Home Blog Page 3

ईरान- अमेरिकी युद्ध की आंच अब इंटरनेट तक, केबल कटी तो दुनिया भर में ‘डिजिटल ब्लैकआउट’ का खतरा

सबमरीन केबल्स के नुकसान से हो सकती है दुनिया की 95% इंटरनेट सप्लाई प्रभावित। (Image: Getty)
सबमरीन केबल्स के नुकसान से हो सकती है दुनिया की 95% इंटरनेट सप्लाई प्रभावित। (Image: Getty)

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब दुनिया के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। Iran और United States के बीच टकराव का असर इंटरनेट सेवाओं पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समुद्र के नीचे बिछी सबमरीन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

दरअसल, आज के समय में करीब 95 फीसदी इंटरनेट इन्हीं केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स समुद्र के अंदर हजारों किलोमीटर तक फैली होती हैं और अलग-अलग देशों को जोड़ती हैं। अगर युद्ध के दौरान इन्हें निशाना बनाया गया, तो कई देशों में इंटरनेट या तो बेहद धीमा हो सकता है या पूरी तरह बंद भी हो सकता है।

इसका सबसे ज्यादा खतरा Strait of Hormuz और लाल सागर जैसे इलाकों में है। ये रूट एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व को जोड़ते हैं और यहां से दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक गुजरता है। अगर यहां कोई बड़ी घटना होती है, तो इसका असर सीधे बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट, ई-कॉमर्स और क्लाउड सेवाओं पर पड़ेगा।

इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर भी इंटरनेट पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर केबल्स कट जाती हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। कई बड़े प्रोजेक्ट, जैसे अंतरराष्ट्रीय केबल नेटवर्क, पहले ही असुरक्षा के कारण प्रभावित हो चुके हैं।

पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब समुद्र के नीचे केबल्स कटने से इंटरनेट सेवाएं ठप हो गई थीं। इन्हें ठीक करने में कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है, क्योंकि समुद्र के अंदर मरम्मत करना बेहद मुश्किल होता है।

मौजूदा हालात से यह साफ है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की डिजिटल जिंदगी पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है।

बिहार में बड़ा सियासी बदलाव, नीतीश कुमार और नितिन नवीन ने दिया इस्तीफा, नए CM पर चर्चा तेज

नीतीश कुमार और नितिन नवीन ने दिया इस्तीफा - फोटो क्रेडिट : अमर उजाला
नीतीश कुमार और नितिन नवीन ने दिया इस्तीफा - फोटो क्रेडिट : अमर उजाला

नई दिल्ली: Bihar में आज एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एमएलसी पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा की नई पारी शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen ने भी एमएलए पद से इस्तीफा दे दिया है, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला लिया जाएगा। फिलहाल, इस मुद्दे पर सियासी चर्चाएं तेज हैं और अलग-अलग नामों पर कयास लगाए जा रहे हैं।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा और अनुभव भरा रहा है। उन्होंने 1985 में विधायक के रूप में राजनीति में कदम रखा और फिर लोकसभा से लेकर विधान परिषद तक कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। अब वे राज्यसभा सदस्य के तौर पर नई भूमिका में नजर आएंगे। खास बात यह है कि वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जो चारों सदनों के सदस्य रह चुके हैं।

इस्तीफे से पहले पटना में मुख्यमंत्री आवास पर जेडीयू नेताओं की बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। इस बैठक में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए, जिससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

दूसरी ओर, नितिन नवीन भी लंबे समय से पटना की बांकीपुर सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। अब उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव होना तय माना जा रहा है।

नीतीश कुमार के इस फैसले ने बिहार की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाएगी और आने वाले समय में सियासी समीकरण कैसे बदलते हैं।

होर्मुज की ‘नस’ पर ईरान की पकड़, केशम द्वीप बना सबसे बड़ा ‘ट्रंप कार्ड’

होर्मुज की ‘नस’ पर ईरान की पकड़... लेकिन सबसे अहम केशम द्वीप... (Hormuz strait AI Image )
होर्मुज की ‘नस’ पर ईरान की पकड़... लेकिन सबसे अहम केशम द्वीप... (Hormuz strait AI Image )

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Strait of Hormuz सबसे अहम केंद्र बन गया है। इसी बीच विशेषज्ञों का कहना है कि असली ताकत Qeshm Island में छिपी है, जो ईरान की रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा बन चुका है।

