कैसे ‘चौधरी’ बने बिहार के सम्राट? बंद कमरे में तय हुआ नाम, BJP के 5 दिग्गज रह गए पीछे

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय से जारी कयासों के बीच अब साफ हो गया है कि सम्राट चौधरी ही राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। 15 अप्रैल को होने वाले शपथ ग्रहण से पहले यह सवाल हर किसी के मन में है कि आखिर पार्टी ने इतने बड़े-बड़े नेताओं को पीछे छोड़कर सम्राट पर ही भरोसा क्यों जताया।

Samrat Chaudhary Bihar CM. | Photo Credit: ANI
Samrat Chaudhary Bihar CM. | Photo Credit: ANI

नई दिल्ली: बिहार की सियासत में एक नए दौर की शुरुआत होने जा रही है। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि बीजेपी की नई रणनीति का संकेत माना जा रहा है। पार्टी ने इस बार पारंपरिक चेहरों के बजाय एक ऐसे नेता को चुना है, जो आक्रामक शैली और मजबूत सामाजिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ रहा है।

पार्टी के अंदर कई बड़े नाम इस रेस में शामिल थे। नित्यानंद राय, मंगल पांडेय, विजय सिन्हा, प्रेम कुमार, राजीव प्रताप रूडी और रेणु देवी जैसे अनुभवी नेताओं का नाम चर्चा में था। लेकिन अंत में बाजी सम्राट चौधरी के हाथ लगी। यह फैसला बताता है कि बीजेपी अब सिर्फ अनुभव नहीं, बल्कि ग्राउंड कनेक्ट और चुनावी समीकरण को ज्यादा अहमियत दे रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी ने ओबीसी और खासकर कोइरी समाज में अपनी पकड़ मजबूत की है। यही वजह रही कि पार्टी ने उन्हें एक बड़े सामाजिक समीकरण के तौर पर देखा। साथ ही उनका आक्रामक अंदाज और संगठन में सक्रिय भूमिका भी उनके पक्ष में गई।

सम्राट का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। वह पहले आरजेडी में रहे, फिर बीजेपी में शामिल हुए और धीरे-धीरे संगठन में अपनी जगह मजबूत करते गए। उन्होंने बूथ स्तर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक की जिम्मेदारी निभाई, जिससे उन्हें जमीनी राजनीति की अच्छी समझ मिली।

बीजेपी के इस फैसले को ‘कास्ट इंजीनियरिंग’ और ‘नया नेतृत्व’ देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के लिए तैयार है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार की राजनीति को किस दिशा में ले जाते हैं।