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एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार होंगे सीपी राधाकृष्णन- जेपी नड्डा

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उपराष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। नड्डा ने बताया कि एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन होंगे, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “हमने एनडीए में शामिल सभी दलों के साथ चर्चा की और उनसे सुझाव भी मांगे गए। इसके बाद सभी ने एनडीए के प्रत्याशी के रूप में सीपी राधाकृष्णन के नाम को मंजूरी दी।

वह वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं और तमिलनाडु के रहने वाले हैं।” केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सीपी राधाकृष्णन के नाम का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “उपराष्ट्रपति के एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को हमारा पूर्ण समर्थन है। हम सड़क से लेकर सदन तक एनडीए के साथ हैं।” बता दें कि चंद्रपुर पोन्नुसामी राधाकृष्णन को 31 जुलाई 2024 को महाराष्ट्र के राज्यपाल के पद पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले, उन्होंने लगभग डेढ़ साल तक झारखंड के राज्यपाल के रूप में काम किया।

इसके अलावा, वे तेलंगाना के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल चुके हैं। 20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में जन्मे सीपी राधाकृष्णन ने 1974 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और भारतीय जनसंघ के राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने। 1996 में वह भाजपा तमिलनाडु के सचिव नियुक्त हुए। इसके बाद 1998 और 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए। इसके अलावा, 2004 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में संसदीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में भाषण दिया और ताइवान की पहली संसदीय यात्रा में भी शामिल हुए थे। वह 2004 से 2007 तक भाजपा तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष रहे। 2020 से 2022 तक भाजपा केरल के अखिल भारतीय प्रभारी रहे। साथ ही 18 फरवरी 2023 को झारखंड के राज्यपाल नियुक्त किए गए थे।

भारी बारिश से अलकनंदा-मंदाकिनी नदियां खतरे के निशान के पास, प्रशासन अलर्ट

जनपद के ऊपरी इलाकों में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है। रविवार को दोनों नदियाँ खतरे के निशान के करीब बहने लगीं, जिसके चलते प्रशासन ने नदी किनारे बसी बस्तियों में अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन द्वारा लगातार लोगों को जागरूक कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की जा रही है।

बरसात का मौसम शुरू होते ही जिले में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की घटनाएँ आम हो जाती हैं। इस वर्ष ऊपरी क्षेत्रों में हुई अत्यधिक वर्षा के कारण नदियाँ विकराल रूप धारण कर रही हैं, जिससे तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रविवार सुबह 8 बजे नदियों का जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही संबंधित विभागों को सतर्क कर दिया गया था।

आपदा प्रबंधन अधिकारी एन.एस. रजवार के अनुसार, अलकनंदा नदी का जलस्तर 626.10 मीटर दर्ज किया गया, जो 626 मीटर के खतरे के निशान से थोड़ा ऊपर है। वहीं, मंदाकिनी नदी 624.70 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान 625 मीटर से कुछ ही नीचे है।

उन्होंने बताया कि “नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए हम लगातार नदी किनारे रहने वाले लोगों को सचेत कर रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से पहले उन्हें समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।” हालांकि, शाम तक दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जाने लगी थी, लेकिन प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है।

अलकनंदा नदी- खतरे का निशान: 626.00 मीटर, खतरे का स्तर: 627.00 मीटर , वर्तमान जलस्तर: 626.10 मीटर

मंदाकिनी नदी– खतरे का निशान: 625.00 मीटर, खतरे का स्तर: 626.00 मीटर, वर्तमान जलस्तर: 624.70 मीटर

जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के मचैल माता यात्रा मार्ग पर बादल फटा, 15 लोगों की मौत की आशंका

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में मचैल मट्टा यात्रा के रास्ते में पड्डेर सब डिवीजन के चिशोती गांव में बादल फटने से भारी तबाही मची है। जानकारी के अनुसार बादल फटने से 12-15 लोगों के मरने की सूचना है।

यह घटना मछेल माता यात्रा के मार्ग पर स्थित पदर उपखंड में हुई है। बचाव कार्य जारी है। प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेने के लिए टीमों को भेजा है। जानकारी के अनुसार, बादल फटने की घटना के बाद चिशोती गांव में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा है। जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। दोनों पुल, लकड़ी का पुल और पीएमजीएसवाई पुल, क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

