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मोदी सरकार ने हमारे बैंक को कलेक्शन एजेंट बना दिया- मल्लिकार्जुन खड़गे

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली , 29 मार्च- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एटीएम से पैसे निकालने पर शुल्क बढ़ाने की सरकार के निर्णय को जन विरोधी करार देते हुए कहा है कि सरकार बैंकों के माध्यम से देश की जनता को लूटने का काम कर रही है. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बैंकों को “कलेक्शन एजेंट” बना दिया है। खड़गे ने इस बात का जिक्र किया कि सरकार ने विभिन्न शुल्कों को लागू किया है. जो आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।
 खड़गे ने कहा बैंक एटीएम केवाईसी व्हाट्सएप पर निकासी तथा जमा संबंधी संदेश देने ग्राहक का अपने खाते का विवरण हासिल करने आदि पर पैसे वसूल कर आम लोगों को लूटने में लगी है.पहले बैंक इसका डाटा  देते थे लेकिन अब सरकार  ने यह कहते हुए डाटा  देने से इनकार कर दिया कि रिजर्व बैंक डाटा  नहीं रखता है,यह परंपरा बंद कर दी गई है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने इन शुल्कों से प्राप्त राशि का विवरण संसद में देना बंद कर दिया है। 
बैंकों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों का विवरण देते हुए खड़गे ने कहा बैंकों को सालाना निष्क्रियता शुल्क 100 से 200 रुपए है. स्टेटमेंट जारी करने का शुल्क 50 से 100 है। एसएमएस अलर्ट के लिए प्रति तिमाही   25 का शुल्क लिया जाता है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो डॉलर के मुकाबले उसे समय ₹60 थे और वह कहते थे रुपया आईसीयू में चला गया है लेकिन आज डॉलर की तुलना रुपया 89 पर है रुपया वेंटिलेटर पर है. लेकिन मोदी खामोश है.खड़गे ने इस पर भी कटाक्ष करते हुए कहा बेतहाशा महंगाई , बेलगाम लूट यह  भाजपा का जबरन वसूली मंत्र है ।  मोदी सरकार ने हमारे बैंक को कलेक्शन एजेंट बना दिया है।

टोन्टो थाना क्षेत्र में नक्सलियों के विस्फोटक डंप का खुलासा, सुरक्षा बलों ने किया नष्ट

चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा झारखंड के सारंडा-कोल्हान क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान तेज कर दिया गया है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछु, अनल, असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया, अश्विन, पिंटु लोहरा, चंदन लोहरा, अमित हांसदा उर्फ अपटन, जयकांत, रापा मुंडा अपने दस्ता सदस्यों के साथ इस क्षेत्र में विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सक्रिय हैं। इनके विरुद्ध चाईबासा पुलिस, कोबरा 203 और 209 बटालियन, झारखंड जगुआर तथा सीआरपीएफ की 26, 60, 134, 174, 193 और 197 बटालियन का संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है।

वर्ष 2022 से लगातार इस अभियान को गोईलकेरा और टोन्टो थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों और जंगलों में संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत कुईड़ा, छोटा कुईड़ा, मारादिरी, मेरालगड़ा, हाथीबुरू, तिलायबेडा, बोयपाईससांग, कटम्बा, बायहातु, बोरोय, लेमसाडीह, हुसिपी, राजाबासा, तुम्बाहाका, रेगड़ा, पाटातोरब, गोबुरू और लुईया के सीमावर्ती इलाकों में विशेष कार्रवाई की जा रही है।

इसी कड़ी में सुरक्षा बलों को सूचना मिली थी कि नक्सलियों ने टोन्टो थाना क्षेत्र के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखा है। इस सूचना के आधार पर 28 मार्च 2025 को वनग्राम सरजामबुरू और जीम्कीइकीर के आसपास व्यापक सर्च अभियान शुरू किया गया। इस दौरान सुरक्षा बलों को एक पुराने नक्सली डंप का पता चला, जहां से भारी मात्रा में विस्फोटक और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद हुई।

सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए पहले से लगाए गए आईईडी और अन्य विस्फोटकों को बम निरोधक दस्ते की मदद से सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया गया। इसके अलावा, बरामद किए गए नक्सल डंप को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। बरामद सामग्री में 28 तैयार आईईडी, 23 डेटोनेटर, 25 किलोग्राम यूरिया, 1 किलोग्राम गन पाउडर, 50 स्विच, 250 मीटर कॉर्डेक्स वायर, 150 मीटर सेफ्टी फ्यूज, 1 सिंटेक्स टैंक और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं।

