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Vardaan International Film Festival 2026: जहां फिल्मों से गूंजेगा अंगदान का संदेश, दिल्ली में होगा शुभारंभ

Naveen Bansal
Naveen Bansal

यह फिल्म फेस्टिवल दधीचि देहदान समिति और संप्रेषण मल्टीमीडिया के सहयोग से किया जा रहा है। समिति पिछले कई वर्षों से अंगदान और देहदान को लेकर जागरूकता फैलाने का काम कर रही है। अब उसी सोच को सिनेमा के माध्यम से और बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

फेस्टिवल का उद्घाटन 26 फरवरी को सुबह 11 बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता करेंगी। इस मौके पर राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में दधीचि देहदान समिति के संस्थापक आलोक कुमार और फेस्टिवल डायरेक्टर अतुल गंगवार की भी अहम भूमिका रहेगी। अभिनेता मनोज जोशी इस कार्यक्रम के विशेष अतिथि होंगे।

फेस्टिवल में भारत और विदेश से चुनी गई 70 से ज्यादा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फिल्मों के जरिए अंगदान, देहदान, मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी प्रेरक कहानियां दिखाई जाएंगी। साथ ही फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों के बीच संवाद सत्र भी होंगे, जिससे युवा छात्रों और नए फिल्म निर्माताओं को सीखने का मौका मिलेगा।

26 फरवरी को मनोज जोशी अभिनय पर एक खास मास्टर क्लास लेंगे, जबकि 27 फरवरी को वरिष्ठ पत्रकार और फिल्म समीक्षक अनंत विजय सिनेमा और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखेंगे। इसके अलावा अंगदान और देहदान के महत्व पर छात्रों के साथ विशेष संवाद भी होगा।

27 फरवरी की शाम पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा, जिसमें सर्वश्रेष्ठ फिल्मों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि यह फेस्टिवल समाज को यह संदेश देगा कि अंगदान और देहदान सिर्फ दान नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी जीवन देने की सबसे बड़ी मानव सेवा है।

घुसपैठियों पर अमित शाह का सख्त संदेश, बोले– वोटर लिस्ट ही नहीं देश से भी होंगे बाहर…

शनिवार को असम पुलिस की 10वीं बटालियन के नए परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि अगर भारत नक्सलवाद से मुक्त हो सकता है, तो घुसपैठियों से भी मुक्त हो सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार अगले पांच वर्षों में अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर उन्हें देश की सीमाओं के बाहर भेजेगी।

गृह मंत्री ने बताया कि जिस जमीन पर असम पुलिस की नई बटालियन बनेगी, वह पहले घुसपैठियों के कब्जे में थी, जिसे अब खाली कराया गया है। उन्होंने कहा कि सिर्फ जमीन खाली कराना काफी नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों को देश से बाहर भेजना भी जरूरी है ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।

अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस और विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घुसपैठियों को बाहर नहीं निकाल सकती क्योंकि यही लोग उनका वोट बैंक हैं। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि भले ही वे बयान दें, लेकिन उनकी पार्टी इस मुद्दे पर कभी सख्ती नहीं दिखा सकती।

अमित शाह ने यह भी दावा किया कि अगले पांच सालों में असम को पूर्वोत्तर भारत का औद्योगिक केंद्र बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब राज्य घुसपैठियों और अतिक्रमण से मुक्त होगा, तभी विकास की रफ्तार तेज होगी और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बयान ऐसे समय में आया है जब असम विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। माना जा रहा है कि घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर चुनाव का बड़ा एजेंडा बनेगा। अमित शाह का यह संदेश साफ है कि सरकार अवैध प्रवासियों के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं बरतेगी और आने वाले वर्षों में इस पर निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।

भारत-ब्राजील की नई दोस्ती, खनिज से लेकर रक्षा तक बड़े समझौते

पीएम मोदी ने कहा कि ब्राजील लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और दोनों देश अगले पांच साल में आपसी व्यापार को 20 अरब डॉलर से आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इसे सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि आपसी भरोसे की मिसाल बताया। राष्ट्रपति लूला के साथ आए बड़े बिजनेस डेलीगेशन को इस भरोसे का प्रमाण माना गया।

