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‘मां-माटी-मानुष’ के जवाब में पीएम मोदी का नया दांव, बंगाल में दिया ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नारा

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नारा दिया
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नारा दिया

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों नए नारों की चर्चा तेज हो गई है। कोलकाता में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ‘रोटी-बेटी-माटी’ का नारा दिया और इसे राज्य की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए सत्तारूढ़ सरकार पर निशाना साधा। माना जा रहा है कि यह नारा सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के पुराने राजनीतिक नारे ‘मां-माटी-मानुष’ का जवाब है।

रैली में पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल की राजनीति अब सिर्फ नारों से नहीं चलेगी, बल्कि लोगों के असली मुद्दों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि ‘रोटी’ का मतलब है रोजगार और लोगों की रोजी-रोटी, ‘बेटी’ का मतलब है महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान, जबकि ‘माटी’ का मतलब है बंगाल की जमीन, संस्कृति और पहचान की रक्षा।

महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि किसी भी समाज के लिए बेटियों की सुरक्षा सबसे अहम होती है। उन्होंने कहा कि अगर महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगी तो समाज में भरोसा कमजोर पड़ता है। इसलिए कानून-व्यवस्था मजबूत होना जरूरी है।

‘माटी’ यानी जमीन और पहचान के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बंगाल की संस्कृति और परंपरा बहुत समृद्ध रही है और इसे सुरक्षित रखना जरूरी है। उनके अनुसार राज्य की राजनीति को ऐसे रास्ते पर चलना चाहिए जो विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नया नारा आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है। इससे बीजेपी सीधे रोजगार, सुरक्षा और जमीन जैसे मुद्दों पर जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है।

वहीं सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress की ओर से इन आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है। पार्टी का कहना है कि राज्य में विकास और सामाजिक योजनाओं पर लगातार काम हो रहा है।

कोलकाता से पीएम मोदी का ममता सरकार पर हमला, बोले—बंगाल में बदलाव तय

हिंदू समुदाय को धीरे-धीरे अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश हो रही है - PM
हिंदू समुदाय को धीरे-धीरे अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश हो रही है - PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कोलकाता में आयोजित एक बड़ी रैली में पश्चिम बंगाल की सरकार पर जोरदार हमला बोला। परिवर्तन संकल्प यात्रा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में हालात बदलने का समय आ गया है और जनता अब बदलाव चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों की वजह से बंगाल में विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

अपने भाषण में उन्होंने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर भी कई आरोप लगाए। पीएम मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार की कई योजनाओं का लाभ बंगाल के लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंचने दिया जा रहा। उनका दावा था कि राजनीति की वजह से कुछ योजनाओं को लागू करने में बाधाएं पैदा की जा रही हैं।

उन्होंने खास तौर पर स्वास्थ्य योजना Ayushman Bharat का जिक्र करते हुए कहा कि देश के कई राज्यों में गरीब परिवारों को इसका फायदा मिल रहा है, लेकिन बंगाल के लोगों को इससे वंचित रखा गया है। इसके अलावा उन्होंने Pradhan Mantri Awas Yojana का भी जिक्र किया और कहा कि गरीबों को पक्का घर देने वाली योजना में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं।

प्रधानमंत्री ने रैली में कहा कि उनकी सभा को रोकने के लिए प्रशासन ने कई कोशिशें कीं, जैसे रास्ते बंद करना और कार्यक्रम से जुड़े पोस्टर हटाना। हालांकि उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का पहुंचना इस बात का संकेत है कि राज्य में बदलाव की चाह बढ़ रही है।

तो महिलाओं को नौकरी नहीं मिलेगी… पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

महिलाओं को कोई भी नौकरी नहीं देगा... - Supreme Court
महिलाओं को कोई भी नौकरी नहीं देगा... - Supreme Court

नई दिल्ली: कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए पीरियड्स लीव की मांग को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने फिलहाल इस मांग को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि अगर पीरियड्स के दौरान अनिवार्य छुट्टी का कानून बनाया गया तो इससे उल्टा असर पड़ सकता है। अदालत का मानना है कि इससे कई नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से हिचक सकते हैं।

यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने की, जिसकी अगुआई जज Surya Kant कर रहे थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अगर महिलाओं के लिए अलग से अनिवार्य छुट्टी तय कर दी जाती है तो इससे यह धारणा बन सकती है कि वे अपने पुरुष सहकर्मियों के बराबर काम नहीं कर सकतीं। इससे महिलाओं की पेशेवर तरक्की पर भी असर पड़ सकता है।

