नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश की जनता पहले ही महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ते खर्चों से परेशान है, लेकिन सरकार समस्याओं का समाधान निकालने की बजाय लोगों से “त्याग” करने की अपील कर रही है।
चंडीगढ़ में जारी बयान में सैलजा ने कहा कि कभी लोगों से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने को कहा जाता है, तो कभी घरेलू खर्चों में कटौती करने की सलाह दी जाती है। उनका कहना है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आम आदमी को रोजमर्रा की जरूरतों में भी समझौता करना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार की ये अपीलें दिखाती हैं कि वह आर्थिक चुनौतियों से सही तरीके से निपटने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी लोगों को राहत देना, रोजगार के अवसर पैदा करना और स्थिर आर्थिक माहौल बनाना है, न कि आम जनता पर बोझ डालना।
सैलजा की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन का सोच-समझकर इस्तेमाल करने, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है। केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, इसलिए एहतियात जरूरी है।
कुमारी सैलजा ने सिर्फ महंगाई और आर्थिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि लाखों छात्रों की मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। उनके मुताबिक जब परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से नहीं कराई जातीं, तो सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती हैं। सैलजा ने मांग की कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और निष्पक्ष बनाया जाए ताकि छात्रों का भरोसा कायम रह सके।
कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी आम लोगों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता को राहत और भरोसा देने की जरूरत है, न कि केवल समझौता करने की सलाह देने की।
सत्ता संघर्ष और नेतृत्व की दुविधा : वर्तमान सियासी परिदृश्य में यह विलंब न केवल शासन को प्रभावित कर रहा है, बल्कि नए गठबंधन की निर्णय क्षमता पर भी सवालिया निशान लगा रहा है…| Image: PTI/File
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम। केरल के हालिया चुनाव परिणामों ने जहां एक ओर सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी, वहीं दूसरी ओर सरकार गठन की प्रक्रिया अब विवादों के साये में है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनादेश मिलने के बाद शीघ्र शासन की बागडोर संभालना एक नैतिक जिम्मेदारी होती है, परंतु राज्य में मुख्यमंत्री के चयन में हो रहा विलंब अब विपक्ष के तीखे हमलों का केंद्र बन गया है।
विपक्षी गठबंधन एलडीएफ ने इस देरी को जनता के निर्णय का अनादर करार देते हुए कांग्रेस और यूडीएफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। एलडीएफ के वरिष्ठ रणनीतिकार टी. पी. रामकृष्णन का मानना है कि प्रशासनिक शून्यता की स्थिति में नीतिगत निर्णय लेना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रतिकूल है। आरोप है कि नई सरकार के औपचारिक रूप से कार्यभार संभालने से पहले ही स्थानांतरण और नियुक्तियों जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संगठन का हस्तक्षेप बढ़ गया है।
इसके अतिरिक्त, आवश्यक वस्तुओं, विशेषकर चावल की कीमतों में संभावित वृद्धि ने जनविरोधी नीतियों की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। पूर्ववर्ती प्रशासन के दौरान जिस तरह कैबिनेट के माध्यम से कीमतों पर नियंत्रण रखा जाता था, उसकी तुलना में वर्तमान अनिश्चितता चिंताजनक है।
सत्ता पक्ष जहां मुख्यमंत्री के नाम पर आम सहमति बनाने में जूझ रहा है, वहीं नेता प्रतिपक्ष के चयन की जल्दबाजी पर भी सवाल उठ रहे हैं। संवैधानिक रूप से पहले सरकार का गठन और फिर प्रतिपक्ष की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। एलडीएफ ने स्पष्ट किया है कि उनके खेमे में नेतृत्व को लेकर कोई अंतर्कलह नहीं है और माकपा की राज्य इकाई जल्द ही जिम्मेदारियों का बंटवारा कर लेगी।
हालांकि, गठबंधन के भीतर भाकपा जैसे सहयोगियों की आकांक्षाओं को आंतरिक संवाद के माध्यम से सुलझाना एक चुनौती जरूर है, जिसे सार्वजनिक विमर्श के बजाय मोर्चे के भीतर हल करने की आवश्यकता है।
अंततः, केरल की जनता एक स्थिर और क्रियाशील शासन की प्रतीक्षा कर रही है। सत्ता के गलियारों में चल रही यह खींचतान न केवल विकास कार्यों को बाधित कर रही है, बल्कि भविष्य की राजनीतिक स्थिरता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
Maharashtra Politics : राकांपा का नया स्वरूप: पार्थ बने महासचिव, जय को मिली अनुशासन की जिम्मेदारी| Image: Facebook
