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उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार राधाकृष्णन ने दाखिल किया नामांकन

उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में मुकाबला तेज हो गया है। इंडिया ब्लॉक ने पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार घोषित किया है, वहीं एनडीए प्रत्याशी सीपी राधाकृष्णन ने आज नामांकन दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री मौजूद रहे। पीएम मोदी खुद उनके प्रस्तावक बने।

राधाकृष्णन का नामांकन सीपी राधाकृष्णन की ओर से कुल चार सेट नामांकन दाखिल किए गए। हर सेट पर 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक सांसदों के हस्ताक्षर हैं। पहले सेट में प्रधानमंत्री मोदी पहले प्रस्तावक के रूप में शामिल हुए। अन्य सेटों में केंद्रीय मंत्रियों और एनडीए सांसदों ने हस्ताक्षर किए।

कौन हैं बी. सुदर्शन रेड्डी?
इंडिया ब्लॉक ने पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी दलों की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी।
बी. सुदर्शन रेड्डी तेलंगाना के रहने वाले हैं। वे आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जज और गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं। वर्ष 2011 में वे सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए। हाल ही में तेलंगाना सरकार द्वारा कराए गए जातिगत सर्वे की समीक्षा समिति के अध्यक्ष भी रहे हैं। सुदर्शन रेड्डी 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे।

उम्मीदवारों के ऐलान के बाद राजनीतिक खेमेबंदी भी शुरू हो गई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एनडीए की ओर से विपक्षी दलों से संपर्क साध रहे हैं। वहीं, सीपी राधाकृष्णन ने भी मंगलवार को एनडीए नेताओं से मुलाकात कर समर्थन मांगा।

उपराष्ट्रपति चुनाव का कार्यक्रम

अधिसूचना जारी: 07 अगस्त 2025 (गुरुवार)
नामांकन की अंतिम तारीख: 21 अगस्त 2025 (गुरुवार)
नामांकन की जांच: 22 अगस्त 2025 (शुक्रवार)
नाम वापस लेने की अंतिम तारीख: 25 अगस्त 2025 (सोमवार)
मतदान (यदि आवश्यक हुआ): 09 सितंबर 2025 (मंगलवार), प्रातः 10 से सायं 5 बजे तक
मतगणना: 09 सितंबर 2025 (मंगलवार)

हिमालय पर प्रकृति का कहर

धराली की बाढ़ ने सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी को बनाया भयावह सच्चाई

विभा शर्मा

जब सुप्रीम कोर्ट ने चेताया था कि हिमाचल प्रदेश “हवा में गायब” हो सकता है, तो यह बात अतिशयोक्ति लग रही थी। लेकिन उत्तराखंड के धराली में यह भविष्यवाणी सच साबित हो गई, जब अचानक आई बाढ़ ने घर बहा दिए, भूगोल बदल दिया और यह सच्चाई उजागर कर दी कि नाजुक हिमालय  में जलवायु परिवर्तन और मानवीय लापरवाहियां से हिमालय की गोद में बसे राज्यों पर  प्रकृति का मार पड़ रही है।

भविष्यवाणी सच हुई!

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था,” यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो हिमाचल प्रदेश “देश के नक्शे से हवा में गायब” हो सकता है “। उस समय किसी को यकीन नहीं आया था लेकिन  जब धराली गांव में अचानक आई बाढ़ ने घर, खेत और जीवन सब कुछ बहा दिया। भयभीत लोग पानी और मलबे के तेज़ बहाव से बचने के लिए संघर्ष करते रहे।

इसरो (ISRO) की सैटेलाइट तस्वीरों ने तबाही का भयावह दृश्य दिखाया: पंखे के आकार की तलछट और मलबे की परत,  नदी के टूटे हुए किनारे, डूबे हुए और तेज बहाव में बह गए घर।
बस्तियां सचमुच “हवा में गायब” हो गईं। प्रारंभिक रिपोर्ट में धराली और उत्तरकाशी जिले के सुखी टॉप इलाके में बादल फटने को मुख्य कारण बताया गया है।हालांकि कोर्ट की टिप्पणी हिमाचल की पारिस्थितिक स्थिति पर थी, लेकिन धराली, भले ही उत्तराखंड में है, उसी भू-वैज्ञानिक क्षेत्र में आता है — हिमालय, जो दुनिया का सबसे युवा और नाजुक पर्वत श्रृंखला है और इस समय इंसानों के लालच और जलवायु परिवर्तन के दोहरे हमले से जूझ रहा है।