दरअसल, यह याचिका वकील Shailendra Mani Tripathi की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि पूरे देश में कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान हर महीने दो से तीन दिन की छुट्टी देने की नीति बनाई जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि कई महिलाओं को इस दौरान शारीरिक तकलीफ और असहजता का सामना करना पड़ता है, इसलिए उन्हें आराम की जरूरत होती है।

हालांकि अदालत ने कहा कि इस तरह की अनिवार्य नीति से जेंडर स्टीरियोटाइप भी मजबूत हो सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार चाहें तो इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करके कोई नीति बनाने पर विचार कर सकती है।

भारत में फिलहाल कुछ राज्यों और निजी कंपनियों ने अपने स्तर पर पीरियड्स लीव की सुविधा शुरू की है। जैसे बिहार और ओडिशा में सरकारी दफ्तरों में महिलाओं को हर महीने दो दिन की छुट्टी मिलती है। वहीं कई निजी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए ऐसी नीतियां लागू कर चुकी हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब भी चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।

राज्यसभा चुनाव से पहले ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’, कांग्रेस ने हरियाणा के विधायकों को शिमला शिफ्ट किया

रिसॉर्ट पॉलिटिक्स
रिसॉर्ट पॉलिटिक्स

नई दिल्ली: राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ देखने को मिल रही है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को चंडीगढ़ से हिमाचल प्रदेश के शिमला के पास कुफरी स्थित एक रिसॉर्ट में भेज दिया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के 37 में से 31 विधायकों को यहां ठहराया गया है, जहां उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक इन विधायकों को कुफरी के ‘द ट्वीन टावर्स’ नाम के रिसॉर्ट में रखा गया है और बाहर हिमाचल प्रदेश पुलिस तैनात है। यहां करीब 33 कमरे बुक कराए गए हैं। इन विधायकों की मेजबानी हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu कर रहे हैं। कांग्रेस का उद्देश्य अपने विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को कम करना है।

दरअसल, हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। इनमें भारतीय जनता पार्टी के पास 48 विधायक हैं और उसे अन्य सहयोगियों का भी समर्थन मिला हुआ है। ऐसे में भाजपा अपने उम्मीदवार Sanjay Bhatia को जिताने की स्थिति में मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस ने भी अपने उम्मीदवार Karmveer Bauddh को मैदान में उतारा है और उसे भी अपने विधायकों के समर्थन पर भरोसा है।

हालांकि चुनावी समीकरण तब थोड़ा बदल गया जब भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार Satish Nandal ने भी नामांकन दाखिल कर दिया। माना जा रहा है कि उनकी उम्मीदवारी के चलते चुनाव में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है, इसलिए कांग्रेस ने एहतियात के तौर पर अपने विधायकों को रिसॉर्ट में ठहराया है।

बताया जा रहा है कि रिसॉर्ट में ठहरे विधायकों को मतदान के दिन ही वापस चंडीगढ़ लाया जाएगा। कांग्रेस का मानना है कि इस तरह वह अपने विधायकों को एकजुट रखकर चुनाव में किसी भी तरह की राजनीतिक उलटफेर से बच सकती है।

ईरान का ‘Karrar Drone’ चर्चा में, तेज रफ्तार और घातक हमले की क्षमता से बढ़ी चिंता

Karrar UAV
Karrar UAV

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का एक खास ड्रोन इन दिनों काफी चर्चा में है। इस ड्रोन का नाम Karrar UAV है। यह एक जेट इंजन से चलने वाला मल्टी-पर्पस ड्रोन है, जिसे इंटरसेप्टर, बॉम्बर और सुसाइड मिशन जैसे कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज रफ्तार और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता की वजह से इसे खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस ड्रोन को पहली बार साल 2010 में सार्वजनिक तौर पर पेश किया था। इसे देश के रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि यह ईरान का पहला स्वदेशी जेट इंजन वाला ड्रोन बताया जाता है। माना जाता है कि यह ड्रोन ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है, खासकर उस रणनीति का जिसमें दुश्मन की पहुंच को सीमित करने और उसके सैन्य ठिकानों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

