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‘यौन शोषण’ मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी

इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगाई अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी
इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगाई अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी

नई दिल्ली: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दाखिल की है। उन पर नाबालिग बच्चों से यौन शोषण और अन्य गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। इस केस को लेकर अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीते एक साल के दौरान दो लोगों के साथ यौन शोषण किया गया, जिनमें एक नाबालिग बच्चा भी शामिल है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उन्हें बदनाम करने की साजिश है। उनका दावा है कि शिकायतकर्ता खुद हिस्ट्रीशीटर है और जांच अधिकारी भी उसके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्वामी ने कहा, “जिन बच्चों से यौन शोषण का आरोप लगाया जा रहा है, वे मुझसे जुड़े हुए नहीं हैं और न ही मैं उन्हें जानता हूं।”

अग्रिम ज़मानत की अर्जी में उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए, ताकि वे जांच में सहयोग कर सकें। उनके वकीलों का कहना है कि आरोप बिना ठोस सबूतों के लगाए गए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया है क्योंकि इसमें नाबालिग से जुड़े आरोप शामिल हैं। ऐसे मामलों में कानून काफी सख्त है और अदालत भी हर पहलू को ध्यान से देखती है।

अब ‘केरलम’ कहलाएगा केरल राज्य, सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट की पहली बैठक का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: देश के दक्षिणी राज्य केरल को अब नए नाम से पहचाना जाएगा। केंद्र सरकार ने सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य का नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब आधिकारिक दस्तावेजों में राज्य का नाम केरलम लिखा जाएगा।

इस बदलाव की पहल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने वर्ष 2024 में की थी। उनका कहना था कि मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से “केरलम” कहा जाता रहा है, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम “केरल” दर्ज है। इसलिए राज्य सरकार चाहती थी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम “केरलम” किया जाए।

25 जून 2024 को केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को दूसरी बार पारित किया था। इससे पहले गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी सुझाव दिए थे, जिनके बाद प्रस्ताव में जरूरी संशोधन किए गए। विधानसभा ने केंद्र से अनुरोध किया था कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य के नाम में औपचारिक बदलाव किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि आज़ादी के आंदोलन के समय से ही मलयालम भाषी क्षेत्रों को मिलाकर “संयुक्त केरल” बनाने की मांग होती रही है। उस समय भी राज्य को “केरलम” नाम से ही जाना जाता था। इसलिए यह फैसला केवल नाम बदलने का नहीं, बल्कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने का कदम है।

अब इस फैसले के बाद सरकारी रिकॉर्ड, नोटिफिकेशन और आगे जारी होने वाले दस्तावेजों में राज्य का नाम केरलम लिखा जाएगा। हालांकि आम लोगों की बोलचाल में पहले से ही केरलम शब्द का इस्तेमाल होता रहा है, इसलिए इस बदलाव से जनता को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

इधर, राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा तेज है। केरल विधानसभा के 140 सदस्यों के चुनाव मई से पहले होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी तक भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

लखनऊ यूनिवर्सिटी गेट पर बवाल, नमाज और हनुमान चालीसा को लेकर तनाव

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने जानबूझकर मस्जिद के रास्ते को बंद किया है, जिससे उनकी धार्मिक गतिविधियों में बाधा आ रही है। छात्रों का आरोप है कि यह फैसला बिना बातचीत के लिया गया, जिससे गुस्सा और बढ़ गया। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि लाल बारादरी क्षेत्र में मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग की गई है।

सोमवार को विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में नारेबाजी और बहस होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को मौके पर तैनात किया गया और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

इस पूरे मामले में लाल बारादरी में नमाज़ पढ़ने को लेकर 13 छात्रों को नोटिस भी जारी किया गया है। इन छात्रों पर सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करने और शांति भंग करने की आशंका जताई गई है। उन्हें निजी मुचलके पर जमानत भरने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के बाद लाल बारादरी इमारत की मरम्मत शुरू हुई थी। इसी वजह से वहां बैरिकेडिंग लगाई गई थी। लेकिन यह कदम अब विवाद की जड़ बन गया है।

फिलहाल लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल तैनात है और छात्रों को समझाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने अपील की है कि सभी छात्र शांति बनाए रखें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें। हालांकि, गेट खोलने की मांग पर अड़े छात्रों के कारण हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

भोजशाला पर बड़ा खुलासा, ASI रिपोर्ट में भगवान शिव समेत कई मूर्तियों के मिले सबूत; मस्जिद का क्या होगा?

