Home Blog Page 4

दोस्ती के नाम पर डबल गेम? होर्मुज विवाद में पाकिस्तान पर ईरान का भरोसा टूटा

पाकिस्तान का दोस्ती के नाम पर डबल गेम?
पाकिस्तान का दोस्ती के नाम पर डबल गेम?

नई दिल्ली: Iran और Pakistan के रिश्तों में इन दिनों खटास देखने को मिल रही है। वजह है होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा एक विवाद, जिसने दोनों देशों के बीच भरोसे को हिला दिया है। ईरान को लग रहा है कि पाकिस्तान एक तरफ दोस्ती की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसे कदम उठा रहा है जिससे अमेरिका को फायदा हो रहा है।

दरअसल, मौजूदा हालात में ईरान ने कुछ ‘दोस्त देशों’ को सीमित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी थी। इसी के तहत पाकिस्तान के कुछ तेल टैंकरों को भी रास्ता दिया गया। लेकिन अब खबर सामने आई है कि इन जहाजों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को फायदा पहुंचा। यही बात ईरान को सबसे ज्यादा खटक रही है।

इस पूरे मामले में Donald Trump के बयान ने भी आग में घी डालने का काम किया। ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई, जिसे उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया। हालांकि, ईरान इसे अपनी रणनीति के खिलाफ मान रहा है और इसे भरोसे के टूटने के तौर पर देख रहा है।

ईरान के नजरिए से यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में उसने पाकिस्तान को अपना दोस्त बताया था। लेकिन अब उसे लग रहा है कि दोस्ती का फायदा उठाकर पाकिस्तान कहीं न कहीं दोहरी चाल चल रहा है। यही वजह है कि तेहरान के राजनीतिक हलकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वहीं पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। उसने बातचीत के प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए हैं, लेकिन ईरान इन कोशिशों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहा। अब तेहरान को पाकिस्तान की नीयत पर ही शक होने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके हालिया कदमों से यह संदेश जा रहा है कि उसका झुकाव अमेरिका और खाड़ी देशों की ओर ज्यादा है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

यह मामला सिर्फ एक समुद्री रास्ते का नहीं, बल्कि भरोसे और कूटनीति का है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस अविश्वास को कैसे दूर करता है और अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाता है।

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत, बांस की खेती बनेगी कमाई का मजबूत सहारा

बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)
बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)

नई दिल्ली: Samastipur समेत बिहार के कई इलाकों में हर साल बाढ़ किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। धान, गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें जलभराव में खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने एक नया और टिकाऊ विकल्प सुझाया है—बांस की खेती।

Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद पाया है कि बांस की कुछ खास किस्में बाढ़ के पानी में भी आसानी से टिक सकती हैं। इनमें बंबूसा बालकोआ, बंबूसा न्यूटन्स और बंबूसा टुल्डा जैसी किस्में शामिल हैं, जो जलभराव की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन किस्मों की खासियत यह है कि ये ज्यादा पानी को सहन कर लेती हैं और जल्दी खराब नहीं होतीं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को एक स्थायी आय का जरिया मिल सकता है। खास तौर पर बंबूसा बालकोआ का सर्वाइवल रेट काफी अच्छा माना गया है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने देशभर से करीब 70 किस्मों पर अध्ययन किया, जिनमें से ज्यादातर ने बेहतर परिणाम दिए। इससे यह साफ हो गया कि अगर सही तकनीक अपनाई जाए, तो बांस की खेती बाढ़ वाले इलाकों में भी सफल हो सकती है।

बांस की खेती का एक और फायदा यह है कि इसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इसका उपयोग निर्माण कार्य, फर्नीचर, सजावटी सामान और हस्तशिल्प बनाने में होता है। यानी किसान इसे बेचकर अच्छी कमाई भी कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने खेती की तकनीक भी बताई है। उनके अनुसार, बांस के पौधों के बीच करीब 6 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। शुरुआती समय में खाली जगह पर सब्जियां उगाकर किसान अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं।