यह नक्सल विरोधी अभियान लगातार जारी है और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम नक्सलियों की विध्वंसक गतिविधियों को रोकने के लिए सतर्कता बरत रही है।

यूपी में गुरुजी ही निकले फर्जी; सीतापुर में 16 शिक्षक बर्खास्त, फर्जी सर्टिफिकेट पर पायी थी नौकरी

यूपी : बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के निर्देश पर सीतापुर में 16 शिक्षकों बर्खास्त कर दिया गया है. इन शिक्षकों की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का मामला आया है. जिसके बाद मंत्री ने तुरंत विभाग के उच्च अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया. इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) सीतापुर ने इन सभी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया.

बर्खास्त शिक्षकों की सूची जारी : जारी सूची के मुताबिक, जिन 16 शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उनमें बबलू यादव, रंजना, अभिषेक कुमार, विनोद कुमार, मनोज कुमार, अरविंद कुमार, गोपाल सिंह, जीतेंद्र कुमार, राहुल कुमार, अकबर शाह, प्रदीप कुमार यादव, दिनेश कुमार यादव, प्रमोद कुमार, भूपेंद्र सिंह, सुनील कुमार और ओमवीर सिंह के नाम शामिल हैं. इनमें अधिकांश के टीईटी प्रमाण पत्र और दस्तावेज फर्जी पाए गए हैं.

बेसिक शिक्षा मंत्री ने दी चेतावनी : बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में फर्जीवाड़े को सहन नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह अभियान और तेज होगा. शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का कोई स्थान नहीं है. जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसे सभी फर्जी नियुक्तियों की जांच कर कार्रवाई जारी रहेगी. भविष्य में भी जो कोई गड़बड़ी करेगा, उसे इसी तरह कठोर दंड मिलेगा.

यह था मामला : बता दें कि यह फर्जीवाड़ा 12,460 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जुलाई 2024 में हुई नियुक्तियों में सामने आया. जांच में पाया गया कि 16 शिक्षकों ने फर्जी टीईटी प्रमाण पत्रों और अन्य कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की थी. सत्यापन के दौरान जब यह धोखाधड़ी उजागर हुई और मामला बेसिक शिक्षा मंत्री के संज्ञान में आया. उन्होंने विभाग को जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया.

केंद्र के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते व महंगाई राहत में 2% की वृद्धि

बिहार में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड आरा-सासाराम कॉरिडोर को हरी झंडी

