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पाकिस्तान-अफगानिस्तान में टकराव तेज, हवाई हमलों के बाद ‘खुले युद्ध’ का ऐलान

नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, कंधार और पकतिया प्रांत के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए हैं। इसके बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने इसे “खुला युद्ध” करार दिया है। इस कार्रवाई से दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों में और ज्यादा कड़वाहट आ गई है।

पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की धरती से आतंकी गतिविधियां चल रही हैं और वहां की तालिबान सरकार चरमपंथी संगठनों को शरण दे रही है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि नाटो सेनाओं की वापसी के बाद उम्मीद थी कि अफगानिस्तान में शांति आएगी, लेकिन वहां से आतंकवाद फैलाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तालिबान शासन महिलाओं को बुनियादी अधिकार तक नहीं दे रहा है।

पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों पर अफगानिस्तान ने कड़ी आपत्ति जताई है। तालिबान प्रवक्ता ने इन हमलों को “कायराना कार्रवाई” बताया और दावा किया कि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई के जवाब में उन्होंने भी जवाबी ऑपरेशन किया है।

अफगानिस्तान का दावा है कि उसके जवाबी हमले में पाकिस्तान के कई सैनिक मारे गए और कुछ सैन्य ठिकानों पर कब्जा कर लिया गया। दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी एक बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है, जिसे उसने आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई बताया है। पाकिस्तान का कहना है कि इस ऑपरेशन में कई तालिबान लड़ाके मारे गए और उनके ठिकाने तबाह किए गए हैं।

हालांकि दोनों देशों की ओर से दिए जा रहे आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन इतना साफ है कि सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से डूरंड लाइन को लेकर विवाद चला आ रहा है। इसके अलावा सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा अभियानों को लेकर दोनों देशों में लगातार आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। 2021 में नाटो सेनाओं की वापसी के बाद से ही दोनों के रिश्ते और बिगड़ते चले गए हैं।

दिल्ली में निकाह, हापुड़ में ठिकाना… बांग्लादेशी महिला की संदिग्ध कहानी से हड़कंप

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बांग्लादेशी महिला के संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने की आशंका ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के दौताई गांव में रहने वाली महमूदा खातून उर्फ रानी को लेकर जांच तेज हो गई है। पुलिस जब उसके परिजनों से पूछताछ के लिए गांव पहुंची, तो उसके घर से कई अहम दस्तावेज बरामद हुए।

पुलिस को महिला के पर्स से बांग्लादेश का पासपोर्ट, वीजा और कुछ ऐसे कागजात मिले हैं, जो उसकी पहचान पर सवाल खड़े करते हैं। इसके अलावा कई ट्रैवल एजेंसियों के विजिटिंग कार्ड, कुछ बांग्लादेशी भाषा में लिखे कागज और अलग-अलग पहचान पत्र भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि महमूदा खातून ने साल 2021 में दिल्ली में दौताई गांव के रहने वाले मशरूफ से निकाह किया था और इसके बाद हापुड़ में रह रही थी।

जांच में सामने आया है कि महिला ने भारत में रहने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। पुलिस को उसके घर से भारतीय पहचान पत्र, बैंक की चेकबुक, चार सिम कार्ड के खाली रैपर और कुछ संदिग्ध लेटर भी मिले हैं। साथ ही बांग्लादेशी करेंसी भी बरामद होने की खबर है।

मामले के खुलासे के बाद महमूदा और उसका पति मशरूफ दोनों फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि महिला भारत में रहकर किसी संवेदनशील जानकारी को बाहर भेजने में शामिल हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस पूरे मामले में गांव के कुछ स्थानीय लोगों और प्रधान की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि महिला इतने समय तक गांव में कैसे रह रही थी और उसे किसने पहचान पत्र बनवाने में मदद की।

दिल्ली में भारत-अमेरिका की बड़ी बैठक, व्यापार और टेक्नोलॉजी पर बनी नई रणनीति

बैठक के बाद पीयूष गोयल ने कहा कि बातचीत काफी सकारात्मक रही और आने वाले समय में भारत-अमेरिका साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने के कई अवसर सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और उभरते सेक्टरों में मिलकर काम करने पर खास जोर दिया गया है।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस मुलाकात को उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए रास्ते खुल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की और भारत-अमेरिका के मजबूत रिश्तों को भविष्य के लिए अहम बताया।

