अंजलि भाटिया
नई दिल्ली , 13 जून
अहमदाबाद में हाल ही में हुए दर्दनाक विमान हादसे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए घटना की न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि हादसे में जिन लोगों की जान गई है, उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना है और कांग्रेस समेत सभी संगठनों के कार्यकर्ताओं को घायलों व पीड़ित परिवारों की साहसिक मदद के लिए आगे आना चाहिए।
खरगे ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह पीड़ितों को आर्थिक सहायता, बेहतर चिकित्सा सुविधा और अन्य जरूरी समर्थन तत्काल प्रदान करे। उन्होंने कहा कि सभी घायलों को प्राथमिकता के आधार पर इलाज मिलना चाहिए और हादसे की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
खरगे ने यह भी दावा किया कि पायलट पर निर्धारित समय से पहले उड़ान भरने का दबाव था, और यह तथ्य केवल निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा। उन्होंने कहा कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से करवाई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह हादसा कैसे हुआ और इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि शाह का यह बयान कि “दुर्घटनाओं को कोई नहीं रोक सकता”, न केवल गैरजिम्मेदाराना है बल्कि यह त्यागपत्र जैसा वक्तव्य है।
खेड़ा ने सवाल उठाया कि अगर सरकार हादसों को नहीं रोक सकती तो मंत्रालयों और नियामक संस्थाओं का औचित्य क्या है? उन्होंने कहा कि “विमान हादसे दैवीय आपदाएं नहीं हैं”, इसलिए उन्हें रोका जा सकता है। तभी तो हमारे पास नियामक तंत्र, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मौजूद हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “क्या यही कहना एक केंद्रीय गृह मंत्री को शोभा देता है? यह बेहद असंवेदनशील बयान है। गौरतलब है कि गुरुवार को अमित शाह ने बयान दिया था कि विमान में ईंधन के कारण तापमान इतना अधिक हो गया था कि किसी को बचा पाना संभव नहीं था।
कांग्रेस ने हादसे की गंभीरता और सरकार की जवाबदेही को रेखांकित करते हुए मांग की है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ठोस और पारदर्शी जांच हो तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
अहमदाबाद विमान हादसे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने निष्पक्ष जांच की मांग की
भारत मंगोलिया की रक्षा सहयोग पर द्विपक्षीय वार्ता सी टुकड़ी थी मौजूद
अंजलि भाटिया
नई दिल्ली , 13 जून- भारत और मंगोलिया के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और मंगोलिया के रक्षा मंत्रालय के राज्य सचिव ब्रिगेडियर जनरल गंखुयाग देवादोरज के बीच शुक्रवार को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई।बैठक में दोनों देशों ने विशेष रूप से नई और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। यह बातचीत भारत-मंगोलिया रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने और रक्षा क्षेत्र में विश्वास और सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उसी दिन भारत-मंगोलिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट 2025’ का समापन समारोह भी उलानबटार में संपन्न हुआ। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ मंगोलिया के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ ब्रिगेडियर जनरल बाटार बालजिद, भारत के मंगोलिया में राजदूत अतुल एम. गोत्सुरवे तथा लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह भी मौजूद थे।
रक्षा सचिव ने भारतीय और मंगोलियाई सैनिकों की पेशेवर दक्षता की प्रशंसा करते हुए इस सैन्य अभ्यास को बढ़ते द्विपक्षीय रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय शांति के प्रति साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