फारस की खाड़ी में स्थित यह द्वीप आकार में बड़ा होने के साथ-साथ रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह Bandar Abbas के पास स्थित है और यहीं से होर्मुज स्ट्रेट के संकरे रास्ते पर नजर रखी जा सकती है। यही वजह है कि ईरान ने इस इलाके को सैन्य रूप से काफी मजबूत कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस द्वीप के नीचे बड़े स्तर पर भूमिगत सैन्य नेटवर्क तैयार किया गया है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने यहां ‘मिसाइल सिटी’ जैसे ठिकाने बनाए हैं, जहां से किसी भी हमले का तुरंत जवाब दिया जा सकता है। इन ठिकानों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे हवाई हमलों से भी सुरक्षित रह सकें।

इतना ही नहीं, यहां कई तरह की घातक मिसाइलें भी तैनात बताई जाती हैं, जो समुद्री जहाजों को निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा, द्वीप के आसपास गुप्त नौसैनिक अड्डे भी बनाए गए हैं, जहां तेज रफ्तार हमलावर नावें मौजूद हैं। ये नावें जरूरत पड़ने पर अचानक हमला करने की क्षमता रखती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पूरी तरह नाकेबंदी करने की बजाय “नियंत्रित दबाव” की रणनीति अपना रहा है। यानी जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद नहीं की जा रही, लेकिन उन्हें तय रास्तों से गुजरने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

Qeshm Island ईरान के लिए एक मजबूत सैन्य और रणनीतिक केंद्र बन चुका है। यही कारण है कि इस इलाके में बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई और व्यापार पर पड़ सकता है।

US रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, पाकिस्तान में पल रहे आतंकी नेटवर्क, कश्मीर पर मंडरा रहा खतरा

Pakistan की जमीन पर करीब 15 आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं। - US रिपोर्ट
Pakistan की जमीन पर करीब 15 आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं। - US रिपोर्ट

नई दिल्ली: अमेरिकी संस्था Congressional Research Service (CRS) की हालिया रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, Pakistan की जमीन पर करीब 15 आतंकी संगठन अब भी सक्रिय हैं, जो लंबे समय से भारत के खिलाफ साजिशें रचते रहे हैं।

इन संगठनों में Lashkar-e-Taiba, Jaish-e-Mohammed और Hizbul Mujahideen जैसे नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन खास तौर पर Jammu and Kashmir में अशांति फैलाने की कोशिश करते रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन संगठनों से जुड़े हजारों आतंकी पाकिस्तान में मौजूद हैं। इनमें से कुछ समूहों के पास सैकड़ों की संख्या में प्रशिक्षित लड़ाके हैं, जो किसी भी समय हमले की साजिश को अंजाम दे सकते हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह बताई गई है कि इन संगठनों पर कार्रवाई के कई दावों के बावजूद, ये पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। पाकिस्तान ने पहले आतंकवाद के खिलाफ कई ऑपरेशन और योजनाएं शुरू की थीं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक उनका असर सीमित ही रहा है।

CRS की रिपोर्ट यह भी इशारा करती है कि एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ बात करता है, वहीं दूसरी तरफ उसकी जमीन पर ऐसे नेटवर्क सक्रिय बने हुए हैं। इससे उसकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस रिपोर्ट ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर भारत के लिए यह संकेत है कि सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि सीमा पार से खतरे की आशंका अभी भी बनी हुई है।

‘नीतीश के बाद कौन?’, पटना में लगे निशांत के पोस्टरों से गरमाई उत्तराधिकार की बहस

पटना में लगे निशांत के पोस्टरों।
पटना में लगे निशांत के पोस्टरों।

नई दिल्ली: Patna में शनिवार को अचानक ऐसे पोस्टर सामने आए, जिन्होंने बिहार की सियासत को और गरमा दिया। इन पोस्टरों में नीतीश कुमार के बेटे Nishant Kumar को अगला मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।

दरअसल, हाल ही में नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। ऐसे में उन्हें तय समय के भीतर अपनी मौजूदा सदस्यता छोड़नी होगी, जिससे राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी बीच, जेडीयू के कुछ समर्थक चाहते हैं कि नीतीश कुमार के बाद उनकी राजनीतिक विरासत परिवार के भीतर ही बनी रहे।

निशांत कुमार भी हाल के दिनों में राजनीतिक तौर पर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्होंने हाल ही में पार्टी की सदस्यता ली है और लगातार बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा, वे जनता से सीधे जुड़ने के लिए ‘जनता दरबार’ जैसी पहल की तैयारी में भी हैं, जिससे उनकी सक्रियता और बढ़ती दिख रही है।

हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। लेकिन पोस्टरों और बढ़ती गतिविधियों ने अटकलों को जरूर हवा दे दी है।

दूसरी तरफ, Samrat Choudhary का नाम भी संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी और एनडीए के स्तर पर इस पर चर्चा हो सकती है।