इस हादसे को लेकर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल कार्यालय ने ट्वीट किया है कि “चोसिटी किश्तवाड़ में बादल फटने की घटना से व्यथित हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। सिविल, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ अधिकारियों को बचाव और राहत अभियान को मजबूत करने और प्रभावितों को हर संभव सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।”

जमीनी हकीकत जाने बिना जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि इस मुद्दे पर फैसला लेते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और इन्हें ध्यान में रखना आवश्यक है। इस मामले में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन वर्तमान में वहां कुछ अजीबोगरीब परिस्थितियां बनी हुई हैं। उन्होंने याद दिलाया कि चुनावों के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का आश्वासन पहले ही दिया जा चुका है, परंतु मौजूदा हालात को देखते हुए यह प्रश्न अभी क्यों उठाया जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है।

मेहता ने कोर्ट से आग्रह किया कि सरकार की आधिकारिक राय प्रस्तुत करने के लिए उन्हें 8 हफ्ते का समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई आठ हफ्ते बाद तय करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे पर कोई भी फैसला लेते समय सुरक्षा और स्थिरता के पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जहूर अहमद भट और कार्यकर्ता खुर्शीद अहमद मलिक की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य का दर्जा बहाल करने में लगातार हो रही देरी”जम्मू और कश्मीर के नागरिकों के अधिकारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है और संघवाद की अवधारणा का भी उल्लंघन कर रही है। आवेदकों का तर्क है कि समयबद्ध सीमा के भीतर राज्य का दर्जा बहाल न करना संघवाद का उल्लंघन है, जो संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा है।

पहले की सुनवाई में एसजी मेहता ने अदालत को बताया था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय कोई विशिष्ट समय-सीमा नहीं बता सकता और राज्य का दर्जा बहाल करने में “कुछ समय” लगेगा। मई 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “रिकॉर्ड में कोई त्रुटि स्पष्ट नहीं है” और मामले को खुली अदालत में सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली में बारिश का कहर; एक चलती बाइक पर गिरा 100 साल पुराना पेड़, एक की दर्दनाक मौत

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को हुई झमाझम बारिश अपने साथ एक दर्दनाक हादसा लेकर आई। दक्षिण दिल्ली के कालकाजी इलाके में एक 100 साल पुराना विशाल नीम का पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया, जिसकी चपेट में एक कार और एक चलती हुई बाइक आ गई। हादसे में बाइक चला रहे 55 वर्षीय सुधीर कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पीछे बैठी महिला गंभीर रूप से घायल हो गई।

इस पूरी घटना का एक दिल दहला देने वाला सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि बारिश के कारण सड़क पर पानी भरा हुआ है और वाहनों की आवाजाही जारी है। इसी बीच, सुधीर कुमार एक महिला को पीछे बिठाकर बाइक से गुजर रहे होते हैं, तभी अचानक सड़क के किनारे लगा विशाल पेड़ सीधे उनकी बाइक के ऊपर आ गिरता है। पलक झपकते ही बाइक सवार पेड़ के नीचे दब जाते हैं।

बदल सकता है आवारा कुत्तों को हटाने का फैसला, चीफ जस्टिस करेंगे आदेश की समीक्षा

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाने का जो आदेश दिया गया था उस आदेश की समीक्षा हो सकती है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने आज दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर आवारा कुत्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध पर पुनर्विचार का आश्वासन दिया। मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी एक वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष कॉन्फ्रेंस फॉर ह्यूमन राइट्स (इंडिया) की एक याचिका भी प्रस्तुत की, जिसमें दावा किया गया था कि पशु जन्म नियंत्रण (कुत्ते) नियम, 2001, जो आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी को कम करने के लिए नियमित नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों को अनिवार्य बनाता है, का पालन नहीं किया जा रहा है। दरअसल कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने प्रशासन को आवारा कुत्तों को हटाने के काम काम को करने के लिए 8 हफ्तों का अल्टीमेटम दिया था। कोर्ट के इस आदेश के बाद से ही इसको लेकर कई लोग विरोध तो कई लोग सपोर्ट में उतर आए।