राजेश कुमार सिंह शनिवार को उलानबटार में आयोजित बहुराष्ट्रीय संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘खान क्वेस्ट 2025’ के उद्घाटन समारोह में भाग लेंगे। इस सैन्य अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी भी शामिल हो रही है। वहीं, मंगोलियाई व अमेरिकी सेना भी इस अभ्यास का हिस्सा हैं। इस अभ्यास में शामिल होने वाली भारतीय सेना की टुकड़ी में कुमाऊं रेजिमेंट के 40 जवानों के साथ-साथ अन्य अंगों और सेवाओं के जवान भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एक महिला अधिकारी और दो महिला सैनिक भी टुकड़ी का हिस्सा हैं। ‘खान क्वेस्ट 2025’ का आयोजन 14 जून से 28 जून तक चलेगा और इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सैन्य समन्वय और साझेदारी को बढ़ावा देना है।भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच आतंकवाद के खिलाफ किया जा रहा एक महत्वपूर्ण संयुक्त युद्धाभ्यास ‘नोमैडिक एलीफेंट 2025’ शुक्रवार को पूरा हो गया।
देशभर के सामरिक हाइवे, पुलों, सुरंगों डाटा बैंक तैयार होगा
अंजलि भाटिया
नई दिल्ली, 13 जून , भारत सरकार ने सीमा क्षेत्रों में स्थित सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत, सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों और सुरंगों की सूची तैयार करने और एक डाटा बैंक बनाने का काम शुरू कर दिया है, ताकि युद्ध जैसी स्थिति में इन बुनियादी ढांचों को सुरक्षित रखा जा सके। इसके अलावा, सरकार वैकल्पिक रास्तों और कनेक्टिविटी के खाके पर भी काम कर रही है।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने इस संबंध में शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसमें भारत की यूनियन वॉर बुक के तहत देशभर के प्रमुख, सीमावर्ती और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए। इस डाटा बैंक में न केवल मौजूदा बुनियादी ढांचे को शामिल किया जाएगा, बल्कि निर्माणाधीन राजमार्ग, पुल, सुरंग और भारी निर्माण उपकरण भी दर्ज किए जाएंगे। इस डाटा बैंक का एक प्रमुख लाभ यह होगा कि इसे ऑनलाइन निगरानी के माध्यम से ट्रैक किया जा सकेगा।
साथ ही, एनएचएआई, एनएचएआईडीसीएल और बीआरओ जैसे संस्थाओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि युद्ध की स्थिति में इन बुनियादी ढांचों के संचालन में कोई रुकावट न हो, इसके लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी के रोडमैप पर भी काम चल रहा है। इससे सेना को युद्ध की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग केवल 2% सड़कों का हिस्सा हैं, लेकिन इन पर करीब 40%सड़क यातायात चलता है। ये राजमार्ग सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करते हैं, जो सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये सड़कें सेना को त्वरित गति से सीमा तक पहुंचाने, हथियार और रसद पहुंचाने और सैनिकों को तैनात करने में मदद करती हैं। ये सेना को नदियों, पहाड़ों और अन्य दुर्गम इलाकों को आसानी से पार करने में सक्षम बनाते हैं।
भारत की यूनियन वॉर बुक एक गोपनीय दस्तावेज है, जो युद्ध की स्थिति में विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को परिभाषित करता है। इसमें विशेष रूप से सामरिक महत्व के राष्ट्रीय राजमार्गों, पुलों और सुरंगों की निगरानी और रखरखाव को प्राथमिकता दी जाती है, जो देश की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।यह बुनियादी ढांचा न केवल युद्ध जैसी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है, बल्कि भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भी एक अहम स्तंभ है।
भीषण गर्मी और हीट वेव का कहर, ऑरेंज अलर्ट जारी, अस्पतालों में बढ़े डिहाइड्रेशन के मामले
नई दिल्ली: उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी ने आम जनजीवन को बेहाल कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की वेबसाइट पर जारी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 11 जून और 12 जून को दिल्ली-एनसीआर में तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है।