चीफ ऑफ मिशन के आवास पर आयोजित एक विशेष डिनर कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय नेता और उद्योग जगत के बड़े नाम शामिल हुए। इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे विषयों पर बातचीत हुई।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के अनुकूल माहौल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि उनका राज्य तकनीक और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को दिखाती है। दोनों देश न सिर्फ व्यापार बढ़ाना चाहते हैं, बल्कि भविष्य की तकनीकों में भी साझेदारी मजबूत करना चाहते हैं।

दिल्ली में हुई यह बैठक संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका के रिश्ते केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापार, तकनीक और निवेश के नए अध्याय भी जुड़ेंगे। यह सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है।

अनिल अंबानी का पाली हिल वाला घर जब्त, ईडी की बड़ी कार्रवाई

ईडी का कहना है कि यह संपत्ति एक निजी पारिवारिक ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर की गई थी, ताकि कागज़ों में यह दिखाया जा सके कि अनिल अंबानी का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है। एजेंसी का दावा है कि यह कदम बैंकों से बचने और संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया था।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इससे पहले भी अनिल अंबानी से जुड़ी करीब 473 करोड़ रुपये की अन्य संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया जा चुका है। यह पूरा मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) से जुड़े कथित लोन घोटाले से जुड़ा हुआ है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि आरकॉम और उससे जुड़ी कंपनियों ने देश-विदेश के बैंकों से भारी कर्ज लिया था, जिसकी कुल बकाया राशि करीब 40 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। बाद में यह कर्ज एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) में बदल गया। यानी बैंकों को पैसा वापस नहीं मिला।

एजेंसी का आरोप है कि इसी दौरान पाली हिल वाली संपत्ति को एक निजी ट्रस्ट में डाल दिया गया, ताकि यह दिखाया जा सके कि यह अनिल अंबानी की नहीं है। लेकिन ईडी का कहना है कि असल में इस घर का इस्तेमाल अनिल अंबानी का परिवार ही करता रहा और इसका नियंत्रण भी उन्हीं के पास था।

ईडी के अनुसार, यह पूरा मामला एक तरह की वित्तीय साजिश का हिस्सा है, जिससे बैंकों को नुकसान पहुंचा और संपत्ति को बचाने की कोशिश की गई। अब इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और जरूरत पड़ने पर और संपत्तियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

ईडी की इस कार्रवाई को बड़े कारोबारी मामलों में एक अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस केस से जुड़े और खुलासे होने की संभावना है।

AI इम्पैक्ट समिट के विरोध को दिल्ली पुलिस ने बताया ‘गहन षड्यंत्र’, 8 आरोपी गिरफ्तार

आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को सौंप दी गई है।
आगे की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल को सौंप दी गई है।

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी क्राइम ब्रांच देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब तक की जांच में यह सामने आया है कि प्रदर्शन के लिए पहले से रणनीति बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि पुलिस को इसके ठोस सबूत भी मिले हैं और इसी आधार पर कार्रवाई तेज की गई है।

पुलिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। बाकी संदिग्धों से पूछताछ जारी है और कई जगहों पर छापेमारी भी की जा रही है। गिरफ्तार किए गए लोगों में इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब का नाम भी शामिल है। सभी आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

दरअसल, भारत मंडपम में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अचानक टी-शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी भी की गई थी। कार्यक्रम में मौजूद मेहमानों और अधिकारियों के लिए यह स्थिति काफी असहज हो गई थी।

पुलिस का कहना है कि इस तरह के प्रदर्शन से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि भी प्रभावित होती है। इसलिए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए साजिश की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस प्रदर्शन की योजना किसने बनाई, फंडिंग कहां से हुई और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

‘यौन शोषण’ मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगाई इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी

इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगाई अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी
इलाहाबाद हाई कोर्ट में लगाई अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी

नई दिल्ली: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंगलवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दाखिल की है। उन पर नाबालिग बच्चों से यौन शोषण और अन्य गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। इस केस को लेकर अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बीते एक साल के दौरान दो लोगों के साथ यौन शोषण किया गया, जिनमें एक नाबालिग बच्चा भी शामिल है। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यह मामला उन्हें बदनाम करने की साजिश है। उनका दावा है कि शिकायतकर्ता खुद हिस्ट्रीशीटर है और जांच अधिकारी भी उसके साथ मिलकर काम कर रहे हैं। स्वामी ने कहा, “जिन बच्चों से यौन शोषण का आरोप लगाया जा रहा है, वे मुझसे जुड़े हुए नहीं हैं और न ही मैं उन्हें जानता हूं।”

