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‘Tehelka’ Cover Story : भगवा को बढ़त, क्षेत्रीय क्षत्रप ढेर

Cover Page Pic Credit : Anangpal Choudhary
Cover Page Pic Credit : Anangpal Choudhary

तहलका Magazine/Edition : 16-31 may 2026

ममता सिंह।

Pic Credit : Naveen Bansal

भारतीय राजनीति का केंद्र अब 2029 की ओर मुड़ चुका है जिसके लिए 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के चुनाव एक निर्णायक ‘सेमीफाइनल’ माने जा रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों ने देश के पांच राज्यों की सियासी दिशा तय कर दी है। परिणामों ने बता दिया है कि मतदाताओं का मिजाज बदल रहा है। अब संकीर्ण मानसिकता की राजनीति नहीं चलेगी। पश्चिम बंगाल से केरल और तमिलनाडु तक, नए की उम्मीद और पुराने के प्रति गुस्से के चलते मौजूदा व्यवस्थाएं ढहती दिखीं। असम में जहां हिमंता की पकड़ बरकरार रही, वहीं बंगाल ने शुभेंदु अधिकारी के राजतिलक के साथ ऐतिहासिक ‘भाजपा युग’ में प्रवेश किया। दक्षिण में अभिनेता विजय की पार्टी ने तमिलनाडु की सत्ता पर कब्जा कर सबको चौंका दिया। पुडुचेरी में रंगासामी का जादू फिर चला, जबकि केरल में कांग्रेस गठबंधन की प्रचंड जीत हुई है।

नतीजों ने बता दिया है कि राजनीति अब केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध के सहारे नहीं जीती जा सकती। आज के दौर में चुनावी वैतरणी पार करने के लिए डेटा इंटेलिजेंस और हाई-टेक बूथ मैनेजमेंट जैसे आधुनिक हथियारों को अपनाना अनिवार्य हो चुका है। पुरानी वैचारिक जकड़न और घिसे-पिटे सिद्धांतों के बूते हाई-टेक संसाधनों से लैस विरोधियों को मात देना अब पूरी तरह असंभव जान पड़ता है। चुनावी मैदान में कामयाबी की डगर अब पहले जैसी सहज नहीं रह गई है, यहां हर कदम पर नई तकनीक और सटीक रणनीतिक कौशल की दरकार होती है।

कांग्रेस के लिए इन नतीजों में सबसे बड़ा सबक यह छिपा है कि राहुल गांधी को अब अपनी नीति निर्धारण में लचीलापन लाना ही होगा। केरल की सफलता और तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी ‘टीवीके’ का उदय इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जहां क्षेत्रीय क्षत्रपों को ‘फ्री हैंड’ दिया गया, वहां करिश्माई नतीजे सामने आए। अब वह समय बीत चुका है जब दिल्ली में बैठकर राज्यों की किस्मत के फैसले तय किए जाते थे। राहुल गांधी को अब क्षेत्रीय चेहरों को न केवल बड़ी पहचान देनी होगी, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की पूरी स्वायत्तता भी सौंपनी होगी।

विपक्ष को यह समझना होगा कि जीत तभी मुमकिन है जब चुनाव को केवल राष्ट्रीय विमर्श में उलझाने के बजाय राज्यों के स्थानीय मुद्दों और जनता की जमीनी जरूरतों पर केंद्रित किया जाए। ऐसे में मुख्य विपक्षी दल होने का दावा करने वाली कांग्रेस को भाजपा के ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल की काट ढूंढनी होगी। कांग्रेस को तत्काल ऐसे कैडर की तलाश शुरू कर देनी चाहिए जो तकनीकी और रणनीतिक रूप से सक्षम हों। आज कांग्रेस सेवादल की जो बदहाली है, वह किसी से छिपी नहीं है।  

संदेश साफ है कि 2027 के राज्यों के चुनावों और 2029 की बिसात बिछाने के लिए अब नए चेहरे और स्पष्ट विजन का फॉर्मूला अपनाना ही होगा। सत्ता पक्ष को पटखनी देने के लिए सत्ता विरोधी लहर का सही समय पर सटीक इस्तेमाल अनिवार्य है, वरना सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। चुनाव नतीजों ने कांग्रेस और क्षेत्रीय क्षत्रपों के सामने जो बड़ी चुनौती पेश की है, उसे पाटने के लिए कार्यकर्ताओं को किताबी बातों के बजाय जमीनी कसरत पर अधिक ध्यान देना होगा। अब केवल ‘मोदी विरोध’ के नकारात्मक नैरेटिव से मतदाता रीझने वाले नहीं हैं। दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए महज सांगठनिक फेरबदल काफी नहीं, बल्कि आधुनिक मॉडल को आधार बनाकर आगे बढ़ना होगा।

पश्चिम बंगाल में वामफ्रंट का कैडर ‘वैज्ञानिक’ तरीके से बूथ की निगरानी के लिए जाना जाता था। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस का बूथ प्रबंधन भी लगभग उसी वामपंथी ढर्रे पर ही आधारित रहा। तृणमूल ने 15 साल सत्ता संभाली, लेकिन आधुनिक दौर के अनुरूप अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव नहीं किया, जिसका खमियाजा उसे वर्ष 2026 के विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ा। दूसरी ओर, भाजपा का पूरा जोर तकनीक और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर जैसे आधुनिक सुधारों पर रहा। भाजपा ने अपने कैडरों को डेटा और टेक्नोलॉजी पर केंद्रित किया, जबकि तृणमूल और कांग्रेस के दिग्गज केवल भाषणों के जरिए हमलावर रहे। विपक्ष मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए जाने का दावा करता ही रह गया, जबकि भाजपा ने तकनीक के मोर्चे पर बाजी मार ली।

दस्तावेजों की पड़ताल के नाम पर करीब करीब 27 लाख मतदाताओं को वोट डालने से रोका गया, क्योंकि निर्वाचन आयोग के अनुसार उनके कागजात अधूरे थे। ममता बनर्जी, कांग्रेस और वामदलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, लेकिन भाजपा को घेरने के चक्कर में वे इसकी तह तक जाने में नाकाम रहे। तृणमूल कांग्रेस केवल आरोप-प्रत्यारोप में ही उलझी रही और अपने वोट बैंक को सुरक्षित व समृद्ध करने के जमीनी मोर्चे पर ध्यान ही नहीं दिया। इसके विपरीत, भाजपा कैडर लोगों के घरों तक पहुंच कर वोटर लिस्ट दुरुस्त करने में जुटा रहा। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों में मतदाताओं की चुप्पी नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश छिपा है। जरूरत बस इस जमीनी हकीकत और जनता के संकेत को सही समय पर समझने की है।

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि अब राज्य में ‘जय श्रीराम’ और ‘खेला होबे’ जैसे नारों की गूंज फीकी पड़ चुकी है। इनकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है और भविष्य में महज इन नारों के दम पर सत्ता की दहलीज तक पहुंचना नामुमकिन है। परिणामों का विश्लेषण करें तो ‘एसआईआर’ के अलावा कई ऐसे कारक हैं, जिन्होंने तृणमूल की विदाई तय की। हार के लिए केवल सरकारी मशीनरी पर आरोप लगाना महज खानापूर्ति के सिवाय कुछ और नहीं, असलियत कहीं अधिक गहरी है। पश्चिम बंगाल में दलित और ओबीसी वोट बैंक में हुए बिखराव ने ममता बनर्जी की बंगाल से विदाई में आग में घी का काम किया। भाजपा ने मतुआ और राजबंशी समुदायों के बीच अपनी पैठ इतनी मजबूत की कि तृणमूल के अभेद्य दुर्ग ढहते चले गए। हुमायूं कबीर और ओवैसी ने ‘दीदी’ के पारंपरिक वोट बैंक में ऐसी सेंध लगाई कि ध्रुवीकरण का सीधा लाभ भाजपा की झोली में जा गिरा। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि मतदाता अब तुष्टिकरण नहीं, बल्कि समान अवसर चाहता है। अपनी ही सीट भवानीपुर न बचा पाने वाली ममता के पतन की पटकथा वामपंथ से आए उन ‘दागी’ कैडरों ने लिखी, जिन्हें तृणमूल ने शरण दी थी।

दूसरी ओर, तमिलनाडु में ‘टीवीके’ सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। यहां के मतदाता लंबे से क्षेत्रीय पार्टियां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के चक्रव्यूह में फंसे थे। लेकिन नायक से जननायक बने विजय ने उस राजनीतिक शून्यता को भर दिया है जो जयललिता और करुणानिधि जैसे दिग्गज नेताओं के जाने से पैदा हुई थी। तमिलनाडु की जनता अब तक थेवर, वनियार और कोंगु वेल्लालर जैसी जातियों में बंटी थी, जिसे टीवीके ने तमिल पहचान के विजन से तोड़ दिया। तमिलनाडु में दशकों पुराने द्रविड़ किलों को ढहाते हुए अभिनेता विजय की पार्टी ने 108 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। हालांकि, बहुमत के 118 के आंकड़े से वे थोड़ा दूर थे, लेकिन कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर उन्होंने तमिलनाडु में एक नए राजनीतिक युग की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। 

तमिलनाडु में क्षेत्रीय राजनीति के इस बड़े उलटफेर ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही भविष्य के लिए सतर्क कर दिया है। अब दोनों ही दल फूंक-फूंककर कदम उठाने को मजबूर हैं। जहां तक असम का सवाल है, भाजपा ने वहां जीत की हैट्रिक लगाकर अपनी पकड़ साबित की, लेकिन सबसे चौंकाने वाली खबर गौरव गोगोई की हार रही। गौरव न केवल कांग्रेस का राष्ट्रीय चेहरा हैं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के उत्तराधिकारी भी हैं। इसके बावजूद, वह जोरहाट सीट पर भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 वोटों से मात खा गए।