अंजलि भाटिया
नई दिल्ली , 28 मार्च
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिहार के लिए योजनाओं की झड़ी लगा दी है। इसमें बिहार में 4-लेन ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर 120.10 किमी के निर्माण को हरी झंडी दे दी। इसके अलावा साल दर साल कोसी के कहर से लोगों को बचाने के लिए एक बहु प्रशिक्षित योजना कोसी मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना पर भी मुहर लगा दी है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पटना-आरा-सासाराम कॉरिडोर से क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय संपर्क बढ़ेगा और यात्रा का समय कम होगा । इसकी अनुमानित लागत 3,712 करोड़ रुपये है। चार लेन वाला यह मार्ग हाइब्रिड एन्युटी मोड-एचएएम पर विकसित किया जाएगा। मौजूदा समय में सासाराम, आरा और पटना के बीच संपर्क मौजूदा राज्य के बनाए राजमार्गों पर निर्भर करता है, इससे यातायात की दुश्वारियां होती हैं। इसके चलते इस सफर को तय करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं।
ब्राउनफील्ड राजमार्ग के 10.6 किलोमीटर के बढ़ने के साथ एक ग्रीन फील्ड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। आरा, ग्राहिणी, पीरो, बिक्रमगंज, मोकर और सासाराम जैसी घनी आबादी वाले इलाके भी यातायात के लिहाज से हल्के हो सकेंगे। इस कॉरिडोर के बनने से लखनऊ,पटना, रांची और वाराणसी के मध्य संपर्क और बेहतर हो जाए। इससे 48 लाख मानव दिवसों के बराबर रोजगार भी सृजित होंगे।
इसके अलावा कैबिनेट ने उर्वरक खरीद के लिए सब्सिडी और इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना को मंजूरी दी। आर्थिक मामलों के मंत्री मंडल ने कोसी मेची अंतरराज्यीय लिंक परियोजना को मंजूरी दी है। इसका मकसद राज्य में संपर्क को बढ़ाना और कृषि सिंचाई को बढ़ावा देना है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- पीएमकेएसवाई- एआईबीपी में इस योजना को मंजूरी दी है। कुल योजना 6,282.32 करोड़ की है। इसमें राज्य का हिस्सा छोड़कर केंद्र से 3,652.56 करोड़ रुपया मिलेगा। इस 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना का उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी को महानंदा बेसिन में कृषि भूमि की सिंचाई के लिए मोड़ना है। इससे अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में 2.10 लाख हेक्टेयर का क्षेत्रफल लाभान्वित होगा। बाढ़ से मुक्ति मिलेगी। बेहतर जल वितरण के लिए पूर्वी कोसी मुख्य नहर-ईडीएमसी का उन्नयन सुनिश्चित हो सकेगा। पूरे क्षेत्र में कृषि उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना को मंजूरी दी। इस योजना से 91,600 प्रत्यक्ष रोजगार जुड़ेंगे। इसका लक्ष्य भारत को इलेक्ट्रानिक्स आपूर्ति श्रृंखला में आत्मनिर्भर बनाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स शीर्ष-3 निर्यातित वस्तुओं में से एक है । इस पहल से घरेलू और वैश्विक स्तर पर बड़े निवेश आकर्षित किए जा सकेंगे और एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करने में मदद मिलेगी। इस योजना से 59,350 करोड़ का निवेश आकर्षित होने का अनुमान है। इससे 4,56,500 करोड़ के उत्पादों का उत्पादन हो सकेगा। यह योजना छह साल के लिए है, इसमे एक साल का गर्भावधि शुल्क शामिल है। इसके साथ की प्रोत्साहन रोजगार सृजन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के अनुसार किया जाएगा।
इस योजना से निर्यात बढ़ाने, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग के हब के रुप में भारत दुनिया के नक्शे पर स्थापित हो सकेगा।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस साल खरीफ मौसम के लिए फॉस्फेटिक और पोटासिक उर्वरकों पर खरीफ, 2025 के लिए 37,216 करोड़ रुपयों की पोषक तत्व आधारित सब्सिडी दरों को भी मंजूरी दी है। इसका मकसद मिट्टी की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए उसे पोषक तत्व उपलब्ध कराना है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए यह पहल खेती किसानी के लिहाज से खासी अहम है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि डीएपी-डायअमोनिया फॉस्टेट की खुदरा कीमत वर्तमान स्तर पर बनी रहें। खरीफ सीजन के लिए सब्सिडी राशि की आवश्यकता करीब 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, जो रबी सीजन 2024-25 के बजटीय प्रावधानों से ज्यादा है।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते व महंगाई राहत (डीए व डीआर) में 2% की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के साथ, डीए और डीआर 53% से बढ़कर 55% हो जाएगा। इससे कर्मचारियों के वेतन और रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन में वृद्धि होगी। पिछली बार डीए में वृद्धि जुलाई 2024 में हुई थी, जब इसे 50% से बढ़ाकर 53% किया गया था।

यूएई ने 500 भारतीय समेत 1500 से अधिक कैदियों को किया रिहा

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रमजान के पवित्र महीने के अंत में एक बड़ा मानवीय कदम उठाया है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कुल 2,813 कैदियों बड़ी राहत दी है।

राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 1,295 कैदियों को माफी दी है, जबकि प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने 1,518 कैदियों को क्षमादान दिया है, इनमें 500 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। यह घोषणा फरवरी के आखिरी सप्ताह में राष्ट्रपति द्वारा रमजान से पहले कैदियों को माफी देने की बात कहे जाने के बाद आई है। इस कदम का उद्देश्य रिहा किए गए कैदियों को अपने परिवारों के साथ ईद का त्योहार मनाने का अवसर प्रदान करना है।