तहलका डेस्क।
मुंबई/नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) ने अपनी सांगठनिक संरचना में एक बड़ा बदलाव करते हुए नई पीढ़ी को नेतृत्व की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर दिया है। राकांपा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति का विस्तार करते हुए अपने दोनों बेटों, पार्थ पवार और जय पवार को महत्वपूर्ण सांगठनिक दायित्व सौंपे हैं।
निर्वाचन आयोग को भेजी गई आधिकारिक सूची के अनुसार, हाल ही में राज्यसभा पहुंचे पार्थ पवार को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया गया है, जबकि उनके छोटे भाई जय पवार को राष्ट्रीय सचिव के साथ-साथ अनुशासन समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
यह कदम राकांपा के भीतर शक्ति संतुलन और भविष्य की नेतृत्व योजना को दर्शाता है। पार्थ पवार अब राष्ट्रीय स्तर पर सांगठनिक समन्वय का मुख्य कार्यभार संभालेंगे। गौरतलब है कि इस साल जनवरी में पुणे के बारामती में एक दुखद विमान दुर्घटना में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद, सुनेत्रा पवार ने न केवल सरकार में बल्कि पार्टी प्रमुख के रूप में भी कमान संभाली थी।
22 सदस्यीय इस नई कार्यकारी समिति में अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों का सामंजस्य बिठाने की कोशिश की गई है। समिति में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल जैसे दिग्गज नेताओं को बरकरार रखा गया है, जो पार्टी के मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे। इसके साथ ही दिलीप पाटिल और शिवाजीराव गर्जे (कोषाध्यक्ष) जैसे भरोसेमंद नामों को भी शामिल किया गया है।
युवा शक्ति को प्रतिनिधित्व देने के क्रम में धीरज शर्मा को युवा इकाई का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए चेतन तुपे, सना मलिक और सरोज अहिरे जैसे विधायकों को भी समिति में स्थान दिया है। जय पवार को मिली दोहरी जिम्मेदारी (सचिव और अनुशासन प्रमुख) यह संकेत देती है कि पार्टी के भीतर आंतरिक अनुशासन और वित्तीय प्रबंधन पर नेतृत्व की सीधी पकड़ रहेगी।
कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार द्वारा गठित यह नई टीम राकांपा के पुनर्गठन और आने वाली चुनावी चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत फैसला माना जा रहा है।
गर्मी भी, बारिश भी! दिल्ली को मिलेगी राहत, लेकिन कई राज्यों में हीटवेव का कहर... | Image Source:
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दिल्ली में मंगलवार को मौसम काफी हद तक साफ रहने के बाद दोपहर और शाम के समय तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार राजधानी में हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है और कुछ जगहों पर तेज झोंके भी चल सकते हैं। तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। अगले दो-तीन दिनों तक दिल्ली में आंशिक बादल छाए रह सकते हैं, जिससे लोगों को तेज गर्मी से कुछ राहत महसूस होगी।
वहीं देश के कई हिस्सों में गर्मी लगातार लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। पश्चिमी राजस्थान में अगले 6 से 7 दिनों तक भीषण लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। बाड़मेर में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। पूर्वी राजस्थान, मध्य भारत, गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी अगले कई दिनों तक गर्म हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों को दोपहर में धूप से बचने की सलाह दी है।
दूसरी तरफ दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और दक्षिण कर्नाटक में अगले 4 से 5 दिनों तक भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। कई इलाकों में तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी खतरा बताया गया है। मौसम विभाग ने निचले इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक प्रभावित होने की आशंका जताई है।
इसके अलावा मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में पहुंचने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल हो रही हैं। माना जा रहा है कि इस सप्ताह के अंत तक मानसून अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में दस्तक दे सकता है। इससे आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम का पैटर्न बदलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि तेज गर्मी के दौरान ज्यादा पानी पिएं, जरूरी काम होने पर ही दोपहर में बाहर निकलें और खराब मौसम के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े होने से बचें।
तमिलनाडु में शराब पर बड़ा एक्शन... | Image Source:
