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Kejriwal Case में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जज बोलीं- मुझे समझ नहीं आ रहा…

केजरीवाल केस में हाईकोर्ट सख्त
केजरीवाल केस में हाईकोर्ट सख्त

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में बहुचर्चित आबकारी नीति मामले को लेकर गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिलचस्प और अहम घटनाक्रम देखने को मिला। इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर बहस चल रही है, जिसमें ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है।

दरअसल, प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया। उनका कहना था कि केस से जुड़े करीब 600 पन्नों के दस्तावेज़ पढ़ने के लिए अतिरिक्त वक्त चाहिए। लेकिन ED की ओर से पेश वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि सभी पक्षों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है, ऐसे में अब देरी की कोई जरूरत नहीं है।

इस दौरान ED की तरफ से पेश हुए SV Raju ने कोर्ट में कहा कि प्रतिवादी पक्ष जानबूझकर सुनवाई को टालने की कोशिश कर रहा है। वहीं कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि पहले जवाब दाखिल करने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक और समय मांगना सही नहीं लगता।

हाईकोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में यह तय करना जरूरी है कि क्या ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टिप्पणियां की थीं या नहीं। इसी को लेकर ED ने यह याचिका दायर की है।

फिलहाल कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा समय दिया है और निर्देश दिया है कि याचिका की कॉपी सभी को उपलब्ध कराई जाए।

असम में बीजेपी का बड़ा दांव, पूर्व सांसदों को मैदान में उतारकर खेला ‘MP फॉर्मूला’

असम में भी बीजेपी का MP वाला फॉर्मूला...
असम में भी बीजेपी का MP वाला फॉर्मूला...

नई दिल्ली: असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासत गरमा गई है और इस बार बीजेपी ने एक अलग ही रणनीति अपनाई है। पार्टी ने कई बड़े और अनुभवी चेहरों को मैदान में उतारते हुए पूर्व सांसदों पर दांव लगाया है। इसमें Rameswar Teli, Pallab Lochan Das और Rajdeep Roy जैसे नाम शामिल हैं।

दरअसल, बीजेपी का यह कदम यूं ही नहीं है। पार्टी पहले भी Madhya Pradesh और Rajasthan में ऐसा प्रयोग कर चुकी है, जहां सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारकर अच्छे नतीजे मिले थे। अब यही ‘MP वाला फॉर्मूला’ असम में आजमाया जा रहा है।

इसके अलावा, ये नेता सिर्फ अपनी सीट ही नहीं बल्कि आसपास की कई सीटों पर भी असर डालते हैं। उनके अनुभव और पकड़ से पार्टी को चुनावी माहौल बनाने में मदद मिलती है। यही वजह है कि बीजेपी ने इस बार अपने ‘हेवीवेट’ नेताओं को मैदान में उतारा है।

हालांकि, यह दांव पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अगर ये बड़े चेहरे जीत जाते हैं, तो मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के लिए सरकार बनाना आसान हो जाएगा। लेकिन अगर इनमें से कुछ हार जाते हैं, तो यह पार्टी की छवि को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस भी इस बार आक्रामक नजर आ रही है और Gaurav Gogoi जैसे नेताओं के साथ मुकाबले में पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में असम का चुनाव इस बार काफी दिलचस्प होने वाला है।

₹2929 करोड़ बैंक फ्रॉड केस में अनिल अंबानी से पूछताछ तेज, CBI ने कसा शिकंजा

बैंक फ्रॉड केस में CBI की अनिल अंबानी से पूछताछ तेज।
बैंक फ्रॉड केस में CBI की अनिल अंबानी से पूछताछ तेज।

नई दिल्ली: देश के जाने-माने कारोबारी Anil Ambani एक बार फिर जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation (CBI) ने उन्हें करीब 2929 करोड़ रुपये के कथित बैंक फ्रॉड मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है।