असम में, हिमंत बिस्वा सरमा ने असमिया अस्मिता को मोदी सरकार के विकास विजन से कुछ इस तरह जोड़ा कि विपक्षी वोट बैंक पूरी तरह बिखर गया। इसी का परिणाम था कि कांग्रेस के राष्ट्रीय चेहरा गौरव गोगोई को जोरहाट में हितेंद्र नाथ गोस्वामी से 23,182 मतों से करारी हार झेलनी पड़ी। असल में असम में कांग्रेस की हार के पीछे बदरुद्दीन अजमल की ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) और अन्य क्षेत्रीय दलों की बड़ी भूमिका रही, जिन्होंने कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भाजपा उन सीटों पर भी जीती, जहां मुकाबला त्रिकोणीय था।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो असम में भाजपा के जीत की पटकथा विधानसभा चुनाव के पहले ही लिख दी गई थी, जब नगांव के कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए। बोरदोलोई ने दिसपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और शानदार जीत दर्ज की। उनके पाला बदलने से असम की सियासत ऐसे गरमाई कि मतदाताओं के बीच यह संदेश चला गया कि राज्य में तीसरी बार भी भाजपा ही सरकार बनाएगी। वाकई, बोरदोलोई का भाजपा में जाना असम चुनाव का सबसे बड़ा ‘टर्निंग प्वाइंट’ साबित हुआ। साथ ही,

अल्पसंख्यक समाज को लेकर उन्होंने जो बिसात बिछाई, उसका सीधा असर 2026 के विधानसभा परिणामों में दिखाई दिया।

अब मतदाता जाति और धर्म की पुरानी बेड़ियों को तोड़कर ‘विकास’ और ‘राष्ट्रहित’ को प्राथमिकता दे रहा है। सूचना के इस दौर में आम नागरिक अब इतना सजग है कि वह नेताओं के वादों और जमीनी हकीकत के अंतर को तुरंत भांप लेता है। यानी जनता अब व्यवस्था की सुस्ती या राजनीतिक संकीर्णता को सहन करने के मूड में नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उभरा यह नया मिजाज बताता है कि लोकतंत्र अब केवल वोट देने तक सीमित नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का माध्यम बन चुका है। स्पष्ट है कि भारतीय राजनीति अब भावनात्मक मुद्दों को पीछे छोड़कर ‘परफॉरमेंस’ की राह पर चल पड़ी है। जहां व्यवस्था उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, वहां जनता का आक्रोश बड़े बदलाव लाने की ताकत रखता है।

मोदी फैक्टर: विपक्ष के हर चक्रव्यूह का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा के लिए एक ब्रांड से कहीं बढ़कर हैं। विपक्षी नेता भी अब परोक्ष रूप से स्वीकार करने लगे हैं कि मोदी न केवल भारत, बल्कि विश्व के लोकप्रिय नेताओं में शुमार हैं। पीएम का विजन स्पष्ट है और मतदाताओं में भरोसा जताने में कामयाब होते हैं कि उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की कामयाबी के पीछे असल चेहरा पीएम मोदी का ही है। वहां के लोगों ने इस विश्वास के साथ मतदान किया कि देश को श्रेष्ठ बनाने के लिए बंगाल में परिवर्तन अनिवार्य है। वरना, ममता बनर्जी के अभेद्य दुर्ग को ढहाना असंभव था। इन चुनावों की जीत का लाभ अगले साल महत्वपूर्ण राज्यों उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड एवं पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में मिलना तय माना जा रहा है। मोदी की हर हुंकार में ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना निहित रहती है।

कांग्रेस की चुनौती: राहुल का गणित और 2029 की राह

हालिया विधानसभा चुनावों ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस को अपनी रणनीति में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है। केरल में जीत के बावजूद पार्टी तमिलनाडु में जनता की नब्ज पहचानने में चूक गई। यदि राहुल गांधी ने समय रहते थलापति विजय के साथ पुख्ता गठबंधन किया होता, तो आज राज्य में दो-तिहाई बहुमत की सरकार होती। वहीं, बंगाल में ममता बनर्जी पर उनका सीधा हमला भी आत्मघाती साबित हुआ, जिसने गठबंधन की संभावनाओं को खत्म कर दिया। राहुल गांधी के लिए 2029 की राह तभी आसान होगी, जब वे क्षेत्रीय दिग्गजों के साथ 2027 के लिए बेहतर सामंजस्य बिठाएंगे।

उम्मीदों का ‘नायक’

तमिलनाडु में दशकों पुराने द्रविड़ किलों को ढहाकर अभिनेता जोसेफ विजय ने नया राजनीतिक इतिहास रच दिया है। उनकी पार्टी टीवीके ने न केवल चुनाव जीता, बल्कि विधानसभा में बहुमत जुटाकर विजय ने अपनी रणनीतिक सूझबूझ से विरोधियों को दंग कर दिया। मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने ‘चरणबद्ध शराबबंदी’ जैसा साहसिक फैसला लेकर जता दिया कि उनके लिए जनहित राजस्व से ऊपर है। महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर उनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने उनकी ‘पर्दे वाले नायक’ की छवि को असल जिंदगी में भी पुख्ता कर दिया है। विजय की सबसे बड़ी खूबी उनका संतुलन है; जहां एक ओर राहुल गांधी के साथ उनकी वैचारिक नजदीकी है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी के साथ विकासपरक तालमेल राज्य के लिए नई उम्मीदें जगाता है। खुद को किसी गठबंधन का पिछलग्गू बनाने के बजाय एक स्वतंत्र और सशक्त विकल्प के रूप में पेश कर विजय ने साबित कर दिया है कि वे लंबी रेस के खिलाड़ी हैं।

हिमंता का मास्टरस्ट्रोक

असम में हिमंता बिस्वा सरमा एक ऐसे रणनीतिकार बनकर उभरे हैं, जिन्होंने ‘सत्ता विरोधी लहर’ को पूरी तरह बेअसर कर दिया। चुनाव से ठीक पहले मटक समुदाय के आरक्षण की मांग और सांस्कृतिक आइकन जुबीन गर्ग के निधन (सितंबर 2025) के बाद उपजे असंतोष ने राज्य का माहौल ‘बर्निंग’ बना दिया था। विपक्ष, खासकर अखिल गोगोई और गौरव गोगोई ने जुबीन गर्ग की मौत और जांच में देरी को सरकार के खिलाफ बड़ा चुनावी हथियार बनाने की कोशिश की। हालांकि, हिमंता की सूझबूझ ने विपक्ष की इस चाल को विफल कर दिया। उन्होंने न केवल जांच के लिए एसआईटी गठित की, बल्कि मटक समुदाय के साथ सीधा संवाद कर ऐसे फैसले लिए जिससे जनता का आक्रोश भरोसे में बदल गया।

सवाल 27 लाख मतदाताओं का

राजनीति में हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन असली सवाल पश्चिम बंगाल के 27 लाख मतदाताओं का है जो लोकतंत्र के इस पर्व से बाहर रह गए। गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव से पहले मतदाता सूची में 91 लाख नाम हटाए गए थे, जिनमें से 34 लाख लोगों ने वोट देने के हक के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया। ममता बनर्जी जिस भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी से करीब 15 हजार वोटों से हारीं, वहां लगभग 47 हजार लोगों के वोट मतदाता सूची से गायब मिले! राजनीतिक गणित देखें तो भाजपा और तृणमूल के बीच जीत-हार का अंतर मात्र 13 लाख वोटों का है। बेशक, यदि ये लोग भी वोट डालते तो चुनावी नतीजे क्या होते, इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है! यह भी सच है कि बंगाल में घुसपैठियों की समस्या पुरानी है, वामपंथियों से लेकर कांग्रेस और फिर तृणमूल तक, हर सरकार ने वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। सवाल यह भी बड़ा है कि यदि वो घुसपैठिए हैं तो उन्हें उनके मूल स्थान पर भेजना चाहिए। लेकिन ऐसा न करना भी पूरे सिस्टम की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शून्य पर सिमटा वाम: एक युग का अंत!

पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल में लंबे समय तक राज करने वाले वामफ्रंट का वर्ष 2026 में पूरी तरह से सफाया हो गया। केरल के नतीजों ने वामपंथ की विदाई पर अंतिम मुहर लगा दी है, जबकि बंगाल और त्रिपुरा से मतदाता इन्हें पहले ही बेदखल कर चुके हैं। कड़वी सच्चाई यह है कि वामपंथ आज भारत में अपने सबसे कठिन दौर में है। आज का युवा ‘वर्ग संघर्ष ’ जैसी अप्रासंगिक विचारधारा से खुद को नहीं जोड़ पा रहा। डिजिटल क्रांति के इस युग में वामपंथ की पुरानी नीतियां विकास की दौड़ में थक सी गई हैं। विशेषज्ञों की मानें तो जनता को अब अंतहीन आंदोलनों से सरोकार नहीं रहा, वह बुद्धिमानी से हर पल बेहतर अवसर तलाश रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि 2029 में वामफ्रंट क्या करेगा। क्योंकि अब उनके पास कोई बड़ा चेहरा तक नहीं बचा। केरल कांग्रेस ने चुनाव नतीजों के बाद कई दिनों की मशक्कत और गहन मंथन करके वरिष्ठ नेता वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना।

editorial@tehelka.com

तहलका की पड़ताल: भारतीय थाली में प्रतिबंधित नमक

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से आयात पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद हिमालयी गुलाबी नमक अवैध तरीके से अनौपचारिक नेटवर्क के माध्यम से लगातार भारत में पहुंच रहा है। राजस्थान और नोएडा के बाजारों में सड़कों के किनारे विक्रेताओं द्वारा खुलेआम यह नमक बेचा जा रहा है और उपभोक्ताओं द्वारा भी यह बड़े चाव से खरीदा जा रहा है। लाहौरी नमक और सेंधा नमक के नाम से प्रसिद्ध यह पाकिस्तानी नमक भारत में बिना रोकटोक के कैसे बिक रहा है? किस तरह आ रहा है? इसी को लेकर तहलका एसआईटी की यह रिपोर्ट :


7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर डिस्प्ले पिक्चर बदली और नागरिकों से भी सशस्त्र बलों और उनकी सफलता के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में ऐसा ही करने का आग्रह किया। भारत ने 7 मई, 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जो जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के खिलाफ एक सुनियोजित सैन्य प्रतिक्रिया थी। इस आतंकी हमले में 26 भारतीय नागरिक मारे गए थे। ऑपरेशन सिंदूर का उद्देश्य सीमा पार आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना और पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा आगे के हमलों को रोकना था। चार दिनों तक चले इस अभियान में भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना की समन्वित कार्रवाई शामिल थी, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े नौ ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया, जिसके बाद अंततः युद्ध विराम हुआ। ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर तहलका ने अपनी इस पड़ताल में खुलासा किया है कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान से आयात पर प्रतिबंध के बावजूद कैसे एक पाकिस्तानी उत्पाद भारतीय सड़कों पर खुलेआम बेचा जा रहा है और लगभग 80 प्रतिशत भारतीय घरों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। ये प्रतिबंधित उत्पाद चावल, सब्जियां या बाजरा नहीं है, बल्कि सेंधा नमक है, जो हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त एक प्रमुख सामग्री है। यह नमक, जिसे आमतौर पर सेंधा नमक के नाम से जाना जाता है, हिंदू संस्कृति और परंपराओं में वैदिक ग्रंथों में निहित कारणों से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे अक्सर पाकिस्तानी नमक या लाहौरी नमक के रूप में जाना जाता है और भारत में उपवास में, विशेषकर नवरात्रि जैसे अनुष्ठानों के दौरान इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। भारत में इस्तेमाल होने वाला अधिकांश सेंधा नमक ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान से आयात किया जाता है, क्योंकि यह नमक भारत में प्राकृतिक रूप से पर्याप्त मात्रा में नहीं पाया जाता है। हालांकि हाल के वर्षों में भारत ने अन्य देशों से उत्पाद आयात करके पड़ोसी देश पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास किया है। गुलाबी नमक या हिमालयी नमक के नाम से प्रसिद्ध सेंधा नमक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। वहां विशाल खेवरा नमक खदान स्थित है, जो दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी खदान है। इस खदान से सालाना लगभग 4.5 लाख टन नमक निकाला जाता है। हालांकि भारत अधिकांश वस्तुओं के मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भर है। लेकिन सेंधा नमक उन कुछ प्रमुख वस्तुओं में से एक है, जिसका भारत में बड़े पैमाने पर- लगभग 80 प्रतिशत भारतीय घरों में उपयोग होता है। यह नमक पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर आयातित होता है। हालांकि 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद और भारत द्वारा 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू करने से पहले पाकिस्तानी मूल के हिमालयी गुलाबी नमक पर भारत में प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया था। नई दिल्ली ने पाकिस्तान से होने वाले सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात जैसे तीसरे देशों के माध्यम से भेजे जाने वाले सामान भी शामिल हैं। 2 मई, 2025 से विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने हिमालयी गुलाबी नमक यानी सेंधा नमक सहित सभी पाकिस्तानी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध आज भी लागू है। हालांकि तहलका की इस पड़ताल में पता चला है कि प्रतिबंधों के बावजूद पाकिस्तानी गुलाबी नमक या सेंधा नमक भारतीय सड़कों पर अवैध रूप से बेचा जा रहा है। पड़ताल के दौरान तहलका को राजस्थान के झुंझुनू और उत्तर प्रदेश के नोएडा में ट्रकों और टेम्पो से गुलाबी नमक बेचने वाले विक्रेताओं की बढ़ती संख्या का पता चला। इनमें से कई विक्रेता, जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं; राजस्थान से हैं। जबकि कुछ उत्तर प्रदेश से हैं। ये लोग अपना कारोबार सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी गाड़ियों को सड़क किनारे खड़ा करते हैं। तहलका रिपोर्टर ने जब इन विक्रेताओं से बात की, तो उन्होंने दावा किया कि बेचा जा रहा नमक पाकिस्तान से पंजाब और राजस्थान के रास्ते लाया जाता है। ऐसे में अगर प्रतिबंध के बावजूद पाकिस्तान से नमक का आयात जारी है, तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इस मामले की तत्काल जांच करनी चाहिए।
‘यह गुलाबी नमक तस्करी के जरिए पाकिस्तान से आ रहा है। मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन मेरे बेटे को है। पंजाब और राजस्थान के बड़े व्यापारी पाकिस्तान से यह नमक खरीदते हैं और हम उनसे एक बार में लगभग 2-3 टन नमक खरीदते हैं।’ -राजस्थान के झुंझुनू में गुलाबी नमक बेचने वाली एक स्ट्रीट वेंडर रोशनी ने तहलका के गुप्त पत्रकार को बताया।
‘पिछले 10 वर्षों से मैं झुंझुनू की सड़कों पर खुलेआम यह पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेच रही हूं। लोग मुझसे इसे क्विंटलों में खरीदते हैं।’ -उसने कहा।
‘भारतीयों को पाकिस्तानी गुलाबी नमक पसंद है। वे भारतीय टाटा नमक को पसंद नहीं करते और इसकी बिक्री हमारे यहां न के बराबर है। पाकिस्तानी गुलाबी नमक को भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। इससे बीमारियों की संभावना कम हो जाती है।’ -रिपोर्टर से बात करते हुए रोशनी ने यह दावा किया।
‘पिछले साल पहलगाम हमले के बाद जब भारत ने पाकिस्तान के साथ सभी तरह के व्यापार पर प्रतिबंध लगा दिया था, तब व्यापारियों ने पाकिस्तानी गुलाबी नमक के पुराने स्टॉक को ऊंची दरों पर बेचा था। अब यह पाकिस्तानी गुलाबी नमक एक बार फिर पाकिस्तान से भारत में आने लगा है।’ -उसने कहा।
‘यह पाकिस्तान का लाहौरी नमक है और यह राजस्थान के रास्ते मुझ तक पहुंचता है। यह नमक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। अगर आपके शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन है, तो यह पाकिस्तानी गुलाबी नमक उसे कम करने में मदद करता है।’ -उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक अन्य स्ट्रीट वेंडर शिव कुमार चौधरी ने तहलका के गुप्त पत्रकार से कहा।


‘मैं गारंटी दे सकता हूं कि मैं जो गुलाबी नमक बेच रहा हूं, वह पाकिस्तान का है। अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं है, तो मेरा फोन नंबर ले लीजिए और अगर आपको पता चले कि नमक पाकिस्तानी नहीं है, तो उसे वापस कर दीजिए।’ -शिव कुमार ने कहा।
‘मैं नोएडा के सेक्टर-78 में सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक पाकिस्तानी लाहौरी नमक बेचता हूं और इसकी शुद्धता की गारंटी देता हूं। यदि आप चाहें, तो मैं 100-150 किलोग्राम पाकिस्तानी लाहौरी नमक उपलब्ध करा सकता हूं।’ -नोएडा के एक अन्य स्ट्रीट वेंडर अरविंद ने हमारे गुप्त रिपोर्टर से कहा।
तहलका के गुप्त कैमरे ने सबसे पहले रोशनी को, जो केवल अपने पहले नाम से जानी जाती है; झुंझुनू में प्रतिबंधित पाकिस्तानी हिमालयी गुलाबी नमक बेचते हुए पकड़ा, जिसे लोकप्रिय रूप से सेंधा नमक यानी लाहौरी नमक के नाम से जाना जाता है। उसने अपना ट्रक सड़क किनारे खड़ा कर रखा था और खुलेआम नमक बेच रही थी।
हमारे गुप्त पत्रकार की रोशनी के साथ संक्षिप्त बातचीत जल्द ही रहस्योद्घाटन में बदल जाती है, क्योंकि हमारे गुप्त पत्रकार ने जब बार-बार उससे पूछा कि पाकिस्तानी गुलाबी नमक भारत कैसे पहुंचता है, तो उसने बिना ज्यादा झिझक के वह स्वीकार किया करती है कि नमक सीमा पार से आता है और अंततः मानती है कि यह तस्करी के माध्यम से आता है। हालांकि वह दावा करती है कि उसके बेटे को मार्ग और नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी है, लेकिन उसके जवाबों से संकेत मिलता है कि प्रतिबंध के बावजूद व्यापार जारी है। यह चैट इस बात को भी दर्शाती है कि सड़क किनारे के विक्रेता कितनी लापरवाही से ऐसे दावे कर रहे हैं।

