं हैं. Read More>>

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