अगर इसके तकनीकी फीचर्स की बात करें तो कर्रार ड्रोन करीब 1,000 किलोमीटर तक की रेंज में उड़ान भर सकता है। जेट टर्बो इंजन की वजह से इसकी रफ्तार लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई जाती है, जो सामान्य प्रोपेलर वाले ड्रोनों से काफी ज्यादा है। यह ड्रोन करीब 250 से 500 किलोग्राम तक हथियार या विस्फोटक ले जाने में सक्षम है। इसमें एंटी-शिप मिसाइल और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे हथियार भी लगाए जा सकते हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत में ज्यादा मारक क्षमता होने की वजह से ऐसे ड्रोन आधुनिक युद्ध में काफी अहम होते जा रहे हैं। खासकर अगर इन्हें बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल किया जाए तो ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कर्रार जैसे ड्रोन को भविष्य के युद्धों में अहम हथियार माना जा रहा है।

लद्दाख हिंसा केस में सोनम वांगचुक को राहत, मोदी सरकार ने खत्म की NSA हिरासत

सोनम वांगचुक को जेल से राहत
सोनम वांगचुक को जेल से राहत

नई दिल्ली: लद्दाख में हुए विवाद और हिंसा के मामले में गिरफ्तार किए गए इंजीनियर और सामाजिक कार्यकर्ता Sonam Wangchuk को केंद्र सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है। सरकार ने उनकी हिरासत को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी National Security Act के तहत समाप्त कर दिया है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

दरअसल, पिछले साल सितंबर में लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए थे। इसी दौरान 26 सितंबर 2025 को जिला प्रशासन के आदेश पर सोनम वांगचुक को NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। बताया जा रहा है कि वे अब तक अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा समय जेल में बिता चुके थे।

केंद्र सरकार का कहना है कि यह फैसला लद्दाख में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। सरकार के मुताबिक क्षेत्र में सभी पक्षों के साथ बातचीत और समाधान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम जरूरी समझा गया। सरकार लगातार लद्दाख के विभिन्न सामाजिक समूहों और स्थानीय नेताओं से बातचीत कर रही है ताकि वहां के लोगों की चिंताओं का समाधान निकाला जा सके।

पिछले कुछ महीनों में लद्दाख में कई बार बंद और विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे। इन प्रदर्शनों का असर स्थानीय जीवन और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा। खास तौर पर पर्यटन, व्यापार और रोज़गार से जुड़े लोगों को काफी नुकसान हुआ। छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं की पढ़ाई पर भी इसका असर देखने को मिला।

अगर सोनम वांगचुक की बात करें तो वे लद्दाख के जाने-माने इंजीनियर, शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्होंने लद्दाख में शिक्षा सुधार और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई पहल की हैं। बॉलीवुड फिल्म 3 Idiots में आमिर खान का किरदार ‘फुनसुक वांगडू’ भी काफी हद तक उन्हीं से प्रेरित बताया जाता है।

केरल की 140 सीटों पर NDA का दांव, बिना CM फेस के लड़ेगा चुनाव

केरल विधानसभा चुनाव को लेकर NDA की 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति तय
केरल विधानसभा चुनाव को लेकर NDA की 140 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति तय

नई दिल्ली: केरल विधानसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। गठबंधन ने फैसला किया है कि इस बार केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा। खास बात यह है कि इस चुनाव में NDA किसी एक मुख्यमंत्री चेहरे के साथ मैदान में नहीं उतरेगा। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रधानमंत्री के नेतृत्व और विकास के मुद्दों पर लड़ा जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक इस बार चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री Narendra Modi के काम और योजनाओं को मुख्य मुद्दा बनाया जाएगा। चुनावी पोस्टरों और प्रचार में केरल भाजपा अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar के साथ 20-20 पार्टी के नेता Sabu M Jacob और भारतीय जन धर्म सेना के प्रमुख T Vellappally के चेहरे भी दिखाई देंगे। इन नेताओं को गठबंधन की ताकत दिखाने के लिए प्रचार में प्रमुखता दी जाएगी।

बताया जा रहा है कि साबू एम जैकब और टी. वेल्लापेल्ली खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन वे पूरे राज्य में NDA उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। गठबंधन का मानना है कि इससे अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों में समर्थन जुटाने में मदद मिलेगी।

सीटों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी करीब 100 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि 20-20 पार्टी को लगभग 10 से 15 सीटें मिल सकती हैं। वहीं भारतीय जन धर्म सेना 25 से 30 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है। इसके अलावा कुछ छोटे दल भी गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने करीब 115 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो पाई थी। इस बार पार्टी ने कुछ नए नेताओं को भी शामिल किया है, जिनके बारे में दावा किया जा रहा है कि वे अपने दम पर चुनाव जीतने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में NDA इस बार केरल में पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।

पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, अफवाहों से बचें: पेट्रोलियम मंत्रालय

देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं... - Sujata Sharma
देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं... - Sujata Sharma

नई दिल्ली: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच देश में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही हैं। कई जगहों पर लोगों ने यह मानकर ज्यादा खरीदारी शुरू कर दी कि कहीं ईंधन की कमी न हो जाए। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोल और डीज़ल की कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

एलपीजी गैस को लेकर उन्होंने कहा कि यह जरूर चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि कुछ जगहों से सिलेंडर की कमी और कालाबाजारी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इसके बावजूद देशभर में मौजूद करीब 25 हजार एलपीजी वितरकों में से किसी के यहां स्टॉक पूरी तरह खत्म होने की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली है। सरकार लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

मंत्रालय के अनुसार भारत की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 258 मिलियन मीट्रिक टन है और देश पेट्रोल व डीज़ल के उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर है। यही वजह है कि इन ईंधनों के लिए बड़े पैमाने पर आयात की जरूरत नहीं पड़ती। फिलहाल देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता या उससे भी ज्यादा पर काम कर रही हैं और उनके पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है।

सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली PNG यानी पाइप्ड नेचुरल गैस और CNG की सप्लाई भी सामान्य रूप से जारी है और इसमें किसी तरह की कटौती नहीं की गई है।

इसके अलावा सरकार ने उन व्यावसायिक उपभोक्ताओं से भी अपील की है, जो एलपीजी पर ज्यादा निर्भर हैं, कि वे PNG कनेक्शन लेने के लिए अपने स्थानीय सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या अधिकृत डीलर से संपर्क करें। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग, 193 सांसदों ने दिया 10 पन्नों का नोटिस

CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग
CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने संसद में बड़ा कदम उठाया है। तृणमूल कांग्रेस की पहल पर विपक्ष के कई सांसदों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया है। बताया जा रहा है कि यह नोटिस करीब 10 पन्नों का है, जिसमें सात अलग-अलग बिंदुओं के आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है। मिली जानकारी के मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में यह नोटिस दिया गया है। लोकसभा में 130 सांसदों और राज्यसभा में 63 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।

संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी सख्त और जटिल होती है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए लागू होती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित करना जरूरी होता है। आम बोलचाल में इसे महाभियोग जैसी प्रक्रिया कहा जाता है।

नियमों के मुताबिक पहले नोटिस पर लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति विचार करते हैं। अगर नोटिस स्वीकार कर लिया जाता है तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। यह समिति जांच करके अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपती है। अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तभी आगे महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू होती है।

हालांकि मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इस प्रस्ताव के पास होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। वजह यह है कि किसी भी सदन में विपक्ष के पास विशेष बहुमत के लिए जरूरी संख्या नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव संसद में चर्चा का विषय तो बन सकता है, लेकिन इसे पारित कराना विपक्ष के लिए आसान नहीं होगा।

गैस संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई में मिलेगा 20% कोटा

कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में 20 प्रतिशत का कोटा
कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में 20 प्रतिशत का कोटा

नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब भारत में गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा चलाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच केंद्र सरकार ने स्थिति को देखते हुए एक अहम फैसला लिया है।

बताया जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। बैठक में कमर्शियल एलपीजी की मौजूदा स्थिति और इससे होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन सेक्टर पर पड़ रहे असर पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद सरकार ने यह फैसला लिया कि कमर्शियल उपभोक्ताओं को उनकी कुल मांग का करीब 20 प्रतिशत सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक यह सुविधा केवल रजिस्टर्ड कमर्शियल गैस कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं को मिलेगी। किस इलाके में किस सेक्टर को कितनी सप्लाई दी जाएगी, इसका फैसला तेल कंपनियों के अधिकारी और राज्य सरकार मिलकर करेंगे। माना जा रहा है कि इससे होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को कुछ राहत मिल सकती है।

इससे पहले नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने भी सरकार से गैस सप्लाई को लेकर चिंता जताई थी। एसोसिएशन ने पेट्रोलियम मंत्री को पत्र लिखकर मांग की थी कि रेस्टोरेंट और होटल को रोजाना कम से कम एक या दो सिलेंडर की सप्लाई सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका काम पूरी तरह बंद न हो।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से अपील की है कि गैस को लेकर घबराकर पैनिक बुकिंग न करें। सरकार का कहना है कि देश में हर दिन करीब 50 लाख एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं और ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।