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“पाकिस्तान नहीं, भारत से बनेगी बात!” ईरान-US तनाव के बीच रूस ने ट्रंप को दी बड़ी सलाह

शांति चाहते हो तो पाकिस्तान की जगह भारत पर करना होगा भरोसा... बोले- रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov | Image Source: LA Times
शांति चाहते हो तो पाकिस्तान की जगह भारत पर करना होगा भरोसा... बोले- रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov | Image Source: LA Times

नई दिल्ली: Iran और America के बीच जारी तनाव को लेकर दुनिया की बड़ी ताकतें लगातार सक्रिय हैं। इसी बीच रूस ने अमेरिका को एक अहम संदेश देते हुए कहा है कि भारत इस पूरे संकट में बेहतर मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत के पास लंबे समय का कूटनीतिक अनुभव और संतुलित विदेश नीति है, जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद को संभालने में मदद कर सकती है।

रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन के दौरे पर हैं और माना जा रहा है कि वह ईरान संकट को लेकर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस मामले में किसी तरह की शांति वार्ता या समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है।

लावरोव ने इशारों में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पाकिस्तान कुछ सीमित मामलों में सहयोग कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक टिकने वाला समाधान निकालने के लिए भारत ज्यादा भरोसेमंद विकल्प है। रूस का मानना है कि भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित और शांतिपूर्ण नीति अपनाई है, जिसकी वजह से उसकी वैश्विक साख मजबूत हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका में महंगाई और युद्ध जैसे मुद्दों को लेकर पहले ही सरकार दबाव में है। ऐसे में ट्रंप की चीन यात्रा को कई लोग उनकी रणनीतिक मजबूरी के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर अपना प्रभाव इस्तेमाल करे ताकि हालात और ज्यादा न बिगड़ें।

रूस के बयान ने एक बार फिर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की ओर ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की संतुलित नीति और मजबूत कूटनीतिक पहचान को अब दूसरे बड़े देश भी खुलकर स्वीकार करने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान-अमेरिका विवाद में भारत की भूमिका कितनी अहम बनती है।

दिल्ली में BRICS बैठक के दौरान ईरान-UAE में टकराव, साझा बयान पर नहीं बनी सहमति

Iran's Foreign Minister Abbas Araqchi attends the BRICS foreign ministers' meeting at Bharat Mandapam in New Delhi | Photo Source: Reuters
Iran's Foreign Minister Abbas Araqchi attends the BRICS foreign ministers' meeting at Bharat Mandapam in New Delhi | Photo Source: Reuters

15 मई 2026, नई दिल्ली: नई दिल्ली में आयोजित BRICS देशों की बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर तीखी असहमति सामने आई। सूत्रों के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह पश्चिम एशिया से जुड़े संवेदनशील भू-राजनीतिक मुद्दे और खाड़ी क्षेत्र में प्रभाव को लेकर मतभेद रहे। बैठक में ईरान ने कुछ क्षेत्रीय मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया, जबकि UAE ने उसका विरोध किया। कई दौर की बातचीत के बावजूद साझा मसौदे पर सहमति नहीं बन सकी।

भारत ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि BRICS जैसे मंच का उद्देश्य आर्थिक सहयोग, वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करना और बहुपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाना है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेद बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए और संगठन की एकजुटता बनी रहनी चाहिए।

कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि भारत ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश की, ताकि साझा बयान जारी हो सके, लेकिन अंतिम समय तक सहमति नहीं बन पाई। हालांकि बैठक में व्यापार, डिजिटल सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS के विस्तार के बाद संगठन के भीतर क्षेत्रीय और रणनीतिक मतभेद अधिक खुलकर सामने आने लगे हैं। ईरान और UAE दोनों के शामिल होने से पश्चिम एशिया की राजनीति का असर अब BRICS मंच पर भी दिखाई देने लगा है।

Indian Oil और DMRC की पहल, राजधानी को मिली Hydrogen बस सेवा

हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस. | Image Source: NDTV.in
हाइड्रोजन फ्यूल सेल बस. | Image Source: NDTV.in

नई दिल्ली में Indian Oil Corporation Limited (IOCL) और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने दो हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों को शुरू किया है। ये बसें केंद्रीय सचिवालय और कर्तव्य भवन के बीच चलेंगी। इंडियन ऑयल के निदेशक (रिफाइनरी) Arvind Kumar ने कहा कि यह पहल देश में क्लीन और Sustainable Mobility को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है।

