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फर्जी रिजल्ट के दावे पड़े भारी, दो बड़े कोचिंग संस्थानों पर लाखों का जुर्माना

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नई दिल्ली: देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों पर अब सरकार सख्त होती नजर आ रही है। उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने भ्रामक विज्ञापन देने के मामले में मोशन एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये और राजस्थान के सीकर स्थित करियर लाइन कोचिंग (CLC) पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार जांच में सामने आया कि दोनों संस्थानों ने अपने विज्ञापनों में छात्रों की सफलता को बड़े स्तर पर प्रचारित किया, लेकिन यह साफ नहीं बताया कि उन छात्रों ने किस तरह का कोर्स किया था। कई छात्रों ने केवल ऑनलाइन क्लास, टेस्ट सीरीज या छोटे कोर्स किए थे, फिर भी संस्थानों ने उनकी सफलता का पूरा श्रेय खुद को दे दिया।

जांच में यह भी पता चला कि मोशन एजुकेशन ने नीट परीक्षा में 91.2 प्रतिशत और आईआईटी-जेईई एडवांस्ड में 51.02 प्रतिशत सफलता दर का दावा किया था। लेकिन सफल बताए गए कई छात्र “आई-एकलव्य” नाम के मुफ्त ऑनलाइन कोर्स से जुड़े थे। कुछ छात्रों को तो परीक्षा के बाद संस्थान से जोड़ा गया, लेकिन फिर भी उनकी सफलता को विज्ञापनों में शामिल किया गया।

वहीं सीएलसी कोचिंग ने अपने प्रचार में “MBBS, IIT और अन्य परीक्षाओं में 1650 से ज्यादा चयन” का दावा किया था। बाद में संस्थान की ओर से दिए गए जवाब और सुनवाई में बताए गए आंकड़ों में फर्क पाया गया। इसी आधार पर प्राधिकरण ने इसे अप्रमाणित और भ्रामक दावा माना।

सीसीपीए ने कहा कि अगर किसी छात्र ने फुल टाइम क्लास, ऑनलाइन कोर्स, क्रैश कोर्स या सिर्फ टेस्ट सीरीज ली है, तो उसकी पूरी जानकारी विज्ञापन में देना जरूरी है। ऐसा नहीं करना उपभोक्ताओं को गुमराह करना माना जाएगा।

दोनों संस्थानों को ऐसे विज्ञापन तुरंत हटाने और भविष्य में पूरी पारदर्शिता बरतने का निर्देश दिया गया है। हालांकि दोनों कोचिंग संस्थानों ने इस आदेश को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में चुनौती दी है। प्राधिकरण के मुताबिक अब तक 60 से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं और 31 कोचिंग संस्थानों पर कुल 1.39 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है।

‘WHO-Exit’ : माइली की ‘Trump स्टाइल’ कूटनीति और अर्जेंटीना में सुलगती बहस

राष्ट्रपति जेवियर माइली के विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकलने के ऐतिहासिक फैसले पर बंटा अर्जेंटीना...Pic Credit : The Ultimate Matchup
राष्ट्रपति जेवियर माइली के विश्व स्वास्थ्य संगठन से बाहर निकलने के ऐतिहासिक फैसले पर बंटा अर्जेंटीना...Pic Credit : The Ultimate Matchup

ममता सिंह। 

नई दिल्ली। अर्जेंटीना का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से पूरी तरह नाता तोड़ लेना और वैश्विक स्तर पर बदलते कूटनीतिक समीकरण इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अब देशों के लिए अपनी सीमाएं, राष्ट्रीय संप्रभुता और तात्कालिक स्वार्थ ही सर्वोपरि हो चुके हैं। दुनिया अब सामूहिक विकास के बजाय ‘अपनी राह, अपना फायदा’ की दिशा में तेजी से बढ़ रही है।

Argentina के दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जेवियर माइली (Xavier Miley) का यह कदम केवल एक राजनीतिक पैंतरा नहीं, बल्कि उन वैश्विक संस्थाओं के खिलाफ सीधी जंग है जो संप्रभु राष्ट्रों की नीतियों को प्रभावित करने का दावा करती हैं। माइली का यह ‘Trump स्टाइल’ फैसला उस विचार पर सीधा प्रहार है जिसके तहत किसी देश की जन-स्वास्थ्य नीतियों का रिमोट कंट्रोल विदेशी अधिकारियों के हाथ में होता है। इसे ‘स्वास्थ्य राष्ट्रवाद’ के एक नए उभार के रूप में देखा जा रहा है।