इस बैठक में सबसे अहम समझौता रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर हुआ। ये खनिज सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल फोन और रक्षा उपकरण बनाने में बेहद जरूरी होते हैं। दोनों देशों ने तय किया कि वे इन खनिजों की खोज, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे। इससे भारत को टेक्नोलॉजी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।

रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत और ब्राजील मिलकर रक्षा उपकरणों के निर्माण, रिसर्च और ट्रेनिंग में साझेदारी करेंगे। इससे दोनों देशों की सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी और रक्षा उद्योग को नई दिशा मिलेगी।

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति लूला की भारत यात्रा ने एआई इम्पैक्ट समिट को नई ऊर्जा दी है और रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में सहयोग सिर्फ भारत और ब्राजील के लिए नहीं, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए फायदेमंद होगा।

इसके अलावा इंडिया-मर्कोसुर ट्रेड एग्रीमेंट के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे। कृषि, ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में भी साथ काम करने की योजना बनाई गई है।

यह बैठक भारत और ब्राजील के रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित हुई। रेयर अर्थ मिनरल, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में हुए समझौते आने वाले समय में दोनों देशों के लिए विकास और सुरक्षा का मजबूत आधार बनेंगे।

ट्रंप का नया टैरिफ़ प्लान, अब भारत समेत सभी देशों पर 10% शुल्क

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों पर नया टैरिफ़ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पुराने टैरिफ़ आदेश को अवैध ठहराए जाने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने नया फैसला लिया और सभी देशों से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ़ लगाने की घोषणा कर दी। यह टैरिफ़ 24 फरवरी से लागू होगा और अगले 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने 1977 के एक कानून का गलत इस्तेमाल करते हुए लगभग सभी देशों पर टैरिफ़ लगाया था। अदालत के अनुसार, टैरिफ़ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। इसके बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लिया, जो उन्हें सीमित समय के लिए 15 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की अनुमति देता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा। व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि भारत समेत वे सभी देश जिन्होंने पहले अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया था, अब सिर्फ 10 प्रतिशत टैरिफ़ का ही सामना करेंगे। पहले भारत पर 18 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की बात कही जा रही थी, लेकिन नए आदेश के बाद यह घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि सभी वस्तुओं पर यह टैरिफ़ लागू नहीं होगा। अमेरिका ने कुछ जरूरी उत्पादों को इससे बाहर रखा है। इनमें दवाइयां, खाद्य पदार्थ, ऊर्जा संसाधन, कुछ धातुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार और एयरोस्पेस से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा किताबें, दान में दी गई वस्तुएं और निजी इस्तेमाल का सामान भी टैरिफ़ से मुक्त रहेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अस्थायी है और आगे इसे लेकर कानूनी लड़ाई भी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले अमेरिका ने टैरिफ़ के जरिए करीब 130 अरब डॉलर जुटाए थे। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनियों को यह पैसा वापस मिलेगा। फिलहाल इस पर कोई साफ निर्देश नहीं दिया गया है और मामला अदालत में जा सकता है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। वहीं कई देशों को डर है कि इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ेगा।

China को टक्कर देने की तैयारी, ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हुआ भारत

pax silica
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नई दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ‘पैक्स सिलिका’ घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही भारत औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले उस वैश्विक गठबंधन का हिस्सा बन गया है, जिसका उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को चुनौती देना है।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में चीन क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर निर्माण में बड़ी शक्ति बनकर उभरा है। कंप्यूटर चिप, मोबाइल फोन, कार, मिसाइल और एआई तकनीक में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर काफी हद तक इन्हीं खनिजों पर निर्भर हैं। चीन की सप्लाई पर ज्यादा निर्भरता अमेरिका और कई देशों के लिए रणनीतिक और सुरक्षा चिंता का कारण बन गई थी। इसी को देखते हुए ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन की योजना बनाई गई।