बाढ़ से जूझ रहे किसानों के लिए बांस की खेती एक मजबूत और फायदेमंद विकल्प बनकर सामने आ रही है। अगर किसान इसे सही तरीके से अपनाते हैं, तो हर साल होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

‘धुरंधर देखने वाले BJP को वोट देंगे?’ हिमंता का बयान बना चर्चा का मुद्दा

Photo Credit: Abdul Sajid/ANI
Photo Credit: Abdul Sajid/ANI

नई दिल्ली: Assam में चुनावी माहौल के बीच अब फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर भी सियासत शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के एक बयान ने इस बहस को और हवा दे दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग ‘धुरंधर’ फिल्म देखने जा रहे हैं, वे भारतीय जनता पार्टी को वोट देंगे।

दरअसल, विपक्ष खासकर कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि यह फिल्म बीजेपी और आरएसएस के विचारों को बढ़ावा देने का काम कर रही है। इसी सवाल पर जवाब देते हुए हिमंता सरमा ने कहा कि फिल्म की लोकप्रियता खुद यह दिखाती है कि बीजेपी का समर्थन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में लोग फिल्म देखने जा रहे हैं और शो हाउसफुल चल रहे हैं, तो यह एक तरह से जनता के मूड का संकेत भी है।

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री ने खुद माना कि उन्होंने अभी तक यह फिल्म नहीं देखी है। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्में देखने का ज्यादा शौक नहीं है, लेकिन लोगों से मिली जानकारी के आधार पर उन्होंने इसकी सफलता को बीजेपी के पक्ष में माहौल से जोड़ा।

वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस बयान को लेकर हमलावर है। कांग्रेस का कहना है कि फिल्मों को राजनीति से जोड़ना सही नहीं है और यह जनता को प्रभावित करने की कोशिश है। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

अगर फिल्म की बात करें, तो ‘धुरंधर 2’ बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने कुछ ही दिनों में सैकड़ों करोड़ की कमाई कर ली है और देश ही नहीं, विदेशों में भी अच्छा कारोबार कर रही है। इसकी लोकप्रियता को लेकर भी चर्चा जारी है।

बता दें कि असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। इस बार मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है।

Jan Vishwas Bill से खत्म होगी जेल की सजा, ‘इंस्पेक्टर राज’ पर लगेगी लगाम, जानिए क्या है पूरा बिल?

छोटी गलती पर अब नहीं होगी जेल - Jan Vishwas Bill
छोटी गलती पर अब नहीं होगी जेल - Jan Vishwas Bill

नई दिल्ली: Jan Vishwas Bill इन दिनों चर्चा में है और इसे भारत की कानूनी व्यवस्था में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इस बिल का मकसद छोटे और तकनीकी नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना है, ताकि लोगों को बेवजह कानूनी झंझटों में न फंसना पड़े।

अब तक कई ऐसे कानून थे, जिनमें मामूली गलती पर भी जेल की सजा का प्रावधान था। इससे आम लोगों और व्यापारियों को काफी परेशानी होती थी। लेकिन इस बिल के लागू होने के बाद ऐसे मामलों में जेल की जगह जुर्माना, चेतावनी या सुधार का मौका दिया जाएगा। यानी पहली बार गलती करने पर सख्ती नहीं, बल्कि सुधार पर जोर होगा।

इस बिल की एक खास बात यह है कि यह करीब 78 कानूनों में बदलाव का प्रस्ताव रखता है। इसमें सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया जाएगा, यानी उन्हें अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाएगा। इससे कानूनी सिस्टम सरल और ज्यादा पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

इसका सबसे बड़ा असर ‘इंस्पेक्टर राज’ पर पड़ेगा। पहले छोटे-छोटे मामलों में भी अधिकारियों के पास कार्रवाई करने के ज्यादा अधिकार होते थे, जिससे कई बार मनमानी और भ्रष्टाचार की शिकायतें आती थीं। लेकिन अब जब इन मामलों को अपराध ही नहीं माना जाएगा, तो अधिकारियों की शक्ति भी सीमित होगी और सिस्टम ज्यादा साफ-सुथरा बनेगा।