अर्जेंटीना ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी सीमाओं, अस्पतालों और स्वास्थ्य बजट पर फैसला केवल उसकी संसद और सरकार करेगी। President Miley के इस आक्रामक राष्ट्रवाद को उनके समर्थक और दक्षिणपंथी संगठन ऐतिहासिक मानकर सराह रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे अर्जेंटीना को संकट के समय अपनी मर्जी से सीमाएं बंद करने, दवाइयां या वैक्सीन चुनने और विदेशी दबाव से मुक्त होने की पूर्ण आजादी मिल गई है।

लेकिन इस बड़े Political फैसले के बाद अर्जेंटीना का आंतरिक माहौल पूरी तरह अशांत है और जनता चुप नहीं है। देश के भीतर इस निर्णय को लेकर एक गहरी खाई खिंच गई है। जहां सरकार और उसके समर्थक इसे ‘स्वाभिमान की बहाली’ कहकर उत्सव मना रहे हैं, वहीं देश का चिकित्सा जगत, वैज्ञानिक, विपक्षी दल और आम नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा सड़कों पर उतरकर इसका पुरजोर विरोध कर रहा है।

चिकित्सा विशेषज्ञों और डॉक्टरों में गहरी चिंता और आक्रोश है कि Global Health Network, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान, वित्तीय मदद और सस्ती जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति बंद होने से देश का पहले से ही चरमराया हुआ सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है। विशेष रूप से देश के कुछ हिस्सों में हाल ही में उभरे हंतावायरस जैसे संक्रामक मामलों के बीच डब्ल्यूएचओ जैसी संस्था से अलग होना आम आदमी के जीवन को सीधे तौर पर खतरे में डालने जैसा माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों को डर है कि यदि अर्जेंटीना का यह दक्षिणपंथी दांव राजनीतिक रूप से सफल रहा, तो ब्राजील, हंगरी और इटली जैसे देशों में भी वैश्विक संगठनों को छोड़ने की होड़ मच सकती है। इससे वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का जो साझा सुरक्षा कवच था, वह बिखर जाएगा। साफ है कि 2026 की यह नई दुनिया अब पुराने आदर्शों पर नहीं, बल्कि कठोर हकीकत और सीधे फायदे पर टिकी है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों की हैसियत अब कमजोर पड़ रही है क्योंकि वास्तविक शक्ति उन राष्ट्रों के हाथ में जा रही है जो अपनी शर्तों पर इतिहास लिख रहे हैं। आज की कूटनीति का कड़वा सच यही है कि अब ‘सबका साथ’ बीते दौर की बात हो चुकी है, और ‘केवल अपना भला’ ही इस नई व्यवस्था का मूल मंत्र बन चुका है।

ओडिशा में वोटर लिस्ट का बड़ा अपडेट, 30 मई से घर-घर होगा सत्यापन

Voter List. | Image Source: Jagran (file photo)
Voter List. | Image Source: Jagran (file photo)

नई दिल्ली: Odisha में चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को और ज्यादा साफ और अपडेट बनाने के लिए बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। राज्य में 30 मई से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR अभियान शुरू होगा, जो 28 जून तक चलेगा। इस दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर लोगों के दस्तावेज और जानकारी का सत्यापन करेंगे।

ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी R. S. Gopalan ने बताया कि इस अभियान की तैयारी 20 मई से शुरू हो जाएगी। 20 से 29 मई के बीच बूथ लेवल अधिकारियों और बूथ लेवल एजेंटों को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद 30 मई से सभी अधिकारी फील्ड में जाकर सत्यापन का काम शुरू करेंगे। अधिकारियों के मुताबिक राज्य में मतदान केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। अभी ओडिशा में 38,123 मतदान केंद्र हैं, लेकिन पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनकी संख्या बढ़कर 45,255 हो जाएगी।

इस अभियान के दौरान 18 साल की उम्र पूरी कर चुके नए वोटरों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। वहीं जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो गए हैं, उनके नाम हटाए जाएंगे। इसके अलावा नाम, उम्र, स्पेलिंग और माता-पिता के नाम जैसी गलतियों को भी ठीक किया जाएगा। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि अगर जांच में कोई बाहरी या विदेशी नागरिक पाया जाता है तो उसका नाम भी मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा।

निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पांच जुलाई को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जाएगा। इसके बाद लोग चार अगस्त तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। सभी शिकायतों और आपत्तियों के निपटारे के बाद छह सितंबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

फिलहाल ओडिशा में करीब 3.34 करोड़ मतदाता हैं। इनमें 1.68 करोड़ पुरुष, 1.65 करोड़ महिलाएं और 3,090 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का मकसद मतदाता सूची को ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया और मजबूत हो सके।

अमीरात दौरे की सफलता के बाद नीदरलैंड रवाना हुए प्रधानमंत्री मोदी

नीदरलैंड के प्रधानमंंत्री के साथ मोदी | Photo Source : aajtak
नीदरलैंड के प्रधानमंंत्री के साथ मोदी | Photo Source : aajtak

15 मई 2026, नई दिल्ली: नरेन्द्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के सफल दौरे के बाद शुक्रवार को नीदरलैंड के लिए रवाना हो गए। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की पांच देशों की कूटनीतिक यात्रा का हिस्सा है, जिसमें यूएई के बाद नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली शामिल हैं। अबू धाबी में प्रधानमंत्री मोदी का विशेष स्वागत किया गया। यूएई के लड़ाकू विमान F-16 ने उनके विमान को अमीराती हवाई क्षेत्र में एस्कॉर्ट किया, जिसे दोनों देशों के मजबूत रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है। 

यूएई दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान के साथ व्यापक बातचीत की। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, गैस आपूर्ति और रणनीतिक तेल भंडारण से जुड़े कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यूएई ने भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय संस्थानों में लगभग 5 अरब डॉलर के निवेश की भी घोषणा की। 

बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि “भारत यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है” और दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही है। 

अब प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड में व्यापार, निवेश, सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, जल प्रबंधन और हाई-टेक सहयोग को लेकर डच नेतृत्व से बातचीत करेंगे। माना जा रहा है कि यूरोपीय देशों के साथ भारत की आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को मजबूत करने पर इस दौरे का विशेष फोकस रहेगा। 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। भारत इस दौरे के जरिए ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और निवेश सहयोग को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

Manipur से बड़ी खबर: सुरक्षित लौटे Naga-Kuki समुदाय के 31 बंधक

सफल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी : हाथ बंधे थे, आंखों पर पट्टी थी...' मणिपुर में उग्रवादियों की कैद से छूटी महिला ने बयां किया दर्द...Pic Credit : indiatodayne 
सफल रही बैकचैनल डिप्लोमेसी : हाथ बंधे थे, आंखों पर पट्टी थी...' मणिपुर में उग्रवादियों की कैद से छूटी महिला ने बयां किया दर्द...Pic Credit : indiatodayne 

तहलका डेस्क। 

नई दिल्ली/इंफाल। मणिपुर के अशांत माहौल के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य के कांगपोकपी और सेनापति जिलों में सक्रिय हथियारबंद समूहों के चंगुल से कुकी और नगा समुदायों के 31 नागरिकों को सुरक्षित रिहा करा लिया गया है। कुल 38 लोगों को बंधक बनाया गया था, जिनमें से बड़ी संख्या में लोगों की वापसी के बाद अब सुरक्षाबलों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है। 

इस पूरी घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को हुई थी, जब कांगपोकपी में संदिग्ध उग्रवादियों ने चर्च के तीन पदाधिकारियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी और चार अन्य को जख्मी कर दिया था। इसी तरह नोनी जिले में भी एक आम नागरिक को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद इन लोगों को अगवा कर अज्ञात पहाड़ी इलाकों में ले जाया गया था।
इस रिहाई प्रक्रिया को धरातल पर उतारने में सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन ने बड़ी भूमिका निभाई है। मुक्त कराए गए लोगों में 12 नगा महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें मखान गांव के पास छोड़ा गया। इसके साथ ही सेनापति जिले से कुकी समुदाय की 10 महिलाओं और 4 पुरुषों को भी देर रात सुरक्षाबलों को सौंप दिया गया।