अग्रिम ज़मानत की अर्जी में उन्होंने कोर्ट से मांग की है कि उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए, ताकि वे जांच में सहयोग कर सकें। उनके वकीलों का कहना है कि आरोप बिना ठोस सबूतों के लगाए गए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

वहीं दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील बन गया है क्योंकि इसमें नाबालिग से जुड़े आरोप शामिल हैं। ऐसे मामलों में कानून काफी सख्त है और अदालत भी हर पहलू को ध्यान से देखती है।

अब ‘केरलम’ कहलाएगा केरल राज्य, सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट की पहली बैठक का बड़ा फैसला

नई दिल्ली: देश के दक्षिणी राज्य केरल को अब नए नाम से पहचाना जाएगा। केंद्र सरकार ने सेवा तीर्थ में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य का नाम “केरल” से बदलकर “केरलम” करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब आधिकारिक दस्तावेजों में राज्य का नाम केरलम लिखा जाएगा।

इस बदलाव की पहल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने वर्ष 2024 में की थी। उनका कहना था कि मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से “केरलम” कहा जाता रहा है, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम “केरल” दर्ज है। इसलिए राज्य सरकार चाहती थी कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम “केरलम” किया जाए।

25 जून 2024 को केरल विधानसभा ने इस प्रस्ताव को दूसरी बार पारित किया था। इससे पहले गृह मंत्रालय ने कुछ तकनीकी सुझाव दिए थे, जिनके बाद प्रस्ताव में जरूरी संशोधन किए गए। विधानसभा ने केंद्र से अनुरोध किया था कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य के नाम में औपचारिक बदलाव किया जाए।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया था कि आज़ादी के आंदोलन के समय से ही मलयालम भाषी क्षेत्रों को मिलाकर “संयुक्त केरल” बनाने की मांग होती रही है। उस समय भी राज्य को “केरलम” नाम से ही जाना जाता था। इसलिए यह फैसला केवल नाम बदलने का नहीं, बल्कि भाषा और सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देने का कदम है।

अब इस फैसले के बाद सरकारी रिकॉर्ड, नोटिफिकेशन और आगे जारी होने वाले दस्तावेजों में राज्य का नाम केरलम लिखा जाएगा। हालांकि आम लोगों की बोलचाल में पहले से ही केरलम शब्द का इस्तेमाल होता रहा है, इसलिए इस बदलाव से जनता को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

इधर, राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा तेज है। केरल विधानसभा के 140 सदस्यों के चुनाव मई से पहले होने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अभी तक भारत निर्वाचन आयोग की ओर से कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

लखनऊ यूनिवर्सिटी गेट पर बवाल, नमाज और हनुमान चालीसा को लेकर तनाव

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने जानबूझकर मस्जिद के रास्ते को बंद किया है, जिससे उनकी धार्मिक गतिविधियों में बाधा आ रही है। छात्रों का आरोप है कि यह फैसला बिना बातचीत के लिया गया, जिससे गुस्सा और बढ़ गया। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि लाल बारादरी क्षेत्र में मरम्मत और निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए सुरक्षा कारणों से बैरिकेडिंग की गई है।

सोमवार को विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में नारेबाजी और बहस होने लगी। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को मौके पर तैनात किया गया और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

इस पूरे मामले में लाल बारादरी में नमाज़ पढ़ने को लेकर 13 छात्रों को नोटिस भी जारी किया गया है। इन छात्रों पर सार्वजनिक स्थान पर प्रदर्शन करने और शांति भंग करने की आशंका जताई गई है। उन्हें निजी मुचलके पर जमानत भरने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के बाद लाल बारादरी इमारत की मरम्मत शुरू हुई थी। इसी वजह से वहां बैरिकेडिंग लगाई गई थी। लेकिन यह कदम अब विवाद की जड़ बन गया है।

फिलहाल लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस बल तैनात है और छात्रों को समझाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने अपील की है कि सभी छात्र शांति बनाए रखें और बातचीत के जरिए समाधान निकालें। हालांकि, गेट खोलने की मांग पर अड़े छात्रों के कारण हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।

भोजशाला पर बड़ा खुलासा, ASI रिपोर्ट में भगवान शिव समेत कई मूर्तियों के मिले सबूत; मस्जिद का क्या होगा?