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नई दिल्ली: Tamil Nadu में शराबबंदी की बढ़ती मांग के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसफ विजय ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने राज्यभर में चल रही 717 सरकारी शराब दुकानों को बंद करने का फैसला लिया है। इनमें मंदिरों, स्कूल-कॉलेजों और बस स्टैंड के पास मौजूद दुकानें शामिल हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला जनता के हित और सामाजिक माहौल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक अगले दो हफ्तों के अंदर इन दुकानों को बंद कर दिया जाएगा। बंद होने वाली दुकानों में 276 दुकानें पूजा स्थलों के पास हैं, जबकि 186 दुकानें शैक्षणिक संस्थानों के आसपास चल रही थीं। इसके अलावा 255 दुकानें बस अड्डों के पास मौजूद थीं, जिन्हें भी हटाया जाएगा।
तमिलनाडु में लंबे समय से महिलाओं और कई सामाजिक संगठनों की ओर से शराबबंदी की मांग उठती रही है। कई राजनीतिक दल भी राज्य में शराब की बिक्री बंद करने की बात करते रहे हैं। इसी दबाव और जनभावनाओं को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।
हालांकि विपक्षी दल द्रमुक ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। द्रमुक नेताओं का कहना है कि जिन इलाकों का जिक्र किया जा रहा है, वहां पहले से ही नियमों के मुताबिक दुकानें नहीं थीं। विपक्ष ने इसे सरकार का “पब्लिसिटी स्टंट” बताया है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है।
तमिलनाडु में शराब की बिक्री पूरी तरह सरकारी कंपनी TASMAC के जरिए होती है। राज्य में कुल 4,765 शराब दुकानें संचालित की जाती हैं। शराब से होने वाली कमाई तमिलनाडु सरकार के राजस्व का बड़ा हिस्सा मानी जाती है। साल 2025 में शराब बिक्री से सरकार को 48 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की आय हुई थी।
इसके बावजूद सरकार का कहना है कि लोगों की सुरक्षा और सामाजिक माहौल ज्यादा जरूरी है। खासतौर पर स्कूलों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के पास शराब की दुकानों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
अब इस फैसले के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या तमिलनाडु सरकार आगे और भी शराब दुकानों को बंद करने की दिशा में कदम उठाती है या नहीं।
12 मई 2026,नई दिल्ली: NTA का कहना है कि 10 मई को जो प्रेस रिलीज जारी हुई थी उसी के चलते ये फैसला लिया गया है। 8 मई को परीक्षा से जुडे सभी मामलों को स्वतंत्र जांच के लिए सेन्ट्रल एजेसिंयों को ये भेजा गया था। इसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसी और केन्द्रीय जांच एजेंसी से मिली जानकारी के आधार पर जाच रिपोर्ट की समीक्षा हुई । इस पर गहन जांच हुई और पाया गया कि पेपर लीक होने के कारणों का पता अब CBI लगाएगी। फिलहाल पेपर लीक होने को लेकर सीबीआई को जांच के आदेश दे दिये है ।
एग्जाम सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया है। NTA के अनुसार, अब NEET UG 2026 परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी. नई परीक्षा की तारीख, एडमिट कार्ड जारी करने का शेड्यूल और अन्य जरूरी जानकारी जल्द ही आधिकारिक माध्यमों से जारी होगी।
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच में राजस्थान पुलिस स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) लगातार कार्रवाई कर रही है। अब तक 45 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि कई राज्यों में छापेमारी और पूछताछ जारी है।
जांच में सामने आया है कि परीक्षा से पहले एक कथित गेस पेपर कुछ छात्रों तक पहुंचा था, जिसके कई सवाल असली परीक्षा से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इसी के बाद पेपर लीक की आशंका गहराई। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि प्रश्नपत्र छपाई के दौरान लीक हुआ या फिर पेपर तैयार करने से जुड़े किसी व्यक्ति की इसमें भूमिका थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी है। वहीं, जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और संभावित धांधली के पीछे जुड़े लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
अंशिका गौड़/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति ने रेलवे की तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर करीब ₹23,437 करोड़ खर्च होंगे और इनके जरिए भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 901 किलोमीटर नई लाइनें जुड़ेंगी। सरकार का कहना है कि इससे रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी और लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। किसको कितना फायदा होगा और क्या हैं ये परियोजनाएं? आइए विस्तार से जानते हैं…
किन परियोजनाओं को मिली मंजूरी?
