Home Blog Page 5

BJP में 35 साल की सेवा बेकार? टिकट न मिलने पर जयंत दास की बगावत

Jayanta Das quit BJP.
Jayanta Das quit BJP.

नई दिल्ली: Assam की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता Jayant Kumar Das ने पार्टी से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। करीब 35 साल तक पार्टी के लिए काम करने के बाद भी जब उन्हें दिसपुर सीट से टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला कर लिया।

जयंत दास संगठन के मजबूत और जमीनी नेता माने जाते रहे हैं। वे असम बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी को मजबूत करने में उनका अहम योगदान रहा है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में उनका नाम नहीं आने से वे नाराज हो गए और उन्होंने बगावती रुख अपना लिया।

दास ने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी अब अपने पुराने सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे Atal Bihari Vajpayee और Lal Krishna Advani की विचारधारा से प्रेरित होकर पार्टी में आए थे, लेकिन अब वही सोच नजर नहीं आती।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इतने सालों की सेवा के बावजूद उनकी बात शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाई। उनका कहना है कि अगर Narendra Modi को इस बारे में जानकारी होती, तो वे जरूर दुखी होते। साथ ही, उन्होंने असम बीजेपी में तानाशाही जैसे हालात होने का भी आरोप लगाया।

जयंत दास के इस फैसले से दिसपुर सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब यहां बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिल सकती है। उनके समर्थकों का कहना है कि इलाके में पानी की समस्या, बाढ़ और खराब प्रशासन जैसे मुद्दों को लेकर जनता में नाराजगी है, जिसका फायदा दास को मिल सकता है।

वहीं बीजेपी ने इस बगावत को ज्यादा महत्व नहीं दिया है। पार्टी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं होता और उनके उम्मीदवार ही जीत दर्ज करेंगे।

असम में इस बार चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। अब देखना होगा कि जयंत दास की बगावत चुनावी नतीजों पर कितना असर डालती है।

Hormuz में ईरानी नेवी चीफ अलीरेजा तंगसीरी की मौत, मरने से पहले दी थी अमेरिका को चेतावनी

Irani Navy Chief Killed at Hormuz.
Irani Navy Chief Killed at Hormuz.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Iran को बड़ा झटका लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए एक हमले में ईरानी नौसेना के प्रमुख Alireza Tangsiri की मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा था, जिसमें रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। खास तौर पर बंदर अब्बास के आसपास का इलाका, जो ईरान के लिए बेहद अहम माना जाता है, इस कार्रवाई के केंद्र में रहा। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां होने वाली हर गतिविधि का असर वैश्विक स्तर पर पड़ता है।

हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह हमला किसने किया। कुछ रिपोर्ट्स में इसे अमेरिका की कार्रवाई बताया जा रहा है, तो कुछ में इजरायल की भूमिका की आशंका जताई गई है। लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

अलीरेजा तंगसीरी ईरान की सैन्य रणनीति के अहम चेहरों में से एक थे। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के प्रमुख थे और खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी पहचान एक ऐसे कमांडर के तौर पर थी, जो असमान युद्ध यानी छोटे और तेज हथियारों के जरिए बड़े दुश्मनों को चुनौती देने की रणनीति पर काम करते थे।

दिलचस्प बात यह है कि अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही उन्होंने United States को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं, तो उनके ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। उनकी इस चेतावनी के बाद से ही क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।

केसी वेणुगोपाल का ‘इमोशनल दांव’ सफल, संजय खान अब नहीं लड़ेंगे कांग्रेस के खिलाफ चुनाव

केसी वेणुगोपाल Photo Credit : PTI
केसी वेणुगोपाल Photo Credit : PTI

नई दिल्ली: Kerala की राजनीति में इन दिनों संजय खान का नाम चर्चा में बना हुआ है। पुनालूर सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे Sanjay Khan ने आखिरी वक्त पर नामांकन दाखिल न करने का फैसला लिया है। इस फैसले के पीछे कोई दबाव नहीं, बल्कि एक भावुक मुलाकात बताई जा रही है।

संजय खान कांग्रेस के जमीनी और सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। वे जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) के सचिव हैं और पनलूर इलाके में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी साफ-सुथरी छवि और मेहनत ने उन्हें मजबूत दावेदार बना दिया था।

दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने पुनालूर सीट अपने सहयोगी दल को दे दी। इस फैसले से नाराज होकर संजय खान ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उनका मानना था कि वे इस सीट के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार हैं और उन्हें मौका मिलना चाहिए था।

मामला बढ़ता देख कांग्रेस के वरिष्ठ नेता K. C. Venugopal खुद सामने आए। उन्होंने संजय खान से मुलाकात की और उन्हें शांत करने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि इस दौरान वे काफी भावुक हो गए। उन्होंने संजय के कंधे पर हाथ रखा, उन्हें गले लगाया और समझाया कि पार्टी उनके योगदान को समझती है।