गौरतलब है कि संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय समुदाय एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यूएई की कुल आबादी में भारतीयों की हिस्सेदारी 37.96 प्रतिशत है। दिसंबर 2024 के आंकड़ों के अनुसार, यूएई में 35 लाख 68 हजार 848 (3.6 मिलियन) भारतीय निवास करते थे, जो दुनिया में भारतीयों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। यूएई के विकास में यहां रहने वाले भारतीयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

काला रंग: ब्रह्मांड की सच्चाई और समाज की सोच

हम काले हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं”-बॉलीवुड फिल्मों ने गोरेपन को लेकर इतनी भ्रांतियां पैदा कर दीं हैं कि हर दिन टनों फेयर एंड लवली क्रीम खप जाती है। गोरे होने के चक्कर में तरह तरह के नुस्खे आजमाए जाते हैं। “गोरे रंग पे न इतना गुमान कर,” गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा। सांवले रंग की वजह से बच्चों के नाम कालिया, कालीचरण, भूरा, आदि रखे जाते हैं। श्री कृष्ण भी मैय्या से पूछते हैं  राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला? सच में भारतीय समाज में रंग भेद का अभिशाप युगों से चल रहा है।

बृज खंडेलवाल द्वारा

आगरा- केरल राज्य सरकार की मुख्य सचिव, सारदा मुरलीधरन, ने हाल ही में अपनी गहरी रंगत और काली त्वचा के बारे में जो बातें कहीं, वे सुनने और गौर करने लायक हैं। उनकी बातें न सिर्फ़ हमारे सौंदर्य के पैमानों को चुनौती देती हैं, बल्कि हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर हमने “काले रंग” को इतना बदनाम क्यों कर रखा है? 

सारदा जी ने कहा, “काले को बुरा क्यों माना जाता है? काला तो ब्रह्मांड का असली रंग है। काला वह रंग है जो हर चीज़ को सोख सकता है। यह ऊर्जा का सबसे ताक़तवर स्रोत है। यह वह रंग है जो हर किसी पर फबता है—चाहे ऑफिस का फॉर्मल ड्रेस हो, शाम की पार्टी की चमकदार पोशाक हो, आँखों का काजल हो या फिर बारिश के बादलों का रंग।”

भारतीय समाज में रंगभेद की समस्या कोई नई नहीं है। सदियों से गोरी त्वचा को “सुंदर” और काली त्वचा को “कमतर” माना जाता रहा है। यह सोच कहाँ से आई? इसके पीछे कई कारण हैं—कुछ प्राचीन मान्यताएँ, कुछ विदेशी आक्रमणकारियों का प्रभाव और कुछ आधुनिक विज्ञापनों की चालाकी। 

प्राचीन काल से ही भारत में गोरी त्वचा को “उच्च वर्ग” का प्रतीक माना जाता था। फिर अंग्रेज़ों के शासन ने इस सोच को और बढ़ावा दिया। उन्होंने गोरे लोगों को “श्रेष्ठ” और काले लोगों को “हीन” बताया। यह मानसिकता इतनी गहरी हो गई कि आज भी हमारे समाज में गोरा होना “सफलता की गारंटी” माना जाता है। 

प्रोफेसर पारस नाथ चौधरी के मुताबिक, “टीवी और मैगज़ीन्स पर “फेयरनेस क्रीम” के विज्ञापनों ने इस सोच को और पुख़्ता किया है। इन विज्ञापनों में गोरी त्वचा को “सुख, समृद्धि और प्यार” से जोड़कर दिखाया जाता है, जबकि काली त्वचा को “कमतर” और “बदसूरत” बताया जाता है। यह एक सोची-समझी साज़िश है जो लोगों के दिमाग़ में यह बात बैठा देती है कि “गोरा होना ज़रूरी है।” 

भारत में आज भी ज़्यादातर लड़कियों को शादी के लिए “गोरी” होने की सलाह दी जाती है। माता-पिता लड़कियों को बचपन से ही यह समझाते हैं कि “रंग साफ़ होगा तो रिश्ता अच्छा मिलेगा।” यह सोच न सिर्फ़ गलत है, बल्कि हज़ारों लड़कियों के आत्मविश्वास को तोड़ देती है, सामाजिक कार्यकर्ता पद्मिनी अय्यर ने कहा।

सारदा मुरलीधरन ने जो कहा है वह सच में विचार करने लायक है,काला ब्रह्मांड का सच है, काला रंग शक्ति का प्रतीक है,  यह वह रंग है जो हर रंग को अपने अंदर समा लेता है,   काला रंग रहस्यमय है: यह अनंत अंतरिक्ष का रंग है, जिसमें हज़ारों रहस्य छिपे हैं,   काला रंग सुंदरता है: काजल की कालिख से लेकर रात के अंधेरे तक, यह रंग हमेशा से मनमोहक रहा है।  फिर भी, समाज ने इस रंग को “बुराई” और “अशुभ” का नाम दे दिया। क्या यह सच में सही है? 