ASI की रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसर से बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और स्थापत्य अवशेष मिले हैं। इनमें भगवान शिव, विष्णु, गणेश और वासुकी नाग की आकृतियों के प्रमाण सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1700 से ज्यादा कलाकृतियां मिली हैं, जिनमें स्तंभ, दीवारों के हिस्से, भित्ति चित्र और शिल्पकला के नमूने शामिल हैं। इन सभी का केमिकल ट्रीटमेंट कर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया गया है।

सर्वे में कई शिलालेख संस्कृत, देवनागरी और नागरी लिपि में पाए गए हैं। कुछ शिलालेखों में “श्री सरस्वत्यै नमः” जैसे शब्द दर्ज हैं, जो देवी सरस्वती से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये शिलालेख 11वीं–12वीं सदी के परमार काल से संबंधित हो सकते हैं। स्तंभों और पत्थरों पर कमल, बेलबूटे, कीर्तिमुख और देवी-देवताओं की आकृतियां भी दर्ज की गई हैं।

ASI ने यह भी उल्लेख किया है कि वर्तमान ढांचे में इस्लामी स्थापत्य के तत्व मौजूद हैं। फारसी और अरबी भाषा के कुछ अभिलेख मिले हैं, जो बाद के समय में इसे मस्जिद या दरगाह के रूप में उपयोग किए जाने का संकेत देते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मस्जिद निर्माण में पुराने संरचनात्मक अवशेषों का दोबारा उपयोग किया गया हो सकता है।

ASI की रिपोर्ट ने भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों पहलुओं को सामने रखा है। अब अदालत के सामने दोनों पक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे, जिसके बाद इस संवेदनशील मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। देशभर की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

रेडिसन होटल ग्रुप और एमबीडी ग्रुप ने भारत में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड के विस्तार के लिए मास्टर फ्रेंचाइज़ी समझौते के तहत की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा

रणनीतिक साझेदारी का ढांचा

इस रणनीतिक साझेदारी के तहत एमबीडी ग्रुप पूरे भारत में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड होटलों के विकास को समर्थन देगा। आरएचजी की स्वतंत्र विकास पहलों और व्यापक पार्टनर नेटवर्क के साथ-साथ, एमबीडी ग्रुप चिह्नित और आपसी सहमति वाले स्थानों पर दोनों ब्रांड्स के लिए बिज़नेस डेवलपमेंट, मैनेजमेंट और फ्रेंचाइज़िंग की जिम्मेदारी भी निभाएगा। यह साझेदारी भारत जैसे प्रमुख बाजार में आरएचजी की विकास रणनीति को और मजबूती देगी।

रेडिसन ब्लू एमबीडी नोएडा बनेगा रेडिसन कलेक्शन एमबीडी

इस रणनीतिक साझेदारी के तहत प्रतिष्ठित रेडिसन ब्लू एमबीडी होटल नोएडा, जो क्षेत्र का पहला पांच सितारा होटल है, अब व्यापक उन्नयन (अपग्रेडेशन) के बाद रेडिसन कलेक्शन एमबीडी के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। यह होटल भारत में आरएचजी के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले होटलों में से एक है। यह बदलाव भारत में आरएचजी के लग्ज़री पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत स्थापित लैंडमार्क होटलों को प्रीमियम ब्रांड श्रेणी में उन्नत किया जा रहा है, साथ ही रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड का विस्तार अन्य साझेदारों के नेटवर्क के माध्यम से भी जारी रहेगा।

भारत के लग्ज़री और लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में अगले चरण की वृद्धि
रेडिसन होटल ग्रुप, साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर निखिल शर्मा ने कहा, “भारत का प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी बाजार लगातार मजबूत वृद्धि देख रहा है और समकालीन, डिजाइन-आधारित लाइफस्टाइल अनुभवों की मांग बढ़ रही है। यह रणनीतिक साझेदारी हमें प्रमुख भारतीय बाजारों में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड के विस्तार को और सशक्त करने में मदद करेगी। एमबीडी ग्रुप पिछले दो दशकों से रेडिसन होटल ग्रुप का भरोसेमंद साझेदार रहा है और हम मिलकर इन ब्रांड्स को आगे बढ़ाने तथा यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप विशिष्ट होटल विकसित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