यह पूरा मामला Reliance Communications (RCOM) से जुड़ा है, जिस पर आरोप है कि कंपनी ने बैंक से लिए गए लोन का सही इस्तेमाल नहीं किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लोन की रकम में गड़बड़ी, फंड डायवर्जन और गलत तरीके से पैसे खर्च करने जैसे आरोप सामने आए हैं।

इसी सिलसिले में अनिल अंबानी दिल्ली स्थित CBI मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे लंबी पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि यह मामला State Bank of India (SBI) की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। SBI ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने लोन की शर्तों का पालन नहीं किया और बैंक को भारी नुकसान हुआ।

वहीं, अनिल अंबानी की तरफ से कहा गया है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। उनके प्रवक्ता के मुताबिक, वे तय तारीखों पर CBI के सामने पेश हो रहे हैं और एजेंसियों के सभी सवालों का जवाब दे रहे हैं।

यह मामला हाई-प्रोफाइल होने की वजह से काफी चर्चा में है। आने वाले दिनों में जांच के दौरान कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि CBI की पूछताछ से क्या नई जानकारी सामने आती है और इस केस में आगे क्या कार्रवाई होती है।

लारीजानी के बाद कौन? ‘सख्त तेवर’ वाले जलीली की एंट्री से क्या और सख्त होगा ईरान?

क्या Ali Larijani की जगह लेंगे Saeed Jalili?
क्या Ali Larijani की जगह लेंगे Saeed Jalili?

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने मध्य पूर्व की राजनीति को हिला दिया है। तेहरान में हुए एयरस्ट्राइक में ईरान के वरिष्ठ नेता Ali Larijani की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उनकी जगह कौन लेगा।

लारीजानी ईरान की सुरक्षा और रणनीति के अहम चेहरे थे। वे देश की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल से जुड़े बड़े फैसलों में मुख्य भूमिका निभाते थे। अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई थी। ऐसे में उनका अचानक जाना ईरान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

अब चर्चा जिस नाम को लेकर सबसे ज्यादा हो रही है, वो है Saeed Jalili। जलीली को ईरान का सख्त और स्पष्ट रुख रखने वाला नेता माना जाता है। वे पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने तेवर दिखा चुके हैं, खासकर जब उन्होंने पश्चिमी देशों के साथ परमाणु वार्ताओं में हिस्सा लिया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ सकता है। अमेरिका और इजरायल के साथ पहले से चल रहा तनाव और बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता भी बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से जलीली का नाम सामने आ रहा है, उससे यह साफ है कि ईरान एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की दिशा में बढ़ सकता है।

कैबिनेट में ‘BHAVYA’ प्लान पर मंथन, क्या बदलेगी देश की इंडस्ट्री की तस्वीर?

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई।
बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई।

नई दिल्ली: दिल्ली के संसद भवन में बुधवार  को बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट की अहम बैठक हुई। इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर चर्चा हुई, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस योजना को लेकर है, वह है ‘BHAVYA’ यानी भारत औद्योगिक विकास योजना।

सरकार का फोकस इस योजना के जरिए देश की इंडस्ट्री को नई रफ्तार देने पर है। आसान भाषा में समझें तो BHAVYA योजना का मकसद भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना, नए इंडस्ट्रियल एरिया बनाना और छोटे-बड़े कारोबारियों को मजबूत करना है। सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा सामान देश में ही बने, जिससे बाहर से चीजें मंगाने की जरूरत कम हो।

इस योजना के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, बेहतर लॉजिस्टिक्स और नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही, छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) को सस्ता लोन और टैक्स में राहत देने की भी बात सामने आ रही है। माना जा रहा है कि इससे रोजगार के नए मौके भी बनेंगे और युवाओं को फायदा मिलेगा।

कैबिनेट बैठक में सिर्फ इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि अन्य अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों यानी FCRA में बदलाव पर भी मंथन हुआ है, जिससे विदेशी चंदे की निगरानी और सख्त हो सकती है। इसके अलावा ऊर्जा क्षेत्र में छोटे जलविद्युत प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र में किसानों के नुकसान की भरपाई के लिए पैकेज पर भी विचार किया गया।

होर्मुज में फंसी LPG से भर सकते हैं करोड़ों सिलेंडर, फिर भी क्यों नहीं मिलेगी राहत?

