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लखीमपुर खीरी मामले में केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली जमानत

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में शुक्रवार केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र आशीष मिश्रा को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत नहीं मिली है। इस मामले की सुनवाई के दौरान आज सर्वोच्च अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।

याद रहे पिछले साल 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया थाना क्षेत्र में हिंसा के दौरान 8 लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना तब हुई जब केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के इलाके के दौरे का विरोध कर रहे थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार 4 किसानों को एक एसयूवी ने कुचल दिया, जिसमें आशीष मिश्रा बैठे थे। घटना के बाद गुस्साए किसानों ने चालक और दो भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी।

इस हिंसा में एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। अब अदालत ने इस अमले में आशीष मिश्रा को जमानत नहीं दी है।

बंगाल के एससीसी भर्ती घोटाले में सीबीआई जांच के हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये के कथित भर्ती घोटाले के मामले में सीबीआई जांच कराने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा गया था।

इस मामले पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत की प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की बेंच ने एससीसी भर्ती घोटाले में पश्चिम बंगाल के प्रमुख सचिव मनीष जैन की व्यक्तिगत पेशी पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।

बेंच का यह आदेश गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के उस फैसले के बाद आया है जिसमें उसने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा था। इस फैसले में  सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले में स्कूल सेवा आयोग में सीबीआई की जांच का आदेश दिया गया था।

याद रहे अदालत के आदेश पर सरकारी स्कूलों में ग्रुप डी के कर्मचारियों से जुड़े कथित भर्ती घोटाले की सीबीआई पहले से ही जांच कर रही है। अब अदालत ने मामले में नोटिस जारी कर तीन हफ्ते में जवाब मांगा है।

राहुल की यात्रा में जुड़ा अमेरिकी छात्र; कांग्रेस का झंडा उठाया, कहा यात्रा का उद्देश्य उन्हें पसंद है

राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में अभी तक सेलेब्रेटी ही शामिल हो रहे थे। लेकिन अब एक अमेरिकी नागरिक भी इसमें शामिल हुआ है। मध्य प्रदेश पहुँची यात्रा में शामिल अमेरिकी नागरिक का नाम ग्रांट है और उनका कहना है कि राहुल गांधी का एकता का संदेश उन्हें पसंद है।

ग्रांट भारत में तालीलनाड की यूनिवर्सिटी में इतिहास में पीएचडी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस का झंडा भी उठाया है और कहा कि राहुल गांधी की इस यात्रा का मकसद/संदेश उन्हें बहुत पसंद है। इसलिए वे इसके साथ जुड़े हैं।

अमेरिकी छात्र के मुताबिक राहुल गांधी का यूनीफाइड करने वाला आंदोलन उनको पसंद है इसलिए वे इसमें शामिल हुए हैं। ग्रांट ने कहा – ‘इस यात्रा का मकसद बिल्कुल  साफ़ है भारत को जोड़ना। इसके अच्छे मैसेज को देखते हुए मैं इसमें शामिल हुआ हूं।’

यात्रा का आज मध्य प्रदेश दिन है और प्रियंका गांधी अभी भी इसमें राहुल गांधी के साथ चल रही हैं। पार्टी के महासचिव दिग्विजय सिंह भी साथ हैं। वे इस यात्रा का संयोजन भी कर रहे हैं।

अभी तक मध्य प्रदेश में भी दक्षिण राज्यों और महाराष्ट्र की तरह  राहुल गांधी और यात्रा को जबरदस्त समर्थन मिला है। उनके मध्य प्रदेश आने पर भाजपा में चले गए कांग्रेस नेता और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि ‘राहुल का मध्य प्रदेश में स्वागत है।’

गलत तरीके से लिखे गए इतिहास को हमें दोबारा लिखने से कोई नहीं रोक सकता- अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम सरकार के दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा, “मैं इतिहास का विद्यार्थी हूं, और कई बार सुनने को मिलता है कि हमारा इतिहास सलीके के प्रस्तुत नहीं किया गया, तथा उसे तोड़ा-मरोड़ा गया है…शायद यह बात सच है, लेकिन अब हमें इसे ठीक करना होगा…”