रिपोर्टर : ये आता कैसे है पाकिस्तान से?
रोशनी : पाकिस्तान से लाकर देते हैं।
रिपोर्टर : बॉर्डर पार करके आता होगा?
रोशनी  : हां, उसका बॉर्डर पार करते हैं… पता न क्या करते हैं, लड़के को पता है।
रिपोर्टर : वो स्मगलिंग जो होती है, वो?
रोशनी : हां।
रिपोर्टर : स्मगलिंग होकर आता है?
रोशनी : हां।

आगे की बातचीत में रोशनी बताती है कि पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर के कारण पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने पर पाकिस्तानी गुलाबी नमक की आपूर्ति कैसे प्रभावित हुई थी। उनका कहना है कि संघर्ष के बाद कुछ समय के लिए नमक की आपूर्ति बंद हो गई थी, जिसके कारण व्यापारियों को पुराने स्टॉक को काफी ऊंची कीमतों पर बेचा था। बातचीत के दौरान वह बार-बार उत्पाद को लाहौरी नमक कहकर संबोधित करती है और दावा करती है कि उस समय यह नमक 150-200 रुपए प्रति किलो के भाव से बिक रहा था। उनके बयानों से पता चलता है कि प्रतिबंधों के बावजूद आपूर्ति माध्यमों के फिर से खुलने के बाद इसका व्यापार फिर से शुरू हो गया।
रिपोर्टर : अभी पाकिस्तान से लड़ाई चल रही थी, तब आ रहा था?
रोशनी : जब नहीं आ रहा था, जब तो बंद हो जाता है। तब तो महंगा देते हैं ये सेठ माल।

रोशनी

रिपोर्टर : अभी पिछले साल लड़ाई हुई थी पाकिस्तान से?
रोशनी : जब बंद हो गया था आना… जब बंद हो जाता है ना, तब सेठ महंगा देते हैं माल।
रिपोर्टर : अच्छा, तब पाकिस्तानी माल तुम्हें महंगा दे रहे थे। तो तुम्हें कितने का दे रहे थे तब, पिछले साल जब लड़ाई हुई थी?
रोशनी : पिछले साल बहुत महंगा खरीदकर लाए थे हम। सबसे महंगा ये वाला- लाहौरी।
रिपोर्टर : लाहौरी नमक है ये?
रोशनी : कभी इसको लाहौरी बोलते हैं, कभी पिंक साल्ट बोलते हैं।
रिपोर्टर : अच्छा, ये लाहौर से आता होगा? क्या रेट था पिछले साल?
रोशनी : बेच रहे थे 150-200 रुपए किलो।
 
इस विक्रेता ने दावा किया कि व्यापार प्रतिबंध लागू होने के बाद भी व्यापारियों ने पाकिस्तानी गुलाबी नमक का पुराना स्टॉक बेचना जारी रखा। इसके बाद वे सीमित मात्रा में आपूर्ति प्राप्त करने में कामयाब रहे। वह कहती है कि पहले माल बहुत बड़ी मात्रा में आता था और वर्तमान में उन्हें अमृतसर स्थित डीलरों से फोन ऑर्डर के माध्यम से उत्पाद प्राप्त होता है।
रिपोर्टर : सेठों के पास कहां से आ रहा था माल, जब पाकिस्तान से बंद हो गया था?
रोशनी : वो पहले का रखा हुआ बेचते थे। थोड़ा-बहुत थोड़ी मंगवाते हैं, वो 100 की 10 गाड़ी आती है।
रिपोर्टर : पाकिस्तान की?
रोशनी : हां, पाकिस्तान की।
रिपोर्टर : ये सेठ कहां रहते हैं सब?
रोशनी : हम तो अमृतसर से लेते हैं।
रिपोर्टर : अमृतसर से कैसे आता है?
रोशनी : हमारे ऐसे फोन पर कर देते हैं।

पहलगाम आतंकी हमले के एक साल बाद पाकिस्तानी वस्तुओं पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद भी रोशनी ने खुलासा किया कि पाकिस्तानी नमक फिर से भारत में आने लगा है। विक्रेता का दावा है कि प्रतिबंध लागू होने के बाद पाकिस्तानी गुलाबी नमक की बाजार में पहुंच अस्थायी रूप से बंद हो गई थी। हालांकि बाद में आपूर्ति फिर से शुरू हो गई और स्थानीय बाजारों में इस उत्पाद की बिक्री दोबारा शुरू हो गई है।
रिपोर्टर : अब ये कब से आ रहा है पाकिस्तानी नमक? बीच में बंद हो गया था?
रोशनी : हां, बंद हो गया था। उसके बाद फिर आना शुरू हो गया।
रिपोर्टर : फिर बिक रहा है?
रोशनी : हां।


इस बातचीत में रोशनी ने दावा किया कि बेचा जा रहा गुलाबी नमक पाकिस्तानी नमक है और यह अमृतसर, बीकानेर तथा जैसलमेर जैसे शहरों के व्यापारियों के माध्यम से स्थानीय विक्रेताओं तक पहुंचता है। रोशनी आरोप लगाती है कि बड़े व्यवसायी दो से तीन टन की थोक खेप में स्टॉक खरीदते हैं और फिर उसे छोटे विक्रेताओं को बेचते हैं।
रिपोर्टर : ये सारा पाकिस्तानी नमक है?
रोशनी : हां, पाकिस्तानी नमक है।

पाकिस्तानी गुलाबी नमक


रिपोर्टर : पाकिस्तानी नमक खिला रही हो हिंदुस्तानियों को?
रोशनी : हम क्या लेते हैं, पीछे से सेठ लोग लेते हैं। अमृतसर से लेते हैं हम तो गाड़ी मंगवा लेते हैं।
रिपोर्टर : ये पाकिस्तानी नमक अमृतसर से आता है?
रोशनी : हां, बड़े बड़े शहरों में आता है ये, बीकानेर, जैसलमेर…।
रोशनी (आगे) : बड़े-बड़े सेठ माल खरीदकर देते हैं हमें।
रिपोर्टर : बड़े-बड़े सेठ खरीदते हैं पाकिस्तान से?
रोशनी : हां, हम सारे (वेंडर्स) मिल के एक बड़ी गाड़ी मंगवा लेते हैं, 2-3 टन का माल।

नीचे दी गई बातचीत में विक्रेता खुले तौर पर दावा करती है कि वह ग्राहकों को बताती है कि बेचा जा रहा गुलाबी नमक पाकिस्तान से आता है। वह कहती हैं कि लोग लगभग एक दशक से इसे बड़ी मात्रा में उससे खरीदते आ रहे हैं। वह पिछले 10 वर्षों से राजस्थान के झुंझुनू में इस उत्पाद को बेच रही है।
रिपोर्टर : तो तुम ये नमक सबको बताकर बेचती हो कि पाकिस्तान का है?
रोशनी : हां, झूठ क्यूं बोलेंगे भाई!
रिपोर्टर : ले जाते हैं लोग?
रोशनी : हां, 10 साल हो गए, क्विंटल-क्विंटल ले जाते हैं लोग।
रिपोर्टर : आप कब से बेच रही हो ये नमक?
रोशनी : हमें 10 साल हुए हैं।
रिपोर्टर : ये कौन-सी जगह है राजस्थान की?
रोशनी : ये झुंझुनू है।

रोशनी के अनुसार, लोग पाकिस्तान के हिमालयी गुलाबी नमक को इसलिए पसंद करते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। उसका दावा है कि पाकिस्तानी गुलाबी नमक न केवल शहरों में, बल्कि गांवों में भी बेचा जा रहा है। उसका कहना है कि यह नमक स्वास्थ्यवर्धक और रोग संबंधी जोखिमों से मुक्त करने वाला है, इसलिए ग्राहक टाटा नमक जैसे भारतीय नमक ब्रांडों को पसंद नहीं करते हैं और इसीलिए वे भारतीय नमक के बजाय पाकिस्तानी नमक को चुनते हैं।
रिपोर्टर :  गांव-गांव बेचती हो नमक?
रोशनी : लड़का बेचने गया है गांव।
रिपोर्टर : हिंदुस्तान का क्यों नहीं बेचतीं?
रोशनी : वो लेते नहीं। टाटा नमक हमारे पास नहीं बिकता, ये खान में से निकलता है?
रिपोर्टर : मतलब हिंदुस्तान का नमक आपसे कोई नहीं खरीदता?
रोशनी : नहीं लेता। ये ज्यादा अच्छा है, कोई बीमारी नहीं होती इससे।
रिपोर्टर : कौन कह रहा है नहीं होती?
रोशनी : नहीं होती।
रिपोर्टर : तुम्हें कैसे पता?
रोशनी : हम खुद खाते हैं।

अब रोशनी ने हमें पाकिस्तान के गुलाबी नमक का भाव बताया। उसने कहा कि एक किलो नमक की कीमत 50 रुपए है और अगर हम इसे पाउडर के रूप में लें, तो इसकी कीमत 100 रुपए प्रति किलो है। उसने हमें यह भी बताया कि वह पुलिस के बिना किसी हस्तक्षेप के एक दिन में 50 किलो पाकिस्तानी नमक बेच देती है।
रिपोर्टर : क्या रेट है ये?
रोशनी : कौन सा?
रिपोर्टर : पाकिस्तानी नमक।
रोशनी : ये 50 रुपए का है, वो 100…।
रिपोर्टर : ये 50 रुपए है?
रोशनी : हां, इसका पाउडर 100 रुपए पर केजी।
रिपोर्टर : एक पैकेट में कितना है?
रोशनी : 1 किलो।
रिपोर्टर : कितना बिक जाता है एक दिन में?
रोशनी : बिक जाता है बोरी।
रिपोर्टर : कोई तंग तो नहीं करता पुलिस वाला?
रोशनी : न…।