इस संवेदनशील संकट के बीच ‘सेल्सियस ऑफ डॉन बॉस्को’ के दो सदस्यों की भी अलग-अलग जगहों से सुरक्षित वापसी हुई है, जिनमें से एक व्यक्ति पड़ोसी राज्य नगालैंड का रहने वाला है। इसके अलावा एक अन्य कार्रवाई में 18 साल की एक युवती सहित तीन अन्य लोगों को भी पुलिस टीम के हवाले किया गया।
इस पूरे संकट के पीछे की भयावहता रिहा हुए लोगों के बयानों से साफ झलकती है। मुक्त हुई एक महिला ने आपबीती बताते हुए कहा कि अपहरण के दौरान उनके हाथ-पैर बांधकर आंखों पर पट्टी लगा दी गई थी, जिससे उन्हें रास्ते का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों से साफ था कि उन्हें किसी दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में रखा गया था। राहत की बात यह रही कि बंधकों के साथ कोई शारीरिक हिंसा नहीं की गई।
राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम के अनुसार, सरकार इस संवेदनशील मसले को सुलझाने के लिए लगातार सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क में थी। इस बीच, इस सामूहिक अपहरण की घटना के विरोध में कांगपोकपी जिले में कुकी और नगा समाज के लोगों ने अलग-अलग शांतिपूर्ण धरने देकर अपना आक्रोश भी व्यक्त किया था।

बहरहाल, इस रिहाई ने राज्य में जारी तनाव के बीच संवाद और शांति का एक नया रास्ता जरूर खोला है।

ड्रोन अब ‘आसमान में बाज के पंजे’ जैसे, युद्ध की तस्वीर बदल रही तकनीक: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह

वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह | Photo Source : Tv9 bharatvarsh
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह | Photo Source : Tv9 bharatvarsh

15 मई 2026,नई दिल्ली: एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह  ने शुक्रवार को कहा कि ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियां अब केवल निगरानी करने वाले उपकरण नहीं रह गए हैं, बल्कि वे ‘आसमान में बाज के पंजों’ की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में इन तकनीकों ने हवाई शक्ति की परिभाषा ही बदल दी है।

वायु सेना प्रमुख ने कहा कि ड्रोन तकनीक ने युद्धक्षेत्र में सटीक हमला, वास्तविक समय में निगरानी और जोखिम कम करने जैसी क्षमताओं को मजबूत किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य के युद्धों में मानव रहित प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाने वाली हैं और भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम करना होगा।

एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय वायु सेना नई पीढ़ी की तकनीकों को तेजी से अपनाने पर ध्यान दे रही है। रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणाली और स्वदेशी ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं, ताकि बदलती वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ड्रोन केवल सूचना जुटाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे रणनीतिक अभियानों, सीमा सुरक्षा और सटीक सैन्य कार्रवाई का अहम हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय रक्षा बल भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक आधारित युद्ध क्षमता को लगातार

ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से प्रधानमंत्री मोदी ने की बातचीत

ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री मोदी | Photo Source : AIR
ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री मोदी | Photo Source : AIR

15 मई 2026, नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करेगा। 

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने और ग्लोबल साउथ की आकांक्षाओं को आवाज देने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। बैठक में रूस, ईरान, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। 

बैठक के दौरान वैश्विक सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं की संरचना पुराने दौर को दर्शाती है और उसमें सुधार की आवश्यकता है ताकि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।  ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की यह बैठक भारत की 2026 की अध्यक्षता के तहत आयोजित की जा रही है। इस बार समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ईरान, मिस्र, इथियोपिया, यूएई और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हैं।

आबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी, राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद ने एयरपोर्ट पर किया भव्य स्वागत

मोदी का भव्य स्वागत, UAE के क्राउन प्रिंस शेख नाहयान ने एयरपोर्ट पर की अगुवानी | Photo sourcec :performindia.com
मोदी का भव्य स्वागत, UAE के क्राउन प्रिंस शेख नाहयान ने एयरपोर्ट पर की अगुवानी | Photo sourcec :performindia.com

15 मई 2026, नई दिल्ली/ आबू धाबी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबू धाबी पहुंचे, जहां यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद ने एयरपोर्ट पर उनका विशेष स्वागत किया। पीएम मोदी के यूएई पहुंचते ही उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जबकि यूएई की वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया। 