Naveen Bansal
Naveen Bansal

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। खबर है कि Strait of Hormuz में भारत की करीब 3 लाख टन एलपीजी फंसी हुई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस गैस से कितने रसोई गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं और क्या इससे राहत मिलेगी?

अगर आसान भाषा में समझें तो 1 टन एलपीजी में 1000 किलो गैस होती है। इस हिसाब से 3 लाख टन यानी करीब 30 करोड़ किलो गैस फंसी हुई है। भारत में एक घरेलू गैस सिलेंडर में 14.2 किलो गैस आती है। इस गणना से देखा जाए तो इस एलपीजी से करीब 2.11 करोड़ सिलेंडर भरे जा सकते हैं।

सुनने में यह संख्या काफी बड़ी लगती है, लेकिन असली तस्वीर थोड़ी अलग है। देश में हर दिन लगभग 70 से 80 लाख गैस सिलेंडर की खपत होती है। यानी अगर यह पूरी गैस भारत पहुंच भी जाए, तो यह सिर्फ 3 से 4 दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगी।

इस पूरी स्थिति से साफ है कि भले ही फंसी हुई गैस की मात्रा बड़ी है, लेकिन देश की जरूरत के हिसाब से यह बहुत कम है। इसलिए अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

नीतीश का बड़ा इशारा, सम्राट चौधरी की बढ़ती भूमिका से बिहार की सियासत गरमाई

क्या सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे?
क्या सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे?

नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Nitish Kumar के एक बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। जमुई में अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम Samrat Choudhary के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा— “अब यही सब काम करेंगे।” बस, इसी बयान के बाद से कयासों का दौर शुरू हो गया है।

दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब नीतीश कुमार ने इस तरह का संकेत दिया हो। पिछले कुछ समय से वे अपनी यात्राओं के दौरान सम्राट चौधरी को लगातार आगे कर रहे हैं। मंच से लोगों से उनके समर्थन की अपील भी करते नजर आए हैं। इससे यह साफ हो रहा है कि पार्टी के भीतर उनकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।

इधर, राज्यसभा चुनाव के बाद एक और चर्चा तेज हो गई है कि क्या नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में ज्यादा सक्रिय होंगे। ऐसे में बिहार की कमान किसे मिलेगी, यह सवाल और बड़ा हो गया है। इसी कड़ी में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

हालांकि, अभी तक इस पर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं, उससे इतना जरूर है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

मोदी सरकार ने किया ऑयल बॉन्ड खत्म, तो क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल? समझिए पूरा खेल

ऑयल बॉन्ड खत्म होने पर क्या सस्ता होगा पेट्रोल?
ऑयल बॉन्ड खत्म होने पर क्या सस्ता होगा पेट्रोल?

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान आम लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। Nirmala Sitharaman ने हाल ही में बताया कि सरकार ने पुराने ऑयल बॉन्ड का पूरा कर्ज चुका दिया है। ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या अब पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा?

दरअसल, ऑयल बॉन्ड वो उधार था जो पहले की सरकार ने तेल कंपनियों को सब्सिडी देने के लिए लिया था। यह कर्ज बाद में सरकार को ब्याज समेत चुकाना पड़ता था। मौजूदा सरकार का कहना था कि इसी बोझ की वजह से कीमतें कम नहीं की जा रही थीं। अब जब यह कर्ज खत्म हो चुका है, तो राहत की उम्मीद बढ़ गई है।