हर घर तिरंगा अभियान: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घर पर फहराया राष्ट्रीय ध्वज

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया है। 15 अगस्त के मद्देनजर भारत सरकार ने देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की है, जिसमें लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। अमित शाह ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान देश को एकता के सूत्र में पिरोने और राष्ट्रप्रेम की भावना को और भी प्रबल बनाने वाला जन-अभियान बन गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पत्नी के साथ अपने आवास की छत पर तिरंगा झंडा लगाया। अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तस्वीरें भी साझा की हैं।

शाह ने लिखा, “आज हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत अपने आवास पर तिरंगा फहराया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज देश को एकता के सूत्र में पिरोने और राष्ट्रप्रेम की भावना को और भी प्रबल बनाने वाला जन-अभियान बन गया है। यह अभियान दर्शाता है कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने त्याग, तप और समर्पण से जिस आजाद भारत का सपना साकार किया था, उसे विकसित और सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए 140 करोड़ देशवासी संकल्पित हैं।”

इसी बीच, दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत जनकपुरी में तिरंगा यात्रा में शामिल हुए। आशीष सूद ने अपने विधानसभा क्षेत्र जनकपुरी के सी1 ब्लॉक से डाबरी चौराह तक पैदल तिरंगा यात्रा निकाली। इस यात्रा में शिक्षा मंत्री आशीष सूद के साथ सांसद कमलजीत सहरावत मौजूद रहीं। कई स्कूलों के बच्चे भी शामिल हुए।

देश में चल रहे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के अंतर्गत नागरिकों को 13 से 15 अगस्त के बीच अपने घरों और कार्यस्थलों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस साल के अभियान में “स्वच्छता ही सेवा है” पहल के अंतर्गत स्वच्छता पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे राष्ट्रीय गौरव और नागरिक जिम्मेदारी दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देशवासियों से इस अभियान से जुड़ने की अपील कर चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी तस्वीरें और सेल्फी ‘हर घर तिरंगा’ की वेबसाइट पर साझा करते रहें।

इस वर्ष RBI का ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल-एसबीआई रिसर्च

एसबीआई रिसर्च की ओर से बुधवार को कहा गया कि अगस्त में मुद्रास्फीति के 2 प्रतिशत से ऊपर और 2.3 प्रतिशत के करीब रहने की संभावना के बीच, अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा दरों में कटौती मुश्किल है। आगे कहा गया कि अगर पहली और दूसरी तिमाही के विकास दर के आंकड़ों को ध्यान में रखा जाए तो दिसंबर में दरों में कटौती भी थोड़ी मुश्किल होगी।

भारत की सीपीआई मुद्रास्फीति जुलाई में 98 महीने के निचले स्तर 1.55 प्रतिशत पर आ गई, जबकि जून में यह 2.10 प्रतिशत और जुलाई, 2024 में 3.60 प्रतिशत थी।जुलाई के आंकड़े लगातार नौवें महीने गिरावट का संकेत दे रहे हैं, मुख्य रूप से खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट के कारण, जो 78 महीने के निचले स्तर पर है। जून 2025 की तुलना में जुलाई में खाद्य मुद्रास्फीति में 75 आधार अंकों की गिरावट आई।

रिपोर्ट के अनुसार, कोर मुद्रास्फीति में भी तेजी से गिरावट आई और पिछले 6 महीनों में पहली बार यह 4 प्रतिशत से नीचे (3.94 प्रतिशत) रही। सोने की कीमतों को छोड़कर, कोर मुद्रास्फीति जुलाई 2025 में 3 प्रतिशत से कम होकर 2.96 प्रतिशत हो गई, जो हेडलाइन कोर सीपीआई से लगभग 100 आधार अंकों कम है।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में भारतीय उद्योग जगत, लगभग 2,500 सूचीबद्ध संस्थाओं ने 5.4 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि दर्ज की, जबकि ईबीआईडीटीए में लगभग 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