नीचे दी गई संक्षिप्त बातचीत में रोशनी ने दावा किया कि इलाके में कई अन्य विक्रेता भी पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेच रहे हैं। वह आगे कहती है कि भारतीय नमक की बाजार में मांग बहुत कम है।
रिपोर्टर : और कौन बेचता है पाकिस्तानी नमक तुम्हारे अलावा?
रोशनी : सारे बेचते हैं।
रिपोर्टर : सारे बेच रहे हैं, और हिन्दुस्तान का क्यूं नहीं बेच रही?
रोशनी : बिक रा नहीं।

बातचीत के इस अंश में विक्रेता इस बात को दोहराती है कि ग्राहक टाटा नमक को त्याग रहे हैं और इसके बजाय पाकिस्तान से प्राप्त लाहौरी या सेंधा नमक को पसंद कर रहे हैं। वह पाकिस्तानी गुलाबी नमक को सेवन के लिए अधिक स्वास्थ्यवर्धक बताती है।
रिपोर्टर : टाटा साल्ट इस्तेमाल ही नहीं हो रहा?
रोशनी : ये खान में से निकल रहा है। ये है सेंधा, लाहौरी नमक खाने का। वो तो बीमारी का कारण है।

रोशनी


रिपोर्टर : टाटा साल्ट बीमारी का कारण है? और ये पाकिस्तानी नमक?
रोशनी : अच्छा है खाने में।
रिपोर्टर : वो सेंधा नमक है, वो भी पाकिस्तान से आता है?
रोशनी : आता सारा पाकिस्तान से है। ये मसाला डालकर बनाया जाता है काला…।

रोशनी की दुकान से निकलने से पहले रिपोर्टर ने उससे पूछा कि क्या वह दिल्ली में उन्हें एक टन (1,000 किलोग्राम) पाकिस्तानी गुलाबी नमक की आपूर्ति कर सकती है? रोशनी ने सकारात्मक जवाब दिया। वह खेप को दिल्ली भेजने के बारे में भी चर्चा करती है और कहती है कि अगर आपके द्वारा डिलीवरी का खर्च वहन किया जाता है, तो यह व्यवस्था की जा सकती है। रिपोर्टर ने उससे कहा कि परिवहन का खर्च हम वहन करेंगे।
रिपोर्टर : तुम्हारा नाम क्या है?
रोशनी : रोशनी।
रिपोर्टर : एकाध टन चाहिए हो, तो मिल जाएगा?
रोशनी : मिल जाएगा।
रिपोर्टर : पाकिस्तानी?
रिपोर्टर (आगे) : दिल्ली कैसे भेजोगी?
रोशनी : दिल्ली भेजना है, इतना तो किराया-भाड़ा हो जाएगा।
रिपोर्टर : वो हम सब दे देंगे आपको।

यह कहानी राजस्थान की है, जहां हमने रोशनी को झुंझुनू की सड़कों पर खुलेआम पाकिस्तानी हिमालयी गुलाबी नमक बेचते हुए पाया। पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ सभी प्रकार के व्यापार पर प्रतिबंध जारी है। फिर भी पाकिस्तान का सेंधा नमक यानी लाहोरी नमक भारतीय बाजारों में खुलेआम बिक रहा है।
इसके बाद तहलका रिपोर्टर ने उत्तर प्रदेश के नोएडा का रुख किया, जहां सेक्टर-45 में उनकी मुलाकात शिव कुमार चौधरी से हुई, जो सड़क किनारे साइकिल रिक्शा पर पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेचते हुए मिला। शिव ने रिपोर्टर को बताया कि वह जो गुलाबी नमक बेच रहा है, वह पाकिस्तान से आया है। उसने दावा किया कि यह नमक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है, खासकर शरीर की सूजन को कम करने में मदद करता है। शिव ने दावा किया कि यह नमक लाहौर (पाकिस्तान) से राजस्थान पहुंचता है और फिर स्थानीय बाजारों में बेचा जाता है। उसने बताया कि उसने पाकिस्तानी नमक राजस्थान से मंगवाया है और उसे 80 रुपए प्रति किलो के भाव से बेचता है।
रिपोर्टर : ये तो वहां का होगा शायद, पाकिस्तान का?
शिव : हां।
रिपोर्टर : ये भी, दोनों?
शिव : ये लाहौरी है, बहुत फायदे का काम करता है, हाथ-पैर में सूजन हो।

शिव कुमार चौधरी

रिपोर्टर : पिंक नमक भी कहते हैं इसे। ये क्या पाकिस्तान से आता है?
शिव : हां, लाहौर से आता है राजस्थान। वहां से यहां आता है।
रिपोर्टर : ये क्या भाव है, लाहौरी?
शिव : 80 रुपए पर केजी।
रिपोर्टर : काला कहां से आता है?
शिव : काला राजस्थान से आता है…।
रिपोर्टर : ये पिंक साल्ट है पाकिस्तान का?
शिव : हां।

अब शिव ने हमें बताया कि वह आमतौर पर नोएडा के सेक्टर-18 के मार्केट में अपनी दुकान लगाता है, जिसे शहर के सबसे पॉश इलाकों में से एक माना जाता है। हालांकि रिपोर्टर के दौरे वाले दिन उसने पाकिस्तानी नमक से लदे अपने साइकिल रिक्शा को नोएडा के सेक्टर-45 में लगाया हुआ था। उसने कहा कि वह मांग होने पर 50-60 किलोग्राम लाहौरी नमक की व्यवस्था कर सकता है। वह इस बात पर भी जोर देता है कि यह नमक वास्तव में पाकिस्तान से है और खरीदार को आश्वस्त करने के लिए अपना फोन नंबर भी देता है कि यदि इसकी उत्पत्ति के बारे में कोई संदेह हो, तो वह इसे वापस लेने को तैयार है।
रिपोर्टर : पहली बार देख रहा हूं आपको, दुकान कहां लगाते हो?
शिव : 18 सेक्टर में।
रिपोर्टर : ये बताओ, लाहौरी नमक हमें चाहिए हो 50-60 किलो?
शिव : हो जाएगा।
रिपोर्टर : अभी कितना है तुम्हारे पास? …और क्या गारंटी है पाकिस्तानी है…?
शिव : लाहौरी है। आप किसी से भी पता कर लीजिए। अगर आपको डाउट हो रहा हो, आप हमारा नंबर ले लीजिए।
रिपोर्टर : हां, नाम और नंबर दे दो।
शिव : हमारा एक दिन का काम नहीं है…।

रिपोर्टर ने शिव कुमार से कहा कि हमें इस बात का यकीन नहीं है कि आप जो गुलाबी नमक बेच रहे हो, वह वास्तव में पाकिस्तान से है या नहीं! क्योंकि पहलगाम हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। रिपोर्टर ने शिव से पूछा कि उसे अभी भी पाकिस्तानी नमक कहां से मिल रहा है? इसके जवाब में शिव ने कहा कि उसने यह नमक राजस्थान से मंगवाया है। उसने आगे कहा कि यह उत्पाद दिल्ली के बदरपुर इलाके में भी उपलब्ध है। हालांकि उसने व्यक्तिगत रूप से इसे राजस्थान से खरीदा है।
रिपोर्टर : मैं पाकिस्तान का इसलिए डाउट कर रहा हूं, क्यूंकि पाकिस्तान की चीजें बैन हैं इंडिया में, वो पहलगाम के बाद बैन हो गया था।
शिव : पाकिस्तान से राजस्थान आता है, वहां से दिल्ली आता है।
रिपोर्टर : दिल्ली से तुम्हें कौन देता है…?
शिव : बदरपुर की तरफ भी मिलता है, लेकिन हम डायरेक्ट राजस्थान से लाते हैं।
रिपोर्टर : स्मगलिंग करवा रहे होंगे, क्यूंकि वैसे तो बैन है ये।
शिव : हम्म…।

नीचे दिए गए अंश में विक्रेता से पाकिस्तानी नमक यानी लाहौरी नमक के रूप में बेचे जा रहे गुलाबी नमक की प्रामाणिकता के बारे में सवाल किया जाता है। वह आश्वासन के तौर पर अपना फोन नंबर देने की पेशकश करता है और यहां तक कि बिक्री के लिए उपलब्ध उत्पाद को खुलेआम दिखाता भी है। वह आगे दावा करता है कि मांग होने पर वह 50-100 किलोग्राम की बड़ी मात्रा की व्यवस्था कर सकता है।
रिपोर्टर : तो गारंटी कैसे दोगे पाकिस्तान का है ये..?
शिव : आप नंबर ले लो।
रिपोर्टर : तुम्हारे नंबर से कैसे गारंटी होगी?
शिव : ये लो लाहौरी।
रिपोर्टर : इस पर तो लिखा हुआ है। खुलेआम बेच रहे हो?
रिपोर्टर (आगे) : मुझे बताओ, 50-60 किलो मिल जाएगा?
शिव : अभी ले जाओ, 100 किलो से कुछ कम होगा अभी।
रिपोर्टर : रोज लगाते हो आप?
रिपोर्टर (आगे) : काफी सालों से बेच रहे होंगे आप?
शिव : हमको तो ज्यादा टाइम नहीं हुआ है। हम जिससे माल खरीदते हैं, वो बहुत दिनों से बेच रहे हैं।
रिपोर्टर : ठीक है, मैं फोन करके बताऊंगा।