उन्होंने बताया कि इन बसों में इस्तेमाल होने वाला हाइड्रोजन फरीदाबाद स्थित इंडियन ऑयल के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर में तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि ये बसें धुआं या जहरीली गैस नहीं छोड़तीं, बल्कि इनसे केवल पानी निकलता है। यानी यह पूरी तरह प्रदूषण मुक्त तकनीक मानी जा रही है।

Arvind Kumar के मुताबिक फिलहाल यह परियोजना शुरुआती चरण में है और अभी केवल दो बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि इंडियन ऑयल भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि पानीपत रिफाइनरी में 10 केटीए क्षमता वाला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट तैयार किया जा रहा है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।

इंडियन ऑयल का कहना है कि जैसे-जैसे तकनीक और लागत दोनों बेहतर होंगे, वैसे-वैसे हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। कंपनी के पास फिलहाल देशभर में अलग-अलग परीक्षण परियोजनाओं के तहत 15 हाइड्रोजन बसें मौजूद हैं।

केंद्र सरकार भी लगातार स्वच्छ ईंधन और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों को बढ़ावा देने की बात कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में हाइड्रोजन बसें भारत के बड़े शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अहम हिस्सा बन सकती हैं। फिलहाल दिल्ली में शुरू हुई यह पहल लोगों के लिए एक नई और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा का अनुभव लेकर आई है।

लखीमपुर में NEET परीक्षा रद्द होने के बाद छात्र की मौत, परिवार बोला- सदमे में था

ऋतिक मिश्रा ने की आत्महत्या छात्र की उम्र 21 साल
ऋतिक मिश्रा ने की आत्महत्या छात्र की उम्र 21 साल

15 मई 2026, नई दिल्ली/ लखीमपुर खीरी: ऋतिक मिश्रा के  परिवार के मुताबिक, छात्र लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और NEET परीक्षा को लेकर बेहद गंभीर था। परीक्षा रद्द होने की खबर मिलने के बाद वह लगातार परेशान रहने लगा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि भविष्य को लेकर चिंता और मानसिक दबाव ने उसे तोड़ दिया।

घटना के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी  ने केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं बल्कि “सिस्टम द्वारा की गई हत्या” है। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल

घटना को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है। नेताओं का कहना है कि बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और अनिश्चितता के कारण लाखों छात्र मानसिक तनाव झेल रहे हैं। वहीं प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और पुलिस छात्र की मौत के सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

इस बीच शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े फैसलों का छात्रों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे मामलों में समय पर काउंसलिंग और पारदर्शी सूचना व्यवस्था बेहद जरूरी है।

उन्नाव केस में सेंगर को बड़ा झटका, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया सजा निलंबन आदेश

उन्नाव केस में Kuldeep Singh Sengar को बड़ा झटका। | Image Source: Navbharatlive/Social Media
उन्नाव केस में Kuldeep Singh Sengar को बड़ा झटका। | Image Source: Navbharatlive/Social Media

नई दिल्ली: उन्नाव रेप केस एक बार फिर चर्चा में आ गया है। शुक्रवार को Supreme Court ने साफ कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट को सभी पहलुओं पर नए सिरे से विचार करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि सेंगर की अपील पर जल्द फैसला किया जाए ताकि मामला ज्यादा लंबा न खिंचे। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से कोशिश करने को कहा है कि दो महीने के भीतर मुख्य याचिका पर फैसला हो जाए।

Supreme Court की पीठ ने कहा कि अगर मुख्य अपील पर जल्दी फैसला नहीं हो पाता है, तो summer holidays से पहले सेंगर की सजा निलंबन वाली याचिका पर दोबारा आदेश पारित किया जाए। अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। यानी हाईकोर्ट अब पीड़िता समेत सभी पक्षों को सुनकर नए सिरे से फैसला ले सकता है।

इस पूरे मामले में एक बड़ा कानूनी सवाल भी उठा है। Supreme Court ने High Court से यह भी विचार करने को कहा कि क्या कोई विधायक POCSO Act के तहत “लोक सेवक” माना जा सकता है या नहीं। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि भारतीय दंड संहिता की धारा 21 के तहत लोक सेवक की परिभाषा में नहीं आता। इसी आधार पर सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित किया गया था।