इसी के साथ मौसम विभाग ने इन दोनों दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इस दौरान दिन में तेज सतही हवाएं, धूल भरी आंधी और हीट वेव जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ेगा। 13 जून को तापमान थोड़ा गिरकर 43 डिग्री तक रहने का अनुमान है, लेकिन मौसम विभाग ने फिर भी येलो अलर्ट जारी किया है।
इस दिन गर्मी के साथ नमी, तेज हवाएं, और गर्जन के साथ बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे उमस, बेचैनी और अधिक बढ़ सकती है। 14 जून से राहत की उम्मीद है। हालांकि, बिजली-गिरने और आंधी का खतरा भी बताया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 14 जून से मौसम में बदलाव देखने के लिए मिल सकता है। इस दिन गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है और तापमान 40 डिग्री तक गिर सकता है। हालांकि, इस दिन के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने, बिजली गिरने और गर्जन की आशंका बनी हुई है। 15 और 16 जून को भी गरज के साथ बारिश या रुक-रुक कर बारिश के आसार हैं। इन दिनों के लिए कोई चेतावनी नहीं दी गई है।
मौजूदा गर्मी की स्थिति के बीच दिल्ली और एनसीआर के अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और चक्कर आने की शिकायतों वाले मरीजों की संख्या में 90 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है। खासकर बच्चे और युवा बड़ी संख्या में अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। डॉक्टरों ने लोगों को दिन में बाहर निकलने से बचने, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन बढ़ाने और धूप में सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी है। भीषण गर्मी के इस दौर में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें, हल्के सूती कपड़े पहनें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को ध्यान में रखते हुए आम जन को सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
जाति जनगणना : कहना आसान है, करना मुश्किल
मोदी सरकार ने भले ही जाति जनगणना की घोषणा कर दी हो, लेकिन इस पहल के सामने कई जटिल चुनौतियां हैं। इनमें सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जाति गणना को शामिल करने के लिए मौजूदा जनगणना अधिनियम और संबंधित नियमों में संशोधन की आवश्यकता है या नहीं। सरकार के पास इन बदलावों को लाने के लिए लगभग 10 महीने हैं। एक बुनियादी बाधा जाति, वंश, गोत्र और उपनाम के बीच अंतर करने में कठिनाई है – खासकर तब जब उत्तरदाता अक्सर असंगत या अस्पष्ट उत्तर देते हैं। आधिकारिक दशकीय जनगणना से अलग 2011 में आयोजित सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के दौरान ये जटिलताएं सामने आईं। इसमें जाति संबंधी 46 लाख से अधिक प्रविष्टियां दर्ज की गईं, जिनमें से कई को उपनाम, उप-जाति, समानार्थी शब्द और कबीले के नाम शामिल होने के कारण अविश्वसनीय माना गया – जिससे सटीक निष्कर्ष निकालना लगभग असंभव हो गया। अराजकता को दूर करने के लिए, मोदी सरकार ने तत्कालीन नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया को एसईसीसी के डेटा को सुव्यवस्थित और मान्य करने के लिए एक पैनल का नेतृत्व करने का काम सौंपा, हालांकि समिति की रिपोर्ट अभी भी अप्रकाशित है।
एक मुख्य चिंता यह है कि क्या मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध जैसे गैर-हिंदू समुदायों के लिए जाति डेटा शामिल किया जाए, जिनमें आंतरिक पदानुक्रम और सामाजिक श्रेणियां भी हैं। इस बात पर बहस चल रही है कि धार्मिक संप्रदायों को शामिल किया जाए या नहीं, एससी और एसटी के साथ ओबीसी के लिए एक अलग कॉलम जोड़ा जाए और जाति समूहों को और उप-वर्गीकृत किया जाए या नहीं। ओबीसी में पसमांदा मुसलमानों को भी शामिल करने की मांग की जा रही है। इन मुद्दों से यह चिंता पैदा
वृंदावन में प्रकृति का विनाश और आस्था का व्यावसायीकरण
गायब हुआ लोटा, ब्रज रज का टोटा
बृज खंडेलवाल द्वारा