अगली बातचीत में शिव को फिर से यह सुनिश्चित करने के लिए याद दिलाया जाता है कि आपूर्ति किया जा रहा गुलाबी नमक वास्तव में पाकिस्तान से ही हो। वह अपना संपर्क नंबर साझा करके आश्वस्त करता है और कहता है कि यदि सामान में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे वापस किया जा सकता है। उसका यह भी दावा है कि फिलहाल लगभग 100 किलोग्राम से कुछ कम स्टॉक उपलब्ध है, जिसका कुछ हिस्सा पहले ही अन्य खरीदारों को बेचा जा चुका है। चर्चा आगे चलकर बड़े पैमाने पर आपूर्ति और वितरण व्यवस्थाओं पर केंद्रित हो जाती है।
रिपोर्टर : बस ये याद रखना, प्योर होना चाहिए, पाकिस्तान का ही हो?
शिव : आपको अगर डाउट हो रहा है, नंबर ले लिए हैं, आप वापस कर देना।
रिपोर्टर : ज्यादा चाहिए हमें, 100 किलो?
शिव : सर! ये 100 किलो से थोड़ा कम है अभी। एक आदमी 24 किलो ले गया है…।
रिपोर्टर : लाहौरी?
शिव : हां, और एक ले गया है 12 किलो।
रिपोर्टर : अभी ले गया है..?
शिव : घंटे 2 घंटे पहले।
रिपोर्टर : तुम 100 केजी से ऊपर भी दे सकते हो, 200-250 किलो?
शिव : हां।
रिपोर्टर : लेकिन पहुंचाना आपका काम होगा फिर?
शिव : पहुंचा देंगे।
रिपोर्टर : हम पैसे दे देंगे। पहुंचाना आपका काम होगा?
शिव : किराया दे देना।
रिपोर्टर : रिक्शा का किराया देना होगा?
शिव : ठीक है।

इस बातचीत में आगे शिव ने बताया कि गुलाबी नमक की आपूर्ति एक कंपनी के साथ नियमित रूप से ऑर्डर देकर कैसे प्रबंधित की जाती है। उसने कहा कि स्टॉक हमेशा रोजाना उपलब्ध नहीं होता है, लेकिन ऑर्डर देने के कुछ दिनों के भीतर आ जाता है। शिव ने यह भी बताया कि सामान की डिलीवरी से पहले ही भुगतान अग्रिम रूप से किया जाता है। इस चर्चा का मुख्य विषय यह है कि आपूर्ति श्रृंखला व्यवहार में कैसे काम करती है।
रिपोर्टर : आप रोज मंगवाते हो?
शिव : कंपनी से मंगवाते हैं।
रिपोर्टर : रोज आता है?
शिव : हम कंपनी को ऑर्डर देते हैं, 2-4 दिन में आ जाता है।
रिपोर्टर : अभी है तुम्हारे पास या मंगवाना है?
शिव : पैसा पहले देना पड़ता है उसके पास, फिर आता है।
रिपोर्टर : अकाउंट में डाल दिया उनके, फिर आता होगा?
शिव : हां, फिर आता है…।

जैसा कि ऊपर देखा गया है कि पहलगाम हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी वस्तुओं पर प्रतिबंध के बावजूद शिव कुमार चौधरी नाम का व्यक्ति भी खुलेआम पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेचते हुए पाया गया। शिव से बातचीत करने के बाद तहलका रिपोर्टर की मुलाकात नोएडा के सेक्टर-78 में एक अन्य स्ट्रीट वेंडर अरविंद से हुई, जो अपने पहले नाम से जाना जाता है। पहलगाम हमले के बाद भारत में पाकिस्तानी सामानों पर प्रतिबंध के बावजूद अरविंद को नोएडा में सड़क किनारे अपनी गाड़ी के जरिए खुलेआम पाकिस्तानी गुलाबी नमक, जिसे लाहौरी नमक भी कहा जाता है; बेचते हुए देखा गया था। जब अरविंद से उसकी बिक्री की दिनचर्या के बारे में पूछा गया, तो उसने बताया कि वह सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक रोजाना पाकिस्तानी नमक बेचता है। उसने रिपोर्टर को 100 किलोग्राम पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेचने पर भी सहमति जताई।
रिपोर्टर : ठीक है, मैं कब आ जाऊं?
अरविंद : टाइम बता दो?
रिपोर्टर : आप कब मिलते हो यहां?
अरविंद : मैं रोज मिलता हूं, 10 से 7 बजे तक शाम को।
रिपोर्टर : मैं 100-150 किलो ले जाऊंगा, रखवा लेना अपने पास।
अरविंद : 100 किलो?
रिपोर्टर : 100 किलो लाहौरी।
अरविंद : 50 किलो का आता है एक कट्टा।
रिपोर्टर : 2 कट्टे आएंगे ना?
अरविंद : हां।
रिपोर्टर : मैं फोन कर दूंगा इसी नंबर पर, मेरा नाम राजीव है…।
अरविंद : फोन कर देना।
रिपोर्टर : आने से एक दिन पहले फोन कर दूंगा।

इस बातचीत में अरविंद इस बात की पुष्टि करता है कि वह लाहौरी नमक बेच रहा है। वह इस नमक की कीमत 60 रुपए प्रति किलोग्राम बताता है।  मिलावट के बारे में संदेह को खारिज करते हुए वह इस बात पर जोर देता है कि नमक असली है और उसमें कृत्रिम रंग नहीं मिलाया गया है। आपूर्ति और उपलब्धता के बारे में पूछे जाने पर उसने कहा कि वह मांग के अनुसार स्टॉक की व्यवस्था कर सकता है और वह नोएडा के सेक्टर-78 में प्रतिदिन अपना काम करता है। उसने यह भी बताया कि यह नमक दिल्ली से मंगाया जाता है।
रिपोर्टर : ये लाहौरी नमक है?
अरविंद : हां।
रिपोर्टर : क्या रेट है?
अरविंद : 60 रुपए किलो।
रिपोर्टर : इसकी क्या गारंटी है कि असली है?
अरविंद : इसमें क्या नकली होगा?

अरविंद

रिपोर्टर : हां, वो नकली कलर लगा देते हैं?
अरविंद : ऐसे नहीं होता है।
रिपोर्टर : मैंने सुना है पिंक कलर कर देते हैं, पिंक साल्ट बोल देते हैं?
अरविंद : अरे, ऐसे नहीं होता, पक्का है ये…।
रिपोर्टर : कितना दे सकते हो हमें, 100-200-300 किलो मिल जाएगा?
अरविंद : मेरे पास तो यही है।
रिपोर्टर : ये मंगवाते कहां से हो लाहौरी नमक?
अरविंद : दिल्ली से आता है।
रिपोर्टर : यहां डेली लगाते हो आप?
अरविंद : हां।
रिपोर्टर : ये कौन सा सेक्टर है?
अरविंद : सेक्टर-78, नोएडा।

तहलका रिपोर्टर को झुंझुनू और नोएडा की सड़कों पर पाकिस्तानी गुलाबी नमक बेचते हुए तीन लोग मिले। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आयात पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पाकिस्तानी गुलाबी नमक, जिसे सेंधा नमक या लाहौरी नमक के नाम से भी जाना जाता है, भारत के अन्य हिस्सों में भी उपलब्ध है। अपने विशिष्ट रंग और स्वाद के लिए प्रसिद्ध यह नमक कथित तौर पर पूरे भारत में बेचा जा रहा है। इसके स्वास्थ्य लाभों के बारे में अप्रमाणित दावे राजस्थान और नोएडा में सड़क किनारे विक्रेताओं से इसे खरीदने के लिए खरीदारों को आकर्षित करते रहते हैं।
इन दावों के अलावा सेंधा नमक का हिंदू परंपराओं में वैदिक ग्रंथों में निहित कारणों से भी महत्व है। रॉक सॉल्ट, जिसे अक्सर पाकिस्तानी नमक या लाहौरी नमक कहा जाता है, नवरात्रि के व्रत अनुष्ठानों के दौरान आमतौर पर इस्तेमाल किया जाता है और यह बड़े पैमाने पर पाकिस्तान से आयात किया जाता है, क्योंकि यह भारत में नहीं पाया जाता है। सामान्य सफेद नमक की तुलना में सेंधा नमक या रॉक सॉल्ट को आयुर्वेद में इसके कथित स्वास्थ्य लाभों के लिए भी मान्यता प्राप्त हुई है। सोशल मीडिया के माध्यम से बढ़ती जागरूकता और डॉक्टरों की सिफारिशों ने अधिक लोगों को सेंधा नमक अपने आहार में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
सड़क पर बिकने वाले नमक की कीमत पैकेटबंद नमक की तुलना में लगभग आधी है, जिससे इसकी मांग में भारी वृद्धि हुई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, जो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है; सभी खाद्य उत्पादों को बेचने से पहले उनकी मंजूरी अनिवार्य करता है। इस तरह की मंजूरी के बिना खाद्य उत्पादों की बिक्री, भंडारण या उत्पाद करना अवैध है। इसका उल्लंघन करने वालों को आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
तहलका रिपोर्टर ने जिन विक्रेताओं से बात की, उनका दावा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद वे बड़ी मात्रा में जो नमक बेच रहे हैं, वह पाकिस्तान से मंगाया जाता है। विक्रेताओं ने यह भी दावा किया कि अनौपचारिक वितरण चैनलों के माध्यम से आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि प्रवर्तन एजेंसियां स्थानीय बाजारों में प्रतिबंधित पाकिस्तानी गुलाबी नमक की खुलेआम बिक्री से अनभिज्ञ प्रतीत होती हैं। चिंता की बात यह है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा उन चैनलों की स्पष्ट रूप से जांच का अभाव है, जिनके माध्यम से प्रतिबंधित पाकिस्तानी गुलाबी नमक कथित तौर पर पंजाब और राजस्थान की सीमाओं के रास्ते भारतीय घरों में प्रवेश कर रहा है। ऐसा लगता है कि भारतीय सड़कों पर ट्रकों और टेम्पो से पाकिस्तानी गुलाबी नमक या सेंधा नमक बेचने वाले विक्रेताओं की संख्या में भी काफी वृद्धि हो रही है।

MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला; ‘मंदिर ही है भोजशाला…’,

धार भोजशाला विवाद फैसला : एएसआई के वैज्ञानिक साक्ष्य और अकाट्य पुरातात्विक सत्य, वैश्विक ज्ञान केंद्र का संकल्प और वाग्देवी की घर वापसी...Pic Sourcs : Timesnownews
धार भोजशाला विवाद फैसला : एएसआई के वैज्ञानिक साक्ष्य और अकाट्य पुरातात्विक सत्य, वैश्विक ज्ञान केंद्र का संकल्प और वाग्देवी की घर वापसी...Pic Sourcs : Timesnownews

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/भोपाल। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा धार की ऐतिहासिक भोजशाला को स्पष्ट रूप से हिंदू मंदिर करार देना और हिंदुओं को निरंतर पूजा-अर्चना का अधिकार सौंपना न्यायशास्त्र के इतिहास में एक युगांतरकारी मोड़ है। न्यायालय ने सुदृढ़ साक्ष्यों के आधार पर रेखांकित किया कि इस पावन स्थल पर हिंदू उपासना की निरंतरता कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई थी।

सन 1034 में परमार वंश के प्रतापी राजा भोज द्वारा स्थापित यह ‘सरस्वती कंठाभरण महाविद्यालय’ केवल एक संरचना नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सभ्यतागत अस्मिता का जीवंत प्रतीक था। यद्यपि वर्ष 1305 में अलाउद्दीन खिलजी, 1401 में दिलावर खान गौरी और 1514 में महमूद शाह खिलजी जैसे आक्रांताओं ने इस भव्य मंदिर को क्षतिग्रस्त कर मस्जिद का स्वरूप देने का बार-बार प्रयास किया, किंतु इसकी दीवारों और स्तंभों में अंकित संस्कृत शिलालेखों ने इसके मूल चरित्र को जीवित रखा।

इस ऐतिहासिक निर्णय का सबसे मजबूत आधार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक और अकाट्य सर्वे रिपोर्ट है। निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया के तहत किए गए इस सर्वे में परिसर से भगवान गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह और भैरव जैसे देवी-देवताओं की 94 प्राचीन मूर्तियां, अवशेष और परमार कालीन सिक्के बरामद हुए, जिन्होंने विवादित ढांचे के पीछे दबे वास्तविक सच को सार्वजनिक कर दिया। विद्वान न्यायाधीशों द्वारा स्वयं किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण, पुरातात्विक साक्ष्यों और ऐतिहासिक साहित्य (जैसे कवि मदन के नाटक) ने इस बात पर अंतिम मुहर लगा दी कि यह वाग्देवी मां सरस्वती का ही पावन धाम था।

यह निर्णय केवल एक स्थल की मुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक आत्मा की पुनर्स्थापना है। अब समाज और सरकार के समक्ष इस परिसर को पुरातन काल की भांति संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बनाने की महती जिम्मेदारी है। इसके साथ ही, वर्ष 1875 में ब्रिटिश काल के दौरान खुदाई से प्राप्त और वर्तमान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की मूल वाग्देवी प्रतिमा को भारत वापस लाने की अदालती टिप्पणी अत्यंत स्वागत योग्य है।

यह फैसला किसी समुदाय की पराजय नहीं बल्कि ऐतिहासिक सत्य का उद्घाटन है, जिसे संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर सभी को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।

Bhojshala पर हाईकोर्ट की मुहर: VHP बोली- यह फैसला सनातन विरासत और सांस्कृतिक न्याय की बड़ी जीत

यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है... बोले - VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar
यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है... बोले - VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष Alok Kumar

नई दिल्ली: विश्व हिन्दू परिषद की ओर से जारी बयान में कहा गया कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि धार स्थित भोजशाला का मूल स्वरूप हिन्दू मंदिर का रहा है और यहां लगातार पूजा की परंपरा बनी रही। अदालत ने हिंदुओं को पूरे परिसर में पूजा का अधिकार देने की बात कही है। वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए अलग स्थान की मांग सरकार से करने का रास्ता खुला रखा गया है।

आलोक कुमार ने कहा कि यह फैसला किसी जल्दबाजी में नहीं बल्कि पूरी न्यायिक प्रक्रिया और वैज्ञानिक जांच के बाद आया है। उन्होंने बताया कि अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई की रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेजों और पुरातात्विक साक्ष्यों का अध्ययन किया। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया गया और न्यायाधीशों ने खुद मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया। उनके मुताबिक इसी आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि भोजशाला प्राचीन समय में देवी वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

वीएचपी ने यह भी कहा कि भोजशाला केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ मुद्दा है। संगठन ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एएसआई मिलकर इस स्थल के संरक्षण और संस्कृत अध्ययन की पुरानी परंपरा को फिर से जीवित करने की दिशा में काम करेंगे।

बयान में लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने की मांग का भी समर्थन किया गया। आलोक कुमार ने कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है और इसे भोजशाला में दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए।

अंत में वीएचपी ने सभी पक्षों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की। संगठन का कहना है कि यह फैसला किसी की हार या जीत नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य और सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना के रूप में देखा जाना चाहिए।

West Bengal में विकास की नई पटरी: 107 KM रेल लाइन से नई एक्सप्रेस तक, रेलवे का बड़ा प्लान

West Bengal में विकास की नई पटरी, रेलवे का बड़ा प्लान... | Image Source: News18 Hindi
West Bengal में विकास की नई पटरी, रेलवे का बड़ा प्लान... | Image Source: News18 Hindi

नई दिल्ली: Ministry of Railways की तरफ से सबसे बड़ी मंजूरी Shalbani-Adra तीसरी रेल लाइन परियोजना को मिली है। करीब 107 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस नई लाइन से कई इलाकों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और ट्रेनों की आवाजाही भी आसान बनेगी। इससे मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों दोनों को फायदा मिलने की संभावना है।

इसके अलावा Kolkata के Santragachi से Rajasthan के Khatipura तक नई एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की मंजूरी भी दी गई है। यह ट्रेन खड़गपुर के रास्ते चलेगी। लंबे रूट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। अभी तक इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों को कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती थी, लेकिन नई एक्सप्रेस शुरू होने से सफर आसान हो सकता है।

रेल मंत्रालय ने न्यू जलपाईगुड़ी से सिलीगुड़ी जंक्शन तक करीब 7 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन के दोहरीकरण सर्वे को भी मंजूरी दी है। उत्तर बंगाल में बढ़ते रेल ट्रैफिक को देखते हुए इस परियोजना को काफी अहम माना जा रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डबल लाइन बनने के बाद ट्रेनों की रफ्तार और समय दोनों में सुधार होगा। साथ ही ट्रैफिक दबाव भी कम किया जा सकेगा।

राजनीतिक गलियारों में भी इन परियोजनाओं को लेकर चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि केंद्र और राज्य में एक ही दल की सरकार होने का असर अब विकास परियोजनाओं पर दिखाई देने लगा है। रेलवे से जुड़ी कई योजनाएं, जो पहले लंबे समय से अटकी हुई थीं, अब तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में रेलवे और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी और भी बड़ी घोषणाएं देखने को मिल सकती हैं।

100 साल पुराने रिकॉर्ड से तय होगा मंदाकिनी का फ्लड जोन, बाढ़ से मिलेगी राहत?

Mandakini River | Image Source: Amar Ujala
Mandakini River | Image Source: Amar Ujala

नई दिल्ली: चित्रकूट प्रशासन का मानना है कि फ्लड प्लेन जोन तय होने से यह साफ हो जाएगा कि नदी के आसपास कौन-कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इसके बाद उन क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर रोक लगाने और लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की योजना तैयार करना आसान होगा। शासन स्तर से संबंधित विभागों को इस काम के लिए निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

मां मंदाकिनी नदी चित्रकूट की आस्था और संस्कृति से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने वनवास का लंबा समय इसी क्षेत्र में बिताया था। यही वजह है कि हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा के लिए पहुंचते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। सामान्य दिनों में नदी का जलस्तर करीब 123.500 मीटर रहता है, जबकि बाढ़ के समय यह बढ़कर 131.500 मीटर तक पहुंच जाता है। इससे घाटों के आसपास कटान और जलभराव की स्थिति बन जाती है।

सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन शुरू कर दिया है। अधिकारी पुराने रिकॉर्ड, नदी के बहाव और प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में कई विभाग मिलकर काम करेंगे और रिपोर्ट तैयार होने के बाद मंदाकिनी नदी का फ्लड प्लेन जोन आधिकारिक रूप से घोषित किया जाएगा।

चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि यह पूरा काम एनजीटी के निर्देशों के तहत किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पहल से भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और स्थानीय लोगों को राहत मिलेगी। प्रशासन अब ऐसी रणनीति तैयार करने में जुटा है जिससे हर साल आने वाली बाढ़ का असर कम किया जा सके।

“झुके कंधे, फीकी मुस्कान”… जिनपिंग से मुलाकात में ट्रंप की बॉडी लैंग्वेज ने क्या इशारा दिया?

