Home Blog Page 7

नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमले से दुनिया में खौफ, क्या रेडियोएक्टिव लीक का खतरा बढ़ा?

Iran के नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला।
Iran के नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला।

नई दिल्ली: Iran के सबसे अहम परमाणु ठिकानों में से एक नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हाल ही में बड़ा हवाई हमला हुआ है। बताया जा रहा है कि इस हमले को United States और Israel ने मिलकर अंजाम दिया। इस हमले में अत्याधुनिक फाइटर जेट्स और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे प्लांट के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है।

हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी बड़े रेडियोएक्टिव लीक की पुष्टि नहीं हुई है। ईरान के परमाणु ऊर्जा अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा सिस्टम ने समय रहते हालात को संभाल लिया। लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है, क्योंकि प्लांट को हुआ नुकसान आगे चलकर समस्या खड़ी कर सकता है।

इस हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की। उसने हिंद महासागर में मौजूद Diego Garcia सैन्य बेस को निशाना बनाते हुए लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं। हालांकि अमेरिकी सुरक्षा सिस्टम ने इन हमलों को काफी हद तक नाकाम कर दिया और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहा। इराक की राजधानी बगदाद में भी ड्रोन हमलों के बाद आग लगने की खबरें सामने आई हैं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।

वहीं, ईरान के नए सुप्रीम लीडर ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई का संकेत दिया है। दूसरी तरफ, अमेरिका की ओर से भी फिलहाल पीछे हटने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।

ईद पर गांधी मैदान में निशांत की एंट्री, बिहार की सियासत में नए संकेत

पटना के गांधी मैदान में ईद की नमाज के दौरान Nishant Kumar की मौजूदगी से बिहार की राजनीति में हलचल
पटना के गांधी मैदान में ईद की नमाज के दौरान Nishant Kumar की मौजूदगी से बिहार की राजनीति में हलचल

नई दिल्ली: पटना के गांधी मैदान में ईद की नमाज के दौरान Nishant Kumar की मौजूदगी ने बिहार की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। खास बात यह रही कि इस बार मुख्यमंत्री Nitish Kumar खुद वहां नजर नहीं आए, लेकिन उनके बेटे निशांत लोगों के बीच पहुंचे और ईद की मुबारकबाद दी।

निशांत कुमार की यह मौजूदगी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ी है—चाहे पार्टी नेताओं के साथ बैठक हो या आम जनता से मुलाकात, वे हर जगह नजर आ रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गांधी मैदान जैसे ऐतिहासिक स्थल पर, वो भी ईद के मौके पर पहुंचना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है। इसे अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और सामाजिक जुड़ाव का संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

जेडीयू के नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार धीरे-धीरे संगठन और जनता के बीच अपनी पहचान बना रहे हैं। पार्टी के मुताबिक, उनकी यह सक्रियता कोई अचानक बदलाव नहीं, बल्कि एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है।

वहीं दूसरी तरफ, बिहार की राजनीति में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत है। नीतीश कुमार की छवि एक अनुभवी और संतुलित नेता की रही है, ऐसे में उनके बेटे के सामने उसी भरोसे को कायम रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल, निशांत कुमार की हर गतिविधि पर सबकी नजर है। उनकी यह नई भूमिका बिहार की राजनीति में क्या रंग लाती है, यह आने वाले समय में साफ हो जाएगा। लेकिन इतना जरूर है कि ईद के दिन गांधी मैदान से एक नया सियासी संदेश निकल चुका है।

ईद के मौके पर सियासी वार: ममता बनर्जी का BJP पर तीखा हमला, कहा- ‘लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है…’

ममता बनर्जी का BJP पर तीखा हमला
ममता बनर्जी का BJP पर तीखा हमला

नई दिल्ली: कोलकाता के रेड रोड पर ईद-उल-फितर की नमाज के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने केंद्र सरकार और Bharatiya Janata Party पर खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार किसी भी हाल में लोगों के अधिकार नहीं छिनने देगी और इसके लिए वह हर स्तर पर लड़ाई लड़ती रहेंगी।