इस बिल से व्यापार करने वालों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। छोटी गलतियों के लिए कोर्ट के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी। आम लोगों के लिए भी रोजमर्रा के नियमों का पालन आसान हो जाएगा।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह बिल सभी अपराधों पर लागू नहीं होगा। गंभीर मामलों में सख्त सजा पहले की तरह जारी रहेगी। यह सिर्फ छोटे और तकनीकी मामलों के लिए राहत देने वाला कदम है।

जन विश्वास बिल का उद्देश्य कानून को डर का नहीं, बल्कि भरोसे का जरिया बनाना है। अगर यह पूरी तरह लागू होता है, तो यह देश की कानूनी व्यवस्था को ज्यादा आसान और लोगों के अनुकूल बना सकता है।

भारत में लॉकडाउन या सिर्फ अफवाह? BJP के दो बड़े मंत्रियों ने क्या कहा जानिए…

देश में लॉकडाउन या सिर्फ अफवाह? Photo Credit : Naveen Bansal
देश में लॉकडाउन या सिर्फ अफवाह? Photo Credit : Naveen Bansal

नई दिल्ली: देश में इन दिनों Lockdown को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। India में सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि हालात बिगड़ने के चलते फिर से लॉकडाउन लगाया जा सकता है। लेकिन सरकार ने इन सभी खबरों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने साफ कहा है कि देश में लॉकडाउन लगाने का कोई प्लान नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार वैश्विक हालात पर नजर जरूर रख रही है, खासकर ऊर्जा और जरूरी चीजों की सप्लाई को लेकर, लेकिन घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें।

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju ने भी इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं, वे पूरी तरह अफवाह हैं और लोगों को भ्रमित करने के लिए फैलाई जा रही हैं।

दरअसल, Iran से जुड़े तनाव और वैश्विक हालात के कारण लोगों में चिंता बढ़ी है। तेल और सप्लाई चेन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे लॉकडाउन की अटकलों को हवा मिली। इसके अलावा प्रधानमंत्री Narendra Modi की मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की खबर ने भी लोगों को कोरोना काल की याद दिला दी।

इस बीच Mamata Banerjee के बयान ने भी इन चर्चाओं को और बढ़ा दिया था, जिसमें उन्होंने लॉकडाउन की संभावना जताई थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि ऐसी कोई योजना फिलहाल नहीं है।

सरकार का साफ संदेश है कि देश में हालात नियंत्रण में हैं और किसी भी तरह के लॉकडाउन की जरूरत नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और बिना वजह घबराएं नहीं।

NHRC ने मिलावटी दूध के सेवन से 16 लोगों की मृत्यु पर स्वतः संज्ञान लिया

भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें बताया गया है कि आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के लालाचेरुवु, चौदेश्वरन्नगर और स्वरूपनगर क्षेत्रों में फरवरी के मध्य से मिलावटी दूध के सेवन के कारण 16 लोगों की मृत्यु हो गई। इसी तरह के लक्षणों वाले कम से कम चार लोगों के उपचाराधीन होने की भी सूचना है। बताया गया है कि दूध में एथिलीन ग्लाइकोल नामक विषैला पदार्थ मिलाया गया था, जिससे कई अंगों की विफलता (मल्टी-ऑर्गन फेल्योर) हुई। संदिग्ध मिलावट का स्रोत नरसापुरम गांव स्थित एक डेयरी को माना जा रहा है, जो इस क्षेत्र के 100 से अधिक घरों में दूध की आपूर्ति कर रही थी।

आयोग ने कहा है कि यदि समाचार रिपोर्ट की सामग्री सत्य है, तो यह पीड़ितों के मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। इसलिए आयोग ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में पीड़ितों की स्वास्थ्य स्थिति, जांच की प्रगति तथा मृतकों के परिजनों को दी गई किसी भी प्रकार की मुआवजा राशि की जानकारी शामिल करने की अपेक्षा की गई है।