इस गठबंधन का मकसद क्रिटिकल मिनरल्स के खनन से लेकर उनकी प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और एआई तकनीक की पूरी सप्लाई चेन को मजबूत करना है। साथ ही यह कोशिश की जा रही है कि इन क्षेत्रों में चीन पर निर्भरता कम हो और मित्र देशों के बीच सहयोग बढ़े।

भारत को इस गठबंधन में ऐसे समय शामिल किया गया है, जब वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे भारत को सेमीकंडक्टर और एआई तकनीक में आत्मनिर्भर बनने का बड़ा मौका मिलेगा। भारत पहले से ही टेलीकॉम और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह गठबंधन नई संभावनाएं खोल सकता है।

‘पैक्स सिलिका’ के तहत सदस्य देश मिलकर रणनीतिक निवेश करेंगे और सुरक्षित टेक्नोलॉजी सिस्टम तैयार करेंगे। इसमें आईटी नेटवर्क, फाइबर ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर, और एआई से जुड़े मूल ढांचे को मजबूत करने पर खास जोर दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस पहल से भारत को दो बड़े फायदे होंगे। पहला, उसे क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर सप्लाई में भरोसेमंद साझेदार मिलेंगे। दूसरा, भविष्य में किसी तकनीकी प्रतिबंध का असर भारत पर कम पड़ेगा।

भारत पहले ही ‘इंडिया एआई मिशन’ के तहत हजारों करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है, ताकि स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिले और देश में एआई तकनीक का मजबूत आधार तैयार हो। ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होना इसी दिशा में एक और अहम कदम माना जा रहा है।

लाल किला और बड़े मंदिरों पर आतंकी खतरा, हाई अलर्ट जारी

Delhi on high alert
Delhi on high alert

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह साजिश पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हाल ही में हुए एक मस्जिद विस्फोट का बदला लेने के इरादे से रची जा रही है। इसी वजह से भारत में भीड़भाड़ वाले और ऐतिहासिक स्थलों को टारगेट किया जा सकता है। लाल किला और धार्मिक स्थल आतंकियों की प्राथमिक सूची में बताए जा रहे हैं।

पिछले साल नवंबर में लाल किले के पास हुए कार बम धमाके की घटना को एजेंसियां अब भी गंभीरता से ले रही हैं। उस हमले में कई लोगों की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि एक आतंकी मॉड्यूल इस साजिश के पीछे काम कर रहा था। इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति बताया गया था, जो युवाओं को गुमराह कर आत्मघाती हमलों के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा था।

इसी जांच के दौरान श्रीनगर पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक समानांतर आतंकी नेटवर्क का खुलासा किया है। पूछताछ में यह बात सामने आई कि आतंकी नए लोगों को भर्ती करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कुछ मामलों में लोग पीछे भी हट गए।

इस पूरे इनपुट के बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लाल किला, चांदनी चौक और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। मंदिरों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान में हुए हमले पर दुख जताया है, लेकिन साथ ही भारत पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि आतंकवाद से निपटना हर देश की जिम्मेदारी है और निर्दोष लोगों की जान जाना बेहद दुखद है।

सुरक्षा एजेंसियों ने आम लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की जानकारी तुरंत पुलिस को देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, बौद्ध सर्किट ट्रेन पर IRCTC की 20% छूट

यह 7 रात और 8 दिन का ऑल-इंक्लूसिव टूर पैकेज दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से शुरू होगा। इस यात्रा में भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को शामिल किया गया है। यात्रियों को बोधगया, नालंदा-राजगीर, वाराणसी-सारनाथ, लुंबिनी, कुशीनगर और श्रावस्ती ले जाया जाएगा। इसके अलावा टूर के अंत में आगरा में ताजमहल का भ्रमण भी कराया जाएगा।

IRCTC की यह खास ट्रेन पूरी तरह से एसी डीलक्स टूरिस्ट ट्रेन होगी, जिसमें आधुनिक सुविधाओं से लैस नए एलएचबी कोच लगाए गए हैं। ट्रेन में एसी-1 और एसी-2 श्रेणी के कोच उपलब्ध होंगे, जिनमें यात्रियों के लिए आरामदायक केबिन और पर्याप्त जगह दी गई है। एसी-1 कोच में यात्रियों के लिए निजी लॉकर जैसी सुविधाएं भी होंगी, ताकि वे अपना सामान सुरक्षित रख सकें।