ASI की रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसर से बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और स्थापत्य अवशेष मिले हैं। इनमें भगवान शिव, विष्णु, गणेश और वासुकी नाग की आकृतियों के प्रमाण सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1700 से ज्यादा कलाकृतियां मिली हैं, जिनमें स्तंभ, दीवारों के हिस्से, भित्ति चित्र और शिल्पकला के नमूने शामिल हैं। इन सभी का केमिकल ट्रीटमेंट कर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया गया है।

सर्वे में कई शिलालेख संस्कृत, देवनागरी और नागरी लिपि में पाए गए हैं। कुछ शिलालेखों में “श्री सरस्वत्यै नमः” जैसे शब्द दर्ज हैं, जो देवी सरस्वती से जुड़े होने की ओर इशारा करते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि ये शिलालेख 11वीं–12वीं सदी के परमार काल से संबंधित हो सकते हैं। स्तंभों और पत्थरों पर कमल, बेलबूटे, कीर्तिमुख और देवी-देवताओं की आकृतियां भी दर्ज की गई हैं।

ASI ने यह भी उल्लेख किया है कि वर्तमान ढांचे में इस्लामी स्थापत्य के तत्व मौजूद हैं। फारसी और अरबी भाषा के कुछ अभिलेख मिले हैं, जो बाद के समय में इसे मस्जिद या दरगाह के रूप में उपयोग किए जाने का संकेत देते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मस्जिद निर्माण में पुराने संरचनात्मक अवशेषों का दोबारा उपयोग किया गया हो सकता है।

ASI की रिपोर्ट ने भोजशाला को लेकर ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों पहलुओं को सामने रखा है। अब अदालत के सामने दोनों पक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे, जिसके बाद इस संवेदनशील मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। देशभर की नजरें इस फैसले पर टिकी हुई हैं।

रेडिसन होटल ग्रुप और एमबीडी ग्रुप ने भारत में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड के विस्तार के लिए मास्टर फ्रेंचाइज़ी समझौते के तहत की रणनीतिक साझेदारी की घोषणा

रणनीतिक साझेदारी का ढांचा

इस रणनीतिक साझेदारी के तहत एमबीडी ग्रुप पूरे भारत में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड होटलों के विकास को समर्थन देगा। आरएचजी की स्वतंत्र विकास पहलों और व्यापक पार्टनर नेटवर्क के साथ-साथ, एमबीडी ग्रुप चिह्नित और आपसी सहमति वाले स्थानों पर दोनों ब्रांड्स के लिए बिज़नेस डेवलपमेंट, मैनेजमेंट और फ्रेंचाइज़िंग की जिम्मेदारी भी निभाएगा। यह साझेदारी भारत जैसे प्रमुख बाजार में आरएचजी की विकास रणनीति को और मजबूती देगी।

रेडिसन ब्लू एमबीडी नोएडा बनेगा रेडिसन कलेक्शन एमबीडी

इस रणनीतिक साझेदारी के तहत प्रतिष्ठित रेडिसन ब्लू एमबीडी होटल नोएडा, जो क्षेत्र का पहला पांच सितारा होटल है, अब व्यापक उन्नयन (अपग्रेडेशन) के बाद रेडिसन कलेक्शन एमबीडी के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। यह होटल भारत में आरएचजी के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले होटलों में से एक है। यह बदलाव भारत में आरएचजी के लग्ज़री पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है, जिसके तहत स्थापित लैंडमार्क होटलों को प्रीमियम ब्रांड श्रेणी में उन्नत किया जा रहा है, साथ ही रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड का विस्तार अन्य साझेदारों के नेटवर्क के माध्यम से भी जारी रहेगा।

भारत के लग्ज़री और लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में अगले चरण की वृद्धि
रेडिसन होटल ग्रुप, साउथ एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर निखिल शर्मा ने कहा, “भारत का प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी बाजार लगातार मजबूत वृद्धि देख रहा है और समकालीन, डिजाइन-आधारित लाइफस्टाइल अनुभवों की मांग बढ़ रही है। यह रणनीतिक साझेदारी हमें प्रमुख भारतीय बाजारों में रेडिसन कलेक्शन और रेडिसन रेड के विस्तार को और सशक्त करने में मदद करेगी। एमबीडी ग्रुप पिछले दो दशकों से रेडिसन होटल ग्रुप का भरोसेमंद साझेदार रहा है और हम मिलकर इन ब्रांड्स को आगे बढ़ाने तथा यात्रियों की बदलती अपेक्षाओं के अनुरूप विशिष्ट होटल विकसित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

रेडिसन होटल ग्रुप, साउथ एशिया के सीनियर डायरेक्टर (डेवलपमेंट) देवाशीष श्रीवास्तव ने कहा, “यह सहयोग भारत के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी सेगमेंट में हमारे विकास की गति को समर्थन देता है। एमबीडी टीम के सहयोग से हमें नए अवसरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। एसेट-लाइट मॉडल पर स्पष्ट फोकस के साथ हम दीर्घकालिक ब्रांड वैल्यू बनाए रखते हुए रणनीतिक रूप से विस्तार करने की स्थिति में हैं।”