ममता बनर्जी ने अपने भाषण में आरोप लगाया कि लोगों के नाम रिकॉर्ड से हटाए जा रहे हैं, जिसे लेकर वह अदालत तक जा चुकी हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर Calcutta High Court से लेकर Supreme Court of India तक अपनी बात रखी है, ताकि आम लोगों के हक सुरक्षित रह सकें।

अपने संबोधन में उन्होंने साफ कहा कि वह बंगाल के हर नागरिक के साथ खड़ी हैं, चाहे वह किसी भी धर्म या समुदाय से क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और आगे भी जारी रहेगी।

इस दौरान ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह किसी को भी बंगाल के लोगों के अधिकारों से खिलवाड़ नहीं करने देंगी। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि राज्य सरकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

बीजेपी पर हमला बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं और जनता अब सब समझ चुकी है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी हर हाल में लोगों के साथ खड़ी रहेगी और डरकर पीछे हटने वाली नहीं है।

ईद के मौके पर दिया गया यह बयान अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

मथुरा में ‘फरसा वाले बाबा’ की मौत पर बवाल, हत्या या हादसा? क्यों बढ़ा बवाल?

मथुरा में गौरक्षक बाबा चंद्रशेखर की मौत बवाल
मथुरा में गौरक्षक बाबा चंद्रशेखर की मौत बवाल

नई दिल्ली: मथुरा के कोसीकलां इलाके में तड़के करीब 4 बजे एक ऐसी घटना हुई जिसने पूरे ब्रज क्षेत्र को हिला कर रख दिया। ‘फरसा वाले बाबा’ के नाम से मशहूर गौरक्षक संत चंद्रशेखर की मौत हो गई। आरोप है कि गौतस्करों का पीछा करते वक्त उन्हें वाहन से कुचल दिया गया। इस घटना को लेकर लोग इसे सीधा हत्या बता रहे हैं।

घटना के बाद जैसे ही खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए। गुस्साए लोगों ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। सैकड़ों गाड़ियां सड़क पर फंसी रहीं और हालात धीरे-धीरे बिगड़ते चले गए।

स्थानीय लोगों ने एक आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है, जबकि तीन अन्य अभी फरार बताए जा रहे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी को लेकर लोगों में और नाराजगी बढ़ गई। इसी गुस्से ने हिंसक रूप ले लिया और कुछ जगहों पर पुलिस पर पथराव भी हुआ। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े।

बाबा चंद्रशेखर ब्रज क्षेत्र में गौतस्करी के खिलाफ सक्रिय रहे हैं और एक सख्त छवि वाले संत के रूप में जाने जाते थे। उनकी मौत के बाद संत समाज और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।

फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। लेकिन माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और लोग इस घटना की सच्चाई जानना चाहते हैं।

हीलियम संकट से बदला गेम: कतर का खेल खत्म? रूस तेजी से बना नई ताकत

ग्लोबल हीलियम क्राइसिस से बढ़ी टेंशन! क्या रूस तय करेगा इलाज की कीमत?
ग्लोबल हीलियम क्राइसिस से बढ़ी टेंशन! क्या रूस तय करेगा इलाज की कीमत?

नई दिल्ली: दुनियाभर में हीलियम गैस को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है और इसका असर अब सीधे भारत के हेल्थ सेक्टर पर दिखने लगा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे Qatar से आने वाली हीलियम की आपूर्ति कम हो गई है। भारत काफी हद तक इसी पर निर्भर रहा है, ऐसे में अब अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स में परेशानी बढ़ने लगी है।

हीलियम कोई आम गैस नहीं है। इसका सबसे अहम इस्तेमाल MRI मशीनों में होता है, जहां यह मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए जरूरी होती है। सप्लाई कम होने की वजह से अब MRI स्कैन महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। कई जगहों पर अस्पतालों के पास बैकअप स्टॉक भी कम होने लगा है, जिससे आने वाले समय में मेडिकल सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

इस बीच Russia एक बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभर रहा है। रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि 2030 तक रूस दुनिया की कुल हीलियम डिमांड का 35 से 45 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा कर सकता है। साइबेरिया और अन्य इलाकों में हीलियम के बड़े भंडार मिलने से रूस तेजी से इस सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इसका असर सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगा। दवाओं, मेडिकल उपकरणों और इलाज की लागत भी बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

बंगाल चुनाव से पहले ममता के 10 बड़े वादे, महिलाओं को ₹1500 महीना देने का ऐला

TMC का घोषणापत्र जारी...
TMC का घोषणापत्र जारी...