इस ट्रेन में दो खूबसूरत डाइनिंग कोच होंगे, जहां एक साथ बड़ी संख्या में यात्री भोजन कर सकेंगे। साथ ही एक पूरी तरह से सुसज्जित किचन कार भी होगी, जिसमें यात्रियों के लिए भारतीय और अंतरराष्ट्रीय व्यंजन तैयार किए जाएंगे। सफाई और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा गया है। ट्रेन में साफ-सुथरे टॉयलेट और शावर की व्यवस्था होगी।

इस टूर पैकेज में यात्रियों को रुकने के लिए अच्छे होटलों की सुविधा दी जाएगी, साथ ही खाने-पीने और स्थानीय भ्रमण की व्यवस्था भी पैकेज में शामिल रहेगी। यानी यात्रियों को अलग से किसी चीज की चिंता नहीं करनी होगी।

IRCTC ने यह विशेष छूट भारतीय नागरिकों के साथ-साथ एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई यात्रियों के लिए भी लागू की है। छूट के बाद इस पैकेज की शुरुआती कीमत करीब 76,905 रुपये प्रति व्यक्ति (ट्विन शेयरिंग आधार पर) रखी गई है।

IRCTC का कहना है कि यह पैकेज उन लोगों के लिए शानदार मौका है जो कम खर्च में आरामदायक और सुरक्षित तरीके से बौद्ध तीर्थों की यात्रा करना चाहते हैं। इस पहल से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश और विदेश के पर्यटकों को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

इस टूर से जुड़ी ज्यादा जानकारी और बुकिंग के लिए IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट(https://www.irctcbuddhisttrain.com) पर जाकर विवरण देख सकते हैं। चाहें तो फोन या ईमेल (buddhisttrain@irctc.com) के जरिए भी संपर्क करके पूरी जानकारी ली जा सकती है।

क्या 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश पूरी तरह बंद हो जाएगा? जानिए अब कैसे होगा भुगतान…

सरकार का कहना है कि यह कदम टोल कलेक्शन सिस्टम को पूरी तरह डिजिटल बनाने के लिए उठाया जा रहा है। अभी कई टोल प्लाजा पर कैश भुगतान की वजह से लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों का काफी समय बर्बाद होता है। डिजिटल भुगतान से न सिर्फ ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि टोल वसूली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, देशभर में FASTag की पहुंच अब 98 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है। RFID तकनीक से लैस FASTag की वजह से वाहन बिना रुके आसानी से टोल पार कर रहे हैं। इसके साथ ही NHAI ने सभी टोल प्लाजा पर UPI पेमेंट की सुविधा भी शुरू कर दी है, ताकि लोगों को डिजिटल भुगतान के कई विकल्प मिल सकें।

फिलहाल जिन वाहनों के पास वैध FASTag नहीं होता, उनसे कैश पेमेंट करने पर दोगुना टोल शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI से भुगतान करने पर यात्रियों को केवल 1.25 गुना शुल्क देना पड़ता है। सरकार का मानना है कि जब कैश पूरी तरह हट जाएगा, तो लोग खुद-ब-खुद डिजिटल मोड अपनाएंगे और टोल प्लाजा पर अव्यवस्था कम होगी।

इसके अलावा FASTag का सालाना पास भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस पास के तहत 3,000 रुपये का एकमुश्त भुगतान करने पर एक साल तक या 200 बार टोल बूथ पार करने की सुविधा मिलती है। इससे बार-बार रिचार्ज कराने की झंझट खत्म हो जाती है। बताया जा रहा है कि अब तक 50 लाख से ज्यादा लोग इस सालाना पास का लाभ उठा चुके हैं।

सरकार का उद्देश्य है कि देश के करीब 1,150 टोल प्लाजा पर सफर को तेज, आसान और पूरी तरह डिजिटल बनाया जाए। अगर 1 अप्रैल से कैश भुगतान बंद करने का फैसला लागू होता है, तो यात्रियों को पहले से FASTag या UPI की व्यवस्था कर लेनी होगी। यह बदलाव आने वाले समय में हाईवे यात्रा को ज्यादा सुगम और आधुनिक बना सकता है।