गौरतलब है कि High Court के फैसले के बाद देशभर में काफी विरोध देखने को मिला था। पीड़िता के परिवार, सामाजिक संगठनों और कई लोगों ने इस आदेश पर नाराजगी जताई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले के बाद एक बार फिर इस केस पर सबकी नजरें टिक गई हैं। अदालत ने सभी पक्षों से यह भी कहा है कि हाईकोर्ट में सुनवाई टालने की कोशिश न की जाए, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके।

IPL के बाद OTT पर रिलीज होगी ‘धुरंधर 2’, मेकर्स ने किया बड़ा ऐलान

'धुरंधर 2' की OTT रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है | Photo Source : TV9 bharatvarsh
'धुरंधर 2' की OTT रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है | Photo Source : TV9 bharatvarsh

15 मई 2026, नई दिल्ली: निर्माताओं के मुताबिक, ‘धुरंधर 2’ को पूरी तरह “अनफिल्टर्ड” अंदाज में दर्शकों के सामने लाया जाएगा, ताकि कहानी की वास्तविकता और किरदारों की तीव्रता बरकरार रहे। सीरीज में इस बार पहले सीजन से ज्यादा हिंसा, राजनीतिक साजिश और गैंगवार देखने को मिलेगा।

मेकर्स ने बताया कि IPL के दौरान बड़े OTT शो रिलीज करने से व्यूअरशिप प्रभावित होती है, इसलिए सीरीज को टूर्नामेंट खत्म होने के बाद लॉन्च करने का फैसला लिया गया। सूत्रों के अनुसार, शो जून के पहले सप्ताह में स्ट्रीम हो सकता है।

सीरीज में मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकारों की वापसी होगी, जबकि कुछ नए चेहरे भी इस सीजन में नजर आएंगे। सोशल मीडिया पर रिलीज डेट सामने आते ही फैंस के बीच उत्साह बढ़ गया है और “नो सेंसर कट” फैसले को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

मनोरंजन जगत के जानकारों का मानना है कि OTT प्लेटफॉर्म अब बोल्ड और रियलिस्टिक कंटेंट पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं, जहां थिएटर या टीवी की तरह कड़े सेंसर नियम लागू नहीं होते। ऐसे में ‘धुरंधर 2’ को लेकर दर्शकों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

“आपने तो नोटिस किया…” कान्स में ट्रोल्स को आलिया भट्ट का शानदार जवाब

आलिया भट्ट का ट्रोल्स को शानदार जवाब। | Image Source: Hindustan Times
आलिया भट्ट का ट्रोल्स को शानदार जवाब। | Image Source: Hindustan Times

Bollywood News: Alia Bhatt दूसरी बार Cannes Film Festival में शामिल हुई हैं। रेड कार्पेट से जुड़े उनके कई वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक वीडियो को लेकर इंटरनेट पर बहस शुरू हो गई, जिसमें कुछ फोटोग्राफर कैमरे नीचे करते नजर आए। इसके बाद कई यूजर्स ने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर आलिया को ज्यादा पहचान नहीं मिली और उन्हें नजरअंदाज किया गया।

हालांकि सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई दिखी। कुछ फैंस ने आलिया का समर्थन किया और कहा कि वह हमेशा की तरह आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही थीं। वहीं कुछ यूजर्स ने वीडियो को लेकर उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने कहा कि हॉलीवुड और इंटरनेशनल इवेंट्स में अभी भी भारतीय कलाकारों को उतना ध्यान नहीं मिलता।

इन सबके बीच आलिया भट्ट ने बेहद शालीन तरीके से ट्रोल्स को जवाब दिया। उन्होंने हाल ही में कान्स फेस्टिवल से जुड़ी अपनी तस्वीरें और वीडियो शेयर किए थे। इसी पोस्ट पर एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि “कितनी अफसोस की बात है, किसी ने आपको नोटिस ही नहीं किया।” इस पर आलिया ने जवाब दिया, “अफसोस किस बात का प्रिय? आपने तो मुझे नोटिस किया ही!”