रेडिसन होटल ग्रुप, साउथ एशिया के सीनियर डायरेक्टर (डेवलपमेंट) देवाशीष श्रीवास्तव ने कहा, “यह सहयोग भारत के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में हमारे विकास की गति को समर्थन देता है। एमबीडी टीम के सहयोग से हमें नए अवसरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। एसेट-लाइट मॉडल पर स्पष्ट फोकस के साथ हम दीर्घकालिक ब्रांड वैल्यू बनाए रखते हुए रणनीतिक रूप से विस्तार करने की स्थिति में हैं।”

रणनीतिक दृष्टि और विकास रोडमैप

एमबीडी ग्रुप की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सोनिका मल्होत्रा कंधारी ने कहा, “यह साझेदारी एमबीडी की हॉस्पिटैलिटी यात्रा में एक निर्णायक रणनीतिक मील का पत्थर है। पहले दशक में रेडिसन कलेक्शन एमबीडी और रेडिसन रेड एमबीडी के तहत 50 सह-ब्रांडेड होटलों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से अधिकांश एसेट-लाइट मॉडल के माध्यम से विकसित होंगे। एमबीडी की संपत्ति हिस्सेदारी लगभग 25% रहेगी। रेडिसन कलेक्शन एमबीडी लग्ज़री सेगमेंट में सोच-समझकर चुने गए स्थानों पर स्थापित किया जाएगा, जबकि रेडिसन रेड एमबीडी लाइफस्टाइल सेगमेंट में अधिक आक्रामक विस्तार करेगा। एमबीडी अपनी पैन-इंडिया ब्रांड उपस्थिति, संचालन उत्कृष्टता और देश में सभी रेडिसन होटलों में नंबर-1 लीडरशिप प्रदर्शन की स्थिति का लाभ उठाएगा।”

सोनिका ने आगे कहा कि प्रस्तावित पोर्टफोलियो में लगभग 80% प्रबंधित और फ्रेंचाइज़ी होटल तथा 20% स्वामित्व वाले होटल शामिल होंगे। यह साझेदारी स्केलेबल और एसेट-लाइट विस्तार पर साझा फोकस को दर्शाती है। यह सहयोग रेडिसन होटल ग्रुप की वैश्विक ब्रांड ताकत और एमबीडी ग्रुप की स्थानीय बाजारों की गहरी समझ व संचालन विशेषज्ञता को एक साथ लाता है, ताकि उच्च-स्तरीय लग्ज़री और डिजाइन-आधारित लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

डिजाइन फिलॉस्फी और ब्रांड पोज़िशनिंग

एमबीडी ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर मोनिका मल्होत्रा कंधारी ने कहा, “आज लग्ज़री का अर्थ सौंदर्यपूर्ण परिष्कार और गहन अनुभवों से है। एमबीडी की प्रोजेक्ट डिजाइन और प्रबंधन विशेषज्ञता के माध्यम से हम अतिथि अनुभवों को नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। रेडिसन कलेक्शन एमबीडी कालातीत, सांस्कृतिक रूप से जुड़ी और क्यूरेटेड लग्ज़री को दर्शाएगा, जबकि रेडिसन रेड एमबीडी बोल्ड, जीवंत और सामाजिक रूप से प्रेरित डिजाइन के साथ भारत में लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी को नया स्वरूप देगा। एमबीडी अपनी सांस्कृतिक विरासत को इन ब्रांड्स में समाहित कर भारत में लग्ज़री और लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी की नई परिभाषा गढ़ेगा। हमारा लक्ष्य भारतीय मूल का नंबर-1 लग्ज़री और लाइफस्टाइल ब्रांड बनना है, जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए।”

विरासत और मूल्य-आधारित साझेदारी

एमबीडी ग्रुप के चेयरपर्सन सतीश बाला मल्होत्रा ने कहा, “आरएचजी के साथ हमारा संबंध हमेशा विश्वास और गुणवत्ता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित रहा है। यह विस्तारित साझेदारी हमारे संस्थापक स्वर्गीय श्री अशोक कुमार मल्होत्रा की उस विरासत को दर्शाती है, जिसमें संस्थानों का निर्माण ईमानदारी, उत्कृष्टता और नैतिक मूल्यों के साथ किया गया। हमें भारतीय हॉस्पिटैलिटी परिदृश्य में सार्थक योगदान देने और भारत को विश्व का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में काम करने पर गर्व है।”