23 मार्च 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लोगों के बीमार पड़ने के मामले फरवरी 2026 के मध्य में सामने आए, जब निवासियों को पेट दर्द, उल्टी, मूत्र न आना (एन्यूरिया) और तीव्र गुर्दा विकार जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होने लगीं। अधिकांश पीड़ित या तो बुजुर्ग थे या छोटे बच्चे।

आईपीएल 2026: हाइलैंड ग्रुप और पंजाब किंग्स पार्टनरशिप सीज़न 2

पहले सफल सीज़न की नींव पर आगे बढ़ते हुए, हाइलैंड ग्रुप ने आईपीएल 2026 के लिए अपने ऑफिशियल रियल एस्टेट पार्टनर के तौर पर पंजाब किंग्स के साथ अपनी पार्टनरशिप जारी रखी है। पार्टनरशिप को जारी रखने और उसे और मजबूत करने की घोषणा यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान की गई, जिसे हाइलैंड ग्रुप के डायरेक्टर विशाल गोयल और हरजिंदर सिंह रंगी ने संबोधित किया। इस मौके पर उनके साथ पंजाब किंग्स के सीईओ सतीश मेनन भी खास तौर पर मौजूद थे। इस मौके पर ग्रुप ने ‘द एड्रेस ऑफ किंग्स’ कैंपेन को भी लॉन्च किया।

इस कैंपेन के तहत, आईपीएल 2026 के दौरान श्रेयस अय्यर और अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ियों के साथ मैच के दिन खास बातचीत से पहले, जाने-माने लाइफस्टाइल और स्पोर्ट्स क्रिएटर्स को हाइलैंड के प्रोजेक्ट्स का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इस मौके पर की गई घोषणाओं में एक मुख्य आकर्षण हाइलैंड ग्रुप का प्रमुख प्रोजेक्ट, हाइलैंड मेफ़ील्ड्स था, जिसे एक स्पोर्ट्स-केंद्रित रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के तौर पर पेश किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, विशाल गोयल, डायरेक्टर, हाईलैंड ग्रुप ने कहा कि “क्रिकेट मेरे सफर का एक अहम हिस्सा रहा है—मैंने अंडर-19 रणजी स्तर पर क्रिकेट खेला है—और यह आज भी इस बात को आकार देता है कि मैं अनुशासन, प्रदर्शन और टीम वर्क को किस नजरिए से देखता हूं। इसलिए, पंजाब किंग्स के साथ यह पार्टनरशिप मेरे लिए व्यक्तिगत होने के साथ-साथ रणनीतिक भी है।  दूसरे साल की पार्टनरशिप ‘द एड्रेस ऑफ किंग्स’ को हकीकत बनाती है, जिसमें मोहाली के हाइलैंड मेफ़ील्ड्स में अल्ट्रा-लग्जरी लिविंग का अनुभव मिलता है।”

गोयल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि खेल—विशेष रूप से क्रिकेट—उनके प्रमुख फ्लैगशिप प्रोजेक्ट, हाइलैंड मेफ़ील्ड्स की मूल सोच में गहराई से समाया हुआ है। इस कार्यक्रम में हाइलैंड ग्रुप द्वारा विशेष रूप से पंजाब किंग्स के लिए तैयार किए गए एक ‘एंथम’ का भी ऑफिशियल रिलीज़ किया गया।

डायरेक्टर हरजिंदर सिंह रंगी ने कहा, “हमारा सहयोग हर सीज़न के साथ और मजबूत होता जा रहा है। इसके जरिए, हमारा लक्ष्य प्रोफेशनल खेलों की ऊर्जा को अपने रेजिडेंशियल इकोसिस्टम में शामिल करना है, ताकि हाइलैंड मेफ़ील्ड्स सिर्फ़ रहने की जगह न रहे, बल्कि एक ऐसी वाइब्रेंट कम्युनिटी बने जो एक्टिव लाइफस्टाइल पर आधारित हो।” उन्होंने आगे कहा कि “यह गठजोड़ सिर्फ़ दो ब्रांड्स के एक साथ आने से कहीं ज़्यादा है—यह पंजाब और इसकी संस्कृति को एक बड़े प्लेटफॉर्म पर पेश करने के बारे में है। दो ‘मेड-इन-पंजाब’ ब्रांड्स के तौर पर, हम ऐसी जगहें बना रहे हैं जो हमारे अपने होम स्टेट की आधुनिक, हमेशा बुलंद हौसले के साथ बनी रहने वाली हाई-एनर्जी पहचान को सही मायने में दर्शाती हैं।”