गृहमंत्री ने 17वीं शताब्दी के अहोम जनरल लचित बरफुकन की 400 वीं जयंती पर आयोजित तीन-दिवसीय समारोह के दूसरे दिन यह सब कहा उन्होंने इतिहासकारों से कहा है कि वे इतिहास को भारतीय संदर्भ में दोबारा लिखें साथ ही उन्हें आश्वासन भी दिया है कि सरकार उनके प्रयासों को पूरा समर्थन देगी।

उन्होंने आगे कहा कि, “मैं आपसे पूछता हूं- हमारे इतिहास को सही तरीके से और गौरवशाली तरीके से प्रस्तुत करने से हमें कौन रोक रहा है.. उन्होंने कहा, मैं यहां मौजूद सभी विद्यार्थियों और यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों से आग्रह करता हूं कि हमें इस चीज को लोगों के दिमाग से निकालना होगा कि हमारे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, और उन्हें भारत के किसी भी भाग में 150 वर्ष से ज्यादा शासन करने वाले 30 साम्राज्यों और मुल्क की आजादी के लिए संघर्ष करने वाली 300 हस्तियों पर शोध करनी चाहिए।”

दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित इतिहासकारों और विद्यार्थियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने आगे कहा कि केंद्र उनकी शोध को पूरा समर्थन देगा। आगे आइए, शोध कीजिए और इतिहास को दोबारा लिखिए…इसी तरह हम अपनी अगली पीढ़ियों को प्रेरणा दे सकते हैं..”

आपको बता दें, 17वीं शताब्दी के अहोम जनरल लचित बरफुकन की 400वीं जयंती को दिल्ली के विज्ञान भवन में मनाया जा रहा हैं। साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से आग्रह कर कहा कि बरफुकन की पुस्तकों का कम से कम 10 भाषाओं में अनुवाद करवाया जाए जिससे कि देश को लचित के साहस और बहादुरी के बारे में जानकारी पूर्ण रूप से प्राप्त हो सकें।

राजधानी दिल्ली की जामा मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध

राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद के तीनों एंट्री गेट पर एक नोटिस द्वारा लड़कियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गर्इ हैं। इस नोटिस में लिखा है कि, ‘जामा मस्जिद में लड़कियों का अकेले दाखिल होना मना हैं’

इसका सीधा सा मतलब यह है कि लड़की के साथ यदि कोई पुरुष अभिभावक नहीं है, तो उन्हें मस्जिद में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वहीं इस पर विवाद छिड़ गया हैं।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने जामा मस्जिद के प्रबंधन के इस फैसले की आलोचना करते हुए मुख्य इमाम को नोटिस जारी करने की बात कही है उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, “जामा मस्जिद में महिलाओं की एंट्री रोकने का फैसला बिल्कुल गलत है जितना एक पुरुष को इबादत का हक है, उतना ही एक महिला को भी। मैं जामा मस्जिद के इमाम को नोटिस जारी कर रही हूं। इस तरह महिलाओं की एंट्री बैन करने का अधिकार किसी को भी नहीं हैं।”

वहीं दूसरी तरफ जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कहा है कि नमाज पढ़ने के लिए आने वाली महिलाओं को नहीं रोका जाएगा। ऐसी शिकायतें आ रही थीं कि लड़कियां अपने प्रेमियों के साथ मस्जिद में आती हैं। और यदि कोई महिला जामा मस्जिद आना चाहती है तो उसे अपने परिवार या पति के साथ आना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि, महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित नहीं है जब लड़कियां अकेले आती हैं, तो अनुचित हरकतें करती हैं, वीडियो शूट करती हैं इसे रोकने के लिए बैन है। परिवारों और विवाहित जोड़ों पर कोई प्रतिबंध नहीं है। धार्मिक स्थलों को अनुपयुक्त बैठक बिंदु बनाना नहीं चाहिए, इसलिए प्रतिबंध हैं।“