सरकार ने जिन तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है उनमें नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन, गुंतकल-वाड़ी तीसरी और चौथी लाइन और बुढ़वल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन शामिल हैं। ये परियोजनाएं मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों से होकर गुजरेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी परियोजनाओं को वर्ष 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए।
इन परियोजनाओं के जरिए रेलवे नेटवर्क को मजबूत करने के साथ-साथ ट्रेनों की आवाजाही को भी तेज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई लाइनें जुड़ने से व्यस्त रूट्स पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर सेवा मिल सकेगी।
1. नागदा-मथुरा तीसरी और चौथी लाइन
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# फायदे…(Source: Rail Ministry)
– रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ेगी, जिससे ज्यादा ट्रेनें चलाना आसान होगा।
– पश्चिमी तट के बड़े बंदरगाहों से माल ढुलाई तेज और बेहतर होगी।
– दादरी, आगरा, कानपुर जैसे औद्योगिक इलाकों को सीधा फायदा मिलेगा।
– महाकालेश्वर, रणथंभौर, मथुरा-वृंदावन जैसे पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
– हर साल करीब 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
– कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आएगी, जो लगभग 5 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर मानी जा रही है।
– लॉजिस्टिक लागत घटेगी और कारोबार को फायदा मिलेगा।
– परियोजनाओं के जरिए लाखों मानव-दिवस रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
2. गुंतकल-वाड़ी तीसरी और चौथी लाइन
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# फायदे…(Source: Rail Ministry)
– मौजूदा रेल लाइन अभी लगभग 90% क्षमता पर चल रही है और आगे दबाव बढ़ने की संभावना है।
– रायचूर, येरमरस और बल्लारी जैसे आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल सुविधा मिलेगी।
– कोयला खदानों से कोयले की ढुलाई आसान होगी, साथ ही बड़े बंदरगाहों से उर्वरक और अन्य सामान तेजी से पहुंच सकेंगे।
– मंत्रालयम, श्री नेट्टिकांती अंजनेय स्वामी मंदिर और रायचूर किला जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
– हर साल करीब 17.4 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की सुविधा बढ़ेगी।
– हर साल लगभग 36 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है।
– लॉजिस्टिक लागत में हर साल करीब 801 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।
– परियोजना से करीब 156 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
3. बुढ़वल-सीतापुर तीसरी और चौथी लाइन
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# फायदे…(Source: Rail Ministry)
– मौजूदा रेल लाइन अभी 78% क्षमता पर चल रही है और आगे यह दबाव 127% तक पहुंचने का अनुमान है।
– इस परियोजना से हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई थर्मल पावर प्लांट्स तक कोयले की सप्लाई आसान होगी।
– श्यामनाथ मंदिर और नैमिषारण्य (नीमसार) जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी।
– हर साल करीब 15.5 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, जिसमें खाद्यान्न, कोयला, रसायन और सीमेंट जैसी चीजें शामिल हैं।
– हर साल लगभग 14.4 करोड़ किलो कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की उम्मीद है, जो करीब 60 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है।
– लॉजिस्टिक लागत में हर साल करीब 321 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।
– परियोजना से करीब 70 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
4161 गांवों और 83 लाख लोगों को क्या फायदा होगा?