उपमहाद्वीप की नाजुक रीढ़

हिमालय न केवल भारत की उत्तरी ढाल है, बल्कि दुनिया के सबसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है।करीब 5 करोड़ वर्ष पहले भारतीय और यूरेशियाई टेक्टॉनिक प्लेटों की टक्कर से बने ये युवा मोड़दार पर्वत आज भी बढ़ रहे हैं। खड़ी ढलानों, ढीले भूगर्भीय ढांचे और विविध सूक्ष्म जलवायु के कारण ये प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। यह इलाका भूकंप, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी आपदाओं के खतरों से हमेशा घिरा रहता है।  और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव — जैसे ग्लेशियर पिघलना, वर्षा का रूख  बदलना आदि  इसे और अस्थिर बना रहे हैं।

प्रकृति की चेतावनी, इंसान की गलती

उत्तरकाशी जिले में धराली की बाढ़ के बाद 13 जून और 7 अगस्त 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों की तुलना में चौड़ी हो चुकी नदी की धाराएं और बदल चुकी नदी की संरचना दिखाई दी।
वैज्ञानिक कारण खोज रहे हैं — संभव है कि भारी बारिश/बादल फटने से ग्लेशियर से जमा तलछट बह निकली हो, या किसी भूस्खलन से अस्थायी बांध बना हो जो अचानक टूट गया।

हिमाचल प्रदेश में ही जून-जुलाई 2025 के अंत में कई बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से अनेक लोग  मर गए और हजारों लोग विस्थापित हुए। विशेषज्ञ एक बात पर सहमत हैं — इसमें मानव हस्तक्षेप अहम है। 2013 के केदारनाथ हादसे से हमने कोई सबक नहीं लिया। वन कटाई और निर्माण नियमों की ढिलाई ने तबाही को और विस्तार दिया । नदी के तल और बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।उत्तरकाशी में इस दौरान असाधारण वर्षा भी नहीं हुई थी, लेकिन मानव बस्तियों ने नदी का प्राकृतिक रास्ता रोक दिया था। जैसा कि कहा जाता है, नदी अपना रास्ता वापस ले ही लेती है, चाहे वहां कुछ भी बना हो।

बरसात के नए स्वरूप  

पिछले दशक में हिमालय में वर्षा के स्वरूप  में  खतरनाक बदलाव आया है। पहले जो हल्की बारिश हफ्तों तक होती रहती थी, अब अचानक और बेहद ज्यादा होती है। खास खतरा यह है कि ये बारिश अब बर्फ की रेखा (स्नो लाइन) पर हो रही है, जहां पिघलती बर्फ पानी के बहाव को कई गुना बढ़ा देती है। वैज्ञानिक इस बढ़ोतरी को वैश्विक तापमान वृद्धि से जोड़ते हैं, जिससे वायुमंडल में अधिक नमी जमा होकर कम समय में भारी बारिश होती है। गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे पवित्र ग्लेशियर भी  तेज़ी से पिघल रहे हैं, जिससे ढलान अस्थिर हो रहे हैं और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।

मानवीय लापरवाहियां

जलवायु परिवर्तन मंच तैयार करता है, लेकिन इंसान अंधाधुध विकास और लालच के चक्कर में पहाड़ो का दोहन कर रहे हैं। बिना योजना के निर्माण, वनों की कटाई, और लापरवाह पर्यटन ढलानों को कमजोर कर रहे हैं, मिट्टी का कटाव तेज़ कर रहे हैं और जल निकासी के रास्ते रोक रहे हैं। जल विद्युत परियोजनाएं, भले ही स्वच्छ ऊर्जा के नाम पर हों, भारी पारिस्थितिक कीमत वसूलती हैं।
बिना उचित ढलान सुदृढ़ीकरण के पहाड़ों में सड़कें काटी जा रही हैं; नदी तल से रेत और बजरी निकाली जा रही है; बाढ़ क्षेत्र में होटल और कस्बे बसाए जा रहे हैं — यह सब मानसून के पानी को सुरक्षित ढंग से बहने देने की क्षमता को खत्म कर देता है।

क्यों इतने असुरक्षित हैं हिमालय

  • भूगर्भीय रूप से युवा और अस्थिर, अब भी ऊंचाई लेते हुए, भूकंप प्रभावित
  • खड़ी ढलान और ढीली मिट्टी, जो भारी बारिश या निर्माण से आसानी से खिसकती है
  • जलवायु परिवर्तन से पिघलते ग्लेशियर और अनियमित वर्षा
  • मानव अतिक्रमण और निर्माण से बिगड़ा संतुलन

जलवायु टकराव बिना तैयारी के उड़ान

गर्म और नमी भरे वातावरण की टक्कर कमजोर पारिस्थितिकी से हो रही है।
अत्यधिक तापमान से भरे मानसूनी बादल अचानक भारी बारिश कर देते हैं, जिससे नदियां उफान पर आ जाती हैं, भूस्खलन और बाढ़ मिनटों में गांव तबाह कर देती है।

कई पहाड़ी राज्यों में मौसम निगरानी, बाढ़ पूर्वानुमान और त्वरित संचार प्रणाली की कमी है। नतीजा — खतरा दिखते ही बहुत देर हो जाती है।

सबक जो धराली सिखा रहा है

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी सिर्फ हिमाचल के लिए नहीं, बल्कि उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल और पश्चिमी घाट जैसे अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी है।
धराली ने याद दिलाया है कि “प्राकृतिक” आपदाएं अक्सर प्रकृति की अनदेखी का नतीजा होती हैं।

क्या करना जरूरी है

  • बाढ़ क्षेत्र, भूस्खलन-प्रभावित ढलान और ग्लेशियर पिघलने के रास्तों पर निर्माण पर सख्त प्रतिबंध
  • जलवायु-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा
  • मौसम और नदी निगरानी नेटवर्क का विस्तार
  • वनीकरण और ढलान सुदृढ़ीकरण
  • पर्यटन की क्षमता सीमा तय करना, खासकर मानसून में
  • स्कूल शिक्षा में पारिस्थितिकी संवेदनशीलता शामिल करना

सुप्रीम कोर्ट का “हवा में गायब” वाला रूपक कोई कविता नहीं, बल्कि कड़वी सच्चाई है।
धराली की तबाही चेतावनी है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो पूरी घाटियां, कस्बे और संस्कृति हमारी आंखों के सामने मिट सकते हैं — सदियों में नहीं, बल्कि हमारे जीवन काल में।

पहाड़ अब भी उठ रहे हैं, लेकिन पानी, मलबा और खतरा भी। अगर विकास को पारिस्थितिकी के अनुरूप नहीं बनाया गया, तो आज की एक गांव की त्रासदी कल पूरे क्षेत्र की तबाही बन सकती है।
और अगली चेतावनी शायद अदालत से नहीं, पहाड़ों से आएगी।

रेलवे यात्रियों को अब हवाई यात्रा की तरह सामान पर लगेगी लिमिट

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे यात्रियों के सफर को सुगम बनाने और अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए दो बड़े बदलाव करने जा रहा है। जल्द ही रेल यात्रा में हवाई यात्रा की तरह सामान ले जाने की एक निश्चित सीमा तय की जाएगी, और इसका उल्लंघन करने पर यात्रियों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। इसके साथ ही, रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाते हुए वहां एयरपोर्ट की तर्ज पर बड़े ब्रांडेड स्टोर्स खोलने की भी तैयारी पूरी हो चुकी है।

नई नीति के तहत, रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक वजन और माप मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों से गुजरने वाले सामान का वजन और आकार तय सीमा से अधिक पाए जाने पर यात्री को अतिरिक्त शुल्क या जुर्माना चुकाना होगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार, यह लिमिट यात्रा की श्रेणी के अनुसार तय होगी।

जनरल क्लास: 35 किलोग्राम प्रति व्यक्ति

स्लीपर और थर्ड एसी: 40 किलोग्राम प्रति व्यक्ति

सेकेंड एसी: 50 किलोग्राम प्रति व्यक्ति

फर्स्ट एसी: 70 किलोग्राम प्रति व्यक्ति

रेलवे ने स्पष्ट किया कि यह लिमिट प्रति यात्री होगी। उदाहरण के लिए, यदि दो लोग स्लीपर क्लास में यात्रा कर रहे हैं, तो वे कुल 80 किलोग्राम तक का सामान बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ले जा सकेंगे। रेलवे का कहना है कि यह कदम सभी यात्रियों के सफर को सुखद और सुविधाजनक बनाने के लिए उठाया जा रहा है।

यात्रियों का अनुभव बदलने के लिए अब रेलवे स्टेशनों पर बड़े ब्रांड्स की दुकानें भी दिखाई देंगी। रेलवे की योजना के अनुसार, स्टेशनों पर कपड़े, ट्रैवल एसेसरीज, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामानों के आकर्षक स्टोर खोले जाएंगे। इन दुकानों को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आवंटित किया जाएगा, जिससे रेलवे को अच्छी आय होने की भी उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसा माहौल और विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करना है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान की लिमिट तय करने की यह नई व्यवस्था सबसे पहले प्रयागराज जोन में लागू की जाएगी। यहां इसके सफल कार्यान्वयन के बाद इस फॉर्मूले को देश भर के सभी रेलवे नेटवर्कों पर लागू कर दिया जाएगा।

इंडिया गठबंधन ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा

इंडिया गठबंधन ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष के आवास पर हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी के नाम पर मुहर लगी। बैठक के बाद खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उम्मीदवार के नाम की घोषणा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बताया कि विपक्ष ने एकमत होकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नाम पर सहमति जताई है।

इससे पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नाम पर फैसला लेने और उसकी घोषणा करने के लिए 10 राजाजी मार्ग पर बैठक की थी। बैठक के बाद विपक्ष ने उनके नाम का एलान किया। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल करेंगे।

सरकार की कोशिश उपराष्ट्रपति के नाम पर सहमति बनाने की थी, लेकिन बात नहीं बन पाई। एनडीए ने 2 दिन पहले सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा की थी. इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सभी दलों से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

टी20 एशिया कप 2025 के लिए भारतीय टीम का ऐलान, सूर्यकुमार यादव को कमान

नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में 9 सितंबर से शुरू होने वाले टी20 एशिया कप के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने 15 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने भविष्य के टी20 विश्व कप 2026 को ध्यान में रखते हुए युवा चेहरों को मौका दिया है। टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी विस्फोटक बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव को सौंपी गई है, जबकि शुभमन गिल उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे।

यह महाद्वीपीय टूर्नामेंट 9 से 28 सितंबर तक दुबई और अबू धाबी में खेला जाएगा। भारत को ग्रुप ‘ए’ में रखा गया है, जहाँ उसके साथ चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान की टीमें शामिल हैं। भारतीय टीम अपने अभियान की शुरुआत 10 सितंबर को दुबई में मेजबान यूएई के खिलाफ करेगी। क्रिकेट प्रेमियों को जिस मैच का बेसब्री से इंतजार है, वह भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को दुबई के मैदान पर ही खेला जाएगा। टीम इंडिया अपना आखिरी लीग मैच 19 सितंबर को अबू धाबी में ओमान के खिलाफ खेलेगी।

टीम में अनुभवी ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की वापसी हुई है। विकेटकीपर के तौर पर जितेश शर्मा के साथ संजू सैमसन को भी टीम में जगह मिली है। वहीं, आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, हर्षित राणा और रिंकू सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों पर भी चयनकर्ताओं ने भरोसा जताया है।

एशिया कप के लिए 15 सदस्यीय भारतीय टीम– सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), हर्षित राणा और रिंकू सिंह      

प्रधानमंत्री मोदी ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से भारत लौटे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से की मुलाकात

पीएम मोदी ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से भारत लौटे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला से मुलाकात की है। इस दौरान पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से कई सवाल भी किए हैं। जिसमें उन्होंने स्पेस स्टेशन में दिए गए अपने होमवर्क को लेकर भी शुभांशु शुक्ला से पूछा है। इस बातचीत का वीडियो सामने आया है।

गगनयान को लेकर दुनियाभर की दिलचस्पी– अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताया कि दुनियाभर में भारत के गगनयान मिशन को लेकर काफी रुचि है। दुनियाभर के शीर्ष वैज्ञानिक इसका हिस्सा बनने के इच्छुक हैं। सोमवार शाम प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के हिस्से के रूप में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की अपनी अंतरिक्ष यात्रा, सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण स्थितियों के साथ समायोजन और कक्षीय प्रयोगशाला में किए गए प्रयोगों के बारे में अपने अनुभव भी साझा किए।

बातचीत में पीएम मोदी ने शुक्ला से कहा कि भारत के अंतरिक्ष मिशनों के लिए हमें 40-50 अंतरिक्ष यात्रियों का एक समूह चाहिए। आपका अनुभव हमारे गगनयान मिशन के लिए मूल्यवान होगा। शुक्ला की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत का वीडियो मंगलवार को पीएम मोदी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया गया है। शुक्ला ने कहा, ‘लोग भारत के गगनयान मिशन को लेकर बहुत उत्साहित हैं। मेरे कई क्रू साथी (एक्सिओम-4 मिशन के) लॉन्च के बारे में जानना चाहते हैं।’

पीएम मोदी ने शुभांशु शुक्ला से अपने होमवर्क के बारे में भी सवाल किया। मालूम हो कि पीएम मोदी ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को गगनयान मिशन को आगे बढ़ाने, चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री की लैंडिंग कराने और भारत के अपने स्पेस स्टेशन के निर्माण में अपने अनुभवों का उपयोग करने का होमवर्क दिया था। पीएम मोदी ने कहा था कि शुभांशु के अंतरिक्ष मिशन (एक्सिओम-4) के अनुभव इन तीनों महत्वपूर्ण अभियानों के लिए बहुत काम आएंगे। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की महत्वाकांक्षाओं का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘मैंने कहा था कि आपका मिशन पहला कदम है।’ पीएम मोदी ने शुक्ला से कहा कि आईएसएस के लिए उनका मिशन भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में मददगार साबित होगा। भारत की योजना 2027 में अपना पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष यान भेजने और 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की है। भारत की 2040 तक चांद पर अपना अंतरिक्ष यात्री उतारने की भी योजना है।

लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा, दोनों सदनों की कार्यवाही करनी पड़ी स्थगित

नई दिल्ली: राज्यसभा व लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार को भी सुचारू रूप से नहीं चल सकी। राज्यसभा में विपक्ष की मांग थी कि सदन की अन्य कार्यवाही स्थगित कर मतदाता सूची संबंधी मामलों पर चर्चा कराई जाए। इसके लिए कई विपक्षी सांसदों ने नियम 267 के तहत नोटिस भी दिए थे। हालांकि नियमों का हवाला देते हुए उप सभापति ने ये सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए।

इसके बाद राज्यसभा में विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए अपनी सीटों से उठकर आगे आ गए। राज्यसभा में हंगामा बढ़ता देख उप सभापति ने सदन की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। वहीं लोकसभा में भी हंगामे व नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई।

लोकसभा की कार्यवाही पहले 12 बजे तक स्थगित की गई। 12 बजे कार्यवाही प्रारंभ होने के पर भी हंगामा जारी रहा और ऐसे में सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दरअसल मंगलवार को और राज्यसभा की कार्यवाही प्रारंभ होने के कुछ देर बाद उपसभापति हरिवंश नारायण ने सदन को बताया कि उन्हें विपक्षी सांसदों की ओर से चर्चा के लिए 20 नोटिस मिले। ये 20 नोटिस 4 अलग-अलग विषयों पर चर्चा के लिए भेजे गए थे। चर्चा के लिए ये सभी नोटिस नियम 267 के तहत उपसभापति को दिए गए थे।