बिहार की राजनीति में इस समय ‘नीतीश के बाद कौन?’ सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राज्य की कमान किसके हाथ में जाती है, लेकिन फिलहाल पोस्टर राजनीति ने माहौल को पूरी तरह गरमा दिया है।

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा सियासी हमला, अमित शाह की ‘चार्जशीट’ से ममता सरकार पर बढ़ा दबाव

अमित शाह ने ममता बनर्जी के खिलाफ जारी की जार्जशीट। (फोटो- पीटीआई)
अमित शाह ने ममता बनर्जी के खिलाफ जारी की जार्जशीट। (फोटो- पीटीआई)

नई दिल्ली: West Bengal में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इसी बीच अमित शाह ने कोलकाता में एक ‘अभियोगनामा’ जारी करते हुए Mamata Banerjee की सरकार पर 15 साल के कामकाज को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी इस चार्जशीट को चुनावी हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है।

इस चार्जशीट में कुल 14 बड़े मुद्दों को उठाया गया है, जिनमें भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, बेरोजगारी और शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी समस्याएं शामिल हैं। बीजेपी का आरोप है कि राज्य में सरकारी योजनाओं में घोटाले हुए हैं और “कट मनी” का सिस्टम आम लोगों को प्रभावित कर रहा है।

कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा गया है। आरोप है कि राज्य में अपराध बढ़े हैं और राजनीतिक हिंसा के मामले भी सामने आए हैं। बीजेपी का कहना है कि इससे आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है, जो चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

महिलाओं की सुरक्षा को भी इस चार्जशीट में प्रमुखता से उठाया गया है। पार्टी का दावा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी हुई है, जिसे लेकर सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा बेरोजगारी और उद्योगों में निवेश की कमी को भी बड़ा मुद्दा बताया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा फोकस भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर है। ये ऐसे मुद्दे हैं जो सीधे जनता से जुड़े होते हैं और चुनाव में असर डाल सकते हैं।

चुनाव से पहले इस चार्जशीट ने बंगाल की सियासत को और गरमा दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों का जनता पर कितना असर पड़ता है और ममता बनर्जी की पार्टी इसका जवाब किस तरह देती है।

ईरान जंग के बीच पीएम का भरोसा कहा, आम लोगों पर नहीं पड़ेगा महंगाई का बोझ…

सरकार इस संकट का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ने देगी... - PM | Photo source: BBC News Hindi
सरकार इस संकट का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ने देगी... - PM | Photo source: BBC News Hindi

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। खासकर Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही कम होने से तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। कई देशों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ चुके हैं।

इसी बीच, भारत में स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि सरकार इस संकट का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ने देगी। उन्होंने यह बात नोएडा में जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान कही, जहां उन्होंने लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की।

दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। मौजूदा हालात में इस रास्ते के प्रभावित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिसका असर कई देशों में महंगाई के रूप में दिख रहा है।

भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, Russia समेत अन्य देशों से तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत चल रही है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

सरकार का कहना है कि जरूरी कदम उठाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

वैश्विक स्तर पर चल रहे इस संकट के बीच सरकार की कोशिश है कि देश के अंदर स्थिति सामान्य बनी रहे। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात कैसे बदलते हैं और इसका असर भारत पर कितना पड़ता है।

देश को मिली नई उड़ान, पीएम मोदी ने किया जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन

PM Narendra Modi ने शनिवार को Noida International Airport का उद्घाटन किया।
PM Narendra Modi ने शनिवार को Noida International Airport का उद्घाटन किया।

नई दिल्ल: Narendra Modi ने शनिवार को Noida International Airport का भव्य उद्घाटन किया। इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath समेत कई बड़े नेता और हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। उद्घाटन के साथ ही यह एयरपोर्ट देश के एविएशन सेक्टर में एक नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

कार्यक्रम में भारी भीड़ देखने को मिली। पीएम मोदी के स्वागत के लिए बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं और जनसभा के लिए विशाल पंडाल भी बनाया गया था। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम में लाखों लोगों के पहुंचने की संभावना थी, जिससे पूरे इलाके में उत्साह का माहौल बना रहा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के विकास को नई ऊंचाई देगा। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले विकास की रफ्तार धीमी थी, लेकिन अब “डबल इंजन” की सरकार ने तेजी से काम किया है। उन्होंने इसे राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

Image Source : UP GOVT.