आलिया का यह जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। फैंस ने उनके शांत और सकारात्मक अंदाज की जमकर तारीफ की। कई यूजर्स ने कहा कि बिना गुस्सा किए या बहस में पड़े, आलिया ने एक लाइन में ट्रोल्स को जवाब दे दिया।

बताया जा रहा है कि आलिया इस बार भी L’Oréal Paris India की ग्लोबल एंबेसडर के तौर पर फेस्टिवल में शामिल हुई हैं। गौरतलब है कि 12 मई से शुरू हुआ Cannes Film Festival 23 मई तक चलेगा और इसमें दुनिया भर के कलाकार हिस्सा ले रहे हैं।

RG कर केस में शुभेंदु सरकार का बड़ा एक्शन, पूर्व पुलिस कमिश्नर समेत 3 IPS अधिकारी सस्पेंड

शुभेंदु अधिकारी ने जांच के दौरान बरामद किया गया फोन भी दिखाया. (File Photo: ITG)
शुभेंदु अधिकारी ने जांच के दौरान बरामद किया गया फोन भी दिखाया. (File Photo: ITG)

15 मई 2026, नई दिल्ली/ कोलकाता:  कोलकाता के चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप और मर्डर केस में शुक्रवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने बड़ी कार्रवाई की। मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पूर्व कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डीसीपी (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और डीसीपी (सेंट्रल) इंदिरा मुखर्जी को सस्पेंड किया गया है। 

सरकार का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मामले की शुरुआती जांच में गंभीर चूक की और केस को सही तरीके से हैंडल नहीं किया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पीड़िता के परिवार को कथित तौर पर पैसे की पेशकश करने और बिना लिखित अनुमति प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जैसे आरोप भी अधिकारियों पर लगे हैं। 

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रेप और मर्डर की मुख्य जांच अभी भी CBI के पास है और राज्य सरकार केवल पुलिस अधिकारियों की भूमिका तथा प्रशासनिक लापरवाही की जांच कर रही है। 

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में आऱ जी कर मेडिकल कॉलेज एण्ड हॉस्पीटल में एक जूनियर डॉक्टर का शव सेमिनार हॉल में मिला था। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और महिला सुरक्षा को लेकर बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए थे। बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।

फर्जी रिजल्ट के दावे पड़े भारी, दो बड़े कोचिंग संस्थानों पर लाखों का जुर्माना

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नई दिल्ली: देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार सख्त होती नजर आ रही है। उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापन देने के मामले में मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये और राजस्थान के सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार जांच में सामने आया कि दोनों संस्थानों ने अपने विज्ञापनों में छात्रों की सफलता को बड़े स्तर पर प्रचारित किया, लेकिन यह साफ नहीं बताया कि उन छात्रों ने किस तरह का कोर्स किया था। कई छात्रों ने केवल ऑनलाइन क्लास, टेस्ट सीरीज या छोटे कोर्स किए थे, फिर भी संस्थानों ने उनकी सफलता का पूरा श्रेय खुद को दे दिया।

जांच में यह भी पता चला कि मोशन एजुकेशन ने नीट परीक्षा में 91.2 प्रतिशत और आईआईटी-जेईई एडवांस्ड में 51.02 प्रतिशत सफलता दर का दावा किया था। लेकिन सफल बताए गए कई छात्र “आई-एकलव्य” नाम के मुफ्त ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे। कुछ छात्रों को तो परीक्षा के बाद संस्थान से जोड़ा गया, लेकिन फिर भी उनकी सफलता को विज्ञापनों में शामिल किया गया।

वहीं सीएलसी कोचिंग ने अपने प्रचार में “MBBS, IIT और अन्य परीक्षाओं में 1650 से ज्यादा चयन” का दावा किया था। बाद में संस्थान की ओर से दिए गए जवाब और सुनवाई में बताए गए आंकड़ों में फर्क पाया गया। इसी आधार पर प्राधिकरण ने इसे अप्रमाणित और भ्रामक दावा माना।

सीसीपीए ने कहा कि अगर किसी छात्र ने फुल टाइम क्लास, ऑनलाइन कोर्स, क्रैश कोर्स या सिर्फ टेस्ट सीरीज ली है, तो उसकी पूरी जानकारी विज्ञापन में देना जरूरी है। ऐसा नहीं करना उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा।

दोनों संस्थानों को ऐसे विज्ञापन तुरंत हटाने और भविष्य में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया गया है। हालांकि दोनों कोचिंग संस्थानों ने इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी है। प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 60 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं और 31 कोचिंग संस्थानों पर कुल 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।