उप सभापति ने इस विषय में सदन को जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें प्राप्त हुए सभी 20 नोटिसों में से कोई भी नोटिस नियमानुसार नहीं भेजा गया है। इसलिए सभी नोटिस अस्वीकार कर दिए गए। इसके बाद विपक्ष द्वारा सदन में जमकर नारेबाजी की गई अधिकांश विपक्षी सांसद अपनी सीटों से उठ कर आगे आ गए और राज्यसभा में खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।

उप सभापति ने राज्यसभा में शून्यकाल और प्रश्नकाल चलने देने का अनुरोध किया। लेकिन विपक्षी सांसद इसके लिए राजी नहीं हुए, वे दिए गए नोटिस के आधार पर चर्चा की मांग करते रहे। सदन में हंगामा बढ़ता देख उप सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। उधर लोकसभा में प्रश्नकाल तो शुरू किया गया लेकिन प्रश्नकाल की कार्यवाही ज्यादा देर नहीं चल सकी। विपक्ष लगातार नारेबाजी करता रहा।

सदन में हुए हंगामे और नारेबाजी के कारण प्रश्नकाल के बीच में ही लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा प्रारंभ होने पर भी सदन में यही स्थिति बनी रही। लोकसभा में पीठासीन कृष्णा प्रसाद तन्नेटी ने बताया कि कुछ सांसदों ने स्थगन प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बताया कि लोकसभा अध्यक्ष ने ये स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार कर दिए हैं। इस बीच लोकसभा में नारेबाजी जारी रही जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई कर दी गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने उन्हें एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में चुने जाने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन के अनुभव से देश को बहुत लाभ होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की तस्वीरें शेयर की।

उन्होंने लिखा, “सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। उन्हें एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनने पर बधाई दी। उनके लंबे समय तक सार्वजनिक सेवा और विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव से हमारे देश को बहुत लाभ होगा। मैं कामना करता हूं कि वे हमेशा की तरह समर्पण और दृढ़ता के साथ राष्ट्र की सेवा करते रहें, जो उन्होंने हमेशा दिखाया है।” इससे पहले, पीएम मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर राधाकृष्णन को एनडीए का उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर बधाई दी थी। उन्होंने लिखा, “थिरु सीपी राधाकृष्णन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अपनी लगन, विनम्रता और बुद्धिमत्ता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्होंने हमेशा सामुदायिक सेवा और वंचितों के सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित किया है।

उन्होंने तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर व्यापक कार्य किया है। मुझे खुशी है कि एनडीए परिवार ने उन्हें हमारे गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में नामित करने का निर्णय लिया है।” भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीपी राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “हमने एनडीए में शामिल सभी दलों के साथ चर्चा की और उनसे सुझाव भी मांगे थे। इसके बाद सभी ने एनडीए के प्रत्याशी के रूप में सीपी राधाकृष्णन के नाम को मंजूरी दी। वह वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और तमिलनाडु के रहने वाले हैं।” बता दें कि चंद्रपुर पोन्नुसामी राधाकृष्णन को 31 जुलाई 2024 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले, उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया। इसके अलावा, वे तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल चुके हैं।

प्रवासी बंगालियों को घर वापसी पर हर महीने मिलेंगे 5000 रुपए- मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछने लगी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बड़ा ऐलान करते हुए ‘डबल इंजन’ सरकारों वाले राज्यों में कथित तौर पर उत्पीड़न का सामना कर रहे बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों के लिए ‘श्रमोश्री योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत बंगाल वापस लौटने वाले मजदूरों को एक साल तक हर महीने 5000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा राज्य में SIR (स्टेट इनहैबिटेंट्स रजिस्टर) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में लगभग 22 लाख बंगाली भाषी लोगों को परेशान किया जा रहा है।