इस मुलाकात का असर भी तुरंत देखने को मिला। बातचीत के दौरान संजय खान भावुक हो गए और उन्होंने अपना नामांकन न भरने का फैसला कर लिया। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि वे पार्टी के साथ बने रहेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, केसी वेणुगोपाल ने उन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी देने का आश्वासन भी दिया है। पार्टी के अंदर इस फैसले को राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इससे संभावित बगावत टल गई है।

सीजफायर या नई चाल? ट्रंप के प्लान ने मिडिल ईस्ट में मचाई हलचल, इजरायल टेंशन में

सीजफायर या ट्रंप की नई चाल?
सीजफायर या ट्रंप की नई चाल?

नई दिल्ली: United States और Iran के बीच चल रहे टकराव के बीच अब सीजफायर को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump 28 मार्च को युद्धविराम का ऐलान कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस खबर ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है।

इस संभावित फैसले से सबसे ज्यादा चिंता Israel को हो रही है। इजरायल को डर है कि अगर अमेरिका अचानक सीजफायर का ऐलान करता है, तो इससे उसकी सैन्य रणनीति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल मानता है कि अभी जंग अपने अहम मोड़ पर है और यही समय है जब वह अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

इसी वजह से इजरायल ने अपने सैन्य अभियान और तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने उच्चस्तरीय बैठक कर सेना को निर्देश दिए हैं कि संभावित सीजफायर से पहले ईरान के सैन्य ढांचे को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाए। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे साफ है कि इजरायल किसी भी हाल में अपनी बढ़त बनाए रखना चाहता है।

वहीं दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को फिलहाल खारिज कर दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी वक्त स्थिति बदल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत का रास्ता खुलता है, तो यह क्षेत्र के लिए राहत की खबर हो सकती है।

मिडिल ईस्ट में इस वक्त स्थिति काफी नाजुक बनी हुई है। एक तरफ सीजफायर की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ जंग और तेज होती नजर आ रही है। अब सबकी नजर 28 मार्च पर टिकी है कि क्या वाकई कोई बड़ा ऐलान होता है या फिर तनाव और बढ़ता है।

नंदीग्राम के बाद भवानीपुर, शुभेंदु अधिकारी का ममता को खुला चैलेंज, 177 सीटों का दावा

शुभेंदु अधिकारी का ममता को खुला चैलेंज। File | Photo Credit: PTI
शुभेंदु अधिकारी का ममता को खुला चैलेंज। File | Photo Credit: PTI

नई दिल्ली: West Bengal में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे नेताओं के तेवर भी तीखे होते जा रहे हैं। बीजेपी के नेता Shubhendu Adhikari ने एक जनसभा के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस बार उनकी पार्टी 177 से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।

रामनगर में आयोजित सभा में शुभेंदु अधिकारी पूरे आत्मविश्वास में नजर आए। उन्होंने कहा कि पहले उन्होंने नंदीग्राम में Mamata Banerjee को हराया था और अब उनकी नजर भवानीपुर सीट पर है। उन्होंने खुलकर कहा, “लिखकर रख लो, इस बार भवानीपुर में भी हराऊंगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

सभा में उन्होंने ममता सरकार पर भी जमकर हमला बोला और कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है। उनके मुताबिक, बीजेपी को इस बार मजबूत जनसमर्थन मिल रहा है और पार्टी बड़ी जीत की ओर बढ़ रही है।

हालांकि, दूसरी तरफ ओपिनियन पोल कुछ अलग तस्वीर दिखा रहे हैं। हालिया सर्वे के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर बढ़त में नजर आ रही है और उसे बहुमत से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं बीजेपी को भी अच्छी संख्या में सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जिससे मुकाबला दिलचस्प बनता दिख रहा है।

ममता बनर्जी अब भी राज्य की राजनीति में बड़ा चेहरा बनी हुई हैं। कई लोगों ने उन्हें पसंदीदा मुख्यमंत्री बताया है, जिससे साफ है कि चुनावी मैदान में मुकाबला आसान नहीं होने वाला।

बंगाल की राजनीति इस वक्त पूरी तरह गर्म है। एक तरफ बड़े-बड़े दावे और चैलेंज दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ आंकड़े अलग कहानी बता रहे हैं। अब असली तस्वीर चुनाव नतीजों के बाद ही साफ होगी, लेकिन फिलहाल सियासी पारा हाई बना हुआ है।

राज्यसभा में गरमाई बहस, संजय सिंह का BJP पर तीखा हमला, ट्रांसजेंडर बिल पर घमासान

राज्यसभा में AAP सांसद संजय सिंह का BJP पर तीखा हमला।
राज्यसभा में AAP सांसद संजय सिंह का BJP पर तीखा हमला।

नई दिल्ली: राज्यसभा में ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े बिल पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी के नेता Sanjay Singh ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस बिल को किन्नर समाज के साथ “विश्वासघात” बताते हुए कहा कि इसे बिना पूरी समीक्षा के पास नहीं किया जाना चाहिए।

संजय सिंह ने मांग की कि इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए ताकि इसमें सभी पक्षों की राय ली जा सके। उनका कहना था कि जिस समुदाय के लिए कानून बनाया जा रहा है, उसकी आवाज और विशेषज्ञों की सलाह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बहस के दौरान संजय सिंह ने सत्तापक्ष के कुछ बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि किन्नर समाज के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो बिल्कुल गलत है। इसी दौरान उन्होंने बीजेपी नेताओं के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और तीखी टिप्पणी की, जिससे सदन का माहौल और गर्म हो गया। चेयर पर मौजूद Dinesh Sharma ने उन्हें बीच में टोकते हुए अपनी बात सीमित रखने को कहा।

संजय सिंह ने अपने भाषण में धार्मिक संदर्भ भी दिया। उन्होंने Lord Rama का उदाहरण देते हुए कहा कि किन्नर समाज को प्राचीन समय से सम्मान मिला है, लेकिन आज सरकार उनकी भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया तो देशभर में विरोध हो सकता है।

इसके अलावा, उन्होंने सरकार पर बजट को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप था कि किन्नर समाज के कल्याण के लिए आवंटित धन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने आंकड़ों के जरिए बताया कि करोड़ों रुपये का बजट होने के बावजूद खर्च बहुत कम हुआ है।

राज्यसभा में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। एक तरफ सरकार बिल को जरूरी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अधूरा और समुदाय के हितों के खिलाफ बता रहा है।

अमित शाह की डेडलाइन का असर, टॉप नक्सलियों ने डाले हथियार, ‘लाल गलियारे’ में हलचल

टॉप नक्‍सली कोसा सोडी-पापा राव ने किया सरेंडर।
टॉप नक्‍सली कोसा सोडी-पापा राव ने किया सरेंडर।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की 31 मार्च तक नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन से पहले ही सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सक्रिय दो बड़े नक्सली नेता—कोसा सोडी उर्फ सुकरू और पापा राव ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन दोनों पर कुल मिलाकर करीब 80 लाख रुपये का इनाम था और इन्हें संगठन के मजबूत स्तंभ माना जाता था।

इनका सरेंडर सिर्फ दो लोगों का आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि नक्सली नेटवर्क की बड़ी कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है। पापा राव लंबे समय से सक्रिय थे और कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहे थे। वहीं, कोसा सोडी भी माओवादी संगठन के अहम पद पर था। ऐसे में इन दोनों का हथियार डालना संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सुरक्षा बलों की बदली हुई रणनीति का बड़ा हाथ है। अब ऑपरेशन में ड्रोन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाना आसान हो गया है। इसके साथ ही जंगलों में घेराबंदी इतनी सख्त हो गई है कि उन्हें खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों की भी कमी होने लगी थी।

सूत्रों के मुताबिक, लगातार बढ़ते दबाव और मौत के डर ने इन नेताओं को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया। इतना ही नहीं, संगठन के अंदर भी अब दरारें दिखने लगी हैं। आपसी अविश्वास और विवाद के कारण कई कैडर खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

इस दौरान कई अन्य नक्सलियों ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने उनके लिए जंगलों में टिके रहना मुश्किल कर दिया है।

कर्ज में डूबा हिमाचल, सुक्खू सरकार फिर लेने जा रही हजारों करोड़ का लोन

सुक्खू सरकार फिर लेने जा रही हजारों करोड़ का लोन
सुक्खू सरकार फिर लेने जा रही हजारों करोड़ का लोन

नई दिल्ली: Himachal Pradesh में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है। Sukhvinder Singh Sukhu की सरकार ने पिछले तीन साल में रिकॉर्ड तोड़ 41,173 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। हालांकि, इस दौरान सरकार ने 32,004 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया भी है, लेकिन कुल कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता ही जा रहा है।

अब सरकार ने 2026-27 के बजट में फिर से 11,965 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का प्रस्ताव रखा है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में भी प्रदेश की आर्थिक स्थिति आसान नहीं रहने वाली है। आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में कुल कर्ज 1,03,994 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो अगले साल बढ़कर 1,12,319 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

राज्य की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि कमाई के स्रोत सीमित हैं, जबकि खर्च तेजी से बढ़ रहा है। वेतन, पेंशन, ब्याज और पुराने कर्ज चुकाने में ही सरकार का करीब 80 फीसदी बजट खर्च हो रहा है। ऐसे में विकास कार्यों और नई योजनाओं के लिए बहुत कम पैसा बच पा रहा है।