‘WHO-Exit’ : माइली की ‘Trump स्टाइल’ कूटनीति और अर्जेंटीना में सुलगती बहस

राष्ट्रपति जेवियर माइली के विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकलने के ऐतिहासिक फैसले पर बंटा अर्जेंटीना...Pic Credit : The Ultimate Matchup
राष्ट्रपति जेवियर माइली के विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकलने के ऐतिहासिक फैसले पर बंटा अर्जेंटीना...Pic Credit : The Ultimate Matchup

ममता सिंह। 

नई दिल्ली। अर्जेंटीना का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से पूरी तरह नाता तोड़ लेना और वैश्विक स्तर पर बदलते कूटनीतिक समीकरण इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अब देशों के लिए अपनी सीमाएं, राष्ट्रीय संप्रभुता और तात्कालिक स्वार्थ ही सर्वोपरि हो चुके हैं। दुनिया अब सामूहिक विकास के बजाय ‘अपनी राह, अपना फायदा’ की दिशा में तेजी से बढ़ रही है।

Argentina के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जेवियर माइली (Xavier Miley) का यह कदम केवल एक राजनीतिक पैंतरा नहीं, बल्कि उन वैश्विक संस्थाओं के खिलाफ सीधी जंग है जो संप्रभु राष्ट्रों की नीतियों को प्रभावित करने का दावा करती हैं। माइली का यह ‘Trump स्टाइल’ फैसला उस विचार पर सीधा प्रहार है जिसके तहत किसी देश की जन-स्वास्थ्य नीतियों का रिमोट कंट्रोल विदेशी अधिकारियों के हाथ में होता है। इसे ‘स्वास्थ्य राष्ट्रवाद’ के एक नए उभार के रूप में देखा जा रहा है।

अर्जेंटीना ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी सीमाओं, अस्पतालों और स्वास्थ्य बजट पर फैसला केवल उसकी संसद और सरकार करेगी। President Miley के इस आक्रामक राष्ट्रवाद को उनके समर्थक और दक्षिणपंथी संगठन ऐतिहासिक मानकर सराह रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अर्जेंटीना को संकट के समय अपनी मर्जी से सीमाएं बंद करने, दवाइयां या वैक्सीन चुनने और विदेशी दबाव से मुक्त होने की पूर्ण आजादी मिल गई है।

लेकिन इस बड़े Political फैसले के बाद अर्जेंटीना का आंतरिक माहौल पूरी तरह अशांत है और जनता चुप नहीं है। देश के भीतर इस निर्णय को लेकर एक गहरी खाई खिंच गई है। जहां सरकार और उसके समर्थक इसे ‘स्वाभिमान की बहाली’ कहकर उत्सव मना रहे हैं, वहीं देश का चिकित्सा जगत, वैज्ञानिक, विपक्षी दल और आम नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा सड़कों पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध कर रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों में गहरी चिंता और आक्रोश है कि Global Health Network, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान, वित्तीय मदद और सस्ती जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति बंद होने से देश का पहले से ही चरमराया हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। विशेष रूप से देश के कुछ हिस्सों में हाल ही में उभरे हंतावायरस जैसे संक्रामक मामलों के बीच डब्ल्यूएचओ जैसी संस्था से अलग होना आम आदमी के जीवन को सीधे तौर पर खतरे में डालने जैसा माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों को डर है कि यदि अर्जेंटीना का यह दक्षिणपंथी दांव राजनीतिक रूप से सफल रहा, तो ब्राजील, हंगरी और इटली जैसे देशों में भी वैश्विक संगठनों को छोड़ने की होड़ मच सकती है। इससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का जो साझा सुरक्षा कवच था, वह बिखर जाएगा। साफ है कि 2026 की यह नई दुनिया अब पुराने आदर्शों पर नहीं, बल्कि कठोर हकीकत और सीधे फायदे पर टिकी है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की हैसियत अब कमजोर पड़ रही है क्योंकि वास्तविक शक्ति उन राष्ट्रों के हाथ में जा रही है जो अपनी शर्तों पर इतिहास लिख रहे हैं। आज की कूटनीति का कड़वा सच यही है कि अब ‘सबका साथ’ बीते दौर की बात हो चुकी है, और ‘केवल अपना भला’ ही इस नई व्यवस्था का मूल मंत्र बन चुका है।