इस एयरपोर्ट की खास बात यह है कि इसे एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करने की योजना है। आने वाले समय में यहां 6 रनवे बनाए जाएंगे, जिससे इसकी क्षमता और बढ़ेगी। साथ ही, कार्गो टर्मिनल और मेंटेनेंस (MRO) सेंटर की शुरुआत से व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

जानकारी के मुताबिक, इस एयरपोर्ट से जल्द ही घरेलू उड़ानें शुरू होंगी और कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स भी चालू हो सकती हैं। इससे दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट आने वाले समय में कनेक्टिविटी, व्यापार और पर्यटन को नई रफ्तार देने वाला साबित हो सकता है।

दोस्ती के नाम पर डबल गेम? होर्मुज विवाद में पाकिस्तान पर ईरान का भरोसा टूटा

पाकिस्तान का दोस्ती के नाम पर डबल गेम?
पाकिस्तान का दोस्ती के नाम पर डबल गेम?

नई दिल्ली: Iran और Pakistan के रिश्तों में इन दिनों खटास देखने को मिल रही है। वजह है होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ा एक विवाद, जिसने दोनों देशों के बीच भरोसे को हिला दिया है। ईरान को लग रहा है कि पाकिस्तान एक तरफ दोस्ती की बात कर रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसे कदम उठा रहा है जिससे अमेरिका को फायदा हो रहा है।

दरअसल, मौजूदा हालात में ईरान ने कुछ ‘दोस्त देशों’ को सीमित रूप से होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी थी। इसी के तहत पाकिस्तान के कुछ तेल टैंकरों को भी रास्ता दिया गया। लेकिन अब खबर सामने आई है कि इन जहाजों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को फायदा पहुंचा। यही बात ईरान को सबसे ज्यादा खटक रही है।

इस पूरे मामले में Donald Trump के बयान ने भी आग में घी डालने का काम किया। ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तानी झंडे वाले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई, जिसे उन्होंने सकारात्मक संकेत बताया। हालांकि, ईरान इसे अपनी रणनीति के खिलाफ मान रहा है और इसे भरोसे के टूटने के तौर पर देख रहा है।

ईरान के नजरिए से यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि हाल ही में उसने पाकिस्तान को अपना दोस्त बताया था। लेकिन अब उसे लग रहा है कि दोस्ती का फायदा उठाकर पाकिस्तान कहीं न कहीं दोहरी चाल चल रहा है। यही वजह है कि तेहरान के राजनीतिक हलकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

वहीं पाकिस्तान लगातार यह कह रहा है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। उसने बातचीत के प्रस्ताव भी आगे बढ़ाए हैं, लेकिन ईरान इन कोशिशों को ज्यादा महत्व नहीं दे रहा। अब तेहरान को पाकिस्तान की नीयत पर ही शक होने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके हालिया कदमों से यह संदेश जा रहा है कि उसका झुकाव अमेरिका और खाड़ी देशों की ओर ज्यादा है। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच भरोसा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

यह मामला सिर्फ एक समुद्री रास्ते का नहीं, बल्कि भरोसे और कूटनीति का है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पाकिस्तान इस अविश्वास को कैसे दूर करता है और अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाता है।

बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत, बांस की खेती बनेगी कमाई का मजबूत सहारा

बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)
बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)

नई दिल्ली: Samastipur समेत बिहार के कई इलाकों में हर साल बाढ़ किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। धान, गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें जलभराव में खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने एक नया और टिकाऊ विकल्प सुझाया है—बांस की खेती।

Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद पाया है कि बांस की कुछ खास किस्में बाढ़ के पानी में भी आसानी से टिक सकती हैं। इनमें बंबूसा बालकोआ, बंबूसा न्यूटन्स और बंबूसा टुल्डा जैसी किस्में शामिल हैं, जो जलभराव की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन किस्मों की खासियत यह है कि ये ज्यादा पानी को सहन कर लेती हैं और जल्दी खराब नहीं होतीं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को एक स्थायी आय का जरिया मिल सकता है। खास तौर पर बंबूसा बालकोआ का सर्वाइवल रेट काफी अच्छा माना गया है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने देशभर से करीब 70 किस्मों पर अध्ययन किया, जिनमें से ज्यादातर ने बेहतर परिणाम दिए। इससे यह साफ हो गया कि अगर सही तकनीक अपनाई जाए, तो बांस की खेती बाढ़ वाले इलाकों में भी सफल हो सकती है।

बांस की खेती का एक और फायदा यह है कि इसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इसका उपयोग निर्माण कार्य, फर्नीचर, सजावटी सामान और हस्तशिल्प बनाने में होता है। यानी किसान इसे बेचकर अच्छी कमाई भी कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने खेती की तकनीक भी बताई है। उनके अनुसार, बांस के पौधों के बीच करीब 6 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। शुरुआती समय में खाली जगह पर सब्जियां उगाकर किसान अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं।

बाढ़ से जूझ रहे किसानों के लिए बांस की खेती एक मजबूत और फायदेमंद विकल्प बनकर सामने आ रही है। अगर किसान इसे सही तरीके से अपनाते हैं, तो हर साल होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।