रेडिसन होटल ग्रुप और एमबीडी ग्रुप मिलकर भारत में लग्जरी और लाइफस्टाइल गंतव्यों की नई पीढ़ी को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह साझेदारी मालिकों और भागीदारों के लिए दीर्घकालिक, टिकाऊ मूल्य सृजित करेगी और देश के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाएगी, साथ ही आरएचजी की स्वतंत्र विकास पहलों को भी पूरक बनेगी।

अब ट्रेन में खाना पहले से बुक करें, यात्रियों को पसंद आई IRCTC की e-Pantry सेवा

Mail और Express ट्रेनों में आमतौर पर खाने का पैसा टिकट में शामिल नहीं होता, बल्कि यात्रा के दौरान अलग से खरीदना पड़ता है। इसी परेशानी को दूर करने के लिए IRCTC ने e-Pantry सेवा शुरू की है। इस सेवा के तहत यात्री नाश्ता, लंच, डिनर और Rail Neer पहले से बुक कर सकते हैं।

इस सुविधा की शुरुआत सबसे पहले भारत की सबसे लंबी दूरी की ट्रेन विवेक एक्सप्रेस से की गई थी। अब यह सेवा देश की 25 Mail और Express ट्रेनों में उपलब्ध है। अप्रैल 2025 से अब तक इस सेवा के जरिए 65 हजार से ज्यादा मील बुक किए जा चुके हैं। सबसे ज्यादा बुकिंग नाश्ता और डिनर की हुई है। दिसंबर 2025 में सबसे ज्यादा 16,500 मील ऑर्डर किए गए, जिसमें यशवंतपुर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस का बड़ा योगदान रहा।

यात्री IRCTC की वेबसाइट पर टिकट बुक करते समय या “My Transaction” सेक्शन में जाकर e-Pantry का विकल्प चुन सकते हैं। बुकिंग के बाद उन्हें मोबाइल या ईमेल पर एक Meal Verification Code (MVC) मिलता है। यात्रा के दिन यही कोड दिखाकर यात्री अपनी सीट पर खाना प्राप्त कर सकते हैं।

इस सेवा की खास बात यह है कि पूरा भुगतान ऑनलाइन होता है, जिससे नकद लेन-देन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर किसी कारण से खाना समय पर नहीं मिलता, तो यात्री को रिफंड भी दिया जाता है। सभी ऑर्डर डिजिटल सिस्टम से ट्रैक होते हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

IRCTC का कहना है कि यह सुविधा यात्रियों को बेहतर अनुभव देने और Digital India Mission को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब ट्रेन में सफर करते समय खाने की चिंता खत्म हो गई है और यात्रा पहले से ज्यादा आरामदायक बन गई है।

किराया, ई-चालान और नियमों के खिलाफ 28 फरवरी को जंतर-मंतर पर टैक्सी चालकों का आंदोलन

एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट के मुताबिक, दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और पंजाब के ट्रांसपोर्टर भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनका कहना है कि नीतियों और नियमों के कारण ड्राइवरों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

संस्था की सबसे बड़ी चिंता निजी नंबर प्लेट वाली बाइक टैक्सियों को लेकर है। उनका आरोप है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और ऑटो व टैक्सी चालकों की कमाई भी प्रभावित होती है। इसके अलावा ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि कंपनियों का कमीशन बढ़ता जा रहा है लेकिन किराया लगभग वही है, जिससे ड्राइवरों की आय कम हो रही है।

ड्राइवरों ने पैनिक बटन सिस्टम पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई बार यह सिस्टम सही से काम नहीं करता, फिर भी चालान काट दिए जाते हैं। वहीं, बस बॉडी कोड (AIS-153) को पुराने वाहनों पर लागू करने को लेकर भी विरोध है। उनका कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इसके अलावा स्पीड लिमिट डिवाइस, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जबरन शिफ्ट होने का दबाव, और 60 दिन में वाहन को अपने राज्य वापस ले जाने जैसे नियमों को भी समस्या बताया गया है। संगठन ने ई-चालान सिस्टम के जरिए परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया है।