सतीश मेनन, सीईओ, पंजाब किंग्स  ने इस नई सहभागिता का स्वागत करते हुए कहा कि “हमें हाइलैंड ग्रुप  के साथ साझेदारी करके बहुत खुशी हो रही है। इस तरह की साझेदारियां हमें कम्युनिटीज़ के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करने और क्रिकेट के मैदान से बाहर भी काफी अधिक पॉजिटिव जुड़ाव बनाने में मदद करती हैं।”

कंपनी ने हाइलैंड मेफ़ील्ड्स में चल रहे कंस्ट्रक्शन कार्य की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि विकास कार्य तय समय-सीमा के अनुसार लगातार आगे बढ़ रहा है। गौरतलब है कि मेफ़ील्ड्स मोहाली के सेक्टर 118 में 15 एकड़ में फैला एक कम-डेंसिटी वाला प्रोजेक्ट है, जो हर फ़्लोर पर सिर्फ़ दो रेजिडेंस के साथ बेजोड़ प्राइवेसी देता है। यह प्रोजेक्ट एक विला की एक्सक्लूसिविटी को एक लग्जरी हाई-राइज़ के फायदों के साथ जोड़ता है। विशाल बालकनी, प्रीमियम फ़िनिश और 85 से ज़्यादा विश्व-स्तरीय सुविधाओं—जिनमें तीन विशाल क्लब हाउस, रूफटॉप होराइज़न पूल और स्काईस्केप जिम शामिल हैं—के साथ, मेफ़ील्ड्स एक फाइव-स्टार लिविंग का अनुभव देता है।

‘CM की कोई वेकेंसी नहीं…’ नीतीश पर अटकलों के बीच JDU का साफ संदेश

Nitish Kumar कहीं नहीं जा रहे हैं... - Khalid Anwar | नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
Nitish Kumar कहीं नहीं जा रहे हैं... - Khalid Anwar | नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


नई दिल्ली: Bihar की सियासत में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच जेडीयू ने साफ संदेश दिया है। पार्टी नेता Khalid Anwar ने बयान देते हुए कहा कि Nitish Kumar कहीं नहीं जा रहे हैं और राज्य में मुख्यमंत्री पद की कोई वेकेंसी नहीं है। उनके इस बयान को विपक्ष के दावों का सीधा जवाब माना जा रहा है।

दरअसल, हाल के दिनों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं या फिर सक्रिय राजनीति से दूरी बना सकते हैं। खासकर ‘समृद्धि यात्रा’ के खत्म होने के बाद इन अटकलों को और हवा मिली। लेकिन जेडीयू नेताओं ने इन सभी बातों को खारिज कर दिया है।

खालिद अनवर ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की राह पर आगे बढ़ाया है और उनकी नेतृत्व क्षमता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने ‘समृद्धि यात्रा’ को एक नई शुरुआत बताते हुए कहा कि इसका मकसद राज्य को और आगे ले जाना है, न कि राजनीति से दूरी बनाना।

उन्होंने यह भी कहा कि जनता का अपने नेता के प्रति गहरा जुड़ाव है। यात्रा के दौरान कई जगह लोगों ने भावुक होकर नीतीश कुमार से बिहार में ही बने रहने की अपील की। इस पर अनवर ने कहा कि यह जनता के विश्वास का संकेत है और नीतीश कुमार भी उसी भरोसे पर खरे उतरेंगे।

सीएम पद को लेकर चल रही अटकलों पर उन्होंने साफ कहा कि जब तक नीतीश कुमार खुद कोई फैसला नहीं लेते, तब तक ऐसी बातें बेबुनियाद हैं। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल मुख्यमंत्री पद खाली नहीं है और सरकार उनके नेतृत्व में ही चल रही है।