ब्याज का बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। 2024-25 में जहां 6,260 करोड़ रुपये ब्याज में गए, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 7,271 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा और बढ़ने का अनुमान है, जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

इस बीच, केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट बंद होने से स्थिति और मुश्किल हो गई है। इससे राज्य को हर साल मिलने वाली बड़ी आर्थिक मदद रुक गई है। इसी वजह से सरकार को पेट्रोल-डीजल पर सेस और एंट्री टैक्स बढ़ाने जैसे फैसले लेने पड़े हैं, जिसका असर आम जनता पर भी पड़ रहा है।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक हालत फिलहाल दबाव में है। अगर जल्द ही आय बढ़ाने और खर्च नियंत्रित करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।

होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से की बड़ी डील, तेल पर टेंशन खत्म?    

होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से की बड़ी डील।
होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से की बड़ी डील।

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में बाधा की आशंका के बीच India ने समझदारी दिखाते हुए रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने करीब 6 करोड़ बैरल तेल की डील की है, जो आने वाले समय में सप्लाई की कमी को काफी हद तक संभाल सकता है।

दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की वजह से इस अहम समुद्री रास्ते से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी था कि वह समय रहते कोई दूसरा विकल्प तैयार करे। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपने पुराने साथी Russia की ओर रुख किया।

बताया जा रहा है कि यह तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले थोड़े प्रीमियम पर खरीदा गया है, जिससे साफ है कि वैश्विक बाजार में मांग बढ़ी हुई है। लेकिन इसके बावजूद भारत ने जोखिम लेने के बजाय सप्लाई सुरक्षित करना ज्यादा जरूरी समझा।

इस बीच, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने भी फिर से रूसी बाजार की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। पहले अमेरिकी दबाव के चलते रूस से खरीद कम कर दी गई थी, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए फिर से खरीद बढ़ाई जा रही है।

सिर्फ रूस ही नहीं, भारत अन्य देशों से भी तेल के विकल्प तलाश रहा है, ताकि किसी एक क्षेत्र या रूट पर निर्भरता कम की जा सके। यह रणनीति भविष्य में किसी भी तरह के वैश्विक संकट से निपटने में मददगार साबित हो सकती है।

भारत ने समय रहते बड़ा फैसला लेकर यह साफ कर दिया है कि वह ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। इस कदम से न सिर्फ देश में तेल की सप्लाई बनी रहेगी, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की स्थिति भी मजबूत होगी।

चीन की समुद्री रणनीति से बढ़ी अमेरिका की टेंशन, बदल रहा पावर बैलेंस

चीन की समुद्री रणनीति से बढ़ी अमेरिका की टेंशन
चीन की समुद्री रणनीति से बढ़ी अमेरिका की टेंशन

नई दिल्ली: ईरान से जुड़े तनाव और वैश्विक हालात के बीच अब China की समुद्री रणनीति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक बड़े स्तर पर अंडरवॉटर सर्वे और निगरानी अभियान चला रहा है। इसमें कई रिसर्च जहाज और Submarines शामिल हैं, जो समुद्र की गहराई का बारीकी से डेटा जुटा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ वैज्ञानिक रिसर्च नहीं, बल्कि एक बड़ी सैन्य रणनीति का हिस्सा है। समुद्र के भीतर की भौगोलिक जानकारी, तापमान, ध्वनि तरंगों का व्यवहार—ये सब चीजें Submarine युद्ध में बहुत अहम होती हैं। ऐसे में चीन इस डेटा के जरिए अपनी सबमरीन को बेहतर तरीके से छिपाने और दुश्मन पर सटीक हमला करने की तैयारी कर रहा है।

चीन Indian Ocean से लेकर Pacific Ocean तक बड़े स्तर पर अंडरवॉटर सर्वे और निगरानी अभियान चला रहा है। (फोटो: Reuters)

इस पूरे घटनाक्रम से United States की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि गुआम और हवाई जैसे अहम इलाकों के आसपास भी चीनी गतिविधियां बढ़ी हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि चीन अब सिर्फ अपने इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अपनी समुद्री पकड़ मजबूत करना चाहता है।

इसी बीच, Donald Trump भी ईरान को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात कर रहे हैं। माना जा रहा है कि बदलते हालात और चीन की बढ़ती मौजूदगी के चलते अमेरिका अपनी रणनीति पर दोबारा विचार कर रहा है।

चीन का यह अभियान उसकी “सिविल-मिलिट्री फ्यूजन” नीति का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक रिसर्च को सीधे सैन्य ताकत से जोड़ा जाता है। इससे भविष्य में समुद्र के भीतर होने वाले युद्ध में उसे बढ़त मिल सकती है।

अब जंग सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रही। आने वाले समय में समंदर के अंदर भी बड़ी ताकतों के बीच मुकाबला और तेज होने वाला है, और चीन की ये चाल उसी दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।