बदलाव संभव है, लेकिन इसके लिए हमें अपनी सोच बदलनी होगी।   लोगों को समझाना होगा कि त्वचा का रंग किसी की काबिलियत या सुंदरता को नहीं तय करता।  फिल्मों और विज्ञापनों में गोरी त्वचा को बढ़ावा देना बंद करना होगा।  शादी-ब्याह में “रंग” को महत्व देना बंद करना होगा, अध्यापिका, मीरा गुप्ता ने कहा।

सोशल एक्टिविस्ट मुक्ता बेंजामिन कहती हैं, “सारदा मुरलीधरन की बातें न सिर्फ़ एक व्यक्ति की आवाज़ हैं, बल्कि उन हज़ारों लोगों की आवाज़ हैं जो रंगभेद की वजह से हीनभावना का शिकार होते हैं। अगर हम सच में एक बेहतर समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें अपनी सोच बदलनी होगी। “

यूथ एक्टिविस्ट माही हीदर मानती हैं, “काला रंग बुरा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का सच है। इसे स्वीकार करें, इसे प्यार करें।  जब तक हम अपनी आँखों से रंगभेद की दीवार नहीं हटाते, तब तक हम सच्ची ख़ूबसूरती को नहीं देख पाएँगे।”

कपड़ा फैक्ट्री में बायलर फटने से 3 मजदूरों की मौत, 6 घायल

गाजियाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र स्थित दतेड़ी गांव में एक कपड़ा फैक्ट्री में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में तीन मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया।

घटना के बाद मृतकों के परिजन आक्रोशित हो गए और उन्होंने फैक्ट्री के बाहर जमकर हंगामा किया। परिजनों ने कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस को शवों को उठाने नहीं दिया। मौके पर ग्रामीणों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल को बुला लिया है। परिजनों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा कामगारों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए थे, जिसके कारण यह हादसा हुआ।

पुलिस फिलहाल घटनास्थल पर गहन जांच कर रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि बॉयलर किस कारण से फटा। पुलिस शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी कर रही थी, लेकिन मृतकों के परिजनों के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका। भीड़ के आगे पुलिस अधिकारी बेबस नजर आए। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

पुलिस ने मृतकों की पहचान अनुज, योगेंद्र और अवधेश के रूप में की है। बताया गया है कि ये तीनों मजदूर क्रमशः जेवर, भोजपुर और मोदीनगर के रहने वाले थे। पुलिस ने कुछ घायल मजदूरों से भी बातचीत की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बॉयलर फटने से इतना तेज धमाका हुआ कि आसपास के इलाके में भी दहशत फैल गई। घटना स्थल पर आसपास के गांवों के लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई है।

बिना वीजा किसी को भी भारत में रहने का अधिकार नहीं: रामदास आठवले

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने आव्रजन और विदेशी नीति पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि भारत में बिना वीजा के रहने का किसी को अधिकार नहीं है।

रामदास आठवले ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि भारत में बिना वीजा के किसी को भी रहने का अधिकार नहीं है। बांग्लादेश के लोग भारत आते हैं और बिना वीजा के यहां रहते हैं इसलिए ही अमित शाह ने कहा है कि जिन्हें यहां रहना है उनके पास वीजा होना चाहिए। भारत में अवैध रूप से रहने वालों को वापस उनके देश भेज दिया जाएगा। बांग्लादेश में भी हिंदू समाज पर अन्याय हो रहा है, यह अच्छी बात नहीं है।

बता दें कि आव्रजन और विदेशी नागरिकों से संबंधित विधेयक गुरुवार (27 मार्च) को लोकसभा में पारित हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा था कि देश में अल्पसंख्यक समूह सबसे सुरक्षित हैं और सरकार ने शरणार्थियों को हमेशा सुरक्षा प्रदान की है।