आपको बता दें, भारत की कई मस्जिदों में महिलाओं की एंट्री बैन हैं। जबकि मुस्लिम धर्मगुरूओं के मुताबिक इबादत को लेकर इस्लाम महिला व पुरुष में कोई भी फर्क नहीं करता और मक्का, मदीना व यरुशलम की अल अक्सी मस्जिद में भी महिलाओं की एंट्री बैन नहीं हैं इबादत का हक जितना पुरूषों को है उतना ही महिलाओं को भी।

इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी लंबित है। यह याचिका पुणे की एक मुस्लिम दंपती यास्मीन जुबेर पीरजादे और उनके पति जुबेर अहमद पीरजादे ने दाखिल की है। पीआईएल में मांग की गर्इ है कि देशभर के मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए, क्योंकि उनकी एंट्री बैन करना असंवैधानिक है साथ ही समानता का अधिकार व जेंडर जस्टिस का उल्लंघन है।

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद असीम मुनीर पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख नियुक्त

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल सैयद असीम मुनीर पाकिस्तान सेना नए चीफ होंगे। वे जनरल कमर जावेद बाजवा की जगह लेंगे जो इसी 29 को रिटायर हो रहे हैं। उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का विरोधी माना जाता है। इमरान खान ने उन्हें आईएसआई चीफ के पद से हटाकर फैज़ हमीद को आईएसआई प्रमुख बनाया था।

लेफ्टिनेंट जनरल मुनीर को भारत विरोधी भी माना जाता है और कई रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि 2019 में पुलवामा हमले के पीछे कथित रूप से मुनीर का हाथ था। जनरल मुनीर ने पूर्व पीएम इमरान खान के इर्द-गिर्द कथित भ्रष्टाचार की बात की थी जिसके बाद इमरान ने उन्हें पद से हटा दिया था। मुनीर जनरल बाजवा के पसंदीदा अधिकारी माने जाते रहे हैं। वे जनरल बाजवा के अधीन ब्रिगेडियर रहे हैं।

मुनीर की नियुक्ति की जानकारी पाकिस्तान की मंत्री मरियम औरंगजेब ने एक ट्वीट में दी। ट्वीट में उन्होंने कहा – ‘प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सैयद असीम मुनीर को नया आर्मी चीफ नियुक्त किया है। इस बारे में राष्ट्रपति को सूचित कर दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को चेयरमैन ऑफ ज्वाइंट चीफ्स नियुक्त किया है।’

लेफ्टिनेंट जनरल साहिर, जनरल राहिल शरीफ के समय में डायरेक्टर मिलिट्री ऑपरेशंस के तौर पर उस कोर टीम का हिस्सा थे, जिसने नॉर्थ वजीरिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान के खिलाफ ऑपरेशन चलाया था। असीम 2018 से 2019 के बीच आठ महीने तक आईएसआई के प्रमुख रहे थे। इमरान खान ने फैज हमीद को आईएसआई चीफ बनाने के बाद मुनीर को गुजरांवाला कॉर्प्स कमांडर के तौर पर  ट्रांसफर कर दिया था।

असीम को 2018 में टू-स्टार जनरल के रैंक पर प्रमोट किया गया था, लेकिन उन्होंने इस पोस्ट को 2 महीने बाद जॉइन किया। लेफ्टिनेंट जनरल के तौर पर उनका 4 साल का कार्यकाल 27 नवंबर को खत्म होगा। फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट के जनरल मुनीर सबसे सीनियर थ्री स्टार जनरल हैं।

लंदन की जेल में बंद भगोड़े कारोबारी नीरब मोदी की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अर्जी

लंदन के वैंड्सवर्थ कारागार में बंद भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने वहां की निचली अदालत (उच्च न्यायालय) अर्जी डालकर अपने भारत प्रत्यर्पण के आदेश के खिलाफ ब्रिटेन के सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की मंजूरी मांगी है।