श्रमोश्री योजना – सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, “हमने उन सभी लोगों से अपने राज्य बंगाल वापस आने का आग्रह किया है। जो लोग उत्पीड़न के बाद वापस आ रहे हैं या आएंगे, उन्हें ‘श्रमोश्री योजना’ के तहत मदद दी जाएगी।” उन्होंने योजना का विवरण देते हुए बताया, बंगाल लौटने वाले प्रत्येक प्रवासी मजदूर को एक साल तक हर महीने 5000 रुपये मुफ्त यात्रा भत्ता दिया जाएगा। यह राशि आईटीआई और श्रम विभाग के माध्यम से प्रदान की जाएगी। इन मजदूरों को तुरंत जॉब कार्ड दिए जाएंगे और सरकार उन्हें अलग से नौकरी दिलाने में भी मदद करेगी।

यह योजना केवल उन बंगाली प्रवासी मजदूरों के लिए होगी जो दूसरे राज्यों में काम कर रहे थे और अब वापस लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि कथित उत्पीड़न के बाद अब तक 2870 परिवारों के 10,000 से अधिक मजदूर पहले ही राज्य में लौट चुके हैं।

राजनीतिक विश्लेषक ममता बनर्जी के इस कदम को 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दांव के रूप में देख रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए SIR का भी पुरजोर विरोध किया और कहा कि पश्चिम बंगाल अभी इसके लिए तैयार नहीं है।

इस बीच, ऐसी भी अटकलें हैं कि प्रवासी बंगाली मजदूरों के उत्पीड़न के विरोध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 22 अगस्त को बंगाल में होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। हालांकि, जब आज उनसे इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे टाल दिया और कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

यूक्रेन के समर्थन में NATO देश, ट्रंप के साथ बातचीत के लिए ज़ेलेंस्की के साथ हुए एकजुट

यूक्रेन-रूस युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के बीच एक बड़े कूटनीतिक घटनाक्रम में, यूरोपीय और नाटो देशों के नेताओं ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ एकजुटता दिखाई है। रविवार को जारी घोषणा के अनुसार, ये सभी नेता वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में ज़ेलेंस्की का साथ देंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने और अमेरिकी सुरक्षा गारंटी को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त रणनीति बनाना है।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में शुक्रवार को अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक शिखर वार्ता हुई थी, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति को शामिल नहीं किया गया था। इसी के बाद ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और फिनलैंड जैसे प्रमुख देशों ने ज़ेलेंस्की के समर्थन में आगे आने का फैसला किया है।

सोमवार को व्हाइट हाउस में ज़ेलेंस्की के साथ नाटो नेताओं की मौजूदगी यह सुनिश्चित करने का एक स्पष्ट प्रयास है कि यह बैठक सफल रहे। इससे पहले फरवरी में हुई एक बैठक के दौरान ट्रंप ने ओवल ऑफिस में ज़ेलेंस्की को फटकार लगाई थी, जिससे असहज स्थिति पैदा हो गई थी। संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के पूर्व सैन्य मिशन प्रमुख, सेवानिवृत्त फ्रांसीसी जनरल डोमिनिक ट्रिनक्वांड ने कहा, “यूरोपीय देश ओवल ऑफिस जैसी घटना को दोहराना नहीं चाहते और इसीलिए वे ज़ेलेंस्की को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं।”

इस बीच, अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन वार्ता से एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रविवार को सीएनएन को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि पुतिन इस बात पर सहमत हो गए हैं कि युद्ध समाप्ति समझौते के हिस्से के रूप में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी यूक्रेन को नाटो जैसी सुरक्षा गारंटी दे सकते हैं। विटकॉफ ने इसे “गेम चेंजर” बताते हुए कहा, “यह पहली बार है जब रूसियों ने इस तरह की किसी बात पर सहमति जताई है।”

वहीं, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति ट्रंप से यूक्रेन की सेना को और मजबूत करने की योजनाओं का समर्थन करने का आग्रह करेगा। इन योजनाओं में शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यूक्रेन की सशस्त्र सेनाओं को अतिरिक्त प्रशिक्षण और उपकरण प्रदान करना शामिल है, जो पहले से ही रूस के बाहर यूरोप की सबसे बड़ी सेना मानी जाती है।