एसबीआई की रिपोर्ट में कहा गया है, “दूसरी तिमाही में, निर्यात-उन्मुख टैरिफ प्रभावित क्षेत्रों जैसे कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, चमड़ा, रसायन, कृषि, ऑटो कंपोनेंट आदि में राजस्व और मार्जिन पर दबाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति (मौसमी रूप से समायोजित नहीं) में भी जुलाई में सालाना आधार पर 2.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो अप्रैल की तुलना में 40 आधार अंक अधिक है, जो टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।”

जब से आरबीआई एमपीसी ने जून में दरों में कटौती और अगस्त में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला किया है, 10-ईयर यील्ड में वृद्धि शुरू हो गई है।

जुलाई में 6.30 प्रतिशत के आसपास रहने के बाद, यह अब 6.45 प्रतिशत के स्तर को पार कर गया है। जब तक टैरिफ के संबंध में स्पष्टता नहीं आ जाती, बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं आ सकती।

रिपोर्ट में कहा गया है, “इस संदर्भ में हम फिर से इस बात पर जोर देना चाहते हैं कि यील्ड कर्व एक सार्वजनिक हित है। भारतीय बाजारों में, डेट बाजार के प्लेयर्स का अलग व्यवहार आम बात है।”

उदाहरण के लिए, अगर एक समूह आरबीआई की मौद्रिक नीति के रुख के साथ प्रोसाइक्लिकली रूप से कार्य करता है, तो दूसरा समूह काउंटरसाइक्लिकली रूप से कार्य करता है और कभी-कभी दोनों समूह आक्रामक रूप से कार्य करते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “हालांकि, जून पॉलिसी की घोषणा के बाद, लगभग सभी बाजार पार्टिसिपेंट्स एक ही तरह से बिकवाली/व्यवहार कर रहे हैं। यह आश्चर्यजनक है और इसके परिणामस्वरूप 8 साल के निचले स्तर पर मुख्य मुद्रास्फीति के बावजूद कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।”

सजा की अवधि से अधिक समय तक जेल में बंद दोषी को तत्काल रिहा करें: सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा कि कोई दोषी व्यक्ति सजा की निर्धारित अवधि पूरी करने के बाद भी जेल में बंद है और किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने 2002 के नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान को रिहा करने का आदेश देते हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि यादव ने इस साल मार्च में बिना किसी छूट के 20 साल की सजा पूरी कर ली है।

पीठ ने इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह सचिवों को निर्देश दिया कि वे यह पता करें कि कोई दोषी व्यक्ति सजा की निर्धारित अवधि से अधिक समय तक जेल में बंद तो नहीं है। यदि कोई दोषी व्यक्ति किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है और निर्धारित अवधि से अधिक समय तक जेल में बंद हैं तो जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे शीघ्र रिहा किया जाए।

पीठ ने कहा कि न्यायालय के इस आदेश को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को भेजा जाए ताकि इससे राज्यों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों अवगत कराया जा सके।

‘कैश कांड’ में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा पर चलेगा महाभियोग

‘कैश कांड’ मामले में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक तीन सदस्यीय जांच समिति के गठन की घोषणा कर दी है। यह समिति जस्टिस वर्मा पर लगे आरोपों की जांच करेगी।

लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित की गई इस उच्च-स्तरीय समिति में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, एक हाईकोर्ट के न्यायाधीश और एक वरिष्ठ कानूनविद को शामिल किया गया है। समिति के सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मनिंदर मोहन श्रीवास्तव और जाने-माने कानूनविद बी.वी. आचार्य का नाम शामिल है।

यह हाई-प्रोफाइल मामला इसी साल 14 मार्च, 2025 को सामने आया था, जब जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लग गई थी। आग बुझाने के बाद मौके से भारी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी, जिसके बाद न्यायपालिका में हड़कंप मच गया था। घटना के समय जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में कार्यरत थे और बाद में उनका तबादला इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया था।

पिछले महीने, कांग्रेस, बीजेपी, जेडीयू और टीडीपी समेत कई दलों के लोकसभा सांसदों ने एक साथ मिलकर अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंपा था और जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मांग की थी। इससे पहले, एक आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की थी। अब जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर सदन में महाभियोग प्रस्ताव पर आगे की कार्रवाई तय होगी।