बता दें नीरव अभी लंदन के वैंड्सवर्थ कारागार में बंद है और वहां के हाई कोर्ट ने पंजाब नेशनल बैंक ऋण घोटाले के मामले में करीब दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी और धनशोधन के आरोपों का सामना करने के लिए हाल ही में नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने का आदेश दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नीरव को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के रास्ते में अभी भी ढेरों कानूनी अड़चनें हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से काम कर रही क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के अब नीरव के नए आवेदन का जवाब देने की उम्मीद है, जिसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश लिखित में फैसला देंगे।

नीरव के पास आम जनता के हित से जुड़े कानून के एक बिंदु के आधार पर उसके पास अपील दायर करने के लिए दो हफ्ते का वक्त है। क्रिसमस की छुट्टियों के चलते यह मामला लंबा खिंच सकता है।

अलग राज्य की मांग कर केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में अलगाववाद को उकसा रही: ममता

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि केंद्र में सत्ता में बैठी भाजपा एक अलग राज्य की मांग उठाकर पश्चिम बंगाल में अलगाववाद को उकसाने की कोशिश कर रही है। तृणमूल नेता ने हालांकि कहा कि वह कभी भी बंगाल के विभाजन की अनुमति नहीं देंगी।

बनर्जी ने साथ ही जनता से आग्रह किया है कि उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज हो, अन्यथा उन्हें राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के नाम पर डिटेंशन कैंप (हिरासत शिविरों) में भेज दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा – ‘वोटर लिस्ट में अपडेट और करेक्शन का काम चल रहा है। यह प्रक्रिया 5 दिसंबर तक चलेगी। मैं सभी लोगों से आग्रह करती हूं कि वोटर लिस्ट में आपका नाम हो, वरना आपको एनआरसी का नाम लेकर डिटेंशन कैंप में भेज दिया जाएगा।’

ममता ने कहा कि कभी-कभी लोगों को कहा जाता है कि वे भारतीय नागरिक नहीं हैं, लेकिन अगर वे नहीं हैं, तो उन्होंने वोट कैसे दिया? ममता ने कहा – ‘आप हमारे वोटों के कारण पीएम बने और आज आप कह रहे हैं कि आप हमें नागरिकता अधिकार प्रदान करेंगे इसका क्या मतलब है? क्या आप हमारा अपमान नहीं कर रहे हैं?’

याद रहे पहले भी ममता बनर्जी इस बात पर जोर दे चुकी हैं कि वह पश्चिम बंगाल में सीएए को कभी लागू नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा आगामी गुजरात विधानसभा चुनावों पर नजर रखते हुए सीएए और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर बयानबाजी कर रही है।

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा में सहभागी बनीं प्रियंका गांधी, मध्य प्रदेश कांग्रेस में उत्साह

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में गुरूवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी जुड़ गईं। यात्रा मध्य प्रदेश के खंडवा के बोरगांव बुजुर्ग से शुरू हुई और प्रियंका 23 किलोमीटर तक राहुल के साथ चलेंगी। वह पहली बार यात्रा में पहुँची हैं जबकि सोनिया गांधी पहले ही एक दिन तक पद यात्रा में चल चुकी हैं।

यात्रा कल मध्य प्रदेश पहुँची थी जहाँ बड़ी  और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उसका स्वागत किया था। राहुल के साथ मध्यप्रदेश कांग्रेस के सभी बड़े नेता भी हैं। राहुल गांधी रुस्तमपुर में टंट्या भील की जन्मस्थली जाएंगे और जनसभा को भी संबोधित करेंगे। उसके बाद यात्रा का डूल्हार के गुरुद्वारा में दोपहर का भोजन होगा।

प्रियंका गांधी पहली बार भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ी हैं। उनके साथ पति रॉबर्ट वाड्रा और बेटे रेहान वाड्रा भी हैं। यात्रा में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार भी साथ हैं। रुस्तमपुर से यात्रा छैगांव माखन के लिए चलेगी, वहां नुक्कड़ सभा के बाद दूसरे दिन का सफर खत्म हो जाएगा। रात्रि विश्राम खरगोन जिले के खेरदा में होगा।