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने जनता को लुभाने के लिए बड़ा दांव चला है। कोलकाता में टीएमसी का घोषणापत्र जारी करते हुए उन्होंने ‘दीदी के 10 संकल्प’ पेश किए, जिनमें महिलाओं, युवाओं, किसानों और आम लोगों के लिए कई बड़े वादे शामिल हैं।

सबसे बड़ा ऐलान महिलाओं के लिए किया गया है। ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत अब सामान्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1700 रुपये देने की बात कही गई है। इसके अलावा ‘द्वारे चिकित्सा’ योजना के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाने का वादा किया गया है, जिसमें हर बूथ स्तर पर मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे।

घोषणापत्र में विकास से जुड़े कई वादे भी किए गए हैं। सरकार ने हर परिवार को पक्का मकान, हर घर नल से जल और स्कूलों में ई-लर्निंग की सुविधा देने की बात कही है। साथ ही राज्य में 7-8 नए जिले, ब्लॉक और नगर पालिकाएं बनाने का भी वादा किया गया है, ताकि प्रशासन को और बेहतर बनाया जा सके।

इस दौरान ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और Narendra Modi पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ जैसा माहौल बनाया जा रहा है और बीजेपी पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

जंग का असर: पेट्रोल से लेकर ऑनलाइन खाना तक महंगा, बढ़ेगा महंगाई का बोझ?

Naveen Bansal
Naveen Bansal

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रही जंग का असर अब भारत में आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है। सबसे पहले असर फ्यूल की कीमतों पर पड़ा है, जहां प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकारी तेल कंपनियों ने इसकी कीमतों में करीब 2 से 2.5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है, जिससे हाई-परफॉर्मेंस गाड़ियों वाले लोगों को झटका लगा है।

हालांकि राहत की बात यह है कि अभी सामान्य पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन जिस तरह से हालात बन रहे हैं, उससे आगे चलकर आम ईंधन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

इसी बीच ऑनलाइन खाना मंगवाना भी महंगा हो गया है। Zomato ने अपनी डिलीवरी फीस में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी का कहना है कि बढ़ती लॉजिस्टिक्स लागत और ईंधन की कीमतों की वजह से यह फैसला लेना पड़ा।

दरअसल, इस पूरे मामले की जड़ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इजरायल और ईरान के बीच तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए वहां की हलचल का असर यहां जल्दी दिखता है।

सोशल मीडिया पर चुनावी प्रचार अब आसान नहीं, EC ने कस दी लगाम

चुनाव आयोग ने डिजिटल और सोशल मीडिया पर चलने वाले राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पहले से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया है।
चुनाव आयोग ने डिजिटल और सोशल मीडिया पर चलने वाले राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पहले से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया है।

नई दिल्ली: चुनाव के समय सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से चलने वाले राजनीतिक विज्ञापनों पर अब सख्ती बढ़ गई है। चुनाव आयोग (EC) ने नए नियम लागू करते हुए साफ कर दिया है कि अब फेसबुक, यूट्यूब, एक्स या किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति कोई भी चुनावी विज्ञापन नहीं चल सकेगा। यानी अब पहले की तरह सीधे पोस्ट या वीडियो डालकर प्रचार करना आसान नहीं रहेगा।

नए नियमों के तहत हर राजनीतिक विज्ञापन को जारी करने से पहले प्री-सर्टिफिकेशन लेना जरूरी होगा। इसके लिए उम्मीदवारों या पार्टियों को मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (MCMC) से मंजूरी लेनी होगी। इस प्रक्रिया का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी विज्ञापन में गलत या भ्रामक जानकारी न हो और वह आचार संहिता के दायरे में रहे।