रणनीतिक दृष्टि और विकास रोडमैप

एमबीडी ग्रुप की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर सोनिका मल्होत्रा कंधारी ने कहा, “यह साझेदारी एमबीडी की हॉस्पिटैलिटी यात्रा में एक निर्णायक रणनीतिक मील का पत्थर है। पहले दशक में रेडिसन कलेक्शन एमबीडी और रेडिसन रेड एमबीडी के तहत 50 सह-ब्रांडेड होटलों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से अधिकांश एसेट-लाइट मॉडल के माध्यम से विकसित होंगे। एमबीडी की संपत्ति हिस्सेदारी लगभग 25% रहेगी। रेडिसन कलेक्शन एमबीडी लग्ज़री सेगमेंट में सोच-समझकर चुने गए स्थानों पर स्थापित किया जाएगा, जबकि रेडिसन रेड एमबीडी लाइफस्टाइल सेगमेंट में अधिक आक्रामक विस्तार करेगा। एमबीडी अपनी पैन-इंडिया ब्रांड उपस्थिति, संचालन उत्कृष्टता और देश में सभी रेडिसन होटलों में नंबर-1 लीडरशिप प्रदर्शन की स्थिति का लाभ उठाएगा।”

सोनिका ने आगे कहा कि प्रस्तावित पोर्टफोलियो में लगभग 80% प्रबंधित और फ्रेंचाइज़ी होटल तथा 20% स्वामित्व वाले होटल शामिल होंगे। यह साझेदारी स्केलेबल और एसेट-लाइट विस्तार पर साझा फोकस को दर्शाती है। यह सहयोग रेडिसन होटल ग्रुप की वैश्विक ब्रांड ताकत और एमबीडी ग्रुप की स्थानीय बाजारों की गहरी समझ व संचालन विशेषज्ञता को एक साथ लाता है, ताकि उच्च-स्तरीय लग्ज़री और डिजाइन-आधारित लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।

डिजाइन फिलॉस्फी और ब्रांड पोज़िशनिंग

एमबीडी ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर मोनिका मल्होत्रा कंधारी ने कहा, “आज लग्ज़री का अर्थ सौंदर्यपूर्ण परिष्कार और गहन अनुभवों से है। एमबीडी की प्रोजेक्ट डिजाइन और प्रबंधन विशेषज्ञता के माध्यम से हम अतिथि अनुभवों को नई ऊंचाई पर ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। रेडिसन कलेक्शन एमबीडी कालातीत, सांस्कृतिक रूप से जुड़ी और क्यूरेटेड लग्ज़री को दर्शाएगा, जबकि रेडिसन रेड एमबीडी बोल्ड, जीवंत और सामाजिक रूप से प्रेरित डिजाइन के साथ भारत में लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी को नया स्वरूप देगा। एमबीडी अपनी सांस्कृतिक विरासत को इन ब्रांड्स में समाहित कर भारत में लग्ज़री और लाइफस्टाइल हॉस्पिटैलिटी की नई परिभाषा गढ़ेगा। हमारा लक्ष्य भारतीय मूल का नंबर-1 लग्ज़री और लाइफस्टाइल ब्रांड बनना है, जो वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाए।”

विरासत और मूल्य-आधारित साझेदारी

एमबीडी ग्रुप के चेयरपर्सन सतीश बाला मल्होत्रा ने कहा, “आरएचजी के साथ हमारा संबंध हमेशा विश्वास और गुणवत्ता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित रहा है। यह विस्तारित साझेदारी हमारे संस्थापक स्वर्गीय श्री अशोक कुमार मल्होत्रा की उस विरासत को दर्शाती है, जिसमें संस्थानों का निर्माण ईमानदारी, उत्कृष्टता और नैतिक मूल्यों के साथ किया गया। हमें भारतीय हॉस्पिटैलिटी परिदृश्य में सार्थक योगदान देने और भारत को विश्व का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में काम करने पर गर्व है।”

रेडिसन होटल ग्रुप और एमबीडी ग्रुप मिलकर भारत में लग्जरी और लाइफस्टाइल गंतव्यों की नई पीढ़ी को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह साझेदारी मालिकों और भागीदारों के लिए दीर्घकालिक, टिकाऊ मूल्य सृजित करेगी और देश के हॉस्पिटैलिटी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाएगी, साथ ही आरएचजी की स्वतंत्र विकास पहलों को भी पूरक बनेगी।