वृंदावन—जिसका नाम सुनते ही मन में कृष्ण की बाँसुरी की मधुर तान, यमुना के नीले जल पर उठती लहरें और हरियाली से घिरे कुंज गलियारों की छवि उभरती थी—आज एक मायावी योजना का शिकार हो रहा है।
यह वही वृंदावन है, जहाँ मीरा ने प्रेम की अमर पंक्तियाँ गाई थीं, जहाँ चैतन्य महाप्रभु ने भक्ति की धारा बहाई थी, और जहाँ सदियों से संतों ने तपस्या की थी। लेकिन आज यह पवित्र भूमि एक क्रूर मशीनरी का हिस्सा बन चुकी है—एक ऐसी मशीनरी जो “विकास” के नाम पर आस्था को कुचल रही है, प्रकृति को निगल रही है और भक्ति को एक कॉर्पोरेट उत्पाद में बदल रही है।
वृंदावन का स्याह परिवर्तन: जब पवित्रता मुनाफे की भेंट चढ़ी
कभी वृंदावन की पहचान उसके पवित्र कुंडों, घने कदंब के वृक्षों और यमुना के किनारे फैले विशाल मैदानों से थी। आज? यह एक बदसूरत शहरी जंगल में तब्दील हो रहा है, जहाँ कंक्रीट के जंगल ने प्राकृतिक सौंदर्य को निगल लिया है। पिछले दो दशकों में वृंदावन का 60% हरित क्षेत्र नष्ट हो चुका है। बृज के 1,000 से अधिक पवित्र कुंडों में से 70 को अवैध कब्जों ने लील लिया है, बाकी को कचरे और गंदगी से पाट दिया गया है। यमुना, जो कभी निर्मल धारा थी, आज एक विषैले नाले में तब्दील हो चुकी है, जिसके किनारे अब होटल और बहुमंजिला अपार्टमेंट खड़े हैं।
वृंदावन की कुंज गलियाँ, जो कभी भक्तों के लिए श्रद्धा और शांति का प्रतीक थीं, अब चौड़ी सड़कों में बदल चुकी हैं। इन सड़कों के किनारे मंदिर, देवालय नहीं, अब श्री कृष्ण स्टोर्स, राधा-कृष्ण फास्ट फूड और भगवान गिफ्ट शॉप्स की भरमार है। यहाँ अब भक्ति नहीं, बल्कि भक्तों की जेबें काटने की होड़ मची है।
वृंदावन कॉरिडोर:
जिस तरह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने वाराणसी के पुरातन स्वरूप को बदल दिया, उसी तर्ज पर वृंदावन कॉरिडोर बनाया जा रहा है। इसके नाम पर सैकड़ों साल पुराने मंदिर, हवेलियाँ और ऐतिहासिक इमारतें ध्वस्त की जा सकती हैं। सरकार का दावा है कि यह “भक्तों की सुविधा” के लिए किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोगों को यह एक व्यावसायिक साजिश दिख रही है।
लास्ट ईयर, स्थानीय पुजारियों और संतों ने इसका विरोध किया था। वर्षों से वृंदावन में रह रहे एक आचार्य ने कहा—”इस कॉरिडोर में भक्ति नहीं, टिकट और सामान बिकेंगे।”
लेकिन सरकार और उसके साथ खड़े बाबाओं को इसकी परवाह नहीं। उनके लिए वृंदावन एक “ब्रांड” है, जिसे बेचकर करोड़ों कमाए जा सकते हैं। इस वक्त तीन ग्रुप्स में विभाजित है विरोध का आंदोलन। कुछ दिनों में कॉरिडोर के पक्ष हो जाएगा माहौल। प्रश्न सिर्फ कॉरिडोर का नहीं, समूचे ब्रज चौरासी कोस में विकास की दिशा का है।
धर्म का नया बाजार: बाबाओं और बिल्डरों का गठजोड़
वृंदावन के पतन का रास्ता उसके “आध्यात्मिक व्यापारीकरण” में देखा जा सकता है। आज यहाँ नए-नए “गुरु” उभर रहे हैं, जो “एक्सप्रेस मोक्ष” का वादा करते हैं। रियल एस्टेट कारोबारियों ने वृंदावन की जमीनों को हड़पने के तमाम उपक्रम चला रखे हैं। 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पाँच सालों में वृंदावन की 40% जमीन अवैध तरीके से बेची गई। इनमें से अधिकांश सौदे बड़े धार्मिक ट्रस्टों और नेताओं के बीच हुए।
इन्होंने पेड़ काटे, तालाब पाटे और उनकी जगह लग्जरी आश्रम, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और पार्किंग लॉट बना दिए। आज वृंदावन में “प्रेम की नगरी” नहीं, “पैसे की नगरी” बस चुकी है।
सुविधा बनाम संस्कृति
कुछ लोग कहते हैं कि यह आधुनिकीकरण अच्छा है, क्योंकि इससे मंदिर सबके लिए खुल गए हैं। सच है, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव खत्म हुआ है। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि हम अपनी विरासत को ही मिटा दें?
स्थानीय वासियों को डर है कि वृंदावन कॉरिडोर, अपनी एयर-कंडीशंड सुविधाओं के साथ, तीर्थ को एक “मॉल” में बदल देगा। भक्त अब यहाँ श्रद्धा से नहीं, सेल्फी लेने आएँगे। क्या यही चाहते थे हमारे ऋषि-मुनि?
क्या बचेगा वृंदावन में?
आने वाले समय में वृंदावन एक विशाल कंक्रीट का जंगल बनकर रह जाएगा। यहाँ की मिट्टी की खुशबू, पक्षियों की चहचहाट और कुंज गलियों की शांति—सब खत्म हो जाएँगे। बचेगा तो सिर्फ एक खोखला ढाँचा, जहाँ भक्ति के नाम पर पैसा बटोरा जाएगा।
यदि यही “विकास” है, तो यह विनाश से कम नहीं। ब्रज वृंदावन की आत्मा को बचाने का समय अब निकला जा रहा है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी एक संदिग्ध ई मेल के जरिए मद्रास टाइगर्स फॉर अजमल कसाब संगठन की ओर से भेजी गई थी। इसके बाद हड़कंप मच गया और पुलिस प्रशासन ने हाईकोर्ट परिसर को खाली कराकर तत्काल तलाशी ली। इस दौरान महाधिवक्ता बिल्डिंग, वकीलों के चेंबर और परिसर से लेकर पूरी हाईकोर्ट बिल्डिंग और गार्डनों के चप्पे चप्पे की तलाशी ली गई। जजों के चेंबर और कोर्ट की भी छानबीन की गई। हालांकि हाईकोर्ट परिसर में तलाशी के दौरान कुछ नहीं मिला है। चकरभाठा पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
समर वेकेशन के बाद 9 जून सोमवार से हाईकोर्ट में नियमित कामकाज शुरू हुआ। इस दौरान कोर्ट परिसर में जजों के साथ ही वकील और पक्षकार भी मौजूद थे, तभी दोपहर में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की वेबसाइट पर ईमेल के जरिए धमकी भरा मैसेज आया। मेल में हाईकोर्ट में बम लगाने और परिसर को उड़ाने देने की बात लिखी थी। मैसेज देखकर हाईकोर्ट के प्रोटोकाल अफसर भी सकते में आ गए। इसकी जानकारी तत्काल पुलिस अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद पुलिस भी अलर्ट मोड पर आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की टीम फौरन डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
धमकी देने वाले ने ईमेल आईडी abdia@outlook.com का इस्तेमाल किया। मेल में साफ तौर पर आईईडी लगाने और किसी भी क्षण विस्फोट की बात कही गई थी। मेल में कई संवेदनशील मुद्दों का जिक्र था, जिसमें अजमल कसाब की फांसी और कुछ व्यक्तियों की हिरासत शामिल थी। इसमें “पवित्र मिशन” को अंजाम देने की धमकी दी गई थी, जिसमें कोर्ट परिसर में कथित तौर पर “अमोनियम सल्फर-आधारित आईईडी” लगाए गए होने का दावा किया गया।
तुरंत बाद पहुंची पुलिस ने बिना समय गंवाए पूरे परिसर को खाली कराया। जज, वकील, स्टाफ और पक्षकारों को बाहर निकाला गया और पूरे क्षेत्र को सील कर दिया गया। पुलिस के मुताबिक पूरे हाईकोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्रों की गंभीरता और बारीकी से चेकिंग की गई, लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला। पुलिस के अनुसार एफआईआर दर्ज मामले में साइबर सेल और खुफियां एजेंसियां ईमेल भेजने वाले की लोकेशन और पहचान का पता लगाने में जुटी है। ज्ञात हो कि वहीं 2 महीने पहले कवर्धा कलेक्टर कार्यालय को आरडीएक्स से उड़ाने की धमकी मिली थी। कलेक्टर कवर्धा के ऑफिशियल मेल आईडी पर कश्मीर से मेल आया था। वहीं 8 महीने पहले बिलासपुर से दिल्ली जा रही फ्लाइट को बम से उड़ाने की भी धमकी मिल चुकी है।
नए साल में पटरियों पर होगी नई डिजाइन की नॉन एसी लोकल ट्रेन
अंजलि भाटिया
नई दिल्ली : मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेनों में सफर अब पहले से ज्यादा सुरक्षित होने जा रहा है। हाल ही में लोकल ट्रेन से गिरने की घटनाओं में चार यात्रियों की मौत के बाद रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। नॉन-एसी लोकल ट्रेनों को अब नई तकनीक और डिजाइन के साथ तैयार किया जाएगा। पहली ट्रेन जनवरी 2026 में मुंबई की पटरियों पर दौड़ने लगेगी।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुंबई उपनगरीय रेल सेवा पर अत्याधिक दबाव के चलते हर रोज एक दर्जन से अधिक यात्रियों की मौत हो जाती है। इसके समाधान के लिए पूर्व में नॉन एसी ट्रेनों में ऑटोमैटिक दरवाजे लगाने का प्रावधान किया गया था। लेकिन इसका ट्रॉयल सफल नहीं रहा। रेल यात्रियों में वेंटिलेशन की कमी और घुटन होने की शिकायत की। कई यात्री बेहोशी होने की स्थिति में पहुंच गए। मुंबई की घटना के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) चैन्नई के इंजीनियरों व शीर्ष अधिकारियों से बैठकर इसका समधान ढूढ निकाल है।
अधिकारी ने बताया कि उपनगरीय रेल सेवा के लिए अब नई तकनीक की नॉन एसी ट्रेनें बनाई जाएंगी। उनमें वेंटिलेशन की इस समस्या को तीन बड़े डिज़ाइन बदलावों से हल किया जाएगा। पहला दरवाज़ों में लूवर (छिद्रयुक्त झरोखे) लगाए जाएंगे ताकि हवा आसानी से आर-पार होगी। दूसरा कोच की छत पर वेंटिलेशन यूनिट्स लगाई जाएंगी जो कोच में ताज़ी हवा पहुंचाएंगी।
तीसरा कोचों के बीच वेस्टिब्यूल होंगे जिससे यात्री एक डिब्बे से दूसरे में जा सकें और भीड़ अपने आप संतुलित हो सके। इससे रेल यात्री कोच के पायदान पर लटकर सफर नहीं करेंगे। अधिकारी का दावा है कि पहली नई डिजाइन की कोच जनवरी 2026 में पटरी पर दौड़ने लगेगी। इसके सफल ट्रॉयल के पश्चात नई डिजाइन लोकल ट्रेनों का उत्पादन शुरू हो जाएगा। इसके अलावा मुंबई में वर्तमान मे दौड़ रही नॉन एसी 3202 लोकल ट्रेनों में नई डिजाइन में परिवर्तित करने की योजना है।
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है नॉन-एसी लोकल ट्रेनों में ऑटोमैटिक दरवाजे लगाने से ट्रेनों की गति पर असर पड़ेगा। वर्तमान में लोकल ट्रेनें स्टेशन पर सिर्फ 15–20 सेकंड रुकती हैं, इतने में यात्री चढ़-उतर जाते हैं। लेकिन ऑटोमैटिक दरवाजों को बंद होने में 50–60 सेकंड तक लगते हैं। अगर किसी एक कोच का दरवाजा नहीं बंद हुआ, तो पूरी ट्रेन नहीं चल पाएगी।सभी स्टेशनों पर इतना समय लगाने पर पीछे की ट्रेनें प्रभावित होंगी और पूरा संचालन धीमा पड़ सकता है। साथ ही, ऑटोमैटिक दरवाजों के कारण एक कोच में यात्री क्षमता भी कम हो जाएगी।
भीषण गर्मी से निजात: वाइल्डलाइफ एसओएस ने हाथी और भालुओं को ठंडा रखने के लिए किये विशेष इंतज़ाम
जैसे-जैसे पूरे उत्तर भारत में तापमान बढ़ रहा है, वाइल्डलाइफ एसओएस ने अपने आगरा और मथुरा केंद्रों में बचाए गए भालू और हाथियों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करने के लिए अपने विशेष प्रबंधन प्रोटोकॉल को फिर से सक्रिय कर दिया है। इन विशेष प्रबंधन के तहत जानवरों को हाइड्रेट रखना एवं उन्हें गर्मी में भी ठंडा रखने के उपाय शामिल हैं।
आगरा भालू संरक्षण केंद्र में भालुओं को दिए जाने वाले तरबूज और खीरे जैसे हाइड्रेटिंग मौसमी फलों की मात्रा में वृद्धि हुई है। आइस पॉप्सिकल्स और जमे हुए फलों के ब्लॉक जैसे शीतलता बढ़ाने वाले पदार्थ भालुओं को दिए जा रहे हैं, जो पोषण प्रदान करने और उन्हें ठंडा रखने में मदद करते हैं। बाड़ों में कूलर और ओवरहेड स्प्रिंकलर लगे हैं, जबकि पानी के पूल गर्मी के दिनों में बहुत जरूरी राहत प्रदान करते हैं। गर्मी से तनाव के लक्षण दिखाने वाले भालुओं में निर्जलीकरण को रोकने के लिए ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) भी दिया जा रहा है।

इस बीच, मथुरा में हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र और हाथी अस्पताल परिसर में, नए अनुकूलन में दिन के ठंडे समय में हाथी सैर पर जाते हैं – सुबह जल्दी और देर शाम – जिससे हाथी दोपहर की गर्मी से बच सकें। स्प्रिंकलर, नियमित पूल रखरखाव और अतिरिक्त ओआरएस सेवन हाथियों को हाइड्रेटेड और आरामदायक बनाए रख रहे हैं। दिन में कई बार साफ पीने का पानी बदला जाता हैं, जबकि छायादार संरचनाएं और मिट्टी के गड्ढे शरीर के तापमान को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “भारत में गर्मियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और हमारी देखभाल में रहने वाले जानवर भी इंसानों की तरह ही इसका सामना कर रहे हैं। हमारी टीमें हर साल इन चुनौतियों का अनुमान लगाती हैं और सुनिश्चित करती हैं कि हमारी देखरेख में रह रहे हर भालू और हाथी के पास वह सब कुछ हो जो उन्हें स्वस्थ, हाइड्रेटेड और खुश रहने के लिए चाहिए।”
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा, “हमारे ग्रीष्मकालीन प्रोटोकॉल शारीरिक राहत से कहीं आगे जाते हैं; वे जानवरों की भावनात्मक और व्यवहारिक भलाई का भी समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। चाहे वह जमे हुए भोजन का आनंद ले रहा भालू हो या आरामदायक स्नान का आनंद ले रहा हाथी, हर उपाय वर्षों की विशेष देखभाल को दर्शाता है।”
वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक डॉ. इलियाराजा ने कहा, “ओआरएस अनुपूरण, अनुकूलित आहार और आवास शीतलन कुछ पशु चिकित्सा-नेतृत्व वाले हस्तक्षेप हैं जिन्हें हमने शुरू किया है। निरंतर निरीक्षण हमें गर्मी के तनाव या थकान के किसी भी शुरुआती संकेत पर तुरंत प्रतिक्रिया करने की अनुमति देता है।”
बेंगलुरु भगदड़ मामला में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिल करने का दिया आदेश
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार (10 जून) को राज्य को बेंगलुरु भगदड़ मामले में सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब पेश करने की अनुमति दे दी। इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी। कोर्ट ने इस हादसे का स्वतः संज्ञान लिया था।
बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में चार जून को रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु (आरसीबी) की जीत का जश्न मनाने आए फैंस के बीच भगदड़ मची थी, जिसमें 11 लोगों की मौत हुई। इस मामले पर अगले दिन हाई कोर्ट स्वत: संज्ञान लिया था। अदालत इस हादसे के पीछे की वजह का पता लगाना चाहती है। अदालत जानना चाहती है कि क्या इस हादसे को रोका जा सकता था और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए।
मंगलवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता शशि किरण शेट्टी ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की खंडपीठ के समक्ष बताया कि उन्होंने जवाब दाखिल नहीं किया है।
शशि किरण शेट्टी ने कहा, “न्यायिक आयोग का गठन किया गया है और रिपोर्ट देने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। लंबित जमानत याचिकाओं में, जो कुछ भी यहां कहा जाता है, उसका इस्तेमाल वहां आरोपी कर रहे हैं।”
हाई कोर्ट ने पूछा, “क्या आप यह कह रहे हैं कि आप हमारे निर्देशों का जवाब नहीं देंगे?” इस पर महाधिवक्ता ने कहा, “कृपया इसे कल रखें, हम जवाब दाखिल करेंगे। कुछ चीजें हैं”।
हाई कोर्ट ने जवाब दाखिल करने में कठिनाई की वजह पूछी, जिस पर महाधिवक्ता ने कहा, “मैं खुली अदालत में नहीं रखना चाहता, हम पूर्वाग्रह से ग्रसित हो जाएंगे। स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट आने दें और ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम पक्षपाती हैं। यह केवल एक महीने का मामला है।”
हाई कोर्ट ने एडवोकेट जनरल को आदेश दिया कि वह अपना जवाब सीलबंद लिफाफे में दाखिल करें। एडवोकेट जनरल शशि किरण शेट्टी ने कोर्ट से स्वतंत्र जांच की रिपोर्ट आने तक इंतजार करने की अपील की है।
कोर्ट ने आदेश में कहा, “हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल (आरजी) ने 5 जून के हमारे पिछले आदेश के अनुसार रिट याचिका (डब्ल्यूपी) दाखिल किया है। शशि किरण शेट्टी ने बताया कि एडवोकेट जनरल ने कहा है कि वह सीलबंद लिफाफे में जवाब दाखिल करना चाहते हैं, उन्हें गुरुवार तक या उससे पहले ऐसा करने की अनुमति है। आरजी यह सुनिश्चित करेंगे कि जवाब सुरक्षित रखा जाए।” इस मामले में अगली सुनवाई 12 जून को होगी।