राहुल की भारत जोड़ो यात्रा मध्य प्रदेश में 12 दिन तक 6 जिलों से गुजरते हुए 4 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश करेगी। यात्रा के दौरान राहुल गांधी रुस्तमपुर गांव में एक ढाबे पर चाय पीने के लिए भी रुके, जहाँ लोगों की काफी भीड़ थी। यात्रा 6 राज्यों का सफर तय करके मध्यप्रदेश पहुँची है। यात्रा में कांग्रेस सेवा दल भी साथ चल रहा है

हमें ऐसा सीईसी चाहिए, जो पीएम के खिलाफ भी कार्रवाई कर सके – सुप्रीम कोर्ट

निर्वाचन आयोग ईसी की नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सवालों के जवाब केंद्र ने दिए हैं सुप्रीम कोर्ट के आरोप पर कि वर्ष 2007 के बाद से सभी सीईसी का कार्यकाल छोटा किया गया, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि हर बार नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर ही की जाती है एक मामले को छोड़कर हमें चुनाव आयोग में व्यक्ति के पूरे कार्यकाल को देखने की जरूरत है न कि सिर्फ सीईसी के रूप में। 2, 3 अलग उदाहरणों को छोड़कर पूरे बोर्ड में वह कार्यालय 5 साल का रहा है इसलिए मुद्दा यह है कि कार्यकाल की सुरक्षा को लेकर कोई समस्या नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाते हुए एक उदाहरण के साथ सरकार से पूछा कि, कभी किसी प्रधानमंत्री पर आरोप लगे तो क्या आयोग ने उनके खिलाफ एक्शन लिया हैं?

संविधान पीठ में जस्टिस जोसफ ने टिप्पणी की है कि हमें मौजूदा दौर में ऐसे सीईसी की आवश्यकता है जो कि पीएम के खिलाफ भी शिकायत मिलने पर एक्शन ले सके। साथ ही कोर्ट ने पूछा कि क्या यह सिस्टम का पूर्ण रूप से ब्रेकडाउन नहीं हैं? संविधान और जनविश्वास के मुताबिक, सीईसी को राजनीतिक प्रभाव से अछूता माना जाता हैं। उसे स्वायत्ता और स्वतंत्र होना चाहिए। साथ ही आयुक्तों के चयन के लिए एक स्वतंत्र निकाय होना चाहिए। सिर्फ कैबिनेट की मंजूरी ही काफी नहीं हैं। नियुक्ति कमेटियों का कहना है कि बदलाव की सख्त जरूरत है राजनेता भी ऊपर से चिल्लाते है लेकिन कुछ नहीं होता।

संविधान पीठ ने सरकार से यह भी कहा कि आप निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी समझाएं हमें। हाल ही में आपने एक आयुक्त की नियुक्ति की है अभी तो आपको सब याद होगा, किस प्रक्रिया के तहत आपने उनको नियुक्त किया है?

बता दें जस्टिस केएम जोसफ के बाद जस्टिस अजय रस्तोगी ने भी निर्वाचन आयुक्तों की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और कहा कि आपने इसकी न्यायपालिका से तुलना की है। और न्यायपालिका में भी नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव आए है। मौजूदा सिस्टम में अगर खामी हो तो उसमें सुधार और बदलाव लाजिमी है। सरकार जो जज और सीजेआई की नियुक्ति करती थी तब भी महान न्यायाधीश बने, लेकिन प्रक्रिया पर सवालिया निशान थे, प्रक्रिया बदल गर्इ।

वहीं जस्टिस रस्तोगी ने सरकार से पूछा कि आप निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करते समय सिर्फ नौकरशाहों तक ही सीमित क्यों रहते हैं? अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ये तो एक अलग बहस हो जाएगी। यदि किसी मामले में कोई घोषणा पत्र है तो हम उसका पालन कैसे नहीं करेंगे? इससे पहले अटॉर्नी जनरल ने कहा कि सरकार पिक एंड चूज यानी मनपसंद अफसर को उठा कर ही नियुक्त कर देती है ऐसा नहीं हैं