ट्रंप और जिनपिंग की बीजिंग के Great Hall of the People में हाई प्रोफाइल मीटिंग। | Image Source: NDTV.in
ट्रंप और जिनपिंग की बीजिंग के Great Hall of the People में हाई प्रोफाइल मीटिंग। | Image Source: NDTV.in

नई दिल्ली: Beijing के Great Hall of the People में हुई इस हाई प्रोफाइल मीटिंग में दोनों नेताओं ने ईरान संकट, व्यापार, ताइवान और वैश्विक हालात जैसे कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की। लेकिन मीटिंग खत्म होने के बाद जब दोनों मीडिया के सामने आए, तो लोगों का ध्यान ट्रंप के हाव-भाव पर टिक गया। तस्वीरों में ट्रंप के कंधे झुके हुए दिखे और उनके चेहरे पर तनाव साफ नजर आया। वहीं शी जिनपिंग आराम से बैठे दिखाई दिए और उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान भी नजर आई।

बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी बड़े नेता के हाव-भाव उसके मानसिक दबाव और स्थिति को काफी हद तक दिखाते हैं। ट्रंप जिस तरह हाथों को घुटनों के बीच दबाकर बैठे थे, उसे कई लोग दबाव और असहजता का संकेत मान रहे हैं। दूसरी तरफ जिनपिंग का आत्मविश्वास भरा अंदाज यह दिखा रहा था कि बातचीत में चीन की स्थिति ज्यादा मजबूत रही।

इस मुलाकात के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर भी चर्चा हुई। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने साफ कहा कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ हर हाल में खुला रहना चाहिए और किसी भी देश की दादागिरी वहां नहीं चलेगी। वहीं ताइवान मुद्दे पर जिनपिंग ने अमेरिका को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि यह चीन की ‘रेड लाइन’ है और इस मामले में कोई समझौता नहीं होगा।

बताया जा रहा है कि ट्रंप इस दौरे में आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। इसी वजह से उनके साथ बड़े कारोबारी चेहरे भी नजर आए। हालांकि सोशल मीडिया पर अब चर्चा इस बात की ज्यादा हो रही है कि इस मुलाकात में मनोवैज्ञानिक बढ़त आखिर किसके पास रही।

मथुरा पुलिस की डायल 112 सेवा का सिपाही निकला गांजा तस्कर, साथी समेत हुआ गिरफ्तार

मथुरा में गांजा तस्करी के आरोप में दो सिपाही गिरफ्तार (Photo- ITG)
मथुरा में गांजा तस्करी के आरोप में दो सिपाही गिरफ्तार (Photo- ITG)

15 मई 2026, नई दिल्ली/ मथुरा: मथुरा पुलिस का एक सिपाही अपने साथी के साथ गांजा तस्करी करते हुए गिरफ्तार किया गया है।इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात तो ये हैं कि पकड़ा गया आरोपी यूपी पुलिस की डायल 112 सेवा में तैनात था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई में दोनों आरोपियों को पकड़ा गया। जांच के दौरान सामने आया कि गिरफ्तार सिपाही लंबे समय से तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और अपने पद का फायदा उठाकर अवैध कारोबार चला रहा था।सिपाही अनिल कुमार और पचावर का रहने वाला उसका साथी पुष्पेंद्र शामिल हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 20 किलो गांजा, नकदी और कुछ संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए हैं। साथ ही 2 लाख रूपये की नकदी भी बरामद की है।बरामद माल की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। मामले में NDPS एक्ट  के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

विभागीय कार्रवाई भी शुरू

घटना सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों ने आरोपी सिपाही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही उसके आपराधिक नेटवर्क और अन्य संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और यदि अन्य पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।

पुलिस को महावन-बल्देव रोड पर नशीले पदार्थों की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी. इस इनपुट के आधार पर जब महावन पुलिस ने घेराबंदी कर वाहनों की जांच शुरू की तो दोनों आरोपियों को धर-दबोच लिया गया। जब रिकार्ड खंगाला गया तो पता चला कि सुनील कुमार चार साल पहले भी शराब की तस्करी मे जेल जा चुका है

किताब के शब्दों में संवेदना, इरादों में जहर: यूटा की ‘Black Widow’ को उम्रकैद

पति की मौत के बाद किताब लिखकर बटोरी सहानुभूति, अब निकली उसी की कातिल? यूटा के उस चर्चित हत्याकांड का खौफनाक अंत… Pic Sourcs : foxnews
पति की मौत के बाद किताब लिखकर बटोरी सहानुभूति, अब निकली उसी की कातिल? यूटा के उस चर्चित हत्याकांड का खौफनाक अंत… Pic Sourcs : foxnews

तहलका ब्यूरो।

पार्क सिटी। अमेरिका के यूटा राज्य से एक ऐसा आपराधिक मामला सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों पर से भरोसा डिगा दिया है। अपने पति की संदिग्ध मौत के बाद बच्चों के लिए ‘शोक से उबरने’ पर किताब लिखकर दुनिया भर की सहानुभूति बटोरने वाली कूरी रिचिन्स (35) ही असल में अपने पति की कातिल निकली।

बीते दिनों अदालत ने इस जघन्य कृत्य के लिए उसे बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने सख्त टिप्पणी करते हुए कूरी को समाज के लिए एक अत्यंत घातक व्यक्तित्व करार दिया।

यह मामला महज एक हत्या का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश का है। अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि साल 2022 में कूरी ने अपने पति एरिक रिचिन्स को उनके कॉकटेल में फेंटेनिल की जानलेवा खुराक देकर मौत की नींद सुला दिया था।

जांच में पाया गया कि वह मात्रा सामान्य से पांच गुना अधिक थी। केवल हत्या ही नहीं, कूरी पर बीमा धोखाधड़ी, जालसाजी और पूर्व में भी हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। साक्ष्यों के अनुसार, उसने ‘वैलेंटाइन डे’ के मौके पर भी एरिक को नशीला सैंडविच देकर मारने की कोशिश की थी, हालांकि तब एरिक की जान बच गई थी।

इस हत्याकांड के पीछे की मंशा पूरी तरह वित्तीय लाभ और निजी स्वार्थ से जुड़ी थी। कूरी भारी कर्ज में दबी थी और पति को रास्ते से हटाकर उसकी 40 लाख डॉलर की संपत्ति और बीमा राशि हड़पना चाहती थी। विडंबना देखिए कि जिस दिन उसे सजा सुनाई गई, उसी दिन एरिक का 44वां जन्मदिन था।

अदालत में कूरी के अपने बच्चों के बयानों ने सबको झकझोर कर रख दिया। बच्चों ने बताया कि उनकी मां उन्हें डराने-धमकाने और कमरे में बंद करने जैसी क्रूरताएं करती थी। सबसे बड़े बेटे ने मां के लालच की कड़वी सच्चाई बयां करते हुए कहा कि वह अपनी मां के साथ सुरक्षित महसूस नहीं करते।

मोबाइल रिकॉर्ड और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री ने कूरी के झूठ की कलई खोल दी, जिसमें उसने जहर और फेंटेनिल के असर के बारे में सर्च किया था। शब्दों के जाल बुनकर सहानुभूति बटोरने वाली इस महिला का मुखौटा अब पूरी तरह उतर चुका है।

“पाकिस्तान नहीं, भारत से बनेगी बात!” ईरान-US तनाव के बीच रूस ने ट्रंप को दी बड़ी सलाह

शांति चाहते हो तो पाकिस्तान की जगह भारत पर करना होगा भरोसा... बोले- रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov | Image Source: LA Times
शांति चाहते हो तो पाकिस्तान की जगह भारत पर करना होगा भरोसा... बोले- रूसी विदेश मंत्री Sergei Lavrov | Image Source: LA Times

नई दिल्ली: Iran और America के बीच जारी तनाव को लेकर दुनिया की बड़ी ताकतें लगातार सक्रिय हैं। इसी बीच रूस ने अमेरिका को एक अहम संदेश देते हुए कहा है कि भारत इस पूरे संकट में बेहतर मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत के पास लंबे समय का कूटनीतिक अनुभव और संतुलित विदेश नीति है, जो किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद को संभालने में मदद कर सकती है।

रूस का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump चीन के दौरे पर हैं और माना जा रहा है कि वह ईरान संकट को लेकर चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इस मामले में किसी तरह की शांति वार्ता या समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहा है।

लावरोव ने इशारों में पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पाकिस्तान कुछ सीमित मामलों में सहयोग कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक टिकने वाला समाधान निकालने के लिए भारत ज्यादा भरोसेमंद विकल्प है। रूस का मानना है कि भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित और शांतिपूर्ण नीति अपनाई है, जिसकी वजह से उसकी वैश्विक साख मजबूत हुई है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका में महंगाई और युद्ध जैसे मुद्दों को लेकर पहले ही सरकार दबाव में है। ऐसे में ट्रंप की चीन यात्रा को कई लोग उनकी रणनीतिक मजबूरी के तौर पर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि चीन ईरान पर अपना प्रभाव इस्तेमाल करे ताकि हालात और ज्यादा न बिगड़ें।

रूस के बयान ने एक बार फिर भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की ओर ध्यान खींचा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की संतुलित नीति और मजबूत कूटनीतिक पहचान को अब दूसरे बड़े देश भी खुलकर स्वीकार करने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान-अमेरिका विवाद में भारत की भूमिका कितनी अहम बनती है।