अमित शाह ने इस बात पर जोर दिया था कि आव्रजन राष्ट्रीय सुरक्षा से निकटता से जुड़ा हुआ है और देश की सीमाओं में प्रवेश करने वालों की निगरानी करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा था, “आव्रजन कोई अलग मुद्दा नहीं है। देश के कई मुद्दे इससे जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि देश की सीमाओं में कौन प्रवेश करता है। हम देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों पर भी कड़ी नजर रखेंगे। यह

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सुरक्षाबलों ने पांच आतंकियों को घेरा

जम्मू: राजबाग थाना के अंतर्गत स्थित जुथाना के अंबा नाल में 5 संदिग्ध आतंकवादियों को देखने के बाद लगभग दो घंटे से मुठभेड़ जारी है। इस दौरान एसडीपीओ बॉर्डर कठुआ के जवान धीरज सिंह कटोच सहित एसओजी के दो जवान घायल हुए हैं।

गौर हो कि पिछले चार दिनों से यहां बड़े पैमाने पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जुठाना इलाके में 4-5 आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया, इस दौरान फायरिंग शुरू हो गई। सभी आतंकवादियों को घेर लिया गया है और क्षेत्र को चारों ओर से घेराबंदी कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, ये संदिग्ध आतंकवादी उज्ज दरिया से सुफैन होते हुए यहां पहुंचे थे।

अधिकारियों ने बताया कि आज सुबह राजबाग के घाटी जुथाना इलाके में जब सुरक्षाबलों ने आतंकवादियों को देखा, तो गोलीबारी शुरू हो गई। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बल भेजा गया है और विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।

सदन में जब भी मैं खड़ा होता हूं, मुझे बोलने नहीं दिया जाता: राहुल गांधी

New Delhi, Mar 26 (ANI): Leader of Opposition in the Lok Sabha and Congress MP Rahul Gandhi speaks to the media at Parliament during the Budget session, in New Delhi on Wednesday. (ANI Photo/Rahul Singh)

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने स्पीकर पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं जब भी लोकसभा में अपनी बात रखने के लिए खड़ा होता हूं, तो मुझे बोलने नहीं दिया जाता। मैं नहीं जानता कि सदन किस प्रकार चल रहा है।

दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि सदन के आचरण और मर्यादा का पालन करें, कुछ घटनाएं सदन के लिहाज से ठीक नहीं थीं। जिसके बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, “एक कन्वेंशन है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाता है। मैं जब भी खड़ा होता हूं तो मुझे बोलने नहीं दिया जाता। मैं नहीं जानता कि सदन किस प्रकार चल रहा है। यहां हम जो कहना चाहते हैं, हमें कहने नहीं दिया जाता है। मैंने कुछ नहीं किया है, मैं बिल्कुल शांति से बैठा था। मैं एक शब्द नहीं बोला। पिछले 7-8 दिन से बोलने नहीं दिया गया।”

उन्होंने कहा, ”लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष की जगह होती है, लेकिन यहां विपक्ष की कोई जगह नहीं है। यहां केवल सरकार की जगह है। उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ मेले के बारे में बोला, जिसमें मैं अपनी बात जोड़ना चाहता था। मैं कहना चाहता था कि बहुत अच्छा है, महाकुंभ मेला हुआ। मैं बेरोजगारी के बारे में कुछ कहना चाहता था। लेकिन, मुझे नहीं बोलने दिया गया। पता नहीं स्पीकर की क्या सोच और अप्रोच है। सच्चाई ये है कि हमें बोलने नहीं दिया जा रहा है।” इससे पहले भी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के महाकुंभ पर दिए गए वक्तव्य पर कहा था कि मैं प्रधानमंत्री मोदी की बात का समर्थन करना चाहता था। कुंभ हमारी परंपरा है, संस्कृति है, इतिहास है। एक शिकायत थी कि प्रधानमंत्री ने, जिनकी मृत्यु हुई, उन्हें श्रद्धांजलि नहीं दी। जो युवा महाकुंभ में गए, उन्हें प्रधानमंत्री से रोजगार चाहिए और प्रधानमंत्री को उस पर भी बोलना चाहिए था। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नेता प्रतिपक्ष को तो बोलने का मौका दिया जाना चाहिए था। लेकिन, बोलने नहीं देते हैं, यह न्यू इंडिया है।