पहले सोशल मीडिया पर निगरानी उतनी सख्त नहीं थी, जिससे कई बार बिना जांच के ही प्रचार सामग्री वायरल हो जाती थी। इससे फेक न्यूज और पेड न्यूज का खतरा बढ़ जाता था। लेकिन अब चुनाव आयोग ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी टीवी और रेडियो की तरह नियमों के दायरे में ला दिया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

सिर्फ इतना ही नहीं, अब उम्मीदवारों को अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी नामांकन के समय देनी होगी। साथ ही, चुनाव प्रचार में खर्च किए गए हर पैसे का हिसाब देना भी अनिवार्य होगा, जिसमें डिजिटल प्रचार का खर्च भी शामिल रहेगा।

नवरात्रि पर महिला शक्ति की गूंज, दिल्ली में ‘शतायु संघ और महिला सहभागिता’ किताब का विमोचन

Naveen Bansal
Naveen Bansal

नयी दिल्ली: नई दिल्ली में 18 मार्च को NDMC कन्वेंशन सेंटर, कनॉट प्लेस में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शोभा विजेंद्र की नई किताब “शतायु संघ और महिला सहभागिता” का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां शामिल रहीं और महिला भूमिका पर गहराई से चर्चा हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख Sunil Ambekar ने की, जबकि दिल्ली विधानसभा के स्पीकर Vijender Gupta विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इसके अलावा स्वंसेविका समिति की पदाधिकारी सुनीता भाटिया समेत कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

डॉ. शोभा विजेंद्र ने अपने संबोधन में बताया कि यह किताब उनके जीवन के अनुभवों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बचपन से लेकर अब तक जो उन्होंने जिया और देखा, वही इस पुस्तक का मुख्य स्रोत है। साथ ही, वर्तमान समय के सामाजिक विचारों, प्रश्नों और संवादों को पढ़कर इस किताब को एक स्वरूप दिया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह पुस्तक उन धारणाओं को चुनौती देने के लिए लिखी गई है, जिनमें संस्थाओं को एकतरफा नजरिए से देखा जाता है। सरल भाषा में लिखी गई यह किताब आम लोगों तक आसानी से अपनी बात पहुंचाती है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नवरात्रि के शुभ अवसर पर इस तरह की किताब का विमोचन और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि यह महिला शक्ति और उनकी भूमिका को सामने लाने का काम करती है।

3 हफ्ते में ही थक गया अमेरिका? ईरान का तंज- “अभी तो शुरुआत है”

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Donald Trump पर साधा निशाना
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Donald Trump पर साधा निशाना

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर अब बयानबाजी भी तेज हो गई है। इस बीच ईरान ने अमेरिका पर तीखा हमला बोलते हुए उसके बढ़ते युद्ध खर्च का मजाक उड़ाया है। ईरानी नेताओं का कहना है कि अभी तो जंग को सिर्फ तीन हफ्ते हुए हैं, लेकिन अमेरिका पर इसका बोझ साफ दिखने लगा है।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Donald Trump पर निशाना साधते हुए कहा कि 200 अरब डॉलर का युद्ध बजट सिर्फ शुरुआत है। असली खर्च तो अभी आगे आएगा और इसका भार सीधे अमेरिकी जनता को उठाना पड़ेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक अमेरिका इस युद्ध पर करीब 30 अरब डॉलर खर्च कर चुका है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विभाग यानी Pentagon ने कुल 200 अरब डॉलर से ज्यादा का बजट मांगा है। यह रकम पहले से ही बड़े रक्षा बजट के ऊपर है, जिससे आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।

ईरान का दावा है कि इस युद्ध का असर अब अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, आर्थिक विकास धीमा पड़ रहा है और बेरोजगारी में इजाफा देखने को मिल रहा है।

इतना ही नहीं, इस युद्ध का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में उछाल आया है।