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा उनके पांच देशों के विदेश दौरे का पहला चरण है। इस यात्रा के दौरान भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, गैस आपूर्ति और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण से जुड़े कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। यूएई ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय क्षेत्रों में 5 अरब डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है। 

दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पीएम मोदी ने यूएई पर हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि भारत पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है। 

विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। मोदी और शेख मोहम्मद बिन जायेद के बीच पिछले कुछ वर्षों में करीबी व्यक्तिगत और कूटनीतिक संबंध विकसित हुए हैं, जिसका असर दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक सहयोग में भी दिखाई दे रहा है।

भोजशाला पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, हिंदुओं को पूरे परिसर में पूजा का अधिकार

Bhojshala-Kamal Maula Mosque Dispute Case. | Image Source: NDTV MP Chhattisgarh
Bhojshala-Kamal Maula Mosque Dispute Case. | Image Source: NDTV MP Chhattisgarh

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार में लंबे समय से चल रहे भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद पर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला और देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर का है। कोर्ट ने माना कि यहां हिंदुओं की पूजा-अर्चना की परंपरा लगातार जारी रही और कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ऐतिहासिक रिकॉर्ड, साहित्य, पुरातात्विक तथ्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI की रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है। कोर्ट ने ASI की सर्वे रिपोर्ट और अधिसूचनाओं को भरोसेमंद माना। साथ ही फैसले में अयोध्या मामले में दिए गए कानूनी सिद्धांतों का भी जिक्र किया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं बल्कि संस्कृति और शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र रही है। अदालत ने माना कि यह स्थान परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा हुआ था और संस्कृत शिक्षा का अहम केंद्र माना जाता था। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि पूरा परिसर 1904 से संरक्षित स्मारक के दायरे में आता है और 1958 के कानून के तहत संरक्षित है।

फैसले में हिंदुओं को पूरे परिसर में पूजा करने का अधिकार दिया गया है। वहीं अदालत ने यह भी कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष चाहे तो वह सरकार से वैकल्पिक जमीन की मांग कर सकता है। फैसले के बाद हिंदू पक्ष ने इसे बड़ी जीत बताया, जबकि मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वह इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। दोनों पक्षों की ओर से लोगों से शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील भी की गई है।

दिल्ली-NCR में गर्मी का बढ़ता सितम, लेकिन राहत की भी उम्मीद: 26 मई तक केरल पहुंच सकता है मानसून

Mausam Update | AI Image
Mausam Update | AI Image

नई दिल्ली: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ताजा जानकारी के अनुसार दिल्ली-NCR में अगले कुछ दिन काफी गर्म रहने वाले हैं। 17 से 21 मई के बीच दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के कई इलाकों में हीटवेव चलने की संभावना जताई गई है। राजधानी दिल्ली में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दिन में तेज गर्म हवाएं चलेंगी, जबकि शाम के समय कहीं-कहीं धूल भरी आंधी और हल्की बारिश भी देखने को मिल सकती है।

15 मई की शाम और रात में दिल्ली के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश, गरज-चमक और 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि इससे बहुत ज्यादा राहत मिलने के आसार नहीं हैं क्योंकि अगले दो दिनों में तापमान फिर तेजी से बढ़ेगा। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में धूप से बचने, ज्यादा पानी पीने और जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी है।

उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई राज्यों में भी गर्मी का असर तेज रहने वाला है। पश्चिम राजस्थान में 18 से 21 मई के बीच गंभीर हीटवेव की चेतावनी जारी की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भी लू लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि लगातार बढ़ता तापमान बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है।

इधर मानसून को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 26 मई के आसपास केरल में दस्तक दे सकता है। इसके साथ ही अगले 24 घंटों में दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन गई हैं। अगर मानसून सामान्य गति से आगे बढ़ता है तो जून की शुरुआत में देश के दूसरे हिस्सों में भी बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

देश के पूर्वोत्तर राज्यों में अगले एक हफ्ते तक भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम में तेज बारिश के कारण जलभराव और भूस्खलन जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी अगले 3 से 4 दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

कुल मिलाकर देश में इस समय मौसम के दो अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ उत्तर भारत भीषण गर्मी से झुलस रहा है, तो दूसरी तरफ कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो चुका है। अब लोगों की नजरें मानसून की एंट्री पर टिकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।