एसोसिएशन का कहना है कि यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री और संबंधित मुख्यमंत्रियों का ध्यान ट्रांसपोर्ट सेक्टर की समस्याओं की ओर खींचने के लिए किया जा रहा है। ड्राइवरों की मांग है कि सरकार इन मुद्दों पर जल्द ठोस फैसला ले, ताकि उन्हें राहत मिल सके और उनका काम सुचारू रूप से चल सके।

मुकुल रॉय के निधन से राजनीतिक जगत में सन्नाटा, नेताओं ने शोक व्यक्त किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शोक जताते हुए कहा कि मुकुल रॉय अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और समाज सेवा के प्रयासों के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया और कहा कि यह राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने संदेश में कहा कि मुकुल रॉय को उनके संगठनात्मक कौशल और राज्य की राजनीति में योगदान के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहकर जनता की सेवा की।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और परिवार को सांत्वना दी।

सोमवार को मुकुल रॉय के पार्थिव शरीर को पश्चिम बंगाल विधानसभा लाया गया, जहां विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय सहित कई विधायकों ने उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनके निवास स्थान उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा क्षेत्र स्थित घाटकपुकुर ले जाया गया।

मुकुल रॉय अपने लंबे राजनीतिक सफर और संगठन मजबूत करने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में रहकर राज्य और देश की राजनीति में सक्रिय योगदान दिया। उनके निधन से एक अनुभवी नेता का अध्याय समाप्त हो गया है। पूरा राजनीतिक जगत और उनके समर्थक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।

POCSO कोर्ट का बड़ा आदेश, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR के निर्देश

यह आदेश विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने सुनाया। इससे पहले कोर्ट ने पीड़ित बताए जा रहे बच्चों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन किया। इसके बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया।

शिकायतकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य लोगों ने अदालत में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं और POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। याचिका में कहा गया कि आश्रम में रहने वाले ‘बटुकों’ यानी छोटे बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच करे। आदेश में साफ कहा गया है कि आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

इस फैसले के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद जल्द ही FIR दर्ज कर ली जाएगी और मामले से जुड़े सभी पक्षों से पूछताछ की जाएगी। साथ ही आश्रम से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत भी जुटाए जाएंगे।

कानूनी जानकारों का कहना है कि POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और बच्चों के बयान को विशेष महत्व दिया जाता है। इस केस में भी जांच एजेंसी को हर पहलू से तथ्य जुटाने होंगे।

फिलहाल अदालत के आदेश के बाद यह मामला औपचारिक जांच के दायरे में आ गया है। अब सबकी नजर पुलिस की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

Vardaan International Film Festival 2026: जहां फिल्मों से गूंजेगा अंगदान का संदेश, दिल्ली में होगा शुभारंभ

Naveen Bansal
Naveen Bansal

यह फिल्म फेस्टिवल दधीचि देहदान समिति और संप्रेषण मल्टीमीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। समिति पिछले कई वर्षों से अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम कर रही है। अब उसी सोच को सिनेमा के माध्यम से और बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

फेस्टिवल का उद्घाटन 26 फरवरी को सुबह 11 बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी। इस मौके पर राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में दधीचि देहदान समिति के संस्थापक आलोक कुमार और फेस्टिवल डायरेक्टर अतुल गंगवार की भी अहम भूमिका रहेगी। अभिनेता मनोज जोशी इस कार्यक्रम के विशेष अतिथि होंगे।

फेस्टिवल में भारत और विदेश से चुनी गई 70 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फिल्मों के जरिए अंगदान, देहदान, मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी प्रेरक कहानियां दिखाई जाएंगी। साथ ही फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद सत्र भी होंगे, जिससे युवा छात्रों और नए फिल्म निर्माताओं को सीखने का मौका मिलेगा।

26 फरवरी को मनोज जोशी अभिनय पर एक खास मास्टर क्लास लेंगे, जबकि 27 फरवरी को वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक अनंत विजय सिनेमा और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा अंगदान और देहदान के महत्व पर छात्रों के साथ विशेष संवाद भी होगा।

27 फरवरी की शाम पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह फेस्टिवल समाज को यह संदेश देगा कि अंगदान और देहदान सिर्फ दान नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी जीवन देने की सबसे बड़ी मानव सेवा है।