वहीं विपक्ष, खासकर Tejashwi Yadav के बयानों पर भी जेडीयू ने पलटवार किया है। पार्टी का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन की बातें सिर्फ राजनीतिक अफवाहें हैं और इसका कोई आधार नहीं है।

जेडीयू के इस बयान से यह साफ संकेत देने की कोशिश की गई है कि बिहार की राजनीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होने वाला। हालांकि, सियासी हलकों में चर्चा अभी भी जारी है और आने वाले समय में तस्वीर और साफ हो सकती है।

BJP में 35 साल की सेवा बेकार? टिकट न मिलने पर जयंत दास की बगावत

Jayanta Das quit BJP.
Jayanta Das quit BJP.

नई दिल्ली: Assam की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता Jayant Kumar Das ने पार्टी से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। करीब 35 साल तक पार्टी के लिए काम करने के बाद भी जब उन्हें दिसपुर सीट से टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला कर लिया।

जयंत दास संगठन के मजबूत और जमीनी नेता माने जाते रहे हैं। वे असम बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी को मजबूत करने में उनका अहम योगदान रहा है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में उनका नाम नहीं आने से वे नाराज हो गए और उन्होंने बगावती रुख अपना लिया।

दास ने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी अब अपने पुराने सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे Atal Bihari Vajpayee और Lal Krishna Advani की विचारधारा से प्रेरित होकर पार्टी में आए थे, लेकिन अब वही सोच नजर नहीं आती।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इतने सालों की सेवा के बावजूद उनकी बात शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाई। उनका कहना है कि अगर Narendra Modi को इस बारे में जानकारी होती, तो वे जरूर दुखी होते। साथ ही, उन्होंने असम बीजेपी में तानाशाही जैसे हालात होने का भी आरोप लगाया।

जयंत दास के इस फैसले से दिसपुर सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब यहां बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिल सकती है। उनके समर्थकों का कहना है कि इलाके में पानी की समस्या, बाढ़ और खराब प्रशासन जैसे मुद्दों को लेकर जनता में नाराजगी है, जिसका फायदा दास को मिल सकता है।

वहीं बीजेपी ने इस बगावत को ज्यादा महत्व नहीं दिया है। पार्टी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं होता और उनके उम्मीदवार ही जीत दर्ज करेंगे।

असम में इस बार चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। अब देखना होगा कि जयंत दास की बगावत चुनावी नतीजों पर कितना असर डालती है।

Hormuz में ईरानी नेवी चीफ अलीरेजा तंगसीरी की मौत, मरने से पहले दी थी अमेरिका को चेतावनी

Irani Navy Chief Killed at Hormuz.
Irani Navy Chief Killed at Hormuz.

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Iran को बड़ा झटका लगा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हुए एक हमले में ईरानी नौसेना के प्रमुख Alireza Tangsiri की मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पहले से ही क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला एक बड़े सैन्य ऑपरेशन का हिस्सा था, जिसमें रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। खास तौर पर बंदर अब्बास के आसपास का इलाका, जो ईरान के लिए बेहद अहम माना जाता है, इस कार्रवाई के केंद्र में रहा। यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है, इसलिए यहां होने वाली हर गतिविधि का असर वैश्विक स्तर पर पड़ता है।

हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यह हमला किसने किया। कुछ रिपोर्ट्स में इसे अमेरिका की कार्रवाई बताया जा रहा है, तो कुछ में इजरायल की भूमिका की आशंका जताई गई है। लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

अलीरेजा तंगसीरी ईरान की सैन्य रणनीति के अहम चेहरों में से एक थे। वे इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की नौसेना के प्रमुख थे और खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनकी पहचान एक ऐसे कमांडर के तौर पर थी, जो असमान युद्ध यानी छोटे और तेज हथियारों के जरिए बड़े दुश्मनों को चुनौती देने की रणनीति पर काम करते थे।

दिलचस्प बात यह है कि अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही उन्होंने United States को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ कोई कदम उठाते हैं, तो उनके ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। उनकी इस चेतावनी के बाद से ही क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था।