लेकिन असली तस्वीर थोड़ी अलग है। जानकारों का मानना है कि सिर्फ ऑयल बॉन्ड खत्म होने से पेट्रोल-डीजल सस्ता होना तय नहीं है। इसकी सबसे बड़ी वजह है टैक्स। केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स वसूलती हैं, जो कीमत का बड़ा हिस्सा होता है।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत भी अहम भूमिका निभाती है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए अगर वैश्विक कीमतें ज्यादा हैं, तो उसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ता है। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी कीमत तय करने में असर डालती है।

एक और कारण तेल कंपनियों का मार्जिन है। कई बार कंपनियां पुराने घाटे की भरपाई के लिए भी कीमतें तुरंत कम नहीं करतीं। ऐसे में भले ही सरकार पर से ऑयल बॉन्ड का बोझ हट गया हो, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत कम होंगे, इसकी गारंटी नहीं है।

काबुल एयरस्ट्राइक पर भारत का कड़ा रुख, पाकिस्तान को घेरा

काबुल एयरस्ट्राइक पर भारत का कड़ा रुख
काबुल एयरस्ट्राइक पर भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली: अफगानिस्तान की राजधानी Kabul में हुए एयरस्ट्राइक को लेकर भारत ने इस बार बेहद सख्त रुख अपनाया है। India ने साफ शब्दों में Pakistan की कार्रवाई को ‘नरसंहार’ बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बताया जा रहा है कि यह हमला एक नशा मुक्ति केंद्र पर हुआ, जहां आम नागरिक इलाज के लिए मौजूद थे। भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह कोई सैन्य ठिकाना नहीं था, बल्कि एक अस्पताल था, जहां बेगुनाह लोग थे। ऐसे में इस तरह का हमला पूरी तरह अमानवीय है।

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने भी भारत के इस रुख की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत ने जिस तरह इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ और ‘अमानवीय’ बताया, वह बिल्कुल सही कदम है। उन्होंने इसे एक मजबूत और जरूरी प्रतिक्रिया बताया।

भारत ने यह भी कहा कि यह हमला सिर्फ एक देश पर नहीं, बल्कि Afghanistan की संप्रभुता पर सीधा हमला है। भारत ने अफगानिस्तान के साथ खड़े होने की बात दोहराई और साफ किया कि अब इस तरह की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

साथ ही भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी संदेश दिया है कि अब ऐसे मामलों में चुप रहने का वक्त खत्म हो चुका है। दोषियों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है, वरना इस तरह की घटनाएं बार-बार होती रहेंगी।

बंगाल चुनाव में दिदी vs शुभेंदु की जोरदार टक्कर, ममता ने 291 उम्मीदवार उतारे

ममता को घेरने के लिए सुवेंदु दो जगह भवानीपुर और नंदीग्राम से उम्मीदवार
ममता को घेरने के लिए सुवेंदु दो जगह भवानीपुर और नंदीग्राम से उम्मीदवार

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। Election Commission of India ने चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के साथ ही बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए कई आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें।

इसी बीच मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने अपनी पार्टी All India Trinamool Congress (TMC) के 291 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में कुछ नए और चर्चित चेहरों को भी मौका दिया गया है, जिससे चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

टीएमसी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करने से पहले कुछ नए चेहरों को पार्टी में शामिल किया है। इनमें खिलाड़ी, पत्रकार और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं। पार्टी का यह कदम चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, ताकि अलग-अलग वर्गों को साधा जा सके।

दूसरी तरफ Bharatiya Janata Party (BJP) ने भी अपनी पहली लिस्ट जारी कर दी है, जिसमें 144 उम्मीदवारों के नाम हैं। बीजेपी इस बार बंगाल में सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। पार्टी ने कई सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया है, जबकि कुछ मौजूदा विधायकों के टिकट भी काटे गए हैं।

चुनाव आयोग के फैसले के मुताबिक इस बार बंगाल में दो चरणों में वोटिंग होगी। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा। इसके बाद 4 मई को नतीजे सामने आएंगे।