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा असर उन गांवों और छोटे शहरों पर पड़ेगा जहां अब तक रेलवे कनेक्टिविटी सीमित रही है। सरकार के मुताबिक करीब 4,161 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 83 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इससे लोगों के लिए यात्रा आसान होगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छोटे शहरों का संपर्क बड़े आर्थिक केंद्रों से मजबूत होगा।
रेलवे लाइन बढ़ने से स्थानीय व्यापार और उद्योग को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। जिन इलाकों में अभी ट्रेनें कम चलती हैं या देरी ज्यादा होती है, वहां नई लाइनों के बनने से ट्रेनों की आवाजाही तेज हो सकेगी।
‘रेलवे में वैसी ही क्रांति होगी जैसी अटल जी ने सड़कों में लाई थी’ — अश्विनी वैष्णव
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रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इन परियोजनाओं को भारतीय रेलवे के लिए बड़ा बदलाव बताते हुए कहा कि जिस तरह पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee ने गोल्डन क्वाड्रिलेटरल हाईवे नेटवर्क बनाकर देश में सड़क क्रांति लाई थी, उसी तरह अब प्रधानमंत्री Narendra Modi रेलवे सेक्टर में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, कोलकाता-मुंबई और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे हाई डेंसिटी रेल रूट्स पर लगातार फोर लाइनिंग का काम किया जा रहा है ताकि रेलवे की क्षमता कई गुना बढ़ाई जा सके।
वैष्णव ने आगे कहा कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बढ़ने वाली भारी भीड़ और लंबी वेटिंग लिस्ट को कम करने के लिए रेलवे नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक नई लाइनें जुड़ने से हजारों अतिरिक्त ट्रेनें चलाना आसान होगा, माल ढुलाई तेज होगी और आने वाले 40-50 वर्षों की जरूरतों को पूरा करने लायक रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे सड़क परिवहन के मुकाबले ज्यादा पर्यावरण अनुकूल है और इन परियोजनाओं से Carbon Emissions में बड़ी कमी आएगी।
यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या पर कैसे असर पड़ेगा?
हर साल गर्मियों की छुट्टियों, छठ पूजा, दिवाली, होली और नए साल के दौरान रेलवे पर भारी दबाव पड़ता है। बड़ी संख्या में यात्रियों को वेटिंग टिकट लेकर सफर करना पड़ता है। रेल मंत्रालय का कहना है कि रेलवे की क्षमता बढ़ाए बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
इसी वजह से सरकार हाई डेंसिटी रूट्स पर मल्टी-ट्रैकिंग कर रही है। यानी जहां अभी दो लाइनें हैं, वहां तीसरी और चौथी लाइन जोड़ी जाएगी। इससे एक साथ ज्यादा ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति कम होगी। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-गुवाहाटी जैसे बड़े रूट्स पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों को मिलेगा बड़ा फायदा
इन परियोजनाओं से कई बड़े धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने वाली है। महाकालेश्वर, रणथंभौर नेशनल पार्क, कुनो नेशनल पार्क, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और नैमिषारण्य जैसे स्थानों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
सरकार का मानना है कि बेहतर रेलवे नेटवर्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारोबार को फायदा पहुंचेगा। खासकर धार्मिक पर्यटन वाले इलाकों में यात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
माल ढुलाई, रोजगार और पर्यावरण को भी फायदा
ये परियोजनाएं सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं बल्कि माल ढुलाई के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही हैं। रेलवे के मुताबिक कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा-इस्पात, कंटेनर और उर्वरक जैसी जरूरी चीजों की ढुलाई इन रूट्स से होती है। नई लाइनें बनने के बाद हर साल करीब 60 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई संभव हो सकेगी।
सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से तेल आयात में करीब 37 करोड़ लीटर की बचत होगी और लगभग 185 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा। इसे करीब 7 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया गया है। साथ ही निर्माण कार्यों के दौरान बड़े स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
र्काडिया शहर की मेयर Eileen Wang पर चीन सरकार के एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप... | Image Source: AajTak
नई दिल्ली: अमेरिका के California राज्य से जुड़ा एक बड़ा मामला चर्चा में है। अर्काडिया शहर की मेयर Eileen Wang पर चीन सरकार के एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप लगा था, जिसे उन्होंने अब स्वीकार कर लिया है। इस खुलासे के बाद उन्होंने मेयर पद से इस्तीफा दे दिया।
अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, एलीन वांग पर आरोप है कि उन्होंने चीन सरकार के अधिकारियों के निर्देश पर अमेरिका में चीन के पक्ष में माहौल बनाने और प्रचार करने का काम किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह गतिविधियां गुप्त तरीके से की जा रही थीं।
इस मामले में वांग के साथ उनके पूर्व मंगेतर याओनिंग ‘माइक’ सन का नाम भी सामने आया था। सन पहले ही अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर चुका है और फिलहाल चार साल की जेल की सजा काट रहा है। अब एलीन वांग भी संघीय अदालत में अपने खिलाफ लगे आरोपों को स्वीकार करने जा रही हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं तो वांग को अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि 2020 से 2022 के बीच दोनों ने चीन सरकार के निर्देशों पर काम किया और बीजिंग के हितों को बढ़ावा देने की कोशिश की।
एफबीआई के अधिकारियों ने इस मामले को अमेरिकी लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है। उनका कहना है कि विदेशी सरकारों के लिए गुप्त रूप से काम करने वाले लोग देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं। अधिकारियों ने साफ कहा कि ऐसे मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एलीन वांग साल 2022 में अर्काडिया सिटी काउंसिल के लिए चुनी गई थीं। बाद में उन्हें बारी-बारी से चुने जाने वाली प्रक्रिया के तहत मेयर बनाया गया था। लेकिन अब इस पूरे मामले के सामने आने के बाद उनके राजनीतिक करियर पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
इस घटना ने अमेरिका में विदेशी दखल और जासूसी को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। वहीं सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को दूसरे संभावित मामलों से जोड़कर भी जांच कर रही हैं।
पेट्रोल संकट से घबराया पाकिस्तान... | Image Source: Hindustan Hindi News
नई दिल्ली: Pakistan की शहबाज शरीफ सरकार ने देशभर में लागू मितव्ययता अभियान को 13 जून 2026 तक बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म नहीं हो पा रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया था, जिसके बाद पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा अनिश्चित हो गए।
दरअसल, पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भर है। ईरान से जुड़े तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए सरकार ने पहले मार्च में दो महीने के लिए खर्च कम करने वाले कई नियम लागू किए थे, जिन्हें अब आगे बढ़ा दिया गया है।
सरकार की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक सरकारी गाड़ियों के ईंधन भत्ते में 50 प्रतिशत तक कटौती की गई है। हालांकि एम्बुलेंस और सार्वजनिक बसों जैसी जरूरी सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा करीब 60 प्रतिशत सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला भी जारी रहेगा।
इतना ही नहीं, सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी सख्त रोक लगा दी गई है। केवल उन्हीं यात्राओं की अनुमति होगी जिन्हें देश के हित में बेहद जरूरी माना जाएगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में ईंधन बचाना और गैरजरूरी खर्च कम करना बेहद जरूरी हो गया है।
पाकिस्तान में पहले से ही महंगाई बड़ी समस्या बनी हुई है। अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान अब उन देशों में शामिल हो गया है जहां पेट्रोलियम उत्पाद काफी महंगे हो चुके हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
मोदी-शाह की मौजूदगी में सरमा ने रचा इतिहास; 102 सीटों के प्रचंड जनादेश के साथ असम में एनडीए की 'विजयी हैट्रिक' का आगाज…. Photo | PTI
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली/गुवाहाटी। असम की राजनीतिक दिशा को एक बार फिर अनुभवी नेतृत्व के हाथों में सौंपते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभाल लिया। गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी ग्राउंड में आयोजित एक गरिमामय और विशाल समारोह के दौरान राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने सरमा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह क्षण न केवल सरमा के व्यक्तिगत राजनीतिक सफर के लिए मील का पत्थर साबित हुआ, बल्कि इसने राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी पर भी मुहर लगा दी।
इस सत्ता हस्तांतरण के साथ ही मंत्रिमंडल के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिसमें क्षेत्रीय संतुलन और अनुभव का तालमेल देखने को मिला। मुख्यमंत्री के साथ चार प्रमुख विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इनमें भारतीय जनता पार्टी से रामेश्वर तेली और अजंता नेओग शामिल हैं, जबकि गठबंधन के सहयोगी दलों से असोम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के चरण बोरो ने मंत्री पद की शपथ लेकर सरकार में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे कद्दावर नेताओं के साथ-साथ भाजपा शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। चुनावी आंकड़ों पर गौर करें तो 126 सीटों वाली असम विधानसभा में एनडीए ने रिकॉर्ड 102 सीटों पर विजय पताका फहराकर विपक्ष को हाशिए पर धकेल दिया है। इसमें भाजपा की अपनी 82 सीटों के साथ-साथ एजीपी और बीपीएफ की 10-10 सीटों के योगदान ने इस जीत को असम के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक बना दिया है। यह जनादेश स्पष्ट रूप से राज्य में विकास और स्थिरता के पक्ष में जाता दिख रहा है।