मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत में तैयारी नासिक, उज्जैन और कुंभकोणम में कुंभ

लोकसभा चुनाव से पहले तीन धार्मिक आयोजन
लोकसभा चुनाव में तीन साल बचे हैं। इस बीच लगभग एक दर्जन राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होंगे। सियासत के इस महाकुंभ के बीच देश में तीन जगहों पर कुंभ आयोजित होंगे। सियासी दल इसका लाभ उठाने की कोशिश करेंगे।
मोहन भागवत का अमेरिका में ‘वननेस’ संदेश
इसका खास महत्व इसलिए हैं क्योंकि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत शनिवार 29 तारीख को अमेरिका में सभा को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम का नाम यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन रखा गया है।
दुनिया को वननेस का संदेश भागवत देंगे। भारत में भी हिंदू-एका या वननेस के विचार को बढ़ाने में तीन महाकुंभ काफी मायने रखने वाला हो सकता है। भाजपा और आरएसएस के लोगों के साथ लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस कुंभ में हिस्सा लेंगे।
नासिक में सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण
नासिक में 31 अक्तूबर 2026 को सिंहस्थ कुंभ का ध्वजारोहण होगा। जुलाई से सितंबर के बीच चार शाही स्नान भी यहां होंगे। गोदावरी नदी के तट पर होने वाले इस कुंभ में लाखों श्रद्धालु हिस्सा लेंगे।
2028 में उज्जैन और कुंभकोणम
इसके बाद 2028 में उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे भी सिंहस्थ कुंभ आयोजित होगा। 2028 में ही तमिलनाडु के कुंभकोणम में कुंभ आयोजित होगा। वहाँ महामम सरोवार के पास यह आयोजन 12 साल में एक बार होता है। यह 9 मार्च 2028 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अगले दिन आयोजित होगा।
सियासी अमृतकलश किसके हिस्से?
पौराणिक कथाओं के मुताबिक कुंभकोणम में श्रृष्टि का अमृतकलश आकर टूटा था। इन तीन कुंभों के बाद लोकसभा चुनाव में सियासी अमृतकलश किसके हिस्से में आएगा, यह काफी दिलचस्प होगा। सभी सियासी दल इन कुंभ पर नजर जमाए बैठे हैं।



