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फ्लोर टेस्ट में पास हुए Vijay, सदन में मिला 144 सदस्यों का साथ

Tamil Nadu Floor Test: तमिलनाडु में विजय सरकार ने हासिल किया बहुमत…Pic Source : PTI/File
Tamil Nadu Floor Test: तमिलनाडु में विजय सरकार ने हासिल किया बहुमत…Pic Source : PTI/File

तहलका डेस्क।

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय का आगाज करते हुए मुख्यमंत्री थलापति विजय ने मंगलवार, 13 मई को विधानसभा के पटल पर अपनी सरकार का वर्चस्व स्थापित कर दिया। हाल ही में सत्ता की कमान संभालने के बाद विजय के लिए यह फ्लोर टेस्ट एक बड़ी अग्निपरीक्षा थी, जिसे उन्होंने 144 विधायकों के ठोस समर्थन के साथ सफलतापूर्वक पार कर लिया।

सदन की कार्यवाही के दौरान दिलचस्प मोड़ तब आया जब मुख्य विपक्षी खेमे ने वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने से ऐन पहले सदन का परित्याग (वॉकआउट) कर दिया। विपक्ष की अनुपस्थिति और सत्ता पक्ष की एकजुटता के बीच तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) नीत गठबंधन ने विश्वास मत आसानी से जीत लिया।

यह जीत न केवल विजय की राजनीतिक स्वीकार्यता को पुख्ता करती है, बल्कि यह भी स्पष्ट करती है कि गठबंधन के भीतर उनका संख्या बल फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है। विपक्षी दलों के वॉकआउट को रणनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने सरकार की राह और आसान बना दी। मुख्यमंत्री के रूप में विजय की इस पहली विधायी परीक्षा ने राज्य में एक स्थिर सरकार का संकेत दिया है, जिससे अब उनके प्रशासनिक विजन को लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

एक बार फिर Diego Garcia Island बना महाशक्तियों की टक्कर का केंद्र, अमेरिका-ब्रिटेन आमने-सामने

Diego Garcia Island | Image: Getty Images
Diego Garcia Island | Image: Getty Images

नई दिल्ली: हिंद महासागर में स्थित Diego Garcia Island इन दिनों अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन गया है। यह छोटा सा द्वीप अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और भारत जैसे देशों के लिए बेहद अहम माना जाता है। हाल ही में अमेरिकी सीनेट में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस हुई, जिसके बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

दरअसल, ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरिशस को सौंपने की तैयारी में है। डिएगो गार्सिया इसी चागोस समूह का हिस्सा है और यहां अमेरिका-ब्रिटेन का बड़ा सैन्य बेस मौजूद है। अमेरिकी नेताओं को डर है कि अगर मॉरिशस पर चीन का प्रभाव बढ़ा, तो भविष्य में इस इलाके में बीजिंग की पकड़ मजबूत हो सकती है।

अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया बेहद खास है क्योंकि यह हिंद महासागर के बीचोंबीच स्थित है। यही वजह है कि इसे मध्य पूर्व, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए सैन्य और लॉजिस्टिक हब माना जाता है। खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान और इराक युद्ध के दौरान भी इस बेस का इस्तेमाल किया जा चुका है। यहां लंबी रनवे, गहरे पानी का बंदरगाह और आधुनिक सैन्य सुविधाएं मौजूद हैं।

अमेरिका का मानना है कि चीन लगातार हिंद महासागर में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। चीन पहले ही पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट, श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट और अफ्रीका के जिबूती में अपनी मौजूदगी मजबूत कर चुका है। इसी रणनीति को “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” कहा जाता है।

भारत के लिए भी यह मामला काफी अहम है। भारत का ज्यादातर समुद्री व्यापार और ऊर्जा आयात हिंद महासागर के रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर चीन इस क्षेत्र में और मजबूत होता है, तो भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि भारत ने मॉरिशस के दावे का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही वह हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक ताकत भी बढ़ा रहा है। भारत सेशेल्स और अंडमान-निकोबार जैसे इलाकों में अपनी निगरानी और सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिएगो गार्सिया सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक में चल रही बड़ी रणनीतिक लड़ाई का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका, चीन और भारत की रणनीति पूरी दुनिया की नजर में रहेगी।

Delhi में बारिश की संभावना, हवा की गुणवत्ता ‘मध्यम’ श्रेणी में

दिल्ली में मौसम का बदला मिजाज… Photo Credit | ABP
दिल्ली में मौसम का बदला मिजाज… Photo Credit | ABP

तहलका डेस्क।

दिल्ली में बुधवार की सुबह एक बदले हुए मिजाज के साथ हुई। आसमान में बादलों की आवाजाही ने जहां तपती गर्मी से मामूली राहत का अहसास कराया, वहीं मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिन चढ़ने के साथ राजधानी के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। फिलहाल, दिल्लीवासी उमस और बादलों के बीच बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

तापमान के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो आज सुबह न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री की बढ़त के साथ 26.4°C दर्ज किया गया। मौसम विभाग की गणना के अनुसार, दिन का अधिकतम पारा 39°C के इर्द-गिर्द सिमटने के आसार हैं। हालांकि, दिल्ली के भौगोलिक विस्तार के कारण अलग-अलग इलाकों में तापमान के अलग रंग देखने को मिले।

जहां सफदरजंग और लोधी रोड जैसे इलाकों में पारा सामान्य से 1°C से 2.4°C तक ऊपर रहा, वहीं पालम और रिज जैसे क्षेत्रों में सुबह तुलनात्मक रूप से ठंडी रही, जहाँ तापमान सामान्य से करीब आधा डिग्री नीचे दर्ज किया गया। आयानगर में भी पारा सामान्य से 1.8°C अधिक रहा, जो शहर के भीतर ही थर्मल वैरिएशन को दर्शाता है।

प्रदूषण के मोर्चे पर राहत की बात यह है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता फिलहाल खतरे के निशान से दूर है। सुबह के समय शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 148 मापा गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी की पुष्टि करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पैमानों पर गौर करें तो 101 से 200 के बीच का AQI स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत गंभीर नहीं माना जाता, लेकिन ‘संतोषजनक’ की श्रेणी में आने के लिए अभी हवा को और अधिक शुद्धता की दरकार है।

यदि आज बारिश होती है, तो हवा में मौजूद धूल के कणों के नीचे बैठने से प्रदूषण स्तर में और सुधार की उम्मीद की जा सकती है। कुल मिलाकर, आज दिल्ली का मौसम गर्मी, उमस और संभावित राहत का एक मिला-जुला पैकेज रहने वाला है।

रंगासामी 5वीं बार बने पुडुचेरी के CM   

रंगासामी का 'पंच': भाजपा-एआईएनआरसी गठबंधन ने संभाली केंद्र शासित प्रदेश की कमान… Photo | PTI
रंगासामी का 'पंच': भाजपा-एआईएनआरसी गठबंधन ने संभाली केंद्र शासित प्रदेश की कमान… Photo | PTI

तहलका ब्यूरो।

नयी दिल्ली/पुडुचेरीराज्य की सियासत में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया जब अनुभवी राजनेता और एआईएनआरसी के शिल्पकार एन. रंगासामी ने रिकॉर्ड पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। हालिया चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की शानदार जीत के बाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा नियुक्त रंगासामी ने ईश्वर के नाम पर पद की शपथ ली। उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने उन्हें और उनके कैबिनेट सहयोगियों को गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस नई सरकार में गठबंधन की मजबूती तब दिखी जब एआईएनआरसी के मल्लाडी कृष्णा राव और भाजपा के दिग्गज नेता ए. नमस्सिवायम ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर अपनी जिम्मेदारियां संभालीं। विशेष रूप से, मल्लाडी कृष्णा राव ने अपनी क्षेत्रीय पहचान को सम्मान देते हुए तेलुगु भाषा में शपथ ली, जो आंध्र प्रदेश की भौगोलिक सीमा में स्थित पुडुचेरी के यानम क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंच पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन के कद्दावर नेता बी.एल. संतोष की मौजूदगी ने केंद्र और प्रदेश के मजबूत तालमेल का संकेत दिया। 9 अप्रैल के जनादेश ने स्पष्ट कर दिया था कि जनता ने रंगासामी के अनुभव और राजग के विजन पर भरोसा जताया है, जिसे आज आधिकारिक स्वरूप मिल गया।

Trump का होर्मुज पर ‘पूर्ण नियंत्रण’ का दावा तो Kuwait-Iran में भी बढ़ी रार

ईरान बनाम कुवैत: महीने की शुरुआत में Bubiyan Island पर हमले का सनसनीखेज आरोप… Pic Credit : saba.ye/File
ईरान बनाम कुवैत: महीने की शुरुआत में Bubiyan Island पर हमले का सनसनीखेज आरोप… Pic Credit : saba.ye/File

तहलका ब्यूरो।

नयी दिल्ली/दुबई। फारस की खाड़ी के शांत जल में एक बार फिर अशांति के भंवर उठने लगे हैं। कुवैत ने सीधे तौर पर ईरान पर आरोप मढ़ा है कि इस महीने की शुरुआत में उसकी अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड की एक टुकड़ी ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बुबियान द्वीप (Bubiyan Island) पर हमले की साजिश रची थी।

विशेष बात यह है कि इसी द्वीप पर चीन के सहयोग से ‘मुबारक अल कबीर’ (Mubarak Al Kabir) बंदरगाह का निर्माण किया जा रहा है, जो बीजिंग की वैश्विक बुनियादी ढांचा महत्वाकांक्षाओं का एक बड़ा केंद्र है। कुवैती सुरक्षा बलों के अनुसार, 1 मई को हुई इस घुसपैठ को नाकाम कर दिया गया और चार हमलावरों को हिरासत में लिया गया है, जबकि दो अन्य भागने में सफल रहे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी चीन यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। बीजिंग में राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ उनकी मुलाकात में व्यापारिक मुद्दों के साथ-साथ ईरान का मसला भी शीर्ष पर रहने वाला है। ट्रंप ने कड़े शब्दों में ईरान को परमाणु समझौते के लिए मजबूर करते हुए कहा कि यदि वे शर्तों पर सहमत नहीं होते, तो उन्हें पूरी तरह तबाही का सामना करना पड़ेगा।

उन्होंने स्पष्ट दावा किया कि ईरान पूरी तरह अमेरिका के नियंत्रण में है और होर्मुज जलडमरूमध्य से उनकी अनुमति के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी संसद को आश्वस्त किया है कि अमेरिकी सेना के पास पर्याप्त आयुध भंडार है और तेल आपूर्ति बाधित होने की धमकियों के बावजूद जलडमरूमध्य पर उनका दबदबा कायम है।

दूसरी तरफ, ईरान ने फिलहाल इन आरोपों पर चुप्पी साधी है, लेकिन उसके राजनयिक काजिम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पलटवार करते हुए धमकियों और अपमान की भाषा को शांति के लिए बाधक बताया है। क्षेत्र में बढ़ते खतरों को देखते हुए सुरक्षा समीकरण भी बदल रहे हैं। इजराइल ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उसने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की सुरक्षा के लिए अपनी ‘आयरन डोम’ हवाई रक्षा प्रणाली और सैन्य कर्मियों को वहां तैनात किया है।

यह कदम न केवल ईरान के खिलाफ एक मजबूत मोर्चेबंदी की ओर इशारा करता है, बल्कि इजराइल और खाड़ी देशों के बीच प्रगाढ़ होते रक्षा संबंधों की पुष्टि भी करता है। बुबियान द्वीप पर हमले की यह नाकाम कोशिश संकेत दे रही है कि खाड़ी क्षेत्र का यह तनाव किसी भी समय बड़े वैश्विक संघर्ष में तब्दील हो सकता है।

Gold पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: आयात शुल्क अब सीधा 15%

आयात शुल्क में भारी वृद्धि: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सरकार का 'गोल्डन' दांव…File Photo
आयात शुल्क में भारी वृद्धि: विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सरकार का 'गोल्डन' दांव…File Photo

तहलका ब्यूरो।

नयी दिल्लीपश्चिम एशिया के गहराते संकट और बढ़ते व्यापार घाटे के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा आर्थिक फैसला लेते हुए सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) में की गई इस बढ़ोतरी का मुख्य उद्देश्य कीमती धातुओं के बेलगाम आयात पर अंकुश लगाना है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस हालिया आह्वान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा बचाने के लिए ईंधन के संयमित उपयोग और सोने की खरीद जैसी गतिविधियों को फिलहाल टालने का आग्रह किया था।

आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो भारत के लिए सोने का बढ़ता आयात बिल चिंता का सबब बनता जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात मूल्य के मामले में 24 प्रतिशत की छलांग लगाकर $71.98 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, यह दिलचस्प है कि ऊंचे दामों के कारण मात्रा के लिहाज से आयात में 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 721.03 टन रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की बात करें तो वित्त वर्ष 2025-26 में सोना $99,825.38 प्रति किलोग्राम तक जा पहुंचा, जबकि पिछले वर्ष यह $76,617.48 के स्तर पर था। स्थानीय बाजारों में भी इसका असर स्पष्ट है; दिल्ली में मंगलवार को सोने की कीमतें उछलकर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमतें ₹2,77,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को छू गईं।

सरकार का यह निर्णय एक तरह से ‘यू-टर्न’ जैसा है, क्योंकि 2024-25 के बजट में स्थानीय आभूषण उद्योग को राहत देने और तस्करी रोकने के लिए शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत किया गया था। लेकिन वर्तमान में अमेरिका-ईरान तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के अवशेषों के कारण तेल और उर्वरक के बढ़ते बिल ने भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) पर दबाव बढ़ा दिया है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता के रूप में भारत का यह फैसला वैश्विक बाजार को प्रभावित करेगा। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि कठिन वैश्विक परिस्थितियों में देश को मेट्रो सेवाओं, इलेक्ट्रिक वाहनों और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे विकल्पों के जरिए ऊर्जा और मुद्रा की बचत करनी होगी।

चक्रव्यूह में ‘Vijay’: विधानसभा में बहुमत साबित करेगी TVK!

बहुमत का गणित और बागियों का साथ: क्या आज सुरक्षित रहेगी टीवीके की सत्ता?…Pic Source : PTI/File
बहुमत का गणित और बागियों का साथ: क्या आज सुरक्षित रहेगी टीवीके की सत्ता?…Pic Source : PTI/File

तहलका डेस्क।

चेन्नई। केरल की तरह ही पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की राजनीति में भी आज का दिन ऐतिहासिक मोड़ ले सकता है। सी जोसफ विजय के नेतृत्व वाली ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) सरकार बुधवार को विधानसभा के पटल पर अपना बहुमत साबित करने उतरेगी।

राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर हो रहा यह शक्ति परीक्षण न केवल विजय की राजनीतिक स्वीकार्यता तय करेगा, बल्कि राज्य के भविष्य के समीकरणों को भी परिभाषित करेगा।

आंकड़ों के लिहाज से देखें तो सत्ताधारी टीवीके के पास अध्यक्ष समेत 107 विधायकों का संख्याबल है। हालांकि, तकनीकी पेंच के कारण सदन में वोटिंग की राह इतनी सरल नहीं है। अध्यक्ष वोट नहीं डालेंगे और तिरुपत्तूर से विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के चलते मतदान से वंचित रहेंगे।

उनकी एक वोट की जीत फिलहाल कानूनी जांच के दायरे में है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें अपने सहयोगियों पर टिकी हैं। कांग्रेस के पांच विधायकों के साथ-साथ भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल के दो-दो विधायकों का बाहरी समर्थन सरकार के लिए सुरक्षा कवच बना हुआ है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा उलटफेर अन्नाद्रमुक के भीतर देखने को मिल रहा है। पार्टी अध्यक्ष के. पलानीसामी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले एसपी वेलुमणि और सी वी षणमुगम के नेतृत्व में करीब 30 विधायकों ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया है।

हालांकि, पलानीसामी गुट ने साफ कर दिया है कि वे सरकार के खिलाफ खड़े हैं और व्हिप का उल्लंघन करने वालों पर दल-बदल विरोधी कानून का चाबुक चलेगा। आज का यह विश्वास मत केवल एक सरकार के टिकने का सवाल नहीं है, बल्कि द्रविड़ राजनीति में एक नए युग की दस्तक है।

NEET-UG 2026 जांच CBI के हवाले : ‘Re-Exam’ ने छीनी 23 लाख छात्रों की नींद

राजस्थान से उपजा 'गेस पेपर' विवाद बना राष्ट्रीय संकट, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला– अब नए सिरे से होगी परीक्षा Pic : X/NSUI
राजस्थान से उपजा 'गेस पेपर' विवाद बना राष्ट्रीय संकट, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला– अब नए सिरे से होगी परीक्षा Pic : X/NSUI

तहलका ब्यूरो।

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पर पेपर लीक का साया इस कदर गहराया कि केंद्र सरकार को अंततः इसे पूरे देश में रद्द करने का कठोर निर्णय लेना पड़ा। 3 मई 2026 को आयोजित हुई इस परीक्षा की शुचिता उस वक्त तार-तार हो गई जब राजस्थान के सीकर समेत कई इलाकों में एक ‘गेस पेपर’ वायरल हुआ। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस संदिग्ध पेपर के 120 से अधिक प्रश्न मुख्य परीक्षा के पेपर से हूबहू मिल रहे थे। 7 मई को एक व्हिसलब्लोअर द्वारा दिए गए पुख्ता इनपुट्स ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय की नींद उड़ा दी, जिसके बाद प्राथमिक आंतरिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि परीक्षा की गोपनीयता के साथ बड़े पैमाने पर खिलवाड़ हुआ है।

इस महाघोटाले की जड़ों तक पहुंचने के लिए सरकार ने अब इसकी कमान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। सीबीआई ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के तार राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र के नासिक तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जहां स्थानीय पुलिस पहले ही कुछ संदिग्धों को हिरासत में ले चुकी है। अब सीबीआई की चुनौती उस ‘मास्टरमाइंड’ और प्रिंटिंग प्रेस से लेकर वितरण केंद्रों तक फैली उस चेन को तोड़ना है, जिसने 22.8 लाख छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया।

इस निरस्तीकरण ने न केवल छात्रों के मानसिक श्रम को बेकार किया है, बल्कि 551 भारतीय शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर फैली इस विशाल परीक्षा व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया है। हालांकि, सरकार ने छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया है कि वे ‘सिस्टम से खेलने वाले’ तत्वों को सफल नहीं होने देंगे। अब सभी की नजरें ‘Re-NEET’ (पुनः परीक्षा) की नई तारीखों पर टिकी हैं, जिनका एलान अगले 7 से 10 दिनों के भीतर होने की संभावना है। राहत की बात यह है कि परीक्षार्थियों को दोबारा फॉर्म भरने या अतिरिक्त फीस देने की आवश्यकता नहीं होगी; उनके पुराने डेटा के आधार पर ही नए एडमिट कार्ड और सिटी स्लिप जारी किए जाएंगे। फिलहाल, मेडिकल उम्मीदवारों के लिए सलाह है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों से बचकर आधिकारिक वेबसाइट के संपर्क में रहें और अपनी तैयारी की लय को न टूटने दें।

लखनऊ से दुखद खबर: Akhilesh Yadav के भाई प्रतीक का निधन

राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक ने दुनिया को कहा अलविदा, शोक में डूबे समर्थक…File Photo
राजनीति से दूर रहने वाले प्रतीक ने दुनिया को कहा अलविदा, शोक में डूबे समर्थक…File Photo

तहलका डेस्क।

नई दिल्ली/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कद्दावर राजनीतिक परिवार और समाजवादी पार्टी के कुनबे से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के अनुज प्रतीक यादव का आज, 13 मई को लखनऊ में निधन हो गया।

महज 38 वर्ष की आयु में उनके इस तरह चले जाने से राजनीतिक गलियारों और यादव परिवार के प्रशंसकों में शोक की गहरी लहर दौड़ गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रतीक यादव की तबीयत बीती रात अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में राजधानी के सिविल अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और उन्होंने अंतिम सांस ली। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही उनका निधन हो चुका था।

फिलहाल उनकी मृत्यु के सटीक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है, जिसकी पुष्टि के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

प्रतीक यादव, मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे थे। जहां उनके बड़े भाई अखिलेश यादव राजनीति के शिखर पर हैं, वहीं प्रतीक ने स्वयं को सक्रिय राजनीति से दूर रखा था। वह मुख्य रूप से अपने रियल एस्टेट और फिटनेस बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करते थे।

हालांकि, उनकी पत्नी अपर्णा यादव राजनीति में एक प्रखर चेहरा हैं और वर्तमान में वह राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं।

प्रतीक के असामयिक निधन की सूचना मिलते ही लखनऊ के सिविल अस्पताल में उनके करीबियों, विभिन्न दलों के नेताओं और समर्थकों का तांता लगना शुरू हो गया है। परिवार के इस कठिन समय में प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं।

CM Yogi और Akhilesh Yadav ने जताया शोक  

लखनऊ। अखिलेश यादव ने अपने भाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अपने संदेश में इसे ‘बेहद दुखद’ करार दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी ने ‘एक्स’ पर एक शोक संदेश में कहा, ‘ प्रतीक यादव का निधन, अत्यंत दुखद! ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। विनम्र श्रद्धांजलि! ‘

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने शोक संदेश में कहा, ‘उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, पद्म विभूषण, स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के पुत्र एवं उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है। विनम्र श्रद्धांजलि।’

उन्होंने कहा, ‘मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति! ‘

भारत में 14 -15 मई को होगी ब्रिक्स देशों के  विदेश मंत्रियों की बैठक

Image Source: India TV Hindi
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12 मई 2026,नई दिल्ली: 14–15 मई 2026 को भारत ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेगा। बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar करेंगे। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुख हिस्सा लेंगे। इस दौरान सभी प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे। बैठक में सदस्य देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे। दूसरे दिन “BRICS@20: लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” विषय पर विशेष सत्र आयोजित होगा। इसके अलावा वैश्विक शासन और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार को लेकर भी चर्चा की जाएगी।

गौरतलब है कि इससे पहले ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित हुई थी, जिसकी अध्यक्षता भी भारत ने की थी।