AI समिट में प्रदर्शन पर बीजेपी का हमला, राहुल गांधी पर साजिश रचने का आरोप

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने कहा कि यह कोई अचानक हुआ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसकी पूरी योजना पहले से बनाई गई थी। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारी बारकोड और पास के जरिए अंदर घुसे थे और उन्होंने जानबूझकर टी-शर्ट उल्टी पहनकर विरोध जताया। पात्रा के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की रणनीति राहुल गांधी के आवास पर बनाई गई थी, जहां सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी भी मौजूद थीं।

संबित पात्रा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कदम देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए उठाया गया। उन्होंने कहा कि जब भारत तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के सामने अपनी पहचान बना रहा है, तब ऐसे प्रदर्शन देश को बदनाम करने की कोशिश हैं।

Source: ANI

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब देश आगे बढ़ता है, तो कुछ लोगों को तकलीफ होती है। उनके मुताबिक, ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में हंगामा करना भारत की प्रगति को रोकने जैसा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया नई दिल्ली में हो रहे एआई समिट को देख रही थी और भारत के बढ़ते वैश्विक कद की सराहना कर रही थी। ऐसे समय में आयोजन स्थल पर हंगामा करना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एआई समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं और इस तरह की घटनाएं देश को बदनाम करने की कोशिश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश की छवि खराब कर अराजकता फैलाना चाहती है।

Source: ANI

वहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस प्रदर्शन से देश शर्मिंदा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजनीति देश की गरिमा से ऊपर हो गई है।

इस पूरे मामले पर दिल्ली पुलिस ने भी कार्रवाई की बात कही है और हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। एआई समिट के दौरान हुए इस विरोध प्रदर्शन ने तकनीकी सम्मेलन के बजाय राजनीतिक विवाद को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ 1 घंटे में, पीएम मोदी करेंगे नमो भारत ट्रेन का उद्घाटन

Namo Bharat rapid rail
Namo Bharat rapid rail

अब तक दिल्ली से मेरठ जाने में लोगों को भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता था। मोदीनगर और मुरादनगर जैसे इलाकों में जाम के कारण सफर में 2 से 3 घंटे तक लग जाते थे। लेकिन नमो भारत ट्रेन के शुरू होने से यह परेशानी अब बीते दिनों की बात हो जाएगी। हाई-स्पीड तकनीक से लैस यह ट्रेन यात्रियों को आरामदायक और तेज सफर का अनुभव देगी।

इस रूट की कुल लंबाई करीब 82 किलोमीटर है। पहले कुछ हिस्सों में ट्रेन का संचालन शुरू किया गया था, लेकिन अब पूरे रूट पर सेवा शुरू होने जा रही है। इसका मतलब है कि सराय काले खां से लेकर मोदीपुरम तक लगातार ट्रेन चलेगी और लोगों को बीच में वाहन बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

22 फरवरी को इसी दिन मेरठ में लोकल मेट्रो सेवा का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह मेट्रो करीब 21 किलोमीटर तक चलेगी और शहर के अंदर यात्रा को आसान बनाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आई है।

नमो भारत ट्रेन के शुरू होने से न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि दिल्ली और मेरठ के बीच रोजाना आने-जाने वाले ऑफिस कर्मचारियों, छात्रों और व्यापारियों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा सड़क पर वाहनों की संख्या कम होगी, जिससे प्रदूषण और ट्रैफिक दोनों में राहत मिलेगी।

यह परियोजना एनसीआर क्षेत्र को आधुनिक और तेज परिवहन से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इस तरह की हाई-स्पीड ट्रेनें अन्य शहरों तक भी पहुंचाई जाएंगी।

दिल्ली से मेरठ का सफर अब थकाने वाला नहीं बल्कि तेज, सुरक्षित और आरामदायक होने जा रहा है। नमो भारत ट्रेन के शुरू होते ही दोनों शहरों के बीच दूरी समय के लिहाज से काफी